1. अध्याय एक नज़र में
मान लीजिए आपने अपने मोहल्ले के 200 परिवारों की मासिक आय एकत्र की। आपके पास 200 संख्याओं की एक लंबी, अव्यवस्थित सूची है। इसे देखकर कोई निष्कर्ष निकालना लगभग असंभव है — कितने परिवार कम आय वाले हैं? अधिकतर परिवार किस आय-वर्ग में हैं? इन प्रश्नों के उत्तर के लिए आँकड़ों को व्यवस्थित (Organise) करना आवश्यक है।
जिस प्रकार एक पुस्तकालय में पुस्तकें विषय, लेखक या भाषा के अनुसार अलमारियों में रखी जाती हैं ताकि वांछित पुस्तक आसानी से मिल सके, उसी प्रकार आँकड़ों को भी समान विशेषताओं के आधार पर समूहों में बाँटा जाता है। इस प्रक्रिया को वर्गीकरण (Classification) कहते हैं। इस अध्याय में हम वर्गीकरण के प्रकार, चर, बारंबारता वितरण बनाने की विधि और उससे जुड़ी शब्दावली सीखेंगे।
- कच्चे आँकड़े और वर्गीकरण का अर्थ तथा उद्देश्य।
- वर्गीकरण के प्रकार: कालानुक्रमिक, स्थानिक, गुणात्मक, मात्रात्मक।
- चर: सतत और विविक्त।
- बारंबारता वितरण: वर्ग, वर्ग-सीमाएँ, वर्ग-अंतराल, वर्ग-चिह्न।
- अपवर्जी और समावेशी विधि; मिलान-चिह्न।
- बारंबारता सारणी और द्विचर बारंबारता वितरण।
2. कच्चे आँकड़े और वर्गीकरण
- कच्चे आँकड़े (Raw Data): वे आँकड़े जो सीधे संग्रहण से प्राप्त हुए हैं और अभी किसी क्रम या वर्ग में व्यवस्थित नहीं किए गए।
- वर्गीकरण (Classification): आँकड़ों को उनकी समान विशेषताओं के आधार पर समूहों या वर्गों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया।
वर्गीकरण के उद्देश्य
- विशाल और जटिल आँकड़ों को सरल और संक्षिप्त बनाना।
- समान और असमान तथ्यों को अलग करना — तुलना आसान बनाना।
- आँकड़ों की मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट करना।
- आगे के विश्लेषण (जैसे माध्य, आलेख) का आधार तैयार करना।
3. वर्गीकरण के प्रकार
| प्रकार | आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| कालानुक्रमिक (Chronological / Temporal) | समय — वर्ष, महीना, दिन | किसी राज्य में पिछले पाँच वर्षों का गेहूँ उत्पादन |
| स्थानिक (Spatial / Geographical) | स्थान — देश, राज्य, ज़िला, शहर | विभिन्न राज्यों की साक्षरता दर |
| गुणात्मक (Qualitative) | गुण — लिंग, धर्म, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा स्तर | किसी गाँव की जनसंख्या का साक्षर/निरक्षर और पुरुष/महिला में वर्गीकरण |
| मात्रात्मक (Quantitative) | मापने योग्य विशेषता — आय, आयु, अंक, ऊँचाई | छात्रों का अंकों के वर्गों (0–10, 10–20, …) में वर्गीकरण |
सरल (Simple) वर्गीकरण: केवल एक गुण के आधार पर दो वर्ग — जैसे जनसंख्या: पुरुष / महिला। बहुगुणी (Manifold) वर्गीकरण: एक से अधिक गुणों के आधार पर उप-वर्ग — जैसे जनसंख्या → पुरुष (साक्षर, निरक्षर), महिला (साक्षर, निरक्षर)।
4. चर : सतत और विविक्त
किसी विशेषता का वह माप जो अलग-अलग इकाइयों में अलग-अलग मान ले सकता है, चर (Variable) कहलाता है। जैसे — आय, आयु, ऊँचाई।
| सतत चर (Continuous Variable) | विविक्त चर (Discrete Variable) |
|---|---|
