1. अध्याय एक नज़र में
आपने अपने बड़ों से सुना होगा — "हमारे समय में सब कुछ कितना सस्ता था!" पर क्या सचमुच? यदि दूध, गेहूँ, कपड़ा, किराया — सबकी कीमतें अलग-अलग दर से बदली हों, तो "कीमतें कितनी बढ़ीं", इसका एक संख्या में उत्तर कैसे दें? इस समस्या का समाधान है — सूचकांक (Index Number)।
सूचकांक एक ऐसा सांख्यिकीय उपकरण है जो संबंधित चरों के एक समूह में समय (या स्थान) के साथ हुए परिवर्तन को एक संख्या द्वारा मापता है। महँगाई (मुद्रास्फीति) मापना, वेतन और महँगाई भत्ता तय करना, औद्योगिक उत्पादन की प्रगति देखना, शेयर बाज़ार की स्थिति जानना — इन सबमें सूचकांकों का उपयोग होता है। इस अध्याय में हम सूचकांक बनाने की विधियाँ, प्रमुख भारतीय सूचकांक, उनके उपयोग और सीमाएँ सीखेंगे।
- सूचकांक का अर्थ; आधार वर्ष और चालू वर्ष।
- सरल समूही विधि और मूल्यानुपातों का सरल औसत।
- भारित सूचकांक: लास्पेयर और पाशे विधि; भारित मूल्यानुपात।
- प्रमुख सूचकांक: उपभोक्ता कीमत सूचकांक, थोक कीमत सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, सेंसेक्स।
- मुद्रास्फीति और वास्तविक आय की गणना।
- सूचकांक निर्माण की समस्याएँ और उपयोग।
2. सूचकांक का अर्थ और आधारभूत शब्द
सूचकांक एक सांख्यिकीय माप है जो किसी चर या संबंधित चरों के समूह में आधार वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में हुए सापेक्ष परिवर्तन को प्रतिशत के रूप में दर्शाता है। आधार वर्ष का सूचकांक सदैव 100 माना जाता है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| आधार वर्ष (Base Year) — 0 | वह वर्ष जिससे तुलना की जाती है; सूचकांक = 100 |
| चालू वर्ष (Current Year) — 1 | वह वर्ष जिसकी तुलना की जा रही है |
| p₀, p₁ | आधार और चालू वर्ष की कीमतें |
| q₀, q₁ | आधार और चालू वर्ष की मात्राएँ |
| मूल्यानुपात (Price Relative) | (p₁ ÷ p₀) × 100 — किसी एक वस्तु की कीमत का सूचकांक |
उदाहरण: यदि किसी सूचकांक का चालू वर्ष का मान 125 है, तो इसका अर्थ है कि आधार वर्ष की तुलना में औसत कीमतें 25% बढ़ी हैं। यदि मान 90 है, तो 10% घटी हैं।
आधार वर्ष के चुनाव की शर्तें
- आधार वर्ष सामान्य वर्ष (Normal Year) हो — उसमें युद्ध, अकाल, बाढ़, महामारी जैसी असामान्य घटनाएँ न हुई हों।
- आधार वर्ष बहुत पुराना न हो, क्योंकि समय के साथ उपभोग की वस्तुएँ और आदतें बदल जाती हैं। इसीलिए सरकारी सूचकांकों का आधार वर्ष समय-समय पर संशोधित किया जाता है।
- आधार वर्ष के विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध हों।
सूचकांक के प्रकार
- कीमत सूचकांक (Price Index): कीमतों में परिवर्तन — जैसे उपभोक्ता कीमत सूचकांक।
- मात्रा सूचकांक (Quantity Index): उत्पादन या उपभोग की मात्रा में परिवर्तन — जैसे औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, कृषि उत्पादन सूचकांक।
