UPSC Mains · Economics · Paper I · अध्याय 6

संवृद्धि एवं विकास अर्थशास्त्र

Growth and Development

हैरोड-डोमर, सोलो, अंतर्जात संवृद्धि; लुईस, रोस्टोव, नर्क्स, संतुलित-असंतुलित संवृद्धि; मानव विकास, गरीबी, असमानता, पर्यावरण और सतत विकास।

Paper I 20 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper I का अंतिम खंड "आर्थिक संवृद्धि और विकास" सबसे अधिक प्रश्न देता है; 2024 में Q7 और Q8 पूरे इसी से थे। सिलेबस:

  • संवृद्धि के सिद्धांत: हैरोड-डोमर, काल्डोर, सोलो (नव-क्लासिकल), अंतर्जात संवृद्धि (रोमर, लूकस)।
  • विकास के सिद्धांत: लुईस और रेनिस-फ़ाई (द्वैत), बड़ा धक्का, संतुलित बनाम असंतुलित संवृद्धि, रोस्टो, निर्भरता सिद्धांत; आयात-स्थानापन्नता बनाम निर्यात-संवर्धन; नियोजन बनाम बाज़ार।
  • विकास का मापन: प्रति व्यक्ति आय, HDI और उसके परिवार (IHDI, MPI), क्षमता दृष्टिकोण; कुज़नेट्स परिकल्पना।
  • पर्यावरण और सतत विकास: हरित लेखांकन, कार्बन व्यापार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी।

2. हैरोड-डोमर मॉडल

  • डोमर (1946): निवेश के दोहरे स्वरूप पर बल: निवेश माँग पैदा करता है (गुणक) और क्षमता भी बढ़ाता है (σ, उत्पादकता)। पूर्ण क्षमता बनाए रखने के लिए निवेश को ΔI/I = σs की दर से बढ़ना चाहिए।
  • हैरोड (1939) की तीन संवृद्धि दरें:
दरसूत्रअर्थ
वास्तविक (G)G = s/CC = वास्तविक वृद्धिमान पूँजी-उत्पाद अनुपात (ΔK/ΔY)
आश्वस्त/अपेक्षित (Gw)Gw = s/Crवह दर जिस पर उद्यमी संतुष्ट हों: वास्तविक निवेश वांछित निवेश के बराबर; Cr = आवश्यक पूँजी-उत्पाद अनुपात
प्राकृतिक (Gn)Gn = n + λश्रम-शक्ति वृद्धि + श्रम-संवर्धी तकनीकी प्रगति; पूर्ण रोज़गार की अधिकतम संभव दर
  • चाकू-धार (knife-edge) अस्थिरता: यदि G > Gw तो C < Cr, यानी पूँजी कम पड़ रही है; उद्यमी निवेश और बढ़ाते हैं, गुणक से माँग बढ़ती है और G, Gw से और दूर चला जाता है (संचयी विस्तार)। G < Gw पर अतिरिक्त क्षमता से निवेश घटता है, संचयी संकुचन। संतुलित पथ पर बने रहना "चाकू की धार" पर चलने जैसा।
  • Gw बनाम Gn:
    • Gw > Gn: बचत क्षमता से अधिक; दीर्घकालीन अवसाद (secular stagnation), क्योंकि वास्तविक वृद्धि Gn से ऊपर टिक नहीं सकती, इसलिए G < Gw, बेरोज़गारी और अतिरिक्त क्षमता (विकसित देशों की प्रवृत्ति)।
    • Gw < Gn: बचत अपर्याप्त; दीर्घकालीन मुद्रास्फीति और संरचनात्मक बेरोज़गारी (विकासशील देश: श्रम प्रचुर, पूँजी कम)।
    • G = Gw = Gn: "स्वर्णिम युग" (जोन रॉबिन्सन), केवल संयोग से।
  • नीति निहितार्थ: विकास के लिए बचत-दर बढ़ाओ और ICOR घटाओ; भारत की पंचवर्षीय योजनाओं (विशेषकर प्रथम योजना) में लक्ष्य-संवृद्धि से आवश्यक निवेश का अनुमान इसी सूत्र से।
  • सीमाएँ: स्थिर s और v, साधनों में प्रतिस्थापन नहीं (स्थिर अनुपात उत्पादन फलन), कोई तकनीकी प्रगति की व्याख्या नहीं।

