UPSC Mains · General Studies Paper II · अध्याय 10

अंतरराष्ट्रीय संबंध

International Relations

भारत और पड़ोसी देश; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह; विकसित-विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव; प्रवासी भारतीय; महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ।

GS-2 35 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

पाठ्यक्रम: "भारत एवं इसके पड़ोसी — संबंध; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से संबंधित या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार; भारत के हितों पर विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय; महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच — उनकी संरचना और अधिदेश।" GS-2 के 20 में से प्रायः 4-5 प्रश्न इसी भाग से आते हैं, और ये सबसे अधिक समसामयिक होते हैं।

वर्षप्रश्न
2026IPMDA — SAGAR और Quad के बीच सेतु; BRICS — प्रतिसंतुलन और ग्लोबल साउथ की आवाज़; प्रवासी भारतीय — "जीवंत सेतु"; BRI और दक्षिण एशिया में महाशक्ति प्रतिस्पर्धा
2025भारत-अफ़्रीका डिजिटल साझेदारी; वैश्वीकरण का क्षय और संप्रभु राष्ट्रवाद; ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति — पश्चिम एशिया; रुका हुआ UN सुधार — पूर्व-पश्चिम और अमेरिका बनाम रूस-चीन
2024चीन के विकल्प के रूप में भारत को आपूर्ति शृंखलाओं में पश्चिम का प्रोत्साहन; भारत और मध्य एशियाई गणराज्य; UNSC आतंकवाद-रोधी समिति की प्रभावशीलता; मालदीव का भू-राजनीतिक और भू-रणनीतिक महत्व
IR उत्तरों का सूत्र

हर उत्तर में चार परतें: (1) भारत के हित (सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रवासी, प्रतिष्ठा), (2) सिद्धांत (रणनीतिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण, "पड़ोस पहले", "वसुधैव कुटुम्बकम्"), (3) ठोस उदाहरण/समझौते, (4) चुनौतियाँ और आगे की राह।

2. भारतीय विदेश नीति के सिद्धांत

  • ऐतिहासिक: पंचशील (1954), गुटनिरपेक्षता (बेलग्रेड 1961), "गुजराल सिद्धांत" (1996 — पड़ोसियों से बिना पारस्परिकता के सद्भाव)।
  • समकालीन: रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण (multi-alignment) — Quad और SCO-BRICS दोनों में सदस्यता; "पड़ोस पहले" (2014), "Act East" (2014), "Think West", SAGAR (2015) और उसका विस्तार MAHASAGAR (2025, मॉरीशस) — क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति।
  • मूल्य: "वसुधैव कुटुम्बकम्" (G20 2023 की थीम — "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य"), "विश्व-बंधु", ग्लोबल साउथ की आवाज़ (Voice of Global South शिखर सम्मेलन 2023 से)।
समकालीन विश्व राजनीति और भारत
द्विध्रुवीयता की समाप्ति, शक्ति के नए केंद्र, दक्षिण एशिया, अंतरराष्ट्रीय संगठन और गैर-परंपरागत सुरक्षा — भारतीय विदेश नीति का कार्यक्षेत्र।

3. पड़ोस और हिंद महासागर

देश / क्षेत्रमुख्य पहलूचुनौती
मालदीव8° और 1.5° चैनल के पास समुद्री मार्ग; ऑपरेशन कैक्टस (1988), "नीर" (2014); ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना"India Out" अभियान (2023); चीन का प्रभाव
श्रीलंका2022 आर्थिक संकट में लगभग $4 अरब सहायताहंबनटोटा (99 वर्ष का पट्टा, 2017); चीनी "शोध" जहाज़
नेपालखुली सीमा, जलविद्युत, ऊर्जा व्यापारकालापानी-लिपुलेख विवाद; BRI रूपरेखा (2024)
बांग्लादेशभूमि सीमा समझौता (2015), समुद्री सीमा निर्णय (2014), गंगा जल संधि (1996)2024 के राजनीतिक परिवर्तन के बाद संबंधों में तनाव; तीस्ता
भूटानजलविद्युत सहयोग, सुरक्षा संबंधडोकलाम (2017)
पाकिस्तानसीमापार आतंकवाद; पहलगाम हमला (अप्रैल 2025) और ऑपरेशन सिंदूरसिंधु जल संधि स्थगित (2025)
अफ़ग़ानिस्तान-मध्य एशियाचाबहार, INSTC, TAPIभू-आबद्धता, पाकिस्तान से मार्ग अवरोध
भारत मालदीव श्रीलंका अंडमान-निकोबार मलक्का जलडमरूमध्य ▸ ◂ होर्मुज़ ◂ बाब-अल-मंदेब ◂ मोज़ाम्बिक चैनल पूर्व-पश्चिम समुद्री व्यापार मार्ग (ऊर्जा आपूर्ति)
भारत हिंद महासागर के मध्य में है; होर्मुज़ से मलक्का तक के समुद्री मार्ग उसकी ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा की धमनियाँ हैं (रेखाचित्र स्केल पर नहीं)।

4. प्रमुख समूह और संस्थाएँ

समूहसदस्य / आरंभभारत के लिए महत्व
Quadभारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया (2007, पुनर्जीवित 2017)स्वतंत्र-खुला हिंद-प्रशांत; IPMDA (2022), टीका, महत्वपूर्ण तकनीक, MAITRI प्रशिक्षण (2024)
BRICS2009 से; 2024-25 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, इंडोनेशिया जुड़े; भागीदार देश श्रेणीNDB (2014), ग्लोबल साउथ; भारत 2026 में अध्यक्ष
SCOभारत 2017 से पूर्ण सदस्यमध्य एशिया, आतंकवाद-रोधी RATS
G20भारत की अध्यक्षता 2023अफ़्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता, DPI, IMEC की घोषणा
IPEF2022, अमेरिका के नेतृत्व मेंआपूर्ति शृंखला, स्वच्छ अर्थव्यवस्था (व्यापार स्तंभ से भारत बाहर)
I2U2भारत, इज़राइल, UAE, अमेरिका (2022)खाद्य पार्क, स्वच्छ ऊर्जा
BIMSTECबंगाल की खाड़ी के 7 देश; चार्टर 2024 से प्रभावी"पड़ोस पहले" + "Act East" का संगम

5. भू-अर्थशास्त्र: आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा और वैश्वीकरण

  • आपूर्ति शृंखला का पुनर्गठन: कोविड और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बाद "China+1", "friend-shoring"; भारत — PLI (2020-21, 14 क्षेत्र), सेमीकंडक्टर मिशन (माइक्रोन, टाटा), मोबाइल निर्यात में तीव्र वृद्धि; SCRI (भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया, 2021), खनिज सुरक्षा साझेदारी (2023), iCET (2023, अब TRUST)।
  • ऊर्जा सुरक्षा: कच्चे तेल की 85% से अधिक ज़रूरत आयात से; रूस से आयात 2022 के बाद तेज़ी से बढ़ा; पश्चिम एशिया — इराक, सऊदी अरब, UAE, क़तर (LNG); रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (विशाखापत्तनम, मंगलुरु, पडूर); लाल सागर संकट (2023-24), इज़राइल-ईरान संघर्ष (2025); हरित हाइड्रोजन मिशन (2023)।
  • वैश्वीकरण का क्षय: 2008 के बाद व्यापार/GDP अनुपात स्थिर, WTO का अपीलीय निकाय दिसंबर 2019 से निष्क्रिय, संरक्षणवाद (2025 में अमेरिका के ऊँचे शुल्क, भारत पर 50% तक), आर्थिक प्रतिबंध, तकनीकी राष्ट्रवाद। भारत की प्रतिक्रिया — द्विपक्षीय FTA: UAE CEPA (2022), ऑस्ट्रेलिया ECTA (2022), EFTA TEPA (2024), ब्रिटेन CETA (2025)।

