1. अध्याय एक नज़र में
Paper I का Section B मुख्यतः भौतिक मानवशास्त्र है — मानव आनुवंशिकी (अध्ययन विधियाँ, मेंडेलियन और जनसंख्या आनुवंशिकी, गुणसूत्र विकार), प्रजाति और नृजातीय वर्गीकरण, आनुवंशिक चिह्नक (रक्त समूह, हीमोग्लोबिन), मानव वृद्धि-विकास, पोषण और जनांकिकी। यह सबसे अधिक प्रश्नों वाला भाग है — 2024 में अकेले आनुवंशिकी से सात प्रश्न (घातक जीन, हीमोग्लोबिन, कैरियोटाइप, आनुवंशिकता का आकलन, एकल-जीन विकार, बहुकारकीय लक्षण, ABO-Rh) और 2023 में बहुजीनी वंशागति, आनुवंशिक संतुलन, गुणसूत्रों की संरचनात्मक असामान्यताएँ, प्रजाति-नृजातीयता, DNA प्रौद्योगिकी आदि पूछे गए।
- मानव आनुवंशिकी — अध्ययन विधियाँ, मेंडल के नियम, वंशागति के प्रतिरूप, जीन अभिव्यक्ति।
- जनसंख्या आनुवंशिकी — हार्डी-वाइनबर्ग, विकास की शक्तियाँ।
- गुणसूत्र और विकार — कैरियोटाइप, संख्यात्मक और संरचनात्मक असामान्यताएँ, एकल-जीन विकार, आनुवंशिक परामर्श।
- प्रजाति, नृजातीयता, आनुवंशिक चिह्नक — ABO, Rh, हीमोग्लोबिन।
- वृद्धि, विकास, पोषण, जीवनशैली रोग।

2. मानव आनुवंशिकी की अध्ययन विधियाँ
मनुष्य पर नियंत्रित प्रजनन-प्रयोग संभव नहीं, पीढ़ियाँ लंबी और संतानें कम होती हैं — इसलिए विशेष विधियाँ अपनाई जाती हैं:
| विधि | क्या बताती है | उदाहरण |
|---|---|---|
| वंशावली (Pedigree) विश्लेषण | वंशागति का प्रतिरूप — प्रभावी/अप्रभावी, अलिंगी/X-सहलग्न | शाही परिवारों में हीमोफ़ीलिया (महारानी विक्टोरिया) |
| जुड़वाँ (Twin) अध्ययन | आनुवंशिकता बनाम पर्यावरण — समयुग्मज (MZ) बनाम द्वियुग्मज (DZ) | फ़्रांसिस गैल्टन; Concordance rate |
| गोद-लिए बच्चों का अध्ययन | जैविक बनाम पालक माता-पिता से समानता | बुद्धि, मनोविकार |
| जनसंख्या अध्ययन | जीन आवृत्तियाँ, आनुवंशिक बहाव | अंतर्विवाही जातियों में |
| कोशिकानुवंशिकी (Cytogenetics) | कैरियोटाइप — गुणसूत्र विकार | डाउन सिंड्रोम |
| जैव-रासायनिक और आणविक | प्रोटीन, एंज़ाइम, DNA अनुक्रम | PCR, DNA फ़िंगरप्रिंटिंग, जीनोम अनुक्रमण |
| Cytogenetic/ सहलग्नता और GWAS | रोगों से जुड़े जीन-स्थल | मधुमेह, हृदय रोग |
3. मेंडेलियन और गैर-मेंडेलियन वंशागति
- मेंडल (1865, मटर के पौधे; 1900 में डी व्रीज़, कोरेंस, शेरमाक द्वारा पुनर्खोज) — प्रभाविता का नियम, पृथक्करण का नियम, स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम। एकसंकर अनुपात 3:1, द्विसंकर 9:3:3:1।
- मनुष्य में वंशागति के प्रतिरूप:
| प्रतिरूप | लक्षण | उदाहरण |
|---|---|---|
| अलिंगी प्रभावी (Autosomal dominant) | हर पीढ़ी में, स्त्री-पुरुष समान; प्रभावित माता-पिता से 50% संभावना | हंटिंगटन रोग, अकॉन्ड्रोप्लेज़िया (बौनापन), मार्फ़न सिंड्रोम, पॉलीडैक्टिली |
| अलिंगी अप्रभावी (Autosomal recessive) | पीढ़ियाँ छोड़कर; वाहक माता-पिता से 25%; सगोत्र विवाह में अधिक | थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, ऐल्बिनिज़्म, फ़ेनिलकीटोन्यूरिया, सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस |
| X-सहलग्न अप्रभावी | पुरुष अधिक प्रभावित; वाहक माँ से बेटों में; पिता से पुत्र में नहीं | हीमोफ़ीलिया, लाल-हरा वर्णांधता, G6PD कमी, डुशेन पेशी दुर्विकास |
| X-सहलग्न प्रभावी | प्रभावित पिता की सभी बेटियाँ प्रभावित | विटामिन-D प्रतिरोधी रिकेट्स |
| Y-सहलग्न (Holandric) | केवल पिता से पुत्र | कान पर बाल (hypertrichosis pinnae — विवादित) |
गैर-मेंडेलियन वंशागति
- अपूर्ण प्रभाविता (गुलाबी फूल — स्नैपड्रैगन; मनुष्य में पारिवारिक हाइपरकोलेस्टेरोलेमिया), सह-प्रभाविता (AB रक्त समूह), बहुविकल्पी (multiple alleles) — ABO (IA, IB, i)।
