UPSC Mains · General Studies Paper III · अध्याय 2

सरकारी बजट एवं राजकोषीय नीति

Government Budgeting and Fiscal Policy

बजट की प्रक्रिया और प्रकार, राजकोषीय घाटा, कर सुधार, GST, FRBM, वित्त आयोग और लोक ऋण।

GS-3 24 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

पाठ्यक्रम: "सरकारी बजट" — पर व्यवहार में UPSC इस शीर्षक के अंतर्गत राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति, कराधान (GST), राज्यों का राजकोषीय स्वास्थ्य, डिजिटल मुद्रा और व्यापार नीति तक पूछता है।

वर्षप्रश्न
2026डिजिटल रुपया (CBDC)
2025राज्यों का राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (NITI Aayog); संरक्षणवाद और द्विपक्षीयता — भारत के लिए चुनौतियाँ
2024लगातार ऊँची खाद्य मुद्रास्फीति और RBI की मौद्रिक नीति

2. बजट: संरचना और प्रक्रिया

  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 112 — वार्षिक वित्तीय विवरण; 113 — अनुदान माँगें (केवल लोकसभा में मतदान); 114 — विनियोग विधेयक; 110 — वित्त विधेयक (धन विधेयक); 266 — संचित निधि और लोक लेखा; 267 — आकस्मिकता निधि।
  • सुधार: बजट 1 फ़रवरी से (2017), रेल बजट का विलय (2017), योजना-गैर योजना भेद समाप्त (2017-18), परिणाम बजट, लैंगिक बजट (2005-06 से)।
  • प्राप्तियाँ: राजस्व (कर, गैर-कर) और पूँजीगत (उधार, ऋण वसूली, विनिवेश)। व्यय: राजस्व (वेतन, ब्याज, सब्सिडी) और पूँजीगत (परिसंपत्ति निर्माण)।
  • घाटे: राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्ति; राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्ति + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति); प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।
  • राजकोषीय समेकन: FRBM अधिनियम 2003 (एन. के. सिंह समिति 2017 — ऋण को "मुख्य लक्ष्य"); केंद्र का राजकोषीय घाटा 2020-21 के लगभग 9% से घटकर 2025-26 के बजट अनुमान में 4.4%; आगे से केंद्र सरकार के ऋण-GDP अनुपात को लगभग 50% (±1) तक लाने का लक्ष्य (2030-31 तक)।
कुल व्यय राजस्व प्राप्ति + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति राजकोषीय घाटा (उधार) ब्याज भुगतान प्राथमिक घाटा
राजकोषीय घाटा सरकार की कुल उधारी की आवश्यकता है; उसमें से ब्याज घटाने पर प्राथमिक घाटा बचता है — जो वर्तमान नीतियों का वास्तविक घाटा दिखाता है।

3. कराधान सुधार

  • GST (1 जुलाई 2017, 101वाँ संशोधन): गंतव्य-आधारित उपभोग कर; CGST, SGST, IGST; GST परिषद (अनुच्छेद 279A)। GST 2.0 (22 सितंबर 2025 से): मुख्यतः दो दरें — 5% और 18%, विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर 40%; क्षतिपूर्ति उपकर का अंत; GST अपीलीय अधिकरण (GSTAT) का संचालन।
  • प्रत्यक्ष कर: निगम कर में कटौती (2019 — नई कंपनियों के लिए 15%); नई कर व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय पर प्रभावी रूप से शून्य कर (बजट 2025); आयकर अधिनियम 2025 — 1961 के अधिनियम को सरल भाषा में प्रतिस्थापित, 1 अप्रैल 2026 से।
  • चुनौतियाँ: कर-GDP अनुपात (केंद्र+राज्य) लगभग 17-18% — उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम; अनौपचारिक क्षेत्र; कृषि आय कर-मुक्त; उपकर-अधिभार का बढ़ता हिस्सा।

4. मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति

  • लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (2016): RBI अधिनियम संशोधन — 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC); CPI मुद्रास्फीति लक्ष्य 4% (±2%); लगातार तीन तिमाही बैंड से बाहर रहने पर RBI को सरकार को कारण बताने होते हैं।
  • उपकरण: रेपो दर, स्थायी जमा सुविधा (SDF, 2022), सीमांत स्थायी सुविधा, CRR, SLR, खुले बाज़ार की क्रियाएँ, विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप।
  • खाद्य मुद्रास्फीति की प्रकृति: CPI में खाद्य का भार लगभग 46% (2012 आधार); सब्ज़ियाँ (टमाटर-प्याज़-आलू), दालें, खाद्य तेल — आपूर्ति झटके (लू, अनियमित मानसून, जलवायु परिवर्तन), भंडारण-आपूर्ति शृंखला की कमी, आयात निर्भरता (दालें, तेल)।
  • बहस: क्या RBI को खाद्य-बाहर (core) मुद्रास्फीति लक्षित करनी चाहिए? (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 ने विचार रखा); RBI का तर्क — ऊँची खाद्य मुद्रास्फीति अपेक्षाओं और मज़दूरी के माध्यम से सामान्य मुद्रास्फीति में फैलती है ("second-round effects")। 2025 में खाद्य क़ीमतों में तीव्र गिरावट से समग्र मुद्रास्फीति बहुत नीचे आई और RBI ने नीतिगत दरें घटाईं।
विनियमित कृषि बाज़ार
मंडी, भंडारण और आपूर्ति शृंखला की कमियाँ खाद्य क़ीमतों की अस्थिरता का प्रमुख कारण हैं।

