Class 11 Economics · Chapter 8 · भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास

भारत और उसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव

भारत, पाकिस्तान और चीन के विकास पथ, जनांकिकीय संकेतक, GDP, मानव विकास और विकास नीतियों का मूल्यांकन।

NCERT भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास + अर्थशास्त्र में सांख्यिकीCBSE Class 11 17 min read

1. अध्याय एक नज़र में

किसी देश की विकास यात्रा को बेहतर समझने का एक प्रभावी तरीका है — उसकी तुलना ऐसे देशों से करना जिन्होंने लगभग उसी समय और लगभग समान परिस्थितियों में अपनी यात्रा शुरू की थी। भारत, पाकिस्तान और चीन — तीनों ने लगभग एक ही समय पर, 1940 के दशक के अंत में, अपनी विकास यात्रा शुरू की। भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ, पाकिस्तान 1947 में बना, और चीनी जनवादी गणराज्य (People's Republic of China) की स्थापना 1949 में हुई।

इस अध्याय में हम इन तीन पड़ोसी देशों की विकास रणनीतियों, जनांकिकीय संकेतकों (Demographic Indicators), सकल घरेलू उत्पाद और क्षेत्रकों की संरचना, तथा मानव विकास संकेतकों का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। साथ ही यह समझेंगे कि वैश्वीकरण के दौर में पड़ोसी देशों के अनुभवों से क्या सीखा जा सकता है।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • भारत, पाकिस्तान और चीन की विकास यात्रा का आरंभ और उनकी समानताएँ।
  • चीन: ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड, सांस्कृतिक क्रांति, 1978 के सुधार, SEZ।
  • पाकिस्तान: मिश्रित अर्थव्यवस्था, सुधार और संकट।
  • जनांकिकीय संकेतक: जनसंख्या, घनत्व, लिंगानुपात, एक-संतान नीति।
  • संवृद्धि और क्षेत्रक संरचना का तुलनात्मक विश्लेषण।
  • मानव विकास संकेतक और विकास रणनीतियों का मूल्यांकन।

2. समानांतर विकास यात्राएँ

स्वतंत्रता/स्थापना के समय तीनों देशों की परिस्थितियाँ कई मायनों में समान थीं — विशाल जनसंख्या, कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था, व्यापक निर्धनता और कमज़ोर औद्योगिक आधार। तीनों ने अपने विकास के लिए योजनाबद्ध रणनीति (Planned Strategy) अपनाई:

  • भारत: 1951–56 में पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की।
  • पाकिस्तान: 1956 में अपनी पहली पंचवर्षीय योजना (जिसे मध्यावधि योजना भी कहा गया) की घोषणा की।
  • चीन: 1953 में अपनी पहली पंचवर्षीय योजना की घोषणा की।

भारत और पाकिस्तान ने एक जैसी रणनीतियाँ अपनाईं — जैसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्रक का निर्माण और सामाजिक विकास पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाना। 1980 के दशक तक तीनों देशों की संवृद्धि दर और प्रति व्यक्ति आय लगभग समान थी। इसके बाद उनके रास्ते अलग होने लगे।

क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक समूह

विश्व के अनेक देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक समूह बनाए हैं, ताकि आपसी व्यापार और सहयोग बढ़े — जैसे यूरोपीय संघ (EU), दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (ASEAN), G-8, G-20, ब्रिक्स (BRICS) और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC)। इन समूहों में शामिल होने वाले देशों के लिए अपने पड़ोसियों की विकास प्रक्रियाओं को समझना आवश्यक हो जाता है, क्योंकि वे बाज़ार में प्रतिस्पर्धी भी हैं और साझेदार भी।

3. चीन की विकास यात्रा

1949 में एक-दलीय शासन के अंतर्गत चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना के बाद अर्थव्यवस्था के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रकों — उद्यमों और भूमि — पर सरकार का स्वामित्व और नियंत्रण स्थापित हुआ।

(क) ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड (Great Leap Forward — GLF), 1958