- बहुजीनी वंशागति (Polygenic — UPSC 2023) — एक लक्षण अनेक जीनों के योगात्मक (additive) प्रभाव से; सतत विविधता और घंटी-आकार (normal) वितरण; उदाहरण — त्वचा का रंग, कद, बुद्धि-लब्धि, अंगुली-छाप रेखा गणना; पर्यावरण का भी प्रभाव।
- बहुकारकीय लक्षण (Multifactorial — UPSC 2024) — अनेक जीन + पर्यावरण; "threshold model" — दायित्व (liability) एक सीमा पार करे तो रोग; उदाहरण — कटे होंठ-तालु, न्यूरल ट्यूब दोष, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्किज़ोफ़्रेनिया; परिवार में पुनरावृत्ति जोखिम निकट संबंधियों में अधिक।
- प्लियोट्रॉपी (एक जीन अनेक लक्षण — सिकल सेल), एपिस्टैसिस (एक जीन दूसरे को दबाए — बॉम्बे रक्त समूह), पेनिट्रेंस और एक्सप्रेसिविटी, जीनोमिक इम्प्रिंटिंग (प्रेडर-विली/एंजेलमैन), माइटोकॉन्ड्रियल वंशागति (केवल माँ से)।
- घातक और अर्ध-घातक जीन (UPSC 2024) — घातक जीन (lethal) जो जन्म से पहले या जनन-आयु से पहले मृत्यु कराते हैं; प्रभावी घातक (समाप्त हो जाते हैं), अप्रभावी घातक (वाहकों में बने रहते हैं — Tay-Sachs); अर्ध-घातक/उप-घातक (sublethal/semilethal) जो 50% से कम जीवित रहने देते हैं (हीमोफ़ीलिया — उपचार से पहले); चूहों में पीले रंग का जीन (AY) — 2:1 अनुपात (क्वेनो, 1905)।
जीन अभिव्यक्ति (Gene expression — UPSC 2023)
DNA की सूचना का प्रोटीन (या कार्यात्मक RNA) में रूपांतरण — "केंद्रीय सिद्धांत" (क्रिक): DNA → (प्रतिलेखन) → mRNA → (अनुवाद) → प्रोटीन। नियंत्रण — प्रवर्तक (promoter), प्रतिलेखन कारक, लैक ओपेरॉन (जैकब-मोनॉड, जीवाणु), एपिजेनेटिक नियंत्रण (DNA मेथिलेशन, हिस्टोन परिवर्तन — पर्यावरण और आहार से प्रभावित); ऊतक-विशिष्ट अभिव्यक्ति (हर कोशिका में DNA समान, पर सक्रिय जीन भिन्न)।
4. जनसंख्या आनुवंशिकी: हार्डी-वाइनबर्ग संतुलन
हार्डी (गणितज्ञ) और वाइनबर्ग (चिकित्सक) ने 1908 में स्वतंत्र रूप से बताया कि एक बड़ी, यादृच्छिक संयोग वाली जनसंख्या में, विकास की शक्तियों के अभाव में, जीन और जीनोटाइप आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रहती हैं।
एलील आवृत्तियाँ: p + q = 1; जीनोटाइप आवृत्तियाँ: p² + 2pq + q² = 1 (AA, Aa, aa)।
उदाहरण: यदि किसी जनसंख्या में अप्रभावी विकार (aa) की आवृत्ति 1/10,000 है, तो q² = 0.0001 → q = 0.01, p = 0.99 → वाहक (2pq) ≈ 0.0198 ≈ लगभग 2% (हर 50 में 1)।
- संतुलन की शर्तें (UPSC 2023) — (1) बहुत बड़ी जनसंख्या (आनुवंशिक बहाव नहीं), (2) यादृच्छिक संयोग (random mating), (3) उत्परिवर्तन नहीं, (4) प्रवासन/जीन प्रवाह नहीं, (5) प्राकृतिक चयन नहीं।
- महत्व — "शून्य परिकल्पना" (null model): विचलन से पता चलता है कि कौन-सी विकास-शक्ति काम कर रही है; वाहक-आवृत्ति का अनुमान (आनुवंशिक परामर्श, स्क्रीनिंग कार्यक्रम); फ़ोरेंसिक DNA प्रोफ़ाइलिंग में संभावना-गणना।
- विकास की शक्तियाँ — उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन (संतुलित बहुरूपता — सिकल सेल), आनुवंशिक बहाव (founder effect — पारसी, अमीश; bottleneck), जीन प्रवाह (मिश्रण), अंतःप्रजनन (inbreeding) — सगोत्र विवाह (दक्षिण भारत में मामा-भांजी/क्रॉस-कज़िन विवाह) से समयुग्मजता और अप्रभावी विकार बढ़ते हैं (inbreeding coefficient F)।
5. गुणसूत्र और विकार
कैरियोटाइप (UPSC 2024)
किसी कोशिका के गुणसूत्रों का आकार, संख्या और आकृति के अनुसार व्यवस्थित चित्र। मनुष्य में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) — 22 जोड़े अलिंगसूत्र (autosomes) और 1 जोड़ा लिंग-गुणसूत्र (XX/XY)। तैयारी — रक्त-लसीकाणु संवर्धन → कोल्सीसिन से मेटाफ़ेज़ पर विभाजन रोकना → हाइपोटोनिक घोल → स्थिरीकरण → G-बैंडिंग (गीम्सा रंजक) → व्यवस्थापन (डेनवर वर्गीकरण, A से G समूह; आज ISCN नामकरण)। प्रसव-पूर्व — एम्नियोसेंटेसिस, कोरियोनिक विलस सैंपलिंग। उपयोग — संख्यात्मक और संरचनात्मक विकारों का निदान, बार-बार गर्भपात, बाँझपन, कैंसर (फ़िलाडेल्फ़िया गुणसूत्र — t(9;22), CML), लिंग निर्धारण संबंधी विकार; आज FISH और माइक्रोएरे से अधिक सूक्ष्म निदान।