5. डिजिटल रुपया (CBDC)

  • अर्थ: केंद्रीय बैंक द्वारा जारी मुद्रा का डिजिटल रूप — RBI की प्रत्यक्ष देनदारी, नक़दी के समान वैध मुद्रा; वित्त अधिनियम 2022 से RBI अधिनियम की धारा 22 में "डिजिटल रूप" शामिल।
  • पायलट: थोक (e₹-W) — 1 नवंबर 2022; खुदरा (e₹-R) — 1 दिसंबर 2022; बाद में UPI QR से अंतर-संचालन, ऑफ़लाइन भुगतान और "प्रोग्रामेबिलिटी" (उद्देश्य-विशेष धन, जैसे सब्सिडी) के परीक्षण।
  • CBDC बनाम UPI बनाम क्रिप्टो: UPI बैंक जमा का हस्तांतरण है (बैंक की देनदारी); CBDC स्वयं "डिजिटल नक़दी" है (केंद्रीय बैंक की देनदारी); क्रिप्टो किसी की देनदारी नहीं, अस्थिर और विकेंद्रीकृत।

6. राज्यों का राजकोषीय स्वास्थ्य

  • NITI Aayog का राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (जनवरी 2025, पहला संस्करण): 18 प्रमुख राज्य; पाँच उप-सूचकांक — व्यय की गुणवत्ता, राजस्व संग्रहण, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक, ऋण स्थिरता; ओडिशा शीर्ष पर, पंजाब सबसे नीचे; राज्यों को "उपलब्धि प्राप्तकर्ता, अग्रणी, प्रदर्शनकर्ता, आकांक्षी" श्रेणियों में।
  • चिंताएँ: कई राज्यों का ऊँचा ऋण-GSDP अनुपात, पुरानी पेंशन योजना की वापसी, बिना लक्ष्यीकरण की मुफ़्त सुविधाएँ, बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) का घाटा, बजट-बाह्य उधार, राजस्व व्यय में वेतन-पेंशन-ब्याज का बड़ा हिस्सा।

7. व्यापार नीति: संरक्षणवाद और द्विपक्षीयता

  • वैश्विक प्रवृत्ति: WTO के अपीलीय निकाय की निष्क्रियता (2019 से), अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, 2025 में अमेरिका के ऊँचे "पारस्परिक" शुल्क (भारत पर 50% तक), औद्योगिक नीतियाँ और निर्यात नियंत्रण, यूरोप का CBAM।
  • भारत की नीति: RCEP से बाहर (2019); नए FTA — UAE CEPA (2022), ऑस्ट्रेलिया ECTA (2022), EFTA TEPA (2024), ब्रिटेन CETA (2025); विदेश व्यापार नीति 2023 (2030 तक $2 ट्रिलियन निर्यात लक्ष्य); रुपये में व्यापार निपटान।

8. विस्तृत विवेचन: राजकोषीय घाटा, FRBM और सार्वजनिक ऋण की स्थिरता

बजट पर GS-3 के प्रश्न प्रायः "राजकोषीय समेकन" (fiscal consolidation), "पूँजीगत व्यय की गुणवत्ता" और "ऋण-स्थिरता" से जुड़े होते हैं। इन्हें समझने के लिए पहले घाटे के विभिन्न मापों का अंतर स्पष्ट होना चाहिए।

घाटापरिभाषाक्या बताता है
राजस्व घाटाराजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँसरकार अपने चालू ख़र्च (वेतन, ब्याज, सब्सिडी) के लिए भी उधार ले रही है — "उपभोग के लिए उधार"
प्रभावी राजस्व घाटाराजस्व घाटा − पूँजीगत परिसंपत्तियाँ बनाने हेतु दिए गए अनुदानराज्यों को परिसंपत्ति-निर्माण हेतु दिए अनुदान को अलग करने के बाद वास्तविक उपभोग-घाटा
राजकोषीय घाटाकुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + ग़ैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ)सरकार की कुल उधारी आवश्यकता
प्राथमिक घाटाराजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतानपिछले ऋणों के ब्याज को छोड़कर वर्तमान नीतियों से उत्पन्न घाटा
FRBM ढाँचे की यात्रा
  • FRBM अधिनियम, 2003: राजस्व घाटा समाप्त करने और राजकोषीय घाटे को GDP के 3% तक लाने का लक्ष्य; राज्यों ने भी अपने राजकोषीय उत्तरदायित्व क़ानून बनाए।
  • विचलन: 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 की महामारी में "escape clause" का प्रयोग; लक्ष्य बार-बार आगे खिसके।
  • एन.के. सिंह समिति (2017): घाटे के स्थान पर "ऋण" को मुख्य लक्ष्य (anchor) बनाने का सुझाव — केंद्र और राज्यों का संयुक्त सामान्य सरकारी ऋण GDP के लगभग 60% तक (केंद्र 40%, राज्य 20%); स्वतंत्र राजकोषीय परिषद।
  • हाल की दिशा: केंद्र ने राजकोषीय घाटे को 2025-26 तक GDP के 4.5% से नीचे लाने का लक्ष्य रखा था, और उसके बाद ऋण-GDP अनुपात को घटाने को मुख्य मार्गदर्शक बनाने की बात कही गई।

