Class 11 Political Science · Chapter 7 · राजनीतिक सिद्धांत

राष्ट्रवाद

राष्ट्र और राष्ट्रवाद, साझे विश्वास, इतिहास, भू-क्षेत्र और राजनीतिक आदर्श, राष्ट्रीय आत्म-निर्णय, राष्ट्रवाद और बहुलवाद।

NCERT भारत का संविधान : सिद्धांत और व्यवहार + राजनीतिक सिद्धांतCBSE Class 11 12 min read

1. अध्याय एक नज़र में

स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराना, राष्ट्रगान गाना, अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत की जीत पर खुशी — ये सब राष्ट्रवाद (Nationalism) की भावनाएँ हैं। पिछली दो शताब्दियों में राष्ट्रवाद ने दुनिया के नक्शे को बदल दिया — साम्राज्य टूटे, नए राष्ट्र बने। पर राष्ट्रवाद ने युद्ध और संघर्ष भी पैदा किए। इस अध्याय में हम राष्ट्र और राष्ट्रवाद का अर्थ, राष्ट्र के निर्माण के आधार, राष्ट्रीय आत्म-निर्णय, राष्ट्रवाद और बहुलवाद, तथा रवींद्रनाथ टैगोर की राष्ट्रवाद की आलोचना समझेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • राष्ट्र क्या है — "कल्पित समुदाय"।
  • राष्ट्र के आधार — साझा विश्वास, इतिहास, भू-क्षेत्र, राजनीतिक आदर्श, राजनीतिक पहचान।
  • राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अधिकार और उसकी समस्याएँ।
  • राष्ट्रवाद और बहुलवाद; भारतीय दृष्टिकोण।
  • टैगोर द्वारा संकीर्ण राष्ट्रवाद की आलोचना।

2. राष्ट्रवाद — इतिहास में भूमिका

राष्ट्रवाद ने पिछली दो शताब्दियों में दुनिया पर गहरा प्रभाव डाला है:

  • एकीकरण: 19वीं शताब्दी में छोटे-छोटे राज्यों को मिलाकर जर्मनी (1871) और इटली जैसे बड़े राष्ट्र-राज्य बने।
  • विघटन: राष्ट्रवाद ने बड़े साम्राज्यों को तोड़ा — प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रो-हंगेरियन और ऑटोमन (उस्मानी) साम्राज्य टूटे।
  • उपनिवेशवाद-विरोध: एशिया और अफ़्रीका में ब्रिटिश, फ़्रांसीसी, डच, पुर्तगाली उपनिवेशों से मुक्ति के आंदोलन — भारत का स्वतंत्रता आंदोलन इसका बड़ा उदाहरण है।
  • आज भी: कई क्षेत्रों में अलग राष्ट्र की माँग वाले आंदोलन जारी हैं — जैसे स्पेन में कैटालोनिया, कनाडा में क्यूबेक।

राष्ट्रवाद ने एक ओर लोगों को एकजुट किया, स्वतंत्रता दिलाई; दूसरी ओर इसने कटु शत्रुता, युद्ध और नरसंहार भी करवाए — जैसे दोनों विश्व युद्धों में उग्र राष्ट्रवाद की भूमिका।

3. राष्ट्र क्या है?

राष्ट्र कोई परिवार या जनजाति जैसा समूह नहीं, जहाँ सब सदस्य एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हों। करोड़ों लोग जो कभी एक-दूसरे से नहीं मिले, फिर भी स्वयं को एक राष्ट्र का हिस्सा मानते हैं। इसीलिए विद्वान बेनेडिक्ट एंडरसन ने राष्ट्र को "कल्पित समुदाय" (Imagined Community) कहा — यह सदस्यों के साझा विश्वासों, आकांक्षाओं और कल्पनाओं पर टिका होता है।

राष्ट्र का आधारअर्थसावधानी
साझा विश्वासलोग मानते हैं कि वे एक राष्ट्र हैं और उनकी साझा नियति हैराष्ट्र विश्वास से बनता है, केवल भौतिक चीज़ों से नहीं
साझा इतिहाससाझा स्मृतियाँ, किंवदंतियाँ, ऐतिहासिक घटनाएँ — जैसे भारत में प्राचीन सभ्यता और स्वतंत्रता संग्रामइतिहास की व्याख्याएँ अलग-अलग हो सकती हैं
साझा भू-क्षेत्रएक भूमि जिसे लोग "मातृभूमि" या "पितृभूमि" मानते हैंएक ही भूमि पर कई समूहों का दावा संघर्ष पैदा कर सकता है
साझे राजनीतिक आदर्शलोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, उदारवाद जैसे मूल्य, जो संविधान में व्यक्त होते हैंसबसे समावेशी और मज़बूत आधार
साझी राजनीतिक पहचाननागरिकता के आधार पर पहचानभाषा, धर्म या नस्ल के आधार पर पहचान अल्पसंख्यकों को बाहर कर सकती है
धर्म या भाषा राष्ट्र का आधार क्यों नहीं?

