1. अध्याय एक नज़र में
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लगभग चार दशकों तक दुनिया दो गुटों में बँटी रही — एक ओर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के नेतृत्व वाला पूँजीवादी गुट, दूसरी ओर सोवियत संघ (USSR) के नेतृत्व वाला साम्यवादी गुट। इसे दो ध्रुवीय (Bipolar) विश्व व्यवस्था कहा गया। 9 नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार गिरी और दिसंबर 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया — इसके साथ ही शीत युद्ध और दो ध्रुवीयता का अंत हुआ। इस अध्याय में हम सोवियत व्यवस्था, उसके विघटन के कारण और परिणाम, उत्तराधिकारी देशों में "शॉक थेरेपी" और भारत-रूस संबंधों को समझेंगे।
- सोवियत प्रणाली की विशेषताएँ और कमियाँ।
- गोर्बाचेव के सुधार और सोवियत संघ का विघटन।
- विघटन के कारण और परिणाम।
- शॉक थेरेपी और उसके प्रभाव; उत्तराधिकारी राज्यों में तनाव।
- भारत और पूर्व-साम्यवादी देश, विशेषकर रूस।
2. सोवियत प्रणाली
1917 की रूसी (बोल्शेविक) क्रांति के बाद 1922 में सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (USSR) बना। यह क्रांति पूँजीवाद के विरोध और समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूर्वी यूरोप के कई देश (पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, हंगरी, पूर्वी जर्मनी, बुल्गारिया, रोमानिया आदि) सोवियत प्रभाव में आए, जिन्हें "दूसरी दुनिया" कहा गया; इनका सैन्य गठबंधन वारसा संधि (1955) था।
| विशेषताएँ (शक्तियाँ) | कमियाँ |
|---|---|
| राज्य-नियंत्रित नियोजित अर्थव्यवस्था; उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व | नौकरशाही का बोझ; नवाचार और उत्पादकता में कमी |
| विशाल ऊर्जा संसाधन (तेल, गैस, लोहा, कोयला), उन्नत मशीनरी और परिवहन | तकनीक में पश्चिम से पिछड़ना, विशेषकर 1970 के बाद |
| सबके लिए न्यूनतम जीवन-स्तर; बेरोज़गारी नगण्य; मुफ़्त शिक्षा और स्वास्थ्य; आवास और बच्चों की देखभाल सब्सिडी पर | उपभोक्ता वस्तुओं की कमी; लंबी कतारें |
| मज़बूत सैन्य शक्ति, परमाणु हथियार, अंतरिक्ष कार्यक्रम | संसाधनों का बड़ा भाग हथियारों की होड़ में ख़र्च |
| एकदलीय शासन — कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण | लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभाव; पार्टी का जनता के प्रति जवाबदेह न होना |
| 15 गणराज्यों का संघ | रूस का प्रभुत्व; अन्य क्षेत्रों के लोगों में उपेक्षा की भावना |
1979 में सोवियत संघ ने अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप किया, जिसने उसकी अर्थव्यवस्था और प्रतिष्ठा को और कमज़ोर किया।
3. गोर्बाचेव और विघटन
मिखाइल गोर्बाचेव 1985 में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने। उन्होंने व्यवस्था में सुधार के लिए दो नीतियाँ अपनाईं:
- पेरेस्त्रोइका (Perestroika) — आर्थिक पुनर्गठन / सुधार।
- ग्लासनोस्त (Glasnost) — खुलापन; अभिव्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता।
गोर्बाचेव ने पश्चिम के साथ संबंध सामान्य किए, हथियारों की होड़ कम करने के समझौते किए और पूर्वी यूरोप के देशों में हस्तक्षेप न करने का निर्णय लिया। परिणामस्वरूप पूर्वी यूरोप में साम्यवादी सरकारें एक-एक कर गिर गईं और 3 अक्टूबर 1990 को जर्मनी का एकीकरण हुआ।
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 1985 | गोर्बाचेव सत्ता में; सुधार शुरू |
| 9 नवंबर 1989 | बर्लिन की दीवार गिरी |
| मार्च 1990 | लिथुआनिया ने स्वतंत्रता की घोषणा की; बाल्टिक गणराज्यों (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) में स्वतंत्रता आंदोलन |
