Class 11 Political Science · Chapter 8 · राजनीतिक सिद्धांत

धर्मनिरपेक्षता

धर्मनिरपेक्षता क्या है, अंतर-धार्मिक और अंतः-धार्मिक वर्चस्व, धर्मनिरपेक्ष राज्य, पश्चिमी और भारतीय मॉडल और आलोचनाएँ।

NCERT भारत का संविधान : सिद्धांत और व्यवहार + राजनीतिक सिद्धांतCBSE Class 11 12 min read

1. अध्याय एक नज़र में

भारत दुनिया के सबसे अधिक धार्मिक विविधता वाले देशों में से एक है — यहाँ हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, यहूदी और अनेक आदिवासी आस्थाओं को मानने वाले लोग साथ रहते हैं। ऐसे समाज में राज्य का धर्म के प्रति क्या रुख़ हो? इसका उत्तर है धर्मनिरपेक्षता (Secularism)। 42वें संशोधन (1976) से प्रस्तावना में "पंथनिरपेक्ष" शब्द जोड़ा गया, पर यह मूल्य संविधान में शुरू से ही था। इस अध्याय में हम धर्मनिरपेक्षता का अर्थ, धर्मनिरपेक्ष राज्य, पश्चिमी और भारतीय मॉडल का अंतर और भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ समझेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • अंतर-धार्मिक और अंतः-धार्मिक वर्चस्व।
  • धर्मनिरपेक्ष राज्य की विशेषताएँ।
  • पश्चिमी (परस्पर अलगाव) और भारतीय (सैद्धांतिक दूरी) मॉडल।
  • भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ और उनका उत्तर।

2. धर्मनिरपेक्षता क्या है?

धर्मनिरपेक्षता एक ऐसा सिद्धांत है जो धार्मिक वर्चस्व (religious domination) का विरोध करता है। वर्चस्व दो प्रकार का होता है:

प्रकारअर्थउदाहरण
अंतर-धार्मिक वर्चस्व (Inter-religious)एक धर्म के लोगों द्वारा दूसरे धर्म के लोगों पर प्रभुत्व या भेदभावभारत में 1984 में दिल्ली में सिख-विरोधी हिंसा, 1990 में कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन, 2002 में गुजरात की सांप्रदायिक हिंसा
अंतः-धार्मिक वर्चस्व (Intra-religious)एक ही धर्म के भीतर कुछ वर्गों द्वारा दूसरे वर्गों पर प्रभुत्वजाति आधारित छुआछूत, मंदिर-प्रवेश पर रोक, धार्मिक परंपराओं में महिलाओं के साथ भेदभाव

धर्मनिरपेक्षता दोनों प्रकार के वर्चस्व का विरोध करती है और धर्मों के बीच तथा धर्मों के भीतर स्वतंत्रता और समानता को बढ़ावा देती है। धर्मनिरपेक्षता धर्म-विरोधी नहीं है; यह धार्मिक कट्टरता और धर्म के नाम पर भेदभाव के विरुद्ध है।

3. धर्मनिरपेक्ष राज्य

धार्मिक भेदभाव रोकने का एक तरीक़ा है लोगों को शिक्षित करना; पर सबसे प्रभावी तरीक़ा है राज्य का धर्मनिरपेक्ष होना। धर्मनिरपेक्ष राज्य की विशेषताएँ:

  1. राज्य किसी एक धर्म का पक्ष नहीं लेता और किसी धर्म को राज्य धर्म घोषित नहीं करता।
  2. राज्य को धार्मिक संस्थाओं द्वारा नहीं चलाया जाता — धर्मतंत्र (theocracy) नहीं होता। उदाहरण: वेटिकन, या ऐसे देश जहाँ धार्मिक नेता शासन चलाते हैं।
  3. राज्य का किसी धर्म से गठबंधन नहीं होता — जैसे इतिहास में कुछ राजतंत्रों में एक धर्म को आधिकारिक संरक्षण मिला।
  4. राज्य के लक्ष्य शांति, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और धार्मिक उत्पीड़न से मुक्ति — धर्मनिरपेक्ष (गैर-धार्मिक) स्रोतों से निकलते हैं।

