UPSC Mains · General Studies Paper III · अध्याय 10

साइबर सुरक्षा, धन शोधन, सीमा प्रबंधन एवं सुरक्षा बल

Cyber Security, Money Laundering, Border Management and Security Forces

संचार नेटवर्क और सोशल मीडिया की चुनौतियाँ, साइबर सुरक्षा, धन शोधन; सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा, संगठित अपराध और आतंकवाद; सुरक्षा बल और उनका अधिदेश।

GS-3 27 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

पाठ्यक्रम: "संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें; धन-शोधन और इसे रोकना", "सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन — संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध" तथा "विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।"

वर्षप्रश्न
2026फ़ेक न्यूज़ और आंतरिक सुरक्षा — IT नियम 2021 के संशोधन; जाली मुद्रा, धन-शोधन और आतंक वित्तपोषण — FATF
2025समुद्री सुरक्षा और समुद्री व्यापार
2024चीन और पाकिस्तान सीमाएँ — BADP और BIM; सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग से सुरक्षा चुनौतियाँ; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023

2. साइबर सुरक्षा

  • ख़तरे: साइबर अपराध (वित्तीय धोखाधड़ी, "डिजिटल अरेस्ट" घोटाले, फ़िशिंग), रैनसमवेयर (AIIMS दिल्ली, 2022), महत्वपूर्ण अवसंरचना पर हमले (बिजली ग्रिड, बंदरगाह, बैंकिंग), राज्य-प्रायोजित जासूसी, डेटा उल्लंघन, दुष्प्रचार और डीपफ़ेक, क्रिप्टो-आधारित अवैध वित्त।
  • संस्थागत ढाँचा: IT अधिनियम 2000 (धारा 66F — साइबर आतंकवाद, 69A — सामग्री अवरोधन, 79 — मध्यस्थों की "सुरक्षित बंदरगाह" छूट); CERT-In (2004 — घटना प्रतिक्रिया; 2022 के निर्देश — 6 घंटे में घटना की सूचना); NCIIPC (2014 — महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना); भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C, 2020) और 1930 हेल्पलाइन; राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र; राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति (2013) — नई रणनीति की प्रतीक्षा; संचार साथी पोर्टल।
  • डेटा संरक्षण: DPDP अधिनियम 2023 — सहमति-आधारित प्रसंस्करण, डेटा प्रधान (व्यक्ति) के अधिकार (जानकारी, सुधार, मिटाना, शिकायत, नामांकन), डेटा न्यासी के दायित्व, बच्चों के डेटा के लिए अभिभावकीय सहमति, "महत्वपूर्ण डेटा न्यासी" के अतिरिक्त दायित्व, डेटा संरक्षण बोर्ड, ₹250 करोड़ तक जुर्माना; DPDP नियम 2025 (चरणबद्ध क्रियान्वयन)।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक CERT-Inघटना प्रतिक्रिया NCIIPCमहत्वपूर्ण अवसंरचना I4C / 1930साइबर अपराध DPDP बोर्डडेटा संरक्षण क़ानून: IT अधिनियम 2000, IT नियम 2021, DPDP अधिनियम 2023
भारत में साइबर सुरक्षा कई संस्थाओं में बँटी है — समन्वय और एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति इसकी सबसे बड़ी आवश्यकता है।

3. सोशल मीडिया, फ़ेक न्यूज़ और एन्क्रिप्शन

  • ख़तरे: अफ़वाहों से भीड़-हिंसा (2018 में बच्चा-चोरी की अफ़वाहें), सांप्रदायिक तनाव, दंगों के दौरान भड़काऊ वीडियो, डीपफ़ेक, विदेशी दुष्प्रचार अभियान, आतंकी भर्ती, एन्क्रिप्टेड ऐप पर समन्वय।
  • IT नियम 2021: मध्यस्थों का "उचित सावधानी" दायित्व, शिकायत अधिकारी; 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ता वाले "महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों" के लिए मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल संपर्क व्यक्ति, और मैसेजिंग सेवाओं के लिए "प्रथम प्रेषक की पहचान" (traceability — नियम 4(2), न्यायालय में चुनौती); 2022 संशोधन — शिकायत अपीलीय समितियाँ; 2023 संशोधन — ऑनलाइन गेमिंग और सरकारी "फ़ैक्ट-चेक इकाई" (बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 2024 में यह प्रावधान रद्द किया); 2025 में सामग्री हटाने के आदेश वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित करने और AI-जनित ("सिंथेटिक") सामग्री के लेबलिंग से जुड़े परिवर्तन।
  • अन्य: भारतीय न्याय संहिता 2023 में सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले झूठे बयान और राष्ट्रीय एकता को ख़तरे में डालने वाली झूठी सूचना से जुड़े अपराध; सहयोग पोर्टल (सामग्री हटाने के अनुरोधों का केंद्रीकृत मंच)।
  • संतुलन: अनुच्छेद 19(1)(a) — श्रेया सिंघल (2015) ने IT अधिनियम की धारा 66A रद्द की; निजता (पुट्टस्वामी 2017) — एन्क्रिप्शन तोड़ना सभी उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा कमज़ोर करता है।

4. धन-शोधन, जाली मुद्रा और आतंक वित्तपोषण

  • धन-शोधन के चरण: प्लेसमेंट (अवैध धन को वित्तीय प्रणाली में डालना) → लेयरिंग (कई लेन-देन से स्रोत छिपाना) → इंटीग्रेशन (वैध संपत्ति के रूप में वापसी)।
  • भारत का ढाँचा: PMLA 2002 — प्रवर्तन निदेशालय (ED), वित्तीय आसूचना इकाई (FIU-IND), संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट; भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018; बेनामी लेन-देन (संशोधन) अधिनियम 2016; विजय मदनलाल चौधरी (2022) — PMLA के कठोर प्रावधान वैध।
  • जाली भारतीय मुद्रा (FICN): सीमापार से तस्करी, आतंक वित्त का साधन; FICN समन्वय समूह, NIA की आतंक वित्तपोषण एवं जाली मुद्रा प्रकोष्ठ; 2016 का विमुद्रीकरण; नए नोटों में सुरक्षा विशेषताएँ।
  • FATF: 1989 में G7 द्वारा गठित; भारत 2010 से सदस्य; 2023-24 के पारस्परिक मूल्यांकन में भारत को "नियमित अनुवर्ती" (regular follow-up) — सर्वोच्च श्रेणी; पाकिस्तान 2018-2022 तक "ग्रे लिस्ट" में रहा।

