1. अध्याय एक नज़र में
सामान्य हिंदी पेपर में व्याकरण के शब्द भेद वाले प्रश्न सबसे अधिक संख्या में होते हैं — लगभग 20 से 25 प्रश्न। BPSSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम में साफ़ लिखा है: अव्यय, निपात, समास, लिंग, वचन, कारक, सर्वनाम, क्रिया, ध्वनि, शब्द एवं पद, संज्ञा, विशेषण, क्रिया विशेषण, संधि। इस अध्याय में इनमें से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, अव्यय (क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक), निपात, लिंग, वचन, कारक, काल और वाच्य को सरल उदाहरणों के साथ पढ़ेंगे।
शब्द — वर्णों का सार्थक समूह जो स्वतंत्र हो (जैसे "राम", "पुस्तक")। पद — जब वही शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर व्याकरण के नियमों (कारक, लिंग, वचन, काल) से बँध जाता है (जैसे "राम ने पुस्तक पढ़ी" में "राम ने" पद है)।
उत्पत्ति के आधार पर शब्द चार प्रकार के होते हैं — तत्सम (संस्कृत से ज्यों के त्यों: अग्नि, सूर्य, क्षेत्र), तद्भव (संस्कृत से बदले रूप: आग, सूरज, खेत), देशज (स्थानीय: लोटा, पगड़ी, खिड़की), विदेशज (विदेशी भाषा से: स्कूल, अदालत, कुर्सी)। रचना के आधार पर — रूढ़ (जिनके खंड सार्थक न हों: घर, पानी), यौगिक (खंड सार्थक: विद्यालय, हिमालय), योगरूढ़ (यौगिक होकर विशेष अर्थ में रूढ़: पंकज = कमल, लंबोदर = गणेश, दशानन = रावण)।
2. संज्ञा
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिवाचक | किसी विशेष व्यक्ति, स्थान, वस्तु का नाम | पटना, गंगा, महात्मा गांधी, रामायण, हिमालय |
| जातिवाचक | पूरी जाति या वर्ग का बोध | लड़का, नदी, शहर, पहाड़, गाय, पुस्तक |
| भाववाचक | गुण, दशा, भाव का नाम (जिसे केवल अनुभव किया जा सके) | मिठास, बचपन, ईमानदारी, क्रोध, सुंदरता, बुढ़ापा |
| समूहवाचक | समूह का बोध | सेना, कक्षा, भीड़, परिवार, गुच्छा |
| द्रव्यवाचक | नापी-तौली जाने वाली वस्तु | पानी, सोना, दूध, तेल, गेहूँ |
- भाववाचक संज्ञा बनाना — जातिवाचक से: मनुष्य → मनुष्यता, बच्चा → बचपन, मित्र → मित्रता, दास → दासता; सर्वनाम से: अपना → अपनापन, मम → ममता, निज → निजत्व; विशेषण से: मीठा → मिठास, सुंदर → सुंदरता, बूढ़ा → बुढ़ापा, चतुर → चतुराई; क्रिया से: लिखना → लिखावट, हँसना → हँसी, पढ़ना → पढ़ाई, चढ़ना → चढ़ाई; अव्यय से: दूर → दूरी, निकट → निकटता।
- संज्ञा के रूप परिवर्तन — व्यक्तिवाचक संज्ञा जब गुण बताए तो जातिवाचक हो जाती है: "वह कलियुग का हरिश्चंद्र है" (सत्यवादी के अर्थ में)। जातिवाचक संज्ञा जब किसी एक के लिए रूढ़ हो जाए तो व्यक्तिवाचक: "गांधीजी को बापू कहते हैं", "पंडितजी (नेहरू)"।
3. सर्वनाम
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम हैं। हिंदी में 11 मूल सर्वनाम हैं — मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ।
| भेद | उदाहरण | विशेष |
|---|---|---|
| पुरुषवाचक | उत्तम पुरुष — मैं, हम; मध्यम — तू, तुम, आप; अन्य — वह, वे, यह | बोलने वाला, सुनने वाला, जिसके बारे में बात |
| निजवाचक | आप, स्वयं, खुद, अपने आप | "मैं स्वयं आऊँगा" — कर्ता के लिए |