ऋण-स्थिरता का सरल गणित

सार्वजनिक ऋण तब तक टिकाऊ माना जाता है जब तक ऋण-GDP अनुपात बढ़ता न जाए। इसका मूल सूत्र यह है: यदि अर्थव्यवस्था की नाममात्र (nominal) वृद्धि दर ऋण पर औसत ब्याज दर से अधिक है ("g > r"), तो थोड़ा प्राथमिक घाटा होते हुए भी ऋण-अनुपात स्थिर रह सकता है या घट सकता है। भारत के लिए यह स्थिति सामान्यतः अनुकूल रही है, पर ब्याज भुगतान केंद्र की राजस्व प्राप्तियों का बड़ा हिस्सा (लगभग एक-तिहाई के आसपास) खा जाता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसंरचना के लिए "राजकोषीय स्थान" (fiscal space) सीमित होता है।

व्यय की गुणवत्ताक्यों महत्वपूर्ण
पूँजीगत व्ययसड़क, रेल, बंदरगाह आदि पर व्यय का गुणक प्रभाव (multiplier) राजस्व व्यय से अधिक माना जाता है; यह निजी निवेश को भी आकर्षित करता है ("crowding in")। महामारी के बाद केंद्र ने पूँजीगत व्यय में भारी वृद्धि की और राज्यों को पूँजीगत व्यय के लिए 50-वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋण दिए।
सब्सिडीलक्षित सब्सिडी कल्याण के लिए आवश्यक, पर अलक्षित सब्सिडी संसाधनों का अपव्यय; DBT से लक्ष्यीकरण में सुधार।
बजट से बाहर उधारी (off-budget borrowing)सार्वजनिक उपक्रमों या विशेष संस्थाओं के माध्यम से उधार, जो घाटे के आँकड़ों में नहीं दिखती — पारदर्शिता का प्रश्न; CAG ने इस पर टिप्पणी की है।
P1अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

"भारत के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से अधिक महत्वपूर्ण सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता है।" विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: FRBM अधिनियम, 2003 ने राजकोषीय घाटे को 3% तक सीमित करने का लक्ष्य रखा, पर संकटों में यह लक्ष्य बार-बार टला। बहस यह है कि क्या घाटे का "स्तर" अधिक महत्वपूर्ण है या उधार लिए धन का "उपयोग"।

घाटा-लक्ष्य का महत्व: ऊँचा घाटा ब्याज दरें बढ़ाकर निजी निवेश को बाहर कर सकता है (crowding out); ऋण-भार और ब्याज-भुगतान बढ़ाता है; मुद्रास्फीति और रेटिंग पर प्रभाव; भावी पीढ़ियों पर बोझ।

व्यय की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण क्यों:

  • यदि उधार पूँजीगत व्यय (अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य) में लगे, तो वह भविष्य की वृद्धि और कर-राजस्व बढ़ाकर स्वयं की भरपाई कर सकता है; पूँजीगत व्यय का गुणक अधिक।
  • राजस्व घाटा (उपभोग हेतु उधार) अधिक चिंताजनक है, न कि समग्र राजकोषीय घाटा।
  • "g > r" की स्थिति में उत्पादक व्यय ऋण-अनुपात को टिकाऊ रख सकता है।
  • महामारी के बाद बढ़े पूँजीगत व्यय ने निजी निवेश को आकर्षित करने में भूमिका निभाई।
  • मानव पूँजी में निवेश जनसांख्यिकीय लाभांश की शर्त है।

संतुलित दृष्टि: दोनों में से किसी एक को चुनना ग़लत है। N.K. सिंह समिति का ऋण-आधारित ढाँचा, स्वतंत्र राजकोषीय परिषद, परिणाम-आधारित बजट (outcome budget), बजट से बाहर उधारी की पारदर्शिता, अलक्षित सब्सिडी का युक्तिकरण, और कर-आधार का विस्तार — ये मिलकर "मात्रा" और "गुणवत्ता" दोनों का ध्यान रखते हैं।