  • उद्देश्य: देश का बड़े पैमाने पर और तीव्र औद्योगीकरण।
  • लोगों को अपने घरों के पिछवाड़े (Backyard) में भी उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कम्यून (Communes) शुरू किए गए — कम्यून पद्धति में लोग सामूहिक रूप से खेती करते थे।
  • इस अभियान को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा: एक भयंकर अकाल में बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई; रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के साथ संघर्ष के बाद उसने अपने विशेषज्ञ वापस बुला लिए, जिससे औद्योगिक विकास बाधित हुआ।

(ख) महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति (Great Proletarian Cultural Revolution), 1966–76

इस अवधि में छात्रों और विशेषज्ञों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने और ग्रामीणों से सीखने के लिए भेजा गया। इससे शिक्षा और विशेषज्ञता के विकास में व्यवधान आया।

(ग) 1978 के सुधार

चीन की वर्तमान तीव्र औद्योगिक संवृद्धि को 1978 में शुरू हुए सुधारों से जोड़ा जाता है। ये सुधार चरणबद्ध (Phased) रूप से लागू किए गए:

  • प्रारंभिक चरण: कृषि, विदेशी व्यापार और निवेश क्षेत्रकों में सुधार। कृषि में कम्यून की भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में बाँटकर अलग-अलग परिवारों को उपयोग के लिए (स्वामित्व के लिए नहीं) दे दिया गया। निर्धारित कर चुकाने के बाद परिवार शेष उपज रख सकते थे।
  • बाद का चरण: औद्योगिक क्षेत्रक में सुधार — निजी फर्मों और ग्राम तथा कस्बा उद्यमों (Township and Village Enterprises) को वस्तुओं का उत्पादन करने की अनुमति दी गई। इससे सरकारी उद्यमों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
  • दोहरी कीमत निर्धारण (Dual Pricing): किसान और औद्योगिक इकाइयों को सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर निश्चित मात्रा में आगत और निर्गत खरीदने-बेचने होते थे; शेष को वे बाज़ार कीमतों पर खरीद-बेच सकते थे। उत्पादन बढ़ने के साथ बाज़ार में लेन-देन का हिस्सा बढ़ता गया।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones — SEZs): विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्थापित किए गए।

4. पाकिस्तान की विकास यात्रा

  • पाकिस्तान ने मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy) मॉडल अपनाया, जिसमें सार्वजनिक और निजी — दोनों क्षेत्रकों की भागीदारी थी।
  • 1950 और 1960 के दशकों में अनेक विनियमित नीतिगत ढाँचे लागू किए गए — आयात प्रतिस्थापन आधारित औद्योगीकरण। इसमें उपभोक्ता वस्तुओं के विनिर्माण के लिए प्रशुल्क संरक्षण और प्रतिस्पर्धी आयातों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण शामिल था।
  • हरित क्रांति के आगमन से कृषि का यंत्रीकरण हुआ और कुछ चयनित क्षेत्रों में आधारिक संरचना में सार्वजनिक निवेश बढ़ा, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई। इससे कृषि ढाँचे में भी परिवर्तन आया।
  • 1970 का दशक: पूँजीगत वस्तुओं के उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • 1970 के अंत और 1980 का दशक: नीतियों में बदलाव — विराष्ट्रीयकरण और निजी क्षेत्रक को प्रोत्साहन। इस दौरान पाकिस्तान को पश्चिमी देशों से वित्तीय सहायता और मध्य-पूर्व में काम करने वाले प्रवासियों द्वारा भेजी गई राशि (Remittances) भी मिली, जिससे आर्थिक संवृद्धि को सहायता मिली।
  • 1988: देश में सुधार शुरू किए गए।
पाकिस्तान की संवृद्धि की कमज़ोरियाँ
  • संवृद्धि का बड़ा भाग विदेशी सहायता और प्रवासी आय पर निर्भर रहा — जो अस्थिर स्रोत हैं।
  • कृषि संवृद्धि प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के बजाय अच्छी फसल (मौसम) पर अधिक निर्भर रही।
  • विनिर्माण क्षेत्रक का अपेक्षित विस्तार नहीं हुआ; निर्यात सीमित रहे।
  • राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी ऋण के बढ़ते बोझ ने भुगतान संतुलन के संकट उत्पन्न किए।