5. सीमा प्रबंधन

पड़ोसीसीमा (लगभग)रक्षक बलप्रमुख चुनौती
बांग्लादेश4,097 किमी (सबसे लंबी)BSFघुसपैठ, पशु-तस्करी, नदी सीमा
चीन3,488 किमी (LAC)ITBP, सेनाअनिर्धारित LAC, अवसंरचना प्रतिस्पर्धा
पाकिस्तान3,323 किमी (नियंत्रण रेखा सहित)BSF, सेनाघुसपैठ, ड्रोन, आतंक
नेपाल1,751 किमी (खुली)SSBअवैध गतिविधियों का दुरुपयोग
म्यांमार1,643 किमीअसम राइफ़ल्सउग्रवादी, ड्रग्स, शरणार्थी
भूटान699 किमी (खुली)SSBउग्रवादी शरण (अतीत)
  • BIM (सीमा अवसंरचना और प्रबंधन) योजना: बाड़, सीमा सड़कें, फ़्लड-लाइट, सीमा चौकियाँ, तकनीकी समाधान; CIBMS (व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली) — "स्मार्ट फ़ेंसिंग" (जम्मू, असम के धुबरी में BOLD-QIT)।
  • BADP (1986-87) — सीमावर्ती गाँवों का विकास; वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (2023) — उत्तरी सीमा; दूसरा चरण (2025) अन्य स्थल सीमाओं के लिए।
  • सीमा अवसंरचना: BRO की सड़कें-सुरंगें (सेला सुरंग 2024), उन्नत लैंडिंग मैदान — चीन के सीमावर्ती "शियाओकांग" गाँवों और तीव्र अवसंरचना के उत्तर में।

6. सुरक्षा बल और उनके अधिदेश

बलमंत्रालयमुख्य अधिदेश
CRPFगृहआंतरिक सुरक्षा, LWE, दंगा नियंत्रण
BSFगृहपाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा
ITBPगृहचीन सीमा (LAC)
SSBगृहनेपाल और भूटान सीमा
असम राइफ़ल्सगृह (प्रशासन), सेना (परिचालन)म्यांमार सीमा, पूर्वोत्तर में उग्रवाद-रोधी
CISFगृहहवाई अड्डे, परमाणु-औद्योगिक प्रतिष्ठान, मेट्रो
NSGगृहआतंकवाद-रोधी, बंधक मुक्ति
भारतीय तटरक्षकरक्षासमुद्री क़ानून प्रवर्तन, तटीय सुरक्षा, खोज-बचाव

7. समुद्री सुरक्षा

  • महत्व: लगभग 11,098 किमी तटरेखा (2024 की नई गणना), लगभग 23 लाख वर्ग किमी से अधिक का EEZ; व्यापार का अधिकांश भाग (मात्रा से) समुद्र से; ऊर्जा आयात।
  • ख़तरे: समुद्री आतंकवाद (26/11), समुद्री डकैती (सोमालिया तट — 2023-24 में पुनरुत्थान), लाल सागर में व्यापारिक जहाज़ों पर हमले, तस्करी (ड्रग्स, हथियार), अवैध मत्स्यन, चीनी "शोध" और निगरानी पोत, चोक पॉइंट्स पर जोखिम, जलवायु और आपदाएँ।
  • ढाँचा: 26/11 के बाद त्रि-स्तरीय तटीय सुरक्षा — नौसेना, तटरक्षक, समुद्री पुलिस; IMAC (गुरुग्राम) और IFC-IOR (2018); तटीय रडार शृंखला; "सागर कवच" अभ्यास; राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (2022); ऑपरेशन संकल्प (2019 से); 2024 में समुद्री डकैती-रोधी अभियान और अपहृत जहाज़ों की मुक्ति; SAGAR → MAHASAGAR; Quad का IPMDA।

8. विस्तृत विवेचन: संगठित अपराध और आतंकवाद का गठजोड़; ड्रोन-ख़तरा

GS-3 के पाठ्यक्रम में "संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध" स्पष्ट रूप से लिखा है। दोनों अलग-अलग उद्देश्यों से चलते हैं: संगठित अपराध का लक्ष्य लाभ है, आतंकवाद का लक्ष्य राजनीतिक-वैचारिक। पर दोनों को एक-दूसरे की आवश्यकता होती है: आतंकवादियों को धन, हथियार, जाली दस्तावेज़ और तस्करी के मार्ग चाहिए, जबकि अपराधी गिरोहों को संरक्षण और नए बाज़ार।

