1. अध्याय एक नज़र में
बिहार पुलिस SI प्रारंभिक परीक्षा में इतिहास से लगभग 16 से 20 प्रश्न आते हैं, जिनमें से आधे प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत से होते हैं। प्रश्न ज़्यादातर तथ्य आधारित होते हैं — कौन-सा शासक, किस वंश का संस्थापक, कौन-सा ग्रंथ किसने लिखा, कौन-सा युद्ध कब और किसके बीच हुआ। इस अध्याय में हम सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू करके वैदिक काल, बौद्ध-जैन धर्म, मौर्य और गुप्त साम्राज्य, दक्षिण भारत के राजवंश, दिल्ली सल्तनत, विजयनगर, भक्ति-सूफ़ी आंदोलन और मुगल साम्राज्य तक का क्रमबद्ध अध्ययन करेंगे।
- सिंधु घाटी के स्थल और उनकी खोज (हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, धौलावीरा, कालीबंगा)।
- वेद, उपनिषद, महाजनपद; बुद्ध और महावीर से जुड़े स्थान तथा शब्दावली।
- मौर्य प्रशासन, अशोक के अभिलेख; गुप्त काल को "स्वर्ण युग" क्यों कहा जाता है।
- सल्तनत के पाँच वंश, अलाउद्दीन के सुधार, मुहम्मद बिन तुगलक के प्रयोग।
- मुगल शासक, पानीपत-हल्दीघाटी-खानवा के युद्ध, अकबर की नीतियाँ।
- भक्ति संत (कबीर, तुलसी, सूर, मीरा, गुरु नानक) और सूफ़ी सिलसिले।
2. सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता
सिंधु घाटी सभ्यता भारत की पहली नगरीय सभ्यता थी। इसका काल लगभग 2500–1750 ई.पू. (परिपक्व चरण) माना जाता है। यह कांस्य युगीन (Bronze Age) सभ्यता थी। सबसे पहले 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा (पंजाब, अब पाकिस्तान में, रावी नदी के तट पर) की खुदाई की, इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं। 1922 में राखालदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो (सिंध, सिंधु नदी) की खोज की। उस समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल थे।
| स्थल | वर्तमान स्थान / नदी | प्रमुख खोज |
|---|---|---|
| हड़प्पा | पंजाब (पाकिस्तान), रावी | अन्नागार, श्रमिक आवास, R-37 कब्रिस्तान |
| मोहनजोदड़ो | सिंध (पाकिस्तान), सिंधु | विशाल स्नानागार, अन्नागार, नर्तकी की कांस्य मूर्ति, पशुपति मुहर |
| लोथल | गुजरात, भोगवा | गोदीवाड़ा (Dockyard), चावल के साक्ष्य |
| कालीबंगा | राजस्थान, घग्गर | जुते हुए खेत, अग्नि वेदिकाएँ |
| धौलावीरा | गुजरात (कच्छ) | जल प्रबंधन, बड़ा सूचना पट्ट; UNESCO धरोहर (2021) |
| राखीगढ़ी | हरियाणा | भारत में सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल |
| चन्हूदड़ो | सिंध | मनके बनाने का कारखाना; एकमात्र नगर जिसमें दुर्ग नहीं |
| बनावली | हरियाणा | मिट्टी का हल (खिलौना), जौ |
- नगर नियोजन — ग्रिड पद्धति (सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं), पकी ईंटों के घर, ढकी हुई नालियाँ। नगर दो भागों में — ऊपरी दुर्ग (Citadel) और निचला नगर।
- लोग लोहे से परिचित नहीं थे; ताँबा, काँसा, सोना, चाँदी का प्रयोग होता था।
- लिपि भावचित्रात्मक (pictographic) थी और अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है। लिखने की दिशा प्रायः दाएँ से बाएँ।
- मातृदेवी, पशुपति (आद्य-शिव), पीपल वृक्ष और एक-शृंगी पशु (Unicorn) की पूजा के संकेत मिलते हैं। घोड़े के ठोस साक्ष्य नहीं मिले।
- मेसोपोटामिया के साथ व्यापार होता था; मेसोपोटामिया के लेखों में इस क्षेत्र को "मेलुहा" कहा गया है।
