बिहार पुलिस SI · मुख्य परीक्षा — पेपर 2 (सामान्य अध्ययन) · अध्याय 4

भारतीय इतिहास

Indian History

नए राजा एवं राज्य, दिल्ली के सुल्तान, मुगल साम्राज्य, स्थापत्य, कंपनी शासन, ग्रामीण समाज, 1857, सुधार आंदोलन, राष्ट्रीय आंदोलन और स्वतंत्र भारत।

परीक्षा में: 12–14 प्रश्न 33 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

मुख्य परीक्षा पेपर 2 में इतिहास से लगभग 12 से 14 प्रश्न आते हैं। BPSSC के पाठ्यक्रम में इतिहास के विषय हैं — नए राजा और राज्य, दिल्ली के सुल्तान, स्थापत्य कला, साम्राज्य, कंपनी की सत्ता की स्थापना, ग्रामीण जीवन और समाज, औपनिवेशिक शासन और आदिवासी समाज, 1857 का विद्रोह, महिलाएँ और सुधार, राष्ट्रीय आंदोलन, स्वतंत्रता के बाद का भारत। ये NCERT कक्षा 7 और 8 की "हमारे अतीत" पुस्तकों पर आधारित हैं। प्रारंभिक परीक्षा के अध्यायों में हमने राजवंशों और घटनाओं के तथ्य पढ़े थे; इस अध्याय में विषयवार (Thematic) दृष्टि से — प्रशासन, अर्थव्यवस्था, समाज, कला-स्थापत्य, औपनिवेशिक नीतियों का प्रभाव और स्वतंत्र भारत का निर्माण — पढ़ेंगे।

इस अध्याय का दायरा
  • इतिहास के स्रोत; राजपूत, चोल और त्रिपक्षीय संघर्ष।
  • सल्तनत और मुगल प्रशासन, अर्थव्यवस्था, स्थापत्य।
  • नगर, व्यापार, शिल्प; जनजातियाँ, घुमंतू समुदाय; क्षेत्रीय संस्कृतियाँ; 18वीं सदी के नए राज्य।
  • कंपनी शासन — भू-राजस्व व्यवस्थाएँ, नील विद्रोह, आदिवासी विद्रोह, बुनकरों का पतन, शिक्षा नीति।
  • 1857, सामाजिक सुधार, राष्ट्रीय आंदोलन; स्वतंत्रता के बाद भारत — विभाजन, रियासतों का विलय, योजनाएँ, विदेश नीति।

2. इतिहास के स्रोत एवं प्रारंभिक मध्यकाल (700–1200 ई.)

  • मध्यकाल के स्रोत — अभिलेख, सिक्के, स्थापत्य, और पांडुलिपियाँ (हाथ से लिखी पुस्तकें; ताड़पत्र और भोजपत्र पर; 13वीं सदी से कागज़ सस्ता और आम हुआ)। लेखक — तवारीख़ (इतिहास) लिखने वाले फ़ारसी विद्वान; अल-बिरूनी ("किताब-उल-हिंद", महमूद ग़ज़नवी के साथ आया)।
  • "हिंदुस्तान" शब्द 13वीं सदी में मिनहाज-ए-सिराज ने दिल्ली सल्तनत के क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, गंगा-यमुना के बीच) के लिए प्रयोग किया; बाबर ने इसे उपमहाद्वीप के भूगोल, जीव-जंतुओं और संस्कृति के लिए। अमीर खुसरो ने 1318 में "हिंदवी" भाषा का उल्लेख किया।
  • सामंत (Samanta) — शक्तिशाली होकर स्वयं को महासामंत, महामंडलेश्वर घोषित करते थे; राष्ट्रकूट पहले चालुक्यों के सामंत थे — दंतिदुर्ग ने "हिरण्यगर्भ" (स्वर्ण गर्भ) अनुष्ठान से क्षत्रिय दर्जा पाया।
  • प्रशस्तियाँ — ब्राह्मणों द्वारा रचित शासकों की प्रशंसा; राजा ब्राह्मणों को भूमि दान (ताम्रपत्रों पर दर्ज) देते थे। कश्मीर के कल्हण की "राजतरंगिणी" (12वीं सदी) — शासकों की आलोचना भी की।
  • त्रिपक्षीय संघर्ष — कन्नौज पर अधिकार के लिए गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल वंशों के बीच लंबा संघर्ष (8वीं–10वीं सदी)।
  • महमूद ग़ज़नवी (अफ़गानिस्तान) — 997–1030 के बीच भारत पर 17 बार आक्रमण; 1025 में सोमनाथ मंदिर (गुजरात) लूटा। पृथ्वीराज चौहान (चाहमान वंश, दिल्ली-अजमेर) — तराइन I (1191) में गोरी को हराया, तराइन II (1192) में हारे।
  • चोल प्रशासन — विजयालय ने उरैयूर के मुत्तरैयारों से सत्ता छीनी (9वीं सदी मध्य), तंजावुर राजधानी। गाँवों की बस्तियाँ — उर; उरों के समूह — नाडु। ब्राह्मणों को दी गई भूमि — ब्रह्मदेय; ब्राह्मणों की सभा — सभा; व्यापारियों का संगठन — नगरम्। उत्तरमेरूर अभिलेख — सभा के सदस्यों के चुनाव की विधि (भूमि का स्वामी, अपना घर, 35–70 वर्ष, वेदों का ज्ञान; लॉटरी से चयन)। सिंचाई — कुएँ, तालाब, कावेरी डेल्टा में नहरें। काँस्य मूर्तियाँ (नटराज) — "लुप्त मोम विधि" से। मंदिर — बृहदेश्वर (तंजावुर), गंगैकोंडचोलपुरम।

