1. अध्याय एक नज़र में
मुख्य परीक्षा (पेपर 2) में सामान्य विज्ञान के लगभग 20 प्रश्नों में से 7 से 9 प्रश्न जीव विज्ञान, पर्यावरण और प्रदूषण से आते हैं। प्रश्न NCERT कक्षा 6 से 10 पर आधारित होते हैं — जैसे "पौधे भोजन कैसे बनाते हैं", "मानव पाचन तंत्र", "आहार श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह", "ओज़ोन परत का क्षय", "जल प्रदूषण के कारण"। इस अध्याय में जीवन की प्रक्रियाएँ (पोषण, श्वसन, परिवहन, उत्सर्जन, नियंत्रण, जनन), आनुवंशिकता, स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को क्रम से पढ़ेंगे।
- सजीवों का वर्गीकरण; कोशिका और ऊतक।
- जैव प्रक्रम — पोषण, श्वसन, परिवहन, उत्सर्जन; नियंत्रण एवं समन्वय; जनन।
- आनुवंशिकता, स्वास्थ्य, रोग और टीकाकरण; सूक्ष्मजीव।
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला, ऊर्जा प्रवाह; जैव-भू-रासायनिक चक्र।
- वायु, जल, मृदा, ध्वनि प्रदूषण; वैश्विक तापन, ओज़ोन क्षय, अम्ल वर्षा; संरक्षण।
2. सजीवों का वर्गीकरण
वर्गीकरण के जनक कैरोलस लिनियस हैं, जिन्होंने द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature) दी — हर जीव का नाम दो भागों में: वंश (Genus) और जाति (Species)। उदाहरण: मनुष्य — Homo sapiens, आम — Mangifera indica, बाघ — Panthera tigris। आर.एच. व्हिटेकर (1969) ने पाँच जगत वर्गीकरण दिया।
| जगत | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| मोनेरा | प्रोकैरियोटिक (स्पष्ट केंद्रक नहीं), एककोशिकीय | जीवाणु, नील-हरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) |
| प्रोटिस्टा | यूकैरियोटिक, एककोशिकीय | अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, प्लाज़्मोडियम |
| कवक (Fungi) | यूकैरियोटिक, पर्णहरित रहित, मृतोपजीवी; कोशिका भित्ति काइटिन की | यीस्ट, मशरूम, फफूँद (पेनिसिलियम) |
| पादप (Plantae) | बहुकोशिकीय, स्वपोषी, सेल्यूलोज़ भित्ति | शैवाल, मॉस, फ़र्न, अनावृतबीजी, आवृतबीजी |
| जंतु (Animalia) | बहुकोशिकीय, परपोषी, कोशिका भित्ति नहीं | स्पंज से स्तनधारी तक |
- विषाणु (Virus) किसी जगत में नहीं रखे जाते — वे सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी हैं; केवल जीवित कोशिका के अंदर गुणन करते हैं।
- पादप जगत — थैलोफ़ाइटा (शैवाल), ब्रायोफ़ाइटा ("पादप जगत के उभयचर" — मॉस), टेरिडोफ़ाइटा (फ़र्न — पहले संवहनी पौधे), जिम्नोस्पर्म (नग्न बीज — चीड़, देवदार, साइकस), एंजियोस्पर्म (फल के अंदर बीज — एकबीजपत्री: गेहूँ, धान, मक्का; द्विबीजपत्री: चना, आम, मटर)।
- जंतु जगत — पोरिफ़ेरा (स्पंज), सीलेंटरेटा (हाइड्रा, जेलीफ़िश), प्लैटिहेल्मिंथीज़ (फीताकृमि), निमेटोडा (गोलकृमि), ऐनेलिडा (केंचुआ, जोंक), आर्थ्रोपोडा (सबसे बड़ा संघ — कीट, मकड़ी, केकड़ा), मोलस्का (घोंघा, ऑक्टोपस), इकाइनोडर्मेटा (तारामछली), कॉर्डेटा (रीढ़धारी)।
- कशेरुकी वर्ग — मत्स्य (दो कक्षीय हृदय), उभयचर (मेंढक; तीन कक्षीय), सरीसृप (साँप, छिपकली; तीन कक्षीय — अपवाद मगरमच्छ चार कक्षीय), पक्षी (चार कक्षीय; खोखली हड्डियाँ), स्तनधारी (चार कक्षीय; बाल, स्तन ग्रंथियाँ; अंडे देने वाले स्तनधारी — प्लैटिपस, एकिडना)। उष्ण रक्त वाले — केवल पक्षी और स्तनधारी।
3. ऊतक
- समान संरचना और कार्य वाली कोशिकाओं का समूह ऊतक है। पादप ऊतक — विभज्योतक (विभाजित होने वाले; जड़ और तने के सिरे पर — लंबाई में वृद्धि) और स्थायी ऊतक — जाइलम (जल और खनिज ऊपर ले जाना), फ़्लोएम (भोजन का संवहन)।
- जंतु ऊतक — उपकला (आवरण), संयोजी (रक्त, अस्थि, उपास्थि, कंडरा — पेशी को अस्थि से जोड़ती है, स्नायु — अस्थि को अस्थि से), पेशी (रेखित — ऐच्छिक, अरेखित — अनैच्छिक, हृदय पेशी — अनैच्छिक पर रेखित, कभी थकती नहीं), तंत्रिका (न्यूरॉन)।
4. पोषण