विशाल स्नानागार मोहनजोदड़ो में है, हड़प्पा में नहीं। गोदीवाड़ा लोथल में है। जुते हुए खेत कालीबंगा में मिले। इन तीनों को आपस में बदलकर विकल्प बनाए जाते हैं।
3. वैदिक काल
सिंधु सभ्यता के पतन के बाद आर्यों का आगमन माना जाता है। वैदिक काल को दो भागों में बाँटा जाता है — ऋग्वैदिक काल (1500–1000 ई.पू.) और उत्तर वैदिक काल (1000–600 ई.पू.)। ऋग्वैदिक आर्य सप्त सैंधव क्षेत्र (सात नदियों का क्षेत्र — पंजाब) में बसे थे।
| वेद | विषय | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| ऋग्वेद | देवताओं की स्तुति (ऋचाएँ) | सबसे प्राचीन; 10 मंडल, 1028 सूक्त; गायत्री मंत्र (तीसरा मंडल); पुरुष सूक्त (10वाँ मंडल) में चार वर्णों का उल्लेख |
| सामवेद | गायन (संगीत) | भारतीय संगीत का मूल |
| यजुर्वेद | यज्ञ की विधियाँ | गद्य और पद्य दोनों में |
| अथर्ववेद | जादू-टोना, औषधि, लोक विश्वास | सभा और समिति को "प्रजापति की दो पुत्रियाँ" कहा |
- ऋग्वैदिक काल में सबसे महत्वपूर्ण देवता इंद्र (पुरंदर), फिर अग्नि और वरुण थे। सबसे पवित्र नदी सरस्वती (नदीतमा) थी।
- दशराज्ञ युद्ध (दस राजाओं का युद्ध) परुष्णी (रावी) नदी के तट पर हुआ, जिसमें भरत वंश के राजा सुदास विजयी हुए।
- उत्तर वैदिक काल में प्रजापति, विष्णु, रुद्र का महत्व बढ़ा; वर्ण व्यवस्था कठोर हुई; लोहे (श्याम अयस) का प्रयोग शुरू हुआ।
- "सत्यमेव जयते" मुण्डक उपनिषद से लिया गया है। उपनिषदों की संख्या 108 मानी जाती है।
- छह वेदांग — शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष। चार उपवेद — आयुर्वेद, धनुर्वेद, गंधर्ववेद, शिल्पवेद।
4. बौद्ध एवं जैन धर्म
| पहलू | बौद्ध धर्म (गौतम बुद्ध) | जैन धर्म (महावीर) |
|---|---|---|
| जन्म | लुंबिनी (नेपाल), 563 ई.पू. (परंपरागत) | कुंडग्राम (वैशाली), 540 ई.पू. (परंपरागत) |
| बचपन का नाम | सिद्धार्थ | वर्धमान |
| माता-पिता | महामाया, शुद्धोधन (शाक्य गण) | त्रिशला, सिद्धार्थ (ज्ञातृक कुल) |
| ज्ञान प्राप्ति | बोधगया, पीपल वृक्ष के नीचे | जृम्भिकग्राम, ऋजुपालिका नदी, साल वृक्ष के नीचे |
| प्रथम उपदेश | सारनाथ — "धर्मचक्र प्रवर्तन" | — |
| मृत्यु | कुशीनगर — "महापरिनिर्वाण" | पावापुरी — "निर्वाण" |
| मुख्य सिद्धांत | चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, मध्यम मार्ग | त्रिरत्न, पंच महाव्रत, अनेकांतवाद (स्याद्वाद) |
| शाखाएँ | हीनयान, महायान (चौथी संगीति के बाद) | श्वेतांबर (स्थूलभद्र), दिगंबर (भद्रबाहु) |
| ग्रंथ | त्रिपिटक — सुत्त, विनय, अभिधम्म (पालि भाषा) | आगम (प्राकृत भाषा) |
- बुद्ध के जीवन की घटनाओं के प्रतीक — जन्म: कमल/सांड, गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण): घोड़ा, ज्ञान: पीपल (बोधि वृक्ष), प्रथम उपदेश: धर्मचक्र, मृत्यु: स्तूप।
- जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) और 23वें पार्श्वनाथ थे। पार्श्वनाथ ने चार व्रत दिए; महावीर ने पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा।
- जैन संगीतियाँ — प्रथम पाटलिपुत्र (स्थूलभद्र, चंद्रगुप्त मौर्य काल), द्वितीय वल्लभी (गुजरात) जिसमें आगम संकलित हुए।
बौद्ध धर्म के चार प्रमुख स्थान क्रम से — लु-बो-सा-कु (लुंबिनी → बोधगया → सारनाथ → कुशीनगर) = जन्म → ज्ञान → उपदेश → मृत्यु।
5. मौर्य साम्राज्य (322–185 ई.पू.)
- चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त) की सहायता से नंद वंश के धनानंद को हराकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। 305 ई.पू. में यूनानी सेनापति सेल्यूकस निकेटर को हराया; संधि के बाद सेल्यूकस ने मेगस्थनीज़ को राजदूत बनाकर भेजा।
- चंद्रगुप्त ने अंतिम समय में जैन धर्म अपनाया और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में सल्लेखना द्वारा प्राण त्यागे।
- कौटिल्य का "अर्थशास्त्र" राजनीति और प्रशासन पर ग्रंथ है। इसमें राज्य के सप्तांग सिद्धांत (राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड, मित्र) का वर्णन है।
- बिंदुसार — यूनानी लेखकों ने उसे "अमित्रोचेट्स" कहा; आजीवक संप्रदाय का अनुयायी।
- अशोक (273–232 ई.पू.) — कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) के भीषण रक्तपात के बाद बौद्ध धर्म अपनाया (उपगुप्त के प्रभाव से)। "धम्म" नीति अपनाई, धम्म महामात्र नियुक्त किए। अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।
- अशोक के अभिलेख मुख्यतः ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में हैं; उत्तर-पश्चिम में खरोष्ठी लिपि, अफ़गानिस्तान में यूनानी और अरामाइक। इन्हें सबसे पहले जेम्स प्रिंसेप (1837) ने पढ़ा। अभिलेखों में अशोक को "देवानांप्रिय प्रियदर्शी" कहा गया है; "अशोक" नाम मास्की और गुर्जरा अभिलेख में मिलता है।
- सारनाथ का सिंह शीर्ष (चार सिंह) भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है (26 जनवरी 1950 को अपनाया गया)।
- अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की (185 ई.पू.) और शुंग वंश की स्थापना की।
6. मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य
मौर्योत्तर काल
- शुंग (पुष्यमित्र) → कण्व (वासुदेव) → सातवाहन (दक्षिण; संस्थापक सिमुक; गौतमीपुत्र शातकर्णी सबसे प्रतापी)।
- हिंद-यवन — सबसे प्रसिद्ध मिनांडर (मिलिंद), जिसने बौद्ध भिक्षु नागसेन से प्रश्न किए ("मिलिंदपन्हो")। भारत में सोने के सिक्के सबसे पहले हिंद-यवनों ने चलाए।
- कुषाण — सबसे महान शासक कनिष्क; 78 ई. में शक संवत् शुरू किया (भारत का राष्ट्रीय पंचांग इसी पर आधारित है)। राजधानी पुरुषपुर (पेशावर)। उसके दरबार में अश्वघोष (बुद्धचरित), नागार्जुन, वसुमित्र, चरक (आयुर्वेद) थे। गांधार कला (यूनानी प्रभाव) और मथुरा कला (स्वदेशी) इसी काल में विकसित हुईं।
गुप्त साम्राज्य (लगभग 319–550 ई.)
- संस्थापक श्रीगुप्त; वास्तविक संस्थापक चंद्रगुप्त प्रथम (319–20 ई. में गुप्त संवत् शुरू; लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह)।
- समुद्रगुप्त — "भारत का नेपोलियन" (इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने कहा); उसकी विजयों का वर्णन दरबारी कवि हरिषेण ने प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ लेख) में किया। सिक्कों पर उसे वीणा बजाते दिखाया गया है।
- चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) — शकों को हराकर "शकारि" कहलाया; उसके समय चीनी यात्री फाह्यान आया। दरबार में नवरत्न थे — कालिदास (अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूतम्, रघुवंशम्), धन्वंतरि (चिकित्सा), अमरसिंह (अमरकोश), वराहमिहिर (बृहत्संहिता) आदि। महरौली का लौह स्तंभ (दिल्ली) इसी काल का है, जिसमें आज तक जंग नहीं लगा।
- कुमारगुप्त प्रथम — नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना। स्कंदगुप्त — हूणों को हराया; सुदर्शन झील की मरम्मत करवाई।
- गुप्त काल को "स्वर्ण युग" कहा जाता है — विज्ञान (आर्यभट्ट — "आर्यभटीय", पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, शून्य और दशमलव का प्रयोग, π का मान), साहित्य, कला (अजंता की गुफाएँ, देवगढ़ का दशावतार मंदिर) सभी में उन्नति हुई।
7. हर्षवर्धन एवं दक्षिण भारत