संख्यात्मक विकार (Aneuploidy)
| विकार | कैरियोटाइप | लक्षण |
|---|---|---|
| डाउन सिंड्रोम | 47, +21 (ट्राइसोमी 21) | बौद्धिक अक्षमता, चपटा चेहरा, simian crease, हृदय दोष; माता की आयु के साथ जोखिम बढ़ता |
| एडवर्ड्स सिंड्रोम | 47, +18 | गंभीर, अधिकांश शैशव में मृत्यु |
| पटाऊ सिंड्रोम | 47, +13 | कटे होंठ-तालु, पॉलीडैक्टिली |
| टर्नर सिंड्रोम | 45, X | नाटी स्त्री, अविकसित अंडाशय, वेब्ड गर्दन, बाँझपन |
| क्लाइनफ़ेल्टर सिंड्रोम | 47, XXY | लंबा पुरुष, गाइनेकोमैस्टिया, बाँझपन |
| XYY, XXX | 47 | प्रायः सामान्य, हल्के लक्षण |
कारण — अर्धसूत्री विभाजन में अवियोजन (non-disjunction)।
संरचनात्मक असामान्यताएँ (UPSC 2023)
- विलोपन (Deletion) — गुणसूत्र का भाग खो जाना: "क्री-डु-शा" (5p−, बिल्ली जैसी रोने की आवाज़)।
- द्विगुणन (Duplication) — भाग का दोहराव।
- प्रतिलोमन (Inversion) — भाग का उलट जाना (pericentric/paracentric)।
- स्थानांतरण (Translocation) — भाग का दूसरे गुणसूत्र पर जाना; पारस्परिक या रॉबर्टसोनियन (14/21 — पारिवारिक डाउन सिंड्रोम); फ़िलाडेल्फ़िया गुणसूत्र।
- वलय गुणसूत्र, आइसोक्रोमोसोम।
- कारण — विकिरण, रसायन (clastogens), विषाणु, आयु, गुणसूत्र टूटने वाले सिंड्रोम।
एकल-जीन (Monogenic) विकार (UPSC 2024)
- एक जीन में उत्परिवर्तन से — बिंदु उत्परिवर्तन (सिकल सेल — β-ग्लोबिन के छठे स्थान पर ग्लूटामिक अम्ल → वैलीन), विलोपन (सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस — ΔF508), ट्रिपलेट रिपीट विस्तार (हंटिंगटन — CAG, फ़्रैजाइल-X — CGG)।
- भारत में प्रमुख — β-थैलेसीमिया (वाहक आवृत्ति कुछ समुदायों में 10% से अधिक), सिकल सेल (मध्य भारत की जनजातियाँ), हीमोफ़ीलिया, G6PD कमी, स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफ़ी।
हीमोग्लोबिन: स्वास्थ्य और रोग (UPSC 2024)
- संरचना — चार ग्लोबिन शृंखलाएँ (वयस्क HbA = α2β2) + हीम (लौह); ऑक्सीजन परिवहन; भ्रूण HbF (α2γ2) — अधिक ऑक्सीजन-बंधुता; HbA2 (α2δ2)।
- हीमोग्लोबिनोपैथी — गुणात्मक (संरचना परिवर्तन): HbS (सिकल सेल), HbE (पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया), HbC, HbD-पंजाब; मात्रात्मक: थैलेसीमिया (α, β शृंखला का कम उत्पादन)।
- संतुलित बहुरूपता — HbS विषमयुग्मजी (AS) मलेरिया (P. falciparum) से सुरक्षा देते हैं — इसलिए मलेरिया-प्रवण क्षेत्रों में HbS उच्च (ए.सी. ऐलिसन, 1954)।
- भारत — राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (जुलाई 2023, 2047 तक उन्मूलन; जनजातीय क्षेत्रों में 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य)।
आनुवंशिक परामर्श (UPSC 2024)
- निदान — रोग की सटीक पहचान (क्लिनिकल, कैरियोटाइप, DNA परीक्षण)।
- वंशावली निर्माण — कम से कम तीन पीढ़ियाँ।
- जोखिम आकलन — मेंडेलियन संभावना, हार्डी-वाइनबर्ग, आनुभविक जोखिम।
- सूचना देना — रोग की प्रकृति, पुनरावृत्ति जोखिम, उपचार, विकल्प (प्रसव-पूर्व निदान, PGD, गोद लेना)।
- निर्णय में सहायता — "non-directive" — निर्णय परिवार का; भावनात्मक समर्थन।
- अनुवर्ती देखभाल और परिवार के अन्य सदस्यों की जाँच (cascade screening)।
नैतिक प्रश्न — गोपनीयता, लिंग-चयन का दुरुपयोग (PCPNDT अधिनियम 1994), भेदभाव; भारत में विवाह-पूर्व थैलेसीमिया स्क्रीनिंग (कुछ समुदायों में कुंडली के साथ "थैलेसीमिया कुंडली")।
6. प्रजाति (Race) और नृजातीयता (Ethnicity)
