UPSC Mains · General Studies Paper IV · अध्याय 2

अभिवृत्ति (Attitude)

Attitude

अभिवृत्ति की विषयवस्तु, संरचना, कार्य; विचार और व्यवहार से संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्ति; सामाजिक प्रभाव और अनुनयन।

GS-4 26 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

पाठ्यक्रम: "अभिवृत्ति — सारांश (विषयवस्तु), संरचना, कार्य; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्ति; सामाजिक प्रभाव और अनुनयन (persuasion)।" अभिवृत्ति वह "मानसिक झुकाव" है जो तय करता है कि हम किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या घटना के प्रति कैसा सोचते, महसूस करते और व्यवहार करते हैं।

वर्षइस अध्याय से प्रश्न
2025विलियम जेम्स — "मनुष्य अपनी अभिवृत्ति बदलकर अपना जीवन बदल सकता है"; सोशल मीडिया से उत्पन्न नैतिक दुविधाएँ
पूर्व वर्ष (प्रवृत्ति)अभिवृत्ति और व्यवहार का संबंध, नैतिक बनाम राजनीतिक अभिवृत्ति, अनुनयन और सामाजिक प्रभाव से जन-अभियान

2. अभिवृत्ति की संरचना और कार्य

  • परिभाषा: किसी "अभिवृत्ति वस्तु" (व्यक्ति, समूह, विचार, नीति) के प्रति अपेक्षाकृत स्थायी मूल्यांकन — अनुकूल या प्रतिकूल।
  • ABC मॉडल (त्रि-घटक): (1) Affective (भावात्मक) — भावनाएँ ("मुझे भ्रष्टाचार से घृणा है"); (2) Behavioural (व्यवहारात्मक) — कार्य की प्रवृत्ति ("मैं रिश्वत नहीं दूँगा"); (3) Cognitive (संज्ञानात्मक) — विश्वास और ज्ञान ("भ्रष्टाचार विकास रोकता है")।
  • विशेषताएँ: दिशा (सकारात्मक/नकारात्मक), तीव्रता, केंद्रीयता, स्पष्ट (explicit) और अंतर्निहित (implicit — अचेतन पूर्वाग्रह)।
  • कार्य (डेनियल कात्ज़): (1) उपयोगितावादी — लाभ प्राप्ति और हानि से बचाव; (2) ज्ञान — दुनिया को समझने का ढाँचा; (3) अहं-रक्षात्मक — आत्म-छवि की रक्षा; (4) मूल्य-अभिव्यंजक — अपने मूल्यों और पहचान की अभिव्यक्ति।
  • निर्माण के स्रोत: परिवार, समाजीकरण, प्रत्यक्ष अनुभव, शिक्षा, मीडिया, सहकर्मी समूह, संस्कृति, आनुवंशिक प्रवृत्तियाँ।
अभिवृत्ति A — भावात्मकभावनाएँ B — व्यवहारात्मककार्य की प्रवृत्ति C — संज्ञानात्मकविश्वास, ज्ञान
अभिवृत्ति के तीन घटक एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं; इनमें असंगति "संज्ञानात्मक असंगति" उत्पन्न करती है।

3. अभिवृत्ति, विचार और व्यवहार

  • अभिवृत्ति-व्यवहार अंतराल: लापियर (1934) का अध्ययन — होटल मालिकों ने पत्र में चीनी ग्राहकों को मना किया, पर व्यवहार में सेवा दी; यानी अभिवृत्ति हमेशा व्यवहार नहीं बनती।
  • कब अभिवृत्ति व्यवहार का पूर्वानुमान करती है: अभिवृत्ति प्रबल, विशिष्ट और प्रत्यक्ष अनुभव से बनी हो; सामाजिक दबाव कम हो; व्यक्ति आत्म-जागरूक हो।
  • नियोजित व्यवहार का सिद्धांत (आइज़ेन): व्यवहार = अभिवृत्ति + व्यक्तिपरक मानदंड (दूसरे क्या सोचेंगे) + अनुभूत नियंत्रण (क्या मैं कर सकता हूँ)।
  • संज्ञानात्मक असंगति (फ़ेस्टिंगर): विश्वास और व्यवहार में टकराव से असुविधा — व्यक्ति या तो व्यवहार बदलता है या अपने विश्वास (तर्क गढ़कर — "सब लेते हैं, मैंने भी ले लिया")। प्रशासन में भ्रष्टाचार का "सामान्यीकरण" इसी से।
  • व्यवहार से अभिवृत्ति: आत्म-प्रत्यक्षण सिद्धांत — जो हम करते हैं, उससे हमारी अभिवृत्ति बनती है (स्वच्छता अभियान में भागीदारी से स्वच्छता के प्रति अभिवृत्ति)।

4. नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्ति

आधारनैतिक अभिवृत्तिराजनीतिक अभिवृत्ति
विषयसही-ग़लत, अच्छा-बुराशासन, सत्ता, नीतियाँ, विचारधाराएँ
आधारमूल्य, अंतरात्माविचारधारा, हित, पहचान, दलीय निष्ठा
लचीलापनअपेक्षाकृत स्थायीअधिक परिवर्तनशील — घटनाओं, नेतृत्व से
उदाहरणभ्रष्टाचार, हिंसा के प्रति दृष्टिआरक्षण, आर्थिक नीति, संघवाद पर मत

सिविल सेवक के लिए: राजनीतिक रूप से तटस्थ (non-partisan) पर नैतिक और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध — "राजनीतिक तटस्थता, नैतिक प्रतिबद्धता"।