3. सोलो और नव-क्लासिकल मॉडल

  • सोलो (1956), स्वान: साधनों में प्रतिस्थापन (Y = F(K, AL), ह्रासमान प्रतिफल); इससे पूँजी-उत्पाद अनुपात समायोजित होता है और चाकू-धार समस्या हल।
k̇ = s·f(k) − (n + δ)k; स्थिर अवस्था: s·f(k*) = (n + δ)k*
  • निष्कर्ष: स्थिर अवस्था में प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर = तकनीकी प्रगति दर (बहिर्जात); बचत-दर बढ़ने से स्तर बढ़ता है, दीर्घकालीन वृद्धि दर नहीं।
  • स्वर्णिम नियम (फेल्प्स): उपभोग-अधिकतम स्थिर अवस्था पर f′(k) = n + δ।
  • अभिसरण: निरपेक्ष (गरीब देश तेज़ बढ़ें) बनाम सशर्त (समान s, n, तकनीक वाले देश अपनी-अपनी स्थिर अवस्था की ओर); आँकड़े सशर्त अभिसरण का अधिक समर्थन करते हैं।
  • सोलो अवशेष: संवृद्धि-लेखांकन gY = gA + αgK + (1 − α)gL; बड़ा भाग "अवशेष" (TFP) से।
  • काल्डोर का मॉडल (1957): तकनीकी प्रगति फलन (निवेश-प्रति-श्रमिक और उत्पादकता का संबंध); वितरण (बचत-दर) से स्थिरता; "शैलीगत तथ्य" (स्थिर पूँजी-उत्पाद अनुपात, स्थिर साधन-हिस्से)।
  • जोन रॉबिन्सन: पूँजी-संचय और विभिन्न "युग" (स्वर्णिम, सीसा आदि)।

4. अंतर्जात संवृद्धि सिद्धांत

  • प्रेरणा: सोलो में दीर्घकालीन वृद्धि अस्पष्टीकृत (बहिर्जात A); और अभिसरण का अभाव।
  • AK मॉडल: Y = AK (व्यापक पूँजी, ह्रासमान प्रतिफल नहीं); g = sA − δ। बचत-दर स्थायी रूप से वृद्धि दर बढ़ाती है।
  • लूकस (1988), मानव पूँजी: शिक्षा और कौशल में निवेश; मानव पूँजी की बाह्यता (शिक्षित सहकर्मियों से उत्पादकता); इसीलिए कुशल श्रम गरीब देशों से अमीर देशों की ओर जाता है।
  • रोमर (1986, 1990), R&D: विचार (ideas) अ-प्रतिद्वंद्वी और आंशिक रूप से वर्जनीय; अनुसंधान-क्षेत्र नए डिज़ाइन बनाता है; ज्ञान का प्रसार (spillover) बढ़ते प्रतिफल देता है। अपूर्ण प्रतियोगिता (पेटेंट लाभ) R&D को प्रेरित करती है।
  • शुम्पीटरवादी (एघियन-हॉविट, 1992): सृजनात्मक विनाश द्वारा गुणवत्ता-सीढ़ी।
  • नीति निहितार्थ: शिक्षा, स्वास्थ्य, R&D सब्सिडी, बौद्धिक संपदा संरक्षण, खुलापन (ज्ञान-प्रसार), संस्थाएँ; सरकार दीर्घकालीन वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। भारत: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (ANRF) अधिनियम 2023, सेमीकंडक्टर मिशन।

5. विकास के सिद्धांत

  • लुईस (1954), "असीमित श्रम-पूर्ति के साथ आर्थिक विकास": द्वैत अर्थव्यवस्था: पारंपरिक निर्वाह क्षेत्र (प्रच्छन्न बेरोज़गारी, MPL ≈ 0) और आधुनिक पूँजीवादी क्षेत्र। पूँजीवादी क्षेत्र निर्वाह-मज़दूरी से थोड़ी ऊँची स्थिर मज़दूरी पर असीमित श्रम पाता है; लाभ का पुनर्निवेश, श्रम-माँग वक्र दाएँ, अधिशेष श्रम का स्थानांतरण। संरचनात्मक रूपांतरण: कृषि से उद्योग; बचत-दर 4-5% से 12-15% तक (लुईस का प्रसिद्ध कथन)। लुईस मोड़-बिंदु: अधिशेष श्रम समाप्त होने पर मज़दूरी बढ़ने लगती है (चीन में 2010 के आसपास बहस)।
  • आलोचना: शहरी बेरोज़गारी की उपेक्षा (हैरिस-टोडारो, 1970: प्रवास अपेक्षित शहरी आय पर); कृषि-उत्पादकता की उपेक्षा; श्रम-बचत तकनीक से रोज़गार न बढ़ना; पूँजी-पलायन।
  • रेनिस-फ़ाई (1961): लुईस में कृषि को जोड़ा; तीन चरण: (i) MPL = 0, (ii) 0 < MPL < संस्थागत मज़दूरी (खाद्य कमी का ख़तरा), (iii) वाणिज्यिकरण; संतुलित वृद्धि आवश्यक।
  • बड़ा धक्का (रोज़ेन्स्टाइन-रोडान, 1943): अविभाज्यताएँ (सामाजिक उपरिव्यय, माँग, बचत-पूर्ति) के कारण छोटे-छोटे प्रयास असफल; न्यूनतम आकार का समन्वित निवेश।
  • संतुलित संवृद्धि (नर्कसे): गरीबी का दुश्चक्र (कम आय, कम बचत, कम निवेश); अनेक उद्योगों में एक साथ निवेश से परस्पर माँग। असंतुलित संवृद्धि (हर्शमैन, 1958): दुर्लभ संसाधन (निर्णय-क्षमता) को अग्र और पश्च संबंधन वाले प्रमुख क्षेत्रों में लगाओ; असंतुलन ही आगे निवेश को प्रेरित करता है।
  • मिर्डल: संचयी कारणता, "प्रतिगामी प्रभाव" (backwash) बनाम "प्रसार प्रभाव"; क्षेत्रीय असमानता।
  • रोस्टो (1960): पाँच अवस्थाएँ: पारंपरिक समाज, उड़ान की पूर्व-शर्तें, उड़ान (take-off), परिपक्वता की ओर, उच्च सामूहिक उपभोग।
  • निर्भरता सिद्धांत: प्रेबिश, फ्रैंक ("अल्पविकास का विकास"), केंद्र-परिधि; आयात-स्थानापन्नता का वैचारिक आधार।

