1. अध्याय एक नज़र में
Paper I के 1.7 से 1.9 भाग — आर्थिक संगठन, राजनीतिक संगठन और सामाजिक नियंत्रण तथा धर्म — यह दिखाते हैं कि सरल और जटिल समाज उत्पादन, वितरण, सत्ता और पवित्रता को कैसे संगठित करते हैं। UPSC इनसे नियमित रूप से पूछता है: 2024 में कुला का सांस्कृतिक महत्व और सत्ता व राजनीतिक संगठन के रूप; 2023 में वैश्वीकरण का स्थानीय/आदिवासी अर्थव्यवस्थाओं पर प्रभाव और क्लिफ़र्ड गीर्ट्ज़ की धर्म-दृष्टि।
- आर्थिक मानवशास्त्र — रूपवादी-तत्ववादी बहस, उत्पादन के प्रकार, विनिमय (पारस्परिकता, पुनर्वितरण, बाज़ार), कुला, पोटलैच, जजमानी।
- राजनीतिक मानवशास्त्र — बैंड, जनजाति, मुखियातंत्र, राज्य; सत्ता और प्राधिकार; क़ानून और सामाजिक नियंत्रण।
- धर्म — उत्पत्ति के सिद्धांत, जादू-धर्म-विज्ञान, पवित्र विशेषज्ञ, धर्म के अध्ययन के दृष्टिकोण।
2. आर्थिक संगठन
रूपवादी बनाम तत्ववादी बहस
| पक्ष | रूपवादी (Formalist) | तत्ववादी (Substantivist) |
|---|---|---|
| प्रवर्तक | रेमंड फ़र्थ, हेरोल्ड श्नाइडर, मेल्विल हर्सकोविट्स, स्कॉट कुक | कार्ल पोलान्यी (The Great Transformation, 1944), जॉर्ज डाल्टन, मार्शल सहलिन्स |
| मान्यता | मनुष्य सर्वत्र "तार्किक अधिकतमकर्ता" — अर्थशास्त्र के नियम सार्वभौमिक | अर्थव्यवस्था सामाजिक संबंधों में "अंतर्निहित" (embedded) है |
| इकाई | व्यक्ति, अभाव, चयन | संस्थाएँ, नातेदारी, धर्म, राजनीति |
| उपयुक्तता | बाज़ार अर्थव्यवस्था | पूर्व-बाज़ार/आदिम अर्थव्यवस्था |
तीसरा पक्ष — मार्क्सवादी/सांस्कृतिक (मॉरिस गोडेलिए, क्लॉड मेयासू) — उत्पादन की पद्धति और शोषण पर ध्यान; बाद में स्टीफ़न गुडमैन का "सांस्कृतिक अर्थशास्त्र"।
उत्पादन के प्रकार (Subsistence strategies)
| प्रकार | विशेषताएँ | भारतीय उदाहरण |
|---|---|---|
| शिकार-संग्रह (Foraging) | छोटे घुमंतू बैंड, समतावादी, लचीली सदस्यता; सहलिन्स — "original affluent society" (कम श्रम-घंटे) | जारवा, ओंगे, सेंटिनली (अंडमान); बिरहोर, चेंचू, कादर |
| पशुचारण (Pastoralism) | मौसमी प्रवास (transhumance), पशु = धन | टोडा (भैंस), गद्दी, बकरवाल, रेबारी, भरवाड |
| झूम / स्थानांतरित खेती (Shifting cultivation) | "काटो-जलाओ" (slash and burn), 5-15 वर्ष का परती चक्र | पूर्वोत्तर में "झूम", ओडिशा में "पोडु/डोंगर चास", बैगा "बेवर", मलेर "कुरवा" |
| स्थायी कृषि | हल, सिंचाई, अधिशेष, ग्राम | अधिकांश भारत; अपातानी की गीली धान खेती + मछली पालन (ज़ीरो घाटी) |
| औद्योगिक/उत्तर-औद्योगिक | मज़दूरी, बाज़ार, सेवा क्षेत्र | शहरी भारत; गिग अर्थव्यवस्था |
विनिमय के रूप — कार्ल पोलान्यी
- पारस्परिकता (Reciprocity) — सहलिन्स (Stone Age Economics, 1972) के तीन प्रकार: सामान्यीकृत (निकट नातेदार — बदले की अपेक्षा नहीं), संतुलित (समान मूल्य, निश्चित समय में — उपहार विनिमय, कुला), नकारात्मक (अजनबी से अधिकतम लाभ — मोलभाव, चोरी)।
- पुनर्वितरण (Redistribution) — केंद्र (मुखिया, मंदिर, राज्य) में संग्रह और फिर वितरण — पोटलैच, जजमानी, कर-कल्याण प्रणाली।
- बाज़ार विनिमय — मुद्रा, माँग-आपूर्ति; जनजातीय हाट (साप्ताहिक बाज़ार — सामाजिक मिलन स्थल भी)।
- मूक व्यापार (Silent trade) — बिना आमने-सामने आए वस्तु-विनिमय (पुराने विवरण — वेद्दा, अंडमान)।
कुला (UPSC 2024)