6. प्रवासी भारतीय

  • लगभग 3.5 करोड़ NRI और भारतवंशी; अमेरिका, UAE, सऊदी अरब, ब्रिटेन, कनाडा में बड़े समुदाय; खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख।
  • धन-प्रेषण: भारत विश्व का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता — RBI के अनुसार 2024-25 में लगभग $135 अरब।
  • नीति: प्रवासी भारतीय दिवस (2003 से, 9 जनवरी), OCI (2005), eMigrate, निकासी अभियान — ऑपरेशन गंगा (यूक्रेन 2022), कावेरी (सूडान 2023), अजय (इज़राइल 2023)।
  • चुनौतियाँ: खाड़ी में श्रम अधिकार (कफ़ाला), पश्चिम में आव्रजन प्रतिबंध (2025 में H-1B शुल्क वृद्धि), खालिस्तानी तत्व (कनाडा से संबंधों में तनाव), प्रतिभा पलायन।

7. संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद

  • UNSC सुधार: G4 (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान), L.69 समूह, अफ़्रीका का एज़ुल्विनी सहमति (स्थायी सीटें वीटो सहित), "Uniting for Consensus" (इटली, पाकिस्तान आदि — स्थायी सीटों का विरोध); 2009 से अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) बिना पाठ-आधारित प्रगति; भारत 8 बार अस्थायी सदस्य (अंतिम 2021-22)।
  • गतिरोध के कारण: P5 का वीटो (चार्टर संशोधन के लिए अनुच्छेद 108 में P5 की सहमति आवश्यक), क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता, रूस-यूक्रेन और गाज़ा पर वीटो से परिषद का पक्षाघात।
  • आतंकवाद: UNSC प्रस्ताव 1373 (2001) से आतंकवाद-रोधी समिति (CTC); भारत ने 2022 में अध्यक्षता की — मुंबई और दिल्ली में विशेष बैठक, "दिल्ली घोषणा" (आतंकवाद में नई तकनीकों का प्रयोग); 1267 प्रतिबंध समिति में "तकनीकी रोक"; भारत का प्रस्तावित CCIT (1996) अब भी लंबित।

8. विस्तृत विवेचन: प्रमुख शक्तियों के साथ भारत के संबंध — एक संरचित दृष्टि

GS-2 में द्विपक्षीय संबंधों पर प्रश्न प्रायः "अवसर और चुनौतियाँ" या "हाल के घटनाक्रम का प्रभाव" के रूप में आते हैं। हर संबंध को एक ही ढाँचे में याद रखें: (1) रणनीतिक/सुरक्षा, (2) आर्थिक, (3) प्रौद्योगिकी और ऊर्जा, (4) बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, (5) तनाव के बिंदु। नीचे की सारणी यही ढाँचा देती है; समसामयिक घटनाएँ तेज़ी से बदलती हैं, इसलिए परीक्षा से पहले नवीनतम स्थिति अवश्य जोड़ें।

देश / समूहसहयोग के स्तंभतनाव या चुनौतियाँ
अमेरिका2008 का असैन्य परमाणु समझौता (123); "मूलभूत" रक्षा समझौते (LEMOA 2016, COMCASA 2018, BECA 2020); क्वाड; महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पर सहयोग (iCET, 2023); बड़ा प्रवासी समुदाय; सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों मेंव्यापार और शुल्क-विवाद; H-1B वीज़ा नीति; रूस से भारत के रक्षा और तेल संबंधों पर मतभेद; भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बनाम गठबंधन की अपेक्षा
चीनबड़ा व्यापार (पर भारी व्यापार घाटा); BRICS और SCO में साथ; जलवायु वार्ताओं में विकासशील देशों के कुछ साझा पक्षसीमा विवाद; गलवान (जून 2020) के बाद गहरा अविश्वास; अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक में गश्त व्यवस्था पर सहमति; पाकिस्तान से "सदाबहार" संबंध; हिंद महासागर में उपस्थिति; ब्रह्मपुत्र पर बाँध; आपूर्ति-श्रृंखला निर्भरता
रूस"विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी"; रक्षा आपूर्ति (S-400, सुखोई, ब्रह्मोस का संयुक्त उत्पादन); परमाणु ऊर्जा (कुडनकुलम); 2022 के बाद रियायती कच्चे तेल का बड़ा आयातरूस-चीन निकटता; यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंध; भुगतान-व्यवस्था की समस्या; रक्षा आपूर्ति में देरी; व्यापार असंतुलन
जापान"विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी"; मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल; पूर्वोत्तर में अवसंरचना; क्वाड; बड़ा ODA साझेदारव्यापार-स्तर अपेक्षा से कम; रक्षा सहयोग की धीमी गति
यूरोपीय संघव्यापार और निवेश; 2022 में मुक्त व्यापार समझौता वार्ता पुनः आरंभ; व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (2023); हरित ऊर्जा सहयोगकार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) से भारतीय निर्यात पर प्रभाव; डेटा और श्रम मानकों पर मतभेद
खाड़ी देशऊर्जा सुरक्षा; लगभग एक करोड़ के आसपास प्रवासी भारतीय और प्रेषण (remittances); भारत-UAE CEPA (2022); भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) की घोषणा (G20, सितंबर 2023); I2U2पश्चिम एशिया में संघर्ष से गलियारों और प्रवासियों की सुरक्षा पर जोखिम; प्रवासी श्रमिकों के अधिकार
रणनीतिक स्वायत्तता: गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखण तक
  • 1950-60 का दशक: गुटनिरपेक्षता — शीत युद्ध के किसी गुट में शामिल न होना, पर तटस्थता नहीं; मुद्दा-आधारित स्वतंत्र निर्णय।
  • 1971: भारत-सोवियत मैत्री संधि — संकट (बांग्लादेश युद्ध) में व्यावहारिक संतुलन।
  • 1991 के बाद: आर्थिक उदारीकरण के साथ अमेरिका, पश्चिम और पूर्वी एशिया ("Look East", 2014 से "Act East") से संबंध।
  • वर्तमान: "बहु-संरेखण" (multi-alignment) — एक साथ क्वाड और SCO, BRICS और G7 आउटरीच; रूस से तेल और अमेरिका से प्रौद्योगिकी। आलोचक इसे विरोधाभासी मानते हैं, समर्थक इसे बहुध्रुवीय विश्व में राष्ट्रीय हित की सबसे लचीली रणनीति कहते हैं।
  • "वैश्विक दक्षिण" की आवाज़: G20 अध्यक्षता (2023) में अफ़्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता; "Voice of Global South" शिखर सम्मेलन।
P1अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

