1. अध्याय एक नज़र में
Paper II का अंतिम अध्याय उदारीकरण के बाद की भारतीय अर्थव्यवस्था के तीन बड़े क्षेत्रों को जोड़ता है: गरीबी-असमानता और क्षेत्रीय विकास, बाह्य क्षेत्र (व्यापार, विदेशी निवेश, विनिमय दर, परिवर्तनीयता) और राजकोषीय क्षेत्र (राजकोषीय नीति, GST, वित्त आयोग, संघवाद)। 2024 में 10 और 2025 में 9 भाग इसी से आए। सिलेबस:
- 1991 के सुधार; राष्ट्रीय आय की क्षेत्रीय संरचना; सेवा-नेतृत्व वृद्धि।
- गरीबी और असमानता के माप, ग्रामीण गरीबी, क्षमता-वंचन; अंतर-राज्यीय असमानता; ग्रामीण-शहरी विकास।
- विदेश व्यापार नीति, निर्यात-संवर्धन, विदेशी निवेश नीति, बहु-ब्रांड खुदरा में FDI, TRIMS; पूर्ण परिवर्तनीयता, विनिमय दर नीति, रुपये का अवमूल्यन।
- राजकोषीय सुधार, FRBM, GST और संघवाद, वित्त आयोग, सहकारी संघवाद।
2. 1991 के सुधार और राष्ट्रीय आय की संरचना
- संकट: 1990-91 में खाड़ी युद्ध से तेल-कीमतें, प्रवासी-प्रेषण में गिरावट, ऊँचा राजकोषीय घाटा, अल्पकालीन विदेशी ऋण; विदेशी मुद्रा भंडार लगभग दो-तीन सप्ताह के आयात लायक; सोना गिरवी रखकर ऋण; IMF से सहायता।
- दो-स्तरीय सुधार: (i) स्थिरीकरण (अल्पकालीन, माँग-पक्ष): राजकोषीय घाटे में कटौती, मौद्रिक कसाव, रुपये का अवमूल्यन (जुलाई 1991); (ii) संरचनात्मक समायोजन (दीर्घकालीन, पूर्ति-पक्ष): औद्योगिक विलाइसेंसिंग, व्यापार-उदारीकरण, वित्तीय क्षेत्र, कर-सुधार (चेलैया समिति), सार्वजनिक क्षेत्र।
- राष्ट्रीय आय की क्षेत्रीय संरचना: स्वतंत्रता के समय GDP में आधे से अधिक हिस्सा कृषि का था; अब GVA में लगभग: कृषि 18%, उद्योग 27-28%, सेवाएँ 54-55%। किंतु रोज़गार में कृषि का हिस्सा अब भी लगभग 45%। यह असंतुलित रूपांतरण है: उत्पादन सेवाओं की ओर गया, पर श्रम कृषि में अटका रहा; विनिर्माण का GDP-हिस्सा लगभग 15-17% पर स्थिर।
- सेवा-नेतृत्व वृद्धि क्या सतत है?