| 3 अक्टूबर 1990 | जर्मनी का एकीकरण |
| अगस्त 1991 | कम्युनिस्ट कट्टरपंथियों का तख़्तापलट का असफल प्रयास; बोरिस येल्तसिन नायक बनकर उभरे |
| दिसंबर 1991 | रूस, यूक्रेन और बेलारूस के नेताओं ने सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की; स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल (CIS) बना; 25 दिसंबर को गोर्बाचेव ने इस्तीफ़ा दिया |
रूस को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य माना गया और उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिली। सोवियत संघ की सभी संधियाँ और प्रतिबद्धताएँ भी रूस ने ग्रहण कीं।
4. विघटन के कारण
- आर्थिक ठहराव: वर्षों तक अर्थव्यवस्था रुकी रही; उपभोक्ता वस्तुओं की भारी कमी; संसाधन हथियारों, उपग्रह राज्यों और अफ़ग़ानिस्तान युद्ध में ख़र्च।
- राजनीतिक कारण: कम्युनिस्ट पार्टी का अलोकतांत्रिक, भ्रष्ट और जनता से कटा शासन; नौकरशाही का प्रभुत्व।
- पश्चिम से तुलना: ग्लासनोस्त के बाद लोगों को पता चला कि पश्चिम कितना आगे निकल चुका है — इससे व्यवस्था पर भरोसा टूटा।
- सुधारों की दोहरी प्रतिक्रिया: एक वर्ग चाहता था कि सुधार तेज़ हों, दूसरा (कम्युनिस्ट पार्टी के कट्टरपंथी) चाहता था कि सुधार रुकें — गोर्बाचेव दोनों का समर्थन खो बैठे।
- राष्ट्रवाद और संप्रभुता की चाह: रूस, बाल्टिक गणराज्यों, यूक्रेन, जॉर्जिया आदि में राष्ट्रवादी भावना और स्वतंत्रता की इच्छा — इसे विघटन का सबसे तात्कालिक कारण माना जाता है।
5. विघटन के परिणाम
- शीत युद्ध का अंत: विचारधाराओं का संघर्ष और हथियारों की होड़ समाप्त हुई; नए संघर्ष के बजाय सहयोग की संभावना बनी।
- शक्ति-संतुलन में बदलाव: दुनिया एक-ध्रुवीय हो गई — अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बना। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनी; विश्व बैंक और IMF शक्तिशाली सलाहकार बने।
- नए देशों का उदय: 15 नए स्वतंत्र देश बने। बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के कई देश यूरोपीय संघ और NATO से जुड़े; मध्य एशियाई देशों ने अपने भौगोलिक महत्त्व का लाभ उठाकर रूस, अमेरिका, चीन सभी से संबंध बनाए।
6. शॉक थेरेपी
साम्यवाद के पतन के बाद रूस, मध्य एशिया और पूर्वी यूरोप के देशों में साम्यवादी अर्थव्यवस्था से पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव का एक विशेष मॉडल अपनाया गया, जिसे "शॉक थेरेपी" कहा गया। इसे विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने प्रोत्साहित किया।
- राज्य की संपत्ति का निजीकरण; सामूहिक खेती की जगह निजी खेती।
- मुक्त व्यापार, मुद्रा की परिवर्तनीयता, पश्चिमी पूँजीवादी देशों से जुड़ाव; पूर्व सोवियत गुट के आपसी व्यापारिक संबंध टूटे।
शॉक थेरेपी के परिणाम
| क्षेत्र | प्रभाव |
|---|---|
| अर्थव्यवस्था | रूस का बड़ा औद्योगिक ढाँचा बहुत कम क़ीमतों पर निजी हाथों में बिका — इसे "इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल" कहा गया; रूबल का भारी अवमूल्यन; मुद्रास्फीति से बचतें नष्ट |
| सामाजिक | सामूहिक खेती की व्यवस्था टूटने से खाद्य असुरक्षा; पुरानी सामाजिक कल्याण व्यवस्था नष्ट; अमीर-गरीब की खाई बढ़ी; नए धनी वर्ग (माफ़िया) का उदय |
| राजनीतिक | लोकतांत्रिक संस्थाएँ जल्दबाज़ी में बनीं; अधिकांश देशों में शक्तिशाली राष्ट्रपति और कमज़ोर संसद; मध्य एशिया में सत्तावादी शासन |