"बहुध्रुवीय विश्व में भारत की 'बहु-संरेखण' नीति अवसर भी है और जोखिम भी।" अमेरिका, रूस और चीन के साथ भारत के संबंधों के संदर्भ में विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: शीत युद्ध के बाद का एकध्रुवीय क्षण समाप्त होकर विश्व बहुध्रुवीय और प्रतिस्पर्धी बन रहा है। भारत ने इसमें किसी एक गुट से बँधने के बजाय विभिन्न शक्तियों के साथ मुद्दा-आधारित साझेदारी, यानी "बहु-संरेखण", की नीति अपनाई है।

अवसर:

  • अमेरिका: उन्नत प्रौद्योगिकी (सेमीकंडक्टर, रक्षा, अंतरिक्ष), निवेश, क्वाड के माध्यम से हिंद-प्रशांत में संतुलन।
  • रूस: रक्षा आपूर्ति की निरंतरता, ऊर्जा सुरक्षा (रियायती तेल), संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ऐतिहासिक समर्थन; रूस को पूरी तरह चीन पर निर्भर होने से रोकना।
  • चीन: संवाद-तंत्र बनाए रखकर सीमा पर तनाव का प्रबंधन; BRICS और SCO में विकासशील देशों के मुद्दे।
  • सभी पक्षों से लाभ उठाकर "स्विंग स्टेट" की स्थिति और सौदेबाज़ी की शक्ति।

जोखिम:

  • अमेरिका-रूस टकराव में दोनों पक्षों का दबाव (प्रतिबंधों का जोखिम, जैसे CAATSA की आशंका; व्यापार दंड)।
  • रूस-चीन की बढ़ती निकटता से रूस पर भरोसे की सीमा।
  • चीन के साथ सीमा-विवाद में "संवाद और प्रतिरोध" का कठिन संतुलन।
  • विश्वसनीयता का प्रश्न: साझेदार भारत को "अविश्वसनीय मित्र" मान सकते हैं।

आगे का रास्ता: घरेलू क्षमता (रक्षा-उत्पादन में आत्मनिर्भरता, विनिर्माण, ऊर्जा विविधीकरण) से निर्भरता घटाना; मध्य शक्तियों (फ़्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, खाड़ी, आसियान) से साझेदारी; बहुपक्षीय सुधार की वकालत; और स्पष्ट रूप से परिभाषित राष्ट्रीय हित।

निष्कर्ष: बहु-संरेखण तभी सफल है जब उसके पीछे आर्थिक और सैन्य शक्ति हो; अन्यथा यह "सबका मित्र, किसी का भरोसेमंद नहीं" बनने का जोखिम रखता है।

P2अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

BRICS के विस्तार का भारत के हितों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

पृष्ठभूमि: 2023 के जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में BRICS के विस्तार का निर्णय हुआ, और 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हुए; बाद में इंडोनेशिया भी सदस्य बना। समूह अब विश्व जनसंख्या और ऊर्जा उत्पादन का बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है।

भारत के लिए अवसर:

  • वैश्विक दक्षिण की आवाज़ और बहुपक्षीय संस्थाओं (IMF, विश्व बैंक, सुरक्षा परिषद) के सुधार की माँग को बल।
  • ऊर्जा-उत्पादक खाड़ी देशों से संबंधों का सुदृढ़ीकरण।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक से अवसंरचना वित्त; स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के विकल्प।

चुनौतियाँ:

  • चीन का बढ़ता प्रभाव; समूह के "पश्चिम-विरोधी" मंच बनने का जोखिम, जो भारत की बहु-संरेखण नीति और पश्चिम से साझेदारी के अनुकूल नहीं।
  • सदस्य-संख्या बढ़ने से सहमति बनाना कठिन; उद्देश्यों का धुँधलापन।
  • साझा मुद्रा या "de-dollarisation" के प्रस्तावों पर भारत की सतर्कता।

निष्कर्ष: भारत के लिए BRICS सुधारवादी (reformist) मंच है, व्यवस्था को उलटने वाला (revisionist) नहीं; भारत को सदस्यता-मानदंड और सहमति-आधारित निर्णय पर ज़ोर देकर इसे संतुलित बनाए रखना होगा।

9. Master Summary Table

विषयमुख्य बिंदुतथ्य
सिद्धांतरणनीतिक स्वायत्तता, बहु-संरेखणSAGAR 2015 → MAHASAGAR 2025
पड़ोसपड़ोस पहले; चीन का प्रभावहंबनटोटा 2017; नेपाल BRI 2024
समुद्रीIPMDA, IFC-IORQuad टोक्यो 2022; IFC-IOR गुरुग्राम 2018
BRICSविस्तार, NDB2024-25 विस्तार; भारत अध्यक्ष 2026
भू-अर्थशास्त्रआपूर्ति शृंखला, FTAPLI, SCRI 2021; UAE CEPA 2022
ऊर्जाआयात निर्भरता 85%+SPR, IMEC, हरित हाइड्रोजन
प्रवासी~3.5 करोड़; धन-प्रेषण ~$135 अरबPBD 2003; OCI 2005
UNसुधार रुका; CTCप्रस्ताव 1373; दिल्ली घोषणा 2022

10. Mind Map

भारत और विश्व
पड़ोस
  • पड़ोस पहले
  • BRI की चुनौती
समुद्री
  • SAGAR, MAHASAGAR
  • IPMDA
समूह
  • Quad, BRICS, SCO
  • G20, BIMSTEC
भू-अर्थशास्त्र
  • आपूर्ति शृंखला
  • ऊर्जा सुरक्षा
मानव सेतु
  • प्रवासी
  • सॉफ़्ट पावर
बहुपक्षवाद
  • UN सुधार
  • आतंकवाद-रोधी

11. महत्वपूर्ण One-liners

  • पंचशील: 1954 (भारत-चीन)।
  • SAGAR: 2015, मॉरीशस; MAHASAGAR: 2025, मॉरीशस।
  • IPMDA की घोषणा: Quad शिखर सम्मेलन, टोक्यो (2022)।
  • हिंद महासागर सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR): गुरुग्राम, 2018।
  • BRICS का न्यू डेवलपमेंट बैंक: 2014, मुख्यालय शंघाई।
  • अफ़्रीकी संघ G20 का स्थायी सदस्य: नई दिल्ली शिखर सम्मेलन (2023)।
  • UNSC आतंकवाद-रोधी समिति: प्रस्ताव 1373 (2001)।
  • CCIT का प्रस्ताव: भारत, 1996।
  • प्रवासी भारतीय दिवस: 9 जनवरी (1915 में गांधी की वापसी)।
  • ऑपरेशन कैक्टस (मालदीव): 1988।
  • भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन (पहला): जनवरी 2022 (वर्चुअल)।