4. पश्चिमी और भारतीय मॉडल

आधारपश्चिमी (मुख्यतः अमेरिकी) मॉडलभारतीय मॉडल
मूल विचारधर्म और राज्य का परस्पर अलगाव (mutual exclusion) — दोनों एक-दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करतेसैद्धांतिक दूरी (principled distance) — राज्य धर्म से दूरी रखता है, पर ज़रूरत पड़ने पर समानता और सुधार के लिए हस्तक्षेप करता है
राज्य का हस्तक्षेपधर्म के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहींछुआछूत, जाति-भेद, लैंगिक भेदभाव जैसी कुरीतियों में हस्तक्षेप; जैसे अनु. 17, मंदिर-प्रवेश कानून, तीन तलाक़ पर रोक
राज्य की सहायताधार्मिक संस्थाओं को सरकारी अनुदान नहींअल्पसंख्यक समुदायों द्वारा चलाई जा रही शिक्षण संस्थाओं को सहायता संभव
किस पर ज़ोरमुख्यतः व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता; अंतर-धार्मिक समानता पर कम ध्यानव्यक्ति और समुदाय दोनों के अधिकार; अंतर-धार्मिक और अंतः-धार्मिक दोनों प्रकार के वर्चस्व का विरोध
सामुदायिक अधिकारप्रायः मान्य नहींअल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति और शिक्षण संस्थाएँ बनाए रखने का अधिकार (अनु. 29-30)
"सैद्धांतिक दूरी" का अर्थ

राजनीतिक विचारक राजीव भार्गव ने भारतीय धर्मनिरपेक्षता को "सैद्धांतिक दूरी" कहा। इसका अर्थ है — राज्य हर धर्म से समान दूरी नहीं, बल्कि सिद्धांत के आधार पर दूरी रखता है। यदि किसी धर्म की कोई प्रथा समानता और स्वतंत्रता के विरुद्ध है, तो राज्य हस्तक्षेप कर सकता है; और यदि किसी समुदाय को मदद की ज़रूरत है, तो राज्य मदद भी कर सकता है। लक्ष्य हमेशा स्वतंत्रता, समानता और गरिमा है।

भारतीय धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक आधार

  • अनु. 14, 15, 16: धर्म के आधार पर भेदभाव का निषेध।
  • अनु. 25-28: अंतःकरण की स्वतंत्रता, धर्म मानने-पालन करने-प्रचार की स्वतंत्रता; धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता; सरकारी शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा नहीं।
  • अनु. 29-30: अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार।
  • अनु. 17: छुआछूत का अंत — अंतः-धार्मिक वर्चस्व के विरुद्ध।
पश्चिमी — परस्पर अलगाव राज्य धर्म अलगाव की दीवार भारतीय — सैद्धांतिक दूरी राज्य धर्म 1 धर्म 2 धर्म 3 सुधार / सहायता
धर्मनिरपेक्षता के दो मॉडल (विचार-चित्र)।

5. भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ

आलोचनातर्कउत्तर
धर्म-विरोधीयह धार्मिक पहचान को कमज़ोर करती हैभारतीय धर्मनिरपेक्षता धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है; यह केवल धार्मिक वर्चस्व और कट्टरता का विरोध करती है
पश्चिम से आयातितयह ईसाई-पश्चिमी समाज की उपज हैभारतीय मॉडल अपनी परिस्थितियों से विकसित हुआ — इसमें सामुदायिक अधिकार और अंतः-धार्मिक सुधार जैसे विशिष्ट तत्त्व हैं; अशोक और अकबर जैसी सहिष्णुता की परंपराएँ भी भारत में रही हैं
अल्पसंख्यकवाद (Minoritism)यह अल्पसंख्यकों को विशेष सुविधाएँ देती हैअल्पसंख्यक अधिकार विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि बहुसंख्यक संस्कृति स्वाभाविक रूप से हावी रहती है
अति-हस्तक्षेपकारीराज्य समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता हैहस्तक्षेप केवल समानता और गरिमा की रक्षा के लिए है; कई सुधारों की माँग समुदायों के भीतर से उठी
वोट बैंक की राजनीतिदल धर्मनिरपेक्षता के नाम पर किसी समुदाय के वोट एकत्र करते हैंलोकतंत्र में हर समूह अपने हित के लिए संगठित हो सकता है; समस्या तब है जब दल केवल वोट लें और समुदाय के वास्तविक हित की उपेक्षा करें
असंभव परियोजनाइतने गहरे धार्मिक मतभेद वाले लोग साथ नहीं रह सकतेभारतीय इतिहास दिखाता है कि विविध समुदाय सदियों से साथ रहते आए हैं; धर्मनिरपेक्षता इसी सह-अस्तित्व को सुरक्षित रखती है

6. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
धर्मनिरपेक्षताधार्मिक वर्चस्व का विरोध; धर्मों के बीच व भीतर स्वतंत्रता-समानता
अंतर-धार्मिक वर्चस्वएक धर्म का दूसरे धर्म पर प्रभुत्व
अंतः-धार्मिक वर्चस्वएक ही धर्म के भीतर कुछ वर्गों का प्रभुत्व
धर्मतंत्र (Theocracy)धार्मिक नेताओं / संस्थाओं द्वारा चलाया जाने वाला राज्य
परस्पर अलगावपश्चिमी मॉडल — धर्म और राज्य का पूर्ण अलगाव
सैद्धांतिक दूरीभारतीय मॉडल — सिद्धांत आधारित दूरी व हस्तक्षेप
सांप्रदायिकताधार्मिक पहचान के आधार पर दूसरे समुदायों से शत्रुता
अल्पसंख्यकवादअल्पसंख्यकों के पक्षपात का आरोप
वोट बैंककिसी समुदाय को एकमुश्त मतदाता समूह मानना

7. मास्टर सारांश तालिका

विषयमुख्य बिंदु
अर्थअंतर-धार्मिक और अंतः-धार्मिक वर्चस्व का विरोध
धर्मनिरपेक्ष राज्यकोई राज्य धर्म नहीं; धर्मतंत्र नहीं; गैर-धार्मिक लक्ष्य
पश्चिमी मॉडलपरस्पर अलगाव; व्यक्ति पर ज़ोर
भारतीय मॉडलसैद्धांतिक दूरी; व्यक्ति + समुदाय; सुधार हेतु हस्तक्षेप
संविधानप्रस्तावना (42वाँ संशोधन), अनु. 14-17, 25-30
आलोचनाएँधर्म-विरोधी, आयातित, अल्पसंख्यकवाद, हस्तक्षेपकारी, वोट बैंक, असंभव

चार्ट — भारत की धार्मिक संरचना (जनगणना 2011, कुल जनसंख्या का प्रतिशत):

हिंदू79.8%
मुस्लिम14.2%
ईसाई2.3%
सिख1.7%
बौद्ध0.7%
जैन0.4%

8. माइंड मैप

धर्मनिरपेक्षता
वर्चस्व
  • अंतर-धार्मिक
  • अंतः-धार्मिक
राज्य
  • राज्य धर्म नहीं
  • धर्मतंत्र नहीं
पश्चिमी
  • परस्पर अलगाव
  • व्यक्ति
भारतीय
  • सैद्धांतिक दूरी
  • समुदाय भी
आलोचना
  • अल्पसंख्यकवाद
  • वोट बैंक

9. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • अंतर = दो धर्मों के बीच, अंतः = एक धर्म के भीतर।
  • पश्चिम = दीवार, भारत = दूरी (सैद्धांतिक)।
  • छह आलोचनाएँ "ध-आ-अ-ह-वो-अ": धर्म-विरोधी, आयातित, अल्पसंख्यकवाद, हस्तक्षेपकारी, वोट बैंक, असंभव।
आम गलतियाँ
  • धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्म-विरोध या नास्तिकता नहीं।
  • "सैद्धांतिक दूरी" का अर्थ "सभी धर्मों से बराबर दूरी" नहीं, बल्कि सिद्धांत के आधार पर दूरी या हस्तक्षेप है।
  • "पंथनिरपेक्ष" शब्द मूल प्रस्तावना में नहीं था; 1976 में जोड़ा गया।

10. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • 42वें संशोधन ने प्रस्तावना में "पंथनिरपेक्ष" जोड़ा।
  • भारतीय धर्मनिरपेक्षता को सैद्धांतिक दूरी कहा जाता है।
  • सैद्धांतिक दूरी की अवधारणा राजीव भार्गव से जुड़ी है।
  • अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता देता है।
  • अनुच्छेद 28 सरकारी शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा रोकता है।
  • अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थाएँ चलाने का अधिकार देता है।
  • धर्मतंत्र में धार्मिक संस्थाएँ राज्य चलाती हैं।
  • पश्चिमी मॉडल धर्म और राज्य के परस्पर अलगाव पर आधारित है।
  • जनगणना 2011 में मुस्लिम जनसंख्या 14.2% थी।
  • धर्मनिरपेक्षता मूल ढाँचे का भाग मानी गई है।

11. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

"पंथनिरपेक्ष" शब्द प्रस्तावना में किस संशोधन से जोड़ा गया?

  1. 24वाँ
  2. 42वाँ
  3. 44वाँ
  4. 73वाँ
उत्तर देखें

42वें संशोधन (1976) ने "समाजवादी", "पंथनिरपेक्ष" और "अखंडता" शब्द जोड़े।

उत्तर: (ख) 42वाँ

प्र2आसान

जाति के आधार पर मंदिर-प्रवेश पर रोक किस प्रकार का वर्चस्व है?

  1. अंतर-धार्मिक
  2. अंतः-धार्मिक
  3. राजनीतिक
  4. आर्थिक
उत्तर देखें

एक ही धर्म के भीतर कुछ वर्गों द्वारा दूसरों पर प्रभुत्व अंतः-धार्मिक वर्चस्व है।

उत्तर: (ख) अंतः-धार्मिक

प्र3आसान

धर्मतंत्र (Theocracy) किसे कहते हैं?

उत्तर देखें

जिस राज्य में शासन धार्मिक संस्थाओं या धार्मिक नेताओं द्वारा चलाया जाता है और धार्मिक नियम ही राज्य के कानून होते हैं, उसे धर्मतंत्र कहते हैं। धर्मनिरपेक्ष राज्य धर्मतंत्र के विपरीत है।

उत्तर: धार्मिक नेताओं द्वारा संचालित राज्य

प्र4मध्यम

धर्मनिरपेक्ष राज्य की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर देखें

(1) कोई राज्य धर्म नहीं, किसी धर्म का पक्ष नहीं; (2) राज्य धार्मिक संस्थाओं द्वारा नहीं चलाया जाता; (3) राज्य का किसी धर्म से गठबंधन नहीं; (4) राज्य के लक्ष्य — शांति, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता, उत्पीड़न से मुक्ति — गैर-धार्मिक स्रोतों से तय होते हैं; (5) सभी नागरिकों को धर्म के भेदभाव बिना समान अधिकार।

उत्तर: राज्य धर्म का अभाव, धर्मतंत्र नहीं, गैर-धार्मिक लक्ष्य, समान अधिकार

प्र5मध्यम

भारतीय धर्मनिरपेक्षता पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता से कैसे भिन्न है? तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर देखें