5. सामाजिक प्रभाव और अनुनयन

  • सामाजिक प्रभाव: (1) अनुरूपता (conformity) — ऐश का प्रयोग: लोग समूह के ग़लत उत्तर को भी मान लेते हैं; (2) अनुपालन (compliance) — अनुरोध पर; (3) आज्ञापालन (obedience) — मिलग्राम का प्रयोग: अधिकार के आदेश पर लोग दूसरों को हानि तक पहुँचाने को तैयार; (4) समूह-चिंतन (groupthink) — असहमति का दमन; (5) "बाईस्टैंडर प्रभाव" — भीड़ में हर व्यक्ति दूसरे से सहायता की अपेक्षा करता है।
  • अनुनयन (persuasion) — होवलैंड मॉडल: स्रोत (विश्वसनीयता, विशेषज्ञता, आकर्षण) + संदेश (तर्क, भावना, दोनों पक्ष, पुनरावृत्ति) + श्रोता (शिक्षा, पूर्व-अभिवृत्ति) + माध्यम।
  • विस्तार संभावना मॉडल (ELM): केंद्रीय मार्ग — तर्क पर गहन विचार (स्थायी परिवर्तन); परिधीय मार्ग — आकर्षक वक्ता, भावनाएँ, प्रसिद्ध व्यक्ति (अल्पकालिक परिवर्तन)।
  • "नज" (Nudge — थेलर और सनस्टीन): विकल्पों की संरचना बदलकर बिना बाध्यता के बेहतर व्यवहार की ओर प्रेरित करना — LPG सब्सिडी "Give It Up" अभियान, स्वच्छ भारत में सामाजिक मानदंड, अंगदान के लिए "डिफ़ॉल्ट" विकल्प, आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 का व्यवहारगत अर्थशास्त्र अध्याय।
सामाजिक परिवर्तन
अभिवृत्तियों में बदलाव ही सामाजिक परिवर्तन का आधार है — अस्पृश्यता, बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध अभियानों में यही देखा गया।

6. विस्तृत विवेचन: अभिवृत्ति-परिवर्तन के सिद्धांत और "नज" (Nudge) आधारित सार्वजनिक नीति

GS-4 पाठ्यक्रम में अभिवृत्ति के अंतर्गत "सामाजिक प्रभाव और अनुनयन (persuasion)" शामिल है। प्रशासक का बड़ा काम लोगों के व्यवहार को बदलना है: खुले में शौच छोड़ना, बेटियों को पढ़ाना, टीका लगवाना, कर चुकाना, कचरा अलग करना। केवल क़ानून और दंड से व्यवहार स्थायी रूप से नहीं बदलता; अभिवृत्ति बदलनी होती है। इसके लिए मनोविज्ञान के कुछ सिद्धांत बहुत उपयोगी हैं।

सिद्धांतमूल विचारप्रशासन में प्रयोग
संज्ञानात्मक असंगति (Cognitive Dissonance) — लियोन फ़ेस्टिंगरजब व्यक्ति के विचार और व्यवहार में टकराव होता है तो असहजता होती है, जिसे दूर करने के लिए वह या तो व्यवहार बदलता है या विचारलोगों से छोटी सार्वजनिक प्रतिबद्धता लेना (जैसे स्वच्छता की शपथ) — बाद में व्यवहार उससे मेल खाने लगता है
विस्तार-संभाव्यता मॉडल (Elaboration Likelihood Model)अनुनयन के दो मार्ग: "केंद्रीय" (तर्क और प्रमाण, जब व्यक्ति ध्यान से सोचता है) और "परिधीय" (वक्ता की विश्वसनीयता, आकर्षण, भावनात्मक संकेत)शिक्षित वर्ग के लिए आँकड़े और तर्क; ग्रामीण संदर्भ में विश्वसनीय स्थानीय व्यक्तियों (ASHA, शिक्षक, धार्मिक नेता) के माध्यम से संदेश
सामाजिक मानदंड (Social Norms)लोग वही करते हैं जो वे समझते हैं कि "दूसरे" कर रहे हैं"आपके गाँव के 90% लोग शौचालय का उपयोग करते हैं" जैसे संदेश; ODF गाँवों की सार्वजनिक मान्यता
संपर्क परिकल्पना (Contact Hypothesis) — गॉर्डन ऑलपोर्टसमान स्थिति वाले, सहयोगी संपर्क से पूर्वाग्रह घटते हैंविभिन्न समुदायों के बच्चों के साझा विद्यालय और खेल; मिश्रित आवास नीतियाँ
नज सिद्धांत (Nudge) — थेलर और सनस्टीनविकल्पों को हटाए या प्रतिबंधित किए बिना, उनके प्रस्तुतीकरण ("choice architecture") से बेहतर निर्णय की ओर हल्का धक्कानीचे देखें
भारत में व्यवहारगत (Behavioural) नीति के उदाहरण
  • स्वच्छ भारत मिशन: शौचालय-निर्माण के साथ "व्यवहार-परिवर्तन संचार", समुदाय-नेतृत्व वाली संपूर्ण स्वच्छता (CLTS) में "घृणा" और "गर्व" जैसी भावनाओं का प्रयोग, प्रसिद्ध हस्तियों के माध्यम से संदेश।
  • LPG "Give It Up" अभियान: संपन्न उपभोक्ताओं से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील — सामाजिक मानदंड और नैतिक पहचान का प्रयोग।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: "सेल्फ़ी विद डॉटर" जैसे अभियानों से बेटियों के प्रति गर्व की भावना।
  • मिशन LiFE: पर्यावरण-अनुकूल जीवन-शैली के लिए व्यक्तिगत व्यवहार पर बल।
  • नीति आयोग में व्यवहारगत अंतर्दृष्टि: आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में "नज" पर एक अध्याय था, जिसमें व्यवहारगत अर्थशास्त्र को नीति में अपनाने की बात कही गई।
नैतिक प्रश्न: नज कब हेरफेर (manipulation) बन जाता है?