3. दिल्ली के सुल्तान — प्रशासन एवं अर्थव्यवस्था

  • दिल्ली पहली बार राजधानी बनी तोमर राजपूतों के समय (12वीं सदी आरंभ); फिर चौहान। देहलीवाल सिक्के प्रचलित थे।
  • सल्तनत की राजधानी शहर के अनेक नगर — किला राय पिथौरा, सीरी (अलाउद्दीन), तुगलकाबाद, जहाँपनाह, फ़िरोज़ाबाद।
  • मस्जिद — कुव्वत-उल-इस्लाम (दिल्ली की पहली मस्जिद; ऐबक); जामी मस्जिद — जुमे (शुक्रवार) की सामूहिक नमाज़; ख़ुत्बा — शासक के नाम का उपदेश; क़िबला — मक्का की दिशा (भारत में पश्चिम)।
  • भीतरी और बाहरी सीमांत — भीतरी: दिल्ली के आसपास के क्षेत्र को मज़बूत करना (गंगा-यमुना दोआब); बाहरी: दक्षिण अभियान (अलाउद्दीन और मुहम्मद तुगलक के समय)।
  • बंदगान — विशेष रूप से खरीदे गए दास जिन्हें सैन्य सेवा के लिए प्रशिक्षित किया जाता था (प्रारंभिक सुल्तान इन पर भरोसा करते थे)। इक्ता — सैन्य कमांडरों (इक्तादार/मुक्ती) को राजस्व क्षेत्र; बदले में सैन्य सेवा; हिसाब जाँचने के लिए लेखाकार नियुक्त होते थे।
  • भू-राजस्व के प्रकार (अलाउद्दीन) — खराज (कृषि पर, उपज का लगभग 50%), मवेशियों पर कर, घरों पर कर।
  • मंगोल आक्रमण — चंगेज़ ख़ान (1219 मध्य एशिया)। अलाउद्दीन ने मंगोलों से बचाव के लिए विशाल स्थायी सेना रखी — सैनिकों को नकद वेतन, सस्ता अनाज (मूल्य नियंत्रण)। मुहम्मद तुगलक ने भी विशाल सेना रखी, पर दोआब में कर वृद्धि और अकाल से विद्रोह हुए।
  • चालीसा (तुर्कान-ए-चहलगानी) — इल्तुतमिश के 40 विशेष दासों का समूह; बलबन ने इसे समाप्त किया।
  • 14वीं सदी के इतिहासकार ज़ियाउद्दीन बरनी ("तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही"); यात्री इब्न बतूता; रज़िया को अमीरों ने हटाया क्योंकि वे महिला शासक को स्वीकार नहीं कर पाए।
  • 15वीं-16वीं सदी — शेरशाह सूरी का प्रशासन बाद में अकबर ने अपनाया; दिल्ली में पुराना किला (शेरशाह)।

4. मुगल साम्राज्य — प्रशासन एवं नीतियाँ

  • मुगल — पिता की ओर से तैमूर (तुर्क) और माता की ओर से चंगेज़ ख़ान (मंगोल) के वंशज; वे स्वयं को "तैमूरी" कहते थे।
  • उत्तराधिकार — मुगलों में ज्येष्ठाधिकार (बड़ा पुत्र राजा) नहीं था; तैमूरी परंपरा "सहदायाद" — सभी पुत्रों में विरासत का बँटवारा; इसलिए उत्तराधिकार के युद्ध होते थे।
  • राजपूतों से संबंध — अकबर ने वैवाहिक संबंध (आमेर की राजकुमारी — जहाँगीर की माँ) और उच्च मनसब देकर राजपूतों को साथ लिया; मेवाड़ के सिसोदिया लंबे समय तक विरोधी रहे।
  • मनसबदारी — मनसब = पद/रैंक; ज़ात — पद और वेतन तय करने वाली संख्या; सवार — रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या। मनसबदारों को वेतन के बदले राजस्व क्षेत्र — जागीर (ये इक्ता जैसी पर जागीरदार वहाँ रहते नहीं थे, केवल राजस्व लेते थे)। औरंगज़ेब के समय मनसबदारों की संख्या बढ़ने से "जागीरदारी संकट"।
  • ज़ब्त / दहसाला — टोडरमल ने 10 वर्षों (1570–1580) की फ़सल, उपज और कीमतों का अध्ययन कर हर फ़सल के लिए नकद कर तय किया; हर प्रांत को राजस्व मंडलों में बाँटा। स्थानीय भू-स्वामी — ज़मींदार।
  • प्रशासनिक ढाँचा (अकबर) — साम्राज्य सूबों (प्रांतों) में, प्रमुख — सूबेदार; वित्त — दीवान; सैन्य वेतन — बख्शी; धार्मिक-शैक्षिक दान — सद्र; न्याय — काज़ी; नगर पुलिस — कोतवाल; ज़िला — सरकार (प्रमुख फ़ौजदार), परगना।
  • सुलह-ए-कुल ("सर्वत्र शांति") — अकबर का विचार; सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता, केवल राज्य की सत्ता को चुनौती न दी जाए। अबुल फ़ज़ल ने इसी पर आधारित शासन की परिकल्पना की। जहाँगीर और शाहजहाँ ने भी इसका पालन किया।
  • अकबरनामा (3 खंड; तीसरा — आइन-ए-अकबरी: प्रशासन, सेना, राजस्व, भूगोल, परंपराएँ)।
  • 17वीं सदी में मुगल साम्राज्य की समृद्धि के बावजूद गरीबी और असमानता; बड़े मनसबदार वेतन का बड़ा हिस्सा पाते थे।

5. शासक और इमारतें — स्थापत्य कला

तकनीक / शैलीअर्थउदाहरण
शीर्षबंधन (Trabeate)दो खड़े स्तंभों पर क्षैतिज शहतीर — मंदिरों, मस्जिदों, बावड़ियों में (7वीं–10वीं सदी से)प्राचीन मंदिर
चापाकार (Arcuate)मेहराब — दरवाज़ों और खिड़कियों के ऊपर का भार मेहराब पर; बीच का पत्थर — डाट (Keystone); 12वीं सदी के बादअलाई दरवाज़ा (1311, कुतुब परिसर)
चारबागचार समान भागों में बँटे चहारदीवारी वाले बागहुमायूँ का मकबरा, ताजमहल
हश्त बिहिश्तआठ कमरों से घिरा केंद्रीय गुंबद वाला कक्षहुमायूँ का मकबरा
पीत्रा दूरा (Pietra Dura)संगमरमर में रंगीन कठोर पत्थरों की जड़ाईताजमहल; दिल्ली के लाल किले में शाहजहाँ का सिंहासन (पीछे ऑर्फ़ियस का चित्र)
बंगाल छत (बांग्ला गुंबद)फूस की झोपड़ी जैसी ढलवाँ छतफ़तेहपुर सीकरी, मुगल स्थापत्य
  • मंदिर — कंदरिया महादेव (खजुराहो, 999 ई., चंदेल शासक धंगदेव); राजराजेश्वर/बृहदेश्वर (तंजावुर; अपने समय का सबसे ऊँचा शिखर)। मंदिर राजा की शक्ति और संपत्ति का प्रतीक होते थे, इसलिए आक्रमणकारी इन्हें लूटते थे (जैसे महमूद ग़ज़नवी, राजेंद्र चोल ने भी पराजित राजाओं की मूर्तियाँ ले गए)।
  • जल व्यवस्था — इल्तुतमिश का हौज़-ए-सुल्तानी ("राजा का जलाशय"), दिल्ली-ए-कुहना के पास; अलाउद्दीन का हौज़ ख़ास।
  • मुगल स्थापत्य — हुमायूँ का मकबरा (1562–1571; ऊँचा चबूतरा, चारबाग, हश्त बिहिश्त; ताजमहल का पूर्वगामी), फ़तेहपुर सीकरी (अकबर; बुलंद दरवाज़ा, जामा मस्जिद, शेख सलीम चिश्ती की दरगाह), ताजमहल (शाहजहाँ; यमुना के किनारे, मकबरा बाग के सिरे पर — "नदी-तट बाग" शैली), लाल किला और जामा मस्जिद दिल्ली (शाहजहानाबाद), दीवान-ए-आम — शाहजहाँ ने न्याय और शाही दरबार के लिए "चालीस स्तंभों वाला कक्ष"।
  • क्षेत्रीय शैलियाँ — विजयनगर (हम्पी — "इंडो-इस्लामिक" शैली, कमल महल, विट्ठल मंदिर), बंगाल के टेराकोटा मंदिर (विष्णुपुर), गोलकुंडा, बीजापुर का गोल गुंबद (मुहम्मद आदिल शाह)।