गठजोड़ का क्षेत्रकैसे काम करता हैभारत से उदाहरण
मादक पदार्थों की तस्करी (नार्को-आतंकवाद)"स्वर्णिम अर्धचंद्र" (Golden Crescent) क्षेत्र से हेरोइन; बिक्री से आतंक-वित्तपोषणपंजाब और जम्मू-कश्मीर सीमा पर तस्करी; गुजरात तट पर बड़ी ज़ब्तियाँ
हथियारों की तस्करीसीमा-पार से छोटे हथियार; पूर्वोत्तर में म्यांमार सीमा सेउग्रवादी समूहों और आपराधिक गिरोहों के बीच हथियारों का लेन-देन
जाली मुद्राउच्च गुणवत्ता के नक़ली नोटों से अर्थव्यवस्था को क्षति और आतंक-वित्तFICN समन्वय समूह; NIA की जाँच
हवाला और धन-शोधनअनौपचारिक धन-हस्तांतरण से निगरानी से बचावPMLA, FIU-IND, FATF मानक
मानव तस्करी और अवैध प्रवासनजाली पहचान-पत्र, सीमा-पार आवाजाहीसीमावर्ती ज़िलों में दस्तावेज़-जालसाज़ी
साइबर अपराध और क्रिप्टोफिरौती (ransomware), ऑनलाइन धोखाधड़ी, क्रिप्टो-वॉलेट से वित्त"डिजिटल अरेस्ट" जैसे संगठित ठगी-तंत्र, जिनमें विदेश स्थित "scam compounds" से संचालन की रिपोर्टें
गैंगस्टर-आतंक गठजोड़जेलों और विदेश से संचालित गिरोह; लक्षित हत्याएँNIA ने गैंगस्टर-आतंक गठजोड़ पर UAPA के तहत मामले दर्ज किए हैं
संस्थागत उत्तर
  • क़ानून: UAPA (आतंक-वित्तपोषण, संगठनों पर प्रतिबंध); NDPS अधिनियम 1985; PMLA 2002; भारतीय न्याय संहिता 2023 में "संगठित अपराध" और "आतंकवादी कृत्य" की पहली बार सामान्य आपराधिक क़ानून में परिभाषा; राज्यों के संगठित अपराध क़ानून (जैसे महाराष्ट्र का MCOCA)।
  • एजेंसियाँ: NIA (2008, मुंबई हमलों के बाद), NCB, DRI, ED, FIU-IND; बहु-एजेंसी केंद्र (MAC) से ख़ुफ़िया-साझाकरण; NATGRID।
  • अंतरराष्ट्रीय: FATF (2024 की पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट में भारत को "नियमित अनुवर्ती" श्रेणी में रखा गया); "No Money for Terror" मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (नई दिल्ली, 2022); इंटरपोल और प्रत्यर्पण संधियाँ।

ड्रोन: सस्ता, सुलभ, ख़तरनाक

2021 में जम्मू वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन-हमले ने एक नए ख़तरे को उजागर किया। पंजाब और जम्मू सीमा पर ड्रोन से हथियार, मादक पदार्थ और नक़दी गिराने की घटनाएँ बढ़ी हैं। ड्रोन कम लागत में, कम ऊँचाई पर उड़कर पारंपरिक रडार से बच सकते हैं, और "झुंड" (swarm) में हमला कर सकते हैं। उत्तर: एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ (रडार, RF-जैमिंग, स्पूफ़िंग, लेज़र जैसे "सॉफ़्ट किल" और "हार्ड किल" उपाय; DRDO की स्वदेशी प्रणाली); ड्रोन नियम 2021 (डिजिटल स्काई मंच, ग्रीन-येलो-रेड ज़ोन, पंजीकरण); सीमा पर तकनीकी निगरानी (CIBMS); और ड्रोन फ़ोरेंसिक्स। दूसरी ओर, ड्रोन कृषि, आपदा-प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स में उपयोगी भी हैं ("ड्रोन दीदी" जैसी योजनाएँ), इसलिए नीति को सुरक्षा और नवाचार का संतुलन बनाना है।

P1अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच बढ़ते गठजोड़ के कारणों की विवेचना कीजिए। इसके विरुद्ध भारत की रणनीति में कौन-से सुधार आवश्यक हैं? (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: संगठित अपराध और आतंकवाद के उद्देश्य भिन्न हैं, पर साधन साझा हैं: तस्करी-मार्ग, हथियार, जाली दस्तावेज़, हवाला और हिंसा। भारत, जो "स्वर्णिम अर्धचंद्र" और "स्वर्णिम त्रिकोण" के बीच स्थित है, इस गठजोड़ के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है।

बढ़ते गठजोड़ के कारण:

  • आतंक-वित्त पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण: राज्य-प्रायोजित धन और औपचारिक बैंकिंग पर निगरानी बढ़ने से आतंकी समूह अपराध (ड्रग्स, फिरौती, जाली मुद्रा) पर अधिक निर्भर।
  • भौगोलिक कारक: लंबी और कठिन सीमाएँ, खुली सीमाएँ (नेपाल, म्यांमार), लंबी तटरेखा।
  • प्रौद्योगिकी: ड्रोन, एन्क्रिप्टेड संचार, क्रिप्टोकरेंसी, डार्क वेब।
  • जेल-नेटवर्क: जेलों से संचालित गिरोह और भर्ती।
  • विदेश में बैठे संचालक और प्रत्यर्पण की कठिनाई।
  • स्थानीय शासन की कमज़ोरी और भ्रष्टाचार।

आवश्यक सुधार:

  • एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम डेटा-साझाकरण (NATGRID, MAC का पूर्ण उपयोग) और संयुक्त जाँच दल।
  • वित्तीय ख़ुफ़िया का सुदृढ़ीकरण: हवाला, क्रिप्टो और व्यापार-आधारित धन-शोधन पर निगरानी।
  • सीमा पर व्यापक एकीकृत प्रबंधन (CIBMS), एंटी-ड्रोन प्रणाली, तटीय सुरक्षा।
  • जेल-सुधार: मोबाइल जैमर, उच्च-जोखिम क़ैदियों का पृथक्करण।
  • राज्य पुलिस की क्षमता (फ़ोरेंसिक, साइबर) और त्वरित अभियोजन; दोषसिद्धि दर में सुधार।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: प्रत्यर्पण संधियाँ, FATF मंच, पड़ोसी देशों से संयुक्त अभियान।
  • मादक पदार्थों की माँग घटाने के लिए नशा-मुक्ति और पुनर्वास (नशा मुक्त भारत अभियान)।

निष्कर्ष: इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए "धन, मार्ग और भर्ती" — तीनों पर एक साथ प्रहार करने वाली समन्वित, प्रौद्योगिकी-सक्षम रणनीति आवश्यक है।

P2अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों की समीक्षा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

पृष्ठभूमि: नवंबर 2008 में आतंकवादी समुद्री मार्ग से मुंबई पहुँचे, जिसने लगभग 7,500 किमी लंबी तटरेखा और हज़ारों मछली-नौकाओं वाले तटीय क्षेत्र की निगरानी की कमज़ोरियाँ उजागर कीं।