उत्तराधिकारी राज्यों में तनाव: रूस के चेचन्या और दागिस्तान में हिंसक अलगाववादी आंदोलन हुए; ताजिकिस्तान में लगभग 10 वर्ष (2001 तक) गृहयुद्ध चला; अज़रबैजान-आर्मेनिया के बीच नागोर्नो-काराबाख विवाद; जॉर्जिया में भी अलगाववादी संघर्ष। मध्य एशिया के तेल-गैस भंडार ने इसे बाहरी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बना दिया।
7. भारत और पूर्व-साम्यवादी देश
शीत युद्ध के दौरान भारत गुटनिरपेक्ष रहा, पर सोवियत संघ के साथ उसके घनिष्ठ संबंध थे — 1971 की भारत-सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि इसका प्रमाण है।
| क्षेत्र | भारत-सोवियत / भारत-रूस सहयोग |
|---|---|
| आर्थिक | भिलाई, बोकारो, विशाखापत्तनम के इस्पात संयंत्र, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स जैसे सार्वजनिक उपक्रमों में सहायता; विदेशी मुद्रा की कमी के समय रुपये में व्यापार |
| राजनीतिक | कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का समर्थन; 1971 के युद्ध में सहयोग |
| सैन्य | सैन्य उपकरणों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता; संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण |
| सांस्कृतिक | हिंदी फ़िल्में और भारतीय संस्कृति सोवियत संघ में लोकप्रिय; लेखकों-कलाकारों का आदान-प्रदान |
1991 के बाद भारत-रूस संबंध: दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व का समर्थन करते हैं — जिसमें कई शक्ति-केंद्र हों, सामूहिक सुरक्षा हो और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ मज़बूत हों। 2000 में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जिसे बाद में "विशेष और विशेषाधिकार-प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" कहा गया। रूस भारत के लिए रक्षा उपकरण, परमाणु ऊर्जा (कुडनकुलम संयंत्र), तेल-गैस और अंतरिक्ष सहयोग का महत्त्वपूर्ण साझेदार है। दोनों BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के भी सदस्य हैं।
8. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दो ध्रुवीयता (Bipolarity) | दो महाशक्तियों के नेतृत्व में बँटा विश्व |
| शीत युद्ध | USA-USSR के बीच प्रत्यक्ष युद्ध के बिना प्रतिद्वंद्विता (1945-1991) |
| दूसरी दुनिया | सोवियत गुट के पूर्वी यूरोपीय साम्यवादी देश |
| पेरेस्त्रोइका | गोर्बाचेव का आर्थिक पुनर्गठन |
| ग्लासनोस्त | खुलापन; अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता |
| CIS | स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल (दिसंबर 1991) |
| शॉक थेरेपी | साम्यवाद से पूँजीवाद में अचानक, तीव्र परिवर्तन |
| उत्तराधिकारी राज्य | रूस — सोवियत संघ का स्थान लेने वाला देश |
| एक-ध्रुवीयता | एक ही महाशक्ति का प्रभुत्व |
| बहुध्रुवीयता | अनेक शक्ति-केंद्रों वाली विश्व व्यवस्था |
9. मास्टर सारांश तालिका
| पक्ष | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| सोवियत प्रणाली | 1917 क्रांति, 1922 USSR; नियोजित अर्थव्यवस्था, एकदलीय शासन, 15 गणराज्य |
| सुधार | गोर्बाचेव (1985) — पेरेस्त्रोइका, ग्लासनोस्त |
| विघटन | बर्लिन दीवार 9 नवंबर 1989; अगस्त 1991 तख़्तापलट प्रयास; दिसंबर 1991 CIS |
| कारण | आर्थिक ठहराव, पार्टी शासन, पश्चिम से तुलना, सुधारों की दोहरी प्रतिक्रिया, राष्ट्रवाद |
| परिणाम | शीत युद्ध का अंत, एक-ध्रुवीय विश्व, 15 नए देश |
| शॉक थेरेपी | निजीकरण, गराज-सेल, रूबल अवमूल्यन, असमानता |
| भारत-रूस | 1971 संधि; 2000 रणनीतिक साझेदारी; रक्षा, ऊर्जा, BRICS, SCO |
चार्ट — सोवियत संघ के विघटन के बाद:
10. माइंड मैप
- नियोजित अर्थव्यवस्था
- एकदलीय शासन
- पेरेस्त्रोइका
- ग्लासनोस्त
- आर्थिक ठहराव
- राष्ट्रवाद
- एक-ध्रुवीयता
