Class 11 Economics · Chapter 2 · अर्थशास्त्र में सांख्यिकी

आँकड़ों का संग्रहण

प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़े, प्रश्नावली, सर्वेक्षण, जनगणना और प्रतिदर्श, प्रतिचयन विधियाँ और आँकड़ों के स्रोत।

NCERT भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास + अर्थशास्त्र में सांख्यिकीCBSE Class 11 17 min read

1. अध्याय एक नज़र में

किसी भी सांख्यिकीय अध्ययन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है — आँकड़ों का संग्रहण (Collection of Data)। यदि आँकड़े ही गलत या अधूरे हों, तो आगे का विश्लेषण कितना भी अच्छा हो, निष्कर्ष गलत ही होंगे। सांख्यिकी में एक प्रसिद्ध कहावत है — "कचरा अंदर, कचरा बाहर" (Garbage In, Garbage Out)।

इस अध्याय में हम सीखेंगे कि आँकड़े कहाँ से मिलते हैं (प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत), उन्हें एकत्र करने के उपकरण और विधियाँ कौन-सी हैं, प्रश्नावली कैसे बनाई जाती है, संगणना और प्रतिदर्श सर्वेक्षण में क्या अंतर है, प्रतिदर्श चुनने की विधियाँ कौन-सी हैं, और आँकड़ों में कौन-सी त्रुटियाँ हो सकती हैं। साथ ही भारत में आँकड़ों के प्रमुख स्रोतों — जनगणना और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय — के बारे में भी जानेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • आँकड़ों के उद्देश्य और स्रोत: प्राथमिक और द्वितीयक।
  • प्रश्नावली और अनुसूची; अच्छी प्रश्नावली के गुण।
  • आँकड़े एकत्र करने की विधियाँ: व्यक्तिगत साक्षात्कार, डाक, टेलीफ़ोन।
  • पायलट सर्वेक्षण।
  • संगणना बनाम प्रतिदर्श; यादृच्छिक और अयादृच्छिक प्रतिचयन।
  • प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियाँ; भारत में आँकड़ों के स्रोत।

2. आँकड़ों के स्रोत : प्राथमिक और द्वितीयक

आधारप्राथमिक आँकड़े (Primary Data)द्वितीयक आँकड़े (Secondary Data)
अर्थअन्वेषक (Investigator) द्वारा अपने उद्देश्य के लिए पहली बार स्वयं एकत्र किए गए आँकड़ेकिसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा पहले से एकत्र और प्रकाशित आँकड़े, जिनका उपयोग अन्वेषक करता है
मौलिकतामौलिक (Original) — पहली बार एकत्रमौलिक नहीं — पहले से उपलब्ध
उद्देश्य से मेलउद्देश्य के अनुरूप पूरी तरह उपयुक्तउद्देश्य से पूरी तरह मेल न खाएँ, यह संभव है
लागत और समयअधिक धन, समय और श्रमकम लागत और कम समय
विश्वसनीयताअन्वेषक स्वयं नियंत्रित करता है, इसलिए अधिक विश्वसनीयउपयोग से पहले विश्वसनीयता, उपयुक्तता और पर्याप्तता की जाँच आवश्यक
उदाहरणकिसी गाँव में स्वयं घर-घर जाकर परिवारों की आय पूछनाजनगणना रिपोर्ट या सरकारी सर्वेक्षण के प्रकाशित आँकड़ों का उपयोग
याद रखें

एक ही आँकड़ा एक व्यक्ति के लिए प्राथमिक और दूसरे के लिए द्वितीयक हो सकता है। जनगणना के आँकड़े जनगणना विभाग के लिए प्राथमिक हैं, पर उन्हें उपयोग करने वाले शोधकर्ता के लिए द्वितीयक।

द्वितीयक आँकड़ों के स्रोत

  • प्रकाशित स्रोत: सरकारी रिपोर्टें (जनगणना, आर्थिक सर्वेक्षण), RBI के बुलेटिन, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक) की रिपोर्टें, शोध-पत्र, समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ।
  • अप्रकाशित स्रोत: सरकारी कार्यालयों, संस्थाओं और शोधकर्ताओं के अभिलेख (Records) जो प्रकाशित नहीं हुए।