| किसी दी गई सीमा के भीतर कोई भी मान ले सकता है — पूर्णांक, भिन्न, दशमलव | केवल कुछ निश्चित मान ले सकता है — प्रायः पूर्णांक; दो मानों के बीच "कूद" होती है |
| उदाहरण: ऊँचाई (152.4 सेमी), वज़न, तापमान, समय, आय | उदाहरण: परिवार में सदस्यों की संख्या, कक्षा में छात्र, कार के पहिए, बच्चों की संख्या |
| मापन (Measurement) से प्राप्त | गणना (Counting) से प्राप्त |
किसी परिवार में "2.5 बच्चे" नहीं हो सकते — इसलिए बच्चों की संख्या विविक्त चर है। पर किसी बच्चे की ऊँचाई 122.5 सेमी हो सकती है — इसलिए ऊँचाई सतत चर है।
5. बारंबारता वितरण (Frequency Distribution)
मात्रात्मक आँकड़ों को वर्गीकृत करने का सबसे सामान्य तरीका है — बारंबारता वितरण। इसमें चर के मानों को वर्गों में बाँटकर दर्शाया जाता है कि प्रत्येक वर्ग में कितने प्रेक्षण आते हैं।
प्रमुख शब्दावली
| शब्द | अर्थ | उदाहरण (वर्ग 20–30) |
|---|---|---|
| वर्ग (Class) | मानों का एक समूह/अंतराल | 20–30 |
| वर्ग-सीमाएँ (Class Limits) | वर्ग के दोनों सिरे — निम्न सीमा (Lower Limit) और उच्च सीमा (Upper Limit) | निम्न = 20, उच्च = 30 |
| वर्ग-अंतराल / वर्ग-विस्तार (Class Interval / Width) | उच्च सीमा − निम्न सीमा | 30 − 20 = 10 |
| वर्ग-चिह्न / मध्य-बिंदु (Class Mark / Mid-point) | (उच्च सीमा + निम्न सीमा) ÷ 2 — वर्ग का प्रतिनिधि मान | (20 + 30)/2 = 25 |
| बारंबारता (Frequency) | किसी वर्ग में आने वाले प्रेक्षणों की संख्या | जैसे 10 छात्र |
| परास (Range) | आँकड़ों का अधिकतम मान − न्यूनतम मान | — |
वर्गों की संख्या और विस्तार कैसे चुनें?
वर्गों की संख्या और विस्तार का चुनाव अन्वेषक के विवेक पर निर्भर करता है, पर कुछ व्यावहारिक बातें ध्यान में रखनी चाहिए। यदि वर्ग बहुत कम हों (जैसे केवल 2–3), तो आँकड़ों की संरचना छिप जाती है — लगभग सब कुछ एक-दो वर्गों में सिमट जाता है। यदि वर्ग बहुत अधिक हों (जैसे 30–40), तो कई वर्ग खाली या लगभग खाली रह जाते हैं और वितरण का पैटर्न स्पष्ट नहीं होता। वर्ग-विस्तार ऐसी संख्या रखें जिससे गणना आसान हो — जैसे 5, 10, 20, 50, 100 — और जहाँ तक संभव हो वर्ग-चिह्न भी पूर्ण संख्या बने। साथ ही, प्रेक्षणों के प्राकृतिक समूहों का ध्यान रखें — जैसे परीक्षा के अंकों में 33 (उत्तीर्ण अंक) के आसपास वर्ग-सीमा रखना अर्थपूर्ण हो सकता है।
वर्गीकरण आँकड़ों को समूहों में बाँटने की प्रक्रिया है, जबकि सारणीयन (Tabulation) इन समूहों को पंक्तियों और स्तंभों के व्यवस्थित ढाँचे में प्रस्तुत करना है। वर्गीकरण पहले होता है, सारणीयन उसके बाद — सारणीयन का विस्तृत अध्ययन अगले अध्याय "आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण" में किया जाएगा।
बारंबारता वितरण बनाने के चरण
- परास ज्ञात करें: अधिकतम − न्यूनतम मान।
- वर्गों की संख्या तय करें: सामान्यतः 5 से 15 के बीच — बहुत कम वर्गों में जानकारी छिप जाती है, बहुत अधिक में आँकड़े बिखर जाते हैं।
- वर्ग-विस्तार तय करें: लगभग परास ÷ वर्गों की संख्या; सुविधाजनक संख्या (5, 10, 20) लें।