ट्रोब्रिएंड और आसपास के द्वीपों (पापुआ न्यू गिनी) में औपचारिक विनिमय का वृत्त: सोउलावा (लाल शंख-हार) दक्षिणावर्त (clockwise) और म्वाली (सफ़ेद शंख-बाजूबंद) वामावर्त (anticlockwise) घूमते हैं। वस्तुएँ स्थायी रूप से नहीं रखी जातीं — कुछ समय रखकर आगे दी जाती हैं; साझेदारी जीवनभर की होती है।
- सांस्कृतिक महत्व — (1) प्रतिष्ठा और प्रस्थिति — प्रसिद्ध वस्तुएँ पाने से सम्मान; (2) सामाजिक और राजनीतिक गठबंधन — द्वीपों के बीच शांति; (3) साथ में होने वाला गिमवाली (सामान्य व्यापार — उपयोगी वस्तुएँ); (4) जादू और मिथक — डोंगी-निर्माण, यात्रा में जादू; (5) उपहार का दर्शन — मार्सेल मॉस (The Gift, 1925): देने, लेने और लौटाने का दायित्व, "समग्र सामाजिक तथ्य" (total social fact); (6) "आर्थिक मनुष्य" (homo economicus) की अवधारणा का खंडन — मनुष्य केवल लाभ के लिए विनिमय नहीं करता।
- बाद के अध्ययन — एनेट वाइनर (Women of Value, Men of Renown, 1976) — मालिनोव्स्की ने स्त्रियों के केले-पत्ते के बंडलों (doba) के विनिमय की उपेक्षा की; जेरी लीच और एडमंड लीच (The Kula, 1983)।
पोटलैच और अन्य उदाहरण
- पोटलैच — उत्तर-पश्चिम अमेरिकी तट (क्वाक्वाक्वाक्वा/क्वाकिउटल, बोआस का अध्ययन) — भोज में संपत्ति का दान या विनाश कर प्रतिष्ठा प्राप्त करना; प्रतिस्पर्धी पुनर्वितरण; कनाडा ने 1884-1951 तक प्रतिबंध लगाया। व्याख्याएँ — रूथ बेनेडिक्ट (मेगालोमैनियक "डायोनिसियन" संस्कृति), मार्विन हैरिस/पियाडा (पारिस्थितिक — क्षेत्रों के बीच संसाधन संतुलन)।
- मोका (पापुआ न्यू गिनी — "बिग मैन" द्वारा सूअर विनिमय, एंड्रयू स्ट्रैदर्न)।
- जजमानी व्यवस्था — विलियम वाइज़र (The Hindu Jajmani System, 1936, करीमपुर, उ.प्र.) — भूस्वामी "जजमान" और सेवा-जातियाँ "कमीन/पुरजन"; वार्षिक अनाज-भुगतान; पारस्परिकता बनाम शोषण (थॉमस बीडलमैन — "शोषणकारी"); मुद्रा अर्थव्यवस्था और हरित क्रांति से क्षय।
संपत्ति और श्रम
- संपत्ति — सामुदायिक (वन, चरागाह, कुल-भूमि — मुंडा "खुंटकट्टी"), व्यक्तिगत, अमूर्त (गीत, जादू-मंत्र, नाम)।
- श्रम-विभाजन — आयु और लिंग आधारित; सामूहिक श्रम (मदद प्रथा — "हल्मा" भील, "मदईत")।
वैश्वीकरण और आदिवासी अर्थव्यवस्थाएँ (UPSC 2023)
| सकारात्मक प्रभाव | नकारात्मक प्रभाव |
|---|---|
| बाज़ार तक पहुँच — लघु वनोपज (महुआ, तेंदू, लाख, शहद) के लिए; GI टैग (कोरापुट काला जीरा चावल, डोंगरिया कोंध शॉल) | खनन, बाँध, SEZ से भूमि-अलगाव और विस्थापन (नियमगिरि, POSCO विवाद) |
| पर्यटन, हस्तशिल्प निर्यात (डोकरा, वारली, गोंड चित्रकला) | बौद्धिक संपदा और पारंपरिक ज्ञान की चोरी (bio-piracy — नीम, हल्दी पेटेंट विवाद) |
| मोबाइल, डिजिटल भुगतान, SHG और माइक्रोफ़ाइनेंस | नक़दी फ़सलें, खाद्य असुरक्षा, ऋणग्रस्तता |
| शिक्षा, प्रवासी रोज़गार से आय | संकटजन्य प्रवासन (ईंट भट्ठे, निर्माण क्षेत्र), तस्करी |
| वन धन योजना (2018), MSP for MFP, TRIFED | पारस्परिकता और सामुदायिक संपत्ति का क्षरण, सांस्कृतिक समरूपीकरण |
3. राजनीतिक संगठन और सामाजिक नियंत्रण
एल्मन सर्विस (1962) का वर्गीकरण
| प्रकार | जनसंख्या/अर्थव्यवस्था | नेतृत्व | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| बैंड (Band) | 25-150; शिकार-संग्रह | अनौपचारिक, प्रभाव पर आधारित; समतावादी | कुंग सैन (!Kung San), जारवा, बिरहोर |
| जनजाति (Tribe) | सैकड़ों-हज़ारों; बागवानी, पशुचारण | "बिग मैन", कुल-बुज़ुर्ग, आयु-वर्ग, युवागृह | नुएर, मेलानेशियाई बिग मैन; नागा ग्राम |
