1. अध्याय एक नज़र में
1989 के बाद भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव आए। कांग्रेस का प्रभुत्व समाप्त हुआ और गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ; मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू होने से अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) की राजनीति उभरी; दलित राजनीति मज़बूत हुई; अयोध्या विवाद और सांप्रदायिकता ने धर्मनिरपेक्षता पर बहस तेज़ की; और नई आर्थिक नीति अपनाई गई। 2014 के बाद फिर एक दल को पूर्ण बहुमत मिला। इस अध्याय में हम 1990 के बाद की भारतीय राजनीति के इन प्रमुख रुझानों को समझेंगे।
- 1990 के दशक का संदर्भ — पाँच प्रमुख बदलाव।
- गठबंधन का युग — राष्ट्रीय मोर्चा, संयुक्त मोर्चा, NDA, UPA।
- OBC का राजनीतिक उदय और मंडल आयोग; दलित राजनीति।
- सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र — अयोध्या, गुजरात।
- 2014 के बाद की राजनीति और उभरती आम सहमति।
2. 1990 का संदर्भ — पाँच प्रमुख बदलाव
- कांग्रेस प्रणाली का अंत: 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी को भारी बहुमत (400 से अधिक सीटें) मिला, पर 1989 में कांग्रेस हार गई। मई 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या हुई; कांग्रेस ने पी. वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में सरकार बनाई। "एक दल के प्रभुत्व" के बजाय बहुदलीय प्रतिस्पर्धा का दौर आया।
- मंडल मुद्दा: 1990 में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने केंद्र सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण लागू किया — इससे "मंडल समर्थक" और "मंडल विरोधी" आंदोलन हुए।
- नई आर्थिक नीति (1991): उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण — "संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम"; इसके बाद सभी सरकारों ने इसे जारी रखा।
- अयोध्या विवाद: दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने से राजनीति में बड़ा बदलाव; धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद पर बहस।
- गठबंधन का युग: 1989 से 2014 तक किसी एक दल को लोकसभा में पूर्ण बहुमत नहीं मिला।
3. गठबंधन का युग (1989-2014)
| वर्ष | सरकार | प्रधानमंत्री | विशेष बात |
|---|---|---|---|
| 1989 | राष्ट्रीय मोर्चा (जनता दल व क्षेत्रीय दल) | वी. पी. सिंह, फिर चंद्रशेखर | भाजपा और वाम मोर्चा का बाहर से समर्थन; मंडल सिफ़ारिशें लागू |
| 1991 | कांग्रेस (अल्पमत, बाद में बहुमत) | पी. वी. नरसिम्हा राव | नई आर्थिक नीति |
| 1996 | संयुक्त मोर्चा (जनता दल व क्षेत्रीय दल) | एच. डी. देवेगौड़ा, फिर इंद्र कुमार गुजराल | कांग्रेस का बाहर से समर्थन; भाजपा सबसे बड़ा दल, पर 13 दिन की सरकार बहुमत न जुटा सकी |
| 1998, 1999 | राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) | अटल बिहारी वाजपेयी | 1999 से 2004 तक पूरा कार्यकाल; पोखरण-II (1998), कारगिल (1999) |
| 2004, 2009 | संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) | डॉ. मनमोहन सिंह | 2004 में वाम मोर्चे का बाहर से समर्थन; सूचना का अधिकार (2005), मनरेगा (2005) |
(1) क्षेत्रीय दलों की केंद्र की राजनीति में भूमिका बढ़ी — DMK, TDP, शिवसेना, तृणमूल, अकाली दल, BJD जैसे दल सरकारों में भागीदार बने; (2) विचारधारा के बजाय व्यावहारिकता और साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर आधारित गठबंधन; (3) संघवाद मज़बूत हुआ — राज्यों की आवाज़ केंद्र में सुनी गई; (4) सरकारें कभी-कभी अस्थिर रहीं, पर NDA (1999-2004) और UPA (2004-14) ने पूरे कार्यकाल चलाकर दिखाया कि गठबंधन भी स्थिर सरकार दे सकते हैं।
4. अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) का राजनीतिक उदय
- मंडल आयोग: 1978 में जनता पार्टी सरकार ने बी. पी. मंडल की अध्यक्षता में दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया। आयोग ने 1980 में रिपोर्ट दी — पिछड़े वर्ग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में बहुत कम प्रतिनिधित्व रखते हैं; उनके लिए शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की सिफ़ारिश की; साथ ही भूमि सुधार जैसे उपाय भी सुझाए।