- वर्ग-सीमाएँ लिखें: सुनिश्चित करें कि हर प्रेक्षण किसी एक वर्ग में अवश्य आए।
- मिलान-चिह्न (Tally Marks) लगाएँ: प्रत्येक प्रेक्षण के लिए उसके वर्ग के सामने एक खड़ी रेखा (|); हर पाँचवाँ चिह्न पिछले चार को काटती तिरछी रेखा — इससे गिनती आसान होती है।
- बारंबारता गिनें और कुल योग की जाँच करें।
6. एक पूर्ण उदाहरण
किसी कक्षा के 30 छात्रों के 50 में से प्राप्त अंक (अभ्यास हेतु काल्पनिक आँकड़े):
12, 25, 33, 41, 8, 19, 27, 36, 44, 22, 15, 29, 31, 38, 47, 5, 18, 24, 35, 26, 39, 21, 28, 33, 42, 17, 30, 23, 37, 26
न्यूनतम = 5, अधिकतम = 47, परास = 42। हम 10 के विस्तार वाले 5 वर्ग (0–10, …, 40–50) बनाते हैं (अपवर्जी विधि)।
| अंक (वर्ग) | मिलान-चिह्न | बारंबारता (f) | वर्ग-चिह्न |
|---|---|---|---|
| 0–10 | || | 2 | 5 |
| 10–20 | 5 | 15 | |
| 20–30 | 10 | 25 | |
| 30–40 | 9 | 35 | |
| 40–50 | |||| | 4 | 45 |
| योग | 30 | — | |
(सारणी में कटी हुई चार रेखाएँ = 5 का समूह दर्शाती हैं।) ध्यान दें — अंक 30 को वर्ग 30–40 में रखा गया है, 20–30 में नहीं, क्योंकि अपवर्जी विधि में उच्च सीमा उस वर्ग में शामिल नहीं होती।
निष्कर्ष: 30 में से 19 छात्रों (63%) ने 20–40 के बीच अंक पाए; केवल 2 छात्र 10 से कम अंक वाले हैं। अव्यवस्थित सूची से यह जानकारी तुरंत नहीं मिल सकती थी — यही वर्गीकरण का लाभ है।
बारंबारता वितरण बनाने के बाद हमें केवल यह पता रहता है कि किसी वर्ग में कितने प्रेक्षण हैं, उनके सटीक मान नहीं। आगे की गणनाओं (जैसे माध्य) में हम मान लेते हैं कि वर्ग के सभी प्रेक्षण वर्ग-चिह्न के बराबर हैं — जैसे 20–30 वर्ग के सभी 10 छात्रों के अंक 25 माने जाते हैं। यह वर्गीकरण की एक अनिवार्य कीमत है।
7. अपवर्जी और समावेशी विधि
| अपवर्जी विधि (Exclusive Method) | समावेशी विधि (Inclusive Method) |
|---|---|
| एक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा होती है: 0–10, 10–20, 20–30 | दोनों सीमाएँ उसी वर्ग में शामिल: 0–9, 10–19, 20–29 |
| उच्च सीमा के बराबर मान अगले वर्ग में जाता है (10 → 10–20) | वर्गों के बीच अंतराल (Gap) रहता है |
| सतत चर के लिए उपयुक्त | प्रायः विविक्त चर के लिए उपयुक्त |
समावेशी वर्गों का समायोजन (Adjustment)
सतत चर के लिए समावेशी वर्गों को अपवर्जी बनाना आवश्यक है, ताकि वर्गों के बीच कोई अंतराल न रहे:
उदाहरण: 10–19 और 20–29 → समायोजन कारक = (20 − 19)/2 = 0.5। हर निम्न सीमा से 0.5 घटाएँ और हर उच्च सीमा में 0.5 जोड़ें: 9.5–19.5, 19.5–29.5, … इस प्रकार प्राप्त सीमाओं को वास्तविक वर्ग-सीमाएँ (True Class Limits) कहते हैं।
समान और असमान वर्ग
सामान्यतः सभी वर्गों का विस्तार समान रखा जाता है, जिससे तुलना आसान हो। पर जब आँकड़े असमान रूप से फैले हों — जैसे आय के आँकड़े, जहाँ अधिकांश परिवार निम्न आय में और बहुत कम परिवार बहुत ऊँची आय में हों — तब असमान वर्ग उपयोगी होते हैं (जैसे 0–5,000; 5,000–10,000; 10,000–25,000; 25,000–1,00,000)।
8. बारंबारता सारणी (विविक्त चर) और द्विचर वितरण