- शॉक थेरेपी
- 1971 संधि
- रणनीतिक साझेदारी
11. टिप्स और ट्रिक्स
- पेरेस्त्रोइका = पुनर्गठन (P-P), ग्लासनोस्त = खुलापन (G-ग्लास जैसा पारदर्शी)।
- क्रम "89-90-91": दीवार गिरी (1989) → जर्मनी एक (1990) → USSR टूटा (1991)।
- CIS बनाने वाले तीन देश "रू-यू-बे": रूस, यूक्रेन, बेलारूस।
- सोवियत संघ 1917 में नहीं, 1922 में बना (क्रांति 1917 में हुई)।
- गोर्बाचेव ने विघटन की योजना नहीं बनाई थी; वे सुधार चाहते थे।
- "गराज-सेल" रूसी उद्योगों की सस्ती बिक्री को कहा गया, किसी सामान्य बाज़ार को नहीं।
12. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर
- रूसी क्रांति 1917 में हुई।
- सोवियत संघ 1922 में बना।
- वारसा संधि 1955 में हुई।
- गोर्बाचेव 1985 में सत्ता में आए।
- बर्लिन की दीवार 9 नवंबर 1989 को गिरी।
- जर्मनी का एकीकरण 3 अक्टूबर 1990 को हुआ।
- सोवियत संघ का विघटन दिसंबर 1991 में हुआ।
- बोरिस येल्तसिन रूस के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति बने।
- शॉक थेरेपी को विश्व बैंक और IMF ने प्रोत्साहित किया।
- ताजिकिस्तान में गृहयुद्ध 2001 तक चला।
- भारत-सोवियत मैत्री संधि 1971 में हुई।
- भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी 2000 में घोषित हुई।
13. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
बर्लिन की दीवार कब गिरी?
- 1985
- 1989
- 1990
- 1991
उत्तर देखें
9 नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार गिरी, जो शीत युद्ध के अंत का प्रतीक बनी; 1990 में जर्मनी का एकीकरण हुआ।
उत्तर: (ख) 1989
"ग्लासनोस्त" का क्या अर्थ है?
- पुनर्गठन
- खुलापन
- निजीकरण
- नियोजन
उत्तर देखें
ग्लासनोस्त का अर्थ खुलापन है — गोर्बाचेव ने अभिव्यक्ति और सूचना की अधिक स्वतंत्रता दी; पुनर्गठन पेरेस्त्रोइका है।
उत्तर: (ख) खुलापन
शॉक थेरेपी क्या थी?
उत्तर देखें
सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस, मध्य एशिया और पूर्वी यूरोप के देशों में साम्यवादी अर्थव्यवस्था से पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में अचानक और तीव्र परिवर्तन के मॉडल को शॉक थेरेपी कहा गया। इसमें निजीकरण, मुक्त व्यापार और पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं से जुड़ाव शामिल था; इसे विश्व बैंक और IMF ने प्रोत्साहित किया।
उत्तर: साम्यवाद से पूँजीवाद में अचानक परिवर्तन का मॉडल
सोवियत प्रणाली की दो विशेषताएँ और दो कमियाँ बताइए।
उत्तर देखें
विशेषताएँ: (1) सबके लिए न्यूनतम जीवन-स्तर — मुफ़्त शिक्षा-स्वास्थ्य, बेरोज़गारी नगण्य; (2) विशाल ऊर्जा संसाधन, उन्नत उद्योग और मज़बूत सैन्य-अंतरिक्ष क्षमता। कमियाँ: (1) नौकरशाही और सत्तावादी एकदलीय शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभाव; (2) तकनीक और उपभोक्ता वस्तुओं में पश्चिम से पिछड़ना, संसाधनों का बड़ा भाग हथियारों पर ख़र्च।
उत्तर: सामाजिक सुरक्षा व औद्योगिक शक्ति; सत्तावाद व आर्थिक ठहराव
सोवियत संघ के विघटन के परिणाम बताइए।
उत्तर देखें
(1) शीत युद्ध और हथियारों की होड़ का अंत; (2) विश्व एक-ध्रुवीय बना — अमेरिका एकमात्र महाशक्ति; पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का वैश्विक प्रसार; विश्व बैंक-IMF का प्रभाव बढ़ा; (3) 15 नए स्वतंत्र देशों का उदय — बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के देश यूरोपीय संघ व NATO से जुड़े; मध्य एशिया का सामरिक महत्त्व बढ़ा।
उत्तर: शीत युद्ध का अंत, एक-ध्रुवीयता, नए देश
"इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल" से क्या तात्पर्य है?
