Class 12 Economics · Chapter 2 · समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय

राष्ट्रीय आय का लेखांकन

आय का चक्रीय प्रवाह, उत्पाद, व्यय और आय विधि, GDP, GNP, NNP, राष्ट्रीय आय, वास्तविक और मौद्रिक GDP।

NCERT व्यष्टि अर्थशास्त्र + समष्टि अर्थशास्त्रCBSE Class 12 17 min read

1. अध्याय एक नज़र में

किसी देश की आर्थिक स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है — एक वर्ष में उसने कितना उत्पादन किया। समाचारों में आप सुनते हैं "इस वर्ष GDP संवृद्धि दर इतने प्रतिशत रही"। पर GDP क्या है, और करोड़ों उत्पादकों द्वारा बनाई गई लाखों प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य कैसे मापा जाता है? इस अध्याय में हम इन्हीं प्रश्नों का उत्तर राष्ट्रीय आय के लेखांकन (National Income Accounting) के माध्यम से खोजेंगे।

हम कुछ मूल अवधारणाओं — अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुएँ, स्टॉक और प्रवाह, निवेश और मूल्यह्रास — से शुरू करके, राष्ट्रीय आय मापने की तीन विधियाँ, विभिन्न समग्र (GDP, GNP, NDP, NNP), बाज़ार कीमत और साधन लागत का अंतर, वास्तविक और मौद्रिक GDP, और अंत में GDP तथा कल्याण के संबंध का अध्ययन करेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुएँ; उपभोग और पूँजीगत वस्तुएँ।
  • स्टॉक और प्रवाह; सकल और निवल निवेश; मूल्यह्रास।
  • राष्ट्रीय आय मापने की तीन विधियाँ: उत्पाद (मूल्य वर्धित), व्यय, आय।
  • GDP, GNP, NDP, NNP; बाज़ार कीमत और साधन लागत; विदेश से निवल साधन आय।
  • मौद्रिक और वास्तविक GDP; GDP अपस्फीतिकारक।
  • GDP और कल्याण — सीमाएँ।

2. मूल अवधारणाएँ

अंतिम और मध्यवर्ती वस्तुएँ

अंतिम वस्तुएँ (Final Goods)मध्यवर्ती वस्तुएँ (Intermediate Goods)
वे वस्तुएँ जो आगे किसी उत्पादन प्रक्रिया में रूपांतरित नहीं होतीं — अंतिम उपयोगकर्ता द्वारा उपभोग या निवेश के लिए खरीदी जाती हैंवे वस्तुएँ जो एक उत्पादक द्वारा दूसरे उत्पादक को आगे के उत्पादन या पुनर्विक्रय के लिए बेची जाती हैं, और उसी लेखा वर्ष में उपयोग हो जाती हैं
राष्ट्रीय आय में शामिलअलग से शामिल नहीं — इनका मूल्य अंतिम वस्तु के मूल्य में पहले से शामिल है
उदाहरण: परिवार द्वारा खरीदी गई डबलरोटीउदाहरण: बेकरी द्वारा खरीदा गया आटा
याद रखें

कोई वस्तु अंतिम है या मध्यवर्ती — यह वस्तु की प्रकृति से नहीं, बल्कि उसके उपयोग से तय होता है। घर में चाय बनाने के लिए खरीदा गया दूध अंतिम वस्तु है; चाय की दुकान द्वारा खरीदा गया वही दूध मध्यवर्ती वस्तु है।

उपभोग वस्तुएँ और पूँजीगत वस्तुएँ

  • उपभोग वस्तुएँ (Consumption Goods): जो उपभोक्ताओं की आवश्यकताएँ सीधे पूरी करती हैं — भोजन, कपड़े (गैर-टिकाऊ), टीवी, फ़्रिज (टिकाऊ उपभोग वस्तुएँ), और सेवाएँ।
  • पूँजीगत वस्तुएँ (Capital Goods): जो उत्पादन में कई वर्षों तक उपयोग होती हैं, पर उत्पादन में रूपांतरित नहीं होतीं — मशीनें, भवन, औज़ार, ट्रैक्टर। ये अंतिम वस्तुएँ हैं। समय के साथ इनमें घिसावट होती है।

