1. अध्याय एक नज़र में
भारत में भाषा, धर्म, जनजाति और संस्कृति के आधार पर अनेक क्षेत्रीय पहचानें हैं। समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों ने अधिक स्वायत्तता, अलग राज्य, अपनी पहचान की रक्षा या कभी-कभी अलगाव की माँग की है। इन्हें क्षेत्रीय आकांक्षाएँ (Regional Aspirations) कहते हैं। इस अध्याय में हम क्षेत्र और राष्ट्र के संबंध, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पूर्वोत्तर और अन्य क्षेत्रों के अनुभव, तथा भारतीय लोकतंत्र द्वारा इन आकांक्षाओं के समायोजन से मिले सबक समझेंगे।
- क्षेत्र और राष्ट्र — भारत का दृष्टिकोण।
- जम्मू-कश्मीर — विलय, विशेष दर्जा, संघर्ष और 2019 का पुनर्गठन।
- पंजाब — आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, हिंसा का दौर, शांति।
- पूर्वोत्तर — स्वायत्तता की माँग, अलगाववादी आंदोलन, बाहरी लोगों के विरुद्ध आंदोलन।
- द्रविड़ आंदोलन, सिक्किम का विलय, गोवा की मुक्ति; क्षेत्रीय आकांक्षाओं के सबक।
2. क्षेत्र और राष्ट्र
1980 के दशक में कई क्षेत्रों में स्वायत्तता या अलगाव की माँगें तेज़ हुईं। भारत ने विविधता के सम्मान के साथ राष्ट्रीय एकता का दृष्टिकोण अपनाया। भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं को राष्ट्र-विरोधी नहीं, बल्कि लोकतंत्र का स्वाभाविक भाग माना गया। कुछ देशों में विविधता को एकता के लिए ख़तरा मानकर दबाया जाता है, पर भारत ने बातचीत और समायोजन का रास्ता चुना — जैसे भाषाई राज्यों का गठन (1956), छठी अनुसूची, अनुच्छेद 371। साथ ही भारत ने एकता और अखंडता से कोई समझौता नहीं किया; हिंसक अलगाववाद का दृढ़ता से सामना किया गया।
3. जम्मू और कश्मीर
जम्मू-कश्मीर में तीन सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र थे — जम्मू (हिंदू बहुल, साथ में मुस्लिम, सिख), कश्मीर घाटी (मुख्यतः कश्मीरी मुस्लिम, साथ में कश्मीरी पंडित) और लद्दाख (बौद्ध और मुस्लिम)। "कश्मीरियत" — सांप्रदायिक सद्भाव और साझा कश्मीरी पहचान — घाटी की विशेषता मानी जाती थी।
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1947 | महाराजा हरि सिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे; अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने क़बायली घुसपैठियों को भेजा; महाराजा ने भारत से सैन्य सहायता माँगी और विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए; भारतीय सेना ने घुसपैठियों को पीछे धकेला; कुछ भाग पाकिस्तान के नियंत्रण में रहा; मामला संयुक्त राष्ट्र गया |
| 1948 | नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता शेख़ अब्दुल्ला प्रधानमंत्री (तब राज्य के शासन प्रमुख को यही कहा जाता था) बने; भूमि सुधार किए |
| 1950-57 | संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को विशेष दर्जा — अपना संविधान (1957), केंद्र के कई कानून राज्य की सहमति से ही लागू |
| 1953 | केंद्र से मतभेद के बाद शेख़ अब्दुल्ला बर्ख़ास्त और कई वर्षों तक नज़रबंद |
| 1974-75 | इंदिरा गांधी और शेख़ अब्दुल्ला के बीच समझौता; शेख़ अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने |
| 1987 | विधानसभा चुनाव में धाँधली के आरोप; नेशनल कॉन्फ़्रेंस-कांग्रेस गठबंधन की जीत; जनता में असंतोष |