- स्वपोषी — अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (हरे पौधे)। परपोषी — दूसरों पर निर्भर: प्राणीसम (मनुष्य), मृतोपजीवी (कवक — मृत पदार्थ से), परजीवी (अमरबेल/कस्कूटा, जूँ, फीताकृमि)। कीटभक्षी पौधे — घटपर्णी (Pitcher plant), ड्रॉसेरा — नाइट्रोजन की कमी वाली मिट्टी में उगते हैं। सहजीवन — लाइकेन (शैवाल + कवक), दलहनी जड़ें + राइज़ोबियम।
- प्रकाश संश्लेषण — पत्तियों के हरितलवक में; आवश्यक — CO₂ (रंध्रों से), जल (जड़ों से), सूर्य का प्रकाश, पर्णहरित। पहले ग्लूकोज़ बनता है जो मंड (Starch) के रूप में संचित होता है — आयोडीन से पत्ती की जाँच करने पर नीला-काला रंग। रंध्र (Stomata) गैसों के आदान-प्रदान और वाष्पोत्सर्जन के लिए; द्वार कोशिकाएँ इन्हें खोलती-बंद करती हैं।
- मानव पाचन तंत्र — मुख (लार में एमाइलेज़/टायलिन — मंड को शर्करा में) → ग्रासनली (क्रमाकुंचन गति) → आमाशय (HCl — अम्लीय माध्यम और कीटाणु नाश; पेप्सिन — प्रोटीन पाचन; श्लेष्मा — आमाशय की रक्षा) → छोटी आँत (सबसे लंबा भाग, ~6–7 मी; यकृत का पित्त — वसा का इमल्सीकरण; अग्न्याशय रस — ट्रिप्सिन, लाइपेज़; दीर्घरोम (Villi) — पचे भोजन का अवशोषण) → बड़ी आँत (जल का अवशोषण) → मलाशय।
- पाचन के अंतिम उत्पाद — कार्बोहाइड्रेट → ग्लूकोज़; प्रोटीन → अमीनो अम्ल; वसा → वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल।
- जुगाली करने वाले (गाय, भैंस) — आमाशय के रूमेन भाग में सेल्यूलोज़ पचाने वाले जीवाणु।
| पोषक तत्व | कार्य | स्रोत | कमी से |
|---|---|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट | ऊर्जा का मुख्य स्रोत (1 ग्राम ≈ 4 kcal) | चावल, गेहूँ, आलू, चीनी | कमज़ोरी |
| प्रोटीन | शरीर निर्माण, मरम्मत ("शरीर निर्माणक") | दालें, दूध, अंडा, मांस, सोयाबीन | क्वाशियोरकर (पेट फूलना), मरास्मस |
| वसा | सर्वाधिक ऊर्जा (1 ग्राम ≈ 9 kcal), ऊष्मा रोधी | घी, तेल, मक्खन | — |
| विटामिन एवं खनिज | "सुरक्षात्मक भोजन"; रोगों से रक्षा | फल, सब्ज़ियाँ | अपूर्णता रोग |
| रेशे (Roughage) | मल त्याग में सहायक | साबुत अनाज, सलाद | कब्ज़ |
| जल | पोषक तत्वों के परिवहन, ताप नियंत्रण | — | निर्जलीकरण (ORS से उपचार) |
5. श्वसन
- श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें भोजन (ग्लूकोज़) के ऑक्सीकरण से ऊर्जा (ATP) मुक्त होती है। यह माइटोकॉन्ड्रिया में होता है।
- वायवीय (Aerobic) — ऑक्सीजन की उपस्थिति में: ग्लूकोज़ → CO₂ + H₂O + अधिक ऊर्जा (38 ATP)। अवायवीय (Anaerobic) — ऑक्सीजन के बिना: यीस्ट में ग्लूकोज़ → एथेनॉल + CO₂ + कम ऊर्जा (किण्वन — ब्रेड, शराब, इडली); मांसपेशियों में (तेज़ व्यायाम) ग्लूकोज़ → लैक्टिक अम्ल (ऐंठन/थकान)।
- मानव श्वसन तंत्र — नासिका → ग्रसनी → स्वरयंत्र → श्वासनली → श्वसनी → कूपिकाएँ (Alveoli) (गैसों का आदान-प्रदान)। श्वास लेते समय डायफ़्राम नीचे और पसलियाँ ऊपर-बाहर जाती हैं।
- पौधे भी श्वसन करते हैं — दिन-रात दोनों समय; रात में केवल श्वसन (CO₂ छोड़ते हैं), इसलिए रात में पेड़ के नीचे सोना ठीक नहीं माना जाता।
- मछली गलफड़ों (Gills) से, केंचुआ त्वचा से, कीट श्वास रंध्रों (Spiracles) से, मेंढक फेफड़ों और नम त्वचा से श्वसन करते हैं।
6. परिवहन एवं उत्सर्जन
- मानव हृदय — चार कक्ष (दो अलिंद, दो निलय); दोहरा परिसंचरण (एक बार हृदय से फेफड़ों तक और एक बार शरीर तक)। धमनी — हृदय से शरीर की ओर रक्त (ऑक्सीजनित; अपवाद — फुफ्फुसीय धमनी में अनॉक्सीजनित); मोटी, लचीली दीवार। शिरा — शरीर से हृदय की ओर (अनॉक्सीजनित; अपवाद — फुफ्फुसीय शिरा); वाल्व होते हैं। केशिकाएँ — सबसे पतली, पदार्थों का आदान-प्रदान।
- रक्त के घटक — प्लाज़्मा (~55%), RBC (हीमोग्लोबिन — ऑक्सीजन परिवहन; मनुष्य में केंद्रक रहित), WBC (रोगों से रक्षा; "शरीर के सैनिक"), प्लेटलेट्स (रक्त का थक्का; डेंगू में घटती हैं)।
- हृदय धड़कन की खोज में "पेसमेकर" — SA नोड। रक्तचाप मापक — स्फ़िग्मोमैनोमीटर। पहला हृदय प्रत्यारोपण — क्रिश्चियन बर्नार्ड (1967)।