निष्कर्ष: राजकोषीय अनुशासन साध्य नहीं, साधन है; लक्ष्य टिकाऊ ऋण के साथ उच्च, समावेशी वृद्धि है, जो उत्पादक व्यय से ही संभव है।

P2अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

वस्तु एवं सेवा कर (GST) की उपलब्धियों और उसकी संरचनात्मक चुनौतियों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: 101वें संविधान संशोधन (2016) के बाद 1 जुलाई 2017 से लागू GST ने केंद्र और राज्यों के अनेक अप्रत्यक्ष करों को एक गंतव्य-आधारित कर में समाहित किया। इसे "एक राष्ट्र, एक कर" की दिशा में सबसे बड़ा कर-सुधार माना जाता है।

उपलब्धियाँ:

  • एकीकृत राष्ट्रीय बाज़ार: राज्य-सीमाओं पर चेक-पोस्ट समाप्त; ई-वे बिल से माल-परिवहन तेज़।
  • कर-पर-कर (cascading) में कमी: इनपुट टैक्स क्रेडिट की श्रृंखला।
  • औपचारिकीकरण: करदाता-आधार का विस्तार; डिजिटल अनुपालन (ई-इनवॉइस)।
  • राजस्व-वृद्धि: मासिक संग्रह में निरंतर वृद्धि।
  • सहकारी संघवाद: GST परिषद में केंद्र और राज्यों का साझा निर्णय।
  • दरों का युक्तिकरण: सितंबर 2025 से लागू सुधारों में अधिकांश वस्तुओं के लिए मुख्यतः दो दरों (5% और 18%) की ओर बढ़ना, कुछ विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर ऊँची दर।

संरचनात्मक चुनौतियाँ:

  • बाहर की वस्तुएँ: पेट्रोलियम उत्पाद, शराब और बिजली GST से बाहर, जिससे इनपुट क्रेडिट की श्रृंखला टूटती है।
  • राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता: अपने कर-दर तय करने की शक्ति का बड़ा हिस्सा छिना; पाँच वर्ष की क्षतिपूर्ति (2022 में समाप्त) के बाद राजस्व-अनिश्चितता।
  • अनुपालन-बोझ: MSME के लिए जटिल रिटर्न, बार-बार परिवर्तन; उलटा शुल्क ढाँचा (inverted duty structure)।
  • कर-चोरी: नक़ली चालान (fake invoicing) से इनपुट क्रेडिट की धोखाधड़ी।
  • विवाद-निपटान: GST अपीलीय अधिकरण की स्थापना में लंबी देरी।

आगे का रास्ता: पेट्रोलियम और बिजली को चरणबद्ध रूप से शामिल करना; राज्यों के लिए राजस्व-स्थिरता तंत्र; रिटर्न का और सरलीकरण; डेटा-विश्लेषण से नक़ली चालानों पर अंकुश; अपीलीय अधिकरण का पूर्ण संचालन।

निष्कर्ष: GST ने "एकीकृत बाज़ार" का सपना साकार किया है; इसका अगला चरण "सरल, स्थिर और संघीय रूप से संतुलित" कर-प्रणाली होना चाहिए।

9. Master Summary Table

विषयमुख्य बिंदुतथ्य
बजटअनुच्छेद 112-1141 फ़रवरी (2017 से)
राजकोषीय नीतिFRBM, ऋण लक्ष्यFD 2025-26 BE 4.4%; ऋण ~50% (2031)
GSTगंतव्य-आधारित2017; GST 2.0 — 22.09.2025
प्रत्यक्ष करसरलीकरणआयकर अधिनियम 2025 (1.4.2026 से)
मौद्रिक नीतिCPI 4% ±2MPC 2016
CBDCडिजिटल नक़दीe₹-W नवंबर 2022; e₹-R दिसंबर 2022
राज्य वित्तराजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांकNITI, जनवरी 2025; ओडिशा शीर्ष
व्यापारसंरक्षणवाद → द्विपक्षीय FTAUAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, UK

10. Mind Map

सरकारी बजट एवं मैक्रो नीति
बजट
  • प्राप्तियाँ, व्यय
  • घाटे
कराधान
  • GST 2.0
  • आयकर अधिनियम 2025
मौद्रिक नीति
  • MPC, रेपो
  • खाद्य मुद्रास्फीति
डिजिटल मुद्रा
  • e₹
  • UPI से अंतर
संघीय वित्त
  • राज्य ऋण
  • FHI
व्यापार
  • शुल्क युद्ध
  • FTA

11. महत्वपूर्ण One-liners

  • वार्षिक वित्तीय विवरण: अनुच्छेद 112।
  • FRBM अधिनियम: 2003; समीक्षा समिति: एन. के. सिंह (2017)।
  • MPC और मुद्रास्फीति लक्ष्य: 2016; CPI 4% ±2%।
  • GST लागू: 1 जुलाई 2017; GST 2.0: 22 सितंबर 2025।
  • CBDC खुदरा पायलट: 1 दिसंबर 2022।
  • राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक: NITI Aayog, जनवरी 2025।
  • लैंगिक बजट: 2005-06 से।
  • स्थायी जमा सुविधा (SDF): अप्रैल 2022।