द्वितीयक आँकड़ों का उपयोग करते समय यह जाँचना आवश्यक है कि वे विश्वसनीय (Reliable — किसने और किस विधि से एकत्र किए), उपयुक्त (Suitable — क्या वे हमारे उद्देश्य से मेल खाते हैं, परिभाषाएँ समान हैं) और पर्याप्त (Adequate — क्या वे पूरे क्षेत्र और अवधि को कवर करते हैं) हैं।

3. आँकड़े एकत्र करने का उपकरण : प्रश्नावली

प्राथमिक आँकड़े एकत्र करने का सबसे सामान्य उपकरण है — प्रश्नावली (Questionnaire) या साक्षात्कार अनुसूची (Interview Schedule)।

प्रश्नावली (Questionnaire)अनुसूची (Schedule)
सूचनादाता (Respondent) स्वयं प्रश्न पढ़कर उत्तर भरता हैअन्वेषक/प्रगणक (Enumerator) प्रश्न पूछकर स्वयं उत्तर भरता है
सूचनादाता का साक्षर होना आवश्यकनिरक्षर सूचनादाताओं से भी जानकारी ली जा सकती है
प्रायः डाक या ऑनलाइन भेजी जाती हैव्यक्तिगत साक्षात्कार में उपयोग

अच्छी प्रश्नावली के गुण

  1. प्रश्नों की संख्या कम हो: लंबी प्रश्नावली से सूचनादाता ऊब जाता है और उत्तर अधूरे या गलत देता है।
  2. प्रश्न सरल, स्पष्ट और छोटे हों: तकनीकी शब्दों और अस्पष्ट शब्दों ("अक्सर", "सामान्यतः") से बचें।
  3. प्रश्नों का तार्किक क्रम: सामान्य से विशिष्ट की ओर; व्यक्तिगत या संवेदनशील प्रश्न अंत में।
  4. सुझावात्मक/अग्रणी प्रश्न (Leading Questions) न हों: जैसे "क्या आप नहीं मानते कि सरकार को कर घटाना चाहिए?" — यह एक विशेष उत्तर की ओर धकेलता है।
  5. दोहरे प्रश्न (Double-barrelled) न हों: जैसे "क्या आप चाय और कॉफ़ी पीते हैं?" — एक प्रश्न में दो बातें।
  6. दोहरे नकारात्मक (Double Negative) प्रश्न न हों: जैसे "क्या आप धूम्रपान न करने वालों को धूम्रपान न करने देने के पक्ष में नहीं हैं?" — भ्रामक।
  7. गणना या स्मृति पर अधिक ज़ोर न दें: "पिछले वर्ष आपने कुल कितना बिजली बिल दिया?" के स्थान पर "पिछले महीने का बिजली बिल कितना था?"
  8. संवेदनशील प्रश्नों से बचें या सावधानी से पूछें: आय, जाति, धर्म जैसे विषयों पर विकल्पों (वर्गों) के रूप में।

प्रश्नों के प्रकार

बंद (संरचित) प्रश्न — Closed-endedखुले (असंरचित) प्रश्न — Open-ended
उत्तर के विकल्प पहले से दिए होते हैं — दो-विकल्पी (हाँ/नहीं) या बहु-विकल्पीसूचनादाता अपने शब्दों में उत्तर देता है
उत्तर देना और विश्लेषण करना आसानविस्तृत और गहरी जानकारी, पर विश्लेषण कठिन
उदाहरण: "आपके परिवार की मासिक आय किस वर्ग में है? (क) ₹10,000 से कम (ख) ₹10,000–20,000 (ग) ₹20,000 से अधिक"उदाहरण: "आपके क्षेत्र में बेरोज़गारी के क्या कारण हैं?"