- अगस्त 1990 में वी. पी. सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने केंद्र सरकार की नौकरियों में OBC के लिए 27% आरक्षण लागू किया; इसके विरुद्ध उत्तर भारत में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए।
- इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992): सर्वोच्च न्यायालय ने OBC आरक्षण को वैध ठहराया, पर "क्रीमी लेयर" (संपन्न वर्ग) को बाहर रखने और कुल आरक्षण की सीमा सामान्यतः 50% रखने का निर्देश दिया।
- राजनीतिक प्रभाव: उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में OBC नेतृत्व वाले दलों का उदय — जैसे समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड); पिछड़े वर्गों की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ा।
दलित राजनीति
- 1978 में BAMSEF (पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी महासंघ) बना — सरकारी कर्मचारियों का संगठन।
- 1984 में कांशी राम ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) बनाई — "बहुजन" (दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक) की राजनीतिक सत्ता का लक्ष्य; उत्तर प्रदेश में मायावती कई बार मुख्यमंत्री बनीं — 2007 में BSP को पूर्ण बहुमत मिला।
- इन आंदोलनों ने सामाजिक न्याय, आरक्षण और सत्ता में भागीदारी को राजनीति के केंद्र में ला दिया।
5. सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र
- भाजपा का उदय: 1980 में पूर्व जनसंघ के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बनाई; 1984 में केवल 2 सीटें, 1989 में 85 सीटें; भाजपा ने "हिंदुत्व" और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपनी विचारधारा बनाया।
- शाहबानो मामला (1985): सर्वोच्च न्यायालय ने तलाक़शुदा मुस्लिम महिला शाहबानो को पति से गुज़ारा भत्ता देने का निर्णय दिया; राजीव गांधी सरकार ने 1986 में कानून बनाकर इस निर्णय को निष्प्रभावी किया — भाजपा ने इसे "अल्पसंख्यक तुष्टीकरण" कहा।
- अयोध्या विवाद: 1986 में फ़ैज़ाबाद ज़िला न्यायालय के आदेश पर बाबरी मस्जिद परिसर के ताले खोले गए; राम जन्मभूमि आंदोलन तेज़ हुआ; 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथयात्रा; 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद ढहा दी; देश में सांप्रदायिक दंगे; केंद्र ने भाजपा शासित चार राज्य सरकारें बर्ख़ास्त कीं; लिब्रहान आयोग ने जाँच की।
- गुजरात (2002): फ़रवरी 2002 में गोधरा स्टेशन पर अयोध्या से लौट रहे कारसेवकों से भरे ट्रेन के डिब्बे में आग से 57 लोगों (कुछ आधिकारिक स्रोतों के अनुसार 59) की मृत्यु; इसके बाद गुजरात में व्यापक सांप्रदायिक हिंसा; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार की भूमिका की आलोचना की।
- अयोध्या निर्णय (नवंबर 2019): सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने विवादित भूमि राम मंदिर निर्माण के लिए दी और मस्जिद के लिए अलग 5 एकड़ भूमि देने का निर्देश दिया; जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई।
इन घटनाओं ने यह प्रश्न उठाया कि लोकतंत्र में बहुसंख्यकवाद और धर्मनिरपेक्षता का संतुलन कैसे हो। भारतीय लोकतंत्र में यह सिद्धांत स्वीकृत है कि हर नागरिक को समान अधिकार हैं और धार्मिक पहचान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव या हिंसा नहीं होनी चाहिए।
6. 2014 के बाद — एक दल के बहुमत की वापसी
- 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 282 सीटें — 1984 के बाद पहली बार किसी दल को अकेले पूर्ण बहुमत; NDA सरकार बनी। कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई।
- 2019 में भाजपा को 303 सीटें मिलीं — और बड़ा बहुमत।
- 2024 में भाजपा को 240 सीटें मिलीं — अकेले बहुमत (272) से कम; पर NDA गठबंधन को बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने; TDP और JD(U) जैसे सहयोगी दलों की भूमिका फिर महत्त्वपूर्ण हुई। कांग्रेस 99 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद 10 वर्ष बाद भरा गया।
- इस दौर में भाजपा का सामाजिक आधार उच्च जातियों से आगे बढ़कर OBC, दलित और आदिवासी समुदायों तक फैला; कल्याणकारी योजनाएँ और राष्ट्रवाद प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे।