- पक्ष: IT-BPM, वित्तीय सेवाएँ, दूरसंचार में वैश्विक प्रतिस्पर्धा; सेवा-निर्यात से चालू खाते का सहारा; वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC); कम पूँजी और ऊर्जा-गहन; डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से विस्तार।
- विपक्ष: कम रोज़गार-लोच (कुशल श्रम पर निर्भर), बहुसंख्य अकुशल श्रम-शक्ति को अवशोषित नहीं कर सकती; उच्च-मूल्य सेवाएँ कुछ महानगरों में; अनौपचारिक निम्न-उत्पादकता सेवाओं (खुदरा, परिवहन) का बड़ा भाग; AI और स्वचालन से जोखिम; विनिर्माण के बिना तकनीकी गहराई और निर्यात-विविधता सीमित।
- निष्कर्ष: सेवाएँ वृद्धि का इंजन बनी रह सकती हैं, पर समावेशी और टिकाऊ वृद्धि के लिए श्रम-गहन विनिर्माण और कृषि-उत्पादकता के साथ "दोहरा इंजन" चाहिए।
3. गरीबी और असमानता: माप और नीतियाँ
| समिति/माप | आधार | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| अलघ कार्यदल (1979) | कैलोरी (ग्रामीण 2400, शहरी 2100) | उपभोग-व्यय आधारित गरीबी-रेखा |
| लकड़ावाला (1993) | कैलोरी + राज्य-विशिष्ट रेखाएँ, CPI-AL/CPI-IW से अद्यतन | 1973-74 के उपभोग-ढाँचे पर |
| तेंदुलकर (2009) | कैलोरी से हटकर समग्र उपभोग-टोकरी (स्वास्थ्य, शिक्षा सहित); ग्रामीण-शहरी के लिए समान टोकरी | 2011-12 में गरीबी 21.9% |
| रंगराजन (2014) | खाद्य (कैलोरी, प्रोटीन, वसा) + गैर-खाद्य आवश्यकताएँ | 2011-12 में 29.5%; सरकार ने औपचारिक रूप से नहीं अपनाया |
| बहुआयामी गरीबी सूचकांक (NITI, 2021 से) | स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन-स्तर के 12 संकेतक (NFHS आँकड़े) | अल्केयर-फ़ॉस्टर पद्धति |
| विश्व बैंक | अंतरराष्ट्रीय गरीबी-रेखा (PPP डॉलर प्रति दिन) | 2025 में 2021 PPP के आधार पर $3.00 प्रति दिन |
- गरीबी के सूचकांक: शीर्ष-गणना अनुपात (HCR: कितने गरीब), गरीबी-अंतराल (कितने गरीब: रेखा से औसत दूरी), वर्गित गरीबी-अंतराल (गरीबों में असमानता: फ़ॉस्टर-ग्रीर-थॉरबेक्के वर्ग)। सेन सूचकांक (1976) तीनों को जोड़ता है।
- असमानता के माप: लॉरेंज़ वक्र; गिनी गुणांक (0 पूर्ण समानता, 1 पूर्ण असमानता; लॉरेंज़ वक्र और समानता-रेखा के बीच का क्षेत्र/समानता-रेखा के नीचे का कुल क्षेत्र); पाल्मा अनुपात (शीर्ष 10% का हिस्सा/निचले 40% का); थाइल सूचकांक (उप-समूहों में विघटनीय); शीर्ष 1% का आय/संपत्ति हिस्सा। भारत में उपभोग-आधारित (NSS/HCES) गिनी कम दिखता है, आय और संपत्ति (AIDIS) आधारित गिनी ऊँचा।
- क्षमता-वंचन के रूप में गरीबी (अमर्त्य सेन): गरीबी केवल आय की कमी नहीं, बल्कि मूल्यवान "कार्य" (functionings: स्वस्थ रहना, पढ़ना, समाज में भाग लेना) करने की वास्तविक स्वतंत्रता (capabilities) का अभाव है। आय एक साधन है; उसे क्षमता में बदलने की दर आयु, लिंग, विकलांगता, स्थान और सामाजिक व्यवस्था पर निर्भर ("रूपांतरण कारक")। इसलिए समान आय पर भी वंचन भिन्न। "Development as Freedom" (1999)। नीति-अर्थ: शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, लोकतांत्रिक भागीदारी; MPI और HDI इसी दृष्टि के माप।