| 1989 से | पाकिस्तान के समर्थन से उग्रवाद और अलगाववाद; 1990 में घाटी से कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन |
| 1996 से | चुनावी प्रक्रिया की बहाली; 2002 के चुनाव निष्पक्ष माने गए |
| अगस्त 2019 | संसद ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किया; जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 से राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर (विधानसभा सहित) और लद्दाख (विधानसभा रहित) — में बाँटा गया; दिसंबर 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय को वैध ठहराया |
| 2024 | जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव; निर्वाचित सरकार का गठन |
बाहरी और आंतरिक विवाद: बाहरी रूप से पाकिस्तान कश्मीर पर दावा करता है और उसका एक भाग ("पाक-अधिकृत कश्मीर") उसके नियंत्रण में है; आंतरिक रूप से राज्य की स्वायत्तता और भारत संघ में उसकी स्थिति पर बहस रही है।
4. पंजाब
- 1966 में भाषाई आधार पर पंजाब का पुनर्गठन हुआ — पंजाबी भाषी पंजाब और हिंदी भाषी हरियाणा बने।
- अकाली दल — सिखों का राजनीतिक दल; 1967 और 1977 में गठबंधन सरकारें बनाईं।
- आनंदपुर साहिब प्रस्ताव (1973): संघीय ढाँचे को मज़बूत करने, राज्यों को अधिक स्वायत्तता, और सिख "क़ौम" की पहचान व आकांक्षाओं पर ज़ोर; कुछ लोगों ने इसकी अलगाववादी व्याख्या भी की।
- हिंसा का चक्र: 1980 के दशक में उग्रवादी समूहों ने हिंसा का रास्ता अपनाया और अलग "खालिस्तान" की माँग की; उग्रवादियों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बनाया।
- ऑपरेशन ब्लू स्टार (जून 1984): स्वर्ण मंदिर से उग्रवादियों को निकालने के लिए सैन्य कार्यवाही; उग्रवादियों का सफ़ाया हुआ, पर पवित्र स्थल को क्षति पहुँचने से सिख समुदाय की भावनाएँ गहराई से आहत हुईं।
- 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके अंगरक्षकों ने की; इसके बाद दिल्ली और उत्तर भारत के कई भागों में सिख-विरोधी हिंसा हुई, जिसमें हज़ारों सिख मारे गए।
- राजीव गांधी-लोंगोवाल समझौता (जुलाई 1985): प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच — चंडीगढ़ पंजाब को सौंपने, पंजाब-हरियाणा सीमा विवाद के लिए आयोग, रावी-ब्यास जल बँटवारे के लिए न्यायाधिकरण, और उग्रवाद से प्रभावित लोगों को मुआवज़े पर सहमति। पर कुछ समय बाद लोंगोवाल की हत्या कर दी गई और हिंसा जारी रही।
- शांति की बहाली: 1990 के दशक के मध्य तक उग्रवाद समाप्त हुआ; 1997 में अकाली दल-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी — सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया लौटी।
5. पूर्वोत्तर
पूर्वोत्तर में आज आठ राज्य हैं — असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश ("सात बहनें") और सिक्किम। यह क्षेत्र एक संकरे गलियारे (लगभग 22 किमी चौड़ा "सिलीगुड़ी गलियारा") से शेष भारत से जुड़ा है और इसकी सीमाएँ चीन, म्यांमार, बांग्लादेश, भूटान से लगती हैं। यहाँ की राजनीति के तीन प्रमुख मुद्दे रहे हैं:
| मुद्दा | उदाहरण |
|---|---|
| 1. स्वायत्तता की माँग | स्वतंत्रता के समय असम में कई जनजातियाँ थीं जो असमिया भाषा थोपने के विरुद्ध थीं; अलग राज्यों की माँग पर 1972 तक मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा बने; बोडो, करबी, दिमासा जैसे समूहों को स्वायत्त परिषदें मिलीं (बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद) |