7. उभरती आम सहमति
तीखी प्रतिस्पर्धा के बावजूद अधिकांश दलों के बीच कुछ मुद्दों पर व्यापक सहमति बनी है:
- नई आर्थिक नीति पर सहमति — अधिकांश दल उदारीकरण और आर्थिक सुधारों को किसी न किसी रूप में स्वीकार करते हैं।
- पिछड़े वर्गों के राजनीतिक-सामाजिक दावों की स्वीकृति — सभी दल OBC और अन्य वंचित वर्गों को आरक्षण और प्रतिनिधित्व का समर्थन करते हैं।
- राज्य-स्तरीय दलों की भूमिका की स्वीकृति — राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों का भेद कम हुआ; क्षेत्रीय दल केंद्र सरकार में भागीदार बनते हैं।
- विचारधारा के बजाय व्यावहारिकता — गठबंधन प्रायः सत्ता और साझा कार्यक्रम पर आधारित होते हैं, कठोर विचारधारा पर नहीं।
8. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| गठबंधन सरकार | कई दलों के मिलकर बनाई गई सरकार |
| राष्ट्रीय मोर्चा | 1989 — जनता दल के नेतृत्व में गठबंधन |
| संयुक्त मोर्चा | 1996 — जनता दल व क्षेत्रीय दलों का गठबंधन |
| NDA | राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन — भाजपा के नेतृत्व में |
| UPA | संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन — कांग्रेस के नेतृत्व में |
| मंडल आयोग | 1978 — दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग, अध्यक्ष बी. पी. मंडल |
| क्रीमी लेयर | OBC का संपन्न वर्ग — आरक्षण से बाहर (इंद्रा साहनी 1992) |
| बहुजन | दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक — BSP की अवधारणा |
| हिंदुत्व | भाजपा की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा |
| साझा न्यूनतम कार्यक्रम | गठबंधन दलों का सहमत नीतिगत एजेंडा |
9. मास्टर सारांश तालिका
| रुझान | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| गठबंधन युग | 1989 राष्ट्रीय मोर्चा (वी. पी. सिंह); 1996 संयुक्त मोर्चा (देवेगौड़ा, गुजराल); 1999-2004 NDA (वाजपेयी); 2004-14 UPA (मनमोहन सिंह) |
| OBC राजनीति | मंडल आयोग 1978, रिपोर्ट 1980, लागू अगस्त 1990 (27%), इंद्रा साहनी 1992 |
| दलित राजनीति | BAMSEF 1978, BSP 1984 (कांशी राम), मायावती |
| सांप्रदायिकता | भाजपा 1980; शाहबानो 1985; रथयात्रा 1990; बाबरी विध्वंस 6 दिसंबर 1992; गुजरात 2002; SC निर्णय 2019 |
| 2014 के बाद | भाजपा 282 (2014), 303 (2019), 240 (2024, NDA बहुमत) |
| आम सहमति | आर्थिक नीति, पिछड़े वर्गों के दावे, क्षेत्रीय दल, व्यावहारिकता |
चार्ट — लोकसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस की सीटें (कुल 543):
10. माइंड मैप
- NF, UF
- NDA, UPA
- मंडल 1990
- इंद्रा साहनी
- BSP 1984
- कांशी राम
- अयोध्या 1992
- गुजरात 2002
- भाजपा बहुमत
- 2024 NDA
11. टिप्स और ट्रिक्स
- मंडल: "78 बना, 80 रिपोर्ट, 90 लागू, 92 न्यायालय"।
- गठबंधन क्रम "NF-UF-NDA-UPA" = 1989, 1996, 1998/99, 2004।
- भाजपा सीटें "282-303-240" — 2014, 2019, 2024।
- मंडल आयोग 1990 में नहीं बना — 1978 में बना, 1990 में सिफ़ारिशें लागू हुईं।
- BSP की स्थापना कांशी राम ने की, मायावती ने नहीं।
- 2024 में भाजपा को अकेले बहुमत नहीं मिला; सरकार NDA गठबंधन की है।
12. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर
- राजीव गांधी की हत्या मई 1991 में हुई।
- 1989 में वी. पी. सिंह राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के प्रधानमंत्री बने।
- मंडल आयोग के अध्यक्ष बी. पी. मंडल थे।
- मंडल आयोग ने OBC के लिए 27% आरक्षण की सिफ़ारिश की।
- इंद्रा साहनी मामला 1992 में आया।
- BSP की स्थापना 1984 में कांशी राम ने की।
- भाजपा की स्थापना 1980 में हुई।
- बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर 1992 को ढहाई गई।
- सर्वोच्च न्यायालय का अयोध्या निर्णय नवंबर 2019 में आया।
- वाजपेयी के नेतृत्व में NDA ने 1999-2004 का पूरा कार्यकाल चलाया।
- 2014 में भाजपा को 282 सीटें मिलीं।
- 2024 में नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने।
13. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
मंडल आयोग की सिफ़ारिशें किस प्रधानमंत्री के समय लागू हुईं?