स्टॉक और प्रवाह (Stock and Flow)

स्टॉक (Stock)प्रवाह (Flow)
किसी समय-बिंदु पर मापी गई मात्राकिसी समय-अवधि में मापी गई मात्रा
उदाहरण: 31 मार्च को पूँजी का भंडार, बैंक में जमा राशि, जनसंख्या, संपत्तिउदाहरण: एक वर्ष की राष्ट्रीय आय, निवेश, उपभोग, मूल्यह्रास, आय
जलाशय में पानी की मात्रानदी में प्रति घंटे बहने वाला पानी

निवेश और मूल्यह्रास

  • सकल निवेश (Gross Investment): किसी वर्ष में पूँजी के भंडार में किया गया कुल जोड़ — नई मशीनें, भवन, और माल-सूची (Inventory) में परिवर्तन।
  • मूल्यह्रास (Depreciation) / स्थिर पूँजी का उपभोग: सामान्य टूट-फूट और अप्रचलन के कारण पूँजी के मूल्य में होने वाली कमी।
  • निवल निवेश (Net Investment) = सकल निवेश − मूल्यह्रास। यही पूँजी भंडार में वास्तविक वृद्धि है।
उदाहरण (अभ्यास हेतु काल्पनिक आँकड़े)

एक कारखाने ने वर्ष के प्रारंभ में ₹10 लाख की मशीन खरीदी, जिसकी आयु 10 वर्ष है और 10 वर्ष बाद उसका कोई मूल्य नहीं बचेगा। वार्षिक मूल्यह्रास = 10 लाख ÷ 10 = ₹1 लाख। यदि उस वर्ष कुल सकल निवेश ₹15 लाख था, तो निवल निवेश = 15 − 1 = ₹14 लाख।

3. राष्ट्रीय आय मापने की तीन विधियाँ

पिछले अध्याय में हमने देखा कि आय के चक्रीय प्रवाह में उत्पादन का मूल्य = कुल आय = कुल व्यय। इसलिए राष्ट्रीय आय को तीन विधियों से मापा जा सकता है, और सिद्धांततः तीनों का उत्तर समान होगा।

(क) उत्पाद विधि या मूल्य वर्धित विधि (Product / Value Added Method)

यदि हम सभी उत्पादकों के कुल उत्पादन का मूल्य सीधे जोड़ दें, तो मध्यवर्ती वस्तुओं की गिनती एक से अधिक बार हो जाएगी — इसे दोहरी गणना (Double Counting) की समस्या कहते हैं। इससे बचने के लिए प्रत्येक उत्पादक के मूल्य वर्धित (Value Added) को जोड़ा जाता है:

मूल्य वर्धित = उत्पादन का मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग
उत्पादकउत्पादन का मूल्य (₹)मध्यवर्ती उपभोग (₹)मूल्य वर्धित (₹)
किसान (गेहूँ)1000100
चक्की वाला (आटा)15010050
बेकरी (डबलरोटी — अंतिम वस्तु)22015070
योग470250220

(काल्पनिक आँकड़े; सरलता के लिए किसान का मध्यवर्ती उपभोग शून्य माना गया है।) कुल उत्पादन का मूल्य जोड़ने पर ₹470 आता है, जो गलत है — इसमें गेहूँ और आटे की गिनती दो-दो बार हुई है। मूल्य वर्धित का योग ₹220 है, जो अंतिम वस्तु (डबलरोटी) के मूल्य के बराबर है — यही सही योगदान है।

माल-सूची में परिवर्तन: यदि किसी फर्म ने वर्ष में जितना उत्पादन किया उससे कम बेचा, तो बिना बिका माल उसकी माल-सूची (Inventory) में जुड़ जाता है। इसे फर्म द्वारा स्वयं का निवेश माना जाता है। अतः उत्पादन का मूल्य = बिक्री + माल-सूची में परिवर्तन।