- ग्रामीण गरीबी के अनुमान और उपाय: तेंदुलकर पद्धति से ग्रामीण गरीबी 2004-05 से 2011-12 में तेज़ी से घटी; NITI के MPI अनुमानों में भी ग्रामीण बहुआयामी गरीबी में बड़ी गिरावट (2015-16 से 2019-21)। उपाय: MGNREGA, DAY-NRLM, PMAY-G, PMGSY (2000), जल जीवन मिशन (2019), उज्ज्वला (2016), NFSA, PM-KISAN, आयुष्मान भारत (2018), स्वच्छ भारत (2014)। आलोचना: गरीबी-रेखा बहुत नीची ("भुखमरी रेखा"), अद्यतन उपभोग सर्वेक्षण (HCES 2022-23) के बाद नई आधिकारिक रेखा का अभाव।
- ग्रामीण और शहरी विकास से गरीबी में कमी: ग्रामीण: कृषि-उत्पादकता (गरीबी पर सर्वाधिक प्रभाव, रविकांत-दत्त जैसे अध्ययन), ग्रामीण गैर-कृषि रोज़गार, सड़कें और बिजली, SHG; शहरी: AMRUT, स्मार्ट सिटी (2015), PMAY-U, DAY-NULM, PM स्वनिधि (2020); शहरीकरण से उत्पादकता और प्रवासी-प्रेषण। ग्रामीण-शहरी संबंध: छोटे शहरों और कस्बों का विकास गरीबी घटाने में महानगरों से अधिक प्रभावी पाया गया।
4. अंतर-राज्यीय असमानता
- प्रवृत्ति: सबसे समृद्ध और सबसे गरीब राज्यों के प्रति व्यक्ति आय-अंतर में कोई अभिसरण नहीं; 1991 के बाद अपसरण (divergence) के प्रमाण: दक्षिणी और पश्चिमी राज्य आगे, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा जैसे राज्य पीछे (सापेक्ष रूप से)।
- बने रहने के कारण: ऐतिहासिक (भू-राजस्व व्यवस्था, उपनिवेशकालीन निवेश); भौतिक और मानव पूँजी में अंतर; निजी निवेश बेहतर अवसंरचना और शासन वाले राज्यों में; उदारीकरण के बाद बाज़ार-शक्तियों से संचयी लाभ (मिर्डल का "प्रतिगामी प्रभाव"); शासन और संस्थागत क्षमता; जनसंख्या-वृद्धि में अंतर; वित्त आयोग के हस्तांतरण पर्याप्त समकारी नहीं; भाड़ा-समानीकरण नीति (1952-93) का खनिज-समृद्ध राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव।
- उपाय: वित्त आयोग का आय-दूरी मानदंड, आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम (2018) और आकांक्षी प्रखंड (2023), पूर्वोदय, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान (BRGF, अब समाप्त), विशेष श्रेणी राज्य, अवसंरचना (गति शक्ति), मानव पूँजी में निवेश।
5. विदेश व्यापार नीति और निर्यात-संवर्धन
- विदेश व्यापार नीति 2023 (31 मार्च 2023 को घोषित, 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी): पहले की पंचवर्षीय नीतियों के विपरीत कोई निश्चित समाप्ति-तिथि नहीं, आवश्यकता अनुसार अद्यतन। लक्ष्य: 2030 तक वस्तु और सेवा निर्यात $2 ट्रिलियन। चार स्तंभ: प्रोत्साहन से छूट/पात्रता आधारित व्यवस्था (incentive to remission), सहयोग (राज्य, ज़िले, दूतावास), व्यापार-सुगमता (स्वचालन, स्व-प्रमाणन), उभरते क्षेत्र (ई-कॉमर्स निर्यात, SCOMET, दोहरे उपयोग की वस्तुएँ)। "ज़िले निर्यात केंद्र के रूप में", निर्यात-उत्कृष्टता के नगर, रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रोत्साहन, एडवांस ऑथराइज़ेशन/EPCG के लिए एकमुश्त माफ़ी योजना।