दुनिया के अधिकांश देश बहु-धार्मिक और बहुभाषी हैं। यदि एक धर्म या एक भाषा को राष्ट्र का आधार बनाया जाए, तो अन्य समुदाय स्वयं को उपेक्षित महसूस करेंगे। इसलिए लोकतांत्रिक राष्ट्रों के लिए साझा राजनीतिक मूल्यों पर आधारित पहचान — "संवैधानिक देशभक्ति" — सबसे उपयुक्त है।

4. राष्ट्रीय आत्म-निर्णय

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय (National Self-determination) का अर्थ है — एक राष्ट्र का यह दावा कि उसे अपना शासन स्वयं चलाने और अपने भविष्य का निर्णय करने का अधिकार हो। प्रायः यह माँग एक अलग राज्य की होती है।

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय की संधि (1919) के समय "एक संस्कृति — एक राज्य" के विचार पर कई नए राज्य बनाए गए।
  • पर सीमाएँ बदलने से बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हुआ; हर नए राज्य में फिर भी अल्पसंख्यक समूह रह गए।
  • भारत का विभाजन (1947) इसका दुखद उदाहरण है — लाखों लोग मारे गए और विस्थापित हुए।
  • हर सांस्कृतिक समूह को अलग राज्य देना व्यावहारिक नहीं — इससे अंतहीन विभाजन होगा और नए अल्पसंख्यक बनेंगे।

समाधान: अलग राज्य के बजाय मौजूदा राष्ट्र-राज्य के भीतर ही विविध समुदायों को अधिक अधिकार, स्वायत्तता और सम्मान देना — जैसे भाषाई राज्य, स्वायत्त परिषदें, सांस्कृतिक अधिकार। राष्ट्र-राज्यों को अपने अल्पसंख्यकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।

5. राष्ट्रवाद और बहुलवाद

बहुलवाद (Pluralism) का अर्थ है समाज में अनेक संस्कृतियों, धर्मों, भाषाओं और पहचानों का एक साथ सम्मानपूर्वक अस्तित्व। लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद को बहुलवाद के साथ चलना चाहिए:

  • अल्पसंख्यक समुदायों को अपनी भाषा, संस्कृति और धर्म के संरक्षण के अधिकार (भारत में अनु. 29-30)।
  • विविध समूहों की समूह पहचान को मान्यता — समान राजनीतिक अधिकार के साथ-साथ।
  • भारत में भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन (1956), छठी अनुसूची, अनुच्छेद 371 — "विविधता में एकता" के उदाहरण हैं।
  • उग्र या आक्रामक राष्ट्रवाद अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णुता पैदा करता है; इससे बचना आवश्यक है।
राष्ट्र (कल्पित समुदाय) साझा विश्वास साझा इतिहास साझा भू-क्षेत्र साझे राजनीतिक आदर्श साझी राजनीतिक पहचान
राष्ट्र के पाँच आधार (विचार-चित्र)।

6. टैगोर की राष्ट्रवाद की आलोचना

रवींद्रनाथ टैगोर उपनिवेशवाद के विरोधी और भारत की स्वतंत्रता के समर्थक थे, पर वे संकीर्ण और उग्र राष्ट्रवाद के आलोचक भी थे। उन्होंने कहा कि उनका आध्यात्मिक आश्रय मानवता है और वे देशभक्ति को मानवता से ऊपर नहीं रख सकते।

  • टैगोर पश्चिमी राष्ट्रवाद की उस प्रवृत्ति के आलोचक थे जो दूसरे राष्ट्रों पर प्रभुत्व और युद्ध की ओर ले जाती है।
  • उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी उन प्रवृत्तियों की आलोचना की जो पश्चिमी संस्कृति की हर बात को अस्वीकार करती थीं।
  • उनका उपन्यास "घरे बाइरे" (घर और बाहर) स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रवाद के उग्र रूप की समस्याओं को दिखाता है।
  • टैगोर का संदेश: राष्ट्र-प्रेम मानवता-प्रेम के विरुद्ध नहीं होना चाहिए; सच्चा राष्ट्रवाद सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों से जुड़ा होता है।

7. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
राष्ट्रसाझा विश्वास, इतिहास, आकांक्षाओं से जुड़ा जनसमूह
राष्ट्रवादअपने राष्ट्र के प्रति निष्ठा और उसकी स्वतंत्रता-प्रगति की भावना
कल्पित समुदायबेनेडिक्ट एंडरसन की राष्ट्र की परिभाषा
राष्ट्र-राज्यऐसा राज्य जिसकी सीमाएँ एक राष्ट्र से मेल खाती मानी जाती हैं
राष्ट्रीय आत्म-निर्णयराष्ट्र का अपना शासन स्वयं चलाने का दावा
बहुलवादअनेक संस्कृतियों और पहचानों का सम्मानपूर्ण सह-अस्तित्व
संवैधानिक देशभक्तिसाझा संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा
उग्र राष्ट्रवाददूसरों के प्रति शत्रुता और प्रभुत्व वाला राष्ट्रवाद

8. मास्टर सारांश तालिका

विषयमुख्य बिंदु
ऐतिहासिक भूमिकाएकीकरण (जर्मनी, इटली), विघटन (ऑटोमन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन), उपनिवेशवाद-विरोध
राष्ट्रकल्पित समुदाय; 5 आधार — विश्वास, इतिहास, भू-क्षेत्र, आदर्श, पहचान
आत्म-निर्णयअलग राज्य की माँग; विस्थापन व नए अल्पसंख्यकों की समस्या; विभाजन 1947
बहुलवादअल्पसंख्यक अधिकार, स्वायत्तता, विविधता में एकता
टैगोरमानवता देशभक्ति से ऊपर; "घरे बाइरे"

चार्ट — संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता में वृद्धि (उपनिवेशवाद-विरोधी राष्ट्रवाद का प्रभाव):

1945 — संस्थापक सदस्य51
वर्तमान सदस्य देश193

9. माइंड मैप

राष्ट्रवाद
इतिहास
  • एकीकरण
  • विघटन, उपनिवेश-विरोध
राष्ट्र
  • कल्पित समुदाय
  • 5 आधार
आत्म-निर्णय
  • अलग राज्य
  • विस्थापन
बहुलवाद
  • अल्पसंख्यक अधिकार
  • स्वायत्तता
टैगोर
  • मानवता ऊपर
  • घरे बाइरे

10. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • राष्ट्र के 5 आधार "वि-इ-भू-आ-प": विश्वास, इतिहास, भू-क्षेत्र, आदर्श, पहचान।
  • एंडरसन = कल्पित समुदाय; टैगोर = मानवता।
  • उत्तर में भारत का उदाहरण: भाषाई राज्य, अनु. 29-30, विभाजन 1947।
आम गलतियाँ
  • टैगोर राष्ट्रवाद-विरोधी या स्वतंत्रता-विरोधी नहीं थे; वे संकीर्ण राष्ट्रवाद के आलोचक थे।
  • राष्ट्र और राज्य एक नहीं — राष्ट्र भावनात्मक समुदाय है, राज्य राजनीतिक संस्था।
  • हर सांस्कृतिक समूह को अलग राज्य देना समाधान नहीं माना गया है।

11. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • बेनेडिक्ट एंडरसन ने राष्ट्र को कल्पित समुदाय कहा।
  • जर्मनी का एकीकरण 1871 में हुआ।
  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑटोमन साम्राज्य का विघटन हुआ।
  • वर्साय की संधि 1919 में हुई।
  • भारत का विभाजन 1947 में हुआ।
  • भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन 1956 में हुआ।
  • टैगोर ने मानवता को देशभक्ति से ऊपर माना।
  • "घरे बाइरे" टैगोर का उपन्यास है।
  • बहुलवाद विविध पहचानों का सम्मान है।
  • संयुक्त राष्ट्र में आज 193 सदस्य देश हैं।

12. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

राष्ट्र को "कल्पित समुदाय" किसने कहा?

  1. टैगोर
  2. बेनेडिक्ट एंडरसन
  3. जे. एस. मिल
  4. रूसो
उत्तर देखें

बेनेडिक्ट एंडरसन ने कहा कि राष्ट्र के सदस्य एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी साझा कल्पना से जुड़े होते हैं।

उत्तर: (ख) बेनेडिक्ट एंडरसन

प्र2आसान

"घरे बाइरे" उपन्यास के लेखक कौन हैं?