- पादपों में परिवहन — जाइलम से जल ऊपर (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव मुख्य कारण); फ़्लोएम से भोजन (स्थानांतरण, दोनों दिशाओं में)।
- उत्सर्जन — शरीर से हानिकारक नाइट्रोजनी अपशिष्ट (यूरिया) निकालना। मानव उत्सर्जन तंत्र — दो वृक्क (किडनी) → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग। वृक्क की कार्यात्मक इकाई — नेफ़्रॉन (हर वृक्क में ~10 लाख); छनन बोमन संपुट/ग्लोमेरुलस में। वृक्क विफलता में डायलिसिस। यकृत में अमोनिया से यूरिया बनता है।
- पादप उत्सर्जन — पत्तियाँ गिराकर, गोंद-रेज़िन के रूप में, वाष्पोत्सर्जन से अतिरिक्त जल।
7. नियंत्रण एवं समन्वय
- तंत्रिका तंत्र — केंद्रीय (मस्तिष्क + मेरुरज्जु) और परिधीय। मस्तिष्क कपाल में सुरक्षित; तीन भाग — अग्रमस्तिष्क (प्रमस्तिष्क — सोचना, स्मृति, बुद्धि), मध्यमस्तिष्क, पश्चमस्तिष्क (अनुमस्तिष्क — शरीर का संतुलन, ऐच्छिक गतियों का समन्वय; मेडुला — हृदय गति, श्वसन, रक्तचाप, उल्टी, छींक जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ)।
- प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex) — गर्म वस्तु छूते ही हाथ हटाना; इसका नियंत्रण मेरुरज्जु करती है (मस्तिष्क तक संदेश जाने से पहले)। पथ को प्रतिवर्ती चाप कहते हैं।
- अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (नलिकाविहीन; हार्मोन सीधे रक्त में):
| ग्रंथि | हार्मोन | कार्य / विकार |
|---|---|---|
| पीयूष (Pituitary) — "मास्टर ग्रंथि" | वृद्धि हार्मोन (GH) | अधिकता — महाकायता; कमी — बौनापन |
| थायरॉयड | थायरॉक्सिन (आयोडीन आवश्यक) | उपापचय नियंत्रण; आयोडीन की कमी — घेंघा |
| अग्न्याशय (आइलेट्स ऑफ़ लैंगरहैंस) | इंसुलिन, ग्लूकागॉन | रक्त शर्करा नियंत्रण; इंसुलिन की कमी — मधुमेह |
| अधिवृक्क (Adrenal) | एड्रिनलीन — "आपातकालीन/लड़ो-या-भागो हार्मोन" | डर, क्रोध में हृदय गति, रक्तचाप बढ़ाना |
| वृषण / अंडाशय | टेस्टोस्टेरॉन / एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरॉन | यौवनारंभ के लक्षण |
पादप में समन्वय — हार्मोन (ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल, एथिलीन) और अनुवर्तन (Tropism): प्रकाशानुवर्तन (तना प्रकाश की ओर — ऑक्सिन के कारण), गुरुत्वानुवर्तन (जड़ नीचे की ओर), जलानुवर्तन (जड़ जल की ओर), स्पर्शानुवर्तन (लता का सहारे से लिपटना)। छुईमुई (Mimosa) का पत्तियाँ मोड़ना — स्पर्श की प्रतिक्रिया (वृद्धि रहित गति)।
8. जनन एवं आनुवंशिकता
- अलैंगिक जनन — विखंडन (अमीबा — द्विखंडन; प्लाज़्मोडियम — बहुखंडन), मुकुलन (यीस्ट, हाइड्रा), खंडन (स्पाइरोगायरा), पुनरुद्भवन (प्लेनेरिया), बीजाणु (राइज़ोपस/ब्रेड मोल्ड), कायिक प्रवर्धन — आलू (कंद/आँख), ब्रायोफ़िलम (पत्ती की कलिकाएँ), गन्ना (तने की कटिंग), गुलाब (कलम), आम (कलम बाँधना/ग्राफ़्टिंग)।
- पुष्प के भाग — बाह्यदल, दल (पंखुड़ी), पुंकेसर (नर भाग — परागकोश में परागकण), स्त्रीकेसर (मादा — वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय)। परागण — स्व और पर (कीट, वायु, जल से)। निषेचन के बाद अंडाशय → फल, बीजांड → बीज।
- मानव में निषेचन अंडवाहिनी (फ़ैलोपियन ट्यूब) में; भ्रूण गर्भाशय में अपरा (Placenta) से पोषण पाता है। गर्भकाल लगभग 9 महीने (~280 दिन)।
- भारत में लड़कियों की विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष। भ्रूण का लिंग परीक्षण अवैध है (PCPNDT अधिनियम, 1994) — पुलिस के लिए महत्वपूर्ण।
- मेंडल के नियम — मटर (Pisum sativum) पर प्रयोग; प्रभाविता का नियम, पृथक्करण का नियम (युग्मकों की शुद्धता), स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम। एकसंकर क्रॉस में F₂ पीढ़ी का लक्षणप्ररूप अनुपात 3 : 1, जीनप्ररूप 1 : 2 : 1; द्विसंकर क्रॉस में 9 : 3 : 3 : 1।