12. टिप्स एवं ट्रिक्स

उत्तर लेखन
  • IR उत्तर में मानचित्र (हिंद महासागर, मध्य एशिया के गलियारे) सबसे प्रभावी चित्र है — 30 सेकंड में बनाएँ।
  • हर उत्तर में भारत का स्पष्ट रुख़ लिखें (जैसे — BRICS में साझा मुद्रा का विरोध, BRI पर संप्रभुता आपत्ति)।
  • आँकड़े सावधानी से — केवल वही जिनकी पुष्टि हो (धन-प्रेषण, आयात निर्भरता)।
  • निष्कर्ष में भारत के सिद्धांत (रणनीतिक स्वायत्तता, वसुधैव कुटुम्बकम्) जोड़ें।
सामान्य गलतियाँ
  • केवल समझौतों की सूची लिखना, विश्लेषण नहीं — हर समझौते के साथ बताएँ कि उससे भारत का कौन-सा हित सधता है।
  • किसी देश के प्रति भावनात्मक या पक्षपाती भाषा — UPSC संतुलित, कूटनीतिक भाषा की अपेक्षा करता है।
  • पुराने आँकड़े — IR में तथ्य तेज़ी से बदलते हैं, इसलिए परीक्षा से पहले समसामयिक घटनाओं को अवश्य दोहराएँ।
याद रखने की तरकीब

भारत के विदेश नीति हित: "सु-अ-प्र-प्र" — सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रवासी, प्रतिष्ठा।

13. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2026 · GS-2 · Q9 · 10 अंक

हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र जागरूकता साझेदारी (IPMDA) किस प्रकार भारत की SAGAR दृष्टि और Quad के उद्देश्यों के बीच सेतु का काम करती है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

IPMDA: Quad के टोक्यो शिखर सम्मेलन (2022) में घोषित पहल, जो वाणिज्यिक उपग्रह (रेडियो-फ़्रीक्वेंसी) आँकड़ों से लगभग वास्तविक समय में समुद्री गतिविधियों — विशेषकर AIS बंद करके चलने वाले "डार्क शिप" — की जानकारी साझेदार देशों को देती है। भारत में इसका केंद्र IFC-IOR, गुरुग्राम है; प्रशांत और दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय केंद्र भी जुड़े।

SAGAR से संबंध: SAGAR (2015) का लक्ष्य — "क्षेत्र में सबके लिए सुरक्षा और विकास"; भारत "प्रथम प्रतिक्रियादाता" और "सुरक्षा प्रदाता"। IPMDA छोटे द्वीपीय देशों (मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स) को अवैध मत्स्यन (IUU), तस्करी, आपदा और समुद्री प्रदूषण की निगरानी में मदद करती है — यही SAGAR का "क्षमता निर्माण" पक्ष।

Quad से संबंध: Quad "स्वतंत्र, खुले, समावेशी हिंद-प्रशांत" के लिए "सार्वजनिक वस्तुएँ" देना चाहता है, सैन्य गठबंधन की छवि से बचते हुए; IPMDA इसका गैर-सैन्य, सहयोगी रूप है।

सेतु: भारत की क्षेत्रीय दृष्टि (SAGAR → MAHASAGAR 2025) और Quad की तकनीकी क्षमता का संगम; चीन के बढ़ते समुद्री दबाव के बीच नियम-आधारित व्यवस्था।

चुनौतियाँ: छोटे देशों की डेटा-विश्लेषण क्षमता, संप्रभुता की संवेदनशीलता, "चीन-विरोधी" धारणा।

Q2UPSC 2026 · GS-2 · Q10 · 10 अंक

क्या विस्तारित BRICS पश्चिम-प्रधान संस्थाओं का प्रतिसंतुलन और ग्लोबल साउथ की आवाज़ बन सकता है? भारत की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

संभावना: (1) विस्तार (2024-25 — मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, इंडोनेशिया; भागीदार देश) के बाद विश्व जनसंख्या का लगभग आधा और GDP (PPP) का बड़ा भाग; (2) NDB और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) — विश्व बैंक-IMF के विकल्प; (3) स्थानीय मुद्रा में व्यापार; (4) IMF कोटा और UN सुधार की संयुक्त माँग।

सीमाएँ: (1) सदस्यों में गहरे मतभेद — भारत-चीन सीमा विवाद, ईरान-UAE-सऊदी समीकरण; (2) चीन का प्रभुत्व, BRICS को "पश्चिम-विरोधी" मंच बनाने की आशंका; (3) संस्थागत ढाँचा कमज़ोर, कोई सचिवालय नहीं; (4) NDB का सीमित आकार; (5) साझा मुद्रा पर असहमति।

भारत की भूमिका: "पश्चिम-विरोधी नहीं, गैर-पश्चिमी" दृष्टि; डी-डॉलरीकरण या साझा मुद्रा का विरोध पर स्थानीय मुद्रा व्यापार का समर्थन; आतंकवाद-रोधी सहयोग; DPI और विकास साझेदारी; 2026 में अध्यक्षता — सुधार-उन्मुख बहुपक्षवाद।

निष्कर्ष: BRICS "प्रतिसंतुलन" से अधिक "विकल्प और सुधार का दबाव" बन सकता है — और भारत उसे संतुलित, समावेशी दिशा देने वाली शक्ति है।

Q3UPSC 2026 · GS-2 · Q19 · 15 अंक

"प्रवासी भारतीय भारत और विश्व के बीच एक जीवंत सेतु हैं।" विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: लगभग 3.5 करोड़ NRI और भारतवंशियों के साथ भारत का प्रवासी समुदाय विश्व के सबसे बड़े समुदायों में से है — गिरमिटिया वंशजों (मॉरीशस, फ़िजी, कैरेबियन) से खाड़ी के श्रमिकों और सिलिकॉन वैली के पेशेवरों तक।

सेतु के आयाम: (1) आर्थिक: विश्व में सर्वाधिक धन-प्रेषण (2024-25 में लगभग $135 अरब), निवेश, स्टार्टअप, ज्ञान-अंतरण ("brain gain"); (2) राजनीतिक: मेज़बान देशों में भारतवंशी नेता, नीति पर सकारात्मक प्रभाव — भारत-अमेरिका परमाणु समझौते (2008) के समर्थन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय; (3) सांस्कृतिक-सॉफ़्ट पावर: योग, आयुर्वेद, भारतीय सिनेमा, भोजन, त्योहार; (4) तकनीकी: IT और विज्ञान में नेतृत्व; (5) संकट में साझेदार: आपदाओं और कोविड में सहायता।

सरकार की पहलें: प्रवासी भारतीय दिवस (2003), OCI (2005), प्रवासी भारतीय सम्मान, eMigrate, "भारत को जानो" कार्यक्रम, निकासी अभियान (वंदे भारत, गंगा, कावेरी, अजय)।

चुनौतियाँ: (1) खाड़ी में श्रमिकों का शोषण, कफ़ाला; (2) पश्चिम में आव्रजन प्रतिबंध (2025 में H-1B शुल्क वृद्धि), नस्लीय घटनाएँ; (3) कुछ अलगाववादी तत्व — कनाडा के साथ तनाव; (4) प्रतिभा पलायन; (5) दोहरी नागरिकता की माँग।

आगे की राह: प्रवासन और गतिशीलता समझौते (जर्मनी, जापान, इज़राइल), प्रवासी श्रमिकों के लिए बीमा और कल्याण कोष (ICWF), कौशल प्रमाणन, प्रवासियों का "ज्ञान नेटवर्क" (VAJRA), प्रवासी बॉन्ड।

निष्कर्ष: प्रवासी भारतीय "भारत के अनौपचारिक राजदूत" हैं — उनकी भलाई ही इस सेतु की मज़बूती है।