उत्तर देखें
शॉक थेरेपी के दौरान रूस के विशाल सरकारी उद्योगों और संपत्तियों का जल्दबाज़ी में निजीकरण हुआ। ये बहुत कम क़ीमतों पर बिके और अधिकतर कुछ प्रभावशाली लोगों के हाथ में चले गए; आम नागरिकों को जो शेयर-वाउचर मिले, वे भी उन्होंने कालाबाज़ारियों को सस्ते में बेच दिए। राष्ट्रीय संपत्ति की इस सस्ती बिक्री को "इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल" कहा गया।
उत्तर: रूसी राष्ट्रीय संपत्ति की सस्ती, जल्दबाज़ी में बिक्री
शीत युद्ध के दौरान भारत-सोवियत संबंधों के आर्थिक और सैन्य पक्ष बताइए।
उत्तर देखें
आर्थिक: सोवियत संघ ने भिलाई, बोकारो, विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्रों और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स जैसे सार्वजनिक उपक्रमों में तकनीकी और वित्तीय सहायता दी; विदेशी मुद्रा की कमी के समय रुपये में व्यापार की सुविधा दी। सैन्य: सोवियत संघ भारत के सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा स्रोत था; उसने संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण भी किया। 1971 की मैत्री संधि से राजनीतिक-सामरिक सहयोग और मज़बूत हुआ।
उत्तर: इस्पात संयंत्र, रुपये में व्यापार; हथियार व तकनीक हस्तांतरण
सोवियत संघ के विघटन के कारणों का विश्लेषण कीजिए। आपके विचार में सबसे महत्त्वपूर्ण कारण कौन-सा था?
उत्तर देखें
(1) आर्थिक ठहराव: उपभोक्ता वस्तुओं की कमी, तकनीकी पिछड़ापन; संसाधन हथियारों, उपग्रह राज्यों और अफ़ग़ानिस्तान युद्ध (1979) में ख़र्च। (2) राजनीतिक: कम्युनिस्ट पार्टी का अलोकतांत्रिक, भ्रष्ट और जनता से कटा शासन। (3) पश्चिम से तुलना: ग्लासनोस्त से लोगों को अपने पिछड़ेपन का पता चला। (4) सुधारों की दोहरी प्रतिक्रिया: सुधारवादी अधिक चाहते थे, कट्टरपंथी विरोधी थे — गोर्बाचेव दोनों ओर से अलग-थलग। (5) राष्ट्रवाद: रूस, बाल्टिक गणराज्यों, यूक्रेन, जॉर्जिया आदि में संप्रभुता की चाह। आर्थिक-राजनीतिक कमज़ोरी गहरे कारण थे, पर विघटन का सबसे तात्कालिक और निर्णायक कारण राष्ट्रवाद और गणराज्यों की संप्रभुता की इच्छा थी — जब रूस सहित गणराज्यों ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया, तो संघ बच नहीं सका।
उत्तर: पाँच कारण; तात्कालिक निर्णायक कारण — राष्ट्रवाद व संप्रभुता की चाह
शॉक थेरेपी के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिणामों का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर देखें
आर्थिक: राष्ट्रीय संपत्ति का सस्ता निजीकरण ("गराज-सेल"); रूबल का भारी अवमूल्यन, मुद्रास्फीति से लोगों की बचतें नष्ट; पुराने व्यापारिक संबंध टूटने से उत्पादन गिरा। सामाजिक: सामूहिक खेती टूटने से खाद्य असुरक्षा; पुरानी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नष्ट, बेरोज़गारी और गरीबी; अमीर-गरीब की खाई बढ़ी, माफ़िया वर्ग उभरा। राजनीतिक: लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण को प्राथमिकता नहीं मिली; संविधान जल्दबाज़ी में बने; अधिकांश देशों में राष्ट्रपति शक्तिशाली और संसद कमज़ोर; मध्य एशिया में सत्तावादी शासन। मूल्यांकन: धीरे-धीरे, सामाजिक सुरक्षा के साथ परिवर्तन बेहतर होता; बाद में तेल-गैस निर्यात से रूस की अर्थव्यवस्था कुछ संभली।