- विकास — चार्ल्स डार्विन ("प्राकृतिक वरण", "On the Origin of Species", 1859); लैमार्क (उपार्जित लक्षणों की वंशागति — जिराफ़ की लंबी गर्दन)। समजात अंग — संरचना समान, कार्य भिन्न (मनुष्य का हाथ, चमगादड़ का पंख, व्हेल का फ़्लिपर); समवृत्ति अंग — कार्य समान, संरचना भिन्न (पक्षी और कीट के पंख)। आर्कियोप्टेरिक्स — सरीसृप और पक्षी के बीच की कड़ी (जीवाश्म)।
9. स्वास्थ्य, रोग एवं सूक्ष्मजीव
- WHO के अनुसार स्वास्थ्य — शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्ण स्वस्थ होने की अवस्था, न कि केवल रोग की अनुपस्थिति।
- संक्रामक रोग — जल जनित (हैजा, टाइफ़ाइड, पीलिया/हेपेटाइटिस A, अतिसार), वायु जनित (TB, ज़ुकाम, खसरा, कोविड-19), कीट जनित (मलेरिया, डेंगू, कालाज़ार, फ़ाइलेरिया), यौन/रक्त जनित (एड्स, हेपेटाइटिस B)। असंक्रामक — मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप।
- टीकाकरण — शरीर में मृत/कमज़ोर रोगाणु डालकर प्रतिरक्षी (Antibody) बनवाना। BCG (TB), OPV/IPV (पोलियो), DPT (डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस), MMR (खसरा, गलसुआ, रूबेला)। मिशन इंद्रधनुष (2014) — पूर्ण टीकाकरण अभियान।
- प्रतिजैविक (Antibiotic) जीवाणुओं पर काम करते हैं, विषाणुओं पर नहीं — इसलिए सर्दी-ज़ुकाम में इनका अनावश्यक प्रयोग हानिकारक है।
- उपयोगी सूक्ष्मजीव — लैक्टोबैसिलस (दूध से दही), यीस्ट (ब्रेड, शराब, केक), राइज़ोबियम (नाइट्रोजन स्थिरीकरण), पेनिसिलियम (एंटीबायोटिक), अपघटक (कचरे को खाद बनाना)। हानिकारक — रोग, भोजन का सड़ना। खाद्य परिरक्षण — नमक, चीनी, तेल-सिरका, पाश्चरीकरण (दूध को ~70°C तक गर्म करके तुरंत ठंडा), सोडियम बेंज़ोएट, रेफ़्रिजरेशन।
- नशे के दुष्प्रभाव — तंबाकू में निकोटीन (फेफड़ों का कैंसर); शराब — यकृत की क्षति (सिरोसिस); मादक पदार्थों पर NDPS अधिनियम 1985 लागू होता है।
10. पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण
पर्यावरण — जीवों के चारों ओर के सभी जैविक (Biotic) और अजैविक (Abiotic — प्रकाश, ताप, जल, मिट्टी, वायु) घटक। पारिस्थितिकी (Ecology) शब्द अर्नेस्ट हेकल ने दिया। पारितंत्र (Ecosystem) शब्द ए.जी. टांसले ने दिया — एक क्षेत्र के सभी जीव और भौतिक पर्यावरण की पारस्परिक क्रिया वाली इकाई (तालाब, वन, घास का मैदान, मरुस्थल)।
- उत्पादक — हरे पौधे (स्वपोषी); प्राथमिक उपभोक्ता — शाकाहारी (हिरण, गाय, टिड्डा); द्वितीयक उपभोक्ता — मांसाहारी (मेंढक, साँप); तृतीयक / शीर्ष उपभोक्ता (बाघ, बाज़); अपघटक — जीवाणु, कवक (पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण — "प्रकृति के सफ़ाईकर्मी")।
- आहार श्रृंखला — घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज़। कई आहार श्रृंखलाएँ मिलकर आहार जाल बनाती हैं।
- 10% का नियम (लिंडमैन) — एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक केवल लगभग 10% ऊर्जा पहुँचती है, बाकी ऊष्मा और जैविक क्रियाओं में व्यय। इसलिए आहार श्रृंखला में प्रायः 3–4 पोषी स्तर ही होते हैं। ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय है (वापस नहीं लौटती), जबकि पोषक तत्व चक्रीय।
- जैव आवर्धन (Biomagnification) — DDT जैसे अजैव-निम्नीकरणीय रसायन आहार श्रृंखला में ऊपर जाते हुए बढ़ती सांद्रता में जमा होते हैं — शीर्ष उपभोक्ता (मनुष्य, बाज़) में सबसे अधिक।
- पारिस्थितिक पिरामिड — संख्या का (वृक्ष पारितंत्र में उलटा), जैवभार का (तालाब में उलटा), ऊर्जा का (हमेशा सीधा)।
- जैव-भू-रासायनिक चक्र — जल चक्र, कार्बन चक्र (प्रकाश संश्लेषण CO₂ लेता है, श्वसन-दहन छोड़ते हैं), नाइट्रोजन चक्र (स्थिरीकरण — राइज़ोबियम, बिजली चमकना; नाइट्रीकरण; विनाइट्रीकरण — स्यूडोमोनास), ऑक्सीजन चक्र।
11. प्रदूषण
| प्रदूषण | प्रमुख कारण / प्रदूषक | प्रभाव | नियंत्रण |
|---|---|---|---|
| वायु | वाहन, उद्योग, पराली जलाना; CO, SO₂, NOₓ, PM2.5, PM10 | दमा, फेफड़ों के रोग; अम्ल वर्षा; धुंध (Smog) | CNG/इलेक्ट्रिक वाहन, BS-VI ईंधन, स्थिर वैद्युत अवक्षेपित्र (उद्योग की चिमनी), वृक्षारोपण |