  1. बंकिमचंद्र चटर्जी
  2. रवींद्रनाथ टैगोर
  3. प्रेमचंद
  4. शरतचंद्र
उत्तर देखें

टैगोर के इस उपन्यास में स्वदेशी आंदोलन के दौरान उग्र राष्ट्रवाद की समस्याएँ दिखाई गई हैं।

उत्तर: (ख) रवींद्रनाथ टैगोर

प्र3आसान

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अर्थ बताइए।

उत्तर देखें

राष्ट्रीय आत्म-निर्णय वह दावा है जिसमें कोई राष्ट्र या समुदाय अपना शासन स्वयं चलाने और अपने भविष्य का निर्णय करने का अधिकार माँगता है; प्रायः यह अलग राज्य की माँग के रूप में होता है।

उत्तर: अपना शासन स्वयं चलाने का दावा

प्र4मध्यम

राष्ट्रवाद ने इतिहास में एकीकरण और विघटन दोनों कैसे किए?

उत्तर देखें

एकीकरण: 19वीं शताब्दी में छोटे-छोटे राज्यों और रियासतों को मिलाकर जर्मनी (1871) और इटली जैसे राष्ट्र-राज्य बने। विघटन: प्रथम विश्व युद्ध के बाद राष्ट्रवादी आंदोलनों से ऑस्ट्रो-हंगेरियन और ऑटोमन साम्राज्य टूटे; 20वीं शताब्दी में उपनिवेशवाद-विरोधी राष्ट्रवाद से ब्रिटिश, फ़्रांसीसी साम्राज्य बिखरे और भारत सहित अनेक नए राष्ट्र बने।

उत्तर: जर्मनी-इटली का एकीकरण; साम्राज्यों का विघटन

प्र5मध्यम

साझे राजनीतिक आदर्श राष्ट्र का सबसे उपयुक्त आधार क्यों हैं?

उत्तर देखें

धर्म, भाषा या नस्ल के आधार पर बना राष्ट्र उन समूहों को बाहर कर देता है जो उस पहचान के नहीं हैं, क्योंकि अधिकांश देश विविध हैं। लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समानता और स्वतंत्रता जैसे साझा राजनीतिक मूल्य सभी नागरिकों को — चाहे उनका धर्म या भाषा कुछ भी हो — समान रूप से जोड़ते हैं। भारत का संविधान इसी "संवैधानिक देशभक्ति" का उदाहरण है।

उत्तर: ये सभी को समान रूप से शामिल करते हैं

प्र6मध्यम

टैगोर ने राष्ट्रवाद की आलोचना क्यों की?

उत्तर देखें

टैगोर उपनिवेशवाद के विरोधी थे, पर वे मानते थे कि संकीर्ण राष्ट्रवाद दूसरे राष्ट्रों से घृणा, प्रभुत्व की इच्छा और युद्ध की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि उनका आध्यात्मिक आश्रय मानवता है और वे देशभक्ति को मानवता से ऊपर नहीं रखेंगे। वे स्वतंत्रता आंदोलन में पश्चिम की हर चीज़ के अंधे विरोध के भी आलोचक थे; उनका मानना था कि भारत को दुनिया की अच्छी बातों से सीखना चाहिए।

उत्तर: संकीर्ण राष्ट्रवाद मानवता-विरोधी; मानवता सर्वोच्च

प्र7मध्यम

भारत ने राष्ट्रीय एकता और विविधता में संतुलन कैसे बनाया?

उत्तर देखें

(1) धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक संविधान जो सबको समान नागरिकता देता है; (2) अल्पसंख्यकों को सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार (अनु. 29-30); (3) भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन (1956); (4) पूर्वोत्तर के लिए छठी अनुसूची और अनु. 371 के विशेष प्रावधान; (5) संघीय ढाँचा। इस प्रकार भारत ने अलगाव के बजाय समायोजन से "विविधता में एकता" को साकार किया।

उत्तर: समान नागरिकता, अल्पसंख्यक अधिकार, भाषाई राज्य, विशेष प्रावधान

प्र8कठिन

"हर राष्ट्र के लिए अलग राज्य" का सिद्धांत व्यावहारिक क्यों नहीं है? विवेचना कीजिए।

उत्तर देखें

(1) दुनिया में हज़ारों सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक समूह हैं; सबको अलग राज्य देना असंभव है और इससे अंतहीन विभाजन होगा। (2) सीमाएँ बदलने पर बड़े पैमाने पर विस्थापन और हिंसा होती है — जैसे 1947 का भारत विभाजन। (3) हर नए राज्य में फिर भी कुछ अल्पसंख्यक रह जाते हैं, जो नई माँगें उठाते हैं। (4) वर्साय संधि (1919) के बाद "एक संस्कृति — एक राज्य" का प्रयोग भी समस्याओं को हल नहीं कर सका। इसलिए बेहतर विकल्प है मौजूदा राज्यों के भीतर विविध समुदायों को स्वायत्तता, समान अधिकार और सांस्कृतिक सम्मान देना।