- प्रजाति की पारंपरिक अवधारणा — साझा शारीरिक लक्षणों (त्वचा रंग, बाल, नाक, कपाल-सूचकांक) वाले बड़े मानव समूह; वर्गीकरण — लिनियस (4), ब्लूमेनबाख (5 — "Caucasian" शब्द), हूटन, कून (5), गार्न (9 भौगोलिक, 32 स्थानीय)।
- शरीरमितीय सूचकांक — कपाल सूचकांक (dolichocephalic <75, mesocephalic 75-80, brachycephalic >80), नासिका सूचकांक (leptorrhine, mesorrhine, platyrrhine)।
- आलोचना — मानव विविधता "सतत" (clinal) है, अलग-अलग खानों में नहीं; रिचर्ड ल्यूवॉन्टिन (1972) — मानव आनुवंशिक विविधता का लगभग 85% किसी भी जनसंख्या के भीतर, केवल ~6-8% तथाकथित "प्रजातियों" के बीच; फ़्रैंक लिविंगस्टोन — "There are no races, there are only clines"; मानव जीनोम परियोजना (2003) — सभी मनुष्य ~99.9% समान।
- UNESCO के वक्तव्य (1950, 1951) — प्रजाति एक सामाजिक मिथक; "ethnic groups" शब्द का सुझाव।
- प्रजाति बनाम नृजातीयता (UPSC 2023) — प्रजाति (जैविक/शारीरिक लक्षणों पर आधारित, विवादित वैज्ञानिक श्रेणी) बनाम नृजातीयता (साझा संस्कृति, भाषा, धर्म, इतिहास, स्व-पहचान पर आधारित, सामाजिक रूप से निर्मित और परिवर्तनशील — फ़्रेडरिक बार्थ, "ethnic boundaries", 1969)।
- भारत में — रिज़ले (1901: 7 प्रकार, नासिका सूचकांक से जाति-प्रजाति संबंध), गुहा (1935: 6 प्रमुख प्रजातीय तत्व — नेग्रिटो, प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉइड, मंगोलॉइड, मेडिटेरेनियन, वेस्टर्न ब्रेकीसेफ़ल्स, नॉर्डिक) — विस्तार Paper II अध्याय में।
आनुवंशिक चिह्नक: ABO और Rh (UPSC 2024)
| रक्त समूह | जीनोटाइप | RBC पर एंटीजन | प्लाज़्मा में एंटीबॉडी |
|---|---|---|---|
| A | IAIA, IAi | A | anti-B |
| B | IBIB, IBi | B | anti-A |
| AB (सर्वग्राही) | IAIB (सह-प्रभाविता) | A और B | कोई नहीं |
| O (सर्वदाता) | ii | कोई नहीं (H-एंटीजन) | anti-A और anti-B |
- खोज — कार्ल लैंडस्टीनर (1900-01), नोबेल 1930; जीन गुणसूत्र 9 पर; बहुविकल्पी वंशागति (3 एलील, 6 जीनोटाइप, 4 फ़ीनोटाइप); बॉम्बे फ़ीनोटाइप (hh — H-एंटीजन नहीं; 1952, भेंडे — मुंबई) — एपिस्टैसिस का उदाहरण।
- Rh — लैंडस्टीनर और वीनर (1940, रीसस बंदर); गुणसूत्र 1 पर; D एंटीजन प्रभावी (DD/Dd = Rh+, dd = Rh−); एरिथ्रोब्लास्टोसिस फ़ीटैलिस — Rh− माँ और Rh+ भ्रूण, दूसरे गर्भ में माँ की anti-D एंटीबॉडी भ्रूण के RBC नष्ट करती है; बचाव — प्रसव के 72 घंटे के भीतर anti-D इम्यूनोग्लोबुलिन।
- मानवशास्त्रीय उपयोग — जनसंख्या संबंध और प्रवासन (B समूह मध्य एशिया-उत्तर भारत में अधिक; O अमेरिकी मूल निवासियों में बहुत अधिक), रोग-संबंध (O — पेप्टिक अल्सर; A — आमाशय कैंसर), पितृत्व परीक्षण (बहिष्करण), रक्ताधान।
7. मानव वृद्धि, विकास और पोषण
- वृद्धि (आकार में मात्रात्मक वृद्धि) बनाम विकास (कार्यात्मक परिपक्वता — गुणात्मक)।
- अवस्थाएँ — प्रसव-पूर्व, शैशव (तीव्रतम वृद्धि), बाल्यावस्था, किशोरावस्था (adolescent growth spurt — लड़कियों में लगभग 2 वर्ष पहले), वयस्कता, वृद्धावस्था।
- वृद्धि-वक्र — दूरी वक्र (distance) और वेग वक्र (velocity); स्कैमन के वक्र (1930) — तंत्रिका (शीघ्र), सामान्य (S-आकार), जनन (किशोरावस्था में), लसीका (बाल्यावस्था में चरम)।
- प्रभावित करने वाले कारक — आनुवंशिक, हार्मोन (वृद्धि हार्मोन, थायरॉइड, लिंग हार्मोन), पोषण, रोग, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जलवायु, ऊँचाई; secular trend — पीढ़ी-दर-पीढ़ी कद में वृद्धि और यौवनारंभ (menarche) की आयु में कमी।
- अध्ययन विधियाँ (UPSC 2023) — अनुप्रस्थ (cross-sectional) — एक समय में अलग-अलग आयु के बच्चे (तेज़, सस्ता, पर व्यक्तिगत वृद्धि-पथ नहीं); अनुदैर्ध्य (longitudinal) — उन्हीं बच्चों का वर्षों तक अनुसरण (वेग वक्र, पर महँगा, समय-साध्य, ड्रॉपआउट); मिश्रित-अनुदैर्ध्य (mixed-longitudinal) — कई आयु-समूहों का कुछ वर्षों तक अनुसरण; लाभ — कम समय में पूरी आयु-सीमा, वेग का अनुमान; हानि — सांख्यिकीय विश्लेषण जटिल, cohort-प्रभाव।