| जल | सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, कीटनाशक, उर्वरक | जल जनित रोग; सुपोषण (Eutrophication) — शैवाल प्रस्फुटन से ऑक्सीजन की कमी, मछलियों की मृत्यु | सीवेज उपचार संयंत्र, नमामि गंगे (2014) |
| मृदा | प्लास्टिक, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक | उर्वरता में कमी | जैविक खेती, कचरा पृथक्करण |
| ध्वनि | वाहन, लाउडस्पीकर, उद्योग | बहरापन, तनाव, अनिद्रा | साइलेंस ज़ोन, साइलेंसर |
- BOD (जैव रासायनिक ऑक्सीजन माँग) — जल प्रदूषण का सूचक; BOD जितनी अधिक, प्रदूषण उतना अधिक।
- भारी धातु प्रदूषण से रोग — मिनामाता (पारा; जापान), इटाई-इटाई (कैडमियम), ब्लैक फ़ुट (आर्सेनिक — बिहार और पश्चिम बंगाल के भूजल में आर्सेनिक की समस्या), फ़्लोरोसिस (फ़्लोराइड)।
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) — 0–50 अच्छा, 401–500 गंभीर।
- हरित गृह प्रभाव एवं वैश्विक तापन — CO₂, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, CFC, जलवाष्प ऊष्मा को रोकती हैं; अधिकता से पृथ्वी का ताप बढ़ता है → हिमनद पिघलना, समुद्र तल बढ़ना। सबसे अधिक योगदान — CO₂; प्रति अणु अधिक प्रभावी — मीथेन (धान के खेत, पशु)।
- ओज़ोन क्षय — CFC (क्लोरोफ़्लोरोकार्बन) (रेफ़्रिजरेटर, AC, एरोसोल) से; ओज़ोन छिद्र सबसे पहले अंटार्कटिका के ऊपर देखा गया; पराबैंगनी किरणों से त्वचा कैंसर। नियंत्रण — मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987); ओज़ोन दिवस 16 सितंबर। ओज़ोन परत की मोटाई डॉबसन इकाई में।
- अम्ल वर्षा — SO₂ और NOₓ से (pH 5.6 से कम); ताजमहल का "संगमरमर कैंसर" (मथुरा रिफ़ाइनरी से)।
- अंतरराष्ट्रीय प्रयास — पृथ्वी शिखर सम्मेलन (रियो, 1992), क्योटो प्रोटोकॉल (1997), पेरिस समझौता (2015) — तापमान वृद्धि 2°C (प्रयास 1.5°C) से कम रखना।
12. प्राकृतिक संसाधन एवं संरक्षण
- 3R सिद्धांत — Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुनः उपयोग), Recycle (पुनर्चक्रण)। जैव-निम्नीकरणीय (सब्ज़ी के छिलके, कागज़) और अजैव-निम्नीकरणीय (प्लास्टिक, काँच, DDT) कचरा।
- वन संरक्षण — चिपको आंदोलन (1973), उत्तराखंड — सुंदरलाल बहुगुणा, गौरा देवी, चंडीप्रसाद भट्ट; अप्पिको आंदोलन (कर्नाटक); बिश्नोई समाज (राजस्थान) — अमृता देवी ने खेजड़ी वृक्षों के लिए बलिदान (1730); नर्मदा बचाओ आंदोलन — मेधा पाटकर।
- जल संरक्षण — वर्षा जल संग्रहण; पारंपरिक प्रणालियाँ — बिहार में आहर-पइन, राजस्थान में खादिन, कुंड, टाँका, महाराष्ट्र में बंधारा, हिमाचल में कुल्ह। बिहार का "जल-जीवन-हरियाली अभियान" (2019)।
- जैव-विविधता संरक्षण — स्वस्थाने (In-situ): राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र; बाह्यस्थाने (Ex-situ): चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक। IUCN रेड डेटा बुक — संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची। जैव-विविधता के हॉटस्पॉट (भारत में 4) — हिमालय, पश्चिमी घाट-श्रीलंका, इंडो-बर्मा, सुंडालैंड (निकोबार)।
- कानून — वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, जल अधिनियम 1974, वायु अधिनियम 1981, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 (भोपाल गैस त्रासदी के बाद), जैव-विविधता अधिनियम 2002; राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) 2010।
- नवीकरणीय ऊर्जा — सौर, पवन, जल, बायोगैस, ज्वारीय, भूतापीय। भारत का लक्ष्य — 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) — भारत और फ़्रांस की पहल (2015), मुख्यालय गुरुग्राम।
13. मास्टर सारणी — सूत्र एवं अनुपात (Master Formula Table)
| विषय | सूत्र / अनुपात | अर्थ |
|---|---|---|
| प्रकाश संश्लेषण | 6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ | प्रकाश + पर्णहरित; O₂ जल से |