6. नगर, व्यापारी, शिल्पकार एवं क्षेत्रीय संस्कृतियाँ

  • नगरों के प्रकार — मंदिर नगर (तंजावुर, भिलसा/विदिशा, सोमनाथ, कांचीपुरम, मदुरै, तिरुपति), प्रशासनिक केंद्र, व्यापारिक/बंदरगाह नगर (सूरत — "मक्का का प्रवेश द्वार", मसूलीपट्टनम, कालीकट), तीर्थ नगर (वृंदावन, अजमेर)।
  • हम्पी — विजयनगर की राजधानी; कृष्णा-तुंगभद्रा दोआब; 1565 के बाद उजड़ गया; 1800 में कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी ने खंडहरों का पता लगाया।
  • व्यापारी संघ — मणिग्रामम्, नानादेशी (दक्षिण भारत); गुजराती व्यापारी — हिंदू बनिये, मुस्लिम बोहरा; राजस्थान के मारवाड़ी ओसवाल; चेट्टियार; केरल के यहूदी और सीरियाई ईसाई।
  • शिल्प — बिदरी (धातु पर चाँदी की जड़ाई; बीदर, कर्नाटक); कपड़ा — मलमल (ढाका), कैलिको (कालीकट), शिंट्ज़ (छींट — छपे सूती), जामदानी (बंगाल), पटोला (गुजरात); बंजारे — व्यापारिक घुमंतू जो सामान बैलों पर ढोते थे (अलाउद्दीन के अनाज ढोने में)।
  • क्षेत्रीय संस्कृतियाँ — केरल में चेर वंश ने मलयालम का प्रयोग शुरू किया; पुरी (ओडिशा) में जगन्नाथ संप्रदाय — 12वीं सदी में अनंतवर्मन ने मंदिर बनवाया, 1230 में राजा अनंगभीम तृतीय ने राज्य जगन्नाथ को समर्पित किया; राजपूत परंपराएँ — वीरता के गीत, "पृथ्वीराज रासो" (चंदबरदाई); कथक — उत्तर भारत में कथाकारों से विकसित, मुगल दरबार में; दो घराने — जयपुर और लखनऊ (अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में)। लघु चित्रकला — मुगल, राजस्थानी, पहाड़ी (कांगड़ा — बसोहली, कांगड़ा शैली)। बंगाल में मंगलकाव्य, पीर परंपरा, टेराकोटा मंदिर।

7. जनजातियाँ, घुमंतू समुदाय एवं 18वीं सदी के नए राज्य

  • प्रमुख जनजातियाँ (मध्यकाल) — पंजाब के खोखर, गक्खर; मुल्तान-सिंध के लंगाह, अरघुन; पश्चिमोत्तर के बलोच; पश्चिमी हिमालय के गद्दी चरवाहे; पूर्वोत्तर में नागा, अहोम (1228 में म्यांमार से आए; 1523 में चुटिया राज्य मिलाया; "पाइक" बेगार व्यवस्था; बुरंजी — इतिहास लेखन; 1662 में मीर जुमला से हारे), मध्य भारत के गोंड (गढ़-कटंगा की रानी दुर्गावती ने अकबर की सेना से संघर्ष किया, 1565), झारखंड-बिहार-ओडिशा के चेरो, मुंडा, संथाल, कोली, भील।
  • गोंड राज्य — गढ़ (84 गाँवों का समूह — चौरासी), बरहोत (12 गाँव)।
  • 18वीं सदी — मुगल साम्राज्य के पतन के बाद नए राज्य: अवध (बुरहान-उल-मुल्क सआदत ख़ान), बंगाल (मुर्शिद कुली ख़ान), हैदराबाद (निज़ाम-उल-मुल्क आसफ़ जाह) — ये मुगल अधिकारियों द्वारा बने "उत्तराधिकारी राज्य"; राजपूत रियासतें (जयपुर — सवाई जय सिंह ने जंतर-मंतर वेधशालाएँ बनवाईं); सिख (गुरु गोबिंद सिंह — 1699 में खालसा पंथ; बंदा बहादुर; 18वीं सदी में जत्थे, मिस्ल, सरबत ख़ालसा; रणजीत सिंह — 1799 लाहौर); मराठा (पेशवा बाजीराव I; चौथ, सरदेशमुखी; सिंधिया, होल्कर, गायकवाड़, भोंसले); जाट (सूरजमल — भरतपुर)।
  • नादिर शाह (ईरान) का 1739 में दिल्ली पर आक्रमण — मयूर सिंहासन और कोहिनूर ले गया; अहमद शाह अब्दाली के 1748–1761 के बीच पाँच आक्रमण।