- मूल्य सूचकांक (Value Index): कीमत × मात्रा (कुल मूल्य) में परिवर्तन — जैसे निर्यात के कुल मूल्य का सूचकांक।
3. अभारित (सरल) सूचकांक
इस अध्याय के सभी संख्यात्मक उदाहरणों के आँकड़े अभ्यास हेतु काल्पनिक हैं।
| वस्तु | p₀ (₹) | q₀ | p₁ (₹) | q₁ | मूल्यानुपात (p₁/p₀ × 100) |
|---|---|---|---|---|---|
| A (चावल, प्रति किलो) | 10 | 5 | 12 | 6 | 120 |
| B (दाल, प्रति किलो) | 8 | 10 | 10 | 8 | 125 |
| C (तेल, प्रति लीटर) | 20 | 2 | 25 | 3 | 125 |
| योग | 38 | — | 47 | — | 370 |
(क) सरल समूही विधि (Simple Aggregative Method)
P₀₁ = (47/38) × 100 = 123.68। सीमा: यह विधि वस्तुओं की इकाइयों से प्रभावित होती है — यदि तेल की कीमत प्रति लीटर के बजाय प्रति 15 लीटर टिन में दी जाए, तो उसका प्रभाव बहुत बढ़ जाएगा। साथ ही सभी वस्तुओं को समान महत्व मिलता है।
(ख) मूल्यानुपातों के सरल औसत की विधि (Simple Average of Price Relatives)
P₀₁ = 370/3 = 123.33। यह विधि इकाइयों से प्रभावित नहीं होती, क्योंकि मूल्यानुपात शुद्ध प्रतिशत हैं। पर फिर भी सभी वस्तुओं को समान महत्व मिलता है — नमक और चावल को एक जैसा भार, जो वास्तविक नहीं है।
4. भारित सूचकांक (Weighted Index Numbers)
वास्तविक जीवन में परिवार कुछ वस्तुओं (जैसे अनाज) पर अधिक और कुछ (जैसे नमक) पर कम खर्च करता है। इसलिए अधिक महत्वपूर्ण वस्तुओं को अधिक भार (Weight) देना चाहिए। मात्राएँ (q) भार के रूप में प्रयुक्त होती हैं।
(क) लास्पेयर कीमत सूचकांक (Laspeyres' Price Index) — आधार वर्ष की मात्राएँ भार
Σp₁q₀ = 12×5 + 10×10 + 25×2 = 60 + 100 + 50 = 210; Σp₀q₀ = 10×5 + 8×10 + 20×2 = 50 + 80 + 40 = 170। P₀₁ = (210/170) × 100 = 123.53।
अर्थ: आधार वर्ष में जो वस्तुओं की टोकरी (Basket) ₹170 में आती थी, वही टोकरी चालू वर्ष में ₹210 में आती है — अर्थात 23.53% अधिक खर्च।
(ख) पाशे कीमत सूचकांक (Paasche's Price Index) — चालू वर्ष की मात्राएँ भार
Σp₁q₁ = 12×6 + 10×8 + 25×3 = 72 + 80 + 75 = 227; Σp₀q₁ = 10×6 + 8×8 + 20×3 = 60 + 64 + 60 = 184। P₀₁ = (227/184) × 100 = 123.37।
अर्थ: चालू वर्ष की टोकरी आधार वर्ष की कीमतों पर ₹184 की होती, जबकि अब ₹227 की है।
| लास्पेयर | पाशे |
|---|---|
| आधार वर्ष की मात्राएँ (q₀) भार | चालू वर्ष की मात्राएँ (q₁) भार |
| भार एक बार तय — हर वर्ष नई मात्राएँ एकत्र करने की आवश्यकता नहीं; व्यावहारिक | हर वर्ष नई मात्राओं की आवश्यकता — महँगा और कठिन |
| कीमतें बढ़ने पर लोग महँगी वस्तुएँ कम खरीदते हैं, पर यह विधि यह परिवर्तन नहीं पकड़ती — इसलिए कीमत वृद्धि को कुछ अधिक आँकने की प्रवृत्ति | वर्तमान उपभोग प्रतिरूप दर्शाती है; कीमत वृद्धि को कुछ कम आँकने की प्रवृत्ति |