GDP (उत्पाद विधि) = सभी उत्पादकों के सकल मूल्य वर्धित का योग

(ख) व्यय विधि (Expenditure Method)

अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल व्यय को जोड़ा जाता है:

GDP = C + I + G + (X − M)
  • C — निजी अंतिम उपभोग व्यय (परिवारों द्वारा)
  • I — सकल निवेश / सकल पूँजी निर्माण (फर्मों द्वारा मशीन, भवन, माल-सूची में परिवर्तन)
  • G — सरकारी अंतिम उपभोग व्यय
  • X − M — निवल निर्यात (निर्यात − आयात)। आयात घटाया जाता है क्योंकि वह विदेश में उत्पादित है; निर्यात जोड़ा जाता है क्योंकि वह देश में उत्पादित है पर विदेशियों द्वारा खरीदा गया।

(ग) आय विधि (Income Method)

उत्पादन के साधनों को प्राप्त सभी आयों को जोड़ा जाता है:

घरेलू आय (NDP साधन लागत पर) = कर्मचारियों का पारिश्रमिक + प्रचालन अधिशेष + मिश्रित आय
  • कर्मचारियों का पारिश्रमिक (Compensation of Employees): मज़दूरी, वेतन, और नियोक्ता द्वारा सामाजिक सुरक्षा अंशदान।
  • प्रचालन अधिशेष (Operating Surplus): लगान (Rent) + ब्याज (Interest) + लाभ (Profit)।
  • मिश्रित आय (Mixed Income): स्वनियोजित लोगों (जैसे छोटा दुकानदार, किसान) की आय, जिसमें उनके श्रम और पूँजी की आय को अलग करना कठिन है।
क्या शामिल नहीं होता?
  • हस्तांतरण भुगतान (Transfer Payments): वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति, बेरोज़गारी भत्ता — इनके बदले कोई उत्पादन नहीं होता।
  • पुरानी वस्तुओं की बिक्री: इनका मूल्य उनके उत्पादन वर्ष में गिना जा चुका है (पर दलाल का कमीशन शामिल होता है, क्योंकि वह इस वर्ष की सेवा है)।
  • शेयर-बॉन्ड की खरीद-बिक्री: ये केवल स्वामित्व का हस्तांतरण हैं, उत्पादन नहीं।
  • मध्यवर्ती वस्तुएँ (अलग से)।

4. राष्ट्रीय आय के विभिन्न समग्र

घरेलू बनाम राष्ट्रीय

घरेलू (Domestic) का अर्थ है देश की भौगोलिक सीमा (घरेलू क्षेत्र) के भीतर उत्पादन — चाहे उत्पादक देशवासी हो या विदेशी। राष्ट्रीय (National) का अर्थ है देश के सामान्य निवासियों (Normal Residents) द्वारा अर्जित आय — चाहे वे देश में काम करें या विदेश में।

विदेश से निवल साधन आय (NFIA) = विदेश से प्राप्त साधन आय − विदेशियों को दी गई साधन आय
राष्ट्रीय = घरेलू + NFIA   (GNP = GDP + NFIA)
सामान्य निवासी और घरेलू क्षेत्र

सामान्य निवासी (Normal Resident) वह व्यक्ति या संस्था है जिसके आर्थिक हितों का केंद्र उसी देश में है — जो सामान्यतः एक वर्ष या अधिक समय से वहाँ रह रहा हो। विदेश में कुछ महीनों के लिए काम करने गया भारतीय भारत का सामान्य निवासी बना रहता है, जबकि विदेशी दूतावास के कर्मचारी भारत के सामान्य निवासी नहीं माने जाते। घरेलू क्षेत्र (Domestic Territory) में देश की राजनीतिक सीमा के साथ-साथ देश के जहाज़ और विमान (जो देश के निवासियों द्वारा चलाए जाते हैं), विदेशों में स्थित देश के दूतावास और सैन्य प्रतिष्ठान, तथा समुद्र में देश के मछली पकड़ने वाले जहाज़ और तेल-कुएँ भी शामिल होते हैं। इसके विपरीत, देश में स्थित विदेशी दूतावास और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालय (जैसे संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय) घरेलू क्षेत्र में शामिल नहीं होते।

