1. अध्याय एक नज़र में
गर्मियों में जब तापमान बढ़ता है तो आइसक्रीम की बिक्री बढ़ जाती है। किसी वस्तु की कीमत बढ़ने पर उसकी माँग प्रायः घटती है। परिवार की आय बढ़ने पर उसका उपभोग व्यय भी बढ़ता है। इन सभी उदाहरणों में दो चर एक साथ बदलते दिखते हैं। दो चरों के बीच इस प्रकार के संबंध की दिशा और तीव्रता को मापने के उपकरण को सहसंबंध (Correlation) कहते हैं।
अब तक हमने एक चर का अध्ययन किया (जैसे उसका माध्य)। इस अध्याय में हम दो चरों के बीच संबंध का अध्ययन करेंगे — प्रकीर्ण आरेख (Scatter Diagram), कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक (Karl Pearson's Coefficient) और स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध गुणांक (Spearman's Rank Correlation) के माध्यम से। साथ ही यह भी समझेंगे कि सहसंबंध का अर्थ कारण-परिणाम संबंध नहीं होता।
- सहसंबंध का अर्थ; धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य सहसंबंध।
- रैखिक और अरैखिक सहसंबंध।
- प्रकीर्ण आरेख से सहसंबंध पहचानना।
- कार्ल पियर्सन का गुणांक r: सूत्र, गुण, पद-विचलन विधि।
- स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध; समान कोटियों का समायोजन।
- सहसंबंध बनाम कारणता; आभासी सहसंबंध।
2. सहसंबंध का अर्थ और प्रकार
जब दो चरों के मान एक साथ, किसी निश्चित पैटर्न में बदलते हैं, तो उनके बीच सहसंबंध होता है। सहसंबंध दो चरों के बीच रैखिक संबंध की दिशा और तीव्रता को मापता है।
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| धनात्मक सहसंबंध (Positive) | दोनों चर एक ही दिशा में बदलते हैं — एक बढ़े तो दूसरा भी बढ़े | आय और उपभोग; वर्षा और फ़सल उत्पादन (एक सीमा तक); कीमत और पूर्ति |
| ऋणात्मक सहसंबंध (Negative) | दोनों चर विपरीत दिशा में बदलते हैं — एक बढ़े तो दूसरा घटे | कीमत और माँग; ब्याज दर और ऋण की माँग; किसी मशीन की आयु और उसका पुनर्विक्रय मूल्य |
| शून्य सहसंबंध (No / Zero) | दोनों चरों के बीच कोई रैखिक संबंध नहीं | छात्र की ऊँचाई और उसके अर्थशास्त्र के अंक |
रैखिक और अरैखिक सहसंबंध
यदि दो चरों के परिवर्तन का अनुपात स्थिर रहे और प्रकीर्ण आरेख के बिंदु लगभग एक सीधी रेखा के आसपास हों, तो सहसंबंध रैखिक (Linear) है। यदि बिंदु किसी वक्र के आसपास हों, तो अरैखिक (Non-linear / Curvilinear)। उदाहरण — खाद की मात्रा बढ़ाने पर फ़सल पहले बढ़ती है, फिर एक सीमा के बाद घटने लगती है — यह अरैखिक संबंध है। इस अध्याय के गुणांक केवल रैखिक सहसंबंध मापते हैं।
3. प्रकीर्ण आरेख (Scatter Diagram)
दो चरों के प्रत्येक युग्म (X, Y) को आलेख पर एक बिंदु के रूप में अंकित करने से प्रकीर्ण आरेख बनता है। बिंदुओं के बिखराव का पैटर्न सहसंबंध की दिशा और अनुमानित तीव्रता दिखाता है — बिना किसी गणना के।
- सभी बिंदु ऊपर की ओर जाती एक सीधी रेखा पर हों → पूर्ण धनात्मक सहसंबंध (r = +1)।
- सभी बिंदु नीचे की ओर जाती एक सीधी रेखा पर हों → पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध (r = −1)।