Q4UPSC 2026 · GS-2 · Q20 · 15 अंक

चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) ने दक्षिण एशिया को महाशक्ति प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बना दिया है। भारत के लिए निहितार्थों और उसकी प्रतिक्रिया का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: 2013 में आरंभ BRI अवसंरचना ऋण और निवेश के माध्यम से चीन को एशिया, अफ़्रीका और यूरोप से जोड़ने की परियोजना है। दक्षिण एशिया में भूटान और भारत को छोड़ लगभग सभी देश इससे जुड़े हैं।

दक्षिण एशिया में स्वरूप: (1) पाकिस्तान — CPEC, ग्वादर बंदरगाह; पाक-अधिकृत कश्मीर से गुज़रने के कारण भारत की संप्रभुता पर आपत्ति; (2) श्रीलंका — हंबनटोटा (ऋण न चुका पाने पर 2017 में 99 वर्ष का पट्टा), कोलंबो पोर्ट सिटी; (3) नेपाल — BRI सहयोग रूपरेखा (2024), ट्रांस-हिमालयी रेल प्रस्ताव; (4) बांग्लादेश — पद्मा रेल लिंक, बंदरगाह; (5) मालदीव — सिनामाले सेतु, चीन के साथ FTA।

भारत के लिए निहितार्थ: (1) रणनीतिक घेराबंदी की आशंका ("String of Pearls"), दोहरे उपयोग वाले बंदरगाह; (2) पड़ोसियों पर "ऋण-जाल" और चीनी राजनीतिक प्रभाव; (3) भारत के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा; (4) चीनी "शोध" जहाज़ों से समुद्री निगरानी की चिंता; (5) पर अवसंरचना की वास्तविक माँग, जिसे भारत अकेले पूरा नहीं कर सकता।

भारत की प्रतिक्रिया: (1) BRI फ़ोरम का बहिष्कार और "संप्रभुता, पारदर्शिता, ऋण-स्थिरता" के सिद्धांत; (2) "पड़ोस पहले" — श्रीलंका को 2022 में लगभग $4 अरब सहायता, मालदीव में ग्रेटर माले परियोजना, नेपाल-बांग्लादेश से ऊर्जा व्यापार; (3) वैकल्पिक संपर्क — चाबहार, INSTC, IMEC, BBIN; (4) साझेदारों के साथ — जापान (AAGC), Quad, PGII; (5) विकास साझेदारी — अनुदान और रियायती ऋण (LoC)।

चुनौतियाँ: भारत की परियोजनाओं में देरी, संसाधनों की सीमा, पड़ोसी देशों की आंतरिक राजनीति में "भारत-विरोधी" भावनाएँ।

निष्कर्ष: भारत को "प्रतिस्पर्धा" से अधिक "भरोसेमंद विकल्प" बनना होगा — समयबद्ध, पारदर्शी और माँग-आधारित परियोजनाओं से।

Q5UPSC 2025 · GS-2 · Q9 · 10 अंक

भारत-अफ़्रीका डिजिटल साझेदारी की संभावनाओं और चुनौतियों की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

पृष्ठभूमि: भारत-अफ़्रीका संबंध उपनिवेश-विरोधी एकजुटता पर आधारित; भारत-अफ़्रीका फ़ोरम शिखर सम्मेलन (2008, 2011, 2015 — सभी 54 देश); भारत की G20 अध्यक्षता (2023) में अफ़्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता।

डिजिटल साझेदारी: (1) पैन-अफ़्रीकी ई-नेटवर्क (2009) और उसका उत्तराधिकारी ई-विद्याभारती व ई-आरोग्यभारती (2019) — टेली-शिक्षा और टेली-मेडिसिन; (2) DPI का निर्यात — MOSIP (IIIT बेंगलुरु का ओपन-सोर्स पहचान मंच) को कई अफ़्रीकी देशों ने अपनाया, UPI जैसी त्वरित भुगतान प्रणाली के लिए NPCI इंटरनेशनल के समझौते (नामीबिया आदि); (3) ITEC के तहत क्षमता निर्माण; (4) फ़िनटेक, एग्रीटेक, एडटेक स्टार्टअप साझेदारी।

संभावनाएँ: युवा जनसंख्या, मोबाइल-मनी का अनुभव (केन्या का M-Pesa), "किफ़ायती, ओपन-सोर्स" भारतीय मॉडल चीन के "डिजिटल सिल्क रोड" का विकल्प।

चुनौतियाँ: डिजिटल अवसंरचना और बिजली की कमी, डेटा संरक्षण क़ानूनों में भिन्नता, साइबर सुरक्षा, भारत की सीमित वित्तीय क्षमता, चीन की मज़बूत उपस्थिति (Huawei, केबल)।

निष्कर्ष: "साझा विकास" और "ज्ञान साझेदारी" का भारतीय मॉडल अफ़्रीका को डिजिटल संप्रभुता के साथ विकास का अवसर दे सकता है।

Q6UPSC 2025 · GS-2 · Q10 · 10 अंक

वैश्वीकरण के क्षय और संप्रभु राष्ट्रवाद के उदय के भारत के लिए क्या निहितार्थ हैं? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

प्रवृत्ति: 2008 के वित्तीय संकट के बाद व्यापार का धीमा विस्तार, ब्रेक्ज़िट, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, कोविड में आपूर्ति शृंखला का टूटना, रूस पर प्रतिबंध, 2025 में अमेरिका के ऊँचे शुल्क, WTO के अपीलीय निकाय की निष्क्रियता; "आर्थिक सुरक्षा" के नाम पर औद्योगिक नीतियाँ (अमेरिका का CHIPS अधिनियम)।

भारत के लिए चुनौतियाँ: (1) निर्यात बाज़ारों में संरक्षणवाद और शुल्क (भारत पर 2025 में 50% तक अमेरिकी शुल्क); (2) सेवा निर्यात पर आव्रजन प्रतिबंध; (3) कार्बन सीमा कर (यूरोप का CBAM); (4) तकनीक हस्तांतरण पर रोक; (5) बहुपक्षीय व्यापार नियमों का कमज़ोर होना।

अवसर: (1) "China+1" से विनिर्माण निवेश; (2) भरोसेमंद साझेदार के रूप में आपूर्ति शृंखला समझौते; (3) द्विपक्षीय FTA — UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, ब्रिटेन; (4) आत्मनिर्भर भारत और PLI से घरेलू क्षमता।

संतुलित रणनीति: "आत्मनिर्भरता" को "अलगाव" नहीं, बल्कि वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में प्रतिस्पर्धी भागीदारी बनाना; WTO सुधार का समर्थन; ग्लोबल साउथ के साथ समन्वय।

निष्कर्ष: खंडित होते विश्व में भारत की सफलता "रणनीतिक स्वायत्तता + आर्थिक खुलापन" के संतुलन पर निर्भर है।

Q7UPSC 2025 · GS-2 · Q19 · 15 अंक

ऊर्जा सुरक्षा भारत की विदेश नीति, विशेषकर पश्चिम एशिया के प्रति उसकी नीति, को किस प्रकार आकार देती है? (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और कच्चे तेल की 85% से अधिक आवश्यकता आयात से पूरी करता है; LPG और LNG में भी बड़ी आयात निर्भरता। इसलिए ऊर्जा सुरक्षा — उपलब्धता, वहनीयता, विश्वसनीयता — विदेश नीति का केंद्रीय तत्व है।