बारंबारता सारणी (Frequency Array)
विविक्त चर के लिए वर्ग बनाने के बजाय प्रत्येक मान की बारंबारता सीधे लिखी जाती है।
| परिवार के सदस्यों की संख्या | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | योग |
|---|---|---|---|---|---|---|
| परिवारों की संख्या (काल्पनिक) | 6 | 14 | 18 | 8 | 4 | 50 |
द्विचर बारंबारता वितरण (Bivariate Frequency Distribution)
जब दो चरों का एक साथ वर्गीकरण किया जाए — जैसे कंपनियों का उनकी बिक्री और विज्ञापन व्यय के अनुसार — तो इसे द्विचर बारंबारता वितरण कहते हैं। इसमें पंक्तियाँ एक चर के वर्ग और स्तंभ दूसरे चर के वर्ग दर्शाते हैं।
| बिक्री (₹ लाख) ↓ / विज्ञापन व्यय (₹ हज़ार) → | 0–50 | 50–100 | 100–150 | योग |
|---|---|---|---|---|
| 0–20 | 5 | 2 | 0 | 7 |
| 20–40 | 2 | 6 | 3 | 11 |
| 40–60 | 0 | 3 | 9 | 12 |
| योग | 7 | 11 | 12 | 30 |
(काल्पनिक आँकड़े) — इससे संकेत मिलता है कि अधिक विज्ञापन व्यय करने वाली कंपनियाँ प्रायः अधिक बिक्री वाले वर्ग में हैं। यह विचार आगे "सहसंबंध" अध्याय में विकसित होगा।
9. संचयी बारंबारता और गुणात्मक आँकड़ों का वितरण
संचयी बारंबारता (Cumulative Frequency)
कई बार हम जानना चाहते हैं कि किसी मान से कम या अधिक कितने प्रेक्षण हैं — जैसे "कितने छात्रों ने 30 से कम अंक पाए?" इसके लिए बारंबारताओं को क्रमशः जोड़कर संचयी बारंबारता बनाई जाती है। यह अगले अध्यायों में माध्यिका (Median) की गणना में बहुत काम आती है।
| अंक (वर्ग) | f | "से कम" संचयी बारंबारता | "से अधिक" संचयी बारंबारता |
|---|---|---|---|
| 0–10 | 2 | 10 से कम: 2 | 0 या अधिक: 30 |
| 10–20 | 5 | 20 से कम: 7 | 10 या अधिक: 28 |
| 20–30 | 10 | 30 से कम: 17 | 20 या अधिक: 23 |
| 30–40 | 9 | 40 से कम: 26 | 30 या अधिक: 13 |
| 40–50 | 4 | 50 से कम: 30 | 40 या अधिक: 4 |
"से कम" संचयी बारंबारता ऊपर से नीचे जोड़कर बनती है और अंतिम मान कुल बारंबारता (30) के बराबर होता है। "से अधिक" संचयी बारंबारता नीचे से ऊपर जोड़कर बनती है और पहला मान कुल बारंबारता के बराबर होता है। उदाहरण — 30 से कम अंक वाले छात्र 17 हैं, और 30 या अधिक वाले 13; दोनों का योग 30 है।
गुणात्मक आँकड़ों का बारंबारता वितरण
गुणात्मक आँकड़ों में वर्ग, गुण की श्रेणियाँ होती हैं। उदाहरण — 40 छात्रों से पूछा गया कि वे विद्यालय कैसे आते हैं (काल्पनिक आँकड़े):
| यात्रा का साधन | पैदल | साइकिल | बस | निजी वाहन | योग |
|---|---|---|---|---|---|
| छात्रों की संख्या | 12 | 15 | 9 | 4 | 40 |
| प्रतिशत | 30% | 37.5% | 22.5% | 10% | 100% |
यहाँ वर्ग-चिह्न या वर्ग-विस्तार का प्रश्न नहीं उठता, क्योंकि श्रेणियाँ संख्याएँ नहीं हैं। इस प्रकार के वितरण को अगले अध्याय में दंड आरेख या वृत्त आरेख से प्रस्तुत किया जाएगा।
- स्पष्ट (Unambiguous): हर प्रेक्षण के लिए यह निश्चित हो कि वह किस वर्ग में जाएगा।
- पूर्ण (Exhaustive): हर प्रेक्षण किसी-न-किसी वर्ग में आए।
- परस्पर अपवर्जी (Mutually Exclusive): कोई प्रेक्षण दो वर्गों में न आए।