सकल बनाम निवल

सकल (Gross) में मूल्यह्रास शामिल है; निवल (Net) = सकल − मूल्यह्रास।

बाज़ार कीमत बनाम साधन लागत

बाज़ार कीमत (Market Price — mp) पर मूल्य में अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं और उत्पादन सहायिकी (Subsidy) घटी होती है। साधन लागत (Factor Cost — fc) वह है जो वास्तव में उत्पादन के साधनों को मिलता है।

साधन लागत = बाज़ार कीमत − (अप्रत्यक्ष कर − सहायिकी) = बाज़ार कीमत − निवल अप्रत्यक्ष कर (NIT)
GDP (mp) − मूल्यह्रास NDP (mp) − निवल अप्रत्यक्ष कर NDP (fc) = घरेलू आय + NFIA NNP (fc) = राष्ट्रीय आय
GDPmp से राष्ट्रीय आय (NNPfc) तक का क्रम। किसी भी समग्र से दूसरा समग्र इन्हीं तीन समायोजनों — मूल्यह्रास, निवल अप्रत्यक्ष कर, NFIA — से प्राप्त होता है।
समग्रसंबंध
GDPmp (सकल घरेलू उत्पाद, बाज़ार कीमत)C + I + G + (X − M)
NDPmpGDPmp − मूल्यह्रास
GNPmpGDPmp + NFIA
NNPmpGNPmp − मूल्यह्रास
NDPfc (घरेलू आय)NDPmp − NIT
NNPfc (राष्ट्रीय आय)NDPfc + NFIA = NNPmp − NIT
हल किया गया संख्यात्मक प्रश्न (₹ करोड़; काल्पनिक आँकड़े)

निजी अंतिम उपभोग व्यय = 800; सरकारी अंतिम उपभोग व्यय = 200; सकल घरेलू पूँजी निर्माण = 300; निवल निर्यात = −20; मूल्यह्रास = 50; निवल अप्रत्यक्ष कर = 70; NFIA = −10।

GDPmp = 800 + 200 + 300 + (−20) = 1,280
NDPmp = 1,280 − 50 = 1,230
NDPfc = 1,230 − 70 = 1,160
राष्ट्रीय आय (NNPfc) = 1,160 + (−10) = 1,150
GNPmp = 1,280 + (−10) = 1,270

निजी आय और व्यक्तिगत आय (परिचय)

राष्ट्रीय आय से आगे कुछ और समग्र भी परिभाषित किए जाते हैं — जैसे व्यक्तिगत आय (Personal Income), जो परिवारों को वास्तव में प्राप्त आय है (राष्ट्रीय आय में से अवितरित लाभ और निगम कर घटाकर तथा हस्तांतरण भुगतान जोड़कर), और व्यक्तिगत प्रयोज्य आय (Personal Disposable Income) = व्यक्तिगत आय − व्यक्तिगत प्रत्यक्ष कर एवं अन्य अनिवार्य भुगतान। यही वह आय है जिसे परिवार उपभोग या बचत पर खर्च कर सकते हैं।

5. मौद्रिक GDP और वास्तविक GDP

यदि किसी वर्ष GDP 10% बढ़ा, तो यह वृद्धि दो कारणों से हो सकती है — अधिक उत्पादन, या ऊँची कीमतें। वास्तविक उत्पादन में वृद्धि जानने के लिए दोनों को अलग करना आवश्यक है।

  • मौद्रिक / नाममात्र GDP (Nominal GDP): चालू वर्ष की कीमतों पर मापा गया GDP।
  • वास्तविक GDP (Real GDP): किसी आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर मापा गया GDP — यह केवल उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन दिखाता है।
GDP अपस्फीतिकारक (GDP Deflator) = (मौद्रिक GDP ÷ वास्तविक GDP) × 100
उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े; दो वस्तुओं की अर्थव्यवस्था)