| 2. अलगाववादी आंदोलन | मिज़ो: 1959 के अकाल में असम सरकार की उपेक्षा से असंतोष; लालडेंगा के नेतृत्व में मिज़ो नेशनल फ़्रंट (MNF) का 1966 से सशस्त्र संघर्ष; 1986 में राजीव गांधी-लालडेंगा समझौता; 1987 में मिज़ोरम राज्य बना, लालडेंगा मुख्यमंत्री — आज मिज़ोरम पूर्वोत्तर के सबसे शांत राज्यों में है। नगा: अंगामी ज़ापू फ़िज़ो के नेतृत्व में 1951 से स्वतंत्रता की माँग; 1963 में नगालैंड राज्य बना; पर कुछ समूहों का संघर्ष जारी; 1997 में NSCN (IM) से युद्धविराम, 2015 में "फ़्रेमवर्क समझौता" — समाधान की बातचीत जारी |
| 3. बाहरी लोगों के विरुद्ध आंदोलन | असम आंदोलन (1979-85): ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के नेतृत्व में बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों की पहचान और निष्कासन की माँग; असमिया पहचान, तेल-चाय जैसे संसाधनों के बावजूद गरीबी पर असंतोष; 1985 में राजीव गांधी सरकार के साथ असम समझौता — 25 मार्च 1971 के बाद आए प्रवासियों की पहचान; आंदोलनकारी नेताओं ने असम गण परिषद (AGP) बनाई और 1985 में सत्ता में आए |
6. अन्य क्षेत्रीय अनुभव
- द्रविड़ आंदोलन (तमिलनाडु): ई. वी. रामास्वामी "पेरियार" के नेतृत्व में ब्राह्मणवादी वर्चस्व, जाति-भेद और उत्तर भारत के राजनीतिक-सांस्कृतिक प्रभुत्व के विरुद्ध आंदोलन; DMK (1949, सी. एन. अन्नादुरै) बना; 1965 का हिंदी-विरोधी आंदोलन; 1967 में DMK की सरकार। प्रारंभ में अलग "द्रविड़ नाडु" की माँग थी, पर बाद में DMK ने लोकतांत्रिक राजनीति अपनाकर उसे छोड़ दिया — यह क्षेत्रीय आकांक्षाओं के लोकतांत्रिक समायोजन का उदाहरण है।
- सिक्किम का विलय: स्वतंत्रता के समय सिक्किम भारत का "संरक्षित राज्य" था — राजा (चोग्याल) का शासन, रक्षा व विदेश मामले भारत के पास; 1974 में चुनाव में सिक्किम कांग्रेस की भारी जीत; 1975 में जनमत-संग्रह में भारत में विलय का समर्थन; 36वें संशोधन (1975) से सिक्किम भारत का 22वाँ राज्य बना।
- गोवा की मुक्ति: 1947 के बाद भी गोवा, दमन और दीव पुर्तगाल के उपनिवेश रहे; दिसंबर 1961 में भारतीय सेना ने गोवा को मुक्त कराया; 1967 में जनमत सर्वेक्षण (Opinion Poll) में जनता ने महाराष्ट्र में विलय के बजाय अलग केंद्र-शासित प्रदेश बने रहने का निर्णय दिया; 1987 में गोवा राज्य बना।
7. क्षेत्रीय आकांक्षाओं के सबक
- क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतंत्र का भाग हैं — इन्हें राष्ट्र-विरोधी मानकर दबाने के बजाय समझना चाहिए।
- दमन नहीं, बातचीत — पंजाब, मिज़ोरम, असम में समझौतों से समाधान निकला; मिज़ोरम सबसे सफल उदाहरण है।
- सत्ता में भागीदारी — क्षेत्रीय दलों और समूहों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर निर्णयों में भागीदारी देना आवश्यक है।
- असमान आर्थिक विकास — पिछड़े क्षेत्रों में अन्याय की भावना पैदा होती है; संतुलित विकास ज़रूरी है।
- संवैधानिक लचीलापन — भारतीय संविधान ने अनुच्छेद 371, छठी अनुसूची, नए राज्यों के गठन जैसे प्रावधानों से "असमान संघवाद" द्वारा विविधता को स्थान दिया।
8. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| क्षेत्रीय आकांक्षाएँ | किसी क्षेत्र की स्वायत्तता, पहचान या अलग राज्य की माँग |