5. जनांकिकीय संकेतकों की तुलना

नीचे की तालिका में मात्राओं के बजाय तीनों देशों की सापेक्ष स्थिति (गुणात्मक तुलना) दी गई है, जो सामान्यतः स्वीकृत प्रवृत्तियों पर आधारित है:

संकेतकभारतचीनपाकिस्तान
जनसंख्या का आकारबहुत बड़ा — विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों मेंबहुत बड़ातीनों में सबसे छोटा
जनसंख्या घनत्वतीनों में सबसे अधिकभौगोलिक क्षेत्र बड़ा होने से भारत से कमभारत से कम
जनसंख्या वृद्धि दरमध्यम, घटती हुईसबसे कमतीनों में सबसे अधिक
लिंगानुपातपुरुषों की तुलना में महिलाएँ कम — पुत्र-प्राथमिकता की चिंतामहिलाएँ कममहिलाएँ कम
प्रजनन दरघटती हुईबहुत कमअपेक्षाकृत अधिक
नगरीकरणतीनों में अपेक्षाकृत कमतेज़ी से बढ़ा, अधिकभारत से कुछ अधिक

चीन की एक-संतान नीति (One-Child Policy)

1970 के दशक के अंत में चीन ने जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिए एक-संतान नीति लागू की। इससे जनसंख्या वृद्धि दर में तेज़ गिरावट आई, पर इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम भी सामने आए — लिंगानुपात में असंतुलन और कुछ दशकों बाद जनसंख्या में वृद्धों का अनुपात बढ़ना, जिससे कार्यशील आयु वर्ग पर निर्भरता का बोझ बढ़ता है। बाद में चीन ने यह नीति शिथिल कर दी (पहले दो संतान, फिर तीन संतान की अनुमति)।

याद रखें

तीनों देशों में लिंगानुपात महिलाओं के प्रतिकूल है। इसका कारण सामान्यतः पुत्र-प्राथमिकता (Son Preference) माना जाता है। तीनों देशों ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं।

6. सकल घरेलू उत्पाद और क्षेत्रक संरचना

दीर्घकाल में चीन ने तीनों देशों में सबसे तेज़ और सबसे स्थिर GDP संवृद्धि दर्ज की। 1980 के दशक में पाकिस्तान की संवृद्धि दर भारत से आगे थी, पर बाद के दशकों में उसमें गिरावट और उतार-चढ़ाव दिखा, जबकि भारत की संवृद्धि दर मध्यम से तेज़ होती गई। आज चीन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है, और भारत भी विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

विकास के मार्ग में अंतर

देशसंवृद्धि का मुख्य वाहकविशेषता
चीनविनिर्माण (Manufacturing) — द्वितीयक क्षेत्रककृषि से श्रमिक बड़ी संख्या में विनिर्माण में गए; बाद में सेवा क्षेत्रक भी बढ़ा। विकास का सामान्य ऐतिहासिक क्रम: कृषि → विनिर्माण → सेवाएँ
भारतसेवा क्षेत्रक (Services)कृषि से सीधे सेवा क्षेत्रक की ओर छलाँग; विनिर्माण का हिस्सा अपेक्षाकृत कम रहा; कार्यबल का बड़ा भाग अब भी कृषि में
पाकिस्तानसेवा क्षेत्रकभारत जैसी ही प्रवृत्ति; विनिर्माण कमज़ोर; विदेशी सहायता और प्रवासी आय पर निर्भरता
कृषि विनिर्माण सेवाएँ चीन का मार्ग कृषि सेवाएँ विनिर्माण चरण अपेक्षाकृत कमज़ोर भारत और पाकिस्तान का मार्ग
प्रतीकात्मक चित्र: चीन ने विनिर्माण-आधारित विकास किया; भारत और पाकिस्तान में सेवा क्षेत्रक ने प्रमुख भूमिका निभाई।

7. मानव विकास संकेतक

आर्थिक संवृद्धि के साथ-साथ यह देखना भी आवश्यक है कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता कितनी सुधरी — शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा, निर्धनता और स्वच्छता। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) प्रतिवर्ष मानव विकास सूचकांक (Human Development Index — HDI) जारी करता है, जो जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और प्रति व्यक्ति आय पर आधारित है।