- मोरारजी देसाई
- वी. पी. सिंह
- राजीव गांधी
- पी. वी. नरसिम्हा राव
उत्तर देखें
अगस्त 1990 में वी. पी. सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने केंद्र सरकार की नौकरियों में OBC के लिए 27% आरक्षण लागू किया।
उत्तर: (ख) वी. पी. सिंह
बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कौन थे?
- मायावती
- कांशी राम
- बी. आर. आंबेडकर
- जगजीवन राम
उत्तर देखें
कांशी राम ने 1984 में BSP की स्थापना की; मायावती बाद में इसकी प्रमुख नेता और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं।
उत्तर: (ख) कांशी राम
"क्रीमी लेयर" से क्या तात्पर्य है?
उत्तर देखें
क्रीमी लेयर अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के उस संपन्न और आगे बढ़ चुके हिस्से को कहते हैं जिसे आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता, ताकि लाभ वास्तव में ज़रूरतमंदों तक पहुँचे। इसे इंद्रा साहनी मामले (1992) में सर्वोच्च न्यायालय ने अनिवार्य किया।
उत्तर: OBC का संपन्न वर्ग, जो आरक्षण से बाहर है
1990 के दशक की भारतीय राजनीति के पाँच प्रमुख बदलाव बताइए।
उत्तर देखें
(1) कांग्रेस प्रणाली का अंत — 1989 में कांग्रेस की हार और बहुदलीय प्रतिस्पर्धा; (2) मंडल मुद्दा — 1990 में OBC आरक्षण और पिछड़े वर्गों की राजनीति का उदय; (3) नई आर्थिक नीति (1991) — उदारीकरण और वैश्वीकरण; (4) अयोध्या विवाद — 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस और सांप्रदायिक राजनीति पर बहस; (5) गठबंधन का युग — 1989 से 2014 तक किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं। इनके साथ मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या भी इस दौर की महत्त्वपूर्ण घटना थी।
उत्तर: कांग्रेस प्रणाली का अंत, मंडल, नई आर्थिक नीति, अयोध्या, गठबंधन
गठबंधन राजनीति के लाभ और हानियाँ बताइए।
उत्तर देखें
लाभ: (1) विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक समूहों का केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व; (2) क्षेत्रीय दलों की भागीदारी से संघवाद मज़बूत; (3) सहमति और बातचीत से नीति-निर्माण; (4) एक दल की निरंकुशता पर रोक। हानियाँ: (1) सरकारें कभी-कभी अस्थिर — 1989-99 के बीच कई सरकारें गिरीं; (2) छोटे सहयोगी दलों का अनुपात से अधिक दबाव; (3) कठोर निर्णय लेने में कठिनाई; (4) विचारधारा के बजाय सत्ता-केंद्रित समझौते। फिर भी NDA (1999-2004) और UPA (2004-14) ने पूरे कार्यकाल चलाकर दिखाया कि गठबंधन स्थिर सरकार दे सकते हैं।
उत्तर: प्रतिनिधित्व व संघवाद बनाम अस्थिरता व दबाव
मंडल आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें बताइए।
उत्तर देखें
1978 में बी. पी. मंडल की अध्यक्षता में बने दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग ने 1980 में रिपोर्ट दी: (1) पिछड़े वर्गों की पहचान सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक आधार पर की जाए; (2) शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में OBC के लिए 27% आरक्षण; (3) भूमि सुधार ताकि पिछड़े वर्गों की आर्थिक स्थिति सुधरे; (4) पिछड़े वर्गों की स्थिति सुधारने के लिए अन्य कल्याणकारी उपाय। आयोग ने पाया कि ये वर्ग शिक्षा और सरकारी सेवाओं में बहुत कम प्रतिनिधित्व रखते हैं।