आलोचक कहते हैं कि नज नागरिकों को उनकी जानकारी के बिना प्रभावित करता है, जो स्वायत्तता (autonomy) का उल्लंघन हो सकता है। नैतिक नज की कसौटियाँ: (1) पारदर्शिता — नागरिक जान सके कि उसे किस ओर प्रेरित किया जा रहा है; (2) विकल्प की स्वतंत्रता — बाहर निकलना (opt-out) आसान हो; (3) हित — नज नागरिक के अपने हित या सार्वजनिक हित के लिए हो, सरकार या किसी दल के लाभ के लिए नहीं; (4) प्रमाण — प्रभाव का मूल्यांकन हो।

P1अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

"क़ानून व्यवहार को नियंत्रित कर सकता है, पर अभिवृत्ति को नहीं।" सामाजिक परिवर्तन लाने में अनुनयन (persuasion) की भूमिका की विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: दहेज, बाल-विवाह और छुआछूत के विरुद्ध दशकों पुराने क़ानूनों के बावजूद ये प्रथाएँ बनी हुई हैं। इससे स्पष्ट है कि क़ानून आवश्यक है, पर पर्याप्त नहीं; स्थायी परिवर्तन के लिए लोगों की अभिवृत्ति (मान्यताएँ, भावनाएँ और व्यवहार की प्रवृत्ति) बदलनी होती है।

क़ानून की सीमाएँ: प्रवर्तन की कठिनाई (घर के भीतर की प्रथाएँ); सामाजिक स्वीकृति के अभाव में क़ानून "काग़ज़ी" रह जाता है; दंड का भय हटते ही व्यवहार लौट आता है; कभी-कभी प्रतिरोध और छिपाव बढ़ता है।

अनुनयन की भूमिका:

  • विश्वसनीय संदेशवाहक: स्थानीय नेता, शिक्षक, ASHA, धार्मिक व्यक्ति (ELM का परिधीय मार्ग)। पोलियो-अभियान में धार्मिक नेताओं की भागीदारी ने टीकों के प्रति अविश्वास कम किया।
  • तर्क और प्रमाण: स्वास्थ्य-लाभ, आर्थिक लाभ के आँकड़े (केंद्रीय मार्ग)।
  • भावनात्मक अपील: गर्व, सम्मान, बच्चों का भविष्य।
  • सामाजिक मानदंड: "सब कर रहे हैं" का संदेश; सकारात्मक उदाहरणों की सार्वजनिक प्रशंसा।
  • संपर्क और अनुभव: अंतर-समुदाय संपर्क से पूर्वाग्रह में कमी।

उदाहरण: स्वच्छ भारत में व्यवहार-परिवर्तन संचार; कई राज्यों में बाल-विवाह-विरोधी अभियानों में किशोरियों के समूह और पंचायतों की भूमिका।

संतुलन: सबसे प्रभावी रणनीति "क़ानून + अनुनयन + प्रोत्साहन" का मिश्रण है: क़ानून न्यूनतम मानक तय करता है, अनुनयन उसे सामाजिक स्वीकृति देता है, और प्रोत्साहन (जैसे बालिका-शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति) व्यवहार को आर्थिक रूप से सरल बनाता है।

निष्कर्ष: गांधीजी का सत्याग्रह स्वयं अनुनयन का सर्वोच्च उदाहरण था — विरोधी का हृदय-परिवर्तन; लोकतांत्रिक प्रशासन को भी यही मार्ग अपनाना चाहिए।

P2अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण के युग में सिविल सेवक की राजनीतिक अभिवृत्ति कैसी होनी चाहिए? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

संदर्भ: सोशल मीडिया और पहचान-आधारित राजनीति ने समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाया है। सिविल सेवक भी नागरिक हैं और उनकी अपनी राजनीतिक राय हो सकती है, पर पद पर रहते हुए उनसे विशिष्ट अभिवृत्ति अपेक्षित है।

अपेक्षित अभिवृत्ति:

  • राजनीतिक तटस्थता: किसी दल या विचारधारा के प्रति पक्षपात नहीं; हर निर्वाचित सरकार की वैध नीतियों का समान निष्ठा से क्रियान्वयन (केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी से रोकते हैं)।
  • संवैधानिक प्रतिबद्धता: तटस्थता का अर्थ मूल्य-शून्यता नहीं; संविधान के मूल्यों (समानता, धर्मनिरपेक्षता, विधि का शासन) के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता।
  • निर्भीक सलाह: सरकार को स्पष्ट, साक्ष्य-आधारित सलाह देना, भले ही वह राजनीतिक रूप से असुविधाजनक हो।
  • सार्वजनिक अभिव्यक्ति में संयम: सोशल मीडिया पर राजनीतिक टिप्पणियों से बचना।
  • नागरिकों के साथ समान व्यवहार: किसी व्यक्ति की राजनीतिक संबद्धता के आधार पर सेवा में भेदभाव नहीं।

चुनौती: "प्रतिबद्ध नौकरशाही" का दबाव, स्थानांतरण और पोस्टिंग पर राजनीतिक प्रभाव।

निष्कर्ष: सिविल सेवक की निष्ठा सत्ता में बैठे दल के प्रति नहीं, संविधान और जनता के प्रति है; यही "स्टील फ़्रेम" की विश्वसनीयता है।

P3अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

पूर्वाग्रह (prejudice) और रूढ़िबद्ध धारणा (stereotype) में अंतर स्पष्ट कीजिए। प्रशासन में इनके प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

अंतर:

  • रूढ़िबद्ध धारणा (Stereotype): किसी समूह के सभी सदस्यों के बारे में सामान्यीकृत "विश्वास" — अभिवृत्ति का संज्ञानात्मक (cognitive) घटक। जैसे "एक क्षेत्र विशेष के लोग अपराध-प्रवृत्त होते हैं"।
  • पूर्वाग्रह (Prejudice): उस विश्वास के आधार पर बनी नकारात्मक "भावना" या पहले से तय निर्णय — भावात्मक (affective) घटक।
  • भेदभाव (Discrimination): इन दोनों के आधार पर किया गया "व्यवहार" — व्यवहारात्मक घटक।