- हर्षवर्धन (606–647 ई.) — पुष्यभूति वंश; राजधानी पहले थानेश्वर, फिर कन्नौज। दरबारी कवि बाणभट्ट ने "हर्षचरित" और "कादंबरी" लिखी। हर्ष ने स्वयं "नागानंद", "रत्नावली", "प्रियदर्शिका" नाटक लिखे। चीनी यात्री ह्वेनसांग उसके समय आया और नालंदा में पढ़ा। हर्ष को चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा तट पर हराया।
- संगम काल — तमिल साहित्य; तीन राज्य — चेर (प्रतीक धनुष), चोल (बाघ), पांड्य (मछली)। संगम सभाएँ मदुरै में आयोजित हुईं। "तिरुक्कुरल" (तिरुवल्लुवर) को "तमिल वेद" कहा जाता है।
- पल्लव (कांचीपुरम) — महाबलीपुरम के रथ मंदिर (नरसिंहवर्मन प्रथम), कांची का कैलाशनाथ मंदिर।
- चालुक्य (बादामी/वातापी) — पुलकेशिन द्वितीय; ऐहोल अभिलेख (रविकीर्ति)।
- राष्ट्रकूट — एलोरा का कैलाश मंदिर (कृष्ण प्रथम), जो एक ही चट्टान काटकर बनाया गया।
- चोल साम्राज्य — राजराज प्रथम ने तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर बनवाया; राजेंद्र प्रथम ने गंगा तक अभियान किया ("गंगैकोंडचोल"), श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक नौसैनिक अभियान भेजे। चोलों का स्थानीय स्वशासन (उत्तरमेरूर अभिलेख — ग्राम सभा "उर" और "सभा") प्रसिद्ध है।
8. दिल्ली सल्तनत (1206–1526)
1192 में तराइन के दूसरे युद्ध में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया (पहले युद्ध 1191 में पृथ्वीराज जीते थे)। गोरी की मृत्यु के बाद उसके गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में दिल्ली सल्तनत की नींव रखी। सल्तनत के पाँच वंश क्रमशः — गुलाम (मामलूक) → खिलजी → तुगलक → सैयद → लोदी।
| वंश | प्रमुख शासक | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| गुलाम (1206–1290) | कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रज़िया, बलबन | ऐबक — "लाखबख्श", कुतुब मीनार शुरू कराई; इल्तुतमिश — इक्ता प्रथा, चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल, कुतुब मीनार पूरी कराई; रज़िया — दिल्ली की पहली और एकमात्र महिला शासक; बलबन — "सिजदा" और "पैबोस" प्रथा, "लौह और रक्त" की नीति |
| खिलजी (1290–1320) | जलालुद्दीन, अलाउद्दीन | अलाउद्दीन — बाज़ार नियंत्रण (मूल्य नियंत्रण), स्थायी सेना, दाग (घोड़ों को दागना) और हुलिया प्रथा; सेनापति मलिक काफ़ूर ने दक्षिण अभियान किए; अमीर खुसरो उसके दरबार में |
| तुगलक (1320–1414) | गयासुद्दीन, मुहम्मद बिन तुगलक, फ़िरोज़ शाह | मुहम्मद बिन तुगलक — राजधानी दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि), सांकेतिक मुद्रा (ताँबे के सिक्के), दोआब में कर वृद्धि — सभी प्रयोग असफल; मोरक्को का यात्री इब्न बतूता आया; फ़िरोज़ शाह — नहरें, जज़िया ब्राह्मणों पर भी, अशोक के दो स्तंभ दिल्ली लाया। 1398 में तैमूर का आक्रमण |
| सैयद (1414–1451) | खिज्र खाँ | सबसे कमज़ोर वंश |
| लोदी (1451–1526) | बहलोल, सिकंदर, इब्राहिम | पहला अफ़गान वंश; सिकंदर लोदी ने आगरा नगर बसाया (1504) और "गज़-ए-सिकंदरी" (भूमि माप) चलाया; इब्राहिम लोदी पानीपत के पहले युद्ध (1526) में बाबर से हारा |
इक्ता — इल्तुतमिश। बाज़ार नियंत्रण, दाग-हुलिया — अलाउद्दीन। सांकेतिक मुद्रा, राजधानी परिवर्तन — मुहम्मद बिन तुगलक। आगरा की स्थापना — सिकंदर लोदी। सल्तनत का अंतिम शासक — इब्राहिम लोदी।
9. विजयनगर एवं बहमनी साम्राज्य
- विजयनगर की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का (संगम वंश) ने की; राजधानी हम्पी (तुंगभद्रा नदी, कर्नाटक) — आज UNESCO विश्व धरोहर। चार वंश: संगम, सालुव, तुलुव, अरविडु।
- सबसे प्रतापी शासक कृष्णदेव राय (तुलुव वंश) — तेलुगु ग्रंथ "आमुक्तमाल्यद" लिखा; दरबार में आठ कवि "अष्टदिग्गज" (तेनालीराम प्रसिद्ध)। विट्ठलस्वामी और हज़ारा राम मंदिर बनवाए।
- तालीकोटा (राक्षसी-तंगड़ी) का युद्ध (1565) में दक्कन की सल्तनतों के संघ ने विजयनगर को हराया और हम्पी नष्ट हो गया।