सुधार:

  • त्रि-स्तरीय सुरक्षा: गहरे समुद्र में नौसेना, क्षेत्रीय जल में तटरक्षक बल, और तट के निकट उथले जल में राज्य समुद्री पुलिस।
  • समन्वय: नौसेना को समग्र समुद्री सुरक्षा का दायित्व; संयुक्त संचालन केंद्र (JOCs); सूचना प्रबंधन और विश्लेषण केंद्र (IMAC, गुरुग्राम) तथा हिंद महासागर क्षेत्र के लिए सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR, 2018)।
  • प्रौद्योगिकी: तटीय रडार श्रृंखला; जहाज़ों के लिए स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS); मछली-नौकाओं का पंजीकरण और ट्रांसपोंडर।
  • तटीय पुलिस थाने और नौकाएँ (तटीय सुरक्षा योजना के चरण I और II)।
  • समुदाय: मछुआरों को "आँख और कान" के रूप में; बायोमेट्रिक पहचान-पत्र; नियमित अभ्यास ("सागर कवच")।

शेष कमियाँ: राज्य समुद्री पुलिस में प्रशिक्षण और कर्मियों की कमी, नौकाओं का रख-रखाव; छोटी नौकाओं की निगरानी; राज्यों और केंद्र की एजेंसियों के बीच समन्वय; राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (NMSC, 2022 में पद सृजित) की भूमिका को संस्थागत रूप से सशक्त करना।

निष्कर्ष: तटीय सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, पर उसे "घटना के बाद की प्रतिक्रिया" से "निरंतर समुद्री जागरूकता" (Maritime Domain Awareness) में बदलना होगा।

9. Master Summary Table

क्षेत्रमुख्य बिंदुतथ्य / संस्था
साइबरCERT-In, NCIIPC, I4CIT अधिनियम 2000; CERT-In निर्देश 2022
डेटासहमति, अधिकार, बोर्डDPDP 2023; नियम 2025
सोशल मीडियामध्यस्थ दायित्व, ट्रेसबिलिटीIT नियम 2021; श्रेया सिंघल 2015
धन-शोधनप्लेसमेंट-लेयरिंग-इंटीग्रेशनPMLA 2002; FATF — नियमित अनुवर्ती (2024)
सीमाBIM, CIBMS, VVPBADP 1986-87; VVP 2023
बलCAPF के अलग अधिदेशITBP-LAC, BSF-पाक/बांग्ला, SSB-नेपाल/भूटान
समुद्रीत्रि-स्तरीय तटीय सुरक्षाIFC-IOR 2018; NMSC 2022

10. Mind Map

साइबर, धन-शोधन, सीमा, बल
साइबर
  • अपराध, युद्ध
  • DPDP
सूचना
  • फ़ेक न्यूज़
  • एन्क्रिप्शन
वित्त
  • PMLA, FICN
  • FATF
सीमा
  • स्थल — BIM
  • समुद्री
बल
  • CAPF
  • तटरक्षक, NSG

11. महत्वपूर्ण One-liners

  • IT अधिनियम: 2000; धारा 66A रद्द: श्रेया सिंघल (2015)।
  • CERT-In: 2004; NCIIPC: 2014; I4C: 2020।
  • DPDP अधिनियम: 2023; अधिकतम जुर्माना ₹250 करोड़।
  • PMLA: 2002; FATF: 1989, भारत सदस्य 2010।
  • भारत की सबसे लंबी स्थल सीमा: बांग्लादेश (लगभग 4,097 किमी)।
  • स्मार्ट फ़ेंसिंग पायलट (BOLD-QIT): धुबरी, असम।
  • IFC-IOR: गुरुग्राम, 2018; राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक: 2022।
  • असम राइफ़ल्स: दोहरा नियंत्रण (गृह मंत्रालय — प्रशासन, सेना — परिचालन)।
  • 1930: राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन।

12. टिप्स एवं ट्रिक्स

उत्तर लेखन
  • सोशल मीडिया और डेटा प्रश्नों में "सुरक्षा बनाम स्वतंत्रता-निजता" का संतुलन — श्रेया सिंघल और पुट्टस्वामी अवश्य उद्धृत करें।
  • सीमा प्रश्नों में मानचित्र और "स्थल सीमा-बल" तालिका बनाएँ।
  • धन-शोधन में तीन चरणों का चित्र और FATF का भारत-संदर्भ लिखें।
याद रखने की तरकीब

सीमा-बल: "बा-पा = BSF, ची = ITBP, ने-भू = SSB, म्या = असम राइफ़ल्स"।

13. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2026 · GS-3 · Q9 · 10 अंक

फ़ेक न्यूज़ आंतरिक सुरक्षा के लिए किस प्रकार ख़तरा है? IT नियम 2021 के संशोधनों की इससे निपटने में भूमिका पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

ख़तरा: (1) अफ़वाहों से भीड़-हिंसा (2018 की बच्चा-चोरी की घटनाएँ); (2) सांप्रदायिक-जातीय तनाव — पुराने/संपादित वीडियो का प्रसार; (3) संघर्ष के दौरान दुष्प्रचार (मणिपुर, सीमा संघर्ष); (4) डीपफ़ेक से नेताओं-संस्थाओं की विश्वसनीयता पर चोट; (5) विदेशी "सूचना युद्ध"; (6) आपदाओं और स्वास्थ्य संकटों में भ्रम; (7) चुनावी हस्तक्षेप।

IT नियम 2021 और संशोधन: (1) मध्यस्थों का "उचित सावधानी" दायित्व — झूठी, भ्रामक सामग्री हटाना, शिकायत अधिकारी; (2) महत्वपूर्ण मध्यस्थों के लिए अनुपालन अधिकारी और प्रथम प्रेषक की पहचान; (3) 2022 — शिकायत अपीलीय समितियाँ; (4) 2023 — सरकारी फ़ैक्ट-चेक इकाई का प्रावधान (बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 2024 में रद्द किया — अस्पष्टता और अभिव्यक्ति पर "chilling effect"); (5) 2025 — सामग्री हटाने के आदेश केवल वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा, कारण सहित; AI-जनित सामग्री की पहचान/लेबलिंग पर ज़ोर।