उत्तर: 27% आरक्षण, भूमि सुधार, कल्याणकारी उपाय
1989 के बाद उभरी "आम सहमति" के तत्त्व बताइए।
उत्तर देखें
(1) नई आर्थिक नीति: अधिकांश दल उदारीकरण और सुधारों को स्वीकार करते हैं, भले ही उसके तरीक़ों पर मतभेद हों; (2) पिछड़े वर्गों के दावे: सभी दल OBC आरक्षण और पिछड़े वर्गों की राजनीतिक भागीदारी का समर्थन करते हैं; (3) क्षेत्रीय दलों की भूमिका: राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों का भेद कम हुआ, क्षेत्रीय दल केंद्र सरकार में भागीदार; (4) व्यावहारिक राजनीति: गठबंधन विचारधारा के बजाय सत्ता में भागीदारी और साझा कार्यक्रम पर आधारित।
उत्तर: आर्थिक नीति, पिछड़ों के दावे, क्षेत्रीय दल, व्यावहारिकता
मंडल आयोग की सिफ़ारिशों के लागू होने से भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर देखें
(1) सामाजिक न्याय की राजनीति: OBC के प्रतिनिधित्व और सत्ता में भागीदारी का प्रश्न राजनीति के केंद्र में आया। (2) नए दलों और नेताओं का उदय: उत्तर प्रदेश और बिहार में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड) जैसे OBC-आधारित दलों का उदय; पिछड़े वर्गों के नेता मुख्यमंत्री बने। (3) ध्रुवीकरण: प्रारंभ में "मंडल समर्थक" और "मंडल विरोधी" आंदोलन; उत्तर भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शन। (4) न्यायिक संतुलन: इंद्रा साहनी (1992) में OBC आरक्षण वैध, पर क्रीमी लेयर बाहर और 50% की सीमा। (5) दीर्घकालिक प्रभाव: सभी दलों ने पिछड़े वर्गों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया — आज यह व्यापक राजनीतिक सहमति का भाग है। इस प्रकार मंडल ने भारतीय राजनीति का सामाजिक आधार व्यापक बनाया।
उत्तर: सामाजिक न्याय की राजनीति, OBC दलों का उदय, ध्रुवीकरण, न्यायिक संतुलन, व्यापक सहमति
अयोध्या विवाद ने भारतीय राजनीति को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर देखें
(1) भाजपा का उदय: राम जन्मभूमि आंदोलन से भाजपा को व्यापक जन समर्थन मिला — 1984 में 2 सीटों से बढ़कर 1989 में 85 और बाद में सबसे बड़ा दल बनी। (2) सांप्रदायिक ध्रुवीकरण: 1990 की रथयात्रा और 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद देश भर में सांप्रदायिक दंगे; धार्मिक पहचान राजनीति में प्रमुख हुई। (3) धर्मनिरपेक्षता पर बहस: भाजपा ने अन्य दलों पर "छद्म धर्मनिरपेक्षता" और "अल्पसंख्यक तुष्टीकरण" (जैसे शाहबानो प्रकरण) का आरोप लगाया; विरोधी दलों ने भाजपा पर बहुसंख्यकवाद का आरोप लगाया। (4) संवैधानिक प्रश्न: केंद्र द्वारा चार भाजपा शासित राज्य सरकारें बर्ख़ास्त; लिब्रहान आयोग की जाँच। (5) न्यायिक समाधान: नवंबर 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से भूमि विवाद का कानूनी अंत हुआ; 2024 में राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा। यह विवाद दिखाता है कि लोकतंत्र में धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन कितना महत्त्वपूर्ण है।
उत्तर: भाजपा का उदय, ध्रुवीकरण, धर्मनिरपेक्षता बहस, न्यायिक समाधान 2019
2014 के बाद की भारतीय राजनीति, गठबंधन युग से कैसे भिन्न है?