प्रशासन में प्रभाव: कुछ समुदायों की अधिक तलाशी या संदेह (प्रोफ़ाइलिंग); महिलाओं की शिकायतों को कम गंभीरता से लेना; प्रवासी मज़दूरों या झुग्गीवासियों के साथ अपमानजनक व्यवहार; अनुसूचित जनजातियों के प्रति औपनिवेशिक "आपराधिक जनजाति" की धारणा का अवशेष (विमुक्त जनजातियाँ)।

कम करने के उपाय:

  • संवेदनशीलता और अंतर्निहित-पूर्वाग्रह (implicit bias) प्रशिक्षण।
  • मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) और वस्तुनिष्ठ मानदंड, जिससे विवेकाधिकार में पूर्वाग्रह की गुंजाइश घटे।
  • प्रशासन और पुलिस में सामाजिक विविधता।
  • विभिन्न समुदायों से सकारात्मक संपर्क (ऑलपोर्ट की संपर्क परिकल्पना)।
  • निर्णयों के कारणों का अभिलेख और स्वतंत्र समीक्षा।

निष्कर्ष: संविधान का अनुच्छेद 14 और 15 केवल क़ानूनी भेदभाव ही नहीं, प्रशासन के व्यवहार में छिपे पूर्वाग्रह को भी समाप्त करने की माँग करते हैं।

7. Master Summary Table

अवधारणामुख्य बिंदुविचारक / उदाहरण
संरचनाभावात्मक, व्यवहारात्मक, संज्ञानात्मकABC मॉडल
कार्यउपयोगिता, ज्ञान, अहं-रक्षा, मूल्य-अभिव्यक्तिकात्ज़
व्यवहार संबंधअंतराल; नियोजित व्यवहारलापियर; आइज़ेन
असंगतिविश्वास-व्यवहार टकरावफ़ेस्टिंगर
सामाजिक प्रभावअनुरूपता, आज्ञापालनऐश; मिलग्राम
अनुनयनस्रोत-संदेश-श्रोता; केंद्रीय/परिधीयहोवलैंड; ELM
नजविकल्प-संरचनाथेलर-सनस्टीन; Give It Up

8. Mind Map

अभिवृत्ति
संरचना
  • ABC
  • स्पष्ट/अंतर्निहित
कार्य
  • कात्ज़ के चार
व्यवहार
  • अंतराल
  • असंगति
प्रकार
  • नैतिक
  • राजनीतिक
परिवर्तन
  • अनुनयन, नज
  • सामाजिक प्रभाव

9. महत्वपूर्ण One-liners

  • संज्ञानात्मक असंगति का सिद्धांत: लियोन फ़ेस्टिंगर (1957)।
  • अनुरूपता प्रयोग: सोलोमन ऐश; आज्ञापालन प्रयोग: स्टैनली मिलग्राम।
  • नियोजित व्यवहार का सिद्धांत: इसेक आइज़ेन।
  • अभिवृत्ति के चार कार्य: डेनियल कात्ज़।
  • "नज" की अवधारणा: रिचर्ड थेलर और कैस सनस्टीन (थेलर — नोबेल 2017)।
  • समूह-चिंतन (Groupthink): इरविंग जेनिस।
  • "Give It Up" अभियान: LPG सब्सिडी स्वैच्छिक त्याग (2015)।

10. टिप्स एवं ट्रिक्स

उत्तर लेखन
  • अभिवृत्ति प्रश्नों में मनोवैज्ञानिक अवधारणा (ABC, असंगति, ELM) + प्रशासनिक उदाहरण (स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ, टीकाकरण) = पूर्ण उत्तर।
  • "व्यवहार परिवर्तन अभियानों" के सफल उदाहरण याद रखें — पल्स पोलियो, स्वच्छ भारत, Give It Up, "हर घर तिरंगा"।
  • सिविल सेवक की अपनी अभिवृत्ति (वंचितों के प्रति, आलोचना के प्रति, तकनीक के प्रति) पर आत्म-चिंतनशील दृष्टि दें।
याद रखने की तरकीब

अनुनयन का सूत्र: "कौन (स्रोत) — क्या (संदेश) — किससे (श्रोता) — कैसे (माध्यम)"।

11. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2025 · GS-4 · Q3(b) · 10 अंक

विलियम जेम्स के अनुसार "मनुष्य अपनी अभिवृत्तियों को बदलकर अपना जीवन बदल सकता है।" इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

आशय: विलियम जेम्स (अमेरिकी मनोवैज्ञानिक-दार्शनिक, व्यवहारवाद के अग्रदूत) के अनुसार परिस्थितियाँ हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं, पर उनके प्रति हमारी अभिवृत्ति हमारे नियंत्रण में है — और वही हमारे निर्णयों, कर्मों और अंततः जीवन की दिशा तय करती है।

मनोवैज्ञानिक आधार: (1) ABC मॉडल — संज्ञानात्मक घटक (विश्वास) बदलने से भावना और व्यवहार बदलते हैं; (2) संज्ञानात्मक-व्यवहार चिकित्सा का मूल यही है; (3) "विकास मानसिकता" (growth mindset, कैरोल ड्वेक) — असफलता को सीखने का अवसर मानना; (4) आत्म-पूर्ति भविष्यवाणी — "मैं कर सकता हूँ" का विश्वास प्रदर्शन बढ़ाता है।

उदाहरण: डॉ. आंबेडकर ने भेदभाव की परिस्थिति को शिक्षा और संघर्ष से परिवर्तन का अवसर बनाया; अरुणिमा सिन्हा ने दुर्घटना के बाद एवरेस्ट फ़तह किया; एक सिविल सेवक कठिन पोस्टिंग को "दंड" के बजाय "सेवा का अवसर" माने तो परिणाम बदल जाते हैं।