4. आँकड़े एकत्र करने की विधियाँ

विधिलाभसीमाएँ
व्यक्तिगत साक्षात्कार (Personal Interview) — अन्वेषक आमने-सामने प्रश्न पूछता हैउच्च उत्तर-दर; प्रश्न समझाए जा सकते हैं; निरक्षरों से भी जानकारी; संदेह दूर करने का अवसर; सूचनादाता की प्रतिक्रिया देखी जा सकती हैसबसे महँगी; अधिक समय; प्रशिक्षित अन्वेषक चाहिए; अन्वेषक की उपस्थिति से उत्तर प्रभावित हो सकते हैं
डाक द्वारा प्रश्नावली (Mailed Questionnaire) — डाक या ई-मेल से भेजनासबसे कम खर्चीली; दूर-दूर के क्षेत्रों तक पहुँच; अन्वेषक के प्रभाव के बिना उत्तर; सूचनादाता को सोचने का समयकेवल साक्षर लोगों के लिए; कम उत्तर-दर; प्रश्न समझाने का अवसर नहीं; अधूरे उत्तर; उत्तर आने में देरी
टेलीफ़ोन साक्षात्कार (Telephone Interview)व्यक्तिगत साक्षात्कार से सस्ती और तेज़; प्रश्न समझाए जा सकते हैं; दूर के सूचनादाताओं तक पहुँचकेवल फ़ोन वाले लोगों तक पहुँच; सूचनादाता की प्रतिक्रिया नहीं दिखती; लंबी बातचीत कठिन; कई लोग फ़ोन पर सहयोग नहीं करते

पायलट सर्वेक्षण (Pilot Survey)

मुख्य सर्वेक्षण से पहले प्रश्नावली को एक छोटे समूह पर आज़माया जाता है — इसे पायलट सर्वेक्षण या पूर्व-परीक्षण (Pre-testing) कहते हैं। इसके लाभ:

  • प्रश्नों की कमियाँ (अस्पष्टता, कठिनाई) पता चलती हैं और उन्हें सुधारा जा सकता है।
  • अन्वेषकों के प्रदर्शन और प्रशिक्षण की आवश्यकता का आकलन।
  • सर्वेक्षण की लागत और समय का अनुमान।
  • सूचनादाताओं की प्रतिक्रिया-दर का अनुमान।

5. संगणना और प्रतिदर्श सर्वेक्षण

परिभाषाएँ
  • समष्टि / जनसंख्या (Population / Universe): अध्ययन के क्षेत्र की सभी इकाइयाँ।
  • संगणना विधि (Census Method): समष्टि की प्रत्येक इकाई से आँकड़े एकत्र करना।
  • प्रतिदर्श (Sample): समष्टि का एक छोटा, प्रतिनिधि (Representative) भाग।
  • प्रतिदर्श विधि (Sample Method): केवल प्रतिदर्श से आँकड़े एकत्र कर पूरी समष्टि के बारे में निष्कर्ष निकालना।
आधारसंगणना विधिप्रतिदर्श विधि
सम्मिलित इकाइयाँसभीकुछ चुनी हुई
लागत और समयबहुत अधिककम
शुद्धताप्रतिचयन त्रुटि नहीं; पर बड़े पैमाने के कारण अप्रतिचयन त्रुटियाँ अधिक हो सकती हैंप्रतिचयन त्रुटि होती है; पर छोटा पैमाना होने से अधिक सावधानी और प्रशिक्षित अन्वेषक संभव
उपयुक्तताजब समष्टि छोटी हो या प्रत्येक इकाई की जानकारी आवश्यक हो (जैसे जनगणना)जब समष्टि बड़ी हो, या परीक्षण में इकाई नष्ट होती हो (जैसे बल्बों का जीवनकाल जाँचना)
समष्टि (20 इकाइयाँ) यादृच्छिक प्रतिदर्श (6 इकाइयाँ) संगणना = सभी इकाइयाँ गिनना; प्रतिदर्श = प्रतिनिधि भाग से समष्टि का अनुमान
प्रतीकात्मक चित्र: रंगीन वृत्त यादृच्छिक रूप से चुनी गई इकाइयाँ हैं; 20 में से 6 इकाइयों का चुनाव केवल समझाने के लिए है।
उदाहरण