- व्यापार-अधिशेष और रोज़गार पर प्रभाव: भारत का वस्तु-व्यापार परंपरागत रूप से घाटे में (कच्चा तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात), सेवा-व्यापार अधिशेष में। नीति का उद्देश्य वस्तु-घाटा घटाना और निर्यात से रोज़गार बढ़ाना है: MSME, हस्तशिल्प, ई-कॉमर्स निर्यात (छोटे निर्यातकों) पर बल। सीमाएँ: वैश्विक माँग में मंदी और संरक्षणवाद (ऊँचे प्रशुल्क), श्रम-गहन क्षेत्रों (वस्त्र, चमड़ा) में बांग्लादेश-वियतनाम से प्रतिस्पर्धा, लॉजिस्टिक्स लागत, आयातित आगत पर निर्भरता (इलेक्ट्रॉनिक्स)।
- पिछले दस वर्षों के निर्यात-संवर्धन कदम: FTP 2015-20 (MEIS, SEIS); WTO-अनुरूपता हेतु MEIS के स्थान पर RoDTEP (जनवरी 2021) और वस्त्र के लिए RoSCTL; PLI योजनाएँ (14 क्षेत्र, 2020-21 से; मोबाइल फ़ोन निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि); राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022) और PM गति शक्ति (2021); FTA/CEPA: UAE (2022), ऑस्ट्रेलिया (ECTA, 2022), EFTA (TEPA, 2024), ब्रिटेन (2025 में हस्ताक्षरित); विदेशी व्यापार में रुपया-निपटान (विशेष वोस्ट्रो खाते, जुलाई 2022); ज़िला निर्यात कार्ययोजनाएँ; निर्यात ऋण गारंटी और ब्याज समकरण योजना।
6. विदेशी निवेश नीति
- विकासक्रम: FERA (1973) की कठोरता → 1991 में 51% तक स्वचालित अनुमोदन → FEMA (1999) → अधिकांश क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग से 100%; सरकारी मार्ग केवल संवेदनशील क्षेत्रों में; FIPB समाप्त (2017), अब संबंधित मंत्रालय और DPIIT।
- प्रमुख सीमाएँ (उदाहरण): रक्षा 74% स्वचालित (2020), इसके ऊपर सरकारी अनुमोदन; बीमा 74% (2021; बजट 2025-26 में 100% का प्रस्ताव); बहु-ब्रांड खुदरा 51% सरकारी मार्ग से; निषिद्ध: लॉटरी, जुआ, चिट फ़ंड, परमाणु ऊर्जा, तंबाकू उत्पाद आदि। प्रेस नोट 3 (अप्रैल 2020): भारत से भूमि-सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश सरकारी अनुमोदन से ही।
- बहु-ब्रांड खुदरा में FDI (सितंबर 2012 से 51%): शर्तें: न्यूनतम $100 मिलियन निवेश, उसका कम से कम 50% "बैक-एंड" अवसंरचना (शीत-भंडारण, गोदाम, लॉजिस्टिक्स) में; विनिर्मित/प्रसंस्कृत उत्पादों का कम से कम 30% भारतीय लघु उद्योगों से; 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में; राज्यों को अनुमति का विकल्प। पक्ष: किसानों को बेहतर कीमत (बिचौलिए कम), आपूर्ति-शृंखला में निवेश और फ़सल-उपरांत हानि में कमी, उपभोक्ताओं को कम कीमत, रोज़गार। विपक्ष: छोटे किराना व्यापारियों का विस्थापन, शिकारी मूल्य-निर्धारण, क्रेता-एकाधिकार से किसानों पर दबाव, आयात बढ़ना। व्यवहार में उपयोग नगण्य; विदेशी कंपनियाँ थोक (कैश एंड कैरी, 100%) और ई-कॉमर्स "मार्केटप्लेस" मॉडल से आईं।