(ग) भारित मूल्यानुपात विधि
उदाहरण: W = p₀q₀ = 50, 80, 40 (ΣW = 170); R = 120, 125, 125। ΣWR = 6000 + 10000 + 5000 = 21000। P₀₁ = 21000/170 = 123.53 — यह लास्पेयर सूचकांक के बराबर है (जब भार p₀q₀ हो, तो दोनों गणितीय रूप से समान होते हैं)।
मात्रा सूचकांक
इसी प्रकार मात्रा सूचकांक में कीमतें भार बनती हैं: Q₀₁ = (Σq₁p₀ ÷ Σq₀p₀) × 100। उदाहरण: Σq₁p₀ = 184, Σq₀p₀ = 170 → Q₀₁ = 108.24 — अर्थात उपभोग की मात्रा लगभग 8% बढ़ी।
5. भारत के प्रमुख सूचकांक
| सूचकांक | क्या मापता है | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) | उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं-सेवाओं की खुदरा कीमतों में परिवर्तन — "जीवन-निर्वाह लागत सूचकांक"। अलग-अलग वर्गों के लिए अलग CPI बनते हैं — जैसे औद्योगिक श्रमिक, कृषि मज़दूर, तथा ग्रामीण, शहरी और संयुक्त | खुदरा मुद्रास्फीति मापना; महँगाई भत्ता (DA) तय करना; RBI की मौद्रिक नीति में मुद्रास्फीति लक्ष्य |
| थोक कीमत सूचकांक (WPI) | थोक बाज़ार में वस्तुओं (प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन-बिजली, विनिर्मित उत्पाद) की कीमतों में परिवर्तन; सेवाएँ शामिल नहीं | उत्पादक स्तर पर कीमतों की प्रवृत्ति; राष्ट्रीय आय के कुछ अनुमानों में अपस्फीतिकारक |
| औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) | खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्रकों के उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन — मात्रा सूचकांक | औद्योगिक संवृद्धि की निगरानी |
| सेंसेक्स (SENSEX) | बंबई स्टॉक एक्सचेंज की 30 प्रमुख कंपनियों के शेयरों की कीमतों का सूचकांक; आधार वर्ष 1978–79 = 100 | शेयर बाज़ार की सामान्य दिशा; निवेशकों के विश्वास का संकेतक |
| कृषि उत्पादन सूचकांक | कृषि फ़सलों के उत्पादन में परिवर्तन | कृषि क्षेत्रक की प्रगति |
(सरकारी सूचकांकों के आधार वर्ष और भार समय-समय पर संशोधित किए जाते हैं; नवीनतम विवरण संबंधित सरकारी प्रकाशनों में देखें।)
6. मुद्रास्फीति और वास्तविक आय
मुद्रास्फीति दर (Rate of Inflation)
उदाहरण: CPI पिछले वर्ष 150 और इस वर्ष 159 है। मुद्रास्फीति = (9/150) × 100 = 6%।
वास्तविक आय / वास्तविक मज़दूरी (Real Income)
यदि किसी कर्मचारी का वेतन 20% बढ़ा, पर कीमतें भी 20% बढ़ गईं, तो उसकी क्रय-शक्ति वही रही। इसलिए मौद्रिक आय (Nominal Income) के बजाय वास्तविक आय देखनी चाहिए:
आधार वर्ष में किसी श्रमिक की मासिक आय ₹10,000 थी (CPI = 100)। चालू वर्ष में आय ₹13,200 है और CPI = 120। वास्तविक आय = (13,200/120) × 100 = ₹11,000 (आधार वर्ष की कीमतों पर)। अर्थात मौद्रिक आय 32% बढ़ी, पर वास्तविक आय केवल 10%।
मुद्रास्फीति का प्रभाव — किसे लाभ, किसे हानि?