| वायवीय श्वसन | C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + 38 ATP | माइटोकॉन्ड्रिया |
| किण्वन (यीस्ट) | ग्लूकोज़ → 2 एथेनॉल + 2CO₂ + 2 ATP | अवायवीय |
| पेशी में अवायवीय | ग्लूकोज़ → लैक्टिक अम्ल | ऐंठन |
| ऊर्जा मान | कार्बोहाइड्रेट/प्रोटीन 4 kcal/g; वसा 9 kcal/g | वसा सर्वाधिक |
| 10% नियम | अगले स्तर की ऊर्जा = पिछले स्तर × 0.1 | लिंडमैन |
| मेंडल एकसंकर | F₂ लक्षणप्ररूप 3 : 1; जीनप्ररूप 1 : 2 : 1 | लंबा × बौना |
| मेंडल द्विसंकर | 9 : 3 : 3 : 1 | दो लक्षण |
| गुणसूत्र | मनुष्य 46 (23 जोड़े); 22 जोड़े अलिंग + 1 जोड़ा लिंग | XX / XY |
| सामान्य मानक | हृदय गति 72/मिनट; रक्तचाप 120/80; ताप 37°C; श्वसन दर 12–18/मिनट | वयस्क |
14. मास्टर सारणी — अवधारणाएँ एक नज़र में
| विषय | सबसे महत्वपूर्ण बिंदु |
|---|---|
| वर्गीकरण | लिनियस — द्विनाम; व्हिटेकर — 5 जगत; आर्थ्रोपोडा सबसे बड़ा संघ |
| पोषण | मंड — आयोडीन से नीला-काला; पित्त — वसा इमल्सीकरण; दीर्घरोम — अवशोषण |
| श्वसन | यीस्ट — एथेनॉल; पेशी — लैक्टिक अम्ल; कूपिकाएँ |
| परिवहन | धमनी-शिरा अपवाद फुफ्फुसीय; जाइलम-फ़्लोएम |
| उत्सर्जन | नेफ़्रॉन; यूरिया यकृत में बनता है |
| नियंत्रण | अनुमस्तिष्क — संतुलन; मेरुरज्जु — प्रतिवर्ती क्रिया; एड्रिनलीन — आपातकाल |
| जनन | ब्रायोफ़िलम — पत्ती से; निषेचन — अंडवाहिनी; लिंग परीक्षण अवैध |
| पारितंत्र | टांसले; 10% नियम; ऊर्जा पिरामिड सीधा; जैव आवर्धन |
| प्रदूषण | CFC — ओज़ोन; SO₂/NOₓ — अम्ल वर्षा; BOD; आर्सेनिक — बिहार भूजल |
| संरक्षण | चिपको, अमृता देवी; आहर-पइन; मॉन्ट्रियल, पेरिस; 3R |
15. माइंड मैप
- वर्गीकरण
- कोशिका, ऊतक
- पोषण, श्वसन
- परिवहन, उत्सर्जन
- नियंत्रण
- जनन, आनुवंशिकता
- रोग, टीका
- सूक्ष्मजीव
- नशे के दुष्प्रभाव
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला
- प्रदूषण
- वैश्विक समस्याएँ
- संरक्षण
16. टिप्स एवं ट्रिक्स
- पाँच जगत: "मो-प्रो-क-पा-जं" — मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप, जंतु।
- धमनी = "Away from heart" (Artery); शिरा = वापस (Vein — Valve वाली)।
- अनुमस्तिष्क = "संतुलन" — शराब पीकर लड़खड़ाना इसी पर असर से।
- प्रदूषण-कानून क्रम: वन्यजीव 72, जल 74, वायु 81, पर्यावरण 86 — "72-74-81-86"।
- विषाणु पाँच जगतों में से किसी में नहीं रखे जाते।
- सभी धमनियों में ऑक्सीजनित रक्त नहीं होता — फुफ्फुसीय धमनी अपवाद है।
- प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रण मस्तिष्क नहीं, मेरुरज्जु करती है।
- एंटीबायोटिक विषाणु जनित रोगों (जैसे ज़ुकाम) पर असर नहीं करते।
- संख्या और जैवभार के पिरामिड उलटे हो सकते हैं, ऊर्जा का पिरामिड कभी नहीं।
17. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- द्विनाम पद्धति कैरोलस लिनियस ने दी।
- पाँच जगत वर्गीकरण आर.एच. व्हिटेकर ने दिया।
- कवक की कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।
- लाइकेन शैवाल और कवक का सहजीवी संबंध है।
- घटपर्णी एक कीटभक्षी पौधा है।
- लार में पाया जाने वाला एंज़ाइम टायलिन मंड को पचाता है।
- यीस्ट अवायवीय श्वसन में एथेनॉल बनाता है।
- वृक्क की कार्यात्मक इकाई नेफ़्रॉन है।
- एड्रिनलीन को आपातकालीन हार्मोन कहते हैं।
- ब्रायोफ़िलम की पत्तियों से नए पौधे उगते हैं।
- मेंडल के एकसंकर क्रॉस में F₂ का लक्षणप्ररूप अनुपात 3 : 1 है।
- पारितंत्र शब्द ए.जी. टांसले ने दिया।
- एक पोषी स्तर से दूसरे तक लगभग 10% ऊर्जा जाती है।
- ओज़ोन परत को सबसे अधिक हानि CFC से होती है।
- चिपको आंदोलन के प्रमुख नेता सुंदरलाल बहुगुणा थे।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 में बना।
18. PYQ आधारित प्रश्न — विस्तृत उत्तर सहित
पत्ती में मंड (Starch) की उपस्थिति की जाँच के लिए किस घोल का प्रयोग किया जाता है?