यदि आप जानना चाहते हैं कि एक कारखाने में बने बल्ब कितने घंटे चलते हैं, तो आप सारे बल्ब जलाकर नहीं जाँच सकते — तब बेचने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं! इसलिए कुछ बल्बों का प्रतिदर्श लेकर परीक्षण किया जाता है। इसी तरह, खून की जाँच के लिए डॉक्टर कुछ बूँदें (प्रतिदर्श) ही लेता है।

6. प्रतिदर्श चुनने की विधियाँ (Sampling Methods)

(क) यादृच्छिक प्रतिचयन (Random Sampling)

इस विधि में समष्टि की प्रत्येक इकाई के प्रतिदर्श में चुने जाने की समान संभावना होती है। चुनाव अन्वेषक की इच्छा पर नहीं, संयोग (Chance) पर निर्भर करता है, इसलिए पक्षपात (Bias) की संभावना न्यूनतम होती है। इसे लॉटरी विधि भी कहते हैं।

  • लॉटरी विधि: सभी इकाइयों के नाम/क्रमांक पर्चियों पर लिखकर, अच्छी तरह मिलाकर, आवश्यक संख्या में पर्चियाँ निकालना।
  • यादृच्छिक संख्या सारणी (Random Number Tables): पहले से तैयार की गई यादृच्छिक अंकों की सारणियों से इकाइयों का चुनाव — बड़ी समष्टि के लिए उपयोगी। आजकल कंप्यूटर से भी यादृच्छिक संख्याएँ बनाई जाती हैं।
उदाहरण — यादृच्छिक संख्याओं से चुनाव (काल्पनिक)

किसी कक्षा के 60 छात्रों (क्रमांक 01–60) में से 5 का प्रतिदर्श चुनना है। यादृच्छिक अंकों की एक पंक्ति है: 47 83 12 60 95 08 33 71 25। दो-दो अंकों के समूह लें और 01–60 के बाहर वाले (83, 95, 71) छोड़ दें। चुने गए क्रमांक: 47, 12, 60, 08, 33।

(ख) अयादृच्छिक प्रतिचयन (Non-random Sampling)

इसमें सभी इकाइयों के चुने जाने की समान संभावना नहीं होती; चुनाव अन्वेषक के निर्णय या सुविधा पर निर्भर करता है।

विधिअर्थसीमा
सविचार/निर्णयात्मक प्रतिचयन (Judgement / Purposive)अन्वेषक अपने विवेक से "प्रतिनिधि" इकाइयाँ चुनता हैअन्वेषक का पक्षपात आ सकता है
सुविधा प्रतिचयन (Convenience)जो इकाइयाँ आसानी से उपलब्ध हों, उन्हें चुनना — जैसे बाज़ार में मिलने वाले लोगों से पूछनाप्रतिदर्श प्रतिनिधि न हो, यह संभव है
कोटा प्रतिचयन (Quota)समष्टि को वर्गों में बाँटकर प्रत्येक वर्ग से निश्चित संख्या (कोटा) में इकाइयाँ चुनना — वर्ग के भीतर चुनाव अन्वेषक परवर्ग के भीतर पक्षपात संभव

7. आँकड़ों में त्रुटियाँ

अनुमानित मान और वास्तविक मान के अंतर को त्रुटि (Error) कहते हैं। आँकड़ों में दो प्रकार की त्रुटियाँ होती हैं:

(क) प्रतिचयन त्रुटि (Sampling Error)

प्रतिदर्श से प्राप्त अनुमान और समष्टि के वास्तविक मान का अंतर। यह इसलिए होती है क्योंकि प्रतिदर्श पूरी समष्टि का केवल एक भाग है। प्रतिदर्श का आकार बढ़ाकर प्रतिचयन त्रुटि घटाई जा सकती है।

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े)

5 किसानों की मासिक आय (₹ हज़ार में): 8, 10, 12, 14, 16। समष्टि माध्य = 60/5 = 12। यदि प्रतिदर्श में केवल दो किसान (8 और 10) चुने जाएँ, तो प्रतिदर्श माध्य = 9। प्रतिचयन त्रुटि = 9 − 12 = −3 (हज़ार)। यदि प्रतिदर्श में 10 और 14 चुने जाते, तो माध्य 12 होता और त्रुटि शून्य। अर्थात प्रतिचयन त्रुटि इस पर निर्भर करती है कि कौन-सी इकाइयाँ चुनी गईं।