| मुखियातंत्र (Chiefdom) | हज़ारों; अधिशेष, पुनर्वितरण | वंशानुगत मुखिया, श्रेणीबद्ध (ranked) | पॉलिनेशियाई (टोंगा, हवाई), खासी "सियेम", मिज़ो मुखिया |
| राज्य (State) | बड़ी जनसंख्या; गहन कृषि, नगर | केंद्रीकृत सत्ता, नौकरशाही, बल प्रयोग का एकाधिकार, कर | मौर्य, आधुनिक भारत |
- मॉर्टन फ़्रीड (1967) — समतावादी (egalitarian) → श्रेणीबद्ध (rank) → स्तरीकृत (stratified) → राज्य।
- African Political Systems (फ़ोर्टेस और इवांस-प्रिचर्ड, 1940) — राज्यविहीन समाज (नुएर, टालेंसी — खंडीय वंश) बनाम राज्य वाले समाज (ज़ुलु, न्गवातो)।
सत्ता, प्राधिकार और राजनीतिक संगठन के रूप (UPSC 2024)
- शक्ति (Power) — दूसरों के प्रतिरोध के बावजूद अपनी इच्छा लागू करने की क्षमता; प्राधिकार (Authority) — वैध शक्ति, जिसे स्वीकार किया जाता है।
- मैक्स वेबर के प्राधिकार के तीन आदर्श प्रकार — पारंपरिक (प्रथा पर आधारित — मुखिया, राजा, जाति पंचायत), करिश्माई (व्यक्तिगत असाधारण गुण — बिरसा मुंडा, गांधी), तार्किक-वैधानिक (नियम और पद — नौकरशाही, निर्वाचित प्रतिनिधि); करिश्मा का "नैत्यकीकरण" (routinisation)।
- प्रभाव (Influence) बनाम प्राधिकार — बैंड-नेता केवल समझाकर नेतृत्व करते हैं।
- भारत में जनजातीय राजनीतिक संगठन — मुंडा पड़हा व्यवस्था (कई गाँवों का संघ, "पड़हा राजा"), संथाल ग्राम-परिषद (माँझी, परगना), हो (मुंडा-मानकी), नागा ग्राम गणतंत्र (अंगामी — लोकतांत्रिक; कोन्याक — "आंग" वंशानुगत मुखिया), खासी (दरबार, सियेम), भील (गमेती/तड़वी)।
सामाजिक नियंत्रण और क़ानून
- सामाजिक नियंत्रण — अनौपचारिक (लोकरीतियाँ, रूढ़ियाँ, उपहास, गप-शप, बहिष्कार, जादू-टोने का भय) और औपचारिक (क़ानून, पुलिस, न्यायालय, पंचायत)।
- क़ानून — रैडक्लिफ़-ब्राउन: "राजनीतिक रूप से संगठित समाज की शक्ति के व्यवस्थित प्रयोग द्वारा सामाजिक नियंत्रण"; मालिनोव्स्की (Crime and Custom in Savage Society, 1926): ट्रोब्रिएंड में पारस्परिक दायित्व ही क़ानून — "binding obligations"; ई. एडमसन होबेल (The Law of Primitive Man, 1954): जिस मानदंड के उल्लंघन पर सामाजिक रूप से अधिकृत बल प्रयोग हो, वही क़ानून।
- न्याय के रूप — दिव्य परीक्षा (ordeal — गर्म तेल/पानी), शपथ (oath), "गीत-द्वंद्व" (इनुइट song duel), "रक्त-प्रतिशोध" (feud) और क्षतिपूर्ति (नुएर में "तेंदुआ-खाल मुखिया" मध्यस्थ), बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद), "जुर्माना/भोज"।
- क़ानूनी बहुलवाद (Legal pluralism) — राज्य क़ानून के साथ प्रथागत क़ानून (छठी अनुसूची में ज़िला परिषदों के न्यायालय, अनुच्छेद 371A), खाप पंचायतों का विवाद।
राज्य की उत्पत्ति (संबंधित: UPSC 2024 Paper II 1(b))
- हाइड्रोलिक सिद्धांत — कार्ल विटफ़ोगेल (Oriental Despotism, 1957): बड़ी सिंचाई व्यवस्था से केंद्रीकृत सत्ता।
- परिसीमन (Circumscription) सिद्धांत — रॉबर्ट कार्नेरो (1970): भौगोलिक/सामाजिक सीमा में जनसंख्या दबाव से युद्ध और विजेता का राज्य।
- व्यापार सिद्धांत, मार्क्सवादी (एंगेल्स — Origin of the Family, Private Property and the State, 1884: वर्ग-संघर्ष), एकीकरण सिद्धांत (सर्विस — लाभ के कारण स्वीकृति)।
- भारत — महाजनपद (6वीं सदी ई.पू.), जनजातीय राज्य-निर्माण (छोटानागपुर के नागवंशी, सुरजीत सिन्हा — "राजपूतीकरण" द्वारा जनजातीय मुखिया का राजा बनना)।