मुद्रास्फीति सभी को समान रूप से प्रभावित नहीं करती। जिन लोगों की आय स्थिर है — जैसे निश्चित पेंशन पाने वाले या बिना महँगाई भत्ते वाले कर्मचारी — उनकी वास्तविक आय घटती है। ऋणदाताओं (Creditors) को हानि होती है, क्योंकि जो धन वे वापस पाते हैं उसकी क्रय-शक्ति कम हो चुकी होती है; जबकि ऋणियों (Debtors) को लाभ होता है। बचत खाते में रखी राशि पर ब्याज दर यदि मुद्रास्फीति से कम हो, तो बचतकर्ता की वास्तविक संपत्ति घटती है। दूसरी ओर, जिन उत्पादकों की बिक्री कीमतें लागत से तेज़ बढ़ती हैं, उन्हें लाभ हो सकता है। इसीलिए सरकार और केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को एक सीमित दायरे में रखने का प्रयास करते हैं, और इसकी निगरानी के लिए सूचकांक सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं।
महँगाई भत्ता (Dearness Allowance)
कर्मचारियों की वास्तविक आय बनाए रखने के लिए सरकार और कई संस्थाएँ उपभोक्ता कीमत सूचकांक के आधार पर समय-समय पर महँगाई भत्ते में संशोधन करती हैं — इसे वेतन का सूचकांकीकरण (Indexation) कहते हैं।
रुपये की क्रय-शक्ति
यदि CPI = 125, तो आज ₹1 की क्रय-शक्ति आधार वर्ष के 100/125 = ₹0.80 के बराबर है।
7. आधार वर्ष बदलना और अन्य व्यावहारिक उपयोग
आधार परिवर्तन (Base Shifting)
कभी-कभी किसी पुराने आधार वर्ष वाले सूचकांक को नए आधार वर्ष पर व्यक्त करना होता है — जैसे दो अलग-अलग आधार वर्षों वाले सूचकांकों की तुलना के लिए, या आधार वर्ष बहुत पुराना हो जाने पर। इसके लिए सूत्र सरल है:
| वर्ष | पुराना सूचकांक (आधार: वर्ष 1 = 100) | नया सूचकांक (आधार: वर्ष 3 = 100) |
|---|---|---|
| वर्ष 1 | 100 | 100/125 × 100 = 80 |
| वर्ष 2 | 110 | 110/125 × 100 = 88 |
| वर्ष 3 | 125 | 100 |
| वर्ष 4 | 140 | 140/125 × 100 = 112 |
(काल्पनिक आँकड़े) ध्यान दें — आधार बदलने से वर्षों के बीच का सापेक्ष संबंध नहीं बदलता; वर्ष 4 अब भी वर्ष 3 से 12% अधिक है।
राष्ट्रीय आय की अपस्फीति (Deflation)
किसी वर्ष का GDP चालू कीमतों पर मापा जाए, तो उसकी वृद्धि में कीमतों की वृद्धि भी शामिल होती है। वास्तविक उत्पादन वृद्धि जानने के लिए उसे उपयुक्त कीमत सूचकांक से "अपस्फीत" किया जाता है: स्थिर कीमतों पर GDP = (चालू कीमतों पर GDP ÷ कीमत सूचकांक) × 100। उदाहरण (काल्पनिक) — चालू कीमतों पर GDP ₹240 लाख करोड़ और कीमत सूचकांक 120 हो, तो स्थिर (आधार वर्ष) कीमतों पर GDP = ₹200 लाख करोड़। इस विषय का विस्तृत अध्ययन कक्षा 12 के समष्टि अर्थशास्त्र में "राष्ट्रीय आय का लेखांकन" अध्याय में होगा।
सेंसेक्स को कैसे पढ़ें?
सेंसेक्स का बढ़ना यह संकेत देता है कि प्रमुख कंपनियों के शेयरों की कीमतें औसतन बढ़ीं — निवेशक भविष्य के बारे में आशावादी हैं। इसका गिरना निराशा या अनिश्चितता का संकेत है। पर सेंसेक्स केवल 30 बड़ी कंपनियों पर आधारित है, इसलिए यह पूरी अर्थव्यवस्था, विशेषकर कृषि और छोटे उद्योगों, की स्थिति का पूर्ण प्रतिबिंब नहीं है।
8. सूचकांक निर्माण की समस्याएँ और उपयोग
निर्माण की समस्याएँ / सावधानियाँ
- उद्देश्य का स्पष्ट निर्धारण: किसका और किस लिए — जैसे शहरी श्रमिकों की जीवन-निर्वाह लागत।
- वस्तुओं का चुनाव: प्रतिनिधि वस्तुएँ चुनना; नई वस्तुएँ (जैसे मोबाइल डेटा) जुड़ना और पुरानी हटना।
- आधार वर्ष का चुनाव: सामान्य और बहुत पुराना न हो।
- कीमतों का संग्रह: किस बाज़ार से, थोक या खुदरा; गुणवत्ता में परिवर्तन का समायोजन।
- भार का निर्धारण: उपभोग व्यय सर्वेक्षणों पर आधारित।
- सूत्र का चुनाव: लास्पेयर, पाशे या अन्य।
उपयोग
- मुद्रास्फीति मापना और मौद्रिक-राजकोषीय नीति बनाना।