- बिंदु किसी पैटर्न के बिना बिखरे हों → शून्य सहसंबंध।
- सीमा: प्रकीर्ण आरेख केवल दिशा और अनुमानित तीव्रता दिखाता है, सटीक संख्यात्मक माप नहीं।
4. कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक (r)
इसे गुणन-आघूर्ण सहसंबंध गुणांक (Product Moment Correlation Coefficient) भी कहते हैं। यह दो चरों के बीच रैखिक सहसंबंध का सटीक संख्यात्मक माप देता है।
एक अन्य रूप: r = Cov(X, Y) ÷ (σx × σy), जहाँ सहप्रसरण (Covariance) Cov(X, Y) = Σxy / N, और σ मानक विचलन है। दोनों रूप एक ही परिणाम देते हैं।
माध्य बिंदु (X̄, Ȳ) से होकर दो रेखाएँ खींचें, तो प्रकीर्ण आरेख चार भागों (चतुर्थांशों) में बँट जाता है। जो बिंदु दोनों माध्यों से ऊपर हैं (x > 0, y > 0) या दोनों से नीचे हैं (x < 0, y < 0), उनके लिए गुणनफल xy धनात्मक है। जो बिंदु एक चर में माध्य से ऊपर और दूसरे में नीचे हैं, उनके लिए xy ऋणात्मक है। यदि अधिकांश बिंदु पहले प्रकार के हैं, तो Σxy धनात्मक होगा — धनात्मक सहसंबंध; यदि दूसरे प्रकार के, तो ऋणात्मक। यदि दोनों प्रकार के बिंदु लगभग बराबर हैं, तो Σxy शून्य के निकट होगा। हर में √(Σx²Σy²) से भाग देने पर परिणाम इकाई-मुक्त होकर −1 से +1 के बीच आ जाता है।
किसी परिवार की आय (X, ₹ हज़ार) और उपभोग व्यय (Y, ₹ हज़ार) के आँकड़े: X: 2, 4, 6, 8, 10; Y: 5, 7, 8, 12, 13।
| X | Y | x = X − 6 | y = Y − 9 | xy | x² | y² |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2 | 5 | −4 | −4 | 16 | 16 | 16 |
| 4 | 7 | −2 | −2 | 4 | 4 | 4 |
| 6 | 8 | 0 | −1 | 0 | 0 | 1 |
| 8 | 12 | 2 | 3 | 6 | 4 | 9 |
| 10 | 13 | 4 | 4 | 16 | 16 | 16 |
| ΣX = 30 | ΣY = 45 | 0 | 0 | 42 | 40 | 46 |
X̄ = 30/5 = 6, Ȳ = 45/5 = 9। r = 42 ÷ √(40 × 46) = 42 ÷ √1840 = 42 ÷ 42.90 = 0.98 (लगभग)। यह अत्यधिक प्रबल धनात्मक सहसंबंध है — आय बढ़ने के साथ उपभोग व्यय लगभग सीधी रेखा में बढ़ता है।
r का निर्वचन
| r का मान | निर्वचन |
|---|---|
| +1 | पूर्ण धनात्मक सहसंबंध |
| +0.7 से +1 के बीच | प्रबल धनात्मक |
| +0.3 से +0.7 के बीच | मध्यम धनात्मक |
| 0 के निकट | बहुत कमज़ोर या कोई रैखिक संबंध नहीं |
| −0.3 से −0.7 के बीच | मध्यम ऋणात्मक |
| −0.7 से −1 के बीच | प्रबल ऋणात्मक |
| −1 | पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध |
(ये सीमाएँ अंगूठे का नियम हैं, कठोर नियम नहीं।)
r के गुण
- r का मान −1 और +1 के बीच होता है: −1 ≤ r ≤ +1। यदि गणना में r इससे बाहर आए, तो गणना में त्रुटि है।
- r इकाई-मुक्त (Unit-free) है: यह एक शुद्ध संख्या है — इसलिए अलग-अलग इकाइयों वाले चरों (जैसे ₹ और किलोग्राम) का सहसंबंध भी निकाला जा सकता है।
- मूल-बिंदु और पैमाने के परिवर्तन से स्वतंत्र: यदि X और Y में से कोई स्थिर संख्या घटाएँ (मूल-बिंदु परिवर्तन) या किसी धनात्मक स्थिर संख्या से भाग दें (पैमाना परिवर्तन), तो r नहीं बदलता। इसी गुण पर पद-विचलन विधि आधारित है।