- स्थिर (Stable): एक ही आधार पर बार-बार वर्गीकरण से तुलना संभव हो।
- लचीला (Flexible): नई परिस्थितियों में वर्गों को समायोजित किया जा सके।
10. मास्टर तालिका : प्रमुख सूत्र
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| परास | अधिकतम मान − न्यूनतम मान |
| वर्ग-विस्तार | उच्च सीमा − निम्न सीमा |
| वर्ग-चिह्न | (निम्न सीमा + उच्च सीमा) ÷ 2 |
| वर्गों की संख्या (लगभग) | परास ÷ वर्ग-विस्तार |
| समायोजन कारक | (अगली निम्न सीमा − पिछली उच्च सीमा) ÷ 2 |
| सापेक्ष बारंबारता | वर्ग की बारंबारता ÷ कुल बारंबारता |
| प्रतिशत बारंबारता | सापेक्ष बारंबारता × 100 |
11. मास्टर सारांश तालिका
| विषय | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| वर्गीकरण | कालानुक्रमिक, स्थानिक, गुणात्मक, मात्रात्मक |
| चर | सतत (मापन) बनाम विविक्त (गणना) |
| बारंबारता वितरण | वर्ग, सीमाएँ, विस्तार, वर्ग-चिह्न, मिलान-चिह्न |
| विधियाँ | अपवर्जी (सतत) बनाम समावेशी (विविक्त); समायोजन |
| अन्य रूप | बारंबारता सारणी, द्विचर वितरण |
| सीमा | सूचना की हानि |
12. माइंड मैप
- समय, स्थान
- गुण, मात्रा
- सतत
- विविक्त
- वर्ग-चिह्न, विस्तार
- मिलान-चिह्न
- अपवर्जी, समावेशी
- द्विचर वितरण
13. टिप्स और ट्रिक्स
- बारंबारता वितरण बनाने के बाद हमेशा योग की जाँच करें — वह प्रेक्षणों की कुल संख्या के बराबर होना चाहिए।
- अपवर्जी विधि में "उच्च सीमा अगले वर्ग में" — यह नियम परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
- वर्ग-चिह्न दिए हों तो सीमाएँ निकालना: वर्ग-विस्तार = दो क्रमागत वर्ग-चिह्नों का अंतर; निम्न सीमा = वर्ग-चिह्न − विस्तार/2।
- सतत चर के लिए समावेशी वर्गों को बिना समायोजन के उपयोग करना।
- वर्ग-चिह्न को वर्ग-विस्तार समझना।
- मिलान-चिह्न में पाँचवीं रेखा को खड़ी लिखना — वह पहले चार को काटती है।
14. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- अव्यवस्थित, अवर्गीकृत आँकड़ों को कच्चे आँकड़े कहते हैं।
- समय के आधार पर वर्गीकरण कालानुक्रमिक कहलाता है।
- ऊँचाई सतत चर और छात्रों की संख्या विविक्त चर है।
- वर्ग-चिह्न वर्ग का प्रतिनिधि मान है।
- अपवर्जी विधि सतत चर के लिए उपयुक्त है।
- बारंबारता वितरण में सूचना की कुछ हानि होती है।
- दो चरों के एक साथ वर्गीकरण को द्विचर बारंबारता वितरण कहते हैं।
- "से कम" संचयी बारंबारता का अंतिम मान कुल बारंबारता के बराबर होता है।
- अच्छा वर्गीकरण स्पष्ट, पूर्ण और परस्पर अपवर्जी होता है।
- वर्गीकरण पहले और सारणीयन उसके बाद होता है।
- वर्ग-विस्तार ऐसा चुनें कि गणना सरल रहे और वर्ग-चिह्न पूर्ण संख्या बने।
- गुणात्मक आँकड़ों के बारंबारता वितरण में वर्ग-चिह्न और वर्ग-विस्तार की अवधारणा लागू नहीं होती।
- मिलान-चिह्नों में हर पाँचवाँ चिह्न पिछले चार चिह्नों को काटता है, जिससे गिनती पाँच-पाँच के समूहों में आसान हो जाती है।
15. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
वर्ग 40–60 का वर्ग-चिह्न क्या है?