संकेतकसामान्य तुलनात्मक स्थिति
मानव विकास सूचकांक (HDI) रैंकचीन तीनों में सबसे आगे; भारत दूसरे स्थान पर; पाकिस्तान पीछे
जीवन प्रत्याशाचीन में सबसे अधिक
शिशु मृत्यु दरचीन में सबसे कम; पाकिस्तान में अपेक्षाकृत अधिक
साक्षरताचीन में लगभग सार्वभौमिक; भारत और पाकिस्तान में महिला साक्षरता अभी भी चुनौती
निर्धनताचीन ने अत्यधिक निर्धनता में सबसे तेज़ कमी की; भारत में भी उल्लेखनीय कमी
स्वच्छता और पेयजलतीनों देशों में सुधार, पर ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर
स्वतंत्रता संकेतक (Liberty Indicators)

मानव विकास के मूल्यांकन में केवल आय, शिक्षा और स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, कानून का शासन, प्रेस की स्वतंत्रता और राजनीतिक भागीदारी जैसे "स्वतंत्रता संकेतकों" को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दृष्टि से लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपना महत्व है, भले ही उसकी आर्थिक संवृद्धि की गति कुछ धीमी हो।

8. विकास रणनीतियों का मूल्यांकन

देशशक्तियाँसीमाएँ / चुनौतियाँ
चीनसुधारों से पहले ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सामाजिक आधारिक संरचना तैयार की गई थी, जिससे सुधारों का लाभ तेज़ी से मिला; भूमि सुधार; विनिर्माण-आधारित तीव्र संवृद्धि; SEZ और विदेशी निवेश; निर्धनता में तेज़ कमीएक-दलीय शासन, राजनीतिक स्वतंत्रता की सीमाएँ; जनसंख्या में वृद्धों का बढ़ता अनुपात; पर्यावरण पर दबाव; क्षेत्रीय असमानता
भारतलोकतांत्रिक व्यवस्था; विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था; सेवा क्षेत्रक (IT) में वैश्विक पहचान; कुशल मानव संसाधनविनिर्माण का कमज़ोर आधार; कृषि पर अधिक निर्भरता; आधारिक संरचना की कमी; रोज़गार सृजन की चुनौती; सामाजिक संकेतकों में असमानता
पाकिस्तानप्रवासी आय; कुछ क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में सुधारराजनीतिक अस्थिरता; विदेशी सहायता और ऋण पर निर्भरता; कमज़ोर विनिर्माण और निर्यात; मानव विकास संकेतकों में पिछड़ापन
मुख्य सीख

चीन के अनुभव से पता चलता है कि मानव पूँजी (शिक्षा-स्वास्थ्य) और आधारिक संरचना में प्रारंभिक निवेश, तथा चरणबद्ध सुधार, तीव्र संवृद्धि की नींव बन सकते हैं। पाकिस्तान के अनुभव से पता चलता है कि केवल बाहरी सहायता और प्रवासी आय पर आधारित संवृद्धि टिकाऊ नहीं होती। भारत के लिए चुनौती है — लोकतांत्रिक ढाँचे के भीतर श्रम-गहन विनिर्माण, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्रक में निवेश बढ़ाना।

9. मास्टर तालिका : प्रमुख शब्दावली और तथ्य

शब्द / तथ्यविवरण
चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना1949
पहली पंचवर्षीय योजनाभारत 1951, चीन 1953, पाकिस्तान 1956
ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड1958; तीव्र औद्योगीकरण, कम्यून
सांस्कृतिक क्रांति1966–76
चीन में सुधार1978; चरणबद्ध, दोहरी कीमत, SEZ
पाकिस्तान में सुधार1988
एक-संतान नीतिचीन; 1970 के दशक का अंत
HDIUNDP; जीवन प्रत्याशा + शिक्षा + प्रति व्यक्ति आय
सर्वाधिक जनसंख्या घनत्वभारत (तीनों में)
चीन की संवृद्धि का वाहकविनिर्माण