- बहमनी साम्राज्य (1347) — संस्थापक अलाउद्दीन हसन बहमन शाह; प्रसिद्ध मंत्री महमूद गवाँ (बीदर में मदरसा)। बाद में पाँच राज्यों में बँटा — बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर, बीदर, बरार। बीजापुर का गोल गुंबद प्रसिद्ध है।
10. भक्ति एवं सूफ़ी आंदोलन
| संत | विशेषता |
|---|---|
| रामानुज | विशिष्टाद्वैत; दक्षिण भारत में भक्ति का दार्शनिक आधार |
| रामानंद | उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक; हिंदी में उपदेश; शिष्य कबीर, रैदास |
| कबीर | निर्गुण भक्ति; मूर्ति पूजा और कर्मकांड का विरोध; "बीजक" में संकलन; साखी, सबद, रमैनी |
| गुरु नानक | सिख धर्म के संस्थापक (जन्म तलवंडी/ननकाना साहिब, 1469); लंगर की परंपरा |
| तुलसीदास | सगुण राम भक्ति; "रामचरितमानस" (अवधी), अकबर के समकालीन |
| सूरदास | सगुण कृष्ण भक्ति; "सूरसागर" (ब्रजभाषा); वल्लभाचार्य के शिष्य |
| मीराबाई | कृष्ण भक्त; मेवाड़ की राजकुमारी (राठौर) |
| चैतन्य महाप्रभु | बंगाल; कीर्तन परंपरा; गौड़ीय वैष्णव |
| शंकरदेव | असम; एकशरण धर्म, सत्र और नामघर |
| नामदेव, ज्ञानेश्वर, तुकाराम | महाराष्ट्र; ज्ञानेश्वर ने "ज्ञानेश्वरी" (गीता की मराठी टीका) लिखी |
सूफ़ी सिलसिले — चिश्ती (भारत में ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती, अजमेर; शिष्य बख्तियार काकी, बाबा फ़रीद, निज़ामुद्दीन औलिया — दिल्ली), सुहरावर्दी (मुल्तान, बहाउद्दीन ज़करिया), फ़िरदौसी (बिहार — शेख शरफ़ुद्दीन याह्या मनेरी), नक्शबंदी (कट्टर; अहमद सरहिंदी)। सूफ़ी संगीत सभा को "समा" और आश्रम को "खानकाह" कहते हैं।
11. मुगल साम्राज्य (1526–1857)
| शासक | काल | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| बाबर | 1526–1530 | पानीपत I (1526, इब्राहिम लोदी), खानवा (1527, राणा सांगा), चंदेरी (1528), घाघरा (1529, अफ़गान); तोपखाने और "तुलुगमा" युद्ध नीति; आत्मकथा "तुज़ुक-ए-बाबरी" (तुर्की भाषा) |
| हुमायूँ | 1530–40, 1555–56 | चौसा (1539) और कन्नौज (1540) में शेरशाह से हारा; 1555 में फिर गद्दी पाई; पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर मृत्यु; जीवनी "हुमायूँनामा" — बहन गुलबदन बेगम |
| अकबर | 1556–1605 | पानीपत II (1556, हेमू) — संरक्षक बैरम खाँ; हल्दीघाटी (1576) — महाराणा प्रताप से (मुगल सेनापति मानसिंह); जज़िया समाप्त (1564); इबादतखाना (फ़तेहपुर सीकरी, 1575); दीन-ए-इलाही (1582); मनसबदारी प्रथा; राजस्व सुधार — टोडरमल की ज़ब्ती/दहसाला प्रणाली; बुलंद दरवाज़ा (गुजरात विजय की स्मृति); नवरत्न — बीरबल, तानसेन, अबुल फ़ज़ल ("अकबरनामा", "आइन-ए-अकबरी"), फ़ैज़ी, टोडरमल, मानसिंह |
| जहाँगीर | 1605–1627 | "न्याय की ज़ंजीर"; पत्नी नूरजहाँ का प्रभाव; अंग्रेज़ कैप्टन हॉकिन्स और सर थॉमस रो आए; पाँचवें सिख गुरु अर्जुन देव को फाँसी; आत्मकथा "तुज़ुक-ए-जहाँगीरी" |
| शाहजहाँ | 1628–1658 | "स्थापत्य कला का स्वर्ण युग"; ताजमहल (मुमताज महल की याद में), दिल्ली का लाल किला, जामा मस्जिद, तख्त-ए-ताउस (मयूर सिंहासन); शाहजहाँनाबाद बसाया; पुत्र औरंगज़ेब ने आगरा किले में कैद किया |
| औरंगज़ेब | 1658–1707 | "ज़िंदा पीर"; जज़िया फिर से लगाया (1679); नौवें सिख गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड (1675); दक्कन अभियान; मराठों से संघर्ष; बीबी का मकबरा (औरंगाबाद) उसके पुत्र आज़म शाह ने बनवाया |
- शिवाजी (1630–1680) — 1674 में रायगढ़ में राज्याभिषेक, "छत्रपति" उपाधि; अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद (पेशवा प्रधानमंत्री); "चौथ" (1/4) और "सरदेशमुखी" (1/10) कर; गुरिल्ला युद्ध नीति।
- पानीपत का तीसरा युद्ध (1761) — अहमद शाह अब्दाली ने मराठों (सदाशिवराव भाऊ) को हराया।
- अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र — 1857 के विद्रोह के बाद रंगून (म्यांमार) निर्वासित।