4. धर्म (Religion)
टायलर — "आध्यात्मिक सत्ताओं में विश्वास" (minimum definition); दुर्खाइम (The Elementary Forms of Religious Life, 1912) — "पवित्र (sacred) वस्तुओं से संबंधित विश्वासों और आचरणों की एकीकृत व्यवस्था जो अनुयायियों को एक नैतिक समुदाय (चर्च) में बाँधती है"; गीर्ट्ज़ (1966) — "प्रतीकों की व्यवस्था" (नीचे विस्तार)।
धर्म की उत्पत्ति के सिद्धांत
| सिद्धांत | विचारक | मुख्य तर्क |
|---|---|---|
| जीववाद (Animism) | ई.बी. टायलर (1871) | स्वप्न, मृत्यु, छाया से "आत्मा" का विचार → आत्माओं की पूजा |
| जीवितसत्तावाद (Animatism/Pre-animism) | आर.आर. मैरेट (1909) | अवैयक्तिक अलौकिक शक्ति — "माना" (मेलानेशिया, कोड्रिंगटन); भारत में "बोंगा" (मजूमदार — हो/मुंडा) |
| प्रकृतिवाद (Naturism) | मैक्स मूलर | प्राकृतिक शक्तियों (सूर्य, अग्नि, वर्षा) का मानवीकरण — वैदिक देवता |
| टोटमवाद (Totemism) | दुर्खाइम | टोटेम = कुल का प्रतीक = समाज ही "ईश्वर"; सामूहिक उत्साह (collective effervescence) — ऑस्ट्रेलिया के अरुंटा |
| जादू से धर्म | जेम्स फ़्रेज़र (The Golden Bough, 1890) | जादू → धर्म → विज्ञान (विकास क्रम) |
| मनोवैज्ञानिक | फ़्रायड (Totem and Taboo, 1913), मालिनोव्स्की | पितृ-हत्या की आदिम स्मृति; चिंता और अनिश्चितता का समाधान |
| मार्क्सवादी | कार्ल मार्क्स | "जनता की अफ़ीम" — वर्ग-शोषण को वैध बनाता है |
जादू, धर्म और विज्ञान
- फ़्रेज़र — जादू के दो सिद्धांत: अनुकरणात्मक/होम्योपैथिक (समान से समान — पुतला जलाना) और संसर्गजन्य (contagious) (एक बार संपर्क में आई वस्तु — बाल, नाख़ून); जादू "छद्म-विज्ञान" है।
- मालिनोव्स्की (Magic, Science and Religion, 1948) — ट्रोब्रिएंड लोग शांत लैगून में मछली पकड़ने में जादू नहीं करते, पर खुले समुद्र (जोखिम) में करते हैं — जादू अनिश्चितता और चिंता में मनोवैज्ञानिक संबल देता है; जादू व्यावहारिक, धर्म जीवन-संकटों (मृत्यु) से जुड़ा।
- ई.ई. इवांस-प्रिचर्ड (Witchcraft, Oracles and Magic among the Azande, 1937) — टोना (witchcraft) "क्यों" (दुर्भाग्य मुझ पर ही क्यों?) का उत्तर देता है — अपनी तार्किकता वाला व्याख्या-तंत्र; witchcraft (जन्मजात, अनैच्छिक) बनाम sorcery (सीखी गई, जानबूझकर)।
- भारत — "डायन" के नाम पर हिंसा (झारखंड, ओडिशा, असम) — झारखंड डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001, असम Witch Hunting (Prohibition) अधिनियम 2015।
धार्मिक विशेषज्ञ
- पुरोहित (Priest) — संस्थागत, प्रशिक्षित, पद-आधारित (मुंडा का पाहन, संथाल का नायके, ब्राह्मण पुरोहित)।
- ओझा/शमन (Shaman) — व्यक्तिगत, आत्मा से संपर्क (trance), रोग-निवारण — साइबेरियाई तुंगुस शब्द; भारत में ओझा, देओनरा, गुनिया, भगत, सोरा (सवरा) के "कुरानमारन" (वेरियर एल्विन; पियर्स विटेब्स्की)।
- पैगंबर (Prophet) — करिश्माई, नया संदेश — बिरसा मुंडा ("धरती आबा"), बाद में आंदोलन।
अनुष्ठान (Ritual)
- संक्रमण संस्कार (Rites of passage) — आर्नोल्ड वान गेनेप (1909): तीन चरण — पृथक्करण (separation), संक्रमण/सीमावर्तिता (liminality), पुनर्समावेशन (incorporation); उदाहरण — उपनयन, विवाह, जनजातीय दीक्षा, घोटुल प्रवेश।
- विक्टर टर्नर (The Ritual Process, 1969) — liminality और communitas (समानता और एकता की भावना — कुंभ मेला, तीर्थयात्रा); प्रतीकों की बहु-अर्थता (Ndembu)।