उत्तर: आर्थिक संकट, सामाजिक असमानता, कमज़ोर लोकतंत्र
सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत-रूस संबंधों की प्रकृति स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखें
विघटन के बाद भी रूस भारत का विश्वसनीय मित्र बना रहा। (1) साझा दृष्टि: दोनों बहुध्रुवीय विश्व का समर्थन करते हैं — जिसमें कई शक्ति-केंद्र, सामूहिक सुरक्षा, क्षेत्रीयता, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का बातचीत से समाधान और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की मज़बूती हो। (2) रणनीतिक साझेदारी: 2000 में घोषित, बाद में "विशेष और विशेषाधिकार-प्राप्त" बनी; नियमित वार्षिक शिखर सम्मेलन। (3) रक्षा: रूस भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार — संयुक्त उत्पादन (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल)। (4) ऊर्जा: कुडनकुलम परमाणु संयंत्र, तेल-गैस सहयोग। (5) बहुपक्षीय मंच: BRICS, SCO। रूस कश्मीर, ऊर्जा और आतंकवाद के मुद्दों पर भारत का समर्थन करता रहा है; भारत रूस के लिए बड़ा हथियार बाज़ार है। इस प्रकार संबंध पारस्परिक हितों पर आधारित हैं।
उत्तर: बहुध्रुवीयता की साझा दृष्टि; रक्षा, ऊर्जा, बहुपक्षीय सहयोग
गोर्बाचेव के सुधार सोवियत संघ को बचाने के बजाय उसके विघटन का कारण कैसे बने?
उत्तर देखें
गोर्बाचेव ने अर्थव्यवस्था सुधारने (पेरेस्त्रोइका) और व्यवस्था को खुला बनाने (ग्लासनोस्त) का प्रयास किया। पर (1) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलते ही लोगों ने कम्युनिस्ट शासन की विफलताओं और पश्चिम से पिछड़ने पर खुलकर असंतोष जताया; (2) पूर्वी यूरोप में हस्तक्षेप न करने के निर्णय से वहाँ की साम्यवादी सरकारें गिर गईं; (3) गणराज्यों में दबा हुआ राष्ट्रवाद उभर आया; (4) आर्थिक सुधार आधे-अधूरे रहे, जिससे अपेक्षाएँ पूरी नहीं हुईं; (5) कट्टरपंथियों के अगस्त 1991 के असफल तख़्तापलट ने येल्तसिन को शक्तिशाली और गोर्बाचेव को कमज़ोर कर दिया। इस प्रकार सुधारों ने जो प्रक्रिया शुरू की, उसे नियंत्रित नहीं किया जा सका।
उत्तर: खुलेपन से असंतोष व राष्ट्रवाद उभरा; अधूरे सुधार; असफल तख़्तापलट
14. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- सोवियत प्रणाली: 1917 क्रांति, 1922 USSR, नियोजित अर्थव्यवस्था, एकदलीय शासन; सामाजिक सुरक्षा पर सत्तावाद और ठहराव।
- गोर्बाचेव (1985): पेरेस्त्रोइका, ग्लासनोस्त; बर्लिन दीवार 1989, जर्मनी एकीकरण 1990, विघटन व CIS दिसंबर 1991।
- कारण: आर्थिक ठहराव, पार्टी शासन, पश्चिम से तुलना, सुधारों पर दोहरी प्रतिक्रिया, राष्ट्रवाद।
- परिणाम: शीत युद्ध का अंत, एक-ध्रुवीयता, 15 नए देश; शॉक थेरेपी — गराज-सेल, असमानता; चेचन्या, ताजिकिस्तान संघर्ष।
- भारत-रूस: 1971 संधि, 2000 रणनीतिक साझेदारी, बहुध्रुवीयता, रक्षा-ऊर्जा, BRICS-SCO।