(ख) अप्रतिचयन त्रुटियाँ (Non-sampling Errors)

ये संगणना और प्रतिदर्श — दोनों में हो सकती हैं, और प्रायः प्रतिचयन त्रुटि से अधिक गंभीर होती हैं:

  • आँकड़े प्राप्त करने की त्रुटि: गलत उत्तर दर्ज करना, लिखने में गलती (जैसे 15 के स्थान पर 51)।
  • अनुत्तर त्रुटि (Non-response Error): जब कुछ सूचनादाता उत्तर न दें या उपलब्ध न हों।
  • प्रतिचयन पक्षपात (Sampling Bias): जब प्रतिदर्श ढाँचा (Sampling Frame) कुछ वर्गों को बाहर कर दे — जैसे केवल टेलीफ़ोन वाले परिवारों का सर्वेक्षण।
  • मापन त्रुटि: गलत उपकरण या अस्पष्ट परिभाषा से।
  • गणना त्रुटि: जोड़ने, घटाने या सारणीयन में गलती।

8. भारत में आँकड़ों के प्रमुख स्रोत

संस्था / स्रोतमुख्य कार्य
भारत की जनगणना (Census of India)भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा; सामान्यतः हर 10 वर्ष में; जनसंख्या, आयु, लिंग, साक्षरता, व्यवसाय, आवास, प्रवसन आदि की संपूर्ण गणना। स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना 1951 में हुई।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत; पहले के राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) और केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) को 2019 में मिलाकर बनाया गया। यह राष्ट्रीय आय के अनुमान, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, और रोज़गार, उपभोग व्यय, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि पर प्रतिदर्श सर्वेक्षण करता है।
भारतीय रिज़र्व बैंकमुद्रा, साख, बैंकिंग और विदेशी विनिमय से संबंधित आँकड़े
भारत के महापंजीयक — नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS)जन्म दर, मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर के अनुमान
श्रम ब्यूरोश्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक, मज़दूरी के आँकड़े
वाणिज्य मंत्रालय (DGCI&S)विदेशी व्यापार (आयात-निर्यात) के आँकड़े
ध्यान दें

राष्ट्रीय सर्वेक्षणों से प्राप्त जानकारी प्रायः रिपोर्टों के रूप में प्रकाशित होती है, जिनका उपयोग शोधकर्ता, नीति-निर्माता और छात्र द्वितीयक आँकड़ों के रूप में करते हैं।

9. मास्टर तालिका : प्रमुख शब्दावली

शब्दअर्थ
प्राथमिक आँकड़ेपहली बार स्वयं एकत्र
द्वितीयक आँकड़ेदूसरों द्वारा पहले से एकत्र
प्रश्नावली / अनुसूचीसूचनादाता भरे / प्रगणक भरे
पायलट सर्वेक्षणप्रश्नावली का पूर्व-परीक्षण
संगणनाप्रत्येक इकाई का अध्ययन
प्रतिदर्शसमष्टि का प्रतिनिधि भाग
यादृच्छिक प्रतिचयनहर इकाई के चुने जाने की समान संभावना
प्रतिचयन त्रुटिप्रतिदर्श अनुमान − समष्टि का वास्तविक मान
NSO2019 में NSSO + CSO के विलय से बना

10. मास्टर सारांश तालिका

विषयमुख्य बिंदु
स्रोतप्राथमिक (मौलिक, महँगे) बनाम द्वितीयक (सस्ते, जाँच आवश्यक)
उपकरणप्रश्नावली — कम, सरल, क्रमबद्ध, निष्पक्ष प्रश्न
विधियाँव्यक्तिगत साक्षात्कार, डाक, टेलीफ़ोन; पहले पायलट सर्वेक्षण
संगणना बनाम प्रतिदर्शसभी इकाइयाँ बनाम प्रतिनिधि भाग
प्रतिचयनयादृच्छिक (लॉटरी, यादृच्छिक सारणी) बनाम अयादृच्छिक (निर्णय, सुविधा, कोटा)
त्रुटियाँप्रतिचयन (प्रतिदर्श बढ़ाकर कम) और अप्रतिचयन (गलत दर्ज, अनुत्तर, पक्षपात)