- शुद्धता-अशुद्धता — मैरी डगलस (Purity and Danger, 1966): "गंदगी स्थान से बाहर की वस्तु" (matter out of place); भारत में ड्यूमों (Homo Hierarchicus, 1966)।
क्लिफ़र्ड गीर्ट्ज़ और धर्म (UPSC 2023)
गीर्ट्ज़ के अनुसार धर्म है — (1) प्रतीकों की एक व्यवस्था जो (2) मनुष्यों में शक्तिशाली, व्यापक और दीर्घकालिक मनोदशाएँ और प्रेरणाएँ (moods and motivations) स्थापित करती है, (3) अस्तित्व की एक सामान्य व्यवस्था की अवधारणाएँ गढ़कर, (4) इन अवधारणाओं को तथ्यात्मकता की ऐसी आभा से ढककर कि (5) वे मनोदशाएँ और प्रेरणाएँ अद्वितीय रूप से यथार्थवादी प्रतीत हों। (भावानुवाद)
- मुख्य बिंदु — धर्म "model of" (यथार्थ का प्रतिबिंब) और "model for" (यथार्थ का निर्माता) दोनों; धर्म तीन समस्याओं का उत्तर देता है — बौद्धिक (असंगत घटनाएँ), पीड़ा (दुःख कैसे सहें), नैतिक (अन्याय क्यों); अनुष्ठान में "ethos" (जीवन-शैली) और "world view" (विश्व-दृष्टि) का संलयन।
- पद्धति — "गहन विवरण" (thick description, 1973) — व्याख्यात्मक (interpretive) मानवशास्त्र; उदाहरण — बाली का मुर्ग़ा-लड़ाई ("Deep Play"), जावा का "स्लामेतान" भोज, The Religion of Java (1960) — अबंगान, सांत्री, प्रियायी।
- आलोचना — तलाल असद (Genealogies of Religion, 1993): गीर्ट्ज़ की परिभाषा ईसाई-प्रोटेस्टेंट "विश्वास" केंद्रित है, अनुशासन और सत्ता की उपेक्षा करती है; अर्थ पर अत्यधिक ज़ोर, सामाजिक प्रक्रिया पर कम।
मानवशास्त्रीय बनाम मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
| पक्ष | मानवशास्त्रीय | मनोवैज्ञानिक |
|---|---|---|
| इकाई | समाज/संस्कृति, समूह | व्यक्ति का मन |
| प्रश्न | धर्म समाज में क्या करता है, क्या अर्थ देता है? | व्यक्ति धर्म में क्यों विश्वास करता है? |
| विचारक | दुर्खाइम, रैडक्लिफ़-ब्राउन, गीर्ट्ज़, टर्नर, लेवी-स्ट्रॉस | फ़्रायड (भ्रम, पितृ-छवि), युंग (archetypes), विलियम जेम्स (Varieties of Religious Experience, 1902) |
| पद्धति | नृवंशवर्णन, सहभागी अवलोकन, तुलना | नैदानिक, प्रयोगात्मक, अंतर्दर्शन |
| सेतु | मालिनोव्स्की (व्यक्तिगत चिंता + सामाजिक कार्य), संस्कृति-व्यक्तित्व स्कूल, संज्ञानात्मक धर्म-विज्ञान (पास्कल बॉयर) | |
धर्म के कार्य
- दुर्खाइम — सामाजिक एकता; मालिनोव्स्की — चिंता-निवारण; रैडक्लिफ़-ब्राउन — सामाजिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; वेबर (Protestant Ethic, 1905) — आर्थिक व्यवहार पर प्रभाव; मार्क्स — वैधता और भ्रम; वॉलेस (1956) — पुनरुत्थान आंदोलन (revitalization movements) — संकट में संस्कृति के पुनर्निर्माण के प्रयास (भारत — बिरसाइत, ताना भगत, भगत आंदोलन; मेलानेशिया के "कार्गो कल्ट")।
5. Master Summary Table
| विषय | मुख्य विचारक / कृति | याद रखें |
|---|---|---|
| आर्थिक बहस | पोलान्यी 1944 (तत्ववादी), फ़र्थ (रूपवादी) | embedded economy |
| पारस्परिकता | सहलिन्स 1972 | सामान्यीकृत, संतुलित, नकारात्मक |
| कुला | मालिनोव्स्की 1922; मॉस 1925; वाइनर 1976 | सोउलावा दक्षिणावर्त, म्वाली वामावर्त |
| पोटलैच | बोआस; बेनेडिक्ट | प्रतिस्पर्धी दान |
| जजमानी | वाइज़र 1936 | करीमपुर; पारस्परिकता बनाम शोषण |
| राजनीतिक प्रकार | सर्विस 1962; फ़्रीड 1967; फ़ोर्टेस-इवांस-प्रिचर्ड 1940 | बैंड-जनजाति-मुखियातंत्र-राज्य |