6. व्यापार-रणनीति और नियोजन बनाम बाज़ार

आधारआयात-स्थानापन्नता (ISI)निर्यात-संवर्धन (EOI)
तर्कशिशु उद्योग, ToT का ह्रास (प्रेबिश-सिंगर), आत्मनिर्भरता, BoP बचततुलनात्मक लाभ, विश्व बाज़ार की प्रतियोगिता, पैमाने की मितव्ययिता
उपकरणऊँचे प्रशुल्क, कोटा, अधिमूल्यित विनिमय दर, लाइसेंसयथार्थवादी विनिमय दर, निर्यात-प्रोत्साहन, खुलापन
उदाहरणभारत (1950-80), लैटिन अमेरिकादक्षिण कोरिया, ताइवान, चीन (1978 के बाद)
परिणाम/दोषअदक्षता, किराया-माँग, आयातित आगत पर निर्भरता से BoP संकट, निर्यात-विरोधी पक्षपातबाहरी आघातों के प्रति संवेदनशीलता; पर अधिक तेज़ और समावेशी वृद्धि (पूर्वी एशियाई "चमत्कार")
  • पूर्वी एशिया में भी शुरुआती ISI के बाद EOI, और राज्य की सक्रिय औद्योगिक नीति ("विकासकारी राज्य")। भारत 1991 के बाद क्रमिक उदारीकरण; हाल में PLI योजनाएँ (निर्यात-उन्मुख विनिर्माण)।
  • बाज़ार अर्थव्यवस्था में नियोजन की भूमिका: बाज़ार विफलताएँ (सार्वजनिक वस्तुएँ, बाह्यताएँ, समन्वय), दीर्घकालीन अवसंरचना, क्षेत्रीय संतुलन, समावेशन; अब सांकेतिक (indicative) नियोजन: लक्ष्य, दृष्टि-पत्र, निजी क्षेत्र के लिए संकेत (फ्रांस का उदाहरण)। भारत में योजना आयोग (1950) से NITI आयोग (1 जनवरी 2015): "टीम इंडिया", सहकारी संघवाद, कोई आवंटन-शक्ति नहीं।