11. माइंड मैप

आँकड़ों का संग्रहण
स्रोत
  • प्राथमिक
  • द्वितीयक
उपकरण व विधि
  • प्रश्नावली, पायलट
  • साक्षात्कार, डाक, फ़ोन
सर्वेक्षण
  • संगणना, प्रतिदर्श
  • यादृच्छिक, अयादृच्छिक
त्रुटियाँ व संस्थाएँ
  • प्रतिचयन, अप्रतिचयन
  • जनगणना, NSO

12. टिप्स और ट्रिक्स

स्मार्ट तरीके
  • प्रश्नावली की गलतियाँ पहचानने वाले प्रश्नों में देखें: अग्रणी? दोहरा? दोहरा नकारात्मक? अस्पष्ट? स्मृति पर अधिक बोझ?
  • "प्रतिचयन त्रुटि केवल प्रतिदर्श में; अप्रतिचयन त्रुटि दोनों में" — यह एक-पंक्ति अंतर अवश्य याद रखें।
  • विधियों की तुलना: लागत — डाक < टेलीफ़ोन < व्यक्तिगत; उत्तर-दर — उलटा क्रम।
आम गलतियाँ
  • यादृच्छिक प्रतिचयन को "बिना सोचे-समझे" चुनाव समझना — यह व्यवस्थित, समान-संभावना वाला चुनाव है।
  • यह मानना कि संगणना में कोई त्रुटि नहीं होती — अप्रतिचयन त्रुटियाँ हो सकती हैं।
  • द्वितीयक आँकड़ों का बिना जाँच उपयोग करना।

13. महत्वपूर्ण वन-लाइनर

  • प्राथमिक आँकड़े मौलिक होते हैं।
  • अनुसूची प्रगणक द्वारा भरी जाती है।
  • पायलट सर्वेक्षण प्रश्नावली की कमियाँ दूर करने के लिए होता है।
  • यादृच्छिक प्रतिचयन में हर इकाई के चुने जाने की समान संभावना होती है।
  • प्रतिदर्श का आकार बढ़ाने से प्रतिचयन त्रुटि घटती है।
  • भारत की जनगणना सामान्यतः हर 10 वर्ष में होती है।
  • NSO, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत है।

14. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

निम्न में से कौन-सी विधि सबसे कम खर्चीली है?

  1. व्यक्तिगत साक्षात्कार
  2. डाक द्वारा प्रश्नावली
  3. टेलीफ़ोन साक्षात्कार
  4. संगणना
उत्तर देखें

डाक प्रश्नावली में अन्वेषक को यात्रा या लंबी बातचीत नहीं करनी पड़ती, इसलिए यह सबसे सस्ती है। व्यक्तिगत साक्षात्कार सबसे महँगा है।

उत्तर: (ख) डाक द्वारा प्रश्नावली

प्र2आसान

अग्रणी प्रश्न (Leading Question) क्या है? एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर देखें

ऐसा प्रश्न जो सूचनादाता को एक विशेष उत्तर की ओर धकेलता है। उदाहरण: "क्या आप सहमत नहीं हैं कि नई सड़क से गाँव का बहुत विकास होगा?"

उत्तर: विशेष उत्तर की ओर ले जाने वाला प्रश्न

प्र3आसान

प्रतिचयन त्रुटि को कैसे कम किया जा सकता है?

