Class 12 Political Science · Chapter 2 · समकालीन विश्व राजनीति

सत्ता के समकालीन केंद्र

यूरोपीय संघ, आसियान (ASEAN), चीन का आर्थिक उदय, जापान और भारत के साथ इनके संबंध।

NCERT समकालीन विश्व राजनीति + स्वतंत्र भारत में राजनीतिCBSE Class 12 13 min read

1. अध्याय एक नज़र में

सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बना, पर दुनिया में कई ऐसे शक्ति-केंद्र (Centres of Power) उभरे जो आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से अमेरिका के प्रभुत्व को संतुलित करते हैं। इनमें प्रमुख हैं — यूरोपीय संघ (EU), दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (ASEAN), चीन, और एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाएँ जापान और दक्षिण कोरिया। इस अध्याय में हम इन शक्ति-केंद्रों का उदय, विशेषताएँ और भारत से उनके संबंध समझेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • यूरोपीय संघ का विकास और उसकी शक्ति के स्रोत।
  • आसियान, "आसियान शैली" और आसियान समुदाय।
  • चीनी अर्थव्यवस्था का उदय और भारत-चीन संबंध।
  • जापान और दक्षिण कोरिया — नए शक्ति-केंद्र।

2. यूरोपीय संघ (European Union)

द्वितीय विश्व युद्ध ने यूरोप को तबाह कर दिया था। युद्ध के बाद यूरोप के देशों ने महसूस किया कि आपसी सहयोग से ही शांति और समृद्धि संभव है। अमेरिका ने मार्शल योजना के तहत पुनर्निर्माण में सहायता दी।

वर्षघटना
1948मार्शल योजना के तहत यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन (OEEC)
1949यूरोपीय परिषद (Council of Europe) — राजनीतिक सहयोग; NATO की स्थापना
1957रोम की संधि — 6 देशों ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) बनाया
1979यूरोपीय संसद के पहले प्रत्यक्ष चुनाव
1992मास्ट्रिख्ट संधि — यूरोपीय संघ की स्थापना; साझा विदेश-सुरक्षा नीति, आंतरिक मामलों में सहयोग, एकल मुद्रा की नींव
1999 / 2002यूरो मुद्रा शुरू (1999 में खातों में, 2002 में नोट-सिक्के)
2004-2007पूर्व-साम्यवादी पूर्वी यूरोपीय देश भी शामिल
2020ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग ("ब्रेग्ज़िट"); सदस्य 27 रह गए

यूरोपीय संघ की शक्ति के स्रोत

  • आर्थिक: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक; यूरो डॉलर के प्रभुत्व के लिए चुनौती; विश्व व्यापार में बड़ा हिस्सा; WTO में प्रभावशाली।
  • राजनीतिक-कूटनीतिक: सदस्य फ़्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है; कई सदस्य अस्थायी सदस्य बनते रहते हैं। EU ने अमेरिका की कई नीतियों से अलग रुख़ अपनाया है, जैसे जलवायु परिवर्तन पर।
  • सैन्य: सदस्य देशों की संयुक्त सेनाएँ बड़ी हैं; फ़्रांस परमाणु शक्ति है; अंतरिक्ष और संचार तकनीक में भी अग्रणी।
  • सीमाएँ: सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीतियाँ हैं; कई मुद्दों पर एकमत नहीं; कुछ देशों में "यूरो-संशयवाद" (Euroscepticism) — जैसे ब्रेग्ज़िट।

3. आसियान (ASEAN)

दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (Association of Southeast Asian Nations) की स्थापना 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक घोषणा से हुई। संस्थापक पाँच देश थे — इंडोनेशिया, मलेशिया, फ़िलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड। बाद में ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया जुड़े, और अक्टूबर 2025 में तिमोर-लेस्ते 11वाँ सदस्य बना।