7. विकास का मापन

  • प्रति व्यक्ति GDP एक अपरिष्कृत सूचक क्यों: वितरण नहीं दिखाता (औसत), गैर-बाज़ार गतिविधियाँ (घरेलू श्रम, विशेषकर महिलाओं का) छूटती हैं, पर्यावरण-ह्रास और संसाधन-क्षय नहीं घटाता, "बुरी" गतिविधियाँ (प्रदूषण-सफ़ाई) भी GDP बढ़ाती हैं, अवकाश और जीवन-गुणवत्ता नहीं, विनिमय दर से तुलना भ्रामक (PPP चाहिए)। स्टिग्लिट्ज़-सेन-फ़िटूसी आयोग (2009)।
  • HDI (UNDP, 1990; महबूब उल हक़, अमर्त्य सेन): तीन आयाम: (i) दीर्घ और स्वस्थ जीवन: जन्म पर जीवन-प्रत्याशा; (ii) ज्ञान: स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष और प्रत्याशित वर्ष; (iii) जीवन-स्तर: प्रति व्यक्ति GNI (PPP $, लघुगणक)। आयाम-सूचकांक = (वास्तविक − न्यूनतम)/(अधिकतम − न्यूनतम); 2010 से तीनों का ज्यामितीय माध्य (पहले अंकगणितीय)।
  • HDI की सीमाएँ: केवल तीन आयाम (स्वतंत्रता, पर्यावरण, सुरक्षा, रोज़गार-गुणवत्ता नहीं); राष्ट्रीय औसत, असमानता छिपती है; मनमाने न्यूनतम/अधिकतम और समान भार; आय का लघुगणक; आँकड़ों की गुणवत्ता और समय-अंतराल; आयामों में प्रतिस्थापन (ज्यामितीय माध्य से आंशिक सुधार)।
  • सुधार/पूरक सूचक: असमानता-समायोजित HDI (IHDI, 2010), लिंग विकास सूचकांक (GDI), लिंग असमानता सूचकांक (GII), बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI, OPHI-UNDP, 2010), ग्रह-दबाव समायोजित HDI (PHDI, 2020); भारत का राष्ट्रीय MPI (NITI आयोग)।
  • कुज़नेट्स परिकल्पना (1955): विकास के आरंभ में असमानता बढ़ती है (श्रम का कम-असमानता वाले कृषि से उच्च-असमानता और ऊँची आय वाले उद्योग में स्थानांतरण), फिर शहरीकरण, शिक्षा, राजनीतिक दबाव और कल्याणकारी राज्य से घटती है: उल्टा U-वक्र। प्रमाण: क्रॉस-सेक्शन में कुछ समर्थन, समय-श्रेणी में कमज़ोर; पूर्वी एशिया में "समानता के साथ वृद्धि"; 1980 के बाद विकसित देशों में असमानता फिर बढ़ी (पिकेटी: r > g)। पर्यावरणीय कुज़नेट्स वक्र (प्रदूषण बनाम आय)।

8. संवृद्धि बनाम सतत विकास

ब्रंटलैंड आयोग (1987, "Our Common Future"): सतत विकास वह है जो वर्तमान की आवश्यकताएँ भावी पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता से समझौता किए बिना पूरी करे।

संवृद्धि और विकास: वनोन्मूलन के दुष्प्रभाव और चिपको आंदोलन
वनोन्मूलन से भूमि-क्षरण, जैव-विविधता की हानि और वायु प्रदूषण; चिपको आंदोलन में ग्रामीण महिलाओं ने पेड़ों से लिपटकर कटाई रोकी
  • भेद: संवृद्धि = उत्पादन में मात्रात्मक वृद्धि (GDP); सतत विकास = मात्रात्मक + गुणात्मक (वितरण, मानव विकास) + अंतर-पीढ़ीगत न्याय (प्राकृतिक पूँजी का संरक्षण)।
  • कमज़ोर बनाम मज़बूत स्थिरता: कमज़ोर: कुल पूँजी (भौतिक + मानव + प्राकृतिक) घटनी नहीं चाहिए, प्राकृतिक का स्थानापन्न संभव (हार्टविक नियम: संसाधन-लगान का पुनर्निवेश); मज़बूत: महत्वपूर्ण प्राकृतिक पूँजी (जलवायु, जैव-विविधता) अपूरणीय।
  • चिपको आंदोलन (1973, तत्कालीन उत्तर प्रदेश का गढ़वाल): वाणिज्यिक कटाई के विरुद्ध ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं का अहिंसक प्रतिरोध; संदेश: वन स्थानीय आजीविका (ईंधन, चारा, जल) के आधार हैं, केवल लकड़ी का भंडार नहीं। अर्थशास्त्रीय दृष्टि से: बाज़ार-मूल्य में न दिखने वाली पारिस्थितिक सेवाएँ (बाह्यताएँ) और साझा संसाधनों का सामुदायिक प्रबंधन (एलिनॉर ओस्ट्रॉम)।
  • हरित लेखांकन: SEEA (UN), "हरित GDP" = GDP − प्राकृतिक पूँजी का ह्रास − प्रदूषण की लागत; विश्व बैंक की "समायोजित शुद्ध बचत"।
  • कार्बन व्यापार: उत्सर्जन पर "सीमा और व्यापार" (cap and trade): कुल उत्सर्जन-सीमा तय, परमिट/क्रेडिट का बाज़ार; जिनकी कमी-लागत कम वे अधिक कटौती करके क्रेडिट बेचें, यानी लक्ष्य न्यूनतम लागत पर (कोस और डेल्स के विचार)। क्योटो प्रोटोकॉल (1997) के तंत्र: उत्सर्जन व्यापार, स्वच्छ विकास तंत्र (CDM), संयुक्त कार्यान्वयन; पेरिस समझौता (2015) का अनुच्छेद 6। EU ETS (2005)। भारत: ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2022 के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना (2023); पहले से PAT योजना (ऊर्जा-दक्षता प्रमाणपत्र) और REC।
  • कार्बन व्यापार की सीमाएँ: परमिट का अति-आवंटन (कीमत ढहना), सत्यापन और "अतिरिक्तता" की समस्या, कार्बन रिसाव (उद्योग का कम-नियमन वाले देशों में जाना), समता (विकसित देशों द्वारा कटौती "खरीदना")। विकल्प: कार्बन कर (कीमत निश्चित, मात्रा अनिश्चित) बनाम ETS (मात्रा निश्चित, कीमत अनिश्चित)।

9. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)

  • अर्थ: सार्वजनिक अवसंरचना/सेवा के निर्माण और संचालन में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच दीर्घकालीन अनुबंध, जोखिम और प्रतिफल का बँटवारा। मॉडल: BOT (टोल/वार्षिकी), DBFOT, हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (HAM, 2016, राजमार्ग), TOT, स्विस चुनौती।
  • लाभ: निजी पूँजी और दक्षता, जीवन-चक्र लागत पर ध्यान, समय पर पूर्णता, सरकार पर तत्काल राजकोषीय भार कम, जोखिम का उपयुक्त पक्ष को हस्तांतरण।
  • दोष: आकस्मिक देनदारियाँ, पुनर्वार्ता (renegotiation) और "विजेता का अभिशाप" (अति-आक्रामक बोली), उपयोगकर्ता शुल्क से समता-प्रश्न, भूमि-अधिग्रहण और मंज़ूरी में देरी, बैंकों पर दबाव (2010 के दशक में अटकी परियोजनाएँ और NPA)।
  • पूर्व-शर्तें: स्पष्ट कानूनी और संस्थागत ढाँचा, स्वतंत्र नियामक, तर्कसंगत जोखिम-आवंटन, पारदर्शी बोली, विवाद-निपटारा तंत्र, व्यवहार्यता अंतर निधि (VGF), दीर्घकालीन वित्त (इन्फ्रा बॉन्ड, NaBFID), परियोजना की तैयारी (भूमि, मंज़ूरी)। विजय केलकर समिति (2015) ने भारत में PPP मॉडल की समीक्षा की।

10. Master Summary Table

सिद्धांतमूल सूत्र/विचारनाम/वर्ष
हैरोडGw = s/Cr; Gn = n + λ; चाकू-धार1939
डोमरΔI/I = σs1946
सोलोs f(k*) = (n + δ)k*; स्वर्णिम नियम f′ = n + δ1956
AK / अंतर्जातg = sA − δ; ज्ञान अ-प्रतिद्वंद्वीरोमर 1986/90, लूकस 1988
लुईसअसीमित श्रम-पूर्ति, मोड़-बिंदु1954
रेनिस-फ़ाईतीन चरण1961
हैरिस-टोडारोअपेक्षित शहरी आय से प्रवास1970
बड़ा धक्का / संतुलित / असंतुलितअविभाज्यता / दुश्चक्र / संबंधनरोज़ेन्स्टाइन-रोडान / नर्कसे / हर्शमैन
HDI3 आयाम, ज्यामितीय माध्य (2010 से)UNDP, 1990
कुज़नेट्सउल्टा U1955
सतत विकासअंतर-पीढ़ीगत समताब्रंटलैंड, 1987
कार्बन व्यापारसीमा और व्यापार; न्यूनतम लागत पर कटौतीक्योटो 1997; भारत CCTS 2023

11. चार्ट: कुज़नेट्स का उल्टा U-वक्र

औद्योगीकरण, ग्रामीण से शहरी प्रवास: असमानता बढ़ती शिक्षा, शहरीकरण पूर्ण, कल्याणकारी राज्य: घटती शीर्ष असमानता (गिनी)प्रति व्यक्ति आय
कुज़नेट्स परिकल्पना। पर्यावरणीय कुज़नेट्स वक्र में ऊर्ध्वाधर अक्ष पर प्रदूषण रखा जाता है।

12. Mind Map

संवृद्धि और विकास
संवृद्धि मॉडल
  • हैरोड-डोमर, चाकू-धार
  • सोलो, स्वर्णिम नियम
  • रोमर, लूकस
विकास सिद्धांत
  • लुईस, रेनिस-फ़ाई, हैरिस-टोडारो
  • बड़ा धक्का, नर्कसे, हर्शमैन
रणनीति
  • ISI बनाम EOI
  • नियोजन, NITI, PPP
मापन
  • GDP की सीमाएँ, HDI, MPI
  • कुज़नेट्स
सततता
  • ब्रंटलैंड, चिपको
  • हरित GDP, कार्बन व्यापार