- रजोनिवृत्ति (UPSC 2023) — लगभग 45-55 वर्ष में मासिक धर्म का स्थायी अंत; एस्ट्रोजन में कमी; लक्षण — hot flashes, रात्रि-पसीना, नींद-विकार, मनोदशा परिवर्तन, अस्थि-क्षरण (osteoporosis), हृदय रोग का जोखिम; सांस्कृतिक भिन्नता (मार्गरेट लॉक — जापान में "kōnenki" के कम हॉट फ़्लैश)।
कुपोषण (UPSC 2023)
| रूप | सूचक / लक्षण |
|---|---|
| नाटापन (Stunting) | आयु के अनुसार कम कद — दीर्घकालिक कुपोषण |
| दुबलापन (Wasting) | कद के अनुसार कम वज़न — तीव्र कुपोषण |
| कम वज़न (Underweight) | आयु के अनुसार कम वज़न |
| प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण | क्वाशियोरकर (प्रोटीन की कमी — शोथ/सूजन, बढ़ा पेट, बालों का रंग बदलना, "flaky paint" त्वचा); मरास्मस (ऊर्जा और प्रोटीन दोनों की कमी — अत्यधिक दुबलापन, "बूढ़ा चेहरा"); मिश्रित — marasmic kwashiorkor |
| सूक्ष्म-पोषक तत्वों की कमी ("hidden hunger") | लौह (एनीमिया), आयोडीन (घेंघा), विटामिन A (रतौंधी) |
| अति-पोषण | मोटापा, मधुमेह — "double burden of malnutrition" |
भारत — NFHS-5 (2019-21): 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में नाटापन 35.5%, दुबलापन 19.3%, कम वज़न 32.1%; जनजातीय बच्चों में अधिक (UPSC 2024 Paper II: जनजातीय बच्चों में नाटापन-दुबलापन के कारण)। कार्यक्रम — पोषण अभियान (2018), ICDS, मिशन पोषण 2.0।
जीवनशैली रोग (UPSC 2024)
गतिहीन जीवन, प्रसंस्कृत आहार, तंबाकू-शराब, तनाव और नींद की कमी से — टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा, कुछ कैंसर, PCOS। मानवशास्त्रीय दृष्टि — "evolutionary mismatch" (शिकारी-संग्राहक शरीर आधुनिक जीवन में), "thrifty genotype" (नील, 1962), पोषण-संक्रमण (nutrition transition — पॉपकिन), जनजातीय समाजों में आधुनिकीकरण से रोगों का उदय। भारत — NCD का बोझ लगभग दो-तिहाई मृत्युओं में; ICMR-INDIAB अध्ययन (2023) — मधुमेह ~11.4%; कार्यक्रम — NP-NCD, फ़िट इंडिया मूवमेंट।
8. DNA प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग (UPSC 2023)
- DNA फ़िंगरप्रिंटिंग — एलेक जेफ़्रीज़ (1984); भारत में लालजी सिंह (CCMB) — "भारतीय DNA फ़िंगरप्रिंटिंग के जनक"; अपराध, पितृत्व, आपदा पीड़ित पहचान।
- PCR (कैरी मुलिस, 1983), STR और SNP प्रोफ़ाइलिंग; अगली पीढ़ी अनुक्रमण (NGS)।
- चिकित्सा — आनुवंशिक रोगों का निदान, प्रसव-पूर्व स्क्रीनिंग, फ़ार्माकोजीनोमिक्स (दवा की प्रतिक्रिया), जीन थेरेपी, CRISPR-Cas9 जीन संपादन (डूडना-शार्पेंटियर, नोबेल 2020) — सिकल सेल के लिए पहली CRISPR चिकित्सा (Casgevy, 2023)।
- मानवशास्त्र — प्राचीन DNA से प्रवासन इतिहास (राखीगढ़ी कंकाल — 2019), जनसंख्या आनुवंशिकी; जीनोम इंडिया परियोजना — 10,000 भारतीयों के जीनोम अनुक्रम (2024 में डेटा जारी)।
- नैतिक प्रश्न — गोपनीयता, आनुवंशिक भेदभाव, "designer babies", समुदायों की सहमति।
9. Master Summary Table
| विषय | मुख्य तथ्य | उदाहरण / सूत्र |
|---|---|---|
| वंशागति के प्रतिरूप | अलिंगी प्रभावी/अप्रभावी, X-सहलग्न, Y-सहलग्न | हंटिंगटन; थैलेसीमिया; हीमोफ़ीलिया |
| गैर-मेंडेलियन | सह-प्रभाविता, बहुविकल्पी, बहुजीनी, बहुकारकीय, एपिस्टैसिस | AB; कद; मधुमेह; बॉम्बे फ़ीनोटाइप |
| हार्डी-वाइनबर्ग | 5 शर्तें; शून्य मॉडल | p² + 2pq + q² = 1 |
| गुणसूत्र विकार | संख्यात्मक (अवियोजन), संरचनात्मक (विलोपन, स्थानांतरण) | डाउन 47,+21; टर्नर 45,X; क्री-डु-शा 5p− |