- r = 0 का अर्थ केवल "रैखिक संबंध नहीं" है; अरैखिक संबंध फिर भी हो सकता है।
- r सममित है: X और Y का सहसंबंध = Y और X का सहसंबंध।
पद-विचलन विधि
जब आँकड़े बड़े हों, तो कल्पित माध्य से विचलन लेकर और उन्हें किसी उभयनिष्ठ गुणक (h) से भाग देकर गणना सरल की जा सकती है:
मूल-बिंदु और पैमाने से स्वतंत्रता के गुण के कारण u और v से प्राप्त r, X और Y के r के बराबर होता है।
5. स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध गुणांक (rs)
कुछ विशेषताएँ — जैसे सुंदरता, ईमानदारी, नेतृत्व क्षमता, किसी प्रतियोगिता में प्रदर्शन — को सटीक रूप से मापा नहीं जा सकता, पर उन्हें कोटि (Rank) दी जा सकती है (प्रथम, द्वितीय …)। ऐसी स्थिति में, या जब आँकड़ों में चरम मान हों, स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध उपयोगी है।
दो निर्णायकों ने एक भाषण प्रतियोगिता के 6 प्रतिभागियों को कोटियाँ दीं:
| प्रतिभागी | A | B | C | D | E | F | योग |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| निर्णायक 1 (R₁) | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | — |
| निर्णायक 2 (R₂) | 2 | 1 | 4 | 3 | 6 | 5 | — |
| D = R₁ − R₂ | −1 | 1 | −1 | 1 | −1 | 1 | 0 |
| D² | 1 | 1 | 1 | 1 | 1 | 1 | 6 |
rs = 1 − (6 × 6)/(6³ − 6) = 1 − 36/210 = 1 − 0.171 = 0.83 (लगभग) — दोनों निर्णायकों की राय में प्रबल सहमति है। (जाँच: ΣD सदैव 0 होता है।)
समान कोटियाँ (Tied Ranks)
यदि दो या अधिक प्रेक्षणों के मान समान हों, तो उन्हें उन कोटियों का औसत दिया जाता है जो वे अन्यथा पाते। जैसे दो छात्र तीसरे और चौथे स्थान के लिए बराबर हों, तो दोनों को (3 + 4)/2 = 3.5 कोटि मिलेगी। ऐसी स्थिति में सूत्र में सुधार जोड़ा जाता है:
पियर्सन बनाम स्पीयरमैन
| कार्ल पियर्सन (r) | स्पीयरमैन (rs) |
|---|---|
| वास्तविक मापे गए मानों पर आधारित | कोटियों पर आधारित |
| मात्रात्मक आँकड़ों के लिए | गुणात्मक (कोटि-योग्य) आँकड़ों के लिए भी |
| चरम मानों से प्रभावित | चरम मानों से कम प्रभावित |
| अधिक सटीक, पर गणना लंबी | सरल गणना; कुछ सूचना की हानि |
6. अर्थशास्त्र में सहसंबंध के उपयोग
सहसंबंध अर्थशास्त्र में सबसे अधिक उपयोग होने वाले सांख्यिकीय उपकरणों में से एक है। कुछ उदाहरण:
- माँग का विश्लेषण: किसी वस्तु की कीमत और उसकी बिक्री के बीच ऋणात्मक सहसंबंध माँग के नियम की पुष्टि करता है। व्यापारी इसका उपयोग कीमत निर्धारण में करते हैं।
- उपभोग फलन: परिवारों की आय और उपभोग व्यय में धनात्मक सहसंबंध — यह विचार समष्टि अर्थशास्त्र (कक्षा 12) में उपभोग फलन का आधार है।
- कृषि: वर्षा और फ़सल उत्पादन, या उर्वरक उपयोग और प्रति हेक्टेयर उपज के बीच संबंध — सरकार इससे कृषि नीति बनाती है।
- शिक्षा और आय: शिक्षा के वर्षों और आय के बीच धनात्मक सहसंबंध — मानव पूँजी में निवेश के पक्ष में तर्क।
- मुद्रास्फीति और ब्याज दर: केंद्रीय बैंक इन चरों के संबंधों का अध्ययन कर मौद्रिक नीति तय करता है।