| निश्चयवाचक | यह, वह, ये, वे | निश्चित संकेत |
| अनिश्चयवाचक | कोई (प्राणी के लिए), कुछ (वस्तु के लिए) | "कोई आया है", "कुछ खा लो" |
| संबंधवाचक | जो-सो, जिसकी-उसकी | दो वाक्यों को जोड़ते हैं |
| प्रश्नवाचक | कौन (प्राणी), क्या (वस्तु) | प्रश्न के लिए |
"यह मेरा घर है" — "यह" सर्वनाम (संज्ञा के स्थान पर)। "यह घर मेरा है" — "यह" सार्वनामिक विशेषण (संज्ञा "घर" से पहले आकर उसकी विशेषता बता रहा है)। "आप" आदरसूचक हो तो पुरुषवाचक (मध्यम पुरुष), "स्वयं" के अर्थ में हो तो निजवाचक।
4. विशेषण
संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण हैं; जिसकी विशेषता बताई जाए वह विशेष्य। "काली गाय" — "काली" विशेषण, "गाय" विशेष्य।
- गुणवाचक — गुण, दोष, रंग, आकार, दशा, स्थान, काल: अच्छा, बुरा, लाल, लंबा, रोगी, बिहारी, पुराना।
- संख्यावाचक — निश्चित (दो, पहला, दुगुना, चारों) और अनिश्चित (कुछ लोग, कई, अनेक)।
- परिमाणवाचक — नाप-तौल: निश्चित (दो किलो चीनी, पाँच लीटर दूध) और अनिश्चित (थोड़ा पानी, बहुत घी)।
- सार्वनामिक — सर्वनाम जो संज्ञा से पहले आएँ: वह लड़का, कौन आदमी, यह पुस्तक।
- प्रविशेषण — विशेषण की भी विशेषता बताने वाले: "बहुत सुंदर", "अत्यंत चतुर"।
- तुलना की अवस्थाएँ — मूलावस्था (उच्च), उत्तरावस्था (उच्चतर), उत्तमावस्था (उच्चतम); लघु-लघुतर-लघुतम; अधिक-अधिकतर-अधिकतम।
"कुछ खा लो" — अनिश्चयवाचक सर्वनाम। "कुछ लोग आए" — अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (गिना जा सकता है)। "कुछ दूध दो" — अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण (नापा जाता है)।
5. क्रिया
जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध हो, वह क्रिया है। क्रिया का मूल रूप धातु कहलाता है (पढ़, लिख, खा) — धातु में "ना" लगाकर सामान्य रूप बनता है (पढ़ना)।
| आधार | भेद | पहचान / उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्म के आधार पर | सकर्मक | कर्म की आवश्यकता; "क्या/किसे" का उत्तर मिलता है: राम फल खाता है |
| अकर्मक | कर्म नहीं; फल सीधे कर्ता पर: बच्चा सोता है, मोहन हँसता है, फूल खिलता है | |
| द्विकर्मक | दो कर्म | शिक्षक ने छात्रों को (गौण कर्म) गणित (मुख्य कर्म) पढ़ाया |
| रचना के आधार पर | प्रेरणार्थक | कर्ता दूसरे से काम करवाए: पढ़ना → पढ़ाना → पढ़वाना; लिखना → लिखाना → लिखवाना |
| संयुक्त | दो या अधिक क्रियाएँ: खा लिया, पढ़ने लगा, चल पड़ा | |
| नामधातु | संज्ञा/विशेषण से बनी: हाथ → हथियाना, बात → बतियाना, लाज → लजाना, चिकना → चिकनाना | |
| पूर्वकालिक | मुख्य क्रिया से पहले पूर्ण हुई क्रिया: वह खाकर सो गया, नहाकर पूजा करो |
सहायक क्रिया — मुख्य क्रिया के साथ काल बताती है: "है, था, गा"। नामधातु और प्रेरणार्थक क्रिया के प्रश्न बार-बार आते हैं।
6. अव्यय (अविकारी शब्द) एवं निपात
जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक, काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, वे अव्यय (अविकारी) हैं।
| अव्यय | कार्य | उदाहरण |
|---|---|---|