12. टिप्स एवं ट्रिक्स

उत्तर लेखन
  • मुद्रास्फीति प्रश्नों में "माँग-जनित बनाम लागत/आपूर्ति-जनित" अंतर करें और बताएँ कि मौद्रिक नीति आपूर्ति झटकों पर कम प्रभावी है।
  • CBDC जैसे तकनीकी विषय में तालिका (CBDC बनाम UPI बनाम क्रिप्टो) अंक बढ़ाती है।
  • राज्य वित्त पर प्रश्न में "मुफ़्त सुविधाएँ बनाम कल्याण" के बीच संतुलित भाषा रखें।
याद रखने की तरकीब

राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक के उप-सूचकांक: "व्य-रा-वि-ऋ-स्थि" — व्यय गुणवत्ता, राजस्व संग्रहण, विवेक, ऋण सूचकांक, ऋण स्थिरता।

13. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2026 · GS-3 · Q1 · 10 अंक

डिजिटल रुपया (CBDC) क्या है? यह UPI और क्रिप्टो-परिसंपत्तियों से किस प्रकार भिन्न है? इसके लाभ और जोखिम बताइए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

अर्थ: CBDC (e₹) RBI द्वारा जारी मुद्रा का डिजिटल रूप है — नक़दी की तरह वैध मुद्रा और केंद्रीय बैंक की प्रत्यक्ष देनदारी। थोक पायलट नवंबर 2022 और खुदरा पायलट दिसंबर 2022 में आरंभ।

अंतर: (1) UPI — बैंक खाते की जमा राशि का हस्तांतरण; पैसा बैंक की देनदारी; (2) CBDC — स्वयं "डिजिटल नक़दी", वॉलेट में रखी जाती है, बैंक जोखिम नहीं; (3) क्रिप्टो — किसी की देनदारी नहीं, विकेंद्रीकृत, अस्थिर मूल्य, वैध मुद्रा नहीं।

लाभ: नक़दी छापने-प्रबंधन की लागत में कमी, ऑफ़लाइन भुगतान (कमज़ोर नेटवर्क वाले क्षेत्र), "प्रोग्रामेबल" धन — सब्सिडी का उद्देश्य-विशेष उपयोग, सीमापार भुगतान तेज़ और सस्ते, निजी क्रिप्टो और विदेशी स्टेबलकॉइन के प्रति मौद्रिक संप्रभुता।

जोखिम: निजता और निगरानी की चिंता, बैंक जमाओं का CBDC की ओर पलायन (disintermediation) — विशेषकर संकट में, साइबर सुरक्षा, UPI की लोकप्रियता के कारण कम अपनाया जाना, डिजिटल विभाजन।

निष्कर्ष: चरणबद्ध, निजता-सुरक्षित डिज़ाइन (जमा-सीमा, गुमनामी की सीमित परतें) के साथ e₹ भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का पूरक बन सकता है।

Q2UPSC 2024 · GS-3 · Q2 · 15 अंक

भारत में लगातार ऊँची खाद्य मुद्रास्फीति के कारणों की चर्चा कीजिए। इसे नियंत्रित करने में RBI की मौद्रिक नीति कितनी प्रभावी है? (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: CPI में खाद्य का भार लगभग 46% है; गरीब परिवार आय का बड़ा भाग भोजन पर ख़र्च करते हैं — इसलिए खाद्य मुद्रास्फीति "सबसे प्रतिगामी कर" है।

कारण: (1) आपूर्ति झटके: लू, बेमौसम वर्षा, सूखा — जलवायु परिवर्तन से बढ़ती आवृत्ति; टमाटर-प्याज़-आलू जैसी शीघ्र नष्ट होने वाली फ़सलों में तीव्र उतार-चढ़ाव; (2) संरचनात्मक: दालें और खाद्य तेल में आयात निर्भरता — वैश्विक क़ीमतों और रुपये के मूल्य का प्रभाव; (3) आपूर्ति शृंखला: कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण की कमी, फ़सल-उपरांत हानियाँ, बिचौलिये; (4) माँग पक्ष: बढ़ती आय से प्रोटीन (दूध, अंडा, मांस) और सब्ज़ियों की माँग; (5) नीतिगत: MSP वृद्धि, निर्यात-आयात नीतियों में अनिश्चितता; (6) ऊर्जा और परिवहन लागत।