- क्या विदेशी निवेश पर नियंत्रण चाहिए? FDI स्थिर, दीर्घकालीन, तकनीक लाने वाला; पोर्टफ़ोलियो (FPI) "हॉट मनी", अचानक बहिर्वाह से रुपये और शेयर बाज़ार में अस्थिरता (2013 का "टेपर टैंट्रम")। अतः संतुलित दृष्टि: FDI का उदारीकरण, FPI पर विवेकपूर्ण (macro-prudential) सीमाएँ, ऋण-प्रवाह (ECB) पर सीमा, राष्ट्रीय सुरक्षा जाँच (प्रेस नोट 3), कर-परिहार और अंतरण-कीमत पर निगरानी।
- TRIMS और भारत: TRIMS स्थानीय सामग्री आवश्यकता, व्यापार-संतुलन (निर्यात-दायित्व से आयात की सीमा) और विदेशी मुद्रा संतुलन जैसी शर्तों को निषिद्ध करता है। भारत के विरुद्ध क्यों: विकासशील देशों से औद्योगिक-नीति के उपकरण छिनते हैं जिन्हें विकसित देशों ने स्वयं प्रयोग किया था (फ़ेज़्ड मैन्युफ़ैक्चरिंग, ऑटो क्षेत्र में स्वदेशीकरण की शर्तें); अमेरिका बनाम भारत (सौर कोशिकाएँ, 2016) में भारत की घरेलू सामग्री शर्त WTO-विरुद्ध पाई गई; MNC के प्रतिबंधात्मक व्यवहार (अंतरण-कीमत, तकनीकी शर्तें) पर कोई नियंत्रण नहीं। फिर भी PLI जैसी उत्पादन-आधारित योजनाएँ (सभी के लिए समान, स्थानीय सामग्री की सीधी शर्त नहीं) अपेक्षाकृत अनुरूप।
7. परिवर्तनीयता, विनिमय दर और रुपया
- चालू खाता परिवर्तनीयता: अगस्त 1994 (IMF अनुच्छेद VIII)। पूँजी खाता परिवर्तनीयता (CAC): तारापोर समिति I (1997) और II (2006) ने पूर्व-शर्तों (राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति, NPA, पर्याप्त भंडार) के साथ चरणबद्ध रोडमैप दिया। आज भारत में "क्रमबद्ध, आंशिक" CAC: FDI, FPI, ECB की सीमाओं में उदार, निवासियों के लिए उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS, प्रति वर्ष $2,50,000 तक)।
- क्या पूर्ण CAC संभव/वांछनीय है? पक्ष: पूँजी की कम लागत, निवेश, रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण, वित्तीय गहराई। विपक्ष: 1997 का पूर्वी एशियाई संकट (भारत अपेक्षाकृत सुरक्षित रहा क्योंकि CAC नहीं था), अचानक पूँजी-पलायन, असंभव त्रयी में मौद्रिक स्वायत्तता का ह्रास, अभी भी ऊँचा सामान्य सरकारी ऋण और राजकोषीय घाटा। निष्कर्ष: पूर्व-शर्तें पूरी होने तक क्रमिक और क्रमबद्ध उदारीकरण (रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण पर RBI के अंतर-विभागीय समूह की 2023 की रिपोर्ट)।
- RBI की विनिमय दर रणनीति: 1992 में LERMS (दोहरी दर), मार्च 1993 से एकीकृत बाज़ार-निर्धारित दर; कोई लक्ष्य-स्तर नहीं, "अत्यधिक अस्थिरता" रोकने के लिए हस्तक्षेप (प्रबंधित अस्थिरता); भंडार-निर्माण (अंतर्वाह के समय) और भंडार-उपयोग (बहिर्वाह के समय), निष्फलीकरण। हाल के बदलाव: 2022-23 में भारी हस्तक्षेप से रुपये की अस्थिरता बहुत कम रही (IMF ने भारत की व्यवस्था को "स्थिरीकृत व्यवस्था" श्रेणी में रखा, जिस पर RBI ने असहमति जताई); अग्रिम (forward) बाज़ार और ऑफ़शोर NDF बाज़ार में हस्तक्षेप; 2025 में अधिक दो-तरफ़ा लचीलापन; रुपये में व्यापार-निपटान और अंतरराष्ट्रीयकरण।