(1) पश्चिमी मॉडल में धर्म और राज्य का परस्पर अलगाव है; भारत में "सैद्धांतिक दूरी" — राज्य सुधार के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। (2) पश्चिमी मॉडल व्यक्ति की स्वतंत्रता पर केंद्रित है; भारतीय मॉडल व्यक्ति के साथ समुदायों के अधिकार भी मानता है (अनु. 29-30)। (3) पश्चिमी राज्य धार्मिक संस्थाओं को अनुदान नहीं देता; भारत में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को सहायता मिल सकती है। साथ ही भारतीय मॉडल अंतः-धार्मिक वर्चस्व (छुआछूत) से भी लड़ता है।

उत्तर: सैद्धांतिक दूरी, सामुदायिक अधिकार, राज्य सहायता

प्र6मध्यम

"धर्मनिरपेक्षता धर्म-विरोधी है" — इस आलोचना का उत्तर दीजिए।

उत्तर देखें

भारतीय धर्मनिरपेक्षता धर्म-विरोधी नहीं है। संविधान का अनु. 25 हर व्यक्ति को धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है; अनु. 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है। धर्मनिरपेक्षता केवल धार्मिक वर्चस्व, कट्टरता और धर्म के नाम पर भेदभाव का विरोध करती है। वास्तव में यह सभी धर्मों को स्वतंत्र और सुरक्षित वातावरण देती है।

उत्तर: यह धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षक है, केवल वर्चस्व की विरोधी

प्र7मध्यम

अल्पसंख्यक अधिकारों को "विशेषाधिकार" क्यों नहीं माना जाना चाहिए?

उत्तर देखें

लोकतंत्र में बहुसंख्यक समुदाय की भाषा, संस्कृति और परंपराएँ स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक जीवन पर हावी रहती हैं। ऐसे में अल्पसंख्यकों की संस्कृति के लुप्त होने का ख़तरा रहता है। अनु. 29-30 के अधिकार उन्हें अपनी पहचान बनाए रखने का समान अवसर देते हैं — यह समानता का साधन है, विशेषाधिकार नहीं। साथ ही ये अधिकार भाषाई अल्पसंख्यकों पर भी लागू होते हैं, जैसे किसी राज्य में दूसरी भाषा बोलने वाले लोग।

उत्तर: ये सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा व समान अवसर का साधन हैं

प्र8कठिन

"सैद्धांतिक दूरी" की अवधारणा को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर देखें

राजीव भार्गव के अनुसार भारतीय राज्य धर्मों से पूरी तरह अलग नहीं रहता, बल्कि स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के सिद्धांतों के आधार पर तय करता है कि कब दूरी रखे और कब हस्तक्षेप करे। हस्तक्षेप के उदाहरण: अनु. 17 द्वारा छुआछूत का अंत, दलितों के मंदिर-प्रवेश कानून, बाल विवाह और सती पर रोक, तीन तलाक़ को अवैध घोषित करना। सहायता के उदाहरण: अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को अनुदान। दूरी के उदाहरण: राज्य का कोई धर्म न होना, सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा न होना (अनु. 28)। इस प्रकार दूरी और हस्तक्षेप दोनों का उद्देश्य एक ही है — सबके लिए स्वतंत्रता और समानता।