- पूर्वानुमान: यदि दो चरों में प्रबल सहसंबंध है, तो एक के ज्ञात मान से दूसरे का अनुमान लगाया जा सकता है — इसका औपचारिक अध्ययन उच्च कक्षाओं में "प्रतीपगमन (Regression)" के रूप में होता है।
प्रत्यक्ष विधि से r — दूसरा सूत्र
जब माध्य भिन्न में हों और विचलन निकालना कठिन हो, तो मूल मानों से सीधे यह सूत्र उपयोगी है:
X: 2, 4, 6, 8, 10; Y: 5, 7, 8, 12, 13। N = 5; ΣX = 30; ΣY = 45; ΣXY = 10 + 28 + 48 + 96 + 130 = 312; ΣX² = 4 + 16 + 36 + 64 + 100 = 220; ΣY² = 25 + 49 + 64 + 144 + 169 = 451।
अंश = 5 × 312 − 30 × 45 = 1560 − 1350 = 210। हर = √[(5 × 220 − 900)(5 × 451 − 2025)] = √(200 × 230) = √46000 = 214.48। r = 210/214.48 = 0.98 ✓ — विचलन विधि के समान उत्तर।
सहसंबंध और प्रतिदर्श का आकार
बहुत कम युग्मों (जैसे 3–4) से निकाला गया उच्च r संयोग का परिणाम भी हो सकता है। जितने अधिक युग्मों पर r आधारित हो, उस पर उतना अधिक भरोसा किया जा सकता है। इसलिए किसी आर्थिक निष्कर्ष के लिए सहसंबंध निकालते समय पर्याप्त संख्या में प्रेक्षण लेना और उन्हें यादृच्छिक रूप से चुनना आवश्यक है।
7. सहसंबंध और कारणता
दो चरों में प्रबल सहसंबंध होने का अर्थ यह नहीं कि एक दूसरे का कारण है। सहसंबंध के तीन अन्य कारण हो सकते हैं:
- संयोग (Chance): छोटे प्रतिदर्श में संयोगवश संबंध दिख सकता है।
- तीसरा चर (Third Variable): गर्मियों में आइसक्रीम की बिक्री और डूबने की घटनाएँ — दोनों बढ़ती हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि आइसक्रीम से डूबना होता है; दोनों का साझा कारण तापमान है।
- उलटा कारण (Reverse Causation): कारण की दिशा उलटी हो सकती है।
ऐसे सहसंबंध को, जिसका कोई तार्किक आधार न हो, आभासी या निरर्थक सहसंबंध (Spurious / Nonsense Correlation) कहते हैं। इसलिए सहसंबंध के निष्कर्ष को आर्थिक सिद्धांत और तर्क के साथ जाँचना चाहिए।
8. मास्टर तालिका : सभी सूत्र
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| पियर्सन r (माध्य से विचलन) | Σxy / √(Σx² Σy²) |
| सहप्रसरण रूप | r = Cov(X,Y) / (σx σy); Cov = Σxy/N |
| पद-विचलन | [NΣuv − ΣuΣv] / √{[NΣu² − (Σu)²][NΣv² − (Σv)²]} |
| स्पीयरमैन | rs = 1 − 6ΣD² / (n³ − n) |
| समान कोटि सुधार | ΣD² में Σ(m³ − m)/12 जोड़ें |
| सीमा | −1 ≤ r ≤ +1 |
| जाँच | Σx = 0, Σy = 0, ΣD = 0 |
9. मास्टर सारांश तालिका
| विधि | प्रकृति | लाभ | सीमा |
|---|---|---|---|
| प्रकीर्ण आरेख | आलेखी | तुरंत दिशा, अरैखिकता भी दिखती है | सटीक माप नहीं |
| कार्ल पियर्सन r | गणितीय | सटीक, इकाई-मुक्त | केवल रैखिक; चरम मानों से प्रभावित |
| स्पीयरमैन rs | कोटि-आधारित | गुणात्मक आँकड़ों में भी; सरल | मानों की सूचना की हानि |
10. माइंड मैप
- धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य
- रैखिक, अरैखिक
- बिंदुओं का पैटर्न
- दिशा व तीव्रता
- Σxy/√(Σx²Σy²)
- −1 से +1, इकाई-मुक्त
- 1 − 6ΣD²/(n³ − n)
- समान कोटि सुधार
11. टिप्स और ट्रिक्स
- गणना के बाद हमेशा जाँचें: −1 ≤ r ≤ 1; Σx = Σy = 0; ΣD = 0।