- चूने का पानी
- आयोडीन घोल
- लिटमस घोल
- कॉपर सल्फ़ेट घोल
उत्तर एवं व्याख्या
मंड आयोडीन के साथ नीला-काला रंग देता है, इसलिए प्रकाश संश्लेषण के प्रयोग में पत्ती को आयोडीन घोल से जाँचा जाता है। चूने का पानी CO₂ की पहचान, लिटमस अम्ल-क्षार की पहचान और कॉपर सल्फ़ेट (बाइयूरेट परीक्षण में) प्रोटीन की जाँच में प्रयोग होता है।
उत्तर: (B) आयोडीन घोल
तेज़ व्यायाम के बाद मांसपेशियों में ऐंठन किसके जमा होने से होती है?
- एथेनॉल
- लैक्टिक अम्ल
- यूरिया
- पाइरुविक अम्ल
उत्तर एवं व्याख्या
तेज़ व्यायाम में ऑक्सीजन की कमी होने पर पेशी कोशिकाएँ अवायवीय श्वसन करती हैं, जिससे ग्लूकोज़ लैक्टिक अम्ल में बदलता है और उसके जमा होने से ऐंठन होती है। एथेनॉल यीस्ट के अवायवीय श्वसन से बनता है, यूरिया नाइट्रोजनी अपशिष्ट है और पाइरुविक अम्ल श्वसन का मध्यवर्ती उत्पाद है।
उत्तर: (B) लैक्टिक अम्ल
शरीर का संतुलन बनाए रखने वाला मस्तिष्क का भाग कौन-सा है?
- प्रमस्तिष्क
- अनुमस्तिष्क
- मेडुला
- हाइपोथैलेमस
उत्तर एवं व्याख्या
अनुमस्तिष्क (Cerebellum) शरीर की मुद्रा, संतुलन और ऐच्छिक गतियों में समन्वय करता है। प्रमस्तिष्क सोच-स्मृति का, मेडुला हृदय गति-श्वसन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं का और हाइपोथैलेमस ताप, भूख-प्यास का नियंत्रण करता है।
उत्तर: (B) अनुमस्तिष्क
किस पौधे की पत्तियों के किनारों पर स्थित कलिकाओं से नए पौधे विकसित होते हैं?
- आलू
- ब्रायोफ़िलम
- गन्ना
- प्याज़
उत्तर एवं व्याख्या
ब्रायोफ़िलम (पत्थरचट्टा) की पत्ती के किनारों पर कलिकाएँ होती हैं जो मिट्टी में गिरकर नए पौधे बनाती हैं — यह पत्ती द्वारा कायिक प्रवर्धन है। आलू में कंद की "आँख", गन्ने में तने की गाँठ और प्याज़ में शल्ककंद से प्रवर्धन होता है।
उत्तर: (B) ब्रायोफ़िलम
एक आहार श्रृंखला में उत्पादकों के पास 20,000 जूल ऊर्जा है। 10% नियम के अनुसार द्वितीयक उपभोक्ता को कितनी ऊर्जा मिलेगी?
- 2000 J
- 200 J
- 20 J
- 2 J
उत्तर एवं व्याख्या
उत्पादक (20,000 J) → प्राथमिक उपभोक्ता को 10% = 2000 J → द्वितीयक उपभोक्ता को 10% = 200 J। 2000 J प्राथमिक उपभोक्ता की ऊर्जा है और 20 J तृतीयक उपभोक्ता की।
उत्तर: (B) 200 J
जैव आवर्धन (Biomagnification) के कारण किस जीव में DDT की सांद्रता सबसे अधिक होगी?
- पादप प्लवक
- छोटी मछली
- बड़ी मछली
- मछली खाने वाला पक्षी
उत्तर एवं व्याख्या
DDT अजैव-निम्नीकरणीय है और हर पोषी स्तर पर जमा होकर बढ़ता जाता है, इसलिए शीर्ष उपभोक्ता — मछली खाने वाले पक्षी — में इसकी सांद्रता सबसे अधिक होती है (इससे उनके अंडों के छिलके पतले हो जाते हैं)। पादप प्लवक श्रृंखला के आधार पर हैं, इसलिए उनमें सबसे कम।
उत्तर: (D) मछली खाने वाला पक्षी
ओज़ोन परत के क्षय के लिए मुख्य रूप से कौन-सा रसायन उत्तरदायी है?