| प्राधिकार | मैक्स वेबर | पारंपरिक, करिश्माई, तार्किक-वैधानिक |
| क़ानून | मालिनोव्स्की 1926, होबेल 1954 | प्रथागत क़ानून, विधिक बहुलवाद |
| धर्म उत्पत्ति | टायलर, मैरेट, मूलर, दुर्खाइम, फ़्रेज़र | जीववाद, माना/बोंगा, टोटमवाद |
| अनुष्ठान | वान गेनेप 1909; टर्नर 1969; डगलस 1966 | liminality, communitas |
| व्याख्यात्मक | गीर्ट्ज़ 1966; आलोचक तलाल असद | moods and motivations |
6. चार्ट: कुला वृत्त
7. Mind Map
- रूपवादी-तत्ववादी
- पारस्परिकता, पुनर्वितरण
- कुला, पोटलैच, जजमानी
- बैंड → राज्य
- वेबर प्राधिकार
- पड़हा, माँझी, दरबार
- मालिनोव्स्की, होबेल
- ordeal, feud
- विधिक बहुलवाद
- टायलर, मैरेट, दुर्खाइम
- गीर्ट्ज़, असद
- जादू — फ़्रेज़र, मालिनोव्स्की
- वान गेनेप
- टर्नर
- शमन, पुरोहित, पैगंबर
8. महत्वपूर्ण One-liners
- "Argonauts of the Western Pacific" (1922) — मालिनोव्स्की; "The Gift" (1925) — मार्सेल मॉस।
- "The Great Transformation" (1944) — कार्ल पोलान्यी; "Stone Age Economics" (1972) — मार्शल सहलिन्स।
- "The Hindu Jajmani System" (1936) — विलियम वाइज़र।
- "African Political Systems" (1940) — फ़ोर्टेस और इवांस-प्रिचर्ड; "The Nuer" (1940) — इवांस-प्रिचर्ड।
- "Primitive Social Organization" (1962) — एल्मन सर्विस; परिसीमन सिद्धांत — रॉबर्ट कार्नेरो।
- "The Elementary Forms of Religious Life" (1912) — एमिल दुर्खाइम; "The Golden Bough" — जेम्स फ़्रेज़र।
- Animatism और "माना" — आर.आर. मैरेट; "बोंगावाद" — डी.एन. मजूमदार।
- "Les Rites de Passage" (1909) — आर्नोल्ड वान गेनेप; "Purity and Danger" (1966) — मैरी डगलस।
- "Religion as a Cultural System" (1966) — क्लिफ़र्ड गीर्ट्ज़; Revitalization movements (1956) — एंथनी वॉलेस।
- Azande में टोना और दैववाणी (1937) — इवांस-प्रिचर्ड।
9. टिप्स एवं ट्रिक्स
- कुला/पोटलैच प्रश्न में हमेशा मॉस के उपहार सिद्धांत और वाइनर की नारीवादी पुनर्व्याख्या जोड़ें।
- राजनीतिक संगठन के प्रश्न में सर्विस का वर्गीकरण + एक भारतीय जनजातीय उदाहरण (पड़हा, खासी दरबार) + PESA/छठी अनुसूची।
- धर्म प्रश्नों में सिद्धांत → भारतीय नृवंशवर्णन (बोंगा, सरना, ओझा) → समकालीन (डायन-हिंसा क़ानून, सरना कोड माँग)।
कुला दिशा — "हार घड़ी की सुई की तरह, बाजूबंद उलटा" (Soulava–clockwise, Mwali–anticlockwise); सर्विस क्रम — "बै-ज-मु-रा" (बैंड, जनजाति, मुखियातंत्र, राज्य)।
10. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
कुला की सांस्कृतिक प्रासंगिकता — टिप्पणी लिखिए।
मॉडल उत्तर
परिचय: मालिनोव्स्की (1922) ने ट्रोब्रिएंड और पड़ोसी द्वीपों में कुला का वर्णन किया — लाल शंख-हार (सोउलावा) दक्षिणावर्त और सफ़ेद शंख-बाजूबंद (म्वाली) वामावर्त, जीवनभर के साझेदारों के बीच।
सांस्कृतिक प्रासंगिकता: (1) वस्तुओं का उपयोग-मूल्य नहीं, प्रतीकात्मक मूल्य — प्रतिष्ठा और इतिहास; (2) द्वीपों के बीच शांति और राजनीतिक गठबंधन; (3) साथ में गिमवाली व्यापार से आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति; (4) डोंगी-निर्माण, जादू और मिथक — कुला एक "समग्र सामाजिक तथ्य" (मॉस); (5) "आर्थिक मनुष्य" की अवधारणा का खंडन; (6) सहभागी अवलोकन पद्धति की स्थापना।
आलोचना/विस्तार: एनेट वाइनर — स्त्रियों के विनिमय (doba) की उपेक्षा; आज कुला मुद्रा अर्थव्यवस्था के साथ जारी है।