सीमाएँ: राज्य को "सत्य का निर्णायक" बनाने की आशंका, अत्यधिक हटाना (over-censorship), एन्क्रिप्टेड ऐप पर नियंत्रण कठिन।

संतुलित उपाय: स्वतंत्र फ़ैक्ट-चेकर, डिजिटल साक्षरता, प्लेटफ़ॉर्म पारदर्शिता रिपोर्ट, त्वरित आधिकारिक खंडन, डीपफ़ेक पहचान तकनीक, श्रेया सिंघल (2015) की कसौटी का पालन।

Q2UPSC 2026 · GS-3 · Q20 · 15 अंक

जाली मुद्रा, धन-शोधन और आतंक वित्तपोषण के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए। इनसे निपटने में FATF और भारत के उपायों की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

संबंध: तीनों "अवैध धन की एक ही शृंखला" के भाग हैं — (1) जाली मुद्रा (FICN) सीमापार से भेजकर अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करना और आतंकी-उग्रवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाना; (2) धन-शोधन — ड्रग्स, तस्करी, भ्रष्टाचार, साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धन को प्लेसमेंट-लेयरिंग-इंटीग्रेशन से "साफ़" करना; (3) आतंक वित्तपोषण — कभी "साफ़" धन (दान, NGO, व्यापार) को भी आतंक के लिए मोड़ना ("उल्टा धन-शोधन"); हवाला, नक़द तस्करी, व्यापार-आधारित धन-शोधन (कम/अधिक बिलिंग), क्रिप्टो — सामान्य माध्यम।

FATF की भूमिका: 40 सिफ़ारिशें — जोखिम-आधारित दृष्टिकोण, ग्राहक की उचित पहचान (KYC), संदिग्ध लेन-देन रिपोर्टिंग, लाभार्थी स्वामित्व की पारदर्शिता, आभासी परिसंपत्तियों का विनियमन, गैर-लाभकारी संस्थाओं का दुरुपयोग रोकना; पारस्परिक मूल्यांकन और "ग्रे/ब्लैक लिस्ट" — देशों पर दबाव (पाकिस्तान 2018-22 ग्रे लिस्ट में, जिसमें भारत की कूटनीति की भूमिका रही)।

भारत के उपाय: (1) क़ानून — PMLA 2002 (विजय मदनलाल चौधरी 2022 में वैध), UAPA (आतंक वित्तपोषण अपराध), भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018, बेनामी क़ानून; (2) संस्थाएँ — ED, FIU-IND, NIA की आतंक वित्तपोषण एवं जाली मुद्रा प्रकोष्ठ, FICN समन्वय समूह, DRI; (3) मुद्रा सुरक्षा — नए नोटों की सुरक्षा विशेषताएँ, 2016 का विमुद्रीकरण, डिजिटल भुगतान; (4) क्रिप्टो — आभासी डिजिटल परिसंपत्ति सेवा प्रदाताओं को PMLA के दायरे में (2023); (5) अंतरराष्ट्रीय — "No Money for Terror" सम्मेलन (2022 में नई दिल्ली), द्विपक्षीय सहयोग; (6) FATF मूल्यांकन (2024) में भारत "नियमित अनुवर्ती" श्रेणी में।

चुनौतियाँ: हवाला का अनौपचारिक नेटवर्क, क्रिप्टो-डार्क वेब, शेल कंपनियाँ, धीमी दोषसिद्धि, NGO के दुरुपयोग और वास्तविक नागरिक समाज के बीच संतुलन।

निष्कर्ष: "पैसे का पीछा करो" (follow the money) आतंकवाद-रोधी रणनीति का सबसे प्रभावी हथियार है।

Q3UPSC 2024 · GS-3 · Q19 · 15 अंक

चीन और पाकिस्तान से लगी भारत की सीमाओं की सुरक्षा चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। BADP और BIM इन चुनौतियों से निपटने में कितने सहायक हैं? (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

चीन सीमा (LAC, लगभग 3,488 किमी): (1) अनिर्धारित और विवादित रेखा — पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (हिमाचल-उत्तराखंड), पूर्वी (सिक्किम-अरुणाचल) क्षेत्र; (2) "ग्रे-ज़ोन" दबाव — गश्त में टकराव (गलवान 2020), "सलामी स्लाइसिंग"; (3) चीन की तीव्र सीमा अवसंरचना और सैन्य-नागरिक "शियाओकांग" गाँव; (4) दुर्गम भूभाग, ऊँचाई, मौसम; (5) अरुणाचल पर दावे और नाम-परिवर्तन; (6) ब्रह्मपुत्र पर बाँध।

पाकिस्तान सीमा (लगभग 3,323 किमी, नियंत्रण रेखा सहित): (1) आतंकवादियों की घुसपैठ; (2) ड्रोन से हथियार और नशीले पदार्थ (पंजाब, जम्मू); (3) सीमापार सुरंगें; (4) संघर्ष-विराम उल्लंघन; (5) कच्छ के रण और सर क्रीक जैसे दलदली-नदीय क्षेत्र; (6) तस्करी और जाली मुद्रा।

BADP (1986-87): सीमा से 0-10 किमी के गाँवों में सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य, पेयजल — पलायन रोकना और सीमावासियों को "सुरक्षा के भागीदार" बनाना; अब उत्तरी सीमा पर वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (2023) — आजीविका, पर्यटन, संपर्क पर केंद्रित। सीमा: धन का बिखराव, "अवसंरचना" पर अधिक ज़ोर, आजीविका पर कम; कई गाँवों में पलायन जारी।

BIM योजना: बाड़, सीमा सड़कें, फ़्लड-लाइट, सीमा चौकियाँ (BOP), तकनीकी निगरानी; CIBMS — सेंसर, थर्मल कैमरे, रडार से "स्मार्ट फ़ेंसिंग"; ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ; BRO की सड़कें-सुरंगें (LAC पर सामरिक सड़कें, सेला सुरंग)। सीमा: दुर्गम भूभाग में बाड़ कठिन, परियोजनाओं में देरी (भूमि, पर्यावरण अनुमति), रख-रखाव, LAC पर "बाड़" संभव नहीं — वहाँ अवसंरचना और गश्त ही उपाय।