- 20
- 40
- 50
- 60
उत्तर देखें
(40 + 60)/2 = 50। 20 वर्ग-विस्तार है।
उत्तर: (ग) 50
निम्न में से विविक्त चर कौन-सा है — वज़न, किसी कारखाने में श्रमिकों की संख्या, तापमान?
उत्तर देखें
श्रमिकों की संख्या — केवल पूर्णांक मान ले सकती है। वज़न और तापमान सतत चर हैं।
उत्तर: श्रमिकों की संख्या
"पिछले 10 वर्षों में भारत का चावल उत्पादन" किस प्रकार का वर्गीकरण है?
उत्तर देखें
समय के आधार पर — कालानुक्रमिक वर्गीकरण।
उत्तर: कालानुक्रमिक
अपवर्जी और समावेशी विधि में अंतर उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर देखें
अपवर्जी: वर्गों की उच्च सीमा उसी वर्ग में शामिल नहीं (0–10, 10–20); मान 10 अगले वर्ग में; सतत चर के लिए। समावेशी: दोनों सीमाएँ शामिल (0–9, 10–19); वर्गों के बीच अंतराल; विविक्त चर के लिए।
उत्तर: उच्च सीमा का समावेश/अपवर्जन; उपयुक्तता
वर्ग 5–9, 10–14, 15–19 को अपवर्जी रूप में बदलिए।
उत्तर देखें
समायोजन कारक = (10 − 9)/2 = 0.5। निम्न सीमा से 0.5 घटाएँ, उच्च सीमा में जोड़ें: 4.5–9.5, 9.5–14.5, 14.5–19.5।
उत्तर: 4.5–9.5, 9.5–14.5, 14.5–19.5
वर्ग-चिह्न 15, 25, 35, 45 दिए हैं। वर्ग-सीमाएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
वर्ग-विस्तार = 25 − 15 = 10; आधा = 5। निम्न सीमा = वर्ग-चिह्न − 5, उच्च = वर्ग-चिह्न + 5: 10–20, 20–30, 30–40, 40–50।
उत्तर: 10–20, 20–30, 30–40, 40–50
20 परिवारों के बच्चों की संख्या (काल्पनिक): 2, 1, 3, 2, 0, 2, 1, 4, 2, 3, 1, 2, 0, 3, 2, 1, 2, 3, 1, 2। बारंबारता सारणी बनाइए।
उत्तर देखें
गिनती: 0 → 2; 1 → 5; 2 → 8; 3 → 4; 4 → 1। योग = 2 + 5 + 8 + 4 + 1 = 20 ✓।
उत्तर: 0:2, 1:5, 2:8, 3:4, 4:1
"वर्गीकरण से सूचना की हानि होती है।" स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखें
बारंबारता वितरण में केवल यह पता रहता है कि किसी वर्ग में कितने प्रेक्षण हैं, उनके सटीक मान नहीं। आगे की गणना में वर्ग के सभी मानों को वर्ग-चिह्न के बराबर मान लिया जाता है, जिससे परिणाम अनुमानित हो जाते हैं। यह सरलता के बदले चुकाई गई कीमत है।
उत्तर: सटीक मान खो जाते हैं; वर्ग-चिह्न से अनुमान
25 श्रमिकों की दैनिक मज़दूरी (₹; काल्पनिक आँकड़े): 312, 455, 380, 298, 520, 410, 365, 470, 335, 590, 425, 388, 305, 448, 512, 372, 399, 460, 342, 555, 418, 327, 483, 395, 438। 250 से शुरू करके 50 के विस्तार वाला बारंबारता वितरण बनाइए।
उत्तर देखें
न्यूनतम 298 और अधिकतम 590 है, इसलिए वर्ग 250–300 से 550–600 तक होंगे। वर्ग और गिनती: 250–300: 298 → 1; 300–350: 312, 335, 305, 342, 327 → 5; 350–400: 380, 365, 388, 372, 399, 395 → 6; 400–450: 410, 425, 448, 418, 438 → 5; 450–500: 455, 470, 460, 483 → 4; 500–550: 520, 512 → 2; 550–600: 590, 555 → 2। योग = 1 + 5 + 6 + 5 + 4 + 2 + 2 = 25 ✓। (ध्यान दें: हर प्रेक्षण किसी एक वर्ग में अवश्य आना चाहिए — इसलिए पहला वर्ग न्यूनतम मान को और अंतिम वर्ग अधिकतम मान को शामिल करे।)
उत्तर: 1, 5, 6, 5, 4, 2, 2 (वर्ग 250–300 से 550–600)
सतत और विविक्त चर में अंतर बताइए। किस प्रकार के चर के लिए अपवर्जी विधि अधिक उपयुक्त है और क्यों?