10. मास्टर सारांश तालिका

आधारभारतचीनपाकिस्तान
शासनलोकतंत्रएक-दलीय शासनलोकतंत्र और सैन्य शासन के दौर
सुधार वर्ष199119781988
संवृद्धि का वाहकसेवाएँविनिर्माणसेवाएँ
HDI स्थिति (तीनों में)मध्यसबसे आगेपीछे
मुख्य चुनौतीविनिर्माण और रोज़गारवृद्ध जनसंख्या, स्वतंत्रताअस्थिरता, बाहरी निर्भरता

11. माइंड मैप

भारत, चीन, पाकिस्तान
चीन
  • GLF 1958, सुधार 1978
  • SEZ, एक-संतान नीति
पाकिस्तान
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था
  • सुधार 1988, बाहरी निर्भरता
भारत
  • योजना 1951, सुधार 1991
  • सेवा-आधारित संवृद्धि
तुलना
  • जनांकिकी, GDP
  • HDI, स्वतंत्रता संकेतक

12. टिप्स और ट्रिक्स

स्मार्ट तरीके
  • सुधार वर्षों का क्रम: चीन 78 → पाकिस्तान 88 → भारत 91।
  • पहली योजना: भारत 51 → चीन 53 → पाकिस्तान 56।
  • चीन = "विनिर्माण", भारत/पाकिस्तान = "सेवा" — तुलनात्मक प्रश्नों का केंद्रीय बिंदु।
आम गलतियाँ
  • ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड को 1978 के सुधारों से जोड़ना — GLF 1958 का अभियान था।
  • चीन की भूमि सुधार में किसानों को भूमि का "स्वामित्व" मिलना लिखना — केवल उपयोग का अधिकार मिला।
  • तीनों में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व चीन का लिखना — घनत्व भारत का सबसे अधिक है।

13. महत्वपूर्ण वन-लाइनर

  • तीनों देशों ने लगभग एक साथ, 1940 के दशक के अंत में विकास यात्रा शुरू की।
  • ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड का उद्देश्य तीव्र औद्योगीकरण था।
  • चीन ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए SEZ बनाए।
  • पाकिस्तान की संवृद्धि में प्रवासी आय और विदेशी सहायता की बड़ी भूमिका रही।
  • चीन की संवृद्धि विनिर्माण-आधारित रही है।
  • HDI को UNDP जारी करता है।
  • तीनों देशों में लिंगानुपात महिलाओं के प्रतिकूल है।
  • चीन में 1978 के सुधार किसी बाहरी संकट के दबाव के बिना, स्वेच्छा से और चरणबद्ध ढंग से लागू किए गए।
  • पाकिस्तान में 1970 के दशक में पूँजीगत वस्तुओं के उद्योगों का राष्ट्रीयकरण हुआ।

14. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

चीन में आर्थिक सुधार किस वर्ष प्रारंभ हुए?

  1. 1949
  2. 1958
  3. 1978
  4. 1991
उत्तर देखें

1978। 1949 = गणराज्य की स्थापना, 1958 = ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड, 1991 = भारत के सुधार।

उत्तर: (ग) 1978

प्र2आसान

ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर देखें

देश का बड़े पैमाने पर तीव्र औद्योगीकरण।

उत्तर: तीव्र औद्योगीकरण

प्र3आसान

भारत, चीन और पाकिस्तान में से किस देश में जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है?

उत्तर देखें

भारत — चीन का भौगोलिक क्षेत्रफल बहुत बड़ा होने से उसका घनत्व भारत से कम है।

उत्तर: भारत

प्र4मध्यम

चीन की कम्यून पद्धति क्या थी? 1978 के सुधारों में इसमें क्या परिवर्तन हुआ?