- रुपये के अवमूल्यन (depreciation) के निहितार्थ: सकारात्मक: निर्यात-प्रतिस्पर्धा (मार्शल-लर्नर शर्त पूरी हो तो, J-वक्र के बाद), प्रवासी-प्रेषण का रुपया-मूल्य बढ़ना, आयात-स्थानापन्नता। नकारात्मक: आयातित मुद्रास्फीति (कच्चा तेल, उर्वरक, इलेक्ट्रॉनिक्स; "पास-थ्रू"), विदेशी मुद्रा ऋण का भार (बिना हेज वाली कंपनियाँ), तेल-सब्सिडी और राजकोषीय दबाव, पूँजी-बहिर्वाह की अपेक्षा, विदेश में शिक्षा-यात्रा महँगी। भारत के निर्यात में आयात-सामग्री अधिक होने से लाभ सीमित। नीति: अस्थिरता घटाना पर स्तर का बचाव नहीं, मूलभूत तत्वों (CAD, मुद्रास्फीति) पर ध्यान।
8. राजकोषीय नीति, GST और संघवाद
- उदारीकरण के बाद राजकोषीय नीति में बदलाव:
- कर-सुधार: चेलैया समिति (1991): कम दरें, व्यापक आधार; आयकर-दरों का सरलीकरण; सेवा कर (1994); VAT (2005, राज्य); GST (2017); कॉरपोरेट कर में कटौती (सितंबर 2019: 22%, नई विनिर्माण कंपनियों के लिए 15%); नई कर-व्यवस्था; आयकर अधिनियम 2025 (1961 के अधिनियम का स्थान, 1 अप्रैल 2026 से)।
- राजकोषीय अनुशासन: FRBM अधिनियम (2003), संशोधन (2018: ऋण-GDP को मुख्य लक्ष्य); राज्यों के राजकोषीय उत्तरदायित्व क़ानून; कोविड में अस्थायी विचलन और फिर समेकन का मार्ग।
- व्यय-संरचना: सब्सिडी-युक्तिकरण, DBT; हाल के वर्षों में सार्वजनिक पूँजीगत व्यय पर बल; परिणाम-आधारित बजट।
- सामाजिक न्याय के साथ संवृद्धि: अधिकार-आधारित कल्याण (MGNREGA 2005, RTE 2009, NFSA 2013), सार्वभौमिक बुनियादी सुविधाएँ (आवास, शौचालय, नल-जल, बिजली, गैस), आयुष्मान भारत, PM-KISAN, DBT और JAM; प्रगतिशील प्रत्यक्ष कर। आलोचना: प्रत्यक्ष कर-GDP अनुपात अब भी कम, अप्रत्यक्ष करों पर निर्भरता (प्रतिगामी), शिक्षा-स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय कम।
- GST और संघवाद: 101वाँ संविधान संशोधन (2016), 1 जुलाई 2017 से लागू; अनुच्छेद 246A (समवर्ती कराधान शक्ति), अनुच्छेद 279A (GST परिषद: केंद्र का 1/3 मत, राज्यों का 2/3, निर्णय 3/4 बहुमत से)। सहकारी संघवाद का उदाहरण: साझा संप्रभुता, सर्वसम्मति-आधारित निर्णय, "एक राष्ट्र एक कर"। तनाव: राज्यों की कर-स्वायत्तता घटी (पेट्रोलियम, शराब छोड़कर); क्षतिपूर्ति (5 वर्ष, जून 2022 तक) के बाद राजस्व-अनिश्चितता; विनिर्माण-राज्यों को उपभोग-आधारित कर से हानि; परिषद में केंद्र का प्रभावी "वीटो"; सर्वोच्च न्यायालय (मोहित मिनरल्स, 2022): परिषद की सिफ़ारिशें प्रेरक (persuasive), बाध्यकारी नहीं। GST 2.0 (सितंबर 2025): दरों का युक्तिकरण, मुख्यतः 5% और 18% दो स्लैब तथा कुछ विलासिता/हानिकारक वस्तुओं पर 40%।