आधार वर्ष: सेब 10 इकाई @ ₹5, संतरे 20 इकाई @ ₹4 → GDP = 50 + 80 = ₹130।
चालू वर्ष: सेब 12 इकाई @ ₹6, संतरे 22 इकाई @ ₹5 → मौद्रिक GDP = 72 + 110 = ₹182।
वास्तविक GDP (आधार वर्ष की कीमतों पर) = 12 × 5 + 22 × 4 = 60 + 88 = ₹148।
GDP अपस्फीतिकारक = 182/148 × 100 ≈ 122.97 — कीमतें लगभग 23% बढ़ीं।
मौद्रिक GDP में वृद्धि = (182 − 130)/130 × 100 = 40%; वास्तविक GDP में वृद्धि = (148 − 130)/130 × 100 ≈ 13.8%।

GDP अपस्फीतिकारकउपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI)
देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं-सेवाओं को शामिल करता हैउपभोक्ताओं द्वारा खरीदी गई वस्तुओं की एक टोकरी पर आधारित
आयातित वस्तुएँ शामिल नहींउपभोग की गई आयातित वस्तुएँ भी शामिल
भार चालू वर्ष के उत्पादन के अनुसार बदलते हैंभार प्रायः स्थिर टोकरी (आधार वर्ष) पर

6. GDP और कल्याण

सामान्यतः माना जाता है कि GDP (विशेषकर प्रति व्यक्ति वास्तविक GDP) अधिक होने पर लोगों का कल्याण (Welfare) भी अधिक होगा। पर GDP कल्याण का पूर्ण माप नहीं है। इसकी तीन प्रमुख सीमाएँ:

  1. GDP का वितरण: यदि GDP बढ़े पर उसका लाभ कुछ ही लोगों को मिले और अधिकांश लोगों की आय घटे, तो समाज का समग्र कल्याण नहीं बढ़ता। GDP वितरण की असमानता नहीं दिखाता।
  2. गैर-मौद्रिक विनिमय: अनेक गतिविधियाँ बाज़ार से बाहर होती हैं और मुद्रा में नहीं आँकी जातीं — जैसे गृहिणियों द्वारा घर का काम, ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तु-विनिमय, परिवार के सदस्यों द्वारा बच्चों और बुज़ुर्गों की देखभाल। ये कल्याण बढ़ाती हैं, पर GDP में शामिल नहीं होतीं — इसलिए GDP कल्याण को कम आँकता है।
  3. बाह्य प्रभाव (Externalities): किसी गतिविधि के ऐसे लाभ या हानियाँ जिनका भुगतान नहीं होता। उदाहरण — एक कारखाना उत्पादन करता है (GDP बढ़ता है), पर पास की नदी प्रदूषित करता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और मछुआरों की आजीविका को हानि होती है। यह हानि GDP से घटाई नहीं जाती — इसलिए GDP कल्याण को अधिक आँकता है। (धनात्मक बाह्य प्रभाव भी होते हैं — जैसे किसी के बगीचे से पड़ोसियों को मिलने वाली सुंदरता और स्वच्छ हवा।)

इसके अतिरिक्त, GDP अवकाश (Leisure), पर्यावरण की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर को सीधे नहीं मापता। इसीलिए मानव विकास सूचकांक जैसे व्यापक मापों का भी उपयोग किया जाता है।

7. मास्टर तालिका : सभी सूत्र

अवधारणासूत्र
निवल निवेशसकल निवेश − मूल्यह्रास
मूल्य वर्धितउत्पादन का मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग
उत्पादन का मूल्यबिक्री + माल-सूची में परिवर्तन
व्यय विधिGDPmp = C + I + G + (X − M)
आय विधिNDPfc = पारिश्रमिक + प्रचालन अधिशेष + मिश्रित आय
सकल → निवल− मूल्यह्रास
घरेलू → राष्ट्रीय+ NFIA
mp → fc− (अप्रत्यक्ष कर − सहायिकी)
राष्ट्रीय आयNNPfc = NDPfc + NFIA
GDP अपस्फीतिकारक(मौद्रिक GDP / वास्तविक GDP) × 100