12. मास्टर सारणी (Master Summary Table)
| युग | सबसे महत्वपूर्ण तथ्य | परीक्षा संकेत |
|---|---|---|
| सिंधु सभ्यता | नगर नियोजन, विशाल स्नानागार, लोथल गोदी, लोहा अज्ञात | स्थल–खोज मिलान |
| वैदिक | ऋग्वेद सबसे प्राचीन; इंद्र प्रमुख देवता; सत्यमेव जयते — मुण्डक उपनिषद | वेद–विषय मिलान |
| बौद्ध-जैन | लुंबिनी-बोधगया-सारनाथ-कुशीनगर; कुंडग्राम-पावापुरी | स्थान और शब्दावली |
| मौर्य | चाणक्य, मेगस्थनीज़, अशोक का धम्म, ब्राह्मी लिपि | अभिलेख, कलिंग |
| कुषाण | कनिष्क, शक संवत् 78 ई., गांधार कला | संवत् प्रश्न |
| गुप्त | स्वर्ण युग, समुद्रगुप्त (प्रयाग प्रशस्ति), कालिदास, आर्यभट्ट, फाह्यान | "भारत का नेपोलियन" |
| हर्ष | कन्नौज, बाणभट्ट, ह्वेनसांग | चीनी यात्री |
| दक्षिण | चोल — बृहदेश्वर, ग्राम सभा; पल्लव — महाबलीपुरम; राष्ट्रकूट — कैलाश मंदिर | मंदिर–वंश मिलान |
| सल्तनत | गुलाम-खिलजी-तुगलक-सैयद-लोदी; इक्ता, बाज़ार नियंत्रण, सांकेतिक मुद्रा | सुधार–शासक मिलान |
| विजयनगर | हरिहर-बुक्का 1336, कृष्णदेव राय, तालीकोटा 1565 | — |
| मुगल | पानीपत, खानवा, हल्दीघाटी; मनसबदारी, दीन-ए-इलाही, ताजमहल | युद्ध–वर्ष–पक्ष |
13. माइंड मैप
- नगर नियोजन
- हड़प्पा, मोहनजोदड़ो
- लोथल, कालीबंगा
- चार वेद
- बुद्ध — चार आर्य सत्य
- महावीर — त्रिरत्न
- मौर्य — अशोक
- कुषाण — कनिष्क
- गुप्त — स्वर्ण युग
- चोल — नौसेना
- सल्तनत के 5 वंश
- विजयनगर
- मुगल, शिवाजी
- भक्ति-सूफ़ी
14. टिप्स एवं ट्रिक्स
- सल्तनत के वंश: "गुलाम खिलाड़ी तुरंत सैर लो" — गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी।
- मुगल क्रम: "बा-हु-अ-ज-शा-औ" — बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगज़ेब।
- चीनी यात्री और शासक: फाह्यान — चंद्रगुप्त II; ह्वेनसांग — हर्ष (दोनों "ह" से)।
- युद्ध और वर्ष: खानवा 1527 (बाबर बनाम राणा सांगा), हल्दीघाटी 1576 (अंक 5-7 उलटे — 1527 और 1576 को मिलाएँ नहीं)।
- मुगल आत्मकथाएँ: बाबर — तुज़ुक-ए-बाबरी (तुर्की); जहाँगीर — तुज़ुक-ए-जहाँगीरी (फ़ारसी)। हुमायूँनामा आत्मकथा नहीं, बहन गुलबदन ने लिखी।
- अशोक के अभिलेखों की भाषा प्राकृत है, लिपि ब्राह्मी — "भाषा" और "लिपि" में भ्रम न करें।
- शक संवत् (78 ई.) कनिष्क ने शुरू किया; विक्रम संवत् 57 ई.पू. से गिना जाता है।
- कुतुब मीनार ऐबक ने शुरू की, इल्तुतमिश ने पूरी की (बाद में फ़िरोज़ तुगलक ने मरम्मत कराई)।
- बुलंद दरवाज़ा अकबर ने बनवाया, शाहजहाँ ने नहीं।
15. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- सिंधु सभ्यता की खोज सबसे पहले हड़प्पा में 1921 में हुई।
- मोहनजोदड़ो का अर्थ है "मृतकों का टीला"।
- गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है।
- बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया।
- जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर थे।
- मेगस्थनीज़ चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था।
- अशोक के अभिलेखों को पहली बार जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा।
- प्रयाग प्रशस्ति की रचना हरिषेण ने की।
- आर्यभट्ट ने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
- एलोरा का कैलाश मंदिर राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम ने बनवाया।
- रज़िया सुल्तान दिल्ली की पहली महिला शासक थी।
- अलाउद्दीन खिलजी ने बाज़ार नियंत्रण व्यवस्था लागू की।
- इब्न बतूता मुहम्मद बिन तुगलक के समय भारत आया।
- विजयनगर की राजधानी हम्पी तुंगभद्रा नदी के तट पर थी।
- अकबर ने 1564 में जज़िया कर समाप्त किया।
- ताजमहल शाहजहाँ ने मुमताज महल की स्मृति में बनवाया।
16. PYQ आधारित प्रश्न — विस्तृत उत्तर सहित
सिंधु घाटी सभ्यता का कौन-सा स्थल गोदीवाड़ा (Dockyard) के लिए प्रसिद्ध है?