उत्तर देखें

प्रतिदर्श का आकार बढ़ाकर।

उत्तर: बड़ा प्रतिदर्श लेकर

प्र4मध्यम

प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़ों में चार अंतर बताइए।

उत्तर देखें

(1) प्राथमिक मौलिक हैं, द्वितीयक पहले से उपलब्ध; (2) प्राथमिक उद्देश्य के अनुरूप, द्वितीयक पूरी तरह मेल न खाएँ; (3) प्राथमिक में अधिक लागत-समय, द्वितीयक में कम; (4) प्राथमिक अधिक विश्वसनीय (अन्वेषक का नियंत्रण), द्वितीयक के उपयोग से पहले विश्वसनीयता, उपयुक्तता, पर्याप्तता की जाँच आवश्यक।

उत्तर: मौलिकता, उपयुक्तता, लागत, विश्वसनीयता

प्र5मध्यम

निम्न प्रश्नों में क्या दोष है? (क) "क्या आप दूध और दही खरीदते हैं?" (ख) "पिछले पाँच वर्षों में आपने राशन पर कुल कितना खर्च किया?"

उत्तर देखें

(क) दोहरा प्रश्न — एक प्रश्न में दो बातें; व्यक्ति दूध खरीदता हो पर दही नहीं, तो उत्तर कठिन। अलग-अलग पूछें। (ख) स्मृति और गणना पर अत्यधिक बोझ — सटीक उत्तर संभव नहीं; "पिछले महीने राशन पर कितना खर्च किया?" पूछें।

उत्तर: (क) दोहरा प्रश्न (ख) स्मृति/गणना पर अधिक बोझ

प्र6मध्यम

पायलट सर्वेक्षण क्या है? इसके लाभ लिखिए।

उत्तर देखें

मुख्य सर्वेक्षण से पहले प्रश्नावली को छोटे समूह पर आज़माना। लाभ: प्रश्नों की कमियाँ पहचानकर सुधारना; अन्वेषकों के प्रदर्शन का आकलन; लागत-समय का अनुमान; उत्तर-दर का अनुमान।

उत्तर: प्रश्नावली का पूर्व-परीक्षण; कमियाँ सुधारना, लागत-समय का अनुमान

प्र7मध्यम

किसी कंपनी के 6 कर्मचारियों का दैनिक वेतन (₹): 400, 500, 600, 700, 800, 900 (काल्पनिक आँकड़े)। प्रतिदर्श में 500 और 900 चुने जाते हैं। प्रतिचयन त्रुटि ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें

समष्टि माध्य = 3900/6 = ₹650। प्रतिदर्श माध्य = (500 + 900)/2 = ₹700। प्रतिचयन त्रुटि = 700 − 650 = ₹50।

उत्तर: ₹50

प्र8मध्यम

व्यक्तिगत साक्षात्कार विधि के लाभ और सीमाएँ बताइए।

उत्तर देखें

लाभ: उच्च उत्तर-दर; प्रश्न समझाए जा सकते हैं; निरक्षरों से भी जानकारी; संदेह दूर; प्रतिक्रिया देखी जा सकती है। सीमाएँ: सबसे महँगी; अधिक समय; प्रशिक्षित अन्वेषक आवश्यक; अन्वेषक की उपस्थिति से उत्तर प्रभावित हो सकते हैं।

उत्तर: विश्वसनीय और पूर्ण, पर महँगी और समय-साध्य

प्र9कठिन

प्रतिदर्श विधि संगणना विधि से कब बेहतर है? क्या प्रतिदर्श विधि कभी संगणना से अधिक शुद्ध परिणाम दे सकती है?

उत्तर देखें

बेहतर जब: समष्टि बहुत बड़ी हो; समय और धन सीमित हों; परीक्षण में इकाई नष्ट होती हो (बल्ब, रक्त जाँच); इकाइयाँ सजातीय हों। हाँ, अधिक शुद्ध हो सकती है: संगणना में बड़े पैमाने के कारण अनेक अप्रशिक्षित अन्वेषक लगाने पड़ते हैं, जिससे अप्रतिचयन त्रुटियाँ (गलत दर्ज, गणना की गलती, अनुत्तर) बढ़ती हैं। प्रतिदर्श में कम इकाइयाँ होने से प्रशिक्षित अन्वेषक, बेहतर निगरानी और सावधानी संभव है; और प्रतिचयन त्रुटि बड़ा प्रतिदर्श लेकर नियंत्रित की जा सकती है।

उत्तर: बड़ी समष्टि/विनाशी परीक्षण में; कम अप्रतिचयन त्रुटि से अधिक शुद्ध हो सकती है