निष्कर्ष: कुला यह दिखाता है कि विनिमय मूलतः सामाजिक संबंध बनाने का माध्यम है — यही आर्थिक मानवशास्त्र की तत्ववादी दृष्टि का आधार बना।
प्राधिकार और राजनीतिक संगठन के रूप — टिप्पणी लिखिए।
मॉडल उत्तर
प्राधिकार: वैध शक्ति — जिसे समाज स्वीकार करता है; वेबर के तीन प्रकार: पारंपरिक (मुखिया, जाति पंचायत), करिश्माई (बिरसा मुंडा), तार्किक-वैधानिक (नौकरशाही, निर्वाचित पंचायत)। शक्ति (बल) और प्रभाव (समझाना) से भिन्न।
राजनीतिक संगठन के रूप (एल्मन सर्विस): (1) बैंड — छोटा, समतावादी, अनौपचारिक नेतृत्व (जारवा); (2) जनजाति — कुल-बुज़ुर्ग, बिग मैन, आयु-वर्ग (नुएर, नागा); (3) मुखियातंत्र — वंशानुगत, श्रेणीबद्ध, पुनर्वितरण (खासी सियेम, पॉलिनेशिया); (4) राज्य — केंद्रीकृत, बल का एकाधिकार, कर, नौकरशाही।
भारतीय उदाहरण: मुंडा पड़हा, संथाल माँझी-परगना, अंगामी नागा का लोकतांत्रिक ग्राम बनाम कोन्याक का वंशानुगत "आंग"; आज PESA 1996 से पारंपरिक और वैधानिक प्राधिकार का संगम।
निष्कर्ष: राज्यविहीन समाजों (फ़ोर्टेस-इवांस-प्रिचर्ड) में भी व्यवस्था रहती है — सामाजिक नियंत्रण नातेदारी, धर्म और पारस्परिकता से।
स्थानीय/आदिवासी समुदायों की आर्थिक व्यवस्थाओं पर वैश्वीकरण के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: वैश्वीकरण — वस्तुओं, पूँजी, तकनीक, लोगों और विचारों का वैश्विक प्रवाह (अप्पादुरै के "scapes")। आदिवासी अर्थव्यवस्थाएँ पारंपरिक रूप से जीविका-आधारित, पारस्परिकता और सामुदायिक संपत्ति पर आधारित रही हैं (पोलान्यी — "embedded")।
सकारात्मक प्रभाव: (1) वनोपज और हस्तशिल्प के लिए विस्तृत बाज़ार — GI टैग, ई-कॉमर्स, TRIFED, वन धन केंद्र; (2) पर्यटन; (3) SHG और डिजिटल वित्तीय समावेशन; (4) शिक्षा और रोज़गार के अवसर; (5) वैश्विक स्वदेशी अधिकार नेटवर्क (UNDRIP 2007) से आवाज़।
नकारात्मक प्रभाव: (1) भूमि-अलगाव और विस्थापन — खनन, बाँध, औद्योगिक गलियारे (नियमगिरि-वेदांता, कलिंगनगर 2006); (2) सामुदायिक संपत्ति का निजीकरण — "commons" का क्षरण; (3) बाज़ार-निर्भरता — नक़दी फ़सलें, मूल्य-अस्थिरता, ऋण, बिचौलिये; (4) संकटजन्य प्रवासन — ईंट भट्ठे, निर्माण, घरेलू काम, मानव तस्करी; (5) बौद्धिक संपदा की चोरी — पारंपरिक ज्ञान का पेटेंट; (6) खाद्य संस्कृति में परिवर्तन — मोटे अनाज से चावल-गेहूँ, कुपोषण; (7) लैंगिक प्रभाव — स्त्रियों की वन-आधारित आय का नुक़सान।
प्रतिरोध और अनुकूलन: ग्राम सभा निर्णय (FRA 2006, PESA), सहकारी मॉडल (लाख, महुआ), जैविक/पारंपरिक खेती का ब्रांडिंग (कोरापुट), "Glocalisation"।
निष्कर्ष: वैश्वीकरण आदिवासी समुदायों के लिए अवसर और जोखिम दोनों है; समुदाय की सहमति (FPIC), लाभ-साझेदारी (जैसे जिला खनिज फ़ाउंडेशन) और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विकास से ही इसे समावेशी बनाया जा सकता है।
क्लिफ़र्ड गीर्ट्ज़ ने धर्म को कैसे देखा? धर्म के अध्ययन के मानवशास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोणों में अंतर कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
गीर्ट्ज़ की दृष्टि: "Religion as a Cultural System" (1966) में धर्म को प्रतीकों की व्यवस्था माना जो मनोदशाएँ और प्रेरणाएँ स्थापित करती है, अस्तित्व की सामान्य व्यवस्था की अवधारणाएँ बनाती है और उन्हें "तथ्यात्मकता की आभा" देती है। धर्म "model of" और "model for" दोनों है; यह बौद्धिक भ्रम, पीड़ा और नैतिक विरोधाभास की समस्याओं का उत्तर देता है; अनुष्ठान में ethos और world view मिलते हैं। पद्धति — "thick description"; उदाहरण — जावा (The Religion of Java, 1960), बाली।