- कालीबंगा
- लोथल
- हड़प्पा
- बनावली
उत्तर एवं व्याख्या
गुजरात में भोगवा नदी के तट पर स्थित लोथल से ईंटों से बना गोदीवाड़ा मिला है, जो समुद्री व्यापार का प्रमाण है। कालीबंगा जुते हुए खेत के लिए, हड़प्पा अन्नागार के लिए और बनावली मिट्टी के हल के लिए जाना जाता है।
उत्तर: (B) लोथल
"सत्यमेव जयते" किस ग्रंथ से लिया गया है?
- ऋग्वेद
- कठोपनिषद
- मुण्डक उपनिषद
- भगवद्गीता
उत्तर एवं व्याख्या
भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे लिखा "सत्यमेव जयते" मुण्डक उपनिषद से लिया गया है। कठोपनिषद में यम-नचिकेता संवाद है, और गीता महाभारत के भीष्म पर्व का भाग है।
उत्तर: (C) मुण्डक उपनिषद
गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश कहाँ दिया था?
- बोधगया
- कुशीनगर
- सारनाथ
- राजगृह
उत्तर एवं व्याख्या
ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने सारनाथ (वाराणसी के पास) के मृगदाव में पाँच साथियों को पहला उपदेश दिया, जिसे "धर्मचक्र प्रवर्तन" कहते हैं। बोधगया में ज्ञान मिला, कुशीनगर में महापरिनिर्वाण हुआ, और राजगृह में प्रथम बौद्ध संगीति हुई।
उत्तर: (C) सारनाथ
"भारत का नेपोलियन" किस शासक को कहा जाता है?
- चंद्रगुप्त मौर्य
- समुद्रगुप्त
- अशोक
- हर्षवर्धन
उत्तर एवं व्याख्या
इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने समुद्रगुप्त की लगातार विजयों के कारण उसे "भारत का नेपोलियन" कहा। उसकी विजयों का वर्णन प्रयाग प्रशस्ति में है। अशोक युद्ध छोड़कर धम्म नीति के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर: (B) समुद्रगुप्त
शक संवत् किसने आरंभ किया?
- कनिष्क
- चंद्रगुप्त द्वितीय
- रुद्रदामन
- मिनांडर
उत्तर एवं व्याख्या
कुषाण शासक कनिष्क ने 78 ई. में शक संवत् शुरू किया। भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचांग इसी पर आधारित है। चंद्रगुप्त द्वितीय ने शकों को हराया था, रुद्रदामन शक क्षत्रप था (जूनागढ़ अभिलेख), और मिनांडर हिंद-यवन शासक था।
उत्तर: (A) कनिष्क
बाज़ार नियंत्रण नीति किस सुल्तान ने लागू की?
- बलबन
- मुहम्मद बिन तुगलक
- अलाउद्दीन खिलजी
- फ़िरोज़ शाह तुगलक
उत्तर एवं व्याख्या
अलाउद्दीन खिलजी ने विशाल स्थायी सेना को कम वेतन पर बनाए रखने के लिए अनाज, कपड़े, घोड़ों आदि के मूल्य तय किए और बाज़ार अधिकारी (शहना-ए-मंडी) नियुक्त किए। बलबन सिजदा-पैबोस के लिए, मुहम्मद बिन तुगलक सांकेतिक मुद्रा के लिए और फ़िरोज़ तुगलक नहरों के लिए जाना जाता है।
उत्तर: (C) अलाउद्दीन खिलजी
हल्दीघाटी का युद्ध (1576) किनके बीच हुआ था?
- बाबर और राणा सांगा
- अकबर और महाराणा प्रताप
- अकबर और हेमू
- जहाँगीर और अमर सिंह
उत्तर एवं व्याख्या
1576 में हल्दीघाटी में अकबर की सेना (सेनापति मानसिंह) और मेवाड़ के महाराणा प्रताप के बीच युद्ध हुआ। बाबर-राणा सांगा का युद्ध खानवा (1527) में हुआ, अकबर-हेमू का युद्ध पानीपत II (1556) था।
उत्तर: (B) अकबर और महाराणा प्रताप
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने की?