8. कंपनी शासन — सत्ता एवं ग्रामीण जीवन

  • व्यापार से सत्ता तक — फ़रमान (1717) — मुगल सम्राट फ़र्रुख़सियर ने कंपनी को बिना शुल्क व्यापार का अधिकार दिया; इसके दुरुपयोग से बंगाल के नवाबों (मुर्शिद कुली, अलीवर्दी, सिराजुद्दौला) से टकराव → प्लासी (1757) → बक्सर (1764) → दीवानी (1765)। प्लासी नाम "पलाश" वृक्ष से।
  • "नवाब" शब्द कंपनी के उन अधिकारियों के लिए प्रयोग होने लगा जो भारत से अपार धन कमाकर ब्रिटेन लौटे; रॉबर्ट क्लाइव पर ब्रिटिश संसद में मुकदमा चला (1772)।
  • सहायक संधि (वेलेज़ली) — भारतीय शासक अपनी सेना नहीं रख सकते थे; कंपनी की सेना का खर्च उन्हें देना होता था; दरबार में ब्रिटिश रेज़िडेंट। व्यपगत सिद्धांत (डलहौजी) — पुरुष उत्तराधिकारी न होने पर राज्य का विलय (सतारा 1848, संबलपुर 1850, उदयपुर 1852, नागपुर 1853, झाँसी 1854); अवध (1856) कुशासन के आधार पर।
  • कंपनी की प्रशासनिक इकाइयाँ — प्रेसीडेंसी (बंगाल, मद्रास, बंबई); 1772 से हर ज़िले में दो अदालतें — फ़ौजदारी अदालत और दीवानी अदालत; ज़िले का मुख्य अधिकारी — कलेक्टर (राजस्व और कर वसूली, न्याय, शांति व्यवस्था)।
भू-राजस्व व्यवस्थावर्ष / किसनेक्षेत्रमुख्य बात
स्थायी बंदोबस्त1793 — कॉर्नवालिसबंगाल, बिहार, उड़ीसा, बनारसज़मींदारों से समझौता; राजस्व हमेशा के लिए तय; कंपनी को स्थायी आय, पर किसान ज़मींदारों के शोषण के शिकार; समय पर कर न देने पर ज़मींदारी नीलाम ("सूर्यास्त कानून")
महालवाड़ी1822 — होल्ट मैकेंज़ीउत्तर-पश्चिम प्रांत (आगरा-अवध), पंजाबगाँव/गाँवों के समूह (महाल) के साथ; ग्राम प्रधान राजस्व वसूलता; समय-समय पर संशोधन
रैयतवाड़ी1820 — थॉमस मुनरो (कैप्टन अलेक्ज़ेंडर रीड ने शुरुआत की)मद्रास, बंबईसीधे किसान (रैयत) से; भूमि का सर्वेक्षण; कर बहुत ऊँचा — किसान ऋण में
  • व्यावसायिक फ़सलें — कंपनी ने नील, अफ़ीम, जूट, कपास, चाय, गन्ना की खेती पर ज़ोर दिया। नील (Indigo) — यूरोप में कपड़े रँगने की माँग; खेती की दो प्रणालियाँ — निज खेती (बागान मालिक की अपनी ज़मीन — कम) और रैयती खेती (किसानों से अनुबंध सट्टा कराकर, अग्रिम ऋण देकर — शोषणकारी)।
  • नील विद्रोह (1859–60) — बंगाल; किसानों ने नील उगाने से मना किया; ज़मींदार और मुखिया (गोमस्ता — बागान मालिकों के एजेंट का विरोध) भी साथ; दीनबंधु मित्र का नाटक "नील दर्पण" (1860); सरकार ने नील आयोग (1860) बनाया — किसानों को नील उगाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। बाद में बिहार (चंपारण) नील खेती का केंद्र बना — गांधीजी का सत्याग्रह 1917।
  • बुनकरों का पतन — 18वीं सदी में भारतीय कपड़ा (मलमल, कैलिको, शिंट्ज़, बंडाना) यूरोप में बहुत लोकप्रिय था; ब्रिटेन में कैलिको अधिनियम (1720) से छींट पर प्रतिबंध; औद्योगिक क्रांति — स्पिनिंग जेनी (1764, जॉन के/हारग्रीव्स), भाप इंजन; मशीनी कपड़ा सस्ता; कंपनी ने गुमाश्ते (वेतनभोगी एजेंट) से बुनकरों पर दबाव डाला। बुनकरों की बर्बादी → ढाका जैसे केंद्रों का पतन। वूट्ज़ स्टील (मैसूर) — टीपू की तलवार; भारत में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) 1907/1912, जमशेदपुर (साकची), झारखंड।
  • भारत का पहला सूती कपड़ा कारख़ाना — बंबई (1854)।

9. आदिवासी समाज एवं औपनिवेशिक शासन

  • औपनिवेशिक नीतियों का प्रभाव — झूम खेती (स्थानांतरी खेती — पूर्वोत्तर, मध्य भारत) पर रोक; वन कानून (आरक्षित वन — लकड़ी, चराई पर रोक; रेलवे स्लीपरों के लिए लकड़ी); व्यापारी और साहूकार (दिकू) का प्रवेश; बागानों और खदानों में मज़दूरी। आदिवासी बाहरी लोगों को "दिकू" कहते थे।
  • बिरसा मुंडा (1875–1900) — छोटानागपुर; "उलगुलान" (महान विद्रोह, 1899–1900); "धरती आबा" कहलाए; लक्ष्य — मिशनरी, साहूकार, हिंदू ज़मींदार और सरकार को बाहर निकालकर "मुंडा राज" स्थापित करना; प्रतीक — पारंपरिक प्रतीक और भाषा; 1900 में जेल में हैज़े से मृत्यु। परिणाम — छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (1908) — आदिवासियों की भूमि दिकुओं को हस्तांतरित करने पर रोक। उनकी जयंती 15 नवंबर — "जनजातीय गौरव दिवस" और झारखंड स्थापना दिवस।
  • संथाल विद्रोह (हूल, 1855–56) — राजमहल पहाड़ियाँ ("दामिन-ए-कोह"); नेता सिद्धू और कान्हू मुर्मू; साहूकारों और ज़मींदारों के शोषण के विरुद्ध; बाद में संथाल परगना ज़िला बनाया गया।
  • अन्य विद्रोह — कोल विद्रोह (1831–32), खोंड विद्रोह (1846), बस्तर विद्रोह (1910) — गुंडाधुर; तमार विद्रोह; रंपा विद्रोह (1922) — अल्लूरी सीताराम राजू; वारली विद्रोह (महाराष्ट्र, 1940s)।
  • पहाड़िया — राजमहल की पहाड़ियों के मूल निवासी; संथालों को कंपनी ने वहाँ बसाया (खेती के लिए), जिससे पहाड़िया पीछे हटे।

10. 1857 — प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (विषयवार विश्लेषण)

  • कारण — राजनीतिक: व्यपगत सिद्धांत, अवध का विलय (1856), बहादुर शाह ज़फ़र के बाद मुगल वंश के अंत की घोषणा (डलहौजी 1849 और कैनिंग 1856 के निर्णय); आर्थिक: भारी लगान, हस्तशिल्प का पतन, किसानों की बेदखली; सामाजिक-धार्मिक: सती प्रतिबंध, विधवा पुनर्विवाह कानून, ईसाई मिशनरियों की गतिविधियाँ, धर्म-परिवर्तन किए व्यक्ति को पैतृक संपत्ति का अधिकार (1850 कानून) — लोगों को लगा कि धर्म ख़तरे में है; सैन्य: भारतीय सिपाहियों को कम वेतन और पदोन्नति नहीं; समुद्र पार जाने की बाध्यता (1856 — सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम); तात्कालिक: चर्बी वाले कारतूस।
  • फैलाव — मेरठ (10 मई) → दिल्ली (11 मई; बहादुर शाह ज़फ़र को नेता घोषित; उन्होंने देश के शासकों को पत्र लिखे) → कानपुर, लखनऊ, झाँसी, जगदीशपुर, बरेली। बख्त ख़ान (बरेली के सिपाही) — दिल्ली में सेना का नेतृत्व; शाह मल — बड़ौत परगना (उ.प्र.); मौलवी अहमदुल्ला शाह — फ़ैज़ाबाद; बिरजिस क़द्र — लखनऊ में नवाब घोषित।
  • दमन — सितंबर 1857 में दिल्ली पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा; बहादुर शाह ज़फ़र पर मुकदमा, रंगून निर्वासन (1862 में मृत्यु); उनके पुत्रों की हत्या। तात्या टोपे ने छापामार युद्ध जारी रखा, 1859 में पकड़े गए और फाँसी।
  • परिणाम — भारत शासन अधिनियम 1858 — कंपनी की सत्ता क्राउन को; भारत सचिव और परिषद; गवर्नर जनरल को वायसराय की उपाधि; शासकों को आश्वासन — भविष्य में राज्यों का विलय नहीं, गोद लेने की अनुमति; सेना में भारतीय सिपाहियों का अनुपात घटाया, गोरखा-सिख-पठानों की भर्ती बढ़ाई; मुसलमानों को अधिक संदेह से देखा गया; भारतीयों के धार्मिक-सामाजिक रीति-रिवाजों का सम्मान करने की नीति; ज़मींदारों के अधिकारों की रक्षा।