13. महत्वपूर्ण One-liners

  • "स्वर्णिम युग" शब्द: जोन रॉबिन्सन; "स्वर्णिम नियम": एडमंड फेल्प्स।
  • सोलो मॉडल में बचत-दर स्तर बदलती है, दीर्घकालीन वृद्धि दर नहीं।
  • HDI की शुरुआत: 1990; ज्यामितीय माध्य: 2010 से।
  • "Economic Development with Unlimited Supplies of Labour": डब्ल्यू. ए. लुईस (1954)।
  • "The Strategy of Economic Development" (असंतुलित संवृद्धि): हर्शमैन (1958)।
  • चिपको आंदोलन: 1973, गढ़वाल हिमालय।
  • NITI आयोग की स्थापना: 1 जनवरी 2015।
  • भारत में कार्बन क्रेडिट व्यापार का कानूनी आधार: ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2022।

14. टिप्स एवं ट्रिक्स

उत्तर-लेखन
  • हैरोड प्रश्नों में तीनों दरों की तालिका और Gw-Gn तुलना अवश्य; सोलो के साथ तुलना से उत्तर समृद्ध होता है।
  • HDI प्रश्नों में सूत्र और भारत की स्थिति (मध्यम मानव विकास श्रेणी) का उल्लेख, पर सटीक रैंक तभी लिखें जब नवीनतम रिपोर्ट से पक्का हो।
  • विकास-सिद्धांत के उत्तर को भारतीय अनुभव से जोड़ें: महालनोबिस (भारी उद्योग, बड़ा धक्का), 1991 के सुधार (EOI), MGNREGA (अधिशेष श्रम)।
याद रखने की तरकीब

हैरोड: "W = Wish (उद्यमी की इच्छा), N = Nature (जनसंख्या + तकनीक)"। Gw > Gn = "अमीर का अवसाद", Gw < Gn = "गरीब की मुद्रास्फीति"।

सामान्य भूल

"PPP" के दो अर्थ: क्रय-शक्ति समता (Purchasing Power Parity, HDI और GDP तुलना में) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी। प्रश्न का संदर्भ देखकर स्पष्ट लिखें कि आप किसकी बात कर रहे हैं।

15. PYQ-आधारित प्रश्न एवं हल

Q1UPSC 2025 · Paper I · 5(d) · 10 अंक

हैरोड मॉडल में "चाकू-धार" (knife-edge) समस्या समझाइए।

मॉडल उत्तर

खंड 2: तीन दरें, G ≠ Gw होने पर संचयी विचलन की प्रक्रिया (C बनाम Cr का तर्क)। मूल कारण: स्थिर पूँजी-उत्पाद अनुपात और निवेश का त्वरक-व्यवहार; विचलन स्वयं को सुधारता नहीं, बढ़ाता है। समाधान: सोलो का परिवर्तनशील पूँजी-उत्पाद अनुपात, काल्डोर का परिवर्तनशील बचत-अनुपात।

Q2UPSC 2025 · Paper I · 5(e) · 10 अंक

मानव विकास सूचकांक की सीमाएँ बताइए।

मॉडल उत्तर

खंड 7 की सूची, उदाहरण सहित: समान HDI वाले दो देशों में भारी असमानता हो सकती है (इसीलिए IHDI); लैंगिक अंतर छिपता है (GDI); पर्यावरणीय लागत नहीं (PHDI); स्वतंत्रता और शासन नहीं। फिर भी HDI ने विकास-विमर्श को आय से मानव क्षमताओं की ओर मोड़ा, यही इसका स्थायी योगदान।

Q3UPSC 2024 · Paper I · 5(a) · 10 अंक

"प्रति व्यक्ति GDP आर्थिक विकास का एक अपरिष्कृत सूचक है।" टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

उपयोगिता: सरल, आसानी से उपलब्ध, तुलनीय, अनेक सामाजिक सूचकों से धनात्मक सहसंबंध। अपरिष्कृत क्यों: खंड 7 के बिंदु। उदाहरण: तेल-समृद्ध देशों में ऊँची प्रति व्यक्ति आय पर निम्न सामाजिक सूचक; केरल की कम आय पर ऊँचे सामाजिक सूचक (सेन का तर्क)। विकल्प: HDI, MPI, हरित GDP, सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (भूटान), स्टिग्लिट्ज़-सेन-फ़िटूसी की सिफ़ारिशें।

Q4UPSC 2024 · Paper I · 5(c) · 10 अंक

कार्बन व्यापार की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर

खंड 8: सीमा और व्यापार की क्रियाविधि और उसकी लागत-दक्षता (सीमांत कमी-लागत सबके लिए बराबर होने तक व्यापार)। उदाहरण: फ़र्म A की कमी-लागत ₹500/टन, B की ₹2000/टन; A अधिक कटौती करके B को क्रेडिट बेचे तो वही कुल कटौती कम लागत पर। अंतरराष्ट्रीय और भारतीय ढाँचा तथा सीमाएँ।