RBI की मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता: सीमाएँ — ब्याज दरें बढ़ाने से वर्षा या फ़सल नहीं बढ़ती; आपूर्ति-जनित मुद्रास्फीति पर दर वृद्धि संवृद्धि को अधिक नुक़सान पहुँचा सकती है; फिर भी भूमिका — (1) खाद्य क़ीमतें मुद्रास्फीति अपेक्षाओं को प्रभावित करती हैं, जो मज़दूरी और अन्य क़ीमतों में फैलती हैं ("द्वितीयक प्रभाव") — RBI इन्हें "स्थिर" (anchor) रखती है; (2) विश्वसनीय लक्ष्यीकरण से 2016 के बाद औसत मुद्रास्फीति पहले की तुलना में कम और स्थिर; (3) अस्थायी झटकों को "देखकर अनदेखा" (look through) करने का लचीलापन।

बहस: आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 ने खाद्य-बाहर मुद्रास्फीति को लक्ष्य बनाने का विचार रखा; RBI हेडलाइन CPI के पक्ष में — क्योंकि आम आदमी की अपेक्षाएँ खाद्य क़ीमतों से बनती हैं।

आपूर्ति पक्ष के उपाय: भंडारण और कोल्ड चेन (ऑपरेशन ग्रीन्स), दालें-तिलहन मिशन, जलवायु-सहनशील किस्में, बफ़र स्टॉक और OMSS, आयात शुल्क का समयबद्ध समायोजन, बाज़ार सुधार (e-NAM)।

निष्कर्ष: खाद्य मुद्रास्फीति का स्थायी समाधान मौद्रिक नहीं, कृषि-आपूर्ति सुधारों में है; मौद्रिक नीति केवल उसके फैलाव को रोकती है।

Q3UPSC 2025 · GS-3 · Q11 · 10 अंक

NITI Aayog के राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? यह राज्यों के वित्तीय प्रबंधन में किस प्रकार सहायक है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

परिचय: NITI Aayog ने जनवरी 2025 में पहला राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) जारी किया, जिसमें 18 प्रमुख राज्यों का मूल्यांकन किया गया — ये राज्य देश के GDP, जनसंख्या और सार्वजनिक व्यय का बड़ा हिस्सा हैं।

विशेषताएँ: पाँच उप-सूचकांक — (1) व्यय की गुणवत्ता (पूँजीगत व्यय का अनुपात); (2) राजस्व संग्रहण (अपने कर-गैर कर राजस्व); (3) राजकोषीय विवेक (राजकोषीय और राजस्व घाटा); (4) ऋण सूचकांक (ऋण-GSDP, ब्याज भार); (5) ऋण स्थिरता (ऋण वृद्धि बनाम GSDP वृद्धि)। ओडिशा शीर्ष पर, उसके बाद छत्तीसगढ़, गोवा, झारखंड; पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल निचले स्थानों पर।

सहायकता: (1) साक्ष्य-आधारित तुलना — कमज़ोरियों की पहचान; (2) प्रतिस्पर्धी संघवाद — सुधार का प्रोत्साहन; (3) बाज़ार और ऋणदाताओं के लिए पारदर्शिता; (4) वित्त आयोग और केंद्र के लिए नीतिगत आधार; (5) पूँजीगत व्यय और राजस्व जुटाने पर ध्यान।

सीमाएँ: बजट-बाह्य उधार और सार्वजनिक उपक्रमों का पूर्ण समावेश नहीं, राज्यों की भिन्न परिस्थितियाँ (पहाड़ी, सीमावर्ती), एक वर्ष के आँकड़े।

निष्कर्ष: FHI "राजकोषीय दर्पण" है — उपयोगी तब, जब राज्य इसे दंड नहीं, सुधार के मार्गदर्शन के रूप में लें।

Q4UPSC 2025 · GS-3 · Q2 · 10 अंक

बढ़ता संरक्षणवाद और द्विपक्षीयता की ओर झुकाव भारत के व्यापार के लिए क्या चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

प्रवृत्ति: WTO के विवाद निपटान का अपीलीय निकाय 2019 से निष्क्रिय; बहुपक्षीय वार्ताएँ (MC13, 2024) ठप; अमेरिका के ऊँचे शुल्क (2025 — भारत पर 50% तक), चीन से "de-risking", यूरोप का CBAM और वनों की कटाई संबंधी नियम (EUDR); देश बहुपक्षीय के स्थान पर द्विपक्षीय/क्षेत्रीय समझौतों की ओर।

भारत के लिए चुनौतियाँ: (1) वस्त्र, रत्न-आभूषण, झींगा, चमड़ा जैसे श्रम-गहन निर्यातों पर शुल्क का सीधा प्रभाव — रोज़गार; (2) द्विपक्षीय वार्ताओं में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सौदेबाज़ी शक्ति — कृषि, डेयरी, डिजिटल व्यापार, IPR पर दबाव; (3) "गैर-शुल्क बाधाएँ" — मानक, कार्बन कर, श्रम-पर्यावरण शर्तें; (4) RCEP से बाहर रहने से पूर्वी एशियाई मूल्य शृंखलाओं से दूरी; (5) सेवाओं पर आव्रजन प्रतिबंध; (6) विवाद निपटान के मंच का अभाव — विकासशील देशों की सुरक्षा कम।