पश्चिम एशिया नीति पर प्रभाव: (1) संतुलन की कूटनीति: सऊदी अरब, UAE, ईरान, इज़राइल — सभी से संबंध; अरब-इज़राइल संघर्ष में संतुलित रुख़; (2) "Think West" और रणनीतिक साझेदारियाँ: UAE (CEPA 2022, रुपया-दिरहम व्यापार), सऊदी अरब (रणनीतिक साझेदारी परिषद), क़तर (दीर्घकालिक LNG समझौता); (3) ऊर्जा से आगे: खाड़ी के सॉवरेन फ़ंड का भारत में निवेश, रिफ़ाइनरी और रणनीतिक भंडार में भागीदारी (ADNOC); (4) संपर्क: IMEC (2023), I2U2, चाबहार (ईरान); (5) समुद्री सुरक्षा: लाल सागर संकट में भारतीय नौसेना की तैनाती (ऑपरेशन संकल्प), होर्मुज़ की चिंता; (6) प्रवासी: खाड़ी में लगभग 90 लाख भारतीय — संकट में निकासी की योजना।

विविधीकरण: 2022 के बाद रूस से रियायती तेल का बड़ा हिस्सा — पश्चिमी दबाव के बीच "राष्ट्रीय हित" का तर्क; अमेरिका, गयाना, अफ़्रीका से आपूर्ति; रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार।

दीर्घकालिक बदलाव: हरित हाइड्रोजन मिशन, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा से निर्भरता कम करना; खाड़ी देशों के साथ हरित ऊर्जा साझेदारी।

चुनौतियाँ: क्षेत्रीय संघर्ष (इज़राइल-ईरान 2025), तेल की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी प्रतिबंध (ईरान, रूस), समुद्री मार्गों की असुरक्षा।

निष्कर्ष: ऊर्जा ने भारत की पश्चिम एशिया नीति को "खरीदार-विक्रेता" से "बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी" में बदला है — रणनीतिक स्वायत्तता इसका आधार है।

Q8UPSC 2025 · GS-2 · Q20 · 15 अंक

संयुक्त राष्ट्र सुधार पूर्व-पश्चिम विभाजन और अमेरिका बनाम रूस-चीन प्रतिद्वंद्विता के कारण रुका हुआ है। भारत की आकांक्षाओं के संदर्भ में विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: 1945 की शक्ति-संरचना पर आधारित UNSC आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करती — अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका का कोई स्थायी सदस्य नहीं, भारत जैसी बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बाहर।

सुधार के प्रस्ताव: G4 (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान — परस्पर समर्थन), L.69 (विकासशील देश), अफ़्रीकी "एज़ुल्विनी सहमति", "Uniting for Consensus" (इटली, पाकिस्तान, अर्जेंटीना आदि — नई स्थायी सीटों का विरोध); 2009 से IGN वार्ताएँ बिना वार्ता-पाठ के; 2024 का "भविष्य के लिए समझौता" (Pact for the Future) — सुधार की प्रतिबद्धता, पर ठोस रूपरेखा नहीं।

रुकावट के कारण: (1) P5 का वीटो — चार्टर संशोधन (अनुच्छेद 108) में सभी P5 की सहमति; (2) महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता: अमेरिका बनाम रूस-चीन — यूक्रेन, गाज़ा, सीरिया पर वीटो से परिषद का पक्षाघात; चीन भारत और जापान की स्थायी सदस्यता का अप्रत्यक्ष विरोध करता है; (3) क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता: पाकिस्तान (भारत), इटली (जर्मनी), अर्जेंटीना-मेक्सिको (ब्राज़ील); (4) वीटो के विस्तार पर असहमति; (5) पश्चिम और ग्लोबल साउथ के बीच अविश्वास।

भारत का दावा: सबसे बड़ी जनसंख्या, बड़ी अर्थव्यवस्था, शांति अभियानों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में, 8 बार अस्थायी सदस्य, G20 में ग्लोबल साउथ की आवाज़।

भारत की रणनीति: G4 और L.69 के माध्यम से, अफ़्रीकी माँगों का समर्थन, "सुधारित बहुपक्षवाद" (reformed multilateralism), समानांतर मंचों (G20, BRICS, Quad, ISA) में नेतृत्व।

निष्कर्ष: UN की प्रासंगिकता उसके सुधार पर निर्भर है — "21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान 20वीं सदी की संस्थाओं से नहीं हो सकता।"

Q9UPSC 2024 · GS-2 · Q9 · 10 अंक

पश्चिमी देश भारत को चीन के विकल्प के रूप में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अवसरों और सीमाओं की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

कारण: कोविड में चीन पर अत्यधिक निर्भरता का संकट, अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा, "de-risking" और "friend-shoring"।

अवसर: (1) इलेक्ट्रॉनिक्स — भारत में स्मार्टफ़ोन उत्पादन और निर्यात में तीव्र वृद्धि; (2) सेमीकंडक्टर — माइक्रोन (साणंद), टाटा (धोलेरा) संयंत्र; (3) फ़ार्मा (API), रक्षा, हरित ऊर्जा उपकरण; (4) समझौते — SCRI (2021), IPEF आपूर्ति शृंखला समझौता, खनिज सुरक्षा साझेदारी, iCET/TRUST; (5) PLI योजना; (6) रोज़गार और निर्यात।

सीमाएँ: (1) लॉजिस्टिक लागत, भूमि-श्रम सुधारों की धीमी गति; (2) कच्चे माल और घटकों के लिए अब भी चीन पर निर्भरता; (3) कुशल श्रम और अनुसंधान की कमी; (4) व्यापार नीति में अनिश्चितता (शुल्क); (5) पश्चिम की अपनी संरक्षणवादी नीतियाँ — 2025 के अमेरिकी शुल्क; (6) वियतनाम, मेक्सिको से प्रतिस्पर्धा।

आगे की राह: घटक पारिस्थितिकी तंत्र, बंदरगाह-लॉजिस्टिक सुधार (गति शक्ति), FTA, अनुसंधान में निवेश, स्थिर कर-नीति।

निष्कर्ष: भारत "विकल्प" बने, यह पश्चिम की इच्छा से नहीं, भारत की प्रतिस्पर्धा-क्षमता से तय होगा।

Q10UPSC 2024 · GS-2 · Q10 · 10 अंक

भारत और मध्य एशियाई गणराज्यों के संबंधों की संभावनाओं और बाधाओं का परीक्षण कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

महत्व: कज़ाख़स्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान — भारत का "विस्तारित पड़ोस"; ऊर्जा (यूरेनियम — कज़ाख़स्तान, गैस — तुर्कमेनिस्तान), सुरक्षा (अफ़ग़ानिस्तान, कट्टरपंथ), संपर्क, सभ्यतागत संबंध (रेशम मार्ग, सूफ़ी परंपरा)।

पहलें: "Connect Central Asia" नीति (2012), भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन (जनवरी 2022), भारत-मध्य एशिया संवाद, SCO सदस्यता (2017), अश्गाबात समझौता (2018), विकास ऋण, ITEC प्रशिक्षण।