Q5UPSC 2025 · Paper I · 7(a)

अंतर्जात संवृद्धि सिद्धांत में मानव पूँजी और अनुसंधान एवं विकास की भूमिका की चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

सोलो की सीमा से आरंभ; लूकस का मानव पूँजी मॉडल (शिक्षा में समय का निवेश, बाह्यता); रोमर का R&D मॉडल (विचारों की अ-प्रतिद्वंद्विता, ज्ञान-प्रसार, बढ़ते प्रतिफल, पेटेंट-लाभ से प्रोत्साहन); AK रूप। नीति: खंड 4। आलोचना: पैमाना-प्रभाव (बड़े देश तेज़ बढ़ें, आँकड़ों में नहीं; जोन्स 1995), मापन की कठिनाई। भारत का संदर्भ: जनसांख्यिकीय लाभांश को मानव पूँजी में बदलना, R&D पर कम व्यय (GDP का 1% से कम)।

Q6UPSC 2025 · Paper I · 7(c)

हैरोड की प्राकृतिक संवृद्धि दर की अवधारणा समझाइए। वास्तविक संवृद्धि दर प्राकृतिक दर से क्यों विचलित होती है?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

Gn = n + λ: पूर्ण रोज़गार बनाए रखने हेतु आवश्यक अधिकतम दीर्घकालीन दर। G कभी Gn से स्थायी रूप से ऊपर नहीं जा सकता (श्रम-सीमा), पर नीचे रह सकता है। विचलन के कारण: (i) Gw ≠ Gn (बचत-दर और Cr स्वतंत्र रूप से तय, n और λ जनसांख्यिकी और तकनीक से); (ii) चाकू-धार अस्थिरता के कारण G का Gw से भी विचलन; (iii) प्रभावी माँग की कमी। Gw > Gn और Gw < Gn के परिणाम: खंड 2। नीति: बचत-दर का प्रबंधन (राजकोषीय नीति), तकनीक का चयन।

Q7UPSC 2024 · Paper I · 8(c)

आश्वस्त संवृद्धि दर और प्राकृतिक संवृद्धि दर में भेद कीजिए। हैरोड की चाकू-धार समस्या समझाइए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

तालिका (खंड 2) से भेद: Gw उद्यमी-संतुष्टि (माँग-पक्ष, बचत और वांछित पूँजी-उत्पाद अनुपात) से; Gn संसाधन-सीमा (पूर्ति-पक्ष) से। फिर Q1 की चाकू-धार व्याख्या और Q6 का Gw-Gn असंतुलन। आरेख: समय पर लघुगणकीय उत्पादन के तीन पथ।

Q8UPSC 2024 · Paper I · 7(a)

लुईस मॉडल में संरचनात्मक रूपांतरण की प्रक्रिया समझाइए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

खंड 5: द्वैत, अधिशेष श्रम, स्थिर मज़दूरी, लाभ-पुनर्निवेश, श्रम-माँग वक्रों का क्रमिक खिसकाव (आरेख: क्षैतिज श्रम-पूर्ति रेखा पर तीन MPL वक्र), मोड़-बिंदु। रूपांतरण के आयाम: रोज़गार और उत्पादन का कृषि से उद्योग की ओर, बचत-दर में वृद्धि, शहरीकरण। आलोचना और भारत: भारत में श्रम कृषि से सीधे सेवाओं और निर्माण (अनौपचारिक) में गया, विनिर्माण का हिस्सा अपेक्षा से कम ("समय-पूर्व विऔद्योगीकरण", रोड्रिक)।

Q9UPSC 2024 · Paper I · 7(b)

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के गुण-दोष बताइए। इसकी सफलता की पूर्व-शर्तें क्या हैं?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

खंड 9 के अनुसार लाभ, दोष और पूर्व-शर्तें। भारतीय उदाहरण: दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डे, राष्ट्रीय राजमार्ग (BOT से HAM की ओर बदलाव), बंदरगाह। निष्कर्ष: PPP वित्तपोषण का नहीं, जोखिम-प्रबंधन का उपकरण है; सफलता अनुबंध-डिज़ाइन और संस्थागत क्षमता पर निर्भर।

Q10UPSC 2024 · Paper I · 7(c)

विकास की रणनीति के रूप में आयात-स्थानापन्नता और निर्यात-संवर्धन की तुलना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