आगे की राह: "एक सीमा, एक बल" सिद्धांत का पालन, ख़ुफ़िया एकीकरण, तकनीक (उपग्रह, UAV), सीमा अवसंरचना की गति, सीमावासियों का कौशल और आजीविका, दोहरे उपयोग वाली अवसंरचना (हवाई पट्टियाँ, सुरंगें)।

निष्कर्ष: सीमा सुरक्षा = "भौतिक बाधा + तकनीक + आबाद, समृद्ध सीमांत गाँव"।

Q4UPSC 2024 · GS-3 · Q20 · 15 अंक

सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाएँ सुरक्षा के लिए किस प्रकार चुनौती प्रस्तुत करती हैं? सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन के उपाय सुझाइए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: भारत में करोड़ों लोग सोशल मीडिया और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड (E2EE) मैसेजिंग का उपयोग करते हैं — यह सूचना-लोकतंत्र का साधन है, पर अपराधियों और शत्रुतापूर्ण तत्वों के लिए भी।

सुरक्षा चुनौतियाँ: (1) आतंकी और उग्रवादी समन्वय — एन्क्रिप्टेड चैनलों पर योजना, भर्ती; (2) कट्टरपंथ — ऑनलाइन दुष्प्रचार; (3) अफ़वाहें और भीड़-हिंसा; (4) साइबर अपराध — धोखाधड़ी, सेक्सटॉर्शन, "डिजिटल अरेस्ट"; (5) बाल यौन शोषण सामग्री; (6) विदेशी प्रभाव अभियान और फ़र्ज़ी खाते; (7) "गोइंग डार्क" — एन्क्रिप्शन के कारण क़ानूनी अवरोधन भी निष्प्रभावी; (8) विदेशी सर्वर — क्षेत्राधिकार और डेटा तक पहुँच में देरी (MLAT)।

भारत के उपाय: IT अधिनियम की धारा 69 (अवरोधन) और 69A (अवरोधन/ब्लॉकिंग); IT नियम 2021 — प्रथम प्रेषक की पहचान (traceability), शिकायत तंत्र; CERT-In निर्देश (2022) — घटनाओं की 6 घंटे में सूचना, लॉग संरक्षण; दूरसंचार अधिनियम 2023; I4C।

निजता के पक्ष: पुट्टस्वामी (2017) — सूचनात्मक निजता मौलिक अधिकार; एन्क्रिप्शन सभी नागरिकों, बैंकिंग, सरकारी संचार की सुरक्षा का आधार — "पिछला दरवाज़ा" (backdoor) बनाने से अपराधी भी उसका लाभ उठा सकते हैं; ट्रेसबिलिटी पर मैसेजिंग कंपनी की न्यायालय में चुनौती।

संतुलन के उपाय: (1) आनुपातिकता — केवल गंभीर अपराधों में, न्यायिक/स्वतंत्र निगरानी में अवरोधन (श्रीकृष्ण समिति की सिफ़ारिश); (2) एन्क्रिप्शन तोड़े बिना मेटाडेटा और उपकरण-आधारित फ़ॉरेंसिक; (3) प्लेटफ़ॉर्म सहयोग — रिपोर्ट किए गए संदेशों पर कार्रवाई, फ़ॉरवर्ड-सीमा (अफ़वाह रोकने में सहायक), फ़र्ज़ी खातों का पता; (4) डेटा तक पहुँच के अंतरराष्ट्रीय समझौते (CLOUD Act जैसा); (5) DPDP अधिनियम का संरक्षण और राज्य छूटों का सीमित उपयोग; (6) साइबर क्षमता — राज्य पुलिस में साइबर प्रकोष्ठ; (7) डिजिटल साक्षरता।

निष्कर्ष: सुरक्षा और निजता शून्य-योग खेल नहीं — "क़ानून-आधारित, आनुपातिक और जवाबदेह निगरानी" दोनों की रक्षा करती है।

Q5UPSC 2024 · GS-3 · Q10 · 10 अंक

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 की प्रमुख विशेषताओं और उससे जुड़ी चिंताओं की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

पृष्ठभूमि: पुट्टस्वामी (2017) के बाद श्रीकृष्ण समिति (2018), कई प्रारूपों के बाद अगस्त 2023 में अधिनियम; DPDP नियम 2025 से चरणबद्ध क्रियान्वयन।

विशेषताएँ: (1) डिजिटल व्यक्तिगत डेटा पर लागू (भारत के बाहर भारतीयों को सेवाएँ देने वालों पर भी); (2) सहमति — स्पष्ट, सूचित, वापस लेने योग्य; "वैध उपयोग" के कुछ अपवाद; (3) डेटा प्रधान के अधिकार — जानकारी, सुधार, मिटाना, शिकायत निवारण, नामांकन; (4) डेटा न्यासी के दायित्व — सुरक्षा उपाय, उल्लंघन की सूचना, उद्देश्य पूरा होने पर डेटा मिटाना; (5) बच्चे — सत्यापन योग्य अभिभावकीय सहमति, ट्रैकिंग-लक्षित विज्ञापन पर रोक; (6) महत्वपूर्ण डेटा न्यासी — डेटा संरक्षण अधिकारी, प्रभाव आकलन, ऑडिट; (7) डेटा संरक्षण बोर्ड; (8) ₹250 करोड़ तक जुर्माना; (9) सीमापार हस्तांतरण — सरकार द्वारा अधिसूचित देशों को छोड़कर अनुमत।