संपर्क: चाबहार बंदरगाह (ईरान — 2024 का 10 वर्षीय संचालन समझौता), INSTC, TAPI गैस पाइपलाइन (प्रस्तावित)।

बाधाएँ: (1) प्रत्यक्ष भूमि संपर्क नहीं — पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से मार्ग अवरुद्ध; (2) व्यापार बहुत कम; (3) चीन (BRI) और रूस का प्रभाव; (4) ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से चाबहार की अनिश्चितता; (5) अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता।

आगे: डिजिटल और शिक्षा सहयोग, दुर्लभ खनिज साझेदारी, हवाई गलियारे, पर्यटन, INSTC का संचालन।

निष्कर्ष: भूगोल की बाधा को कूटनीति, संपर्क और "सॉफ़्ट पावर" से पार करना ही इस संबंध की कुंजी है।

Q11UPSC 2024 · GS-2 · Q19 · 15 अंक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी समिति (CTC) की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए। आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहयोग में भारत की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: 9/11 के बाद UNSC प्रस्ताव 1373 (2001, अध्याय VII के अंतर्गत बाध्यकारी) से CTC बनी, जो सदस्य देशों द्वारा आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक, आतंकियों को शरण न देने, सीमा नियंत्रण और सूचना साझेदारी की निगरानी करती है; 2004 से कार्यकारी निदेशालय (CTED)।

उपलब्धियाँ: (1) देशों में आतंकवाद-रोधी क़ानूनों और वित्तीय निगरानी (FATF के साथ) का प्रसार; (2) देश-आधारित मूल्यांकन और तकनीकी सहायता; (3) विदेशी आतंकी लड़ाकों (प्रस्ताव 2178, 2014) और नई तकनीकों पर मानक; (4) दिल्ली घोषणा (2022) — ड्रोन, सोशल मीडिया, क्रिप्टो के दुरुपयोग पर।

सीमाएँ: (1) आतंकवाद की सार्वभौमिक परिभाषा नहीं — भारत का CCIT (1996) लंबित; (2) राजनीतिकरण: 1267 प्रतिबंध समिति में चीन की "तकनीकी रोक" से पाकिस्तान-आधारित आतंकियों की सूचीकरण में बाधा (मसूद अज़हर 2019 में वर्षों बाद सूचीबद्ध); (3) प्रवर्तन तंत्र नहीं — रिपोर्टिंग पर आधारित; (4) "अच्छा आतंकवाद बनाम बुरा आतंकवाद" की दोहरी नीति; (5) राज्य-प्रायोजित आतंकवाद पर मौन; (6) पहलगाम हमले (2025) के बाद UNSC वक्तव्य में संगठन का नाम हटवाया जाना — सहमति की सीमाएँ।

भारत की भूमिका: (1) दशकों से सीमापार आतंकवाद का शिकार, वैश्विक चेतना का अग्रदूत; (2) CTC की अध्यक्षता (2022) — मुंबई में 26/11 स्थल पर बैठक; (3) "No Money for Terror" सम्मेलन (2018 से, भारत ने 2022 में मेज़बानी); (4) FATF में पाकिस्तान की "ग्रे लिस्टिंग" (2018-22) के लिए कूटनीति; (5) द्विपक्षीय आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह; (6) अमेरिका द्वारा TRF को विदेशी आतंकी संगठन घोषित करना (2025) — भारत की कूटनीति का परिणाम।

आगे की राह: CCIT को अपनाना, 1267 समिति में "तकनीकी रोक" पर समय-सीमा, आतंकी वित्तपोषण में नई तकनीकों पर वैश्विक मानक, राज्य-प्रायोजन के लिए जवाबदेही।

निष्कर्ष: आतंकवाद पर "शून्य सहिष्णुता" तभी सार्थक है जब वह चयनात्मक न हो — भारत यही संदेश वैश्विक मंचों पर दोहराता है।

Q12UPSC 2024 · GS-2 · Q20 · 15 अंक

भारत के लिए मालदीव के भू-राजनीतिक और भू-रणनीतिक महत्व का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: मालदीव लगभग 1,192 प्रवाल द्वीपों (26 एटॉल) का देश है, जो भारत के लक्षद्वीप से कुछ सौ किमी दक्षिण-पश्चिम में, हिंद महासागर के प्रमुख पूर्व-पश्चिम समुद्री मार्गों के पास स्थित है। [मानचित्र: भारत, लक्षद्वीप, मालदीव, 8° और 1.5° चैनल]

भू-रणनीतिक महत्व: (1) समुद्री मार्ग: होर्मुज़ से मलक्का जाने वाला ऊर्जा और व्यापार यातायात इसके पास के चैनलों से — भारत की ऊर्जा सुरक्षा; (2) सुरक्षा: समुद्री डकैती, तस्करी, आतंकवाद, अवैध मत्स्यन की निगरानी; भारत का "पहला प्रतिक्रियादाता" होना — ऑपरेशन कैक्टस (1988, तख़्तापलट विफल), 2004 सुनामी, "नीर" (2014 जल संकट), कोविड में टीके; (3) चीन की उपस्थिति: BRI, सिनामाले सेतु, FTA — "String of Pearls" की चिंता; (4) भारत की समुद्री दृष्टि: SAGAR/MAHASAGAR का केंद्रीय भागीदार; कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन।

भू-राजनीतिक आयाम: (1) "India Out" अभियान और 2023 के बाद सरकार का चीन-झुकाव — भारतीय सैन्य कर्मियों की जगह नागरिक तकनीकी दल (2024); (2) फिर संबंधों में सुधार — मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था और आर्थिक सहायता (2024), 2025 में भारत के प्रधानमंत्री की यात्रा, ऋण-रेखा और FTA वार्ता; (3) भारत पर्यटन, खाद्य, दवा और शिक्षा-स्वास्थ्य में प्रमुख साझेदार; (4) जलवायु परिवर्तन से अस्तित्व का संकट — भारत का IRIS और आपदा सहयोग।

भारत की परियोजनाएँ: ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना, हनीमाधू हवाई अड्डा, उथुरु थिला फाल्हू बंदरगाह, उच्च-प्रभाव सामुदायिक परियोजनाएँ।

चुनौतियाँ: आंतरिक राजनीति में भारत का मुद्दा बनना, ऋण संकट, कट्टरपंथ, चीन से प्रतिस्पर्धा।

निष्कर्ष: मालदीव के साथ संबंध "बड़े भाई" नहीं, "भरोसेमंद पड़ोसी" की दृष्टि से — संवेदनशीलता, विकास साझेदारी और जन-संपर्क पर आधारित होने चाहिए; हिंद महासागर में भारत की विश्वसनीयता की परीक्षा यहीं होती है।

Q13अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

गलवान (2020) के बाद भारत-चीन संबंधों के विकास का परीक्षण कीजिए। "प्रतिस्पर्धा के साथ सह-अस्तित्व" की रणनीति कितनी व्यावहारिक है? (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: जून 2020 की गलवान झड़प 1975 के बाद LAC पर पहली घातक घटना थी; इसने 1988 (राजीव गांधी यात्रा) के बाद के "सीमा विवाद को अलग रखकर संबंध बढ़ाने" के मॉडल को झटका दिया।