11. शिक्षा, महिलाएँ एवं सामाजिक सुधार

  • प्राच्यवादी (Orientalists) — भारतीय भाषाओं और ज्ञान का सम्मान: विलियम जोन्स (1783 कलकत्ता; संस्कृत; एशियाटिक सोसायटी 1784), हेनरी थॉमस कोलब्रुक, नथानियल हॉलहेड; कलकत्ता मदरसा (1781) और बनारस हिंदू कॉलेज (1791)।
  • आंग्लवादी (Anglicists) — थॉमस बैबिंगटन मैकाले का मिनट (1835): "एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अलमारी भारत और अरब के समूचे देशज साहित्य के बराबर है"; अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम 1835; उद्देश्य — "रक्त और रंग से भारतीय, पर रुचि, विचार और बुद्धि में अंग्रेज़" वर्ग बनाना। वुड का डिस्पैच (1854) — "भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा"; विश्वविद्यालयों की स्थापना (1857 — कलकत्ता, बंबई, मद्रास)।
  • विलियम एडम की रिपोर्ट (1830s) — बंगाल-बिहार में 1 लाख से अधिक पाठशालाएँ; लचीली व्यवस्था, फ़सल के समय कक्षाएँ नहीं। कंपनी ने बाद में पाठशालाओं को नियमों, पाठ्यपुस्तकों और निरीक्षण से बाँधा — गरीब बच्चों के लिए कठिन हो गया।
  • राष्ट्रीय शिक्षा के विचार — महात्मा गांधी — "नई तालीम / बुनियादी शिक्षा" (1937, वर्धा): मातृभाषा में, हाथ के काम (शिल्प) से जुड़ी; अंग्रेज़ी शिक्षा ने "दासता का भाव" पैदा किया। रवींद्रनाथ टैगोर — शांतिनिकेतन (1901), प्रकृति के बीच रचनात्मक शिक्षा; बाद में विश्वभारती।
  • महिलाएँ और सुधार — सती प्रतिबंध (1829) — राममोहन राय; विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856) — ईश्वरचंद्र विद्यासागर; वीरेशलिंगम पंतुलु (मद्रास — विधवा पुनर्विवाह); स्वामी दयानंद — आर्य समाज; बाल विवाह निरोध अधिनियम / शारदा अधिनियम (1929); ताराबाई शिंदे — "स्त्री पुरुष तुलना"; पंडिता रमाबाई — पूना में विधवाओं के लिए आश्रम; पहले मुस्लिम बालिका विद्यालय — मुमताज़ अली ने कुरान की आयतों से महिला शिक्षा का समर्थन किया।
  • जाति सुधार — ज्योतिबा फुले ("गुलामगिरी" 1873, अमेरिकी दास प्रथा के विरुद्ध आंदोलन को समर्पित; सत्यशोधक समाज); श्री नारायण गुरु (केरल, एझवा जाति; "एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर"); पेरियार (ई.वी. रामास्वामी नायकर) — आत्म-सम्मान आंदोलन (1925); डॉ. अंबेडकर — 1927 में महाड़ सत्याग्रह, 1927-35 में मंदिर प्रवेश आंदोलन; हरिदास ठाकुर का मतुआ संप्रदाय (बंगाल, चांडाल समुदाय); परमहंस मंडली (1840, बंबई — जाति उन्मूलन)।
  • दृश्य कलाएँ — यूरोपीय तैल चित्रकला का आगमन; कंपनी पेंटिंग; राजा रवि वर्मा (केरल; पौराणिक चित्र; मुंबई के पास लिथोग्राफ़ प्रेस); बंगाल स्कूल — अबनींद्रनाथ टैगोर ("भारत माता" चित्र), नंदलाल बोस — राष्ट्रवादी कला। स्थापत्य — नव-शास्त्रीय (टाउन हॉल बंबई), नव-गॉथिक (बंबई विश्वविद्यालय, विक्टोरिया टर्मिनस/छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस), इंडो-सारासेनिक (गेटवे ऑफ़ इंडिया 1911, ताजमहल होटल — जमशेदजी टाटा)।

12. राष्ट्रीय आंदोलन — प्रमुख धाराएँ

1885कांग्रेस 1905स्वदेशी 1917चंपारण 1920असहयोग 1930सविनय अवज्ञा 1942भारत छोड़ो 1947स्वतंत्रता नरम (1885–1905) → गरम (1905–1917) → गांधी युग (1917–1947)
राष्ट्रीय आंदोलन के तीन चरण और प्रमुख पड़ाव।
  • 1870-80 के दशक में राजनीतिक संगठन — पूना सार्वजनिक सभा (1870), इंडियन एसोसिएशन (1876, सुरेंद्रनाथ बनर्जी), मद्रास महाजन सभा (1884), बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन (1885)। असंतोष के कारण — शस्त्र अधिनियम (1878), वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878), इल्बर्ट बिल विवाद (1883) — भारतीय न्यायाधीश द्वारा यूरोपियों पर मुकदमा चलाने के प्रस्ताव का गोरों ने विरोध किया, सरकार झुकी।
  • नरमपंथी — याचिका, प्रार्थना; आर्थिक आलोचना (धन निष्कासन); भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्ति, विधान परिषदों में अधिक प्रतिनिधित्व, नमक कर हटाने की माँग। गरमपंथी — "स्वराज" का लक्ष्य, आत्मनिर्भरता, बहिष्कार।
  • स्वदेशी आंदोलन (1905) — बंगाल विभाजन के विरोध में; विदेशी वस्त्रों की होली, राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान, स्वदेशी उद्योग; रवींद्रनाथ टैगोर ने "आमार सोनार बांग्ला" लिखा और रक्षाबंधन का आयोजन किया। मुस्लिम लीग (1906) — पृथक निर्वाचन की माँग।
  • गांधी युग — दक्षिण अफ़्रीका (1893–1914) में नस्लभेद के विरुद्ध सत्याग्रह; भारत में चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद (1917-18); रौलट सत्याग्रह (1919); खिलाफ़त-असहयोग (1920-22) — हिंदू-मुस्लिम एकता का शिखर; चौरी-चौरा पर वापसी।
  • असहयोग के अलग-अलग रूप — खेड़ा (गुजरात) के पाटीदार किसानों ने लगान न देने का आंदोलन; आंध्र में वन सत्याग्रह; सिंध के व्यापारियों द्वारा विदेशी सामान का बहिष्कार; पंजाब में अकाली आंदोलन (गुरुद्वारों से भ्रष्ट महंतों को हटाना); असम के चाय बागान मज़दूरों ने "गांधी राज" के लिए बागान छोड़े।
  • 1920s के घटनाक्रम — स्वराज पार्टी (चित्तरंजन दास, मोतीलाल नेहरू — परिषदों में प्रवेश); राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (1925); भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (1925); HSRA (1928, भगत सिंह); साइमन कमीशन विरोध।
  • दांडी (1930) — नमक आम आदमी की ज़रूरत, इसलिए नमक कानून तोड़ने का प्रतीकात्मक महत्व; महिलाओं की बड़ी भागीदारी; पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान ("सीमांत गांधी") के ख़ुदाई ख़िदमतगार (लाल कुर्ती)।
  • 1937 के चुनाव (भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत) — 11 में से 7 प्रांतों में कांग्रेस सरकारें; 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को बिना पूछे शामिल करने पर कांग्रेस मंत्रिमंडलों का इस्तीफ़ा।
  • 1940 लाहौर प्रस्ताव (मुस्लिम लीग) — मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के लिए "स्वतंत्र राज्य" की माँग; 1946 के चुनाव — मुस्लिम सीटों पर लीग की बड़ी जीत; प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (16 अगस्त 1946) — कलकत्ता में दंगे।
  • भारत छोड़ो (1942) के दौरान बलिया (उ.प्र.), सतारा (महाराष्ट्र), तामलुक-मिदनापुर (बंगाल) में समानांतर सरकारें बनीं।