| हीमोग्लोबिन | HbA α2β2; HbS — संतुलित बहुरूपता | सिकल सेल मिशन 2023 |
| रक्त समूह | ABO (लैंडस्टीनर 1901), Rh (1940) | एरिथ्रोब्लास्टोसिस फ़ीटैलिस |
| प्रजाति | clinal विविधता; ल्यूवॉन्टिन 85% | प्रजाति बनाम नृजातीयता |
| वृद्धि | अनुप्रस्थ, अनुदैर्ध्य, मिश्रित-अनुदैर्ध्य | स्कैमन वक्र |
| कुपोषण | नाटापन, दुबलापन; क्वाशियोरकर, मरास्मस | NFHS-5 नाटापन 35.5% |
10. Mind Map
- मेंडल के नियम
- प्रतिरूप — AD, AR, XL
- बहुजीनी, बहुकारकीय
- हार्डी-वाइनबर्ग
- बहाव, जीन प्रवाह
- अंतःप्रजनन
- कैरियोटाइप
- संख्यात्मक, संरचनात्मक
- आनुवंशिक परामर्श
- प्रजाति बनाम नृजातीयता
- ABO, Rh, Hb
- वृद्धि-वक्र, अध्ययन विधियाँ
- कुपोषण, जीवनशैली रोग
- DNA प्रौद्योगिकी
11. महत्वपूर्ण One-liners
- मेंडल के नियमों की पुनर्खोज — 1900 (डी व्रीज़, कोरेंस, शेरमाक)।
- हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत — 1908।
- ABO रक्त समूह — कार्ल लैंडस्टीनर (1900-01); Rh — लैंडस्टीनर और वीनर (1940)।
- बॉम्बे रक्त समूह — 1952, वाई.एम. भेंडे (मुंबई)।
- सिकल सेल और मलेरिया संबंध — ए.सी. ऐलिसन (1954)।
- DNA फ़िंगरप्रिंटिंग — एलेक जेफ़्रीज़ (1984); भारत — लालजी सिंह।
- "85% विविधता जनसंख्या के भीतर" — रिचर्ड ल्यूवॉन्टिन (1972)।
- "No races, only clines" — फ़्रैंक लिविंगस्टोन; ethnic boundaries — फ़्रेडरिक बार्थ (1969)।
- Thrifty genotype — जेम्स नील (1962)।
- राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन — जुलाई 2023 (लक्ष्य 2047)।
12. टिप्स एवं ट्रिक्स
- हर वंशागति-प्रतिरूप के लिए एक वंशावली चार्ट (वर्ग = पुरुष, वृत्त = स्त्री, भरा = प्रभावित, आधा भरा = वाहक) बनाएँ।
- हार्डी-वाइनबर्ग पर एक छोटा संख्यात्मक उदाहरण हल करें।
- भारतीय संदर्भ — थैलेसीमिया, सिकल सेल मिशन, सगोत्र विवाह, जनजातीय पोषण आँकड़े।
हार्डी-वाइनबर्ग की शर्तें — "बड़ा-यादृच्छिक, न उत्परिवर्तन, न प्रवास, न चयन"; गुणसूत्र संरचना परिवर्तन — "DDIT": Deletion, Duplication, Inversion, Translocation।
13. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
किसी जनसंख्या के आनुवंशिक संतुलन में होने के लिए कौन-सी मान्यताएँ पूरी होनी चाहिए? आनुवंशिक संतुलन का महत्व स्पष्ट कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत (1908) के अनुसार कुछ शर्तों के अधीन किसी जनसंख्या में एलील और जीनोटाइप आवृत्तियाँ पीढ़ियों तक स्थिर रहती हैं — p + q = 1 और p² + 2pq + q² = 1।
मान्यताएँ: (1) बहुत बड़ी जनसंख्या — संयोग से आवृत्ति परिवर्तन (आनुवंशिक बहाव) नहीं; (2) यादृच्छिक संयोग — सगोत्र या चयनात्मक (assortative) विवाह नहीं; (3) उत्परिवर्तन नहीं; (4) प्रवासन/जीन प्रवाह नहीं; (5) प्राकृतिक चयन नहीं — सभी जीनोटाइप समान रूप से जीवित और प्रजननशील; (6) पीढ़ियाँ असतत (non-overlapping) और लिंग-अनुपात समान (आदर्श स्थिति)।
महत्व: (1) विकास का "शून्य मॉडल" — विचलन से पता चलता है कि कौन-सी शक्ति कार्यरत है; (2) वाहक-आवृत्ति का अनुमान — जैसे 1/10,000 रोग-आवृत्ति पर ~2% वाहक; (3) आनुवंशिक परामर्श और स्क्रीनिंग कार्यक्रम (थैलेसीमिया); (4) फ़ोरेंसिक DNA प्रोफ़ाइल की संभावना-गणना; (5) जनसंख्या संबंधों और मिश्रण का अध्ययन।
भारतीय संदर्भ: जाति-अंतर्विवाह और सगोत्र विवाह के कारण अनेक भारतीय जनसंख्याएँ HW संतुलन से विचलित — "founder effect" वाले समुदायों में दुर्लभ रोग अधिक (Reich और साथी, 2009)।
निष्कर्ष: वास्तविक जनसंख्याएँ कभी पूर्ण संतुलन में नहीं होतीं, पर यही आदर्श मॉडल विकास और चिकित्सा आनुवंशिकी का आधार है।
कैरियोटाइप से क्या तात्पर्य है? इसका विश्लेषण मनुष्य में गुणसूत्रीय विपथनों (chromosomal aberrations) के निदान में किस प्रकार सहायक है?