- वेतन, महँगाई भत्ता और पेंशन का समायोजन।
- वास्तविक आय और जीवन-स्तर में परिवर्तन मापना।
- औद्योगिक और कृषि उत्पादन की प्रगति देखना।
- राष्ट्रीय आय को स्थिर कीमतों पर बदलना (अपस्फीति)।
- शेयर बाज़ार की दिशा जानना; व्यावसायिक निर्णय।
सूचकांक औसत परिवर्तन दिखाता है, हर व्यक्ति का अनुभव नहीं — जिस परिवार के बजट में खाद्य पदार्थ अधिक हैं, उसके लिए खाद्य कीमतें बढ़ने पर महँगाई सूचकांक से अधिक महसूस होगी। गुणवत्ता में सुधार (जैसे बेहतर मोबाइल) को कीमत वृद्धि से अलग करना कठिन है। प्रतिदर्श पर आधारित होने से त्रुटियाँ संभव हैं।
9. मास्टर तालिका : सभी सूत्र
| सूचकांक / अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| मूल्यानुपात | R = (p₁/p₀) × 100 |
| सरल समूही | (Σp₁/Σp₀) × 100 |
| मूल्यानुपातों का सरल औसत | ΣR / n |
| लास्पेयर | (Σp₁q₀/Σp₀q₀) × 100 |
| पाशे | (Σp₁q₁/Σp₀q₁) × 100 |
| भारित मूल्यानुपात | ΣWR / ΣW |
| मात्रा सूचकांक (लास्पेयर) | (Σq₁p₀/Σq₀p₀) × 100 |
| मुद्रास्फीति दर | [(I₁ − I₀)/I₀] × 100 |
| वास्तविक आय | (मौद्रिक आय / CPI) × 100 |
| रुपये की क्रय-शक्ति | 100 / कीमत सूचकांक |
10. मास्टर सारांश तालिका
| विधि | भार | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| सरल समूही | नहीं | इकाइयों से प्रभावित |
| मूल्यानुपातों का औसत | नहीं (समान) | इकाई-मुक्त |
| लास्पेयर | q₀ | व्यावहारिक; वृद्धि अधिक आँकने की प्रवृत्ति |
| पाशे | q₁ | वर्तमान प्रतिरूप; कम आँकने की प्रवृत्ति |
| CPI / WPI / IIP / सेंसेक्स | सरकारी भार | खुदरा / थोक कीमत / उत्पादन / शेयर |
11. माइंड मैप
- आधार वर्ष = 100
- कीमत, मात्रा, मूल्य
- सरल समूही, अनुपात औसत
- लास्पेयर, पाशे
- CPI, WPI
- IIP, सेंसेक्स
- मुद्रास्फीति, वास्तविक आय
- महँगाई भत्ता
12. टिप्स और ट्रिक्स
- "लास्पेयर = पुरानी मात्रा (q₀), पाशे = अभी की मात्रा (q₁)" — इसी से सूत्र याद रहेगा।
- सूचकांक 100 से जितना ऊपर, उतने प्रतिशत की वृद्धि — पर यह आधार वर्ष से तुलना है, पिछले वर्ष से नहीं।
- मुद्रास्फीति दर के लिए हमेशा पिछली अवधि के सूचकांक से भाग दें।
- सूचकांक 113 से 120 होने को "7% मुद्रास्फीति" लिखना — सही: 7/113 × 100 ≈ 6.2%।
- मौद्रिक आय में वृद्धि को जीवन-स्तर में वृद्धि मान लेना।
- WPI में सेवाओं को शामिल मानना।
13. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- आधार वर्ष का सूचकांक सदैव 100 होता है।
- लास्पेयर सूचकांक में आधार वर्ष की मात्राएँ भार होती हैं।
- पाशे सूचकांक में चालू वर्ष की मात्राएँ भार होती हैं।
- CPI को जीवन-निर्वाह लागत सूचकांक भी कहते हैं।
- IIP एक मात्रा सूचकांक है।
- सेंसेक्स 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित है।
- वास्तविक आय = मौद्रिक आय ÷ CPI × 100।
- मूल्य सूचकांक कीमत और मात्रा दोनों के परिवर्तन को एक साथ दर्शाता है।
- आधार वर्ष बदलने से वर्षों के बीच का सापेक्ष संबंध नहीं बदलता, केवल संदर्भ बिंदु बदलता है।
- मुद्रास्फीति से निश्चित आय वाले लोगों और ऋणदाताओं को हानि तथा ऋणियों को लाभ होता है।
- राष्ट्रीय आय को स्थिर कीमतों पर बदलने के लिए कीमत सूचकांक का उपयोग अपस्फीतिकारक के रूप में किया जाता है।
- सूचकांक बनाने के लिए वस्तुओं के भार प्रायः परिवारों के उपभोग व्यय सर्वेक्षणों से तय किए जाते हैं।
- रुपये की क्रय-शक्ति कीमत सूचकांक के व्युत्क्रमानुपाती होती है — सूचकांक बढ़ने पर क्रय-शक्ति घटती है।
14. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
लास्पेयर कीमत सूचकांक में भार के रूप में किसका उपयोग होता है?