8. मास्टर सारांश तालिका

विषयमुख्य बिंदु
मूल अवधारणाएँअंतिम बनाम मध्यवर्ती; स्टॉक बनाम प्रवाह; सकल बनाम निवल निवेश
तीन विधियाँमूल्य वर्धित (दोहरी गणना से बचाव), व्यय (C + I + G + X − M), आय (पारिश्रमिक + अधिशेष + मिश्रित)
समग्रGDP, NDP, GNP, NNP — mp और fc पर
वास्तविक GDPस्थिर कीमतों पर; अपस्फीतिकारक
कल्याणवितरण, गैर-मौद्रिक विनिमय, बाह्य प्रभाव — GDP की सीमाएँ

9. माइंड मैप

राष्ट्रीय आय का लेखांकन
अवधारणाएँ
  • अंतिम, मध्यवर्ती
  • स्टॉक, प्रवाह, मूल्यह्रास
तीन विधियाँ
  • मूल्य वर्धित
  • व्यय, आय
समग्र
  • GDP, GNP, NDP, NNP
  • mp, fc, NFIA
वास्तविक व कल्याण
  • GDP अपस्फीतिकारक
  • बाह्य प्रभाव

10. टिप्स और ट्रिक्स

स्मार्ट तरीके
  • तीन "पुल" याद रखें: सकल ↔ निवल = मूल्यह्रास; घरेलू ↔ राष्ट्रीय = NFIA; mp ↔ fc = NIT।
  • संख्यात्मक प्रश्न में पहले देखें कि दिया गया समग्र किस "रूप" में है, फिर आवश्यक पुल लगाएँ।
  • किसी मद को शामिल करने का प्रश्न: पूछें — "क्या इसके बदले इस वर्ष कोई उत्पादन हुआ?" नहीं तो बाहर।
आम गलतियाँ
  • हस्तांतरण भुगतान (पेंशन, छात्रवृत्ति) को राष्ट्रीय आय में जोड़ना।
  • NFIA ऋणात्मक हो तो उसका चिह्न भूल जाना।
  • मध्यवर्ती वस्तुओं को कुल उत्पादन में अलग से जोड़कर दोहरी गणना करना।

11. महत्वपूर्ण वन-लाइनर

  • राष्ट्रीय आय एक प्रवाह चर है।
  • पूँजीगत वस्तुएँ अंतिम वस्तुएँ होती हैं।
  • मूल्य वर्धित विधि दोहरी गणना से बचाती है।
  • बिना बिका उत्पादन माल-सूची में परिवर्तन के रूप में निवेश माना जाता है।
  • GNP = GDP + NFIA।
  • साधन लागत = बाज़ार कीमत − निवल अप्रत्यक्ष कर।
  • वास्तविक GDP स्थिर (आधार वर्ष की) कीमतों पर मापा जाता है।
  • बाह्य प्रभाव GDP में नहीं गिने जाते।

12. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

निम्न में से कौन-सा स्टॉक चर है?

  1. राष्ट्रीय आय
  2. निवेश
  3. पूँजी
  4. मूल्यह्रास
उत्तर देखें

पूँजी किसी समय-बिंदु पर मापी जाती है — स्टॉक। राष्ट्रीय आय, निवेश और मूल्यह्रास एक अवधि में मापे जाते हैं — प्रवाह।

उत्तर: (ग) पूँजी

प्र2आसान

वृद्धावस्था पेंशन राष्ट्रीय आय में शामिल क्यों नहीं की जाती?

उत्तर देखें

यह हस्तांतरण भुगतान है — इसके बदले चालू वर्ष में कोई वस्तु या सेवा का उत्पादन नहीं होता।

उत्तर: हस्तांतरण भुगतान — उत्पादन के बदले नहीं

प्र3आसान

सकल निवेश ₹500 करोड़ और मूल्यह्रास ₹80 करोड़ है। निवल निवेश ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें

500 − 80 = ₹420 करोड़।

उत्तर: ₹420 करोड़

प्र4मध्यम

दोहरी गणना की समस्या क्या है? इससे कैसे बचा जाता है?