13. स्वतंत्रता के बाद का भारत

  • विभाजन — 14-15 अगस्त 1947; लाखों लोग विस्थापित, भारी हिंसा; शरणार्थियों का पुनर्वास पहली बड़ी चुनौती। 30 जनवरी 1948 — नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या।
  • रियासतों का एकीकरण — लगभग 565 रियासतें; गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और सचिव वी.पी. मेनन ने "विलय पत्र (Instrument of Accession)" से अधिकांश को भारत में मिलाया। जूनागढ़ — जनमत संग्रह (1948); हैदराबाद — "ऑपरेशन पोलो" (सितंबर 1948); कश्मीर — राजा हरि सिंह ने पाकिस्तानी कबायली आक्रमण के बाद अक्टूबर 1947 में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए; गोवा — 1961 में पुर्तगाल से मुक्त ("ऑपरेशन विजय"); पुडुचेरी — 1954 में फ़्रांस से; सिक्किम — 1975 में भारत का 22वाँ राज्य। पटेल को "भारत का लौह पुरुष" और "भारत का बिस्मार्क" कहा जाता है; उनकी प्रतिमा "स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी" (2018, केवड़िया, गुजरात — विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा, 182 मी)।
  • संविधान निर्माण — 1946–49; 26 जनवरी 1950 लागू; सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार; अल्पसंख्यकों, SC-ST की रक्षा; हिंदी राजभाषा, अंग्रेज़ी को 15 वर्ष तक सहायक (बाद में जारी); दक्षिण भारत में हिंदी थोपने का विरोध (1965)।
  • भाषाई राज्य — नेहरू और पटेल शुरू में इसके विरुद्ध थे (विभाजन के अनुभव के कारण); पोट्टी श्रीरामुलु के 58 दिन के अनशन के बाद मृत्यु (दिसंबर 1952) → 1 अक्टूबर 1953 आंध्र राज्य; राज्य पुनर्गठन आयोग → 1956 अधिनियम; 1960 — बंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात।
  • नियोजित विकास — योजना आयोग (1950); दूसरी योजना (1956) — भारी उद्योग, भिलाई (सोवियत सहयोग), राउरकेला (जर्मनी), दुर्गापुर (ब्रिटेन) इस्पात संयंत्र; बड़े बाँध — भाखड़ा-नांगल (नेहरू ने इन्हें "आधुनिक भारत के मंदिर" कहा), हीराकुंड, दामोदर घाटी निगम (1948)। हरित क्रांति (1960s) — HYV बीज; श्वेत क्रांति — अमूल, आनंद (गुजरात)।
  • विदेश नीति — गुटनिरपेक्षता (NAM) — शीत युद्ध में अमेरिका या सोवियत गुट में शामिल न होना; संस्थापक — नेहरू (भारत), नासिर (मिस्र), टीटो (यूगोस्लाविया), सुकर्णो (इंडोनेशिया), नक्रूमा (घाना); पहला शिखर सम्मेलन बेलग्रेड (1961); उससे पहले बांडुंग सम्मेलन (1955)। पंचशील (1954) — भारत-चीन समझौता (नेहरू-चाऊ एन लाई)।
  • युद्ध — 1947-48 (कश्मीर), 1962 (चीन), 1965 (पाकिस्तान; ताशकंद समझौता 1966 — लाल बहादुर शास्त्री; "जय जवान जय किसान"), 1971 (पाकिस्तान; बांग्लादेश का निर्माण; शिमला समझौता 1972), 1999 (कारगिल — "ऑपरेशन विजय")।
  • आपातकाल (25 जून 1975 – मार्च 1977) — इंदिरा गांधी; JP आंदोलन; 1977 में जनता पार्टी की सरकार — पहली गैर-कांग्रेसी केंद्र सरकार (प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई)।

14. मास्टर सारणी (Master Summary Table)

विषयमुख्य अवधारणामहत्वपूर्ण तथ्य
प्रारंभिक मध्यकालसामंत, प्रशस्ति, भूमि दानत्रिपक्षीय संघर्ष — कन्नौज; चोल — उर, नाडु, सभा
सल्तनतबंदगान, इक्ता, खराजकुव्वत-उल-इस्लाम; हौज़-ए-सुल्तानी; बरनी
मुगलमनसब (ज़ात-सवार), जागीर, ज़ब्त, सुलह-ए-कुलसूबेदार, दीवान, बख्शी, सद्र, काज़ी, कोतवाल
स्थापत्यशीर्षबंधन बनाम चापाकार; चारबाग; पीत्रा दूराअलाई दरवाज़ा, हुमायूँ का मकबरा, ताजमहल
नगर-व्यापारमंदिर नगर, बंदरगाहसूरत, मसूलीपट्टनम, हम्पी; बिदरी, मलमल
जनजातियाँअहोम, गोंड, भीलरानी दुर्गावती; पाइक; बुरंजी
18वीं सदीउत्तराधिकारी राज्यखालसा 1699; रणजीत सिंह; नादिर शाह 1739
भू-राजस्वस्थायी, महालवाड़ी, रैयतवाड़ी1793 कॉर्नवालिस; 1822 मैकेंज़ी; मुनरो
नीलनिज और रैयती खेतीनील विद्रोह 1859; नील दर्पण; चंपारण
आदिवासीझूम, वन कानून, दिकूबिरसा मुंडा — उलगुलान; संथाल हूल 1855
शिक्षाप्राच्यवादी बनाम आंग्लवादीमैकाले 1835; वुड डिस्पैच 1854; नई तालीम; शांतिनिकेतन
सुधारमहिलाएँ, जातिसती 1829, विधवा विवाह 1856; फुले, पेरियार, नारायण गुरु
राष्ट्रीय आंदोलननरम-गरम-गांधीइल्बर्ट बिल; स्वदेशी; ख़ुदाई ख़िदमतगार; समानांतर सरकारें
स्वतंत्र भारतएकीकरण, भाषाई राज्य, योजना, NAMपटेल-मेनन; आंध्र 1953; भाखड़ा; बेलग्रेड 1961