- स्पीयरमैन में n³ − n = n(n² − 1) — जैसे n = 6 पर 6 × 35 = 210; n = 10 पर 10 × 99 = 990।
- "मूल-बिंदु और पैमाने से स्वतंत्र" — इस गुण से बड़े आँकड़ों को छोटा करके r निकालें।
- परीक्षा में r निकालने का क्रम: (1) X̄, Ȳ ज्ञात करें; (2) x, y स्तंभ बनाएँ और Σx = Σy = 0 की जाँच करें; (3) xy, x², y² स्तंभ बनाएँ; (4) सूत्र में रखें; (5) उत्तर का निर्वचन एक वाक्य में लिखें — "प्रबल धनात्मक सहसंबंध" आदि। निर्वचन लिखना न भूलें, इस पर अलग से अंक मिलते हैं।
- यदि माध्य पूर्णांक न हो, तो विचलन विधि के स्थान पर प्रत्यक्ष सूत्र [NΣXY − ΣXΣY] वाला रूप उपयोग करें — भिन्नों से बचाव होगा।
- r = 0 को "कोई संबंध नहीं" लिखना — सही: "कोई रैखिक संबंध नहीं"।
- उच्च r को कारण-परिणाम का प्रमाण मानना।
- कोटि देते समय समान मानों को अलग-अलग कोटि दे देना — औसत कोटि दें।
12. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- सहसंबंध दो चरों के रैखिक संबंध की दिशा और तीव्रता मापता है।
- कीमत और माँग में ऋणात्मक सहसंबंध होता है।
- r का मान −1 और +1 के बीच होता है।
- r इकाई-मुक्त है।
- r मूल-बिंदु और पैमाने के परिवर्तन से स्वतंत्र है।
- गुणात्मक विशेषताओं के लिए कोटि सहसंबंध उपयुक्त है।
- सहसंबंध कारण-परिणाम संबंध सिद्ध नहीं करता।
- प्रकीर्ण आरेख में बिंदु जितने अधिक एक सीधी रेखा के निकट होते हैं, सहसंबंध उतना ही प्रबल होता है।
- स्पीयरमैन के सूत्र में कोटियों के अंतरों का योग (ΣD) सदैव शून्य होता है, इसलिए यह गणना की जाँच का उपयोगी साधन है।
- दो चरों के बीच अरैखिक संबंध होने पर भी पियर्सन का r शून्य के निकट आ सकता है, इसलिए पहले प्रकीर्ण आरेख देखना अच्छा अभ्यास है।
- सहसंबंध गुणांक की गणना के लिए दोनों चरों के युग्मित (Paired) प्रेक्षण आवश्यक हैं — हर X के साथ उसी इकाई का Y।
- उपभोग फलन, माँग वक्र और कृषि उत्पादन के अध्ययन में सहसंबंध का व्यापक उपयोग होता है।
13. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
सहसंबंध गुणांक r का मान हो सकता है:
- 1.5
- −2
- −0.6
- 3
उत्तर देखें
r सदैव −1 और +1 के बीच होता है; केवल −0.6 इस सीमा में है।
उत्तर: (ग) −0.6
ब्याज दर और ऋण की माँग के बीच किस प्रकार का सहसंबंध अपेक्षित है?
उत्तर देखें
ब्याज दर बढ़ने पर ऋण महँगा होता है, इसलिए माँग घटती है — ऋणात्मक सहसंबंध।
उत्तर: ऋणात्मक
प्रकीर्ण आरेख की एक सीमा बताइए।
उत्तर देखें
यह सहसंबंध की दिशा और अनुमानित तीव्रता दिखाता है, पर सटीक संख्यात्मक माप नहीं देता।
उत्तर: सटीक माप नहीं देता
Σxy = 60, Σx² = 90, Σy² = 40 (माध्यों से विचलन)। r ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
r = 60 / √(90 × 40) = 60 / √3600 = 60/60 = 1 — पूर्ण धनात्मक सहसंबंध।
उत्तर: r = 1
5 युग्मों के लिए ΣD² = 4। स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
rs = 1 − (6 × 4)/(125 − 5) = 1 − 24/120 = 1 − 0.2 = 0.8।
उत्तर: 0.8
"r इकाई-मुक्त है" — इसका क्या लाभ है?