उत्तर देखें

कम्यून पद्धति में ग्रामीण लोग सामूहिक रूप से खेती करते थे। 1978 के सुधारों में कम्यून की भूमि छोटे भूखंडों में बाँटकर परिवारों को उपयोग के लिए (स्वामित्व के लिए नहीं) दी गई; निर्धारित कर चुकाने के बाद शेष उपज परिवार रख सकते थे — इससे उत्पादन के लिए प्रोत्साहन बढ़ा।

उत्तर: सामूहिक खेती → पारिवारिक उपयोग अधिकार

प्र5मध्यम

दोहरी कीमत निर्धारण (Dual Pricing) प्रणाली को समझाइए।

उत्तर देखें

किसानों और औद्योगिक इकाइयों को सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर आगत और निर्गत की निश्चित मात्रा खरीदनी-बेचनी होती थी; शेष मात्रा वे बाज़ार कीमतों पर खरीद-बेच सकते थे। उत्पादन बढ़ने के साथ बाज़ार में होने वाले लेन-देन का अनुपात बढ़ता गया — इससे अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे बाज़ार-उन्मुख हुई।

उत्तर: निश्चित मात्रा पर सरकारी कीमत + शेष पर बाज़ार कीमत

प्र6मध्यम

चीन की एक-संतान नीति के परिणाम बताइए।

उत्तर देखें

सकारात्मक: जनसंख्या वृद्धि दर में तेज़ गिरावट। नकारात्मक: लिंगानुपात में असंतुलन; कुछ दशकों बाद वृद्धों का अनुपात बढ़ना और कार्यशील आयु वर्ग पर निर्भरता का बोझ। बाद में यह नीति शिथिल की गई।

उत्तर: जनसंख्या वृद्धि में कमी, पर लिंगानुपात असंतुलन और वृद्ध होती जनसंख्या

प्र7मध्यम

पाकिस्तान की आर्थिक संवृद्धि की प्रमुख कमज़ोरियाँ क्या रहीं?

उत्तर देखें

विदेशी सहायता और प्रवासी आय (अस्थिर स्रोत) पर निर्भरता; कृषि संवृद्धि का प्रौद्योगिकी के बजाय मौसम पर निर्भर होना; कमज़ोर विनिर्माण और सीमित निर्यात; राजनीतिक अस्थिरता; बढ़ता विदेशी ऋण और भुगतान संतुलन संकट।

उत्तर: बाहरी निर्भरता, कमज़ोर विनिर्माण, अस्थिरता

प्र8मध्यम

"स्वतंत्रता संकेतक" क्या हैं? मानव विकास के मूल्यांकन में इनका क्या महत्व है?

उत्तर देखें

नागरिक अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, कानून का शासन, प्रेस की स्वतंत्रता, राजनीतिक भागीदारी जैसे संकेतक। मानव विकास केवल आय-शिक्षा-स्वास्थ्य नहीं है; लोगों को निर्णयों में भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी चाहिए। इसलिए केवल संवृद्धि दर से विकास का पूर्ण मूल्यांकन नहीं हो सकता।

उत्तर: राजनीतिक-नागरिक स्वतंत्रता के माप; विकास के व्यापक मूल्यांकन हेतु आवश्यक

प्र9कठिन

चीन की तीव्र संवृद्धि के कारणों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर देखें

(1) सुधारों से पहले ही शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि सुधार द्वारा सामाजिक आधारिक संरचना तैयार थी; (2) 1978 से चरणबद्ध सुधार — पहले कृषि, फिर उद्योग; (3) परिवारों को भूमि उपयोग अधिकार से कृषि उत्पादन में वृद्धि; (4) ग्राम-कस्बा उद्यमों और निजी फर्मों से प्रतिस्पर्धा; (5) दोहरी कीमत द्वारा धीरे-धीरे बाज़ार की ओर बढ़ना; (6) SEZ द्वारा विदेशी निवेश और निर्यात; (7) विनिर्माण-आधारित संवृद्धि जिसने कृषि से बड़ी संख्या में श्रमिकों को उत्पादक रोज़गार दिया।

उत्तर: प्रारंभिक सामाजिक निवेश + चरणबद्ध सुधार + SEZ + विनिर्माण-आधारित संवृद्धि

प्र10कठिन

भारत और चीन के विकास मार्गों में क्षेत्रक संरचना की दृष्टि से अंतर स्पष्ट कीजिए। भारत के लिए इसका क्या निहितार्थ है?