15. माइंड मैप

भारतीय इतिहास (विषयवार)
मध्यकालीन राज्य
  • राजपूत, चोल
  • सल्तनत प्रशासन
  • मुगल मनसबदारी
  • स्थापत्य
समाज-अर्थव्यवस्था
  • नगर, व्यापार
  • जनजातियाँ
  • क्षेत्रीय संस्कृति
  • 18वीं सदी
औपनिवेशिक भारत
  • भू-राजस्व
  • नील, बुनकर
  • आदिवासी विद्रोह
  • 1857, शिक्षा, सुधार
राष्ट्र निर्माण
  • राष्ट्रीय आंदोलन
  • विभाजन, एकीकरण
  • योजना, भाषाई राज्य
  • विदेश नीति

16. टिप्स एवं ट्रिक्स

याद रखने की तरकीबें
  • भू-राजस्व: "ज़मींदार–स्थायी–बंगाल", "गाँव–महाल–उत्तर", "रैयत–रैयतवाड़ी–मद्रास"।
  • मुगल पद: "सू-दी-ब-स-का-को" — सूबेदार (प्रांत), दीवान (वित्त), बख्शी (सेना), सद्र (धर्मार्थ), काज़ी (न्याय), कोतवाल (नगर)।
  • आदिवासी नेता-क्षेत्र: बिरसा — छोटानागपुर (मुंडा); सिद्धू-कान्हू — राजमहल (संथाल); गुंडाधुर — बस्तर; सीताराम राजू — आंध्र (रंपा)।
  • रियासत-विलय की विधि: जूनागढ़ — जनमत; हैदराबाद — पुलिस कार्रवाई (ऑपरेशन पोलो); कश्मीर — विलय पत्र; गोवा — सैन्य कार्रवाई 1961।
आम गलतियाँ
  • इक्ता (सल्तनत) और जागीर (मुगल) अलग शब्द हैं — दोनों राजस्व क्षेत्र हैं पर अलग काल के।
  • मनसब में "ज़ात" वेतन-पद तय करता है, "सवार" घुड़सवारों की संख्या — इन्हें उलटें नहीं।
  • रैयतवाड़ी व्यवस्था थॉमस मुनरो से जुड़ी है, कॉर्नवालिस से नहीं।
  • "आधुनिक भारत के मंदिर" — नेहरू ने बड़े बाँधों के लिए कहा, मंदिरों के लिए नहीं।

17. महत्वपूर्ण वन-लाइनर

  • "हिंदुस्तान" शब्द का प्रयोग 13वीं सदी में मिनहाज-ए-सिराज ने किया।
  • कल्हण ने "राजतरंगिणी" लिखी।
  • त्रिपक्षीय संघर्ष कन्नौज के लिए हुआ।
  • उत्तरमेरूर अभिलेख चोल ग्राम सभा की चुनाव पद्धति बताता है।
  • कुव्वत-उल-इस्लाम दिल्ली की पहली मस्जिद है।
  • मुगल मनसबदारी में "सवार" घुड़सवारों की संख्या बताता था।
  • दहसाला व्यवस्था टोडरमल ने बनाई।
  • "सुलह-ए-कुल" अकबर की धार्मिक नीति थी।
  • हुमायूँ के मकबरे में चारबाग और हश्त बिहिश्त शैली है।
  • अहोम लोग 13वीं सदी में म्यांमार से असम आए।
  • गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की।
  • महालवाड़ी व्यवस्था होल्ट मैकेंज़ी ने लागू की।
  • "नील दर्पण" नाटक दीनबंधु मित्र ने लिखा।
  • बिरसा मुंडा के आंदोलन को "उलगुलान" कहा जाता है।
  • वुड के डिस्पैच (1854) को भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
  • गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड में हुआ।

18. PYQ आधारित प्रश्न — विस्तृत उत्तर सहित

Q1PYQ आधारित

चोल काल में ब्राह्मणों को दान में दी गई भूमि को क्या कहा जाता था?

  1. वेल्लनवगाई
  2. ब्रह्मदेय
  3. शालाभोग
  4. देवदान
उत्तर एवं व्याख्या

चोल अभिलेखों में ब्राह्मणों को दी गई भूमि को "ब्रह्मदेय" कहा गया है, जिसकी देखरेख ब्राह्मणों की "सभा" करती थी। वेल्लनवगाई गैर-ब्राह्मण किसानों की भूमि, शालाभोग विद्यालय के लिए और देवदान (तिरुनमट्टुक्कनी) मंदिर को दी गई भूमि थी।

उत्तर: (B) ब्रह्मदेय

Q2PYQ आधारित

मुगल मनसबदारी में "ज़ात" किसे दर्शाता था?

  1. घुड़सवारों की संख्या
  2. मनसबदार का पद और वेतन
  3. जागीर का क्षेत्रफल
  4. मनसबदार का धर्म
उत्तर एवं व्याख्या

"ज़ात" एक संख्यात्मक मान था जो मनसबदार का पद (रैंक) और व्यक्तिगत वेतन तय करता था; जितनी बड़ी ज़ात, उतना प्रतिष्ठित पद। घुड़सवारों की संख्या "सवार" से तय होती थी। जागीर वेतन के बदले मिलने वाला राजस्व क्षेत्र था, और धर्म का मनसब से कोई संबंध नहीं था।

उत्तर: (B) मनसबदार का पद और वेतन

Q3PYQ आधारित

स्थापत्य की "चापाकार (Arcuate)" शैली में किसका प्रयोग होता है?

  1. क्षैतिज शहतीर
  2. मेहराब
  3. शिखर
  4. स्तूप
उत्तर एवं व्याख्या

चापाकार शैली में दरवाज़ों और खिड़कियों के ऊपर की संरचना का भार मेहराब पर डाला जाता है; यह 12वीं सदी के बाद लोकप्रिय हुई (उदाहरण — अलाई दरवाज़ा)। क्षैतिज शहतीर "शीर्षबंधन" शैली है, शिखर नागर मंदिरों का भाग है और स्तूप बौद्ध संरचना है।

उत्तर: (B) मेहराब

Q4PYQ आधारित

रैयतवाड़ी भू-राजस्व व्यवस्था मुख्य रूप से किस क्षेत्र में लागू की गई?

  1. बंगाल
  2. बिहार
  3. मद्रास और बंबई
  4. पंजाब
उत्तर एवं व्याख्या

रैयतवाड़ी व्यवस्था थॉमस मुनरो के नेतृत्व में मद्रास और बाद में बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई, जिसमें सरकार सीधे किसानों (रैयतों) से राजस्व लेती थी। बंगाल-बिहार में स्थायी बंदोबस्त और पंजाब-उत्तर प्रदेश में महालवाड़ी व्यवस्था थी।

उत्तर: (C) मद्रास और बंबई

Q5PYQ आधारित

बिरसा मुंडा का आंदोलन किस क्षेत्र से संबंधित था?

  1. राजमहल पहाड़ियाँ
  2. छोटानागपुर
  3. बस्तर
  4. नीलगिरि
उत्तर एवं व्याख्या

बिरसा मुंडा ने 1890s में छोटानागपुर (वर्तमान झारखंड) में मुंडा आदिवासियों का "उलगुलान" आंदोलन चलाया। राजमहल पहाड़ियाँ संथाल विद्रोह (सिद्धू-कान्हू) से, बस्तर गुंडाधुर के विद्रोह से जुड़ी हैं, और नीलगिरि का इससे संबंध नहीं।

उत्तर: (B) छोटानागपुर

Q6PYQ आधारित

"नील दर्पण" नाटक किस आंदोलन से जुड़ा है?