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: कैरियोटाइप किसी व्यक्ति के गुणसूत्रों का मानक रूप से व्यवस्थित चित्र है — संख्या, आकार, सेंट्रोमियर की स्थिति और बैंडिंग प्रतिरूप के अनुसार; सामान्य मनुष्य — 46,XX या 46,XY।
तैयारी: परिधीय रक्त लसीकाणु संवर्धन (PHA उत्तेजक) → कोल्सीसिन (मेटाफ़ेज़ पर रोक) → हाइपोटोनिक KCl → स्थिरीकरण (मेथनॉल-एसिटिक अम्ल) → स्लाइड → G-बैंडिंग → सूक्ष्मदर्शी/डिजिटल व्यवस्थापन (A–G समूह)।
निदान में सहायता: (1) संख्यात्मक — ट्राइसोमी 21, 18, 13; टर्नर (45,X), क्लाइनफ़ेल्टर (47,XXY); मोज़ेसिज़्म; (2) संरचनात्मक — विलोपन (5p− क्री-डु-शा), स्थानांतरण (रॉबर्टसोनियन — पारिवारिक डाउन; फ़िलाडेल्फ़िया — CML), प्रतिलोमन, आइसोक्रोमोसोम; (3) प्रसव-पूर्व निदान — एम्नियोसेंटेसिस, CVS; (4) बार-बार गर्भपात और बाँझपन के कारण — संतुलित स्थानांतरण वाहक; (5) कैंसर कोशिकानुवंशिकी।
सीमाएँ और आधुनिक तकनीकें: 5-10 Mb से छोटे परिवर्तन नहीं दिखते — इसलिए FISH, माइक्रोएरे (CMA), NGS।
निष्कर्ष: कैरियोटाइप आज भी आनुवंशिक निदान की "पहली पंक्ति" है — आनुवंशिक परामर्श और प्रसव-पूर्व देखभाल में इसकी केंद्रीय भूमिका है (आरेख — सामान्य और ट्राइसोमी-21 कैरियोटाइप)।
मनुष्य में ABO और Rh रक्त समूहों की आनुवंशिकी और वंशागति प्रतिरूपों का वर्णन कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
ABO प्रणाली: लैंडस्टीनर (1900-01); जीन गुणसूत्र 9q34 पर; तीन एलील — IA, IB (परस्पर सह-प्रभावी) और i (अप्रभावी); 6 जीनोटाइप, 4 फ़ीनोटाइप; एलील एंज़ाइम (ग्लाइकोसिलट्रांसफ़रेज़) बनाते हैं जो H-पदार्थ पर शर्करा जोड़कर A या B एंटीजन बनाते हैं; बॉम्बे फ़ीनोटाइप (hh) में H-पदार्थ नहीं, इसलिए IA/IB होते हुए भी "O" दिखते हैं — एपिस्टैसिस।
वंशागति उदाहरण: A (IAi) × B (IBi) → संतान में AB, A, B, O — चारों संभव (प्रत्येक 25%) — पितृत्व विवाद में बहिष्करण।
Rh प्रणाली: लैंडस्टीनर-वीनर (1940); गुणसूत्र 1p पर RHD जीन; D उपस्थित (DD, Dd) — Rh+, अनुपस्थित (dd) — Rh−; Rh− व्यक्ति में anti-D एंटीबॉडी केवल संवेदीकरण के बाद बनती है (प्राकृतिक नहीं)। Rh− माँ × Rh+ पिता — भ्रूण Rh+ हो सकता है → एरिथ्रोब्लास्टोसिस फ़ीटैलिस (HDN) दूसरी गर्भावस्था में; रोकथाम — anti-D इम्यूनोग्लोबुलिन।
मानवशास्त्रीय महत्व: जनसंख्या आनुवंशिक चिह्नक, प्रवासन (B उत्तर भारत-मध्य एशिया में अधिक; Rh− बास्क लोगों में बहुत अधिक, भारत में लगभग 5%), रोग-संबंध, रक्ताधान और अंग प्रत्यारोपण।
निष्कर्ष: ABO और Rh प्रणालियाँ बहुविकल्पी वंशागति, सह-प्रभाविता और एपिस्टैसिस की "पाठ्यपुस्तक" उदाहरण हैं तथा चिकित्सा और मानवशास्त्र दोनों में अत्यंत उपयोगी (आरेख — Punnett square)।
बहुकारकीय लक्षण (multifactorial trait) क्या है? उपयुक्त मानवीय उदाहरणों सहित अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: बहुकारकीय लक्षण वे हैं जो अनेक जीनों (बहुजीनी) और पर्यावरणीय कारकों की अंतःक्रिया से निर्धारित होते हैं — ये मेंडेलियन अनुपात नहीं दिखाते।
विशेषताएँ: (1) सतत विविधता और सामान्य वितरण (कद, त्वचा रंग, IQ, रक्तचाप); (2) "threshold model" — असतत रोग (जैसे कटे होंठ) तब प्रकट जब आनुवंशिक-पर्यावरणीय "दायित्व" सीमा पार करे; (3) निकट संबंधियों में पुनरावृत्ति जोखिम अधिक, दूर के संबंधियों में तेज़ी से कम; (4) लिंग-भेद — जिस लिंग में रोग दुर्लभ, उसके प्रभावित व्यक्ति के संबंधियों में जोखिम अधिक (Carter effect — pyloric stenosis)।
मानवीय उदाहरण: कद (पोषण + जीन — secular trend), त्वचा रंग (MC1R आदि + धूप), टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्किज़ोफ़्रेनिया, न्यूरल ट्यूब दोष (फ़ोलिक अम्ल से रोकथाम), कटे होंठ-तालु, जन्मजात हृदय दोष।