उत्तर देखें

यदि सभी उत्पादकों के उत्पादन का मूल्य सीधे जोड़ें, तो मध्यवर्ती वस्तुओं (जैसे गेहूँ, आटा) का मूल्य कई बार गिना जाता है, क्योंकि वह अंतिम वस्तु के मूल्य में पहले से शामिल है। बचाव: (1) केवल अंतिम वस्तुओं का मूल्य लें, या (2) प्रत्येक चरण का मूल्य वर्धित जोड़ें।

उत्तर: मध्यवर्ती वस्तुओं की बार-बार गिनती; मूल्य वर्धित विधि से बचाव

प्र5मध्यम

एक फर्म का उत्पादन मूल्य ₹900, कच्चे माल की खरीद ₹350, बिजली ₹50, मूल्यह्रास ₹40 और अप्रत्यक्ष कर ₹60 है (काल्पनिक)। (क) सकल मूल्य वर्धित (mp) (ख) निवल मूल्य वर्धित (fc) ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें

मध्यवर्ती उपभोग = 350 + 50 = 400। (क) GVAmp = 900 − 400 = ₹500। (ख) NVAfc = 500 − 40 − 60 = ₹400।

उत्तर: (क) ₹500 (ख) ₹400

प्र6मध्यम

GDP और GNP में अंतर बताइए। क्या GNP, GDP से कम हो सकता है?

उत्तर देखें

GDP देश की भौगोलिक सीमा में उत्पादन का मूल्य है; GNP देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित आय। GNP = GDP + NFIA। हाँ, यदि NFIA ऋणात्मक हो — अर्थात विदेशियों को दी गई साधन आय विदेश से प्राप्त आय से अधिक हो — तो GNP, GDP से कम होगा।

उत्तर: घरेलू बनाम राष्ट्रीय; NFIA ऋणात्मक हो तो GNP < GDP

प्र7मध्यम

मौद्रिक GDP ₹2,400 करोड़ और GDP अपस्फीतिकारक 120 है। वास्तविक GDP ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें

वास्तविक GDP = (मौद्रिक GDP / अपस्फीतिकारक) × 100 = 2400/120 × 100 = ₹2,000 करोड़।

उत्तर: ₹2,000 करोड़

प्र8मध्यम

बताइए कि निम्न मदें राष्ट्रीय आय में शामिल होंगी या नहीं: (क) पुरानी कार की बिक्री (ख) पुरानी कार की बिक्री पर दलाल का कमीशन (ग) किसी कंपनी के नए शेयर खरीदना (घ) सरकार द्वारा शिक्षकों को वेतन।

उत्तर देखें

(क) नहीं — उत्पादन वर्ष में गिनी जा चुकी। (ख) हाँ — चालू वर्ष की सेवा। (ग) नहीं — वित्तीय लेन-देन, केवल स्वामित्व का हस्तांतरण। (घ) हाँ — शिक्षण सेवा के बदले कर्मचारियों का पारिश्रमिक।

उत्तर: (क) नहीं (ख) हाँ (ग) नहीं (घ) हाँ

प्र9कठिन

निम्न आँकड़ों (₹ करोड़; काल्पनिक) से राष्ट्रीय आय ज्ञात कीजिए: कर्मचारियों का पारिश्रमिक 600; लगान 100; ब्याज 80; लाभ 220; मिश्रित आय 150; मूल्यह्रास 70; NFIA −20; निवल अप्रत्यक्ष कर 90।

उत्तर देखें

प्रचालन अधिशेष = 100 + 80 + 220 = 400। NDPfc = 600 + 400 + 150 = 1,150। राष्ट्रीय आय (NNPfc) = 1,150 + (−20) = 1,130। (मूल्यह्रास और NIT यहाँ अनावश्यक हैं, क्योंकि आय विधि सीधे NDPfc देती है।)