  1. संथाल विद्रोह
  2. नील विद्रोह
  3. 1857 का विद्रोह
  4. मोपला विद्रोह
उत्तर एवं व्याख्या

दीनबंधु मित्र का नाटक "नील दर्पण" (1860) बंगाल में नील बागान मालिकों द्वारा किसानों के शोषण को दिखाता है और 1859-60 के नील विद्रोह से जुड़ा है। संथाल विद्रोह साहूकारों के विरुद्ध, 1857 सैनिक-जन विद्रोह, और मोपला विद्रोह (1921) केरल में था।

उत्तर: (B) नील विद्रोह

Q7PYQ आधारित

भारत में अंग्रेज़ी शिक्षा को बढ़ावा देने वाला "मिनट" (1835) किसने लिखा?

  1. विलियम जोन्स
  2. थॉमस बैबिंगटन मैकाले
  3. चार्ल्स वुड
  4. विलियम एडम
उत्तर एवं व्याख्या

मैकाले के 1835 के मिनट में भारतीय ज्ञान की आलोचना करते हुए अंग्रेज़ी शिक्षा की वकालत की गई, जिसके बाद अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम 1835 बना। विलियम जोन्स प्राच्यवादी थे, चार्ल्स वुड का डिस्पैच 1854 का है, और विलियम एडम ने देशी पाठशालाओं पर रिपोर्ट दी।

उत्तर: (B) थॉमस बैबिंगटन मैकाले

Q8PYQ आधारित

हैदराबाद रियासत का भारत में विलय किस अभियान से हुआ?

  1. ऑपरेशन विजय
  2. ऑपरेशन पोलो
  3. ऑपरेशन ब्लू स्टार
  4. जनमत संग्रह
उत्तर एवं व्याख्या

निज़ाम के भारत में शामिल होने से इनकार और रज़ाकारों की हिंसा के बाद सितंबर 1948 में "ऑपरेशन पोलो" (पुलिस कार्रवाई) द्वारा हैदराबाद का विलय हुआ। ऑपरेशन विजय गोवा (1961) और कारगिल (1999) से, ब्लू स्टार 1984 में स्वर्ण मंदिर से, और जनमत संग्रह जूनागढ़ से जुड़ा है।

उत्तर: (B) ऑपरेशन पोलो

Q9PYQ आधारित

"सीमांत गांधी" के नाम से कौन प्रसिद्ध थे?

  1. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
  2. ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान
  3. हकीम अजमल ख़ान
  4. मोहम्मद अली जौहर
उत्तर एवं व्याख्या

पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान ने अहिंसक संगठन "ख़ुदाई ख़िदमतगार" (लाल कुर्ती) बनाया और गांधीवादी सिद्धांतों पर चलने के कारण "सीमांत गांधी" कहलाए; उन्हें 1987 में भारत रत्न मिला। अबुल कलाम आज़ाद पहले शिक्षा मंत्री और मोहम्मद अली खिलाफ़त आंदोलन के नेता थे।

उत्तर: (B) ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान

Q10PYQ आधारित

भाषाई आधार पर गठित पहला राज्य कौन-सा था?

  1. महाराष्ट्र
  2. गुजरात
  3. आंध्र
  4. केरल
उत्तर एवं व्याख्या

पोट्टी श्रीरामुलु के आमरण अनशन में निधन के बाद 1 अक्टूबर 1953 को तेलुगु भाषियों के लिए आंध्र राज्य बना — यह पहला भाषाई राज्य था। केरल 1956 में, और महाराष्ट्र-गुजरात 1960 में बंबई राज्य के विभाजन से बने।

उत्तर: (C) आंध्र

Q11कथन आधारित

स्थायी बंदोबस्त के संबंध में कौन-से कथन सही हैं? 1. यह 1793 में कॉर्नवालिस ने लागू किया। 2. इसमें सरकार ने सीधे किसानों से समझौता किया। 3. इसमें राजस्व की राशि हमेशा के लिए तय कर दी गई।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर एवं व्याख्या

कथन 1 और 3 सही हैं — कॉर्नवालिस ने 1793 में बंगाल, बिहार, उड़ीसा में स्थायी बंदोबस्त लागू किया और राजस्व स्थायी रूप से तय किया। कथन 2 गलत है — समझौता किसानों से नहीं, ज़मींदारों से हुआ था; किसानों से सीधा समझौता रैयतवाड़ी व्यवस्था में था।

उत्तर: (B) केवल 1 और 3

Q12सुमेलित करें

सही मिलान चुनिए — (a) गुलामगिरी (b) आत्म-सम्मान आंदोलन (c) शांतिनिकेतन (d) नई तालीम ; (1) पेरियार (2) ज्योतिबा फुले (3) महात्मा गांधी (4) रवींद्रनाथ टैगोर

  1. a-2, b-1, c-4, d-3
  2. a-1, b-2, c-4, d-3
  3. a-2, b-1, c-3, d-4
  4. a-4, b-1, c-2, d-3
उत्तर एवं व्याख्या

"गुलामगिरी" (1873) ज्योतिबा फुले की पुस्तक है; आत्म-सम्मान आंदोलन (1925) पेरियार ने चलाया; शांतिनिकेतन (1901) टैगोर ने स्थापित किया; "नई तालीम" (बुनियादी शिक्षा) गांधीजी का विचार था। इसलिए a-2, b-1, c-4, d-3 सही है।

उत्तर: (A) a-2, b-1, c-4, d-3

19. त्वरित पुनरावृत्ति

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • प्रारंभिक मध्यकाल: सामंत, प्रशस्ति, त्रिपक्षीय संघर्ष; चोल — उर, नाडु, सभा, ब्रह्मदेय, उत्तरमेरूर।
  • सल्तनत: बंदगान, इक्ता, खराज; कुव्वत-उल-इस्लाम; अलाई दरवाज़ा।
  • मुगल: ज़ात-सवार, जागीर, दहसाला (टोडरमल), सुलह-ए-कुल; स्थापत्य — चारबाग, हश्त बिहिश्त, पीत्रा दूरा।
  • जनजातियाँ एवं 18वीं सदी: अहोम, गोंड, रानी दुर्गावती; खालसा 1699; अवध-बंगाल-हैदराबाद।
  • कंपनी: स्थायी (1793), महालवाड़ी (1822), रैयतवाड़ी; नील विद्रोह; बुनकरों का पतन; बिरसा मुंडा, संथाल हूल।
  • 1857: कारण, नेता, परिणाम — 1858 अधिनियम; शिक्षा — मैकाले, वुड, नई तालीम, शांतिनिकेतन; सुधार — फुले, पेरियार, नारायण गुरु।
  • स्वतंत्र भारत: पटेल-मेनन, ऑपरेशन पोलो, आंध्र 1953, भाखड़ा, NAM (बेलग्रेड 1961), पंचशील 1954।