चिंताएँ: (1) राज्य और उसकी एजेंसियों को व्यापक छूट (धारा 17) — निगरानी की आशंका; (2) बोर्ड की स्वतंत्रता (सदस्यों की नियुक्ति केंद्र द्वारा); (3) RTI की धारा 8(1)(j) में संशोधन — व्यक्तिगत सूचना की छूट का विस्तार, पारदर्शिता पर प्रभाव; (4) डेटा पोर्टेबिलिटी और "भूल जाने का अधिकार" जैसे अधिकार सीमित; (5) सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा को बाहर रखना — AI प्रशिक्षण के लिए डेटा स्क्रैपिंग; (6) स्टार्टअप-MSME पर अनुपालन भार।

निष्कर्ष: अधिनियम भारत की "डेटा अर्थव्यवस्था" का आधार है; इसकी विश्वसनीयता स्वतंत्र बोर्ड और राज्य छूटों के संयमित प्रयोग पर निर्भर है।

Q6UPSC 2025 · GS-3 · Q20 · 15 अंक

भारत के समुद्री व्यापार के लिए समुद्री सुरक्षा के महत्व की चर्चा कीजिए। भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार (मात्रा के अनुसार) और लगभग पूरा तेल आयात समुद्री मार्गों से होता है; तटरेखा लगभग 11,098 किमी (2024 की नई गणना), विशाल EEZ, 1,300 से अधिक द्वीप। "ब्लू इकोनॉमी" — मत्स्य, अपतटीय ऊर्जा, बंदरगाह — भी समुद्री सुरक्षा पर निर्भर।

व्यापार के लिए महत्व: (1) होर्मुज़, बाब-अल-मंदेब, मलक्का जैसे चोक पॉइंट्स पर व्यवधान से ऊर्जा और माल की लागत; (2) लाल सागर संकट (2023-24) — जहाज़ों का केप ऑफ़ गुड होप से मार्ग, माल ढुलाई और बीमा महँगा; (3) समुद्री डकैती — सोमालिया तट पर पुनरुत्थान; (4) बंदरगाहों और समुद्री केबलों की सुरक्षा; (5) तस्करी और अवैध मत्स्यन से राजस्व और आजीविका की हानि।

समुद्री सुरक्षा संरचना: (1) त्रि-स्तरीय तटीय सुरक्षा (26/11 के बाद) — नौसेना (समग्र), तटरक्षक (क्षेत्रीय जल), समुद्री पुलिस (उथले जल); (2) तटीय रडार शृंखला, AIS निगरानी, मछुआरों के लिए बायोमेट्रिक पहचान; (3) IMAC और IFC-IOR (गुरुग्राम, 2018) — साझेदार देशों के साथ सूचना संलयन; (4) राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (2022) — एजेंसियों का समन्वय; (5) नौसेना की मिशन-आधारित तैनाती — ऑपरेशन संकल्प (2019 से, खाड़ी), 2024 में अरब सागर में डकैती-रोधी अभियान और जहाज़ों-कर्मियों की मुक्ति; (6) क्षेत्रीय सहयोग — SAGAR/MAHASAGAR, कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन, Quad का IPMDA, मालदीव-मॉरीशस-सेशेल्स में रडार और क्षमता निर्माण; (7) "सागर कवच" अभ्यास।

प्रभावशीलता और कमियाँ: 26/11 के बाद तटीय घुसपैठ की कोई बड़ी घटना नहीं, क्षेत्र में "प्रथम प्रतिक्रियादाता" की विश्वसनीयता बढ़ी; पर — (1) समुद्री पुलिस की क्षमता और प्रशिक्षण कमज़ोर; (2) छोटे जहाज़ों (20 मीटर से कम) की ट्रैकिंग कठिन; (3) एजेंसियों में ओवरलैप; (4) नौसेना के लिए जहाज़ों-पनडुब्बियों की संख्या की कमी, चीन की बढ़ती उपस्थिति; (5) व्यापक समुद्री सुरक्षा क़ानून/सिद्धांत की कमी।

आगे की राह: समुद्री पुलिस का केंद्रीय प्रशिक्षण, समुद्री डोमेन जागरूकता के लिए उपग्रह और ड्रोन, स्वदेशी जहाज़ निर्माण, बंदरगाह साइबर सुरक्षा, क्षेत्रीय साझेदारी।

निष्कर्ष: "समुद्र भारत की समृद्धि की धमनी है" — समुद्री सुरक्षा ही व्यापार सुरक्षा है।

Q7अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 15 अंक

भारत में साइबर सुरक्षा संरचना की कमियों का विश्लेषण कीजिए और एक व्यापक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति के तत्व सुझाइए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: UPI, आधार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और करोड़ों इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ भारत विश्व के सबसे बड़े डिजिटल समाजों में है — इसलिए साइबर हमलों का बड़ा लक्ष्य भी। AIIMS दिल्ली पर रैनसमवेयर (2022), बिजली ग्रिड पर संदिग्ध घुसपैठ, बड़े डेटा उल्लंघन और तेज़ी से बढ़ती साइबर धोखाधड़ी इसके उदाहरण हैं।

मौजूदा संरचना: IT अधिनियम 2000, CERT-In, NCIIPC, I4C, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक, सेना की रक्षा साइबर एजेंसी, क्षेत्रीय CERT (वित्त, बिजली), DPDP अधिनियम।

कमियाँ: (1) पुरानी नीति — 2013 की नीति के बाद नई राष्ट्रीय रणनीति का अभाव; (2) बिखरा ढाँचा — अनेक एजेंसियाँ, स्पष्ट नेतृत्व और ज़िम्मेदारी की कमी; (3) कुशल जनशक्ति की कमी; (4) आयातित हार्डवेयर-सॉफ़्टवेयर पर निर्भरता — आपूर्ति शृंखला जोखिम; (5) राज्य पुलिस की साइबर जाँच क्षमता कमज़ोर, कम दोषसिद्धि; (6) MSME, अस्पताल, नगर निकायों में कमज़ोर सुरक्षा; (7) साइबर बीमा और घटना-रिपोर्टिंग की संस्कृति कम; (8) अंतरराष्ट्रीय सहयोग में बाधाएँ (बुडापेस्ट अभिसमय से भारत बाहर)।