भारत की रणनीति: संतुलित FTA (UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, ब्रिटेन; यूरोपीय संघ से वार्ता), निर्यात बाज़ारों का विविधीकरण, PLI से प्रतिस्पर्धा, गुणवत्ता मानक, रुपये में व्यापार, WTO सुधार का समर्थन।

निष्कर्ष: खंडित व्यापार व्यवस्था में भारत को "रक्षात्मक" नहीं, "प्रतिस्पर्धी और रणनीतिक" होना होगा।

Q5अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

GST के आठ वर्षों के अनुभव का मूल्यांकन कीजिए। 2025 के "GST 2.0" सुधार किन समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते हैं? (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: 1 जुलाई 2017 को लागू GST ने केंद्र और राज्यों के 17 से अधिक अप्रत्यक्ष करों को समाहित कर "एक राष्ट्र, एक कर, एक बाज़ार" की नींव रखी।

उपलब्धियाँ: (1) अंतर-राज्यीय चेक पोस्ट समाप्त — लॉजिस्टिक्स लागत और समय में कमी; (2) कर-पर-कर (cascading) में कमी, इनपुट टैक्स क्रेडिट; (3) करदाता आधार का विस्तार और औपचारिकीकरण; (4) ई-इनवॉइस और ई-वे बिल से अनुपालन; (5) GST परिषद — सहकारी संघवाद का सफल मंच; (6) संग्रह में स्थिर वृद्धि।

समस्याएँ: (1) बहु-दर संरचना (5, 12, 18, 28% + उपकर) — वर्गीकरण विवाद, उलटा शुल्क ढाँचा (inverted duty); (2) पेट्रोलियम, बिजली, शराब बाहर; (3) MSME पर अनुपालन बोझ; (4) फ़र्ज़ी इनवॉइस से ITC धोखाधड़ी; (5) राज्यों की कर-स्वायत्तता में कमी, 2022 में क्षतिपूर्ति का अंत; (6) अपीलीय अधिकरण का देर से गठन; (7) आवश्यक वस्तुओं पर ऊँची दरों से प्रतिगामी प्रभाव।

GST 2.0 (22 सितंबर 2025): (1) दरों का सरलीकरण — मुख्यतः 5% और 18%, विलासिता/हानिकारक वस्तुओं पर 40%; (2) दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं, कृषि उपकरणों, स्वास्थ्य-शिक्षा से जुड़ी वस्तुओं पर दर में कटौती — उपभोग को बढ़ावा; (3) क्षतिपूर्ति उपकर का अंत; (4) उलटा शुल्क ढाँचा सुधारना, वर्गीकरण विवाद कम; (5) पंजीकरण और रिफ़ंड का सरलीकरण; (6) GSTAT का संचालन।

शेष चुनौतियाँ: राज्यों के राजस्व पर अल्पकालिक प्रभाव, पेट्रोलियम-बिजली का समावेश, विवाद निपटान तंत्र (279A(11)) का अभाव, डेटा-आधारित धोखाधड़ी नियंत्रण।

निष्कर्ष: GST "अच्छा और सरल कर" (Good and Simple Tax) की ओर बढ़ा है; अगला चरण पेट्रोलियम को शामिल करने और राज्यों के भरोसे को सुदृढ़ करने का है।

Q6अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

राजकोषीय घाटे के बजाय ऋण-GDP अनुपात को राजकोषीय नीति का मुख्य लक्ष्य बनाने के पक्ष में तर्क दीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

पृष्ठभूमि: FRBM अधिनियम 2003 ने वार्षिक राजकोषीय घाटे (3%) को लक्ष्य बनाया; एन. के. सिंह समिति (2017) ने ऋण को "मुख्य लक्ष्य" और घाटे को "परिचालन लक्ष्य" सुझाया; कोविड के बाद केंद्र ने 2025-26 के बाद से ऋण-GDP अनुपात को लगभग 50% (±1) तक घटाने का मार्ग अपनाया (2030-31 तक)।

तर्क: (1) ऋण "स्टॉक" है — दीर्घकालिक स्थिरता (ब्याज भार, रेटिंग, निवेशक विश्वास) का बेहतर संकेतक; (2) आर्थिक चक्र के अनुसार लचीलापन — मंदी में अधिक व्यय, तेज़ी में समेकन (प्रति-चक्रीय नीति); (3) वार्षिक घाटे के कठोर लक्ष्य से पूँजीगत व्यय में कटौती की प्रवृत्ति थी; (4) अंतरराष्ट्रीय प्रथा; (5) ब्याज भुगतान राजस्व का बड़ा भाग खा जाता है — ऋण घटाना कल्याण-व्यय के लिए स्थान बनाता है।

सावधानियाँ: स्पष्ट मध्यम-अवधि मार्ग, बजट-बाह्य उधार का समावेश, स्वतंत्र राजकोषीय परिषद (वित्त आयोग की सिफ़ारिश), राज्यों का ऋण भी शामिल करना।