| क्रिया विशेषण | क्रिया की विशेषता — कालवाचक (कब?), स्थानवाचक (कहाँ?), परिमाणवाचक (कितना?), रीतिवाचक (कैसे?) | कल, अभी, प्रतिदिन; यहाँ, ऊपर, दूर; बहुत, थोड़ा, खूब; धीरे-धीरे, ध्यानपूर्वक, अचानक |
| संबंधबोधक | संज्ञा/सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों से संबंध | के पास, के ऊपर, के बिना, की ओर, के कारण, के साथ — "घर के पास मंदिर है" |
| समुच्चयबोधक (योजक) | दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ना | समानाधिकरण — और, तथा, या, अथवा, लेकिन, परंतु, इसलिए; व्यधिकरण — कि, क्योंकि, यदि-तो, ताकि, जिससे |
| विस्मयादिबोधक | हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा आदि भाव; बाद में (!) चिह्न | वाह!, अरे!, हाय!, छी!, शाबाश!, ओह! |
"वह ऊपर बैठा है" — "ऊपर" क्रिया की विशेषता बता रहा है → क्रिया विशेषण। "वह छत के ऊपर बैठा है" — संज्ञा "छत" से संबंध जोड़ रहा है → संबंधबोधक। नियम: पहले संज्ञा + "के/की" हो तो संबंधबोधक।
निपात
निपात वे अव्यय हैं जो किसी शब्द या वाक्य पर बल (ज़ोर) देने के लिए प्रयोग होते हैं। मुख्य निपात — ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, केवल, सिर्फ़, ठीक, जी, हाँ, नहीं, मत।
- "राम ही जाएगा" (कोई और नहीं) · "राम भी जाएगा" (दूसरों के साथ) · "राम तो जाएगा" · "उसने बात तक नहीं की" · "केवल दस रुपये बचे हैं"।
- निपात से वाक्य का अर्थ बदल जाता है: "मैंने ही उसे पत्र लिखा" और "मैंने उसे ही पत्र लिखा" — दोनों में बल अलग शब्द पर है।
7. लिंग
हिंदी में दो लिंग हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग (संस्कृत का नपुंसक लिंग हिंदी में नहीं)। लिंग पहचानने का सबसे सरल तरीका — शब्द के साथ क्रिया या विशेषण लगाकर देखें: "दही खट्टा है" → पुल्लिंग; "चाय गर्म थी / अच्छी चाय" → स्त्रीलिंग।
| सदा पुल्लिंग | सदा स्त्रीलिंग |
|---|---|
| दिनों के नाम (सोमवार), महीनों के नाम (चैत्र, जनवरी), पर्वत (हिमालय), समुद्र, ग्रह (सूर्य, मंगल; पृथ्वी अपवाद), देश, धातुएँ (सोना, लोहा; चाँदी अपवाद), रत्न (हीरा, मोती; मणि अपवाद), अनाज (गेहूँ, चावल; मक्का, ज्वार अपवाद), वृक्ष (पीपल, आम; इमली अपवाद), द्रव (पानी, दूध, घी, दही; चाय, लस्सी अपवाद) | नदियाँ (गंगा, यमुना; सिंधु, ब्रह्मपुत्र, सोन पुल्लिंग), भाषाएँ और लिपियाँ (हिंदी, देवनागरी), तिथियाँ (प्रतिपदा, पूर्णिमा), नक्षत्र (अश्विनी, रोहिणी), "-ता, -आई, -आवट, -आहट" वाले भाववाचक (सुंदरता, लिखाई, लिखावट, घबराहट) |
- स्त्रीलिंग बनाने के प्रत्यय — -ई (लड़का → लड़की, देव → देवी), -इया (बूढ़ा → बुढ़िया, चूहा → चुहिया), -इन (धोबी → धोबिन, माली → मालिन), -नी (मोर → मोरनी, शेर → शेरनी), -आनी (सेठ → सेठानी, देवर → देवरानी), -आ (छात्र → छात्रा, सुत → सुता), -वती/-मती (गुणवान → गुणवती, श्रीमान → श्रीमती), -इका (बालक → बालिका, लेखक → लेखिका)।
- विशेष शब्द — कवि → कवयित्री, विद्वान → विदुषी, नर → मादा, सम्राट → साम्राज्ञी, साधु → साध्वी, युवक → युवती, नेता → नेत्री, पुरुष → स्त्री, बैल → गाय।