  • उद्देश्य: आर्थिक विकास तेज़ करना, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रगति, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता, कानून का शासन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन।
  • "आसियान शैली" (ASEAN Way): अनौपचारिक, टकराव-रहित और सहयोगात्मक बातचीत; एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना; सर्वसम्मति से निर्णय।
  • आसियान समुदाय (2003 में निर्णय, 2015 में घोषित) के तीन स्तंभ: (1) आसियान सुरक्षा समुदाय, (2) आसियान आर्थिक समुदाय, (3) आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय।
  • आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF, 1994): सुरक्षा और विदेश नीति पर संवाद; भारत, चीन, अमेरिका, जापान, रूस आदि भी इसमें भाग लेते हैं।
  • आसियान मुक्त व्यापार क्षेत्र (AFTA) और आसियान निवेश क्षेत्र।
भारत और आसियान

भारत ने 1991 में "पूर्व की ओर देखो" (Look East) नीति अपनाई, जिसे 2014 में "एक्ट ईस्ट" (Act East) नीति में बदला गया। भारत आसियान का संवाद साझेदार है; दोनों के बीच वस्तु व्यापार का मुक्त व्यापार समझौता (2009) हुआ। आसियान की केंद्रीयता भारत की हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) नीति का आधार है।

4. चीनी अर्थव्यवस्था का उदय

1949 में माओ त्से-तुंग के नेतृत्व में साम्यवादी क्रांति के बाद जनवादी गणराज्य चीन (PRC) बना। प्रारंभ में सोवियत मॉडल पर राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था अपनाई गई, जिससे औद्योगिक आधार तो बना पर विकास दर सीमित रही।

चरणप्रमुख कदम
1972अमेरिका से संबंध सुधरे (निक्सन की चीन यात्रा); राजनीतिक और आर्थिक अलगाव ख़त्म
1973प्रधानमंत्री चाऊ एन-लाई ने कृषि, उद्योग, सेना, विज्ञान-प्रौद्योगिकी में "चार आधुनिकीकरण" का प्रस्ताव रखा
1978देंग शियाओपिंग ने "खुले द्वार" (Open Door) नीति और आर्थिक सुधारों की घोषणा की
1982खेती का निजीकरण
1998उद्योगों का निजीकरण तेज़; विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) स्थापित
2001विश्व व्यापार संगठन (WTO) में प्रवेश

चीन ने शॉक थेरेपी के बजाय चरणबद्ध तरीक़े से अर्थव्यवस्था खोली। इससे कृषि और उद्योग दोनों में तेज़ वृद्धि हुई, विदेशी निवेश आया और चीन "दुनिया का कारख़ाना" बना। आज चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चुनौतियाँ: सुधारों का लाभ सबको समान रूप से नहीं मिला — बेरोज़गारी, ग्रामीण-शहरी और तटीय-आंतरिक क्षेत्रों में असमानता, पर्यावरण प्रदूषण और भ्रष्टाचार बढ़े।

5. भारत-चीन संबंध

वर्षघटना
1954पंचशील समझौता; "हिंदी-चीनी भाई-भाई" का नारा
1962सीमा युद्ध — अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख (अक्साई चिन) पर विवाद; संबंधों में गहरी कटुता
1976पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल
1988प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा — सीमा विवाद पर बातचीत और व्यापार-सांस्कृतिक सहयोग का नया दौर
2017डोकलाम (भूटान-चीन-भारत त्रि-संगम) पर गतिरोध
2020पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में झड़प; सीमा पर लंबा तनाव

भारत और चीन के बीच व्यापार बहुत बढ़ा है, पर भारत का व्यापार घाटा बड़ा है। दोनों BRICS और SCO के सदस्य हैं और जलवायु परिवर्तन, WTO जैसे मुद्दों पर कई बार साथ खड़े होते हैं। पर सीमा विवाद, चीन-पाकिस्तान निकटता, हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति और ब्रह्मपुत्र जल जैसे मुद्दों पर अविश्वास बना हुआ है। सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों साथ चलते हैं।