| कश्मीरियत | कश्मीर घाटी की साझा, सद्भावपूर्ण सांस्कृतिक पहचान |
| अनुच्छेद 370 | जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा — 2019 में निष्प्रभावी |
| आनंदपुर साहिब प्रस्ताव | 1973 — अकाली दल का स्वायत्तता और संघवाद का प्रस्ताव |
| ऑपरेशन ब्लू स्टार | जून 1984 — स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्यवाही |
| राजीव-लोंगोवाल समझौता | जुलाई 1985 — पंजाब समझौता |
| MNF | मिज़ो नेशनल फ़्रंट — लालडेंगा |
| AASU | ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन — असम आंदोलन |
| असम समझौता | 1985 — विदेशी प्रवासियों की पहचान का समझौता |
| जनमत सर्वेक्षण (गोवा) | 1967 — गोवा ने अलग इकाई बने रहना चुना |
9. मास्टर सारांश तालिका
| क्षेत्र | मुख्य मुद्दा | समाधान / स्थिति |
|---|---|---|
| जम्मू-कश्मीर | विलय 1947, अनु. 370, उग्रवाद 1989 | 2019 में 370 निष्प्रभावी, दो UT; SC ने 2023 में वैध माना; 2024 में चुनाव |
| पंजाब | आनंदपुर साहिब 1973, उग्रवाद, ब्लू स्टार 1984 | राजीव-लोंगोवाल 1985; 1990 के मध्य तक शांति |
| मिज़ोरम | MNF का सशस्त्र संघर्ष (1966 से) | 1986 समझौता, 1987 राज्य — सबसे सफल उदाहरण |
| नगालैंड | फ़िज़ो, स्वतंत्रता की माँग | 1963 राज्य; 1997 युद्धविराम, 2015 फ़्रेमवर्क समझौता |
| असम | बाहरी लोगों के विरुद्ध आंदोलन 1979-85 | असम समझौता 1985, AGP सरकार |
| तमिलनाडु | द्रविड़ आंदोलन, हिंदी-विरोध 1965 | लोकतांत्रिक राजनीति में समायोजन |
| सिक्किम | संरक्षित राज्य | 1975 — 22वाँ राज्य (36वाँ संशोधन) |
| गोवा | पुर्तगाली उपनिवेश | 1961 मुक्ति, 1967 जनमत सर्वेक्षण, 1987 राज्य |
चार्ट — पूर्वोत्तर में राज्यों की संख्या:
10. माइंड मैप
- अनु. 370
- 2019 पुनर्गठन
- आनंदपुर 1973
- समझौता 1985
- मिज़ो, नगा
- असम आंदोलन
- द्रविड़
- सिक्किम, गोवा
- बातचीत
- संतुलित विकास
11. टिप्स और ट्रिक्स
- राजीव गांधी के तीन समझौते "पं-अ-मि": पंजाब 1985, असम 1985, मिज़ोरम 1986।
- पूर्वोत्तर के तीन मुद्दे "स्वा-अ-बा": स्वायत्तता, अलगाववाद, बाहरी लोगों का विरोध।
- "61 गोवा मुक्त, 75 सिक्किम विलय, 87 गोवा-मिज़ोरम राज्य"।
- सिक्किम 1947 में नहीं, 1975 में भारत का राज्य बना।
- गोवा 1961 में मुक्त हुआ, पर राज्य 1987 में बना।
- 2019 के बाद लद्दाख अलग केंद्र-शासित प्रदेश है; उसकी विधानसभा नहीं है।
12. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर
- महाराजा हरि सिंह ने अक्टूबर 1947 में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए।
- शेख़ अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता थे।
- अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी किया गया।
- आनंदपुर साहिब प्रस्ताव 1973 में पारित हुआ।
- ऑपरेशन ब्लू स्टार जून 1984 में हुआ।
- इंदिरा गांधी की हत्या 31 अक्टूबर 1984 को हुई।
- राजीव-लोंगोवाल समझौता जुलाई 1985 में हुआ।
- मिज़ो नेशनल फ़्रंट के नेता लालडेंगा थे।
- मिज़ोरम 1987 में राज्य बना।
- असम समझौता 1985 में हुआ।
- सिक्किम 1975 में भारत का 22वाँ राज्य बना।
- गोवा को दिसंबर 1961 में पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया गया।
13. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
आनंदपुर साहिब प्रस्ताव किस राज्य से संबंधित है?