व्यापक रणनीति के तत्व: (1) शासन — एक नोडल प्राधिकरण, स्पष्ट भूमिकाएँ, क्षेत्रीय CERT; (2) महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए अनिवार्य मानक, ऑडिट, "zero trust"; (3) स्वदेशी तकनीक — विश्वसनीय स्रोत नीति, सेमीकंडक्टर, क्वांटम-सुरक्षित एन्क्रिप्शन (राष्ट्रीय क्वांटम मिशन); (4) मानव संसाधन — साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम, प्रमाणन, "साइबर कमांडो"; (5) नागरिक जागरूकता — 1930, संचार साथी, डिजिटल साक्षरता; (6) क़ानून — IT अधिनियम का आधुनिकीकरण (प्रस्तावित डिजिटल इंडिया अधिनियम), साइबर अपराधों की त्वरित सुनवाई; (7) निवारण — आक्रामक साइबर क्षमता और "साइबर निवारण सिद्धांत"; (8) अंतरराष्ट्रीय — UN मानदंड, द्विपक्षीय साइबर संवाद, Quad सहयोग; (9) सार्वजनिक-निजी भागीदारी — ख़तरे की सूचना साझा करना।

निष्कर्ष: डिजिटल भारत की सफलता की शर्त "सुरक्षित भारत" है — साइबर सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है।

Q8अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की भूमिका और उनके सामने की चुनौतियों की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

भूमिका: गृह मंत्रालय के अधीन CAPF — CRPF (आंतरिक सुरक्षा, LWE, दंगा नियंत्रण, चुनाव), BSF (पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा), ITBP (चीन सीमा), SSB (नेपाल-भूटान), असम राइफ़ल्स (म्यांमार सीमा, पूर्वोत्तर), CISF (हवाई अड्डे, औद्योगिक-परमाणु प्रतिष्ठान, मेट्रो), NSG (आतंकवाद-रोधी)। ये "एक सीमा, एक बल" सिद्धांत और राज्यों की सहायता के आधार पर काम करते हैं।

चुनौतियाँ: (1) अत्यधिक तैनाती — बार-बार चुनाव, आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी — सीमा और प्रशिक्षण पर प्रभाव; (2) तनाव और मनोबल — लंबे समय तक परिवार से दूरी, आत्महत्याएँ, कठिन परिस्थितियाँ; (3) रिक्तियाँ और कैडर मुद्दे — पदोन्नति में ठहराव, नेतृत्व पदों पर प्रतिनियुक्ति (IPS) पर विवाद; (4) उपकरण और तकनीक — ड्रोन-रोधी, निगरानी, संचार; (5) राज्य पुलिस की कमज़ोरी — CAPF पर अत्यधिक निर्भरता; (6) सेवानिवृत्ति के बाद लाभ (पुरानी पेंशन) को लेकर माँगें; (7) समन्वय — ख़ुफ़िया और सेना के साथ।

सुधार: राज्य पुलिस का आधुनिकीकरण (प्रकाश सिंह 2006 के निर्देश), तैनाती का युक्तिकरण, कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य, तकनीकी उन्नयन, कैडर सुधार, संयुक्त प्रशिक्षण।

निष्कर्ष: CAPF आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ हैं — उनकी क्षमता और कल्याण में निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा में निवेश है।

Q9अभ्यास प्रश्न · UPSC पैटर्न · 10 अंक

संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए। भारत में इस गठजोड़ को तोड़ने के उपाय बताइए। (150 शब्द)

मॉडल उत्तर

संबंध: (1) वित्त — ड्रग्स, हथियार, मानव तस्करी, जाली मुद्रा, वसूली, साइबर धोखाधड़ी से आतंक वित्तपोषण; (2) रसद — तस्करी नेटवर्क आतंकवादियों, हथियारों और विस्फोटकों को सीमा पार पहुँचाते हैं (1993 मुंबई धमाकों में आपराधिक सिंडिकेट और समुद्री तस्करी); (3) दस्तावेज़ और ठिकाने — नकली पहचान, सुरक्षित घर; (4) भर्ती — अपराधियों का कट्टरपंथीकरण; (5) विदेशों से संचालित गिरोह — लक्षित हत्याओं और वसूली में गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ (NIA की जाँचें); (6) राज्य-प्रायोजक — शत्रु देशों की एजेंसियाँ आपराधिक नेटवर्क का उपयोग करती हैं।

उपाय: (1) संगठित अपराध की क़ानूनी परिभाषा — भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 111 (संगठित अपराध) और राज्य क़ानून (MCOCA); (2) NIA और राज्य ATS/ANTF का समन्वय; (3) "पैसे का पीछा" — PMLA, FIU, संपत्ति कुर्की; (4) सीमा और तटीय सुरक्षा, ड्रोन-रोधी; (5) जेलों से संचालित गिरोहों पर नियंत्रण — जेल सुधार; (6) प्रत्यर्पण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग (इंटरपोल); (7) गवाह संरक्षण और त्वरित सुनवाई।

निष्कर्ष: अपराध और आतंक को अलग-अलग नहीं, एक ही "ख़तरा-तंत्र" के रूप में देखकर ही प्रभावी कार्रवाई संभव है।

14. Quick Revision Summary

एक नज़र में
  • साइबर: CERT-In, NCIIPC, I4C; बिखरा ढाँचा — नई राष्ट्रीय रणनीति की आवश्यकता।
  • डेटा: DPDP 2023 — अधिकार, सहमति, बोर्ड; राज्य छूट और RTI पर चिंता।
  • सोशल मीडिया: फ़ेक न्यूज़, एन्क्रिप्शन; IT नियम 2021 और संशोधन; आनुपातिक निगरानी।
  • धन-शोधन-FICN-आतंक वित्त: एक शृंखला; PMLA, NIA, FATF ("नियमित अनुवर्ती")।
  • सीमाएँ: चीन (LAC) और पाकिस्तान की चुनौतियाँ; BADP, VVP, BIM, CIBMS।
  • सुरक्षा बल: CAPF के अधिदेश; समुद्री सुरक्षा — त्रि-स्तरीय ढाँचा, IFC-IOR, NMSC।