उत्तर: अंतहीन विभाजन, विस्थापन, नए अल्पसंख्यक; विकल्प — भीतर ही स्वायत्तता व अधिकार

प्र9कठिन

लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद और उग्र राष्ट्रवाद में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखें

लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद: साझा संवैधानिक मूल्यों पर आधारित; सभी नागरिकों — अल्पसंख्यकों सहित — को समान अधिकार; विविधता और असहमति का सम्मान; दूसरे राष्ट्रों के साथ शांतिपूर्ण सहयोग। उग्र राष्ट्रवाद: किसी एक धर्म, भाषा या नस्ल को श्रेष्ठ मानता है; अल्पसंख्यकों और असहमति रखने वालों को "बाहरी" या "देशद्रोही" मानता है; दूसरे राष्ट्रों के प्रति शत्रुता और विस्तारवाद। इतिहास में उग्र राष्ट्रवाद ने युद्ध और नरसंहार करवाए, जबकि लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद ने स्वतंत्रता और एकता दी।

उत्तर: समावेशी, संवैधानिक बनाम बहिष्कारी, आक्रामक

प्र10कठिन

"राष्ट्र एक कल्पित समुदाय है।" इस कथन का क्या अर्थ है? क्या इसका अर्थ है कि राष्ट्र वास्तविक नहीं है?

उत्तर देखें

एंडरसन का अर्थ है कि राष्ट्र के करोड़ों सदस्य कभी एक-दूसरे से नहीं मिलते, फिर भी अपने मन में एक साझा समुदाय की छवि रखते हैं — साझा इतिहास, भाषा-संस्कृति, प्रतीक (झंडा, राष्ट्रगान) और भविष्य की आकांक्षाओं के आधार पर। "कल्पित" का अर्थ "झूठा" या "अवास्तविक" नहीं है; यह कल्पना इतनी शक्तिशाली होती है कि लोग इसके लिए त्याग करते हैं, आंदोलन चलाते हैं और राज्य बनाते हैं। इसका अर्थ यह है कि राष्ट्र स्थायी या प्राकृतिक नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और सामूहिक प्रयास से बनता और बदलता है।

उत्तर: साझी कल्पना से बना, पर वास्तविक और शक्तिशाली समुदाय

प्र11कठिन

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का राष्ट्रवाद किस प्रकार समावेशी था?

उत्तर देखें

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ने विभिन्न धर्मों, भाषाओं, जातियों और क्षेत्रों के लोगों को उपनिवेशवाद के विरुद्ध एकजुट किया। इसका आधार किसी एक धर्म या भाषा के बजाय स्वतंत्रता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और आर्थिक आत्मनिर्भरता के साझा आदर्श थे। गांधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता, छुआछूत-विरोध और महिलाओं की भागीदारी को आंदोलन से जोड़ा। कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) के मौलिक अधिकार प्रस्ताव में भी सबके लिए समान अधिकारों का वादा था। हालाँकि विभाजन ने दिखाया कि सभी को साथ रखना कठिन था, फिर भी स्वतंत्र भारत ने धर्मनिरपेक्ष संविधान अपनाकर इसी समावेशी राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाया।

उत्तर: साझे राजनीतिक आदर्शों पर आधारित, सभी समुदायों की भागीदारी

13. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • राष्ट्रवाद ने एकीकरण (जर्मनी 1871, इटली), विघटन (ऑटोमन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन) और उपनिवेशवाद-विरोध किया; युद्ध भी करवाए।
  • राष्ट्र = कल्पित समुदाय (एंडरसन); 5 आधार — विश्वास, इतिहास, भू-क्षेत्र, राजनीतिक आदर्श, राजनीतिक पहचान।
  • आत्म-निर्णय: अलग राज्य की माँग; विस्थापन, नए अल्पसंख्यक; विभाजन 1947।
  • बहुलवाद: अल्पसंख्यक अधिकार, स्वायत्तता — भारत में भाषाई राज्य, अनु. 29-30, छठी अनुसूची।
  • टैगोर: मानवता देशभक्ति से ऊपर; संकीर्ण राष्ट्रवाद की आलोचना; "घरे बाइरे"।