उत्तर देखें
r एक शुद्ध संख्या है, इसलिए अलग-अलग इकाइयों वाले चरों (जैसे वर्षा मिमी में और उत्पादन क्विंटल में) का सहसंबंध निकाला जा सकता है, और विभिन्न आँकड़ा-समूहों के सहसंबंधों की आपस में तुलना की जा सकती है।
उत्तर: भिन्न इकाइयों के चरों का सहसंबंध और तुलना संभव
आँकड़े 40, 55, 55, 60, 72 को अवरोही क्रम में कोटि दीजिए (सबसे बड़े को कोटि 1)।
उत्तर देखें
72 → 1; 60 → 2; दोनों 55 तीसरे और चौथे स्थान पर → (3 + 4)/2 = 3.5 प्रत्येक; 40 → 5।
उत्तर: 40 → 5, 55 → 3.5, 55 → 3.5, 60 → 2, 72 → 1
आभासी सहसंबंध क्या है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखें
ऐसा सहसंबंध जो आँकड़ों में दिखता है पर जिसका कोई तार्किक कारण-संबंध नहीं होता — प्रायः संयोग या किसी तीसरे चर के कारण। उदाहरण: आइसक्रीम की बिक्री और डूबने की घटनाएँ दोनों गर्मियों में बढ़ती हैं; साझा कारण तापमान है, आइसक्रीम नहीं।
उत्तर: तर्कहीन सहसंबंध; आइसक्रीम-डूबना उदाहरण
X: 1, 2, 3, 4, 5; Y: 10, 8, 6, 4, 2 (काल्पनिक)। r ज्ञात कीजिए और निर्वचन कीजिए।
उत्तर देखें
X̄ = 3, Ȳ = 6। x: −2, −1, 0, 1, 2; y: 4, 2, 0, −2, −4। xy: −8, −2, 0, −2, −8 → Σxy = −20। Σx² = 10, Σy² = 40। r = −20/√400 = −20/20 = −1। पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध — सभी बिंदु नीचे जाती एक सीधी रेखा पर (Y = 12 − 2X)।
उत्तर: r = −1 (पूर्ण ऋणात्मक)
7 छात्रों के अर्थशास्त्र और गणित में अंकों की कोटियाँ (काल्पनिक): अर्थशास्त्र — 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7; गणित — 3, 1, 2, 5, 4, 7, 6। rs ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
D: −2, 1, 1, −1, 1, −1, 1; D²: 4, 1, 1, 1, 1, 1, 1 → ΣD² = 10। n³ − n = 343 − 7 = 336। rs = 1 − 60/336 = 1 − 0.179 = 0.82 (लगभग) — प्रबल धनात्मक सहसंबंध।
उत्तर: rs ≈ 0.82
सिद्ध कीजिए कि r मूल-बिंदु और पैमाने के परिवर्तन से स्वतंत्र है — X: 200, 400, 600, 800, 1000 और Y: 5, 7, 8, 12, 13 के उदाहरण से।
उत्तर देखें
u = X/100 लें (पैमाना परिवर्तन): u = 2, 4, 6, 8, 10 — यही अनुच्छेद 4 के उदाहरण का X है, और Y वही है। वहाँ r = 0.98 था। अतः X: 200 … 1000 और Y का r भी 0.98 होगा। कारण: r = Σxy/√(Σx²Σy²) में X को 100 से भाग देने पर अंश और हर — दोनों में x का गुणक 1/100 आता है और कट जाता है; किसी स्थिर संख्या को घटाने से माध्य से विचलन x नहीं बदलते।
उत्तर: r = 0.98 — परिवर्तन से अपरिवर्तित
एक अध्ययन में पाया गया कि किसी शहर में मोबाइल फ़ोन की संख्या और जीवन प्रत्याशा के बीच r = 0.9 है। क्या यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि मोबाइल फ़ोन जीवन प्रत्याशा बढ़ाते हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर देखें
नहीं। उच्च r केवल यह दर्शाता है कि दोनों चर एक साथ बढ़े हैं, कारण-संबंध नहीं। संभावित तीसरा चर — आय और आर्थिक विकास: आय बढ़ने से लोग अधिक मोबाइल खरीदते हैं और साथ ही बेहतर भोजन, स्वास्थ्य सेवाएँ भी प्राप्त करते हैं, जिससे जीवन प्रत्याशा बढ़ती है। अतः दोनों चर एक साझा कारण से प्रभावित हैं। कारण-संबंध स्थापित करने के लिए आर्थिक सिद्धांत, अन्य चरों का नियंत्रण और विस्तृत विश्लेषण आवश्यक है।
उत्तर: नहीं — सहसंबंध कारणता नहीं; साझा कारण (आय/विकास) संभव
14. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- सहसंबंध: दो चरों के रैखिक संबंध की दिशा और तीव्रता; धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य।
- प्रकीर्ण आरेख: बिंदुओं का पैटर्न — दिशा दिखाता है, सटीक माप नहीं।
- r = Σxy/√(Σx²Σy²); −1 ≤ r ≤ 1; इकाई-मुक्त; मूल-बिंदु और पैमाने से स्वतंत्र।
- rs = 1 − 6ΣD²/(n³ − n); समान कोटि = औसत कोटि + सुधार।
- r = 0 → रैखिक संबंध नहीं (अरैखिक संभव)।
- सहसंबंध ≠ कारणता; आभासी सहसंबंध से सावधान।