- वित्त आयोग (अनुच्छेद 280): 15वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष एन.के. सिंह; 2021-26): विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41% (जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से 42% से समायोजित)। क्षैतिज वितरण के मानदंड: आय-दूरी 45%, जनसंख्या (2011) 15%, क्षेत्रफल 15%, वन और पारिस्थितिकी 10%, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन 12.5%, कर-प्रयास 2.5%। राजस्व-घाटा अनुदान, स्थानीय निकाय अनुदान, आपदा-प्रबंधन अनुदान, क्षेत्र-विशिष्ट और प्रदर्शन-आधारित अनुदान। राजकोषीय समेकन: केंद्र के राजकोषीय घाटे को 2025-26 तक GDP के 4% तक लाने का मार्ग; राज्यों के लिए GSDP के 3-4% की शुद्ध उधार-सीमा (बिजली क्षेत्र सुधार से जुड़ी अतिरिक्त 0.5% की छूट); स्वतंत्र राजकोषीय परिषद और ऋण-नियम की सिफ़ारिश। 16वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया) की अवधि 2026-31 है।
- राजकोषीय संघवाद, राजकोषीय समेकन और सहकारी संघवाद का संबंध: राजकोषीय संघवाद = केंद्र-राज्यों में कर-शक्तियों, व्यय-दायित्वों और हस्तांतरणों का बँटवारा (ऊर्ध्वाधर असंतुलन: राज्यों का व्यय अधिक, राजस्व-शक्ति कम)। राजकोषीय समेकन = घाटा-ऋण घटाना; यदि केंद्र उपकर और अधिभार (जो विभाज्य पूल में नहीं) बढ़ाकर समेकन करे या राज्यों की उधार-सीमा कसे, तो राजकोषीय संघवाद पर दबाव। सहकारी संघवाद = साझा संस्थाएँ (GST परिषद, NITI आयोग, अंतर-राज्य परिषद) से सहमति-आधारित निर्णय। तीनों में संतुलन: नियम-आधारित, पारदर्शी हस्तांतरण, उपकर-अधिभार की सीमा, राज्यों की उधार-सीमा का पूर्वानुमेय ढाँचा, राजकोषीय परिषद।
9. Master Summary Table
| विषय | मुख्य तथ्य | परीक्षा-बिंदु |
|---|---|---|
| 1991 | स्थिरीकरण + संरचनात्मक समायोजन | BoP संकट |
| गरीबी-रेखा | तेंदुलकर 21.9%, रंगराजन 29.5% (2011-12) | MPI (NITI) |
| क्षमता-वंचन | सेन, "Development as Freedom" 1999 | रूपांतरण कारक |
| FTP 2023 | 1 अप्रैल 2023, कोई समाप्ति-तिथि नहीं | $2 ट्रिलियन (2030) |
| निर्यात प्रोत्साहन | RoDTEP 2021, PLI, FTA | लॉजिस्टिक्स नीति 2022 |
| बहु-ब्रांड खुदरा | 51% (2012), $100 मिलियन, 50% बैक-एंड, 30% लघु उद्योग | राज्यों का विकल्प |
| परिवर्तनीयता | चालू खाता 1994; तारापोर 1997, 2006 | LRS $2,50,000 |
| विनिमय दर | LERMS 1992; बाज़ार-दर 1993 | प्रबंधित अस्थिरता |
| GST | 101वाँ संशोधन; 1 जुलाई 2017; अनु. 279A | GST 2.0 (सितंबर 2025) |
| 15वाँ FC | 41%; आय-दूरी 45% | 2021-26 |
| 16वाँ FC | अरविंद पनगढ़िया | 2026-31 |
10. चार्ट: लॉरेंज़ वक्र और गिनी गुणांक
11. Mind Map
- 1991, क्षेत्रीय संरचना
- सेवा-नेतृत्व वृद्धि
- समितियाँ, MPI, गिनी
- क्षमता-वंचन, राज्य-असमानता
- FTP 2023, RoDTEP, FTA
- FDI, बहु-ब्रांड, TRIMS
- CAC, तारापोर
- प्रबंधित अस्थिरता, अवमूल्यन
- कर-सुधार, FRBM, GST
- वित्त आयोग, संघवाद
12. महत्वपूर्ण One-liners