- नित्य स्त्रीलिंग प्राणी — मक्खी, कोयल, मैना, छिपकली, चील (पुल्लिंग बनाने के लिए "नर" जोड़ें: नर मक्खी)। नित्य पुल्लिंग — खटमल, भेड़िया, उल्लू, कौआ (स्त्रीलिंग बनाने के लिए "मादा" जोड़ें)।
8. वचन
हिंदी में दो वचन हैं — एकवचन और बहुवचन।
- बहुवचन बनाने के नियम — आकारांत पुल्लिंग में "आ" → "ए" (लड़का → लड़के, कमरा → कमरे); अकारांत स्त्रीलिंग में "एँ" (बात → बातें, आँख → आँखें); इकारांत/ईकारांत स्त्रीलिंग में "इयाँ" (नदी → नदियाँ, रीति → रीतियाँ); "या" अंत वाले स्त्रीलिंग में "याँ" (चिड़िया → चिड़ियाँ, गुड़िया → गुड़ियाँ); उकारांत स्त्रीलिंग में "एँ" (वस्तु → वस्तुएँ, वधू → वधुएँ)।
- विभक्ति लगने पर — "ओं" (लड़का → लड़कों ने, घर → घरों में, नदी → नदियों का)।
- समूह बताने वाले शब्द जोड़कर — गण, वर्ग, जन, लोग, वृंद (छात्रगण, अध्यापकवर्ग, गुरुजन, आप लोग)।
- सदा एकवचन — द्रव्यवाचक और भाववाचक (दूध, पानी, सोना, प्रेम, क्रोध, जनता, सामान)। सदा बहुवचन — प्राण, दर्शन, आँसू, होश, बाल (केश), लोग, हस्ताक्षर, समाचार ("उसके प्राण निकल गए")।
- आदर के लिए एकवचन में बहुवचन प्रयोग: "पिताजी आए हैं", "गुरुजी पढ़ा रहे हैं"।
9. कारक
संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया या दूसरे शब्दों से संबंध बताने वाले रूप को कारक कहते हैं। कारक-चिह्नों को परसर्ग या विभक्ति कहते हैं। हिंदी में 8 कारक हैं।
| क्रम | कारक | विभक्ति / परसर्ग | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | कर्ता | ने (या शून्य) | राम ने पत्र लिखा; राम पढ़ता है |
| 2 | कर्म | को (या शून्य) | माँ ने बच्चे को सुलाया |
| 3 | करण | से, के द्वारा (साधन) | वह कलम से लिखता है |
| 4 | संप्रदान | को, के लिए (जिसके लिए कार्य) | गरीब को कपड़े दो; बच्चों के लिए मिठाई लाओ |
| 5 | अपादान | से (अलग होना, डरना, तुलना, निकलना) | पेड़ से पत्ते गिरे; गंगा हिमालय से निकलती है; वह शेर से डरता है |
| 6 | संबंध | का, के, की, रा, रे, री | यह राम की पुस्तक है; मेरा घर |
| 7 | अधिकरण | में, पर (आधार) | मछली पानी में रहती है; पुस्तक मेज़ पर है |
| 8 | संबोधन | हे!, अरे!, ओ! | हे प्रभु! रक्षा करो |
"से" का अर्थ साधन (with/by) हो → करण: "चाकू से फल काटा"। "से" का अर्थ अलगाव (from) हो → अपादान: "छत से गिरा"। इसी प्रकार "को" — कार्य किस पर हुआ → कर्म; किसके लिए/किसे दिया → संप्रदान।
10. काल एवं वाच्य
- काल — क्रिया के होने का समय। तीन काल — वर्तमान (सामान्य: पढ़ता है; अपूर्ण/तात्कालिक: पढ़ रहा है; संदिग्ध: पढ़ता होगा), भूत (छह भेद — सामान्य: पढ़ा; आसन्न: पढ़ा है; पूर्ण: पढ़ा था; अपूर्ण: पढ़ रहा था; संदिग्ध: पढ़ा होगा; हेतुहेतुमद्: पढ़ता तो पास होता), भविष्यत् (सामान्य: पढ़ेगा; संभाव्य: शायद पढ़े)।
- वाच्य — क्रिया का रूप किसके अनुसार है। कर्तृवाच्य — कर्ता प्रधान: "राम पुस्तक पढ़ता है"। कर्मवाच्य — कर्म प्रधान (सकर्मक क्रिया): "राम द्वारा पुस्तक पढ़ी गई"। भाववाच्य — भाव प्रधान (अकर्मक क्रिया, प्रायः निषेध/असमर्थता): "मुझसे चला नहीं जाता", "बच्चे से सोया नहीं जाता"।
11. मास्टर सारणी — नियम एक नज़र में