- कार्बन डाइऑक्साइड
- क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC)
- सल्फ़र डाइऑक्साइड
- मीथेन
उत्तर एवं व्याख्या
CFC समतापमंडल में पहुँचकर पराबैंगनी किरणों से टूटते हैं और मुक्त क्लोरीन परमाणु ओज़ोन अणुओं को नष्ट करते हैं; इसी कारण मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) से CFC पर रोक लगाई गई। CO₂ और मीथेन वैश्विक तापन के लिए, तथा SO₂ अम्ल वर्षा के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं।
उत्तर: (B) क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC)
चिपको आंदोलन किससे संबंधित है?
- जल संरक्षण
- वन संरक्षण
- वन्यजीव संरक्षण
- मृदा संरक्षण
उत्तर एवं व्याख्या
1973 में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर उन्हें कटने से बचाया — यह वन संरक्षण आंदोलन था, जिसके प्रमुख नेता सुंदरलाल बहुगुणा और चंडीप्रसाद भट्ट थे। इसका मुख्य उद्देश्य जल, वन्यजीव या मृदा संरक्षण नहीं था, यद्यपि अप्रत्यक्ष लाभ उन्हें भी मिले।
उत्तर: (B) वन संरक्षण
दूध से दही बनाने वाला जीवाणु है —
- राइज़ोबियम
- लैक्टोबैसिलस
- यीस्ट
- स्यूडोमोनास
उत्तर एवं व्याख्या
लैक्टोबैसिलस जीवाणु दूध की शर्करा (लैक्टोज़) को लैक्टिक अम्ल में बदलकर दही जमाता है। राइज़ोबियम नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है, यीस्ट (कवक) ब्रेड और शराब बनाने में तथा स्यूडोमोनास विनाइट्रीकरण में भूमिका निभाता है।
उत्तर: (B) लैक्टोबैसिलस
बिहार में आहर-पइन प्रणाली किससे संबंधित है?
- वन संरक्षण
- पारंपरिक सिंचाई एवं जल संग्रहण
- मछली पालन
- पशुपालन
उत्तर एवं व्याख्या
आहर-पइन दक्षिण बिहार (गया, औरंगाबाद, नालंदा आदि) की पारंपरिक प्रणाली है — "आहर" जल संग्रह के लिए जलाशय और "पइन" उससे खेतों तक पानी ले जाने वाली नहरें। इसका संबंध वन, मछली पालन या पशुपालन से नहीं है।
उत्तर: (B) पारंपरिक सिंचाई एवं जल संग्रहण
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. फुफ्फुसीय धमनी अनॉक्सीजनित रक्त ले जाती है। 2. प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण मेरुरज्जु करती है। 3. एंटीबायोटिक विषाणु जनित रोगों के उपचार में प्रभावी हैं।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर एवं व्याख्या
कथन 1 सही है — फुफ्फुसीय धमनी हृदय से अनॉक्सीजनित रक्त फेफड़ों तक ले जाती है (धमनियों का अपवाद)। कथन 2 सही है — गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटाने जैसी क्रियाएँ मेरुरज्जु नियंत्रित करती है। कथन 3 गलत है — एंटीबायोटिक केवल जीवाणुओं पर काम करते हैं, विषाणुओं पर नहीं।
उत्तर: (A) केवल 1 और 2
शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) मटर के पौधों के क्रॉस से प्राप्त F₁ पौधों का स्वपरागण कराया गया। F₂ में 800 पौधे मिले, तो बौने पौधों की अपेक्षित संख्या कितनी होगी?
- 100
- 200
- 400
- 600
उत्तर एवं व्याख्या
F₁ सभी Tt (लंबे) होंगे। Tt × Tt से F₂ में TT : Tt : tt = 1 : 2 : 1, यानी लंबे : बौने = 3 : 1। बौने पौधे = 800 × 1/4 = 200। 600 लंबे पौधों की संख्या है, 400 विषमयुग्मजी (Tt) पौधों की, और 100 किसी सही अनुपात से नहीं आता।
उत्तर: (B) 200
19. त्वरित पुनरावृत्ति
- वर्गीकरण: लिनियस, व्हिटेकर, 5 जगत; विषाणु किसी जगत में नहीं; मगरमच्छ का हृदय चार कक्षीय।
- पोषण: प्रकाश संश्लेषण — हरितलवक, मंड-आयोडीन; पाचन — टायलिन, पेप्सिन, पित्त, दीर्घरोम।
- श्वसन: वायवीय 38 ATP; यीस्ट — एथेनॉल; पेशी — लैक्टिक अम्ल।
- परिवहन-उत्सर्जन: फुफ्फुसीय अपवाद; नेफ़्रॉन; यूरिया यकृत में।
- नियंत्रण: अनुमस्तिष्क — संतुलन; मेरुरज्जु — प्रतिवर्ती; इंसुलिन — मधुमेह; एड्रिनलीन।
- जनन-आनुवंशिकता: ब्रायोफ़िलम; मेंडल 3:1 और 9:3:3:1; डार्विन — प्राकृतिक वरण।
- पर्यावरण: टांसले; 10% नियम; जैव आवर्धन; CFC-ओज़ोन; SO₂-अम्ल वर्षा; मॉन्ट्रियल 1987, पेरिस 2015; चिपको; आहर-पइन; 3R।