प्रशासन में: "नियम-पालन" से "समस्या-समाधान" की अभिवृत्ति, नागरिक को "याचक" के बजाय "ग्राहक/अधिकार-धारक" मानना — मिशन कर्मयोगी का "नियम से भूमिका" (rule to role) दृष्टिकोण।

सीमा: संरचनात्मक बाधाएँ (गरीबी, भेदभाव) केवल अभिवृत्ति से नहीं मिटतीं — व्यक्तिगत अभिवृत्ति और सामाजिक सुधार दोनों आवश्यक।

निष्कर्ष: अभिवृत्ति "भीतर का परिवर्तन" है जो "बाहर के परिवर्तन" का पहला कदम बनता है।

Q2UPSC 2025 · GS-4 · Q1(a) · 10 अंक

सोशल मीडिया के व्यापक उपयोग से उत्पन्न होने वाली नैतिक दुविधाओं की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति, सूचना और संपर्क का लोकतंत्रीकरण किया है, पर साथ ही अनेक नैतिक दुविधाएँ भी उत्पन्न की हैं।

दुविधाएँ: (1) अभिव्यक्ति बनाम हानि — स्वतंत्र अभिव्यक्ति और घृणा-भाषण, फ़ेक न्यूज़ के बीच रेखा; (2) निजता बनाम सार्वजनिकता — दूसरों की तस्वीरें-वीडियो बिना सहमति साझा करना, "डॉक्सिंग"; (3) सत्य बनाम लोकप्रियता — "वायरल" होने के लिए सनसनीख़ेज़ सामग्री; (4) एल्गोरिद्म और स्वायत्तता — "इको चैंबर", ध्यान का व्यावसायिक दोहन, लत; (5) गुमनामी बनाम जवाबदेही — ट्रोलिंग, साइबर-बुलिंग; (6) सिविल सेवकों के लिए — व्यक्तिगत राय बनाम सेवा आचरण नियमों की तटस्थता; जन-संपर्क के लिए उपयोग बनाम आत्म-प्रचार; (7) बच्चे और किशोर — मानसिक स्वास्थ्य, शोषण; (8) डीपफ़ेक — छवि और सत्य का विनाश।

नैतिक दिशानिर्देश: साझा करने से पहले सत्यापन ("रुको, सोचो, जाँचो"), दूसरों की गरिमा और सहमति का सम्मान, डिजिटल साक्षरता, प्लेटफ़ॉर्मों की पारदर्शिता और जवाबदेही (IT नियम 2021), सिविल सेवकों के लिए सोशल मीडिया दिशानिर्देश।

निष्कर्ष: तकनीक तटस्थ है, उसका उपयोग नहीं — "डिजिटल नागरिकता" में स्वतंत्रता के साथ उत्तरदायित्व अनिवार्य है।

Q3अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

अभिवृत्ति की संरचना और कार्यों को स्पष्ट कीजिए। सिविल सेवक की अभिवृत्ति उसके प्रशासनिक व्यवहार को कैसे प्रभावित करती है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

संरचना (ABC): भावात्मक (भावनाएँ), व्यवहारात्मक (कार्य-प्रवृत्ति), संज्ञानात्मक (विश्वास)। उदाहरण — गरीबों के प्रति अभिवृत्ति: "वे मेहनती पर अवसरों से वंचित हैं" (संज्ञान), उनके कष्ट से सहानुभूति (भाव), उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देना (व्यवहार)।

कार्य (कात्ज़): उपयोगितावादी, ज्ञान, अहं-रक्षात्मक, मूल्य-अभिव्यंजक।

प्रशासनिक व्यवहार पर प्रभाव: (1) वंचितों के प्रति — सकारात्मक अभिवृत्ति से संवेदनशील सेवा, नकारात्मक से "लाभार्थी को परजीवी" मानने वाला व्यवहार; (2) नियमों के प्रति — "नियम साध्य" बनाम "नियम साधन"; (3) आलोचना के प्रति — रक्षात्मक बनाम सीखने वाली; (4) नवाचार और तकनीक के प्रति — परिवर्तन का स्वागत या प्रतिरोध; (5) राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति — "हाँ मंत्री" बनाम निर्भीक, निष्पक्ष सलाह; (6) अंतर्निहित पूर्वाग्रह — जाति, लिंग, धर्म के आधार पर अनजाने भेदभाव।

उदाहरण: एक ज़िलाधिकारी की "समस्या-समाधान" अभिवृत्ति ने आकांक्षी ज़िलों में सामान्य योजनाओं से असाधारण परिणाम दिए।

निष्कर्ष: प्रशिक्षण केवल "कौशल" नहीं, "अभिवृत्ति" का भी होना चाहिए — यही मिशन कर्मयोगी का मूल विचार है।

Q4अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

अभिवृत्ति और व्यवहार के बीच असंगति के कारण क्या हैं? लोक प्रशासन में इसके उदाहरण दीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

असंगति: व्यक्ति कुछ मानता है पर करता कुछ और है — जैसे लापियर (1934) के प्रयोग में।

कारण: (1) सामाजिक दबाव — समूह और वरिष्ठों की अपेक्षाएँ; (2) परिस्थितिजन्य बाधाएँ — संसाधन, समय, नियम; (3) कमज़ोर या सामान्य अभिवृत्ति — "पर्यावरण अच्छा है" जैसी सामान्य अभिवृत्ति विशिष्ट व्यवहार (कार छोड़कर बस) का पूर्वानुमान नहीं करती; (4) प्रतिस्पर्धी अभिवृत्तियाँ और हित; (5) आत्म-नियंत्रण की कमी; (6) अनुभूत नियंत्रण का अभाव (आइज़ेन)।