- असम
- पंजाब
- मिज़ोरम
- तमिलनाडु
उत्तर देखें
1973 में अकाली दल ने पंजाब के लिए अधिक स्वायत्तता और संघवाद को मज़बूत करने का यह प्रस्ताव पारित किया।
उत्तर: (ख) पंजाब
सिक्किम भारत का राज्य कब बना?
- 1947
- 1961
- 1975
- 1987
उत्तर देखें
1975 में जनमत-संग्रह के बाद 36वें संविधान संशोधन से सिक्किम भारत का 22वाँ राज्य बना।
उत्तर: (ग) 1975
"कश्मीरियत" का क्या अर्थ है?
उत्तर देखें
कश्मीरियत कश्मीर घाटी की साझा सांस्कृतिक पहचान है, जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों के बीच सद्भाव, साझा भाषा, संस्कृति और परंपराएँ शामिल हैं। यह धार्मिक भेद से ऊपर उठकर कश्मीरी पहचान पर ज़ोर देती है।
उत्तर: घाटी की साझा, सद्भावपूर्ण सांस्कृतिक पहचान
पूर्वोत्तर की राजनीति के तीन प्रमुख मुद्दे बताइए।
उत्तर देखें
(1) स्वायत्तता की माँग: असम की जनजातियों ने असमिया भाषा थोपने का विरोध किया; 1972 तक मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा बने; बोडो आदि को स्वायत्त परिषदें मिलीं। (2) अलगाववादी आंदोलन: मिज़ो (MNF, लालडेंगा) और नगा (फ़िज़ो) आंदोलन। (3) बाहरी लोगों के विरुद्ध आंदोलन: असम आंदोलन (1979-85) — बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के विरुद्ध, AASU के नेतृत्व में।
उत्तर: स्वायत्तता, अलगाववाद, बाहरी लोगों का विरोध
राजीव गांधी-लोंगोवाल समझौते के प्रमुख प्रावधान बताइए।
उत्तर देखें
जुलाई 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच समझौता हुआ: (1) चंडीगढ़ पंजाब को सौंपा जाएगा; (2) पंजाब-हरियाणा सीमा विवाद सुलझाने के लिए आयोग; (3) रावी-ब्यास नदियों के जल बँटवारे के लिए न्यायाधिकरण; (4) उग्रवाद से प्रभावित लोगों को मुआवज़ा और बेहतर व्यवहार; (5) सशस्त्र बल विशेष शक्तियाँ अधिनियम को हटाने पर विचार। पर लोंगोवाल की हत्या के बाद हिंसा कुछ वर्ष जारी रही; 1990 के दशक के मध्य तक शांति लौटी।
उत्तर: चंडीगढ़, सीमा आयोग, जल न्यायाधिकरण, मुआवज़ा
असम आंदोलन (1979-85) के कारण और परिणाम बताइए।
उत्तर देखें
कारण: (1) बांग्लादेश से बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों के आने से असमिया लोगों में अपनी पहचान, संस्कृति और राजनीतिक प्रभुत्व खोने का डर; (2) तेल, चाय, कोयला जैसे संसाधनों के बावजूद असम की गरीबी और यह भावना कि संसाधनों का लाभ बाहर जा रहा है। आंदोलन: AASU के नेतृत्व में अहिंसक, पर व्यापक आंदोलन; कई बार हिंसा भी हुई। परिणाम: 1985 में राजीव गांधी सरकार के साथ असम समझौता — 25 मार्च 1971 के बाद आए विदेशियों की पहचान और निष्कासन; आंदोलनकारी नेताओं ने असम गण परिषद (AGP) बनाई और 1985 के चुनाव जीतकर सरकार बनाई। प्रवासी समस्या का पूर्ण समाधान आज भी बहस का विषय है।
उत्तर: प्रवासी व पहचान का डर, आर्थिक असंतोष → असम समझौता 1985, AGP सरकार
द्रविड़ आंदोलन क्षेत्रीय आकांक्षाओं के लोकतांत्रिक समायोजन का उदाहरण कैसे है?