उत्तर: ₹1,130 करोड़

प्र10कठिन

व्यय विधि से (₹ करोड़; काल्पनिक): निजी अंतिम उपभोग 1,500; सरकारी अंतिम उपभोग 400; सकल स्थिर पूँजी निर्माण 450; माल-सूची में परिवर्तन 50; निर्यात 200; आयात 260; मूल्यह्रास 100; निवल अप्रत्यक्ष कर 150; NFIA 30। GDPmp और राष्ट्रीय आय ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें

I = 450 + 50 = 500; X − M = 200 − 260 = −60। GDPmp = 1500 + 400 + 500 − 60 = 2,340। NDPmp = 2,340 − 100 = 2,240। NDPfc = 2,240 − 150 = 2,090। NNPfc = 2,090 + 30 = 2,120।

उत्तर: GDPmp = ₹2,340 करोड़; राष्ट्रीय आय = ₹2,120 करोड़

प्र11कठिन

"GDP कल्याण का संतोषजनक सूचक नहीं है।" तीन कारण देकर विवेचना कीजिए।

उत्तर देखें

(1) वितरण: GDP बढ़ने पर भी यदि आय कुछ लोगों में केंद्रित हो जाए, तो अधिकांश लोगों का कल्याण नहीं बढ़ता। (2) गैर-मौद्रिक विनिमय: घरेलू काम, देखभाल, वस्तु-विनिमय जैसी कल्याणकारी गतिविधियाँ GDP में शामिल नहीं — GDP कल्याण को कम आँकता है। (3) बाह्य प्रभाव: प्रदूषण जैसी ऋणात्मक बाह्यताएँ GDP से नहीं घटाई जातीं — GDP कल्याण को अधिक आँकता है। इसके अतिरिक्त, GDP अवकाश, स्वास्थ्य और शिक्षा को सीधे नहीं मापता।

उत्तर: वितरण, गैर-मौद्रिक विनिमय, बाह्य प्रभाव

प्र12कठिन

एक अर्थव्यवस्था में वर्ष 1 (आधार) में 100 इकाई वस्तु ₹10 प्रति इकाई पर बनी; वर्ष 2 में 110 इकाई ₹12 प्रति इकाई पर (काल्पनिक)। मौद्रिक GDP, वास्तविक GDP, अपस्फीतिकारक और वास्तविक संवृद्धि दर ज्ञात कीजिए।

उत्तर देखें

वर्ष 1: मौद्रिक = वास्तविक = 100 × 10 = ₹1,000। वर्ष 2: मौद्रिक GDP = 110 × 12 = ₹1,320; वास्तविक GDP = 110 × 10 = ₹1,100; अपस्फीतिकारक = 1320/1100 × 100 = 120। वास्तविक संवृद्धि = (1100 − 1000)/1000 × 100 = 10%; मौद्रिक GDP 32% बढ़ा, जिसमें से अधिकांश कीमत वृद्धि (20%) के कारण है।

उत्तर: मौद्रिक ₹1,320; वास्तविक ₹1,100; अपस्फीतिकारक 120; वास्तविक संवृद्धि 10%

13. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • अंतिम वस्तुएँ गिनें, मध्यवर्ती नहीं; पूँजीगत वस्तुएँ अंतिम हैं।
  • स्टॉक = समय-बिंदु; प्रवाह = समय-अवधि; निवल निवेश = सकल − मूल्यह्रास।
  • तीन विधियाँ: मूल्य वर्धित; C + I + G + (X − M); पारिश्रमिक + प्रचालन अधिशेष + मिश्रित आय।
  • पुल: मूल्यह्रास (सकल-निवल), NFIA (घरेलू-राष्ट्रीय), NIT (mp-fc); राष्ट्रीय आय = NNPfc।
  • वास्तविक GDP = स्थिर कीमतें; अपस्फीतिकारक = मौद्रिक/वास्तविक × 100।
  • GDP ≠ कल्याण: वितरण, गैर-मौद्रिक विनिमय, बाह्य प्रभाव।