प्रशासन में उदाहरण: (1) अधिकारी भ्रष्टाचार को ग़लत मानता है, पर "व्यवस्था" के दबाव में चुप रहता है; (2) लैंगिक समानता का समर्थन, पर बैठकों में महिला कर्मचारियों की राय की अनदेखी; (3) पारदर्शिता का समर्थन, पर RTI आवेदनों को टालना; (4) नागरिकों से "समय पर सेवा" का वादा, पर फ़ाइलें लंबित।

असंगति घटाने के उपाय: (1) संस्थागत संस्कृति — ईमानदारी को पुरस्कार; (2) स्पष्ट नियम और व्हिसलब्लोअर संरक्षण; (3) आत्म-चिंतन और नैतिक प्रशिक्षण; (4) सार्वजनिक प्रतिबद्धता — घोषणा से व्यवहार की संभावना बढ़ती है; (5) "अनुभूत नियंत्रण" बढ़ाना — अधिकारियों को सशक्त करना।

निष्कर्ष: सत्यनिष्ठा का अर्थ ही अभिवृत्ति और आचरण की एकता है।

Q5अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

सिविल सेवक के लिए "राजनीतिक तटस्थता" और "नैतिक प्रतिबद्धता" में संतुलन क्यों आवश्यक है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

राजनीतिक तटस्थता: सिविल सेवक किसी दल के प्रति निष्ठा नहीं रखता; निर्वाचित सरकार चाहे जो हो, वह समान निष्ठा और दक्षता से काम करता है (केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम 1964 — राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध)।

नैतिक प्रतिबद्धता: संविधान, क़ानून के शासन, जनहित, कमज़ोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और सत्यनिष्ठा के प्रति अडिग निष्ठा।

संतुलन क्यों: (1) केवल "तटस्थता" का अर्थ "मूल्य-शून्यता" हो जाए तो अधिकारी अनैतिक आदेशों का भी "तटस्थ" पालन कर सकता है (आपातकाल 1975-77 में "प्रतिबद्ध नौकरशाही" का अनुभव; नूर्नबर्ग में "मैं तो आदेश मान रहा था" की अस्वीकृति); (2) केवल "प्रतिबद्धता" का अर्थ अपनी विचारधारा थोपना हो जाए तो लोकतांत्रिक जनादेश की अवहेलना; (3) संविधान ही वह साझा आधार है जो दोनों को जोड़ता है।

व्यवहार में: नीतिगत विषयों पर निर्भीक, स्पष्ट सलाह (फ़ाइल पर लिखित), निर्णय के बाद ईमानदार क्रियान्वयन; पर अवैध या असंवैधानिक आदेश पर लिखित आपत्ति और इनकार।

निष्कर्ष: सिविल सेवक "दल के प्रति तटस्थ, संविधान के प्रति प्रतिबद्ध" — यही "प्रतिबद्ध नौकरशाही" और "मूल्य-शून्य नौकरशाही" के बीच का सही मार्ग है।

Q6अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

जन-व्यवहार में परिवर्तन के लिए सरकारें अनुनयन और "नज" (nudge) का उपयोग कैसे करती हैं? भारतीय उदाहरणों सहित इसकी नैतिकता का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: क़ानून और दंड से हर व्यवहार नहीं बदलता — स्वच्छता, टीकाकरण, बालिका शिक्षा जैसे विषयों में अभिवृत्ति परिवर्तन आवश्यक है।

अनुनयन के तत्व (होवलैंड): विश्वसनीय स्रोत, स्पष्ट-भावनात्मक संदेश, लक्षित श्रोता, उपयुक्त माध्यम; ELM के केंद्रीय (तर्क) और परिधीय (प्रसिद्ध चेहरे) मार्ग।

नज: थेलर-सनस्टीन — "विकल्प संरचना" (choice architecture) को इस तरह बदलना कि लोग स्वतंत्रता खोए बिना बेहतर विकल्प चुनें: डिफ़ॉल्ट विकल्प, सामाजिक मानदंड, सरल प्रक्रिया, समय पर स्मरण।

भारतीय उदाहरण: (1) पल्स पोलियो — प्रसिद्ध अभिनेता, धार्मिक नेता, घर-घर अभियान; (2) स्वच्छ भारत — "दरवाज़ा बंद" अभियान, सामाजिक मानदंड ("गाँव खुले में शौच मुक्त"), स्वच्छाग्रही; (3) Give It Up (2015) — करोड़ों परिवारों द्वारा LPG सब्सिडी का स्वैच्छिक त्याग — "सामाजिक प्रशंसा" और सरल ऑनलाइन विकल्प; (4) बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ — "सेल्फ़ी विद डॉटर"; (5) डिजिटल भुगतान — कैशबैक प्रोत्साहन; (6) कर अनुपालन — "आपके कर से बना" संदेश; आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 ने व्यवहारगत अर्थशास्त्र पर विशेष अध्याय रखा।

नैतिकता: पक्ष — स्वतंत्रता बनी रहती है ("libertarian paternalism"), कम लागत, कल्याणकारी परिणाम; चिंताएँ — (1) छिपा हेरफेर (manipulation) — व्यक्ति की स्वायत्तता और सूचित सहमति का प्रश्न; (2) सरकारी प्रचार और राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग; (3) "डार्क पैटर्न" जैसी व्यावसायिक युक्तियाँ; (4) व्यवहार पर ज़ोर देकर संरचनात्मक कारणों (गरीबी, अवसंरचना) की उपेक्षा।

नैतिक कसौटियाँ: पारदर्शिता (नज छिपा न हो), जनहित, आसान "बाहर निकलने" का विकल्प, साक्ष्य-आधारित परीक्षण, स्वतंत्र मूल्यांकन।