उत्तर देखें
पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, जाति-भेद और उत्तर भारत के राजनीतिक-सांस्कृतिक प्रभुत्व का विरोध किया। प्रारंभ में अलग "द्रविड़ नाडु" की माँग भी की गई। पर DMK ने लोकतांत्रिक राजनीति का मार्ग अपनाया — 1965 के हिंदी-विरोधी आंदोलन के बाद केंद्र ने अंग्रेज़ी को सहायक राजभाषा बनाए रखने का आश्वासन दिया, और 1967 में DMK ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई। इसके बाद अलगाव की माँग छोड़ दी गई, और द्रविड़ दल राष्ट्रीय राजनीति में भी भागीदार बने। इस प्रकार बातचीत, भाषा नीति में लचीलापन और सत्ता में भागीदारी से क्षेत्रीय आकांक्षा का समायोजन हुआ।
उत्तर: अलगाव की माँग छोड़कर चुनावी राजनीति; भाषा नीति में लचीलापन
मिज़ोरम को क्षेत्रीय संघर्ष के समाधान का सबसे सफल उदाहरण क्यों माना जाता है?
उत्तर देखें
संघर्ष: 1959 में मिज़ो पहाड़ियों में भीषण अकाल पड़ा, पर असम सरकार की ओर से पर्याप्त सहायता न मिलने से मिज़ो लोगों में गहरा असंतोष पैदा हुआ। लालडेंगा के नेतृत्व में मिज़ो नेशनल फ़्रंट (MNF) ने 1966 से भारत से अलगाव के लिए सशस्त्र संघर्ष छेड़ा; MNF को पाकिस्तान (तब पूर्वी पाकिस्तान) से समर्थन मिला; लगभग 20 वर्ष तक हिंसा चली। समाधान: 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी और लालडेंगा के बीच शांति समझौता हुआ — MNF ने हिंसा छोड़ी, हथियार डाले और भारतीय संविधान को स्वीकार किया; बदले में 1987 में मिज़ोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा और विशेष प्रावधान (अनु. 371G) मिले; लालडेंगा मुख्यमंत्री बने। सफलता के कारण: दोनों पक्षों में बातचीत की इच्छाशक्ति, अलगाववादी नेतृत्व को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल करना, सांस्कृतिक पहचान का सम्मान। आज मिज़ोरम पूर्वोत्तर के सबसे शांत और विकसित राज्यों में है।
उत्तर: 1986 समझौते से उग्रवादी नेतृत्व लोकतंत्र में शामिल; स्थायी शांति
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आंतरिक और बाहरी विवादों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर देखें
बाहरी विवाद: 1947 में पाकिस्तान समर्थित क़बायली हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय किया; पाकिस्तान ने हमेशा कश्मीर पर दावा किया; 1947-48, 1965 और 1999 (कारगिल) में युद्ध हुए; पाकिस्तान के कब्ज़े वाला भाग विवाद का विषय है; 1989 के बाद पाकिस्तान ने उग्रवाद को समर्थन दिया। आंतरिक विवाद: (1) अनुच्छेद 370 के तहत राज्य की स्वायत्तता पर बहस — कुछ लोग अधिक स्वायत्तता चाहते थे, कुछ पूर्ण एकीकरण; (2) केंद्र के हस्तक्षेप के आरोप — 1953 में शेख़ अब्दुल्ला की बर्ख़ास्तगी, 1987 के चुनाव में धाँधली के आरोप; (3) तीनों क्षेत्रों — जम्मू, घाटी, लद्दाख — की अलग आकांक्षाएँ; जम्मू और लद्दाख की उपेक्षा की शिकायत; (4) 1990 में कश्मीरी पंडितों का पलायन। वर्तमान: अगस्त 2019 में अनु. 370 निष्प्रभावी कर राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों में बाँटा गया; सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2023 में इसे वैध माना; 2024 में विधानसभा चुनाव हुए। पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग बनी हुई है।
उत्तर: बाहरी — पाकिस्तान का दावा व उग्रवाद; आंतरिक — स्वायत्तता, केंद्र-राज्य संबंध, क्षेत्रीय असंतुलन
क्षेत्रीय आकांक्षाओं से भारतीय लोकतंत्र ने कौन-से सबक सीखे?