- चालू वर्ष की मात्राएँ
- आधार वर्ष की मात्राएँ
- चालू वर्ष की कीमतें
- कोई भार नहीं
उत्तर देखें
लास्पेयर = Σp₁q₀/Σp₀q₀ — आधार वर्ष की मात्राएँ (q₀) भार। चालू वर्ष की मात्राएँ पाशे में।
उत्तर: (ख) आधार वर्ष की मात्राएँ
किसी वस्तु की कीमत आधार वर्ष में ₹40 और चालू वर्ष में ₹50 है। मूल्यानुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
(50/40) × 100 = 125।
उत्तर: 125
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक किस प्रकार का सूचकांक है?
उत्तर देखें
यह उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन मापता है — मात्रा सूचकांक।
उत्तर: मात्रा सूचकांक
CPI पिछले वर्ष 180 और इस वर्ष 198 है। मुद्रास्फीति दर ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
(198 − 180)/180 × 100 = 18/180 × 100 = 10%।
उत्तर: 10%
एक कर्मचारी की आय ₹25,000 से बढ़कर ₹30,000 हो गई, जबकि CPI 100 से बढ़कर 125 हो गया। क्या उसका जीवन-स्तर सुधरा?
उत्तर देखें
वास्तविक आय = 30,000/125 × 100 = ₹24,000, जो आधार वर्ष की ₹25,000 से कम है। मौद्रिक आय 20% बढ़ी पर कीमतें 25% बढ़ीं — जीवन-स्तर गिरा।
उत्तर: नहीं; वास्तविक आय घटकर ₹24,000
सरल समूही विधि की दो सीमाएँ बताइए।
उत्तर देखें
(1) वस्तुओं की कीमतें जिस इकाई में दी गई हैं, उससे परिणाम प्रभावित होता है — ऊँची कीमत वाली इकाई का प्रभाव अधिक। (2) सभी वस्तुओं को समान महत्व मिलता है, जबकि उपभोग में उनका महत्व अलग-अलग है।
उत्तर: इकाइयों से प्रभावित; समान महत्व
आधार वर्ष के चुनाव में कौन-सी सावधानियाँ आवश्यक हैं?