| विषय | भेद / नियम | पहचान का संकेत |
|---|---|---|
| शब्द (प्रयोग) | विकारी 4 + अविकारी 4 | रूप बदलता है या नहीं |
| शब्द (उत्पत्ति) | तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज | संस्कृत रूप ज्यों का त्यों = तत्सम |
| संज्ञा | व्यक्ति, जाति, भाव (+ समूह, द्रव्य) | भाववाचक — केवल अनुभव |
| सर्वनाम | 11 मूल; 6 भेद | संज्ञा से पहले आए तो सार्वनामिक विशेषण |
| विशेषण | गुण, संख्या, परिमाण, सार्वनामिक | गिनें = संख्या; नापें = परिमाण |
| क्रिया | सकर्मक, अकर्मक, द्विकर्मक; प्रेरणार्थक, नामधातु, संयुक्त, पूर्वकालिक | "क्या" का उत्तर = सकर्मक |
| अव्यय | क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक | के/की + शब्द = संबंधबोधक |
| निपात | ही, भी, तो, तक, मात्र, केवल | बल देने के लिए |
| लिंग | पुल्लिंग, स्त्रीलिंग | विशेषण/क्रिया लगाकर जाँचें |
| वचन | एकवचन, बहुवचन | प्राण, दर्शन, हस्ताक्षर — सदा बहुवचन |
| कारक | 8 — ने, को, से, को/के लिए, से, का, में/पर, हे | से = साधन (करण) या अलगाव (अपादान) |
| वाच्य | कर्तृ, कर्म, भाव | "द्वारा" = कर्मवाच्य; "से ... नहीं जाता" = भाववाच्य |
12. माइंड मैप
- संज्ञा
- सर्वनाम
- विशेषण
- क्रिया
- क्रिया विशेषण
- संबंधबोधक
- समुच्चयबोधक
- विस्मयादिबोधक
- निपात
- लिंग
- वचन
- कारक
- काल
- वाच्य
13. टिप्स एवं ट्रिक्स
- कारक क्रम याद करें: "ने को से को, से का में हे" — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण, संबोधन।
- सकर्मक-अकर्मक: क्रिया से पहले "क्या?" लगाएँ — "वह क्या खाता है?" उत्तर मिला (फल) → सकर्मक; "वह क्या सोता है?" उत्तर नहीं → अकर्मक।
- नामधातु पहचान: मूल शब्द संज्ञा/विशेषण हो (हाथ, बात, लाज, चिकना) और उससे क्रिया बने।
- लिंग में शक हो तो "मेरा/मेरी" लगाकर बोलें: "मेरा दही" ✓, "मेरी दही" ✗।
- "दही" पुल्लिंग है ("दही खट्टा है"), "चाय" स्त्रीलिंग।
- "हस्ताक्षर" सदा बहुवचन: "मेरे हस्ताक्षर", "उनके हस्ताक्षर"।
- "कवि" का स्त्रीलिंग "कवयित्री" है, "कवियत्री" नहीं।
- "आप" हमेशा मध्यम पुरुष नहीं — "मैं आप चला जाऊँगा" में निजवाचक है।
14. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- प्रयोग के आधार पर शब्द के 8 भेद होते हैं।
- "खेत" तद्भव और "क्षेत्र" तत्सम शब्द है।
- "पंकज" योगरूढ़ शब्द है।
- "बचपन" भाववाचक संज्ञा है।
- हिंदी में 11 मूल सर्वनाम हैं।
- "कोई" प्राणी के लिए और "कुछ" वस्तु के लिए अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।
- "उच्चतम" विशेषण की उत्तमावस्था है।
- "बतियाना" नामधातु क्रिया है।
- "पढ़वाना" द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया है।
- "ही, भी, तो" निपात हैं।
- "के पास" संबंधबोधक अव्यय है।
- "कवि" का स्त्रीलिंग "कवयित्री" है।
- "प्राण" शब्द सदा बहुवचन में प्रयुक्त होता है।
- हिंदी में कारकों की संख्या 8 है।
- अपादान कारक में अलग होने का भाव होता है।
- "मुझसे चला नहीं जाता" भाववाच्य है।
15. PYQ आधारित प्रश्न — विस्तृत उत्तर सहित
"ईमानदारी" शब्द संज्ञा का कौन-सा भेद है?