आलोचना: तलाल असद — परिभाषा "विश्वास"-केंद्रित और ईसाई-प्रोटेस्टेंट पूर्वाग्रह वाली; सत्ता और अनुशासन की उपेक्षा; व्याख्या में शोधकर्ता की व्यक्तिपरकता।
दृष्टिकोणों में अंतर: (1) इकाई — समाज/संस्कृति बनाम व्यक्ति; (2) प्रश्न — धर्म का सामाजिक अर्थ/कार्य बनाम विश्वास का मानसिक कारण; (3) विचारक — दुर्खाइम, रैडक्लिफ़-ब्राउन, टर्नर, गीर्ट्ज़ बनाम फ़्रायड, युंग, विलियम जेम्स; (4) पद्धति — नृवंशवर्णन, तुलनात्मक बनाम नैदानिक, प्रयोगात्मक; (5) व्याख्या — सामूहिक प्रतिनिधान बनाम व्यक्तिगत अनुभव, भय, इच्छा-पूर्ति।
सेतु: मालिनोव्स्की (व्यक्तिगत चिंता + सामाजिक कार्य), संस्कृति-व्यक्तित्व स्कूल, आधुनिक संज्ञानात्मक धर्म-विज्ञान; भारत में सुधीर कक्कड़ (Shamans, Mystics and Doctors) — मनोविश्लेषण और संस्कृति का मेल।
निष्कर्ष: गीर्ट्ज़ ने धर्म के अध्ययन को "कार्य" से "अर्थ" की ओर मोड़ा; मनोवैज्ञानिक और मानवशास्त्रीय दृष्टिकोण परस्पर पूरक हैं।
"जादू, धर्म और विज्ञान" पर फ़्रेज़र और मालिनोव्स्की के विचारों की तुलना कीजिए। भारतीय संदर्भ में उदाहरण दीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
फ़्रेज़र (The Golden Bough): विकासवादी क्रम — जादू → धर्म → विज्ञान; जादू "ग़लत विज्ञान" (प्रकृति के नियमों में विश्वास, पर ग़लत कार्य-कारण); अनुकरणात्मक और संसर्गजन्य जादू; धर्म — उच्च शक्तियों को प्रसन्न करना।
मालिनोव्स्की (Magic, Science and Religion, 1948): तीनों हर समाज में साथ-साथ — ट्रोब्रिएंड लोग बागवानी में तकनीकी ज्ञान (विज्ञान) और जादू दोनों अपनाते हैं; जादू वहाँ जहाँ परिणाम अनिश्चित (खुला समुद्र); जादू व्यावहारिक और विशिष्ट लक्ष्य वाला, धर्म जीवन-संकटों (जन्म, मृत्यु) से जुड़ा और स्वयं में लक्ष्य।
तुलना: विकासवादी बनाम प्रकार्यवादी; आरामकुर्सी बनाम क्षेत्रकार्य; जादू की "ग़लती" बनाम "मनोवैज्ञानिक कार्य"।
भारतीय उदाहरण: फ़सल के लिए अनुष्ठान (सरहुल, करमा) के साथ आधुनिक कृषि; परीक्षा से पहले ताबीज़ — अनिश्चितता में जादू; ओझा और अस्पताल दोनों का उपयोग (चिकित्सा बहुलवाद); "नज़र उतारना" — अनुकरणात्मक/संसर्गजन्य तत्व।
निष्कर्ष: मालिनोव्स्की का दृष्टिकोण अधिक यथार्थवादी है — आधुनिक समाजों में भी जादुई सोच अनिश्चितता के क्षेत्रों (खेल, परीक्षा, बाज़ार) में बनी रहती है।
11. Quick Revision Summary
- आर्थिक — रूपवादी (फ़र्थ) बनाम तत्ववादी (पोलान्यी); शिकार-संग्रह से औद्योगिक; पारस्परिकता के 3 प्रकार (सहलिन्स); कुला (मालिनोव्स्की, मॉस, वाइनर); पोटलैच; जजमानी (वाइज़र); वैश्वीकरण के प्रभाव।
- राजनीतिक — सर्विस (बैंड-जनजाति-मुखियातंत्र-राज्य), फ़्रीड; राज्यविहीन समाज (नुएर); वेबर का प्राधिकार; पड़हा, माँझी, खासी दरबार; राज्य उत्पत्ति — विटफ़ोगेल, कार्नेरो, एंगेल्स।
- क़ानून — मालिनोव्स्की, होबेल; ordeal, oath, feud; विधिक बहुलवाद।
- धर्म — टायलर (जीववाद), मैरेट (माना), मजूमदार (बोंगा), दुर्खाइम (टोटम), फ़्रेज़र (जादू), मालिनोव्स्की, इवांस-प्रिचर्ड (Azande), गीर्ट्ज़ बनाम असद; वान गेनेप, टर्नर, डगलस; पुरोहित-शमन-पैगंबर; वॉलेस के पुनरुत्थान आंदोलन।