निष्कर्ष: ऋण-आधारित "लंगर" राजकोषीय अनुशासन और संवृद्धि-समर्थक लचीलेपन के बीच बेहतर संतुलन देता है।

Q7अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

परिणाम बजट और लैंगिक बजट शासन में जवाबदेही को किस प्रकार बढ़ाते हैं? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

परिणाम बजट (2005 से): व्यय ("कितना ख़र्च हुआ") के साथ उत्पादन (output — कितने विद्यालय बने) और परिणाम (outcome — सीखने का स्तर बढ़ा या नहीं) के मापनीय लक्ष्य जोड़ता है; अब "आउटपुट-आउटकम निगरानी ढाँचा" (NITI-DMEO)।

लैंगिक बजट (2005-06 से): बजट दस्तावेज़ में भाग A — 100% महिला-विशिष्ट योजनाएँ, भाग B — कम से कम 30% महिलाओं के लिए आवंटन वाली योजनाएँ; मंत्रालयों में जेंडर बजटिंग प्रकोष्ठ; लैंगिक बजट आवंटन में हाल के वर्षों में वृद्धि।

जवाबदेही में योगदान: (1) व्यय और परिणाम का संबंध स्पष्ट; (2) संसद और जनता के लिए पारदर्शिता; (3) लैंगिक अंतर को नीति-निर्माण के केंद्र में लाना; (4) संसाधनों का प्रभावी पुनर्वितरण।

सीमाएँ: परिणाम संकेतक कमज़ोर, आँकड़ों की कमी, भाग B में "30%" का अनुमानित आवंटन, "लैंगिक लेखा परीक्षा" का अभाव, राज्यों में असमान अपनाया जाना।

निष्कर्ष: बजट केवल लेखा नहीं, नीति का नैतिक दस्तावेज़ है — परिणाम और लैंगिक दृष्टि उसे जवाबदेह बनाती है।

Q8अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

कुछ राज्यों द्वारा पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वापसी के राजकोषीय निहितार्थों की चर्चा कीजिए। एकीकृत पेंशन योजना (UPS) किस प्रकार मध्य मार्ग प्रस्तुत करती है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

पृष्ठभूमि: OPS में अंतिम वेतन का 50% आजीवन पेंशन, महँगाई भत्ते के साथ — पूरा भार सरकार पर, कर्मचारी का अंशदान नहीं ("अनिधिक" — unfunded)। 2004 से केंद्र (और अधिकांश राज्यों) ने अंशदायी, बाज़ार-आधारित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) अपनाई। हाल में कुछ राज्यों ने OPS की वापसी की घोषणा की।

राजकोषीय निहितार्थ: (1) अभी नई देनदारी कम दिखती है, पर 2030 के दशक से पेंशन भार तेज़ी से बढ़ेगा — "भविष्य की पीढ़ियों पर बोझ"; (2) पूँजीगत व्यय (विद्यालय, अस्पताल, सड़कें) के लिए स्थान घटेगा; (3) राज्यों के ऋण और राजकोषीय घाटे पर दबाव; (4) RBI और पूर्व वित्त आयोग सदस्यों ने इसे "प्रतिगामी कदम" कहा; (5) कर्मचारियों के NPS कोष को राज्यों को लौटाने पर क़ानूनी जटिलता।

एकीकृत पेंशन योजना (UPS, 1 अप्रैल 2025 से केंद्र के लिए): 25 वर्ष की सेवा पर अंतिम 12 माह के औसत मूल वेतन का 50% सुनिश्चित पेंशन, न्यूनतम पेंशन, पारिवारिक पेंशन, महँगाई राहत; पर यह अंशदायी है — कर्मचारी 10%, सरकार का अंशदान बढ़ाकर 18.5%; कोष-आधारित होने से भविष्य का भार अपेक्षाकृत पूर्वानुमेय।

निष्कर्ष: UPS "सुनिश्चितता (OPS)" और "राजकोषीय स्थिरता (NPS)" के बीच संतुलन का प्रयास है — राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मध्य मार्ग।

14. Quick Revision Summary

एक नज़र में
  • बजट: अनुच्छेद 112-114; घाटों के प्रकार; FRBM → ऋण-आधारित लक्ष्य।
  • कराधान: GST 2.0 (5-18-40%), आयकर अधिनियम 2025।
  • मौद्रिक नीति: MPC, CPI 4% ±2; खाद्य मुद्रास्फीति मुख्यतः आपूर्ति-जनित।
  • CBDC: डिजिटल नक़दी; UPI और क्रिप्टो से भिन्न; निजता-स्थिरता के जोखिम।
  • राज्य वित्त: NITI FHI (2025) — ओडिशा शीर्ष; ऋण और बजट-बाह्य उधार की चिंता।
  • व्यापार: संरक्षणवाद के दौर में द्विपक्षीय FTA और प्रतिस्पर्धा।