उत्तर देखें

चीन ने विकास का सामान्य ऐतिहासिक क्रम अपनाया — कृषि → विनिर्माण → सेवाएँ; विनिर्माण ने कृषि के अतिरिक्त श्रमिकों को बड़े पैमाने पर रोज़गार दिया। भारत में कृषि से सीधे सेवा क्षेत्रक की ओर छलाँग हुई; सेवा क्षेत्रक (IT, वित्त) GDP में बड़ा योगदान देता है, पर कम और अधिक कुशल श्रमिकों को रोज़गार देता है; इसलिए कार्यबल का बड़ा भाग अब भी कृषि में है। निहितार्थ: भारत को श्रम-गहन विनिर्माण, कौशल विकास और आधारिक संरचना पर बल देना होगा, ताकि कृषि से निकलने वाले श्रमिकों को उत्पादक रोज़गार मिल सके।

उत्तर: चीन विनिर्माण-आधारित, भारत सेवा-आधारित; भारत को विनिर्माण और कौशल पर ध्यान देना होगा

प्र11कठिन

तीनों देशों के सुधारों का क्रम और प्रकृति तुलनात्मक रूप से स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखें

चीन (1978): किसी बाहरी संकट या अंतरराष्ट्रीय दबाव के बिना, स्वेच्छा से चरणबद्ध सुधार — पहले कृषि, विदेशी व्यापार और निवेश, फिर उद्योग; दोहरी कीमत और SEZ। पाकिस्तान (1988): विदेशी सहायता और ऋण के संदर्भ में सुधार; राजनीतिक अस्थिरता के कारण निरंतरता का अभाव। भारत (1991): भुगतान संतुलन संकट के बाद विश्व बैंक और IMF से ऋण के साथ सुधार; व्यापक LPG उपाय। निष्कर्ष: चीन के सुधार सबसे पहले और स्व-प्रेरित थे, जबकि भारत और पाकिस्तान के सुधार काफ़ी हद तक संकट और बाहरी परिस्थितियों से प्रेरित रहे।

उत्तर: चीन — स्व-प्रेरित चरणबद्ध; भारत-पाकिस्तान — संकट/बाहरी दबाव से प्रेरित

प्र12कठिन

"केवल GDP संवृद्धि की तुलना से किसी देश के विकास का पूर्ण मूल्यांकन नहीं हो सकता।" भारत, चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में इस कथन की विवेचना कीजिए।

उत्तर देखें

GDP संवृद्धि आय की वृद्धि दिखाती है, पर यह नहीं बताती कि लोगों का जीवन कितना सुधरा। इसके लिए मानव विकास संकेतक — जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर, साक्षरता, निर्धनता, स्वच्छता — देखने होते हैं; इनमें चीन आगे है, भारत मध्य में और पाकिस्तान पीछे। साथ ही स्वतंत्रता संकेतक — लोकतंत्र, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता — भी महत्वपूर्ण हैं; इस दृष्टि से भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था एक बड़ी शक्ति है, जबकि चीन में राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित है। अतः विकास का संतुलित मूल्यांकन आय, मानव विकास और स्वतंत्रता — तीनों के आधार पर होना चाहिए।

उत्तर: GDP + मानव विकास + स्वतंत्रता संकेतक — तीनों आवश्यक

15. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • भारत (1947), पाकिस्तान (1947), चीन (1949) — समान आरंभ; योजनाएँ 1951, 1956, 1953।
  • चीन: GLF 1958 (कम्यून), सांस्कृतिक क्रांति 1966–76, सुधार 1978 (भूमि उपयोग अधिकार, दोहरी कीमत, SEZ)।
  • पाकिस्तान: मिश्रित अर्थव्यवस्था, 1970 में राष्ट्रीयकरण, 1988 सुधार; बाहरी निर्भरता।
  • जनांकिकी: भारत का घनत्व सबसे अधिक; पाकिस्तान की वृद्धि दर सबसे अधिक; चीन की एक-संतान नीति।
  • संवृद्धि: चीन विनिर्माण-आधारित, भारत-पाकिस्तान सेवा-आधारित।
  • HDI: चीन आगे, भारत मध्य, पाकिस्तान पीछे; स्वतंत्रता संकेतक भी महत्वपूर्ण।