निष्कर्ष: अनुनयन और नज लोकतांत्रिक शासन के "कोमल उपकरण" हैं — उनका नैतिक प्रयोग नागरिक को "प्रजा" नहीं, "सहभागी" मानता है।

Q7अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

सामाजिक प्रभाव (अनुरूपता और आज्ञापालन) प्रशासनिक संगठनों में नैतिक विफलताओं का कारण कैसे बन सकता है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

अनुरूपता (ऐश): लोग समूह के स्पष्ट रूप से ग़लत निर्णय को भी मान लेते हैं — अलग दिखने के भय से। प्रशासन में — विभाग की "परंपरा" (जैसे फ़ाइल आगे बढ़ाने के लिए "सुविधा शुल्क") को चुपचाप स्वीकार करना।

आज्ञापालन (मिलग्राम): अधिकार के आदेश पर सामान्य लोग भी दूसरों को हानि पहुँचाने को तैयार — "उत्तरदायित्व का स्थानांतरण"। प्रशासन में — वरिष्ठ या राजनीतिक दबाव में अवैध आदेशों का पालन (आपातकाल में ज़बरन नसबंदी, बस्तियों का विध्वंस)।

समूह-चिंतन (जेनिस): समिति में असहमति का दमन, "सर्वसम्मति" के भ्रम में ग़लत निर्णय।

अन्य: "बाईस्टैंडर प्रभाव" — सब देखते हैं, कोई कार्रवाई नहीं करता; नैतिक "अलगाव" (moral disengagement) — "मैं तो केवल एक पुर्ज़ा हूँ"।

उपाय: (1) असहमति दर्ज करने की संस्थागत व्यवस्था (फ़ाइल नोटिंग); (2) व्हिसलब्लोअर संरक्षण; (3) "डेविल्स एडवोकेट" की भूमिका; (4) नैतिक नेतृत्व — वरिष्ठ का आदर्श; (5) प्रशिक्षण में मिलग्राम-ऐश जैसे अध्ययन और नैतिक साहस; (6) व्यक्तिगत जवाबदेही — "आदेश का पालन" बचाव नहीं।

निष्कर्ष: नैतिक संगठन वह है जहाँ "ना" कहना सुरक्षित हो।

Q8अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

पूर्वाग्रह और रूढ़ियाँ (stereotypes) अभिवृत्ति के रूप में कमज़ोर वर्गों के प्रति प्रशासनिक व्यवहार को कैसे प्रभावित करती हैं? इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

अवधारणाएँ: रूढ़ि — किसी समूह के बारे में सामान्यीकृत विश्वास (संज्ञानात्मक); पूर्वाग्रह — उसके प्रति नकारात्मक भावना (भावात्मक); भेदभाव — व्यवहार। अंतर्निहित पूर्वाग्रह (implicit bias) व्यक्ति के जाने बिना काम करते हैं।

प्रशासनिक प्रभाव: (1) पुलिस द्वारा कुछ समुदायों को "अपराधी" मानना — विमुक्त जनजातियों का ऐतिहासिक कलंक; (2) महिलाओं की शिकायतों (घरेलू हिंसा) को "पारिवारिक मामला" कहकर टालना; (3) दिव्यांगों के लिए सुलभता की अनदेखी; (4) LGBTQIA+ व्यक्तियों के साथ असंवेदनशील व्यवहार; (5) ग्रामीण और गरीब नागरिकों से अपमानजनक भाषा; (6) योजनाओं के लक्ष्यीकरण में पक्षपात।

दूर करने के उपाय: (1) संपर्क परिकल्पना (ऑलपोर्ट) — विविध समूहों से समान स्तर पर संपर्क; (2) संवेदनशीलता प्रशिक्षण और "अंतर्निहित पूर्वाग्रह" परीक्षण; (3) विविध और प्रतिनिधि नौकरशाही (आरक्षण, महिलाओं की भागीदारी); (4) मानक प्रक्रियाएँ और डेटा-आधारित निर्णय — विवेक में पक्षपात कम; (5) शिकायत निवारण और जवाबदेही; (6) संवैधानिक मूल्यों (अनुच्छेद 14-17) का आंतरिकीकरण।

निष्कर्ष: निष्पक्ष प्रशासन की पहली शर्त है — अपने भीतर के पूर्वाग्रहों को पहचानने का साहस।

Q9अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

संज्ञानात्मक असंगति की अवधारणा स्पष्ट कीजिए। यह भ्रष्टाचार के "सामान्यीकरण" को कैसे समझाती है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

अवधारणा (फ़ेस्टिंगर, 1957): जब व्यक्ति के दो विश्वासों, या विश्वास और व्यवहार के बीच टकराव होता है, तो वह मानसिक असुविधा (असंगति) महसूस करता है और उसे कम करने के लिए — (1) व्यवहार बदलता है, (2) विश्वास बदलता है, या (3) नए तर्क (औचित्य) गढ़ता है।

भ्रष्टाचार का सामान्यीकरण: एक ईमानदार अधिकारी पहली बार "छोटा उपहार" स्वीकार करता है — उसका विश्वास ("मैं ईमानदार हूँ") और व्यवहार टकराते हैं। व्यवहार बदलने के बजाय वह तर्क गढ़ता है: "यह तो परंपरा है", "सब लेते हैं", "वेतन कम है", "मैंने किसी का नुक़सान नहीं किया", "यह तो धन्यवाद है"। हर बार असंगति कम होती जाती है और अनैतिकता "सामान्य" लगने लगती है — "फिसलन भरी ढलान" (slippery slope)। संगठन में जब बहुत से लोग ऐसा करते हैं, तो पूरी संस्कृति बदल जाती है।