- कृष्णदेव राय
- हरिहर और बुक्का
- देवराय प्रथम
- अलाउद्दीन हसन
उत्तर एवं व्याख्या
1336 में संगम वंश के दो भाइयों हरिहर और बुक्का ने तुंगभद्रा के तट पर विजयनगर की स्थापना की। कृष्णदेव राय सबसे प्रसिद्ध शासक था, देवराय संगम वंश का बाद का शासक था, और अलाउद्दीन हसन बहमनी साम्राज्य का संस्थापक था।
उत्तर: (B) हरिहर और बुक्का
"आइन-ए-अकबरी" के लेखक कौन हैं?
- फ़ैज़ी
- बदायूँनी
- अबुल फ़ज़ल
- गुलबदन बेगम
उत्तर एवं व्याख्या
"आइन-ए-अकबरी" अबुल फ़ज़ल ने लिखी, जो "अकबरनामा" का तीसरा भाग है और अकबर के प्रशासन का विस्तृत विवरण देती है। फ़ैज़ी अबुल फ़ज़ल का भाई और कवि था, बदायूँनी ने "मुंतखब-उत-तवारीख" लिखी, और गुलबदन बेगम ने "हुमायूँनामा"।
उत्तर: (C) अबुल फ़ज़ल
तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर किस शासक ने बनवाया?
- राजेंद्र प्रथम
- राजराज प्रथम
- नरसिंहवर्मन प्रथम
- कृष्ण प्रथम
उत्तर एवं व्याख्या
चोल शासक राजराज प्रथम ने लगभग 1010 ई. में तंजावुर का बृहदेश्वर (राजराजेश्वर) मंदिर बनवाया। राजेंद्र प्रथम ने गंगैकोंडचोलपुरम बसाया, नरसिंहवर्मन ने महाबलीपुरम के रथ बनवाए और कृष्ण प्रथम ने एलोरा का कैलाश मंदिर।
उत्तर: (B) राजराज प्रथम
मुहम्मद बिन तुगलक के संबंध में कौन-से कथन सही हैं? 1. उसने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की। 2. उसने सांकेतिक मुद्रा चलाई। 3. इब्न बतूता उसके दरबार में आया।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर एवं व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी को दौलताबाद (देवगिरि) ले जाने का प्रयोग किया, ताँबे-पीतल की सांकेतिक मुद्रा चलाई, और मोरक्को का यात्री इब्न बतूता उसके दरबार में काज़ी नियुक्त हुआ। बतूता ने "रेहला" में इसका वर्णन किया।
उत्तर: (D) 1, 2 और 3
सही मिलान चुनिए — (a) रामचरितमानस (b) सूरसागर (c) बीजक (d) ज्ञानेश्वरी
- a-तुलसीदास, b-सूरदास, c-कबीर, d-ज्ञानेश्वर
- a-सूरदास, b-तुलसीदास, c-कबीर, d-ज्ञानेश्वर
- a-तुलसीदास, b-सूरदास, c-ज्ञानेश्वर, d-कबीर
- a-कबीर, b-सूरदास, c-तुलसीदास, d-ज्ञानेश्वर
उत्तर एवं व्याख्या
रामचरितमानस तुलसीदास (अवधी), सूरसागर सूरदास (ब्रजभाषा), बीजक कबीर की वाणियों का संग्रह और ज्ञानेश्वरी गीता पर ज्ञानेश्वर की मराठी टीका है। बाकी विकल्पों में कम से कम दो जोड़े आपस में बदले गए हैं।
उत्तर: (A) a-तुलसीदास, b-सूरदास, c-कबीर, d-ज्ञानेश्वर
17. त्वरित पुनरावृत्ति
- सिंधु: 1921 हड़प्पा; मोहनजोदड़ो — स्नानागार; लोथल — गोदी; कालीबंगा — जुते खेत; लोहा अज्ञात।
- वैदिक: ऋग्वेद सबसे प्राचीन; इंद्र प्रमुख देवता; दशराज्ञ युद्ध परुष्णी तट पर।
- बुद्ध: लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर; महावीर: कुंडग्राम, पावापुरी।
- मौर्य: चाणक्य-अर्थशास्त्र; मेगस्थनीज़-इंडिका; अशोक — कलिंग 261 ई.पू., धम्म।
- गुप्त: समुद्रगुप्त-प्रयाग प्रशस्ति; चंद्रगुप्त II-फाह्यान, कालिदास; आर्यभट्ट।
- सल्तनत: ऐबक 1206; इल्तुतमिश — इक्ता; अलाउद्दीन — बाज़ार; तुगलक — प्रयोग; लोदी — आगरा।
- मुगल: पानीपत 1526/1556/1761; खानवा 1527; हल्दीघाटी 1576; अकबर — मनसबदारी, दीन-ए-इलाही।