उत्तर देखें
सतत चर सीमा के भीतर कोई भी मान (दशमलव सहित) ले सकता है और मापन से प्राप्त होता है (ऊँचाई, आय); विविक्त चर केवल निश्चित मान लेता है और गणना से प्राप्त होता है (बच्चों की संख्या)। अपवर्जी विधि सतत चर के लिए उपयुक्त है, क्योंकि सतत चर में 19.7 जैसे मान आ सकते हैं, जो समावेशी वर्ग 10–19 और 20–29 के बीच के अंतराल में "खो" जाएँगे; अपवर्जी वर्गों में कोई अंतराल नहीं होता, इसलिए हर मान किसी एक वर्ग में अवश्य आता है।
उत्तर: सतत चर — क्योंकि अपवर्जी वर्गों में अंतराल नहीं होता
आय के आँकड़ों के लिए असमान वर्ग क्यों उपयुक्त हो सकते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखें
आय का वितरण प्रायः विषम होता है — अधिकांश परिवार निम्न और मध्यम आय में, और बहुत कम परिवार बहुत ऊँची आय में। समान वर्ग (जैसे ₹5,000 विस्तार) लें तो ऊँची आय के बहुत सारे वर्ग लगभग खाली रहेंगे और निम्न आय के वर्ग में बहुत भीड़ होगी। असमान वर्ग — जैसे 0–5,000; 5,000–10,000; 10,000–20,000; 20,000–50,000; 50,000–2,00,000 — आँकड़ों को अधिक अर्थपूर्ण और संक्षिप्त रूप में दिखाते हैं।
उत्तर: विषम वितरण के कारण; निम्न आय में छोटे और ऊँची आय में बड़े वर्ग
ऊपर (अनुच्छेद 6) के 30 छात्रों के बारंबारता वितरण से सापेक्ष और प्रतिशत बारंबारता ज्ञात कीजिए। कितने प्रतिशत छात्रों ने 30 या अधिक अंक पाए?
उत्तर देखें
सापेक्ष बारंबारता = f/30: 0–10: 0.067; 10–20: 0.167; 20–30: 0.333; 30–40: 0.300; 40–50: 0.133। प्रतिशत: 6.7%, 16.7%, 33.3%, 30%, 13.3% (योग ≈ 100%)। 30 या अधिक अंक = वर्ग 30–40 और 40–50 = (9 + 4)/30 × 100 = 43.3%।
उत्तर: 43.3% छात्रों ने 30 या अधिक अंक पाए
16. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- कच्चे आँकड़े → वर्गीकरण (कालानुक्रमिक, स्थानिक, गुणात्मक, मात्रात्मक)।
- सतत (मापन) बनाम विविक्त (गणना) चर।
- बारंबारता वितरण: वर्ग, सीमाएँ, विस्तार = उ − नि, वर्ग-चिह्न = (उ + नि)/2।
- मिलान-चिह्न से गिनती; योग की जाँच।
- अपवर्जी (सतत) बनाम समावेशी (विविक्त); समायोजन कारक से वास्तविक सीमाएँ।
- बारंबारता सारणी (विविक्त), द्विचर वितरण; वर्गीकरण से सूचना की हानि।