तालिका (खंड 6), सैद्धांतिक आधार (प्रेबिश-सिंगर बनाम तुलनात्मक लाभ), भारत पर भगवती-देसाई (1970) और भगवती-श्रीनिवासन (1975) तथा लिटिल-सिटोवस्की-स्कॉट (1970) के अध्ययन जिन्होंने ISI की अदक्षता दिखाई; पूर्वी एशिया का अनुभव। निष्कर्ष: क्रमिक दृष्टिकोण: सीमित, समयबद्ध संरक्षण के बाद निर्यात-अनुशासन; भारत की वर्तमान नीति (PLI, FTA) "निर्यात-उन्मुख विनिर्माण" की ओर।

Q11UPSC 2024 · Paper I · 8(a)

HDI के घटक बताइए। इसकी पद्धतिगत सीमाएँ और उनके उपचार की चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

घटक और सूत्र (खंड 7); आयाम-सूचकांक का उदाहरण: जीवन-प्रत्याशा 70 वर्ष, न्यूनतम 20, अधिकतम 85 ⇒ (70 − 20)/(85 − 20) = 0.77। पद्धतिगत सीमाएँ: भार, सीमाएँ (goalposts), आय का लघुगणक, प्रतिस्थापन, औसत। उपचार: ज्यामितीय माध्य (2010), IHDI, GDI/GII, MPI, PHDI, उप-राष्ट्रीय HDI।

Q12UPSC 2024 · Paper I · 8(b)

कुज़नेट्स की उल्टे U की परिकल्पना की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

परिकल्पना और क्रियाविधि (चार्ट, खंड 11)। आलोचना: (i) कुज़नेट्स के आँकड़े सीमित (कुछ देश); (ii) क्रॉस-सेक्शन परिणाम लैटिन अमेरिका (मध्यम आय, ऊँची असमानता) से प्रभावित; (iii) पूर्वी एशिया ने असमानता बढ़ाए बिना वृद्धि की (भूमि-सुधार, शिक्षा); (iv) विकसित देशों में 1980 के बाद असमानता फिर बढ़ी, यानी "N" आकार; (v) नीति से असमानता निर्धारित होती है, यह स्वचालित नहीं। भारत में उपभोग-आधारित गिनी अपेक्षाकृत कम पर आय और संपत्ति असमानता ऊँची।

Q13UPSC 2025 · Paper I · 8(b)

आर्थिक संवृद्धि और सतत विकास में भेद कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

परिभाषाएँ और भेद-तालिका (मात्रात्मक बनाम गुणात्मक, अल्पकाल बनाम अंतर-पीढ़ीगत, GDP बनाम हरित GDP/HDI, प्राकृतिक पूँजी की उपेक्षा बनाम संरक्षण)। तर्क: वनोन्मूलन GDP बढ़ा सकता है (लकड़ी, खेती) पर भूमि-क्षरण, जैव-विविधता हानि और प्रदूषण से दीर्घकालीन कल्याण घटाता है; चिपको आंदोलन ने यही दिखाया। कमज़ोर बनाम मज़बूत स्थिरता; SDG 2030; भारत की "LiFE" पहल, 2070 तक शुद्ध-शून्य लक्ष्य।

Q14UPSC 2025 · Paper I · 8(c)

बाज़ार अर्थव्यवस्था में नियोजन की भूमिका की चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

बहस: हायेक (सूचना-समस्या, "The Road to Serfdom") बनाम लांगे (बाज़ार समाजवाद); समन्वय और बाज़ार-विफलता के तर्क। आदेशात्मक बनाम सांकेतिक नियोजन। खंड 6 के बिंदु और भारत का विकासक्रम: योजना आयोग से NITI आयोग, विकसित भारत @2047 दृष्टि, राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन, पीएम गति शक्ति (समन्वित अवसंरचना नियोजन)। निष्कर्ष: बाज़ार और राज्य पूरक; नियोजन का रूप "निर्देशन" से "समन्वय और रणनीतिक दिशा" में बदला।

16. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • हैरोड-डोमर: G, Gw, Gn; चाकू-धार; Gw-Gn असंतुलन के परिणाम।
  • सोलो: स्थिर अवस्था, स्वर्णिम नियम, अभिसरण, सोलो अवशेष। अंतर्जात: AK, लूकस, रोमर, एघियन-हॉविट।
  • विकास: लुईस, रेनिस-फ़ाई, हैरिस-टोडारो, बड़ा धक्का, नर्कसे, हर्शमैन, मिर्डल, रोस्टो, निर्भरता।
  • रणनीति: ISI बनाम EOI; सांकेतिक नियोजन, NITI; PPP के गुण-दोष और पूर्व-शर्तें।
  • मापन: GDP की सीमाएँ, HDI (सूत्र, सीमाएँ, उपचार), कुज़नेट्स।
  • सततता: ब्रंटलैंड, कमज़ोर/मज़बूत, चिपको, हरित GDP, कार्बन व्यापार (क्योटो, पेरिस, भारत CCTS)।