निवारण: (1) "पहले कदम" पर ही दृढ़ता — छोटे समझौते से इनकार; (2) स्पष्ट आचार संहिता — उपहार नियम; (3) नैतिक नेतृत्व और सहकर्मी समर्थन; (4) नियमित आत्म-चिंतन; (5) पारदर्शिता — विवेक कम करना (ई-गवर्नेंस); (6) सार्वजनिक प्रतिबद्धता (सत्यनिष्ठा शपथ)।

निष्कर्ष: असंगति का सही समाधान "तर्क गढ़ना" नहीं, "आचरण सुधारना" है।

Q10अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

अभिवृत्ति (attitude) और अभिक्षमता (aptitude) में अंतर स्पष्ट कीजिए। सिविल सेवा के लिए दोनों का महत्व बताइए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

अंतर: (1) अर्थ — अभिवृत्ति किसी वस्तु के प्रति मूल्यांकनात्मक झुकाव ("मैं कैसा महसूस करता/सोचता हूँ"); अभिक्षमता किसी कार्य को सीखने-करने की संभावित क्षमता ("मैं क्या कर सकता हूँ"); (2) प्रकृति — अभिवृत्ति भावात्मक-मूल्य आधारित; अभिक्षमता संज्ञानात्मक-कौशल आधारित; (3) परिवर्तनशीलता — अभिवृत्ति अनुनयन और अनुभव से बदलती है; अभिक्षमता अपेक्षाकृत स्थिर, प्रशिक्षण से विकसित; (4) मापन — अभिवृत्ति सर्वेक्षण-पैमानों से; अभिक्षमता परीक्षणों से (UPSC प्रारंभिक में CSAT)।

सिविल सेवा में महत्व: अभिक्षमता — विश्लेषण, निर्णय, समस्या-समाधान, संचार, नेतृत्व; अभिवृत्ति — सेवा-भाव, ईमानदारी, सहानुभूति, वस्तुनिष्ठता, परिवर्तन के प्रति खुलापन।

संबंध: उच्च अभिक्षमता पर नकारात्मक अभिवृत्ति = कुशल पर भ्रष्ट या असंवेदनशील अधिकारी (ख़तरनाक); अच्छी अभिवृत्ति पर कम अभिक्षमता = नेक पर अप्रभावी अधिकारी। दोनों का मेल ही "सक्षम और नैतिक" सिविल सेवक बनाता है।

निष्कर्ष: "योग्यता द्वार खोलती है, अभिवृत्ति तय करती है कि आप भीतर क्या करेंगे।"

Q11अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

सरकारी कर्मचारियों में परिवर्तन (नई तकनीक, नई कार्य-पद्धति) के प्रति प्रतिरोधी अभिवृत्ति के कारण क्या हैं? इसे कैसे बदला जा सकता है? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

कारण: (1) अनिश्चितता का भय — नई प्रणाली में ग़लती और दंड का डर; (2) कौशल की कमी — विशेषकर वरिष्ठ कर्मचारियों में डिजिटल असहजता; (3) शक्ति और विवेक का घटना — ई-गवर्नेंस से कुछ लोगों का "प्रभाव" और अनौपचारिक लाभ समाप्त; (4) आदत और जड़ता — "हमेशा से ऐसे ही होता आया है"; (5) परामर्श के बिना ऊपर से थोपना — स्वामित्व की कमी; (6) अतिरिक्त कार्यभार — संक्रमणकाल में दोहरी प्रणालियाँ; (7) पिछले असफल प्रयोगों का अनुभव।

अभिवृत्ति बदलने के उपाय (अभिवृत्ति सिद्धांतों के आधार पर): (1) संज्ञानात्मक घटक — परिवर्तन का उद्देश्य और लाभ स्पष्ट रूप से समझाना ("आपका काम आसान होगा"); (2) भावात्मक घटक — भय का समाधान, आश्वासन कि सीखने की प्रक्रिया में ग़लतियाँ दंडित नहीं होंगी; (3) व्यवहारात्मक घटक — व्यावहारिक प्रशिक्षण, "करके सीखना", चरणबद्ध लागू करना; (4) सहभागिता — कर्मचारियों से सुझाव लेना, "परिवर्तन दूत" (change champions) बनाना; (5) सामाजिक प्रभाव — सफल सहकर्मियों के उदाहरण, सराहना और पुरस्कार; (6) नेतृत्व का आदर्श — वरिष्ठ स्वयं नई प्रणाली अपनाएँ; (7) संस्थागत समर्थन — हेल्पडेस्क, उपकरण, मिशन कर्मयोगी के मॉड्यूल।

उदाहरण: ई-ऑफ़िस, GeM, DBT जैसी प्रणालियाँ उन विभागों में अधिक सफल रहीं जहाँ प्रशिक्षण और नेतृत्व का समर्थन मज़बूत था।

निष्कर्ष: परिवर्तन "आदेश" से लागू होता है, पर "अभिवृत्ति" से टिकता है।

12. Quick Revision Summary

एक नज़र में
  • अभिवृत्ति: ABC संरचना; कात्ज़ के चार कार्य; स्पष्ट और अंतर्निहित।
  • व्यवहार से संबंध: अंतराल (लापियर), नियोजित व्यवहार (आइज़ेन), असंगति (फ़ेस्टिंगर)।
  • नैतिक (स्थायी, मूल्य-आधारित) बनाम राजनीतिक (परिवर्तनशील) अभिवृत्ति; सिविल सेवक — दल-तटस्थ, संविधान-प्रतिबद्ध।
  • सामाजिक प्रभाव: अनुरूपता, आज्ञापालन, समूह-चिंतन — नैतिक साहस की आवश्यकता।
  • अनुनयन: होवलैंड, ELM; नज — पल्स पोलियो, स्वच्छ भारत, Give It Up; पारदर्शिता की कसौटी।
  • सोशल मीडिया की नैतिक दुविधाएँ; पूर्वाग्रह से मुक्ति — संपर्क, प्रशिक्षण, विविधता।