उत्तर: सिद्धांत-आधारित दूरी / हस्तक्षेप; छुआछूत अंत, अल्पसंख्यक अनुदान, अनु. 28

प्र9कठिन

भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर देखें

(1) धर्म-विरोधी: गलत — यह धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है। (2) पश्चिम से आयातित: भारतीय मॉडल अपनी परिस्थितियों से विकसित हुआ — इसमें सामुदायिक अधिकार और अंतः-धार्मिक सुधार जैसे विशिष्ट तत्त्व हैं। (3) अल्पसंख्यकवाद: अल्पसंख्यक अधिकार सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए हैं, पक्षपात नहीं। (4) अति-हस्तक्षेप: हस्तक्षेप समानता और गरिमा के लिए है, और प्रायः समुदायों के भीतर से उठी सुधार की माँगों के अनुरूप। (5) वोट बैंक: यह राजनीतिक दलों की कमी है, सिद्धांत की नहीं। (6) असंभव परियोजना: भारत का सदियों का सह-अस्तित्व इसे संभव सिद्ध करता है। निष्कर्ष: आलोचनाएँ व्यवहार की कमियों को उजागर करती हैं, पर सिद्धांत के रूप में भारतीय धर्मनिरपेक्षता विविध समाज के लिए सबसे उपयुक्त है।

उत्तर: आलोचनाएँ व्यवहार की कमियाँ दिखाती हैं; सिद्धांत उपयुक्त

प्र10कठिन

सांप्रदायिक हिंसा धर्मनिरपेक्षता के लिए चुनौती क्यों है? इससे निपटने के उपाय सुझाइए।

उत्तर देखें

1984 की सिख-विरोधी हिंसा, 1990 में कश्मीरी पंडितों का पलायन और 2002 की गुजरात हिंसा जैसी घटनाएँ दिखाती हैं कि जब किसी समुदाय को धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया जाता है, तो समान नागरिकता और धर्मनिरपेक्षता का वादा टूटता है; पीड़ितों में असुरक्षा और अविश्वास पैदा होता है। उपाय: (1) दोषियों को निष्पक्ष और त्वरित न्याय; (2) पुलिस और प्रशासन की निष्पक्षता; (3) शिक्षा और जागरूकता द्वारा सहिष्णुता; (4) राजनीतिक दलों द्वारा धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण से बचना; (5) पीड़ितों का पुनर्वास; (6) नागरिक समाज और मीडिया की ज़िम्मेदार भूमिका।

उत्तर: समान नागरिकता का उल्लंघन; न्याय, निष्पक्ष प्रशासन, शिक्षा व ज़िम्मेदार राजनीति

प्र11कठिन

"भारतीय धर्मनिरपेक्षता व्यक्ति और समुदाय दोनों की रक्षा करती है।" स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखें

व्यक्ति की रक्षा: अनु. 25 हर व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता देता है — वह कोई भी धर्म माने, बदले या न माने; अनु. 14-15 धर्म के आधार पर भेदभाव रोकते हैं; राज्य अंतः-धार्मिक कुरीतियों (छुआछूत, लैंगिक भेदभाव) से व्यक्ति को बचाता है। समुदाय की रक्षा: अनु. 26 धार्मिक संप्रदायों को अपने मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है; अनु. 29-30 अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति और शिक्षण संस्थाएँ बनाए रखने का अधिकार देते हैं। यह दोहरी रक्षा भारतीय मॉडल को पश्चिमी मॉडल से अलग और भारत जैसे बहु-धार्मिक समाज के अनुकूल बनाती है।

उत्तर: अनु. 25 (व्यक्ति), अनु. 26, 29-30 (समुदाय)

12. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • धर्मनिरपेक्षता = अंतर-धार्मिक और अंतः-धार्मिक वर्चस्व का विरोध; धर्म-विरोधी नहीं।
  • धर्मनिरपेक्ष राज्य: राज्य धर्म नहीं, धर्मतंत्र नहीं, गैर-धार्मिक लक्ष्य।
  • पश्चिमी: परस्पर अलगाव, व्यक्ति पर ज़ोर। भारतीय: सैद्धांतिक दूरी (भार्गव), व्यक्ति + समुदाय, सुधार हेतु हस्तक्षेप।
  • संविधान: प्रस्तावना (42वाँ), अनु. 14-17, 25-30।
  • आलोचनाएँ: धर्म-विरोधी, आयातित, अल्पसंख्यकवाद, हस्तक्षेपकारी, वोट बैंक, असंभव — सबका उत्तर संभव।