उत्तर देखें
गठबंधन युग (1989-2014): किसी एक दल को बहुमत नहीं; सरकारें सहयोगी दलों पर निर्भर; क्षेत्रीय दलों की निर्णायक भूमिका; साझा न्यूनतम कार्यक्रम; कभी-कभी अस्थिरता। 2014 के बाद: (1) 2014 (282) और 2019 (303) में भाजपा को अकेले पूर्ण बहुमत — 1984 के बाद पहली बार एक दल का बहुमत; (2) फिर भी NDA गठबंधन के रूप में सहयोगी दलों को सरकार में स्थान; (3) भाजपा का सामाजिक आधार OBC, दलित और आदिवासी समुदायों तक फैला; (4) राष्ट्रीय विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, कमज़ोर हुआ (2014 में 44, 2019 में 52)। 2024 का बदलाव: भाजपा 240 सीटों के साथ बहुमत से पीछे रही; NDA सहयोगियों (TDP, JD-U) की भूमिका फिर बढ़ी; कांग्रेस 99 सीटों के साथ मज़बूत विपक्ष बनी। अतः भारतीय राजनीति में "एक दल का प्रभुत्व" और "गठबंधन" — दोनों प्रवृत्तियाँ साथ-साथ चलती दिखती हैं।
उत्तर: एक दल का बहुमत लौटा (2014, 2019), पर 2024 में गठबंधन की भूमिका फिर बढ़ी
दलित राजनीति के उदय ने भारतीय लोकतंत्र को कैसे गहरा किया?
उत्तर देखें
(1) संगठन: 1978 में BAMSEF ने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक सरकारी कर्मचारियों को संगठित किया; 1984 में कांशी राम ने BSP बनाई, जिसका लक्ष्य था "बहुजन" — समाज की बहुसंख्यक वंचित आबादी — को राजनीतिक सत्ता दिलाना। (2) सत्ता में भागीदारी: उत्तर प्रदेश में मायावती कई बार मुख्यमंत्री बनीं; 2007 में BSP ने अकेले बहुमत पाया — दलित नेतृत्व की ऐतिहासिक उपलब्धि। (3) सामाजिक बदलाव: दलितों में आत्म-सम्मान और राजनीतिक चेतना बढ़ी; आंबेडकर की विरासत राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आई। (4) राजनीतिक प्रभाव: अन्य सभी दलों को दलित मतदाताओं और मुद्दों — आरक्षण, अत्याचार निवारण, भूमि अधिकार — पर ध्यान देना पड़ा। (5) लोकतंत्र का विस्तार: निम्नतम सामाजिक वर्गों का सत्ता तक पहुँचना दिखाता है कि भारतीय लोकतंत्र अधिक समावेशी हुआ है, जिसे कुछ विद्वान "लोकतांत्रिक उभार" कहते हैं।
उत्तर: BAMSEF, BSP, मायावती की सरकारें — वंचितों की सत्ता में भागीदारी से समावेशी लोकतंत्र
14. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- 1990 के पाँच बदलाव: कांग्रेस प्रणाली का अंत (1989; राजीव हत्या 1991), मंडल, नई आर्थिक नीति, अयोध्या, गठबंधन युग।
- गठबंधन: राष्ट्रीय मोर्चा 1989 (वी. पी. सिंह), संयुक्त मोर्चा 1996 (देवेगौड़ा, गुजराल), NDA 1998-2004 (वाजपेयी), UPA 2004-14 (मनमोहन सिंह)।
- OBC: मंडल आयोग 1978 → रिपोर्ट 1980 → 27% आरक्षण अगस्त 1990 → इंद्रा साहनी 1992 (क्रीमी लेयर, 50%); दलित — BAMSEF 1978, BSP 1984 (कांशी राम), मायावती।
- सांप्रदायिकता: भाजपा 1980; शाहबानो 1985; रथयात्रा 1990; बाबरी विध्वंस 6 दिसंबर 1992; गुजरात 2002; SC निर्णय नवंबर 2019।
- 2014 के बाद: भाजपा 282 (2014), 303 (2019), 240 (2024, NDA बहुमत); आम सहमति — आर्थिक नीति, पिछड़ों के दावे, क्षेत्रीय दल, व्यावहारिकता।