उत्तर देखें
आधार वर्ष सामान्य हो (युद्ध, अकाल, महामारी जैसी असामान्य घटनाओं वाला न हो); बहुत पुराना न हो (उपभोग प्रतिरूप बदल जाते हैं); उसके विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध हों।
उत्तर: सामान्य, हाल का और विश्वसनीय आँकड़ों वाला
CPI और WPI में दो अंतर बताइए।
उत्तर देखें
(1) CPI खुदरा कीमतों पर, WPI थोक कीमतों पर आधारित। (2) CPI में वस्तुएँ और सेवाएँ (शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन) दोनों, WPI में केवल वस्तुएँ। (3) CPI उपभोक्ताओं की जीवन-निर्वाह लागत दर्शाता है और महँगाई भत्ते के लिए उपयोगी है; WPI उत्पादक स्तर की कीमत प्रवृत्ति।
उत्तर: खुदरा बनाम थोक; सेवाएँ शामिल बनाम नहीं
वस्तुएँ (काल्पनिक): X — p₀ = 5, q₀ = 10, p₁ = 6, q₁ = 12; Y — p₀ = 10, q₀ = 4, p₁ = 15, q₁ = 3। लास्पेयर और पाशे सूचकांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
Σp₁q₀ = 60 + 60 = 120; Σp₀q₀ = 50 + 40 = 90 → लास्पेयर = 120/90 × 100 = 133.33। Σp₁q₁ = 72 + 45 = 117; Σp₀q₁ = 60 + 30 = 90 → पाशे = 117/90 × 100 = 130। लास्पेयर अधिक है — उपभोक्ताओं ने महँगी हुई वस्तु Y कम खरीदी, जिसे लास्पेयर नहीं पकड़ता।
उत्तर: लास्पेयर 133.33, पाशे 130
भारित मूल्यानुपात विधि से सूचकांक ज्ञात कीजिए (काल्पनिक): वस्तु A — R = 110, भार 40; B — R = 130, भार 25; C — R = 150, भार 20; D — R = 90, भार 15।
उत्तर देखें
ΣWR = 4400 + 3250 + 3000 + 1350 = 12000; ΣW = 100। सूचकांक = 12000/100 = 120 — औसत कीमतें 20% बढ़ीं।
उत्तर: 120
लास्पेयर सूचकांक कीमत वृद्धि को प्रायः अधिक क्यों आँकता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखें
लास्पेयर आधार वर्ष की टोकरी को स्थिर मानता है। पर जब किसी वस्तु की कीमत बहुत बढ़ती है, तो उपभोक्ता उसके स्थान पर सस्ते विकल्प खरीदते हैं (प्रतिस्थापन)। लास्पेयर इस प्रतिस्थापन को नहीं पकड़ता और मानता है कि लोग अब भी महँगी वस्तु पुरानी मात्रा में खरीद रहे हैं — इसलिए जीवन-निर्वाह लागत में वृद्धि अधिक दिखाता है। उदाहरण: प्र9 में Y की कीमत 50% बढ़ी और उसकी खपत 4 से 3 हुई; लास्पेयर (133.33) पाशे (130) से अधिक रहा।
उत्तर: स्थिर आधार टोकरी के कारण प्रतिस्थापन प्रभाव की उपेक्षा
किसी सरकारी कर्मचारी का मूल वेतन ₹40,000 है। CPI आधार अवधि में 100 था और अब 115 है। वास्तविक आय बनाए रखने के लिए कितना महँगाई भत्ता चाहिए? यदि उसे 10% महँगाई भत्ता मिलता है, तो उसकी वास्तविक आय पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर देखें
वास्तविक आय बनाए रखने के लिए मौद्रिक आय = 40,000 × 115/100 = ₹46,000 → आवश्यक महँगाई भत्ता = ₹6,000 (15%)। 10% भत्ते पर आय = ₹44,000; वास्तविक आय = 44,000/115 × 100 = ₹38,261 (लगभग) — आधार अवधि की ₹40,000 से लगभग ₹1,739 कम। अतः वास्तविक आय लगभग 4.3% घटेगी।
उत्तर: 15% (₹6,000) भत्ता चाहिए; 10% पर वास्तविक आय ≈ ₹38,261
15. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- सूचकांक: आधार वर्ष (= 100) की तुलना में सापेक्ष परिवर्तन; कीमत, मात्रा, मूल्य।
- सरल: Σp₁/Σp₀ × 100 (इकाइयों से प्रभावित); ΣR/n।
- भारित: लास्पेयर (q₀), पाशे (q₁), भारित मूल्यानुपात ΣWR/ΣW।
- भारतीय सूचकांक: CPI (खुदरा, DA), WPI (थोक, केवल वस्तुएँ), IIP (उत्पादन), सेंसेक्स (30 शेयर, 1978–79 = 100)।
- मुद्रास्फीति = (I₁ − I₀)/I₀ × 100; वास्तविक आय = मौद्रिक आय/CPI × 100।
- सावधानियाँ: उद्देश्य, वस्तुएँ, आधार वर्ष, कीमतें, भार, सूत्र।