अध्ययन: जुड़वाँ अध्ययन (MZ बनाम DZ concordance), heritability (h²) का आकलन, GWAS, polygenic risk scores।
निष्कर्ष: अधिकांश सामान्य रोग बहुकारकीय हैं — इसलिए जीवनशैली और पर्यावरण में परिवर्तन से उनके जोखिम को घटाया जा सकता है; यह "प्रकृति बनाम पोषण" बहस को "प्रकृति और पोषण" में बदल देता है।
कुपोषण के विभिन्न रूपों को स्पष्ट कीजिए। उपयुक्त उदाहरणों सहित प्रोटीन-कैलोरी कुपोषण का वर्णन कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: WHO के अनुसार कुपोषण का अर्थ है ऊर्जा और/या पोषक तत्वों का अभाव, अधिकता या असंतुलन — इसमें अल्प-पोषण और अति-पोषण दोनों शामिल हैं।
रूप: (1) अल्प-पोषण — नाटापन, दुबलापन, कम वज़न; (2) सूक्ष्म-पोषक कमी (hidden hunger) — लौह-एनीमिया, आयोडीन-घेंघा, विटामिन A-रतौंधी, विटामिन D-रिकेट्स; (3) अति-पोषण — मोटापा और आहार-संबंधी NCD; भारत में "दोहरा बोझ"।
प्रोटीन-कैलोरी (ऊर्जा) कुपोषण: क्वाशियोरकर ("दूध छुड़ाने पर रोग" — घाना की गा भाषा का शब्द, सिसली विलियम्स, 1933) — मुख्यतः प्रोटीन की कमी: शोथ (oedema), फूला पेट, यकृत वृद्धि, बालों का रंग फीका, "flaky paint dermatosis", उदासीनता; मरास्मस — ऊर्जा और प्रोटीन दोनों की गंभीर कमी (प्रायः शैशव में): अत्यधिक दुबलापन, त्वचा-हड्डी, "बूढ़ा चेहरा", शोथ नहीं, सतर्क पर भूखा; marasmic kwashiorkor — दोनों के लक्षण।
उदाहरण और आँकड़े: NFHS-5 — नाटापन 35.5%, दुबलापन 19.3%; जनजातीय क्षेत्रों (मेलघाट, झारखंड) में गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM)।
मानवशास्त्रीय दृष्टि: गरीबी, खाद्य-प्रथाएँ, शिशु-आहार की परंपराएँ, लैंगिक भेदभाव, जंगलों तक पहुँच का नुक़सान।
निष्कर्ष: पोषण अभियान, ICDS, समुदाय-आधारित SAM प्रबंधन (CMAM), स्थानीय मोटे अनाज और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील पोषण शिक्षा से ही कुपोषण का स्थायी समाधान संभव।
प्रजाति और नृजातीयता (Race and Ethnicity) — टिप्पणी लिखिए।
मॉडल उत्तर
प्रजाति: परंपरागत रूप से साझा वंशानुगत शारीरिक लक्षणों (त्वचा रंग, बाल, नाक, कपाल-रूप) के आधार पर मनुष्यों का बड़ा समूह — ब्लूमेनबाख, कून, गार्न के वर्गीकरण। आधुनिक आनुवंशिकी ने इसे चुनौती दी — ल्यूवॉन्टिन (1972): ~85% विविधता समूहों के भीतर; मानव विविधता clinal; HGP — 99.9% समानता। अतः प्रजाति अब मुख्यतः सामाजिक श्रेणी मानी जाती है जिसके वास्तविक परिणाम (नस्लवाद) हैं।
नृजातीयता: साझा संस्कृति, भाषा, धर्म, इतिहास, वंश की धारणा और स्व-पहचान पर आधारित समूह-सदस्यता; बार्थ (1969) — "ethnic boundaries" और अंतःक्रिया से पहचान बनती है; परिस्थितिजन्य और परिवर्तनशील।
अंतर: आधार (शारीरिक बनाम सांस्कृतिक), प्रकृति (बाहर से थोपी बनाम स्व-निर्धारित), स्थिरता (स्थिर मानी गई बनाम परिवर्तनशील)।
निष्कर्ष: UNESCO (1950) से आज तक मानवशास्त्र का निष्कर्ष है कि "प्रजाति" जैविक रूप से कमज़ोर अवधारणा है; नृजातीयता के अध्ययन से ही पहचान-राजनीति और संघर्ष समझे जा सकते हैं।
14. Quick Revision Summary
- विधियाँ — वंशावली, जुड़वाँ, गोद, जनसंख्या, कोशिकानुवंशिकी, आणविक।
- वंशागति — AD (हंटिंगटन), AR (थैलेसीमिया), XR (हीमोफ़ीलिया); बहुजीनी (कद), बहुकारकीय (मधुमेह); घातक जीन; जीन अभिव्यक्ति — DNA → mRNA → प्रोटीन, एपिजेनेटिक्स।
- HW — p² + 2pq + q² = 1; 5 शर्तें; बहाव, अंतःप्रजनन।
- गुणसूत्र — कैरियोटाइप (46), ट्राइसोमी, टर्नर, क्लाइनफ़ेल्टर; DDIT संरचनात्मक परिवर्तन; आनुवंशिक परामर्श के 6 चरण।
- Hb और रक्त समूह — HbS संतुलित बहुरूपता; ABO (बहुविकल्पी, सह-प्रभाविता, बॉम्बे), Rh (HDN)।
- प्रजाति — clinal, ल्यूवॉन्टिन; नृजातीयता — बार्थ।
- वृद्धि-पोषण — स्कैमन वक्र, मिश्रित-अनुदैर्ध्य विधि, रजोनिवृत्ति; क्वाशियोरकर बनाम मरास्मस; NFHS-5; जीवनशैली रोग — evolutionary mismatch; DNA प्रौद्योगिकी — फ़िंगरप्रिंटिंग, CRISPR।