6. जापान और दक्षिण कोरिया

  • जापान: द्वितीय विश्व युद्ध (1945 में हिरोशिमा-नागासाकी पर परमाणु बम) के बाद तेज़ पुनर्निर्माण; सोनी, पैनासोनिक, टोयोटा, होंडा जैसे वैश्विक ब्रांड; प्राकृतिक संसाधन कम, पर तकनीक में अग्रणी। G7 का सदस्य; संयुक्त राष्ट्र के बजट में बड़ा योगदान। संविधान का अनुच्छेद 9 युद्ध को राष्ट्रीय नीति के साधन के रूप में त्यागता है; सैन्य व्यय GDP का छोटा भाग रहा है।
  • दक्षिण कोरिया: 1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद तेज़ विकास — "हान नदी का चमत्कार" (Miracle on the Han River); 1996 में OECD का सदस्य; सैमसंग, LG, ह्युंडई जैसे ब्रांड; शिक्षा, भूमि सुधार और निर्यात-आधारित उद्योग इसके आधार रहे।
  • भारत के दोनों से घनिष्ठ आर्थिक संबंध हैं — जापान भारत में बड़ा निवेशक है (दिल्ली मेट्रो, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना) और क्वाड (Quad) में भारत का साझेदार भी है।
अमेरिका (महाशक्ति) यूरोपीय संघ27 देश, यूरो चीन1978 सुधार आसियान1967, आसियान शैली जापान, द. कोरियातकनीक, निर्यात
शीत युद्ध के बाद के प्रमुख शक्ति-केंद्र (विचार-चित्र)।

7. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
शक्ति-केंद्रआर्थिक, राजनीतिक, सैन्य प्रभाव वाला देश या समूह
मार्शल योजनायुद्धोत्तर यूरोप के पुनर्निर्माण हेतु अमेरिकी सहायता
मास्ट्रिख्ट संधि1992 — यूरोपीय संघ की स्थापना
यूरोयूरोपीय संघ के अनेक देशों की साझा मुद्रा
ब्रेग्ज़िटब्रिटेन का EU से बाहर निकलना (2020)
आसियान शैलीअनौपचारिक, टकराव-रहित, सहयोगात्मक, सर्वसम्मति-आधारित कूटनीति
ARFआसियान क्षेत्रीय मंच (1994) — सुरक्षा संवाद
खुले द्वार की नीतिदेंग शियाओपिंग की 1978 की आर्थिक सुधार नीति
SEZविशेष आर्थिक क्षेत्र — निवेश व निर्यात हेतु रियायती क्षेत्र
एक्ट ईस्टभारत की 2014 से पूर्वी एशिया-आसियान नीति

8. मास्टर सारांश तालिका

शक्ति-केंद्रस्थापना / उदयशक्ति के स्रोतभारत से संबंध
यूरोपीय संघ1957 EEC → 1992 EUविशाल अर्थव्यवस्था, यूरो, फ़्रांस की स्थायी सदस्यताप्रमुख व्यापार-निवेश साझेदार
आसियान8 अगस्त 1967, बैंकॉकआर्थिक विकास, आसियान शैली, ARFLook East (1991) → Act East (2014)
चीन1949 PRC; 1978 सुधारचरणबद्ध उदारीकरण, SEZ, WTO 2001पंचशील 1954, युद्ध 1962, गलवान 2020; सहयोग + प्रतिस्पर्धा
जापानयुद्धोत्तर पुनर्निर्माणतकनीक, G7, अनु. 9निवेश, मेट्रो, क्वाड
दक्षिण कोरिया1953 के बादहान नदी का चमत्कार, OECD 1996व्यापार, तकनीक

चार्ट — यूरोपीय एकीकरण में सदस्य देशों की संख्या:

1957 — EEC के संस्थापक6
2013 — अधिकतम (क्रोएशिया के बाद)28
2020 के बाद — ब्रेग्ज़िट के बाद27