उत्तर देखें
(1) क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतंत्र का स्वाभाविक भाग हैं — विविध समाज में अलग-अलग क्षेत्रों की अलग ज़रूरतें होंगी; इन्हें राष्ट्र-विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। (2) दमन के बजाय बातचीत — पंजाब (1985), असम (1985), मिज़ोरम (1986) के समझौते दिखाते हैं कि लोकतांत्रिक बातचीत से समाधान संभव है; जहाँ केवल बल का प्रयोग हुआ, वहाँ समस्या लंबी चली। (3) सत्ता में भागीदारी — क्षेत्रीय दलों और समूहों को राज्य व केंद्र के निर्णयों में शामिल करना; मिज़ोरम में लालडेंगा का मुख्यमंत्री बनना उदाहरण है। (4) संतुलित आर्थिक विकास — पिछड़ेपन से अन्याय और अलगाव की भावना पनपती है। (5) संवैधानिक लचीलापन — अनु. 371, छठी अनुसूची, नए राज्य; पर राष्ट्रीय एकता और अखंडता से कोई समझौता नहीं — हिंसक अलगाववाद का दृढ़ता से सामना।
उत्तर: लोकतंत्र का भाग, बातचीत, सत्ता में भागीदारी, संतुलित विकास, संवैधानिक लचीलापन
पंजाब संकट (1980 के दशक) के कारण, घटनाक्रम और समाधान का विवरण दीजिए।
उत्तर देखें
कारण: (1) 1966 के पुनर्गठन के बाद भी चंडीगढ़ और नदी-जल के मुद्दे अनसुलझे; (2) 1973 के आनंदपुर साहिब प्रस्ताव में अधिक स्वायत्तता की माँग, जिसकी कुछ लोगों ने अलगाववादी व्याख्या की; (3) अकाली दल और कांग्रेस की प्रतिस्पर्धी राजनीति; (4) उग्रवादी समूहों का उदय और अलग "खालिस्तान" की माँग; बाहरी समर्थन। घटनाक्रम: उग्रवादियों ने स्वर्ण मंदिर को ठिकाना बनाया; जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार से उग्रवादियों को निकाला गया, पर सिख भावनाएँ आहत हुईं; 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या; उसके बाद दिल्ली और अन्य स्थानों पर सिख-विरोधी हिंसा। समाधान: जुलाई 1985 का राजीव-लोंगोवाल समझौता; पर लोंगोवाल की हत्या के बाद हिंसा जारी रही; सुरक्षा बलों की कार्यवाही और जनता के उग्रवाद से मोहभंग से 1990 के दशक के मध्य तक शांति; 1997 के चुनाव में अकाली दल-भाजपा सरकार बनी — सामान्य लोकतांत्रिक राजनीति लौटी।
उत्तर: स्वायत्तता व अनसुलझे मुद्दे → उग्रवाद → ब्लू स्टार, इंदिरा हत्या → 1985 समझौता → 1990 के दशक में शांति
14. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- भारत ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को लोकतंत्र का भाग मानकर समायोजन किया, पर एकता-अखंडता से समझौता नहीं।
- कश्मीर: विलय अक्टूबर 1947; अनु. 370; शेख़ अब्दुल्ला; 1987 धाँधली आरोप; 1989 उग्रवाद; 2019 — 370 निष्प्रभावी, दो UT; SC 2023; 2024 चुनाव।
- पंजाब: आनंदपुर साहिब 1973; ब्लू स्टार जून 1984; इंदिरा हत्या 31 अक्टूबर 1984; राजीव-लोंगोवाल 1985; 1997 सामान्य राजनीति।
- पूर्वोत्तर: स्वायत्तता (1972 मेघालय-मणिपुर-त्रिपुरा), अलगाववाद (मिज़ो — 1986 समझौता, 1987 राज्य; नगा — फ़िज़ो), असम आंदोलन (AASU, 1985 समझौता, AGP)।
- अन्य: द्रविड़ आंदोलन (पेरियार, DMK, हिंदी-विरोध 1965); सिक्किम 1975 (22वाँ राज्य); गोवा 1961 मुक्ति, 1967 जनमत, 1987 राज्य।