2020 के बाद का क्रम: (1) सैन्य गतिरोध और कई दौर की कोर कमांडर वार्ताओं से चरणबद्ध पीछे हटना; अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक में गश्त व्यवस्था पर सहमति; (2) आर्थिक कदम — चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध, पड़ोसी देशों से FDI पर अनुमोदन की शर्त (प्रेस नोट 3, 2020), दूरसंचार में "विश्वसनीय स्रोत"; (3) 2024-25 में संवाद की बहाली — कज़ान (2024) में शीर्ष नेताओं की भेंट, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानों की बहाली की दिशा में क़दम, SCO शिखर सम्मेलन (2025) में भारत की भागीदारी।

प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र: सीमा (LAC पर बुनियादी ढाँचा), दक्षिण एशिया और हिंद महासागर (BRI), ब्रह्मपुत्र पर बाँध, पाकिस्तान से चीन की निकटता, UN में "तकनीकी रोक", भारी व्यापार घाटा, NSG और UNSC पर विरोध।

सहयोग/सह-अस्तित्व के क्षेत्र: BRICS, SCO, जलवायु वार्ताएँ, WTO में विकासशील देशों के हित; इलेक्ट्रॉनिक्स और फ़ार्मा के कच्चे माल में परस्पर निर्भरता।

व्यावहारिकता: भारत के लिए पूर्ण टकराव न आर्थिक रूप से संभव, न रणनीतिक रूप से वांछनीय; पर "सामान्य संबंध" भी सीमा पर शांति के बिना संभव नहीं — भारत का रुख़: "सीमा पर शांति संबंधों का आधार"।

रणनीति: सीमा अवसंरचना (वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम), सैन्य निवारक क्षमता, आर्थिक "de-risking" (PLI, आपूर्ति शृंखला), Quad और समान विचार वाले साझेदार, साथ ही उच्च-स्तरीय संवाद के चैनल खुले रखना।

निष्कर्ष: भारत-चीन संबंध "प्रतिस्पर्धी सह-अस्तित्व" के दीर्घकालिक दौर में हैं — सफलता संतुलन, धैर्य और अपनी क्षमता-वृद्धि पर निर्भर है।

Q14अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

अमेरिका और रूस के साथ संबंधों में संतुलन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की परीक्षा है। चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

अमेरिका के साथ: व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी; रक्षा (LEMOA, COMCASA, BECA आधारभूत समझौते), Quad, तकनीक (iCET/TRUST), सेमीकंडक्टर, प्रवासी; पर 2025 में ऊँचे शुल्क (रूसी तेल ख़रीद पर अतिरिक्त शुल्क सहित) और आव्रजन नीतियों से तनाव।

रूस के साथ: "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी"; रक्षा आपूर्ति (S-400, सह-उत्पादन — ब्रह्मोस), परमाणु ऊर्जा (कुडनकुलम), 2022 के बाद रियायती कच्चा तेल; पर रूस-चीन की निकटता भारत की चिंता।

संतुलन के उपकरण: (1) यूक्रेन युद्ध पर "संवाद और कूटनीति" का रुख़, UN में मतदान से परहेज़, "यह युद्ध का युग नहीं"; (2) CAATSA प्रतिबंधों के जोखिम के बावजूद S-400; (3) रक्षा आयात का विविधीकरण और स्वदेशीकरण; (4) बहुपक्षीय मंचों में दोनों के साथ संबंध — Quad और BRICS/SCO।

चुनौतियाँ: द्वितीयक प्रतिबंध, पश्चिमी दबाव, रक्षा आपूर्ति में देरी, रुपया-रूबल भुगतान।

निष्कर्ष: रणनीतिक स्वायत्तता "तटस्थता" नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित के आधार पर मुद्दा-विशेष साझेदारियाँ (issue-based alignment) है।

Q15अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

SAARC की निष्क्रियता के बीच BIMSTEC क्षेत्रीय सहयोग का बेहतर मंच क्यों माना जा रहा है? इसकी संभावनाओं और सीमाओं की चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: SAARC (1985) दक्षिण एशिया का प्रमुख मंच था, पर 2014 के बाद से कोई शिखर सम्मेलन नहीं हुआ; उरी हमले (2016) के बाद इस्लामाबाद सम्मेलन का बहिष्कार हुआ। भारत-पाकिस्तान तनाव ने इसे लगभग पंगु बना दिया। ऐसे में BIMSTEC (1997) — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड — एक विकल्प के रूप में उभरा।

BIMSTEC बेहतर क्यों: (1) पाकिस्तान सदस्य नहीं — द्विपक्षीय विवादों से कार्यसूची बाधित नहीं; (2) सेतु क्षेत्र: दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है — भारत की "पड़ोस पहले" और "Act East" नीतियों का संगम; (3) बंगाल की खाड़ी का साझा समुद्री क्षेत्र — विश्व की लगभग एक-पाँचवीं जनसंख्या; (4) संस्थागत प्रगति: चार्टर (2022 में अपनाया, 2024 से प्रभावी), क्षेत्रों का युक्तिकरण, ढाका में सचिवालय; (5) क्षेत्रीय परियोजनाएँ: कालादान बहु-मॉडल परियोजना, भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, तटीय नौवहन, ऊर्जा ग्रिड।

सीमाएँ: (1) FTA (2004 से वार्ता) अब तक अधूरा; (2) अंतर-क्षेत्रीय व्यापार बहुत कम; (3) म्यांमार की आंतरिक अस्थिरता और रोहिंग्या संकट; (4) सचिवालय छोटा और कम संसाधन वाला; (5) बांग्लादेश और नेपाल में राजनीतिक परिवर्तनों का प्रभाव; (6) चीन का बढ़ता प्रभाव; (7) भारत के "प्रभुत्व" की आशंका छोटे देशों में।

आगे की राह: FTA और व्यापार सुगमता समझौते, तटीय नौवहन और मोटर वाहन समझौते, आपदा प्रबंधन और समुद्री सुरक्षा सहयोग, ब्लू इकोनॉमी, शिक्षा-पर्यटन संपर्क, सचिवालय का सशक्तीकरण, भारत द्वारा "असममित रियायतें"।

निष्कर्ष: BIMSTEC SAARC का "विकल्प" से अधिक भारत के लिए "पूर्व की ओर खुलने वाली खिड़की" है — उसकी सफलता परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर है।

14. Quick Revision Summary

एक नज़र में
  • सिद्धांत: रणनीतिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण, पड़ोस पहले, SAGAR → MAHASAGAR।
  • पड़ोस: BRI की प्रतिस्पर्धा; मालदीव, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश में भारत "भरोसेमंद विकल्प"।
  • समूह: Quad (IPMDA), BRICS (विस्तार, 2026 अध्यक्षता), SCO, G20, BIMSTEC।
  • भू-अर्थशास्त्र: आपूर्ति शृंखला, FTA, वैश्वीकरण का क्षय; ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया।
  • प्रवासी: ~3.5 करोड़, सर्वाधिक धन-प्रेषण; जीवंत सेतु।
  • UN: सुधार रुका (वीटो, प्रतिद्वंद्विता); CTC — मानक, पर राजनीतिकरण; CCIT लंबित।
  • मध्य एशिया: चाबहार, INSTC; भूगोल की बाधा।