9. माइंड मैप

शक्ति के केंद्र
EU
  • मास्ट्रिख्ट 1992
  • यूरो, ब्रेग्ज़िट
आसियान
  • 1967, 5 संस्थापक
  • 3 स्तंभ
चीन
  • 1978 खुले द्वार
  • WTO 2001
भारत-चीन
  • 1962, 1988
  • गलवान 2020
जापान-कोरिया
  • तकनीक
  • हान चमत्कार

10. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • आसियान के 5 संस्थापक "इं-म-फ़ि-सिं-था": इंडोनेशिया, मलेशिया, फ़िलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड।
  • आसियान समुदाय के 3 स्तंभ "सु-आ-सा": सुरक्षा, आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक।
  • चीन: "49 क्रांति, 78 सुधार, 01 WTO"।
आम गलतियाँ
  • EU 1957 में नहीं बना — 1957 में EEC बना; EU 1992 (मास्ट्रिख्ट) से।
  • भारत आसियान का सदस्य नहीं, संवाद साझेदार है।
  • "खुले द्वार" की नीति माओ ने नहीं, देंग शियाओपिंग ने अपनाई।

11. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • मास्ट्रिख्ट संधि 1992 में हुई।
  • यूरो के नोट-सिक्के 2002 में चलन में आए।
  • ब्रिटेन 2020 में EU से अलग हुआ।
  • आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक में हुई।
  • आसियान क्षेत्रीय मंच 1994 में बना।
  • भारत की Look East नीति 1991 में शुरू हुई।
  • Act East नीति 2014 में आई।
  • चीन में साम्यवादी क्रांति 1949 में हुई।
  • देंग शियाओपिंग ने 1978 में खुले द्वार की नीति अपनाई।
  • चीन 2001 में WTO में शामिल हुआ।
  • भारत-चीन युद्ध 1962 में हुआ।
  • दक्षिण कोरिया 1996 में OECD का सदस्य बना।

12. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

यूरोपीय संघ की स्थापना किस संधि से हुई?

  1. रोम की संधि
  2. मास्ट्रिख्ट संधि
  3. वर्साय की संधि
  4. लिस्बन संधि
उत्तर देखें

1992 की मास्ट्रिख्ट संधि से यूरोपीय संघ बना; 1957 की रोम संधि से EEC बना था।

उत्तर: (ख) मास्ट्रिख्ट संधि

प्र2आसान

चीन में "खुले द्वार" की नीति किसने शुरू की?

  1. माओ त्से-तुंग
  2. चाऊ एन-लाई
  3. देंग शियाओपिंग
  4. शी जिनपिंग
उत्तर देखें

देंग शियाओपिंग ने 1978 में खुले द्वार की नीति और आर्थिक सुधारों की घोषणा की।

उत्तर: (ग) देंग शियाओपिंग

प्र3आसान

"आसियान शैली" क्या है?

उत्तर देखें

आसियान शैली अनौपचारिक, टकराव-रहित और सहयोगात्मक बातचीत का तरीक़ा है, जिसमें सदस्य देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हैं, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते और सर्वसम्मति से निर्णय लेते हैं।

उत्तर: अनौपचारिक, टकराव-रहित, सर्वसम्मति-आधारित कूटनीति

प्र4मध्यम

यूरोपीय संघ को एक शक्तिशाली क्षेत्रीय संगठन क्यों माना जाता है?