- जातिवाचक
- व्यक्तिवाचक
- भाववाचक
- समूहवाचक
उत्तर एवं व्याख्या
"ईमानदारी" एक गुण है जिसे देखा-छुआ नहीं, केवल अनुभव किया जा सकता है, इसलिए यह भाववाचक संज्ञा है (विशेषण "ईमानदार" + "ई" प्रत्यय)। जातिवाचक वर्ग का, व्यक्तिवाचक विशेष नाम का और समूहवाचक समूह का बोध कराता है।
उत्तर: (C) भाववाचक
"वह लड़का बहुत होशियार है।" — इस वाक्य में "वह" क्या है?
- पुरुषवाचक सर्वनाम
- सार्वनामिक विशेषण
- निश्चयवाचक सर्वनाम
- क्रिया विशेषण
उत्तर एवं व्याख्या
यहाँ "वह" संज्ञा "लड़का" से पहले आकर उसकी ओर संकेत करता है, यानी विशेषता बताता है — इसलिए यह सार्वनामिक विशेषण है। यदि वाक्य होता "वह होशियार है" (संज्ञा के बिना), तब "वह" सर्वनाम होता।
उत्तर: (B) सार्वनामिक विशेषण
निम्न में से अकर्मक क्रिया वाला वाक्य कौन-सा है?
- सीता गीत गाती है।
- बच्चा रोता है।
- मोहन पत्र लिखता है।
- माँ खाना बनाती है।
उत्तर एवं व्याख्या
"बच्चा रोता है" में "क्या रोता है?" का कोई उत्तर (कर्म) नहीं मिलता; क्रिया का फल सीधे कर्ता पर है, इसलिए अकर्मक है। बाकी वाक्यों में कर्म है — गीत, पत्र, खाना — इसलिए वे सकर्मक हैं।
उत्तर: (B) बच्चा रोता है।
"हथियाना" किस प्रकार की क्रिया है?
- प्रेरणार्थक
- नामधातु
- संयुक्त
- पूर्वकालिक
उत्तर एवं व्याख्या
"हथियाना" संज्ञा "हाथ" से बनी क्रिया है, इसलिए नामधातु है (जैसे बात → बतियाना)। प्रेरणार्थक में दूसरे से काम करवाया जाता है (पढ़वाना), संयुक्त में दो क्रियाएँ होती हैं (खा लिया) और पूर्वकालिक में "कर" लगता है (खाकर)।
उत्तर: (B) नामधातु
"पेड़ से पत्ते गिरते हैं।" — रेखांकित "से" में कौन-सा कारक है? (पेड़ से)
- करण
- अपादान
- संप्रदान
- अधिकरण
उत्तर एवं व्याख्या
पत्ते पेड़ से अलग हो रहे हैं; जहाँ "से" अलगाव (from) का भाव दे, वहाँ अपादान कारक होता है। करण में "से" साधन का भाव देता है (कलम से लिखना), संप्रदान "के लिए" और अधिकरण "में/पर" से पहचाना जाता है।
उत्तर: (B) अपादान
"कवि" शब्द का स्त्रीलिंग है —
- कवियत्री
- कवयित्री
- कविनी
- कवित्री
उत्तर एवं व्याख्या
"कवि" का शुद्ध स्त्रीलिंग "कवयित्री" है (क-व-यि-त्री)। "कवियत्री" वर्तनी की सामान्य गलती है, और "कविनी", "कवित्री" शब्द मान्य नहीं हैं।
उत्तर: (B) कवयित्री
निम्न में से कौन-सा शब्द सदा बहुवचन में प्रयुक्त होता है?
- पानी
- प्राण
- सोना
- जनता
उत्तर एवं व्याख्या
"प्राण" सदा बहुवचन में प्रयोग होता है — "उसके प्राण निकल गए", "प्राण बच गए"। पानी और सोना द्रव्यवाचक तथा जनता समूहवाचक होने से सदा एकवचन में प्रयुक्त होते हैं ("जनता जाग उठी")।
उत्तर: (B) प्राण
"वह भी आएगा।" — वाक्य में "भी" क्या है?