प्र10कठिन

01 से 80 तक क्रमांकित 80 परिवारों में से 6 का यादृच्छिक प्रतिदर्श चुनना है। यादृच्छिक अंक: 92 15 07 88 64 15 39 81 72 50। चुने गए क्रमांक बताइए और प्रक्रिया समझाइए। (काल्पनिक)

उत्तर देखें

दो-अंकीय संख्याएँ क्रम से पढ़ें; 01–80 से बाहर (92, 88, 81) छोड़ें; दोहराव (दूसरा 15) छोड़ें। चुने गए: 15, 07, 64, 39, 72, 50 — कुल 6।

उत्तर: 15, 07, 64, 39, 72, 50

प्र11कठिन

अप्रतिचयन त्रुटियों के प्रकार बताइए। एक शोधकर्ता ने ग्रामीण आय का सर्वेक्षण केवल उन परिवारों से किया जिनके पास मोबाइल फ़ोन था। इसमें कौन-सी त्रुटि है?

उत्तर देखें

प्रकार: आँकड़े प्राप्त करने की त्रुटि (गलत दर्ज), अनुत्तर त्रुटि, प्रतिचयन पक्षपात, मापन त्रुटि, गणना त्रुटि। उदाहरण में प्रतिचयन पक्षपात है — प्रतिदर्श ढाँचे से बिना फ़ोन वाले (प्रायः गरीब) परिवार बाहर हो गए; अनुमानित औसत आय वास्तविक से अधिक आएगी।

उत्तर: प्रतिचयन पक्षपात (Sampling Bias) — आय अधिक आँकी जाएगी

प्र12कठिन

अपने विद्यालय के छात्रों के दैनिक यात्रा-साधन (पैदल, साइकिल, बस, निजी वाहन) पर सर्वेक्षण के लिए 5 प्रश्नों की एक प्रश्नावली बनाइए, जो अच्छी प्रश्नावली के गुणों का पालन करे।

उत्तर देखें

नमूना प्रश्नावली: (1) आप किस कक्षा में पढ़ते हैं? ___ (2) आपका घर विद्यालय से लगभग कितनी दूर है? (क) 1 किमी से कम (ख) 1–3 किमी (ग) 3–5 किमी (घ) 5 किमी से अधिक (3) आप सामान्यतः विद्यालय कैसे आते हैं? (क) पैदल (ख) साइकिल (ग) बस (घ) निजी वाहन (4) विद्यालय पहुँचने में लगभग कितना समय लगता है? (क) 15 मिनट से कम (ख) 15–30 मिनट (ग) 30 मिनट से अधिक (5) यात्रा में आपको सबसे बड़ी कठिनाई क्या होती है? ___ (खुला प्रश्न, अंत में)। गुण: कम और सरल प्रश्न, तार्किक क्रम, बंद विकल्प, कोई अग्रणी या दोहरा प्रश्न नहीं, स्मृति पर कम बोझ।

उत्तर: सरल, क्रमबद्ध, बंद विकल्पों वाली 5-प्रश्नीय प्रश्नावली (नमूना ऊपर)

15. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • प्राथमिक (मौलिक) बनाम द्वितीयक (पहले से उपलब्ध — विश्वसनीयता, उपयुक्तता, पर्याप्तता जाँचें)।
  • प्रश्नावली: कम, सरल, क्रमबद्ध; अग्रणी, दोहरे, दोहरे-नकारात्मक प्रश्न नहीं।
  • विधियाँ: व्यक्तिगत (विश्वसनीय, महँगी), डाक (सस्ती, कम उत्तर), टेलीफ़ोन; पहले पायलट सर्वेक्षण।
  • संगणना = सभी इकाइयाँ; प्रतिदर्श = प्रतिनिधि भाग।
  • यादृच्छिक (लॉटरी, यादृच्छिक सारणी) बनाम अयादृच्छिक (निर्णय, सुविधा, कोटा)।
  • त्रुटियाँ: प्रतिचयन (प्रतिदर्श में) और अप्रतिचयन (दोनों में); जनगणना और NSO प्रमुख स्रोत।