उत्तर देखें

(1) आर्थिक: विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक; यूरो डॉलर को चुनौती देता है; विश्व व्यापार में बड़ा हिस्सा और WTO में प्रभाव। (2) राजनीतिक-कूटनीतिक: फ़्रांस सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य; EU कई मुद्दों पर अमेरिका से स्वतंत्र रुख़ अपनाता है, जैसे जलवायु परिवर्तन। (3) सैन्य-तकनीकी: सदस्यों की संयुक्त सेनाएँ बड़ी; फ़्रांस परमाणु शक्ति; अंतरिक्ष और संचार तकनीक में अग्रणी।

उत्तर: आर्थिक, कूटनीतिक और सैन्य-तकनीकी शक्ति

प्र5मध्यम

आसियान समुदाय के तीन स्तंभ बताइए।

उत्तर देखें

(1) आसियान सुरक्षा समुदाय — क्षेत्रीय विवादों को सैन्य टकराव तक न जाने देना; (2) आसियान आर्थिक समुदाय — साझा बाज़ार और उत्पादन आधार, क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास; (3) आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय — लोगों के बीच संपर्क, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग।

उत्तर: सुरक्षा, आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक

प्र6मध्यम

चीन ने शॉक थेरेपी के बजाय कौन-सा तरीक़ा अपनाया? उसके क्या लाभ हुए?

उत्तर देखें

चीन ने अर्थव्यवस्था को एक झटके में नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीक़े से खोला — पहले 1982 में कृषि का निजीकरण, फिर उद्योगों का; SEZ बनाए; और 2001 में WTO में प्रवेश। साम्यवादी पार्टी का राजनीतिक नियंत्रण बना रहा। लाभ: कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय बढ़ी, जिससे उद्योगों के लिए बचत और बाज़ार मिला; विदेशी निवेश आया; निर्यात बढ़ा; चीन तेज़ी से विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना।

उत्तर: चरणबद्ध उदारीकरण; तेज़ वृद्धि, निवेश, निर्यात

प्र7मध्यम

भारत की "एक्ट ईस्ट" नीति का महत्त्व बताइए।

उत्तर देखें

1991 की "लुक ईस्ट" नीति मुख्यतः आर्थिक जुड़ाव पर केंद्रित थी; 2014 की "एक्ट ईस्ट" नीति ने इसे व्यापार, निवेश, संपर्क (कनेक्टिविटी), सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों तक बढ़ाया। इसमें आसियान केंद्रीय है। इससे पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने (जैसे भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग), समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाने में मदद मिलती है।

उत्तर: आसियान व पूर्वी एशिया से व्यापक आर्थिक-सामरिक जुड़ाव

प्र8कठिन

भारत-चीन संबंधों में सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर देखें

सहयोग: 1954 का पंचशील; 1988 में राजीव गांधी की यात्रा के बाद संबंधों का सामान्यीकरण; तेज़ी से बढ़ा द्विपक्षीय व्यापार; BRICS, SCO, जलवायु वार्ता और WTO में विकासशील देशों के हितों पर साझा रुख़। प्रतिस्पर्धा / तनाव: 1962 का युद्ध और अनसुलझा सीमा विवाद; 2017 डोकलाम और 2020 गलवान की घटनाएँ; चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (जो पाक-अधिकृत कश्मीर से गुज़रता है); हिंद महासागर और दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती उपस्थिति; भारत का बड़ा व्यापार घाटा; ब्रह्मपुत्र जल मुद्दा। निष्कर्ष: दोनों बड़े पड़ोसी हैं; सीमा पर शांति, बातचीत और आर्थिक संतुलन से ही स्थिर संबंध संभव हैं।

उत्तर: पंचशील, व्यापार, बहुपक्षीय सहयोग; सीमा विवाद, CPEC, व्यापार घाटा

प्र9कठिन

क्या यूरोपीय संघ अमेरिका के लिए वास्तविक चुनौती है? तर्क दीजिए।

उत्तर देखें

हाँ, कुछ हद तक: EU की संयुक्त अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है; यूरो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में डॉलर को चुनौती देता है; व्यापार नियमों और WTO में EU का प्रभाव अमेरिका के बराबर है; जलवायु परिवर्तन और डेटा-निजता जैसे मुद्दों पर EU वैश्विक मानक तय करता है। पर सीमाएँ: सदस्य देशों की अपनी-अपनी विदेश और रक्षा नीतियाँ; सैन्य मामलों में अधिकांश सदस्य NATO के माध्यम से अमेरिका पर निर्भर; यूरो-संशयवाद और ब्रेग्ज़िट जैसी आंतरिक दरारें; कई मुद्दों पर सर्वसम्मति न बनना। निष्कर्ष: EU आर्थिक-कूटनीतिक रूप से एक सशक्त शक्ति-केंद्र है, पर सैन्य रूप से अमेरिका का प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि उसका सहयोगी है।