- समुच्चयबोधक
- निपात
- क्रिया विशेषण
- संबंधबोधक
उत्तर एवं व्याख्या
"भी" यहाँ किसी शब्द या वाक्य को जोड़ नहीं रहा, बल्कि "वह" पर बल देकर बता रहा है कि दूसरों के साथ वह भी आएगा — इसलिए यह निपात है। समुच्चयबोधक दो वाक्यों/शब्दों को जोड़ता है (और, या), संबंधबोधक संज्ञा का संबंध बताता है (के पास)।
उत्तर: (B) निपात
"वह धीरे-धीरे चलता है।" — "धीरे-धीरे" कौन-सा क्रिया विशेषण है?
- कालवाचक
- स्थानवाचक
- परिमाणवाचक
- रीतिवाचक
उत्तर एवं व्याख्या
"धीरे-धीरे" बताता है कि वह कैसे (किस रीति से) चलता है, इसलिए यह रीतिवाचक क्रिया विशेषण है। कालवाचक "कब", स्थानवाचक "कहाँ" और परिमाणवाचक "कितना" का उत्तर देते हैं।
उत्तर: (D) रीतिवाचक
"दो लीटर दूध लाओ।" — "दो लीटर" कौन-सा विशेषण है?
- निश्चित संख्यावाचक
- निश्चित परिमाणवाचक
- अनिश्चित परिमाणवाचक
- गुणवाचक
उत्तर एवं व्याख्या
दूध गिना नहीं जाता, नापा जाता है, और "दो लीटर" निश्चित माप बताता है — इसलिए निश्चित परिमाणवाचक विशेषण है। "दो लड़के" होता तो निश्चित संख्यावाचक, और "थोड़ा दूध" होता तो अनिश्चित परिमाणवाचक।
उत्तर: (B) निश्चित परिमाणवाचक
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द पुल्लिंग है?
- चाय
- दही
- इमली
- पृथ्वी
उत्तर एवं व्याख्या
"दही" पुल्लिंग है — "दही खट्टा है", "मीठा दही"। "चाय" स्त्रीलिंग (गरम चाय), "इमली" वृक्षों में अपवाद होकर स्त्रीलिंग और "पृथ्वी" ग्रहों में अपवाद होकर स्त्रीलिंग है।
उत्तर: (B) दही
"राम द्वारा रावण मारा गया।" — यह वाक्य किस वाच्य में है?
- कर्तृवाच्य
- कर्मवाच्य
- भाववाच्य
- कोई वाच्य नहीं
उत्तर एवं व्याख्या
वाक्य में कर्म "रावण" प्रधान है, कर्ता "राम" के साथ "द्वारा" लगा है और क्रिया "मारा गया" कर्म के अनुसार है — यह कर्मवाच्य है। कर्तृवाच्य होता तो "राम ने रावण को मारा"; भाववाच्य अकर्मक क्रिया के साथ होता है ("मुझसे चला नहीं जाता")। हर वाक्य किसी न किसी वाच्य में होता है।
उत्तर: (B) कर्मवाच्य
16. त्वरित पुनरावृत्ति
- शब्द: विकारी (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया) + अविकारी (क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक); तत्सम-तद्भव-देशज-विदेशज।
- संज्ञा 5 भेद; भाववाचक बनाना — मीठा → मिठास, बच्चा → बचपन।
- सर्वनाम 11 मूल, 6 भेद; संज्ञा से पहले आए तो सार्वनामिक विशेषण।
- क्रिया: सकर्मक/अकर्मक; प्रेरणार्थक (पढ़वाना), नामधातु (हथियाना)।
- निपात: ही, भी, तो, तक, मात्र — बल देने के लिए।
- लिंग: दही पुल्लिंग, चाय स्त्रीलिंग; कवि → कवयित्री; वचन: प्राण, हस्ताक्षर सदा बहुवचन।
- कारक 8: ने, को, से (करण), को/के लिए, से (अपादान), का, में/पर, हे; वाच्य: कर्तृ, कर्म ("द्वारा"), भाव।