उत्तर: आर्थिक-कूटनीतिक चुनौती; सैन्य रूप से सहयोगी, आंतरिक मतभेद सीमा

प्र10कठिन

आसियान की सफलता के कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखें

(1) आसियान शैली: टकराव-रहित, सर्वसम्मति-आधारित कूटनीति ने विविध राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देशों को साथ रखा। (2) आर्थिक फोकस: मुक्त व्यापार क्षेत्र, निवेश क्षेत्र और निर्यात-आधारित विकास से क्षेत्र एशिया के सबसे तेज़ बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हुआ। (3) संवाद के मंच: ARF और आसियान-प्लस बैठकों में अमेरिका, चीन, भारत, जापान, रूस सब शामिल — आसियान "केंद्रीय मंच" बना। (4) संप्रभुता का सम्मान से छोटे देशों में भरोसा बना। (5) आसियान समुदाय के तीन स्तंभों से सहयोग बहुआयामी हुआ। चुनौती: म्यांमार संकट और दक्षिण चीन सागर विवाद में "अहस्तक्षेप" की नीति की सीमाएँ भी दिखी हैं।

उत्तर: आसियान शैली, आर्थिक एकीकरण, संवाद मंच, संप्रभुता का सम्मान

प्र11कठिन

चीनी अर्थव्यवस्था की प्रगति के नकारात्मक पक्ष क्या रहे?

उत्तर देखें

(1) असमानता: सुधारों का लाभ तटीय और शहरी क्षेत्रों को अधिक मिला; आंतरिक ग्रामीण क्षेत्र पीछे रहे; अमीर-गरीब की खाई बढ़ी। (2) बेरोज़गारी: सरकारी उद्योगों के निजीकरण से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियाँ गईं। (3) पर्यावरण: तेज़ औद्योगीकरण से वायु-जल प्रदूषण। (4) भ्रष्टाचार और (5) राजनीतिक स्वतंत्रता का अभाव — आर्थिक खुलापन तो आया, पर एकदलीय शासन बना रहा। (6) प्रवासी मज़दूरों और महिलाओं के कार्य-स्थितियों की समस्याएँ। ये दिखाते हैं कि तेज़ आर्थिक वृद्धि अपने आप में समावेशी विकास की गारंटी नहीं है।

उत्तर: क्षेत्रीय असमानता, बेरोज़गारी, प्रदूषण, भ्रष्टाचार, राजनीतिक नियंत्रण

13. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • EU: मार्शल योजना → 1957 EEC (6 देश) → 1992 मास्ट्रिख्ट (EU) → यूरो (2002) → ब्रेग्ज़िट (2020), 27 सदस्य; आर्थिक-कूटनीतिक शक्ति।
  • आसियान: 8 अगस्त 1967 बैंकॉक, 5 संस्थापक; आसियान शैली; 3 स्तंभ; ARF 1994; भारत — Look East 1991, Act East 2014।
  • चीन: 1949 PRC; 1978 देंग — खुले द्वार; चरणबद्ध सुधार, SEZ, WTO 2001; असमानता, प्रदूषण।
  • भारत-चीन: पंचशील 1954, युद्ध 1962, राजीव यात्रा 1988, डोकलाम 2017, गलवान 2020 — सहयोग + प्रतिस्पर्धा।
  • जापान (तकनीक, G7, अनु. 9) और दक्षिण कोरिया (हान नदी का चमत्कार, OECD 1996)।