- चालू खाता परिवर्तनीयता: अगस्त 1994।
- GST लागू: 1 जुलाई 2017; GST परिषद: अनुच्छेद 279A।
- 15वें वित्त आयोग में राज्यों का हिस्सा: 41%।
- बहु-ब्रांड खुदरा में FDI सीमा: 51% (सरकारी मार्ग)।
- प्रेस नोट 3: अप्रैल 2020 (भूमि-सीमा वाले देश)।
- तेंदुलकर समिति ने कैलोरी-मानदंड छोड़ा।
- MEIS का स्थान लेने वाली योजना: RoDTEP (2021)।
- "Development as Freedom": अमर्त्य सेन (1999)।
13. टिप्स एवं ट्रिक्स
- नीति-प्रश्नों (FTP, FDI, GST) में "विशेषताएँ → प्रभाव → चुनौतियाँ → आगे की राह" ढाँचा।
- प्रश्न में कोई तथ्य असटीक हो (जैसे FTP 2023 को किसी निश्चित अवधि की नीति कहना) तो उत्तर में विनम्रता से सही तथ्य लिखें; परीक्षक इसे सराहते हैं।
- गरीबी-असमानता के उत्तर में कम से कम एक आरेख (लॉरेंज़ वक्र) और समितियों की तुलना-तालिका।
गरीबी-समितियाँ कालक्रम से: "अलघ-लकड़ावाला-तेंदुलकर-रंगराजन" (1979-93-2009-14)। 15वें FC के मानदंड: "आय 45, जन 15, क्षेत्र 15, वन 10, जनसांख्यिकी 12.5, कर 2.5"।
"अवमूल्यन" (devaluation, स्थिर दर में सरकारी निर्णय) और "मूल्यह्रास" (depreciation, बाज़ार-निर्धारित गिरावट) को एक मानना। आज रुपये में मूल्यह्रास होता है, अवमूल्यन नहीं।
14. PYQ-आधारित प्रश्न एवं हल
विदेश व्यापार नीति 2023 व्यापार-अधिशेष और रोज़गार-सृजन में कहाँ तक सहायक हो सकती है?
मॉडल उत्तर
खंड 5: नीति की विशेषताएँ (समाप्ति-तिथि रहित, चार स्तंभ, ज़िला-केंद्र, ई-कॉमर्स); व्यापार-संतुलन पर संभावित प्रभाव और रोज़गार (MSME, हस्तशिल्प); सीमाएँ (वैश्विक संरक्षणवाद, लॉजिस्टिक्स, आयात-निर्भरता)। निष्कर्ष: नीति सहायक है पर व्यापार-अधिशेष के लिए विनिर्माण-प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा-आयात में कमी अधिक निर्णायक।
GST और भारतीय संघवाद पर टिप्पणी कीजिए।
मॉडल उत्तर
खंड 8: संवैधानिक ढाँचा (246A, 279A), सहकारी संघवाद के पक्ष, तनाव के बिंदु (स्वायत्तता, क्षतिपूर्ति, विनिर्माण-राज्य, मोहित मिनरल्स निर्णय), GST 2.0। निष्कर्ष: GST "साझा संप्रभुता" का प्रयोग है जिसकी सफलता परिषद में भरोसे और राज्यों की राजस्व-सुरक्षा पर निर्भर।
क्या भारत की सेवा-नेतृत्व वृद्धि सतत है?
मॉडल उत्तर
खंड 2: संरचना के आँकड़े (लगभग), पक्ष-विपक्ष, "दोहरा इंजन" निष्कर्ष।
रुपये के मूल्यह्रास के भारतीय अर्थव्यवस्था पर निहितार्थ बताइए।
मॉडल उत्तर
खंड 7 का अंतिम बिंदु: सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव, सीमित निर्यात-लाभ का कारण (आयात-सामग्री), RBI की प्रतिक्रिया।
बहु-ब्रांड खुदरा व्यापार में FDI पर टिप्पणी कीजिए।
मॉडल उत्तर
खंड 6: नीति और शर्तें, पक्ष-विपक्ष, व्यवहार में सीमित उपयोग और ई-कॉमर्स/थोक मार्ग। निष्कर्ष: बैक-एंड निवेश की शर्त किसानों के लिए उपयोगी, पर किराना-क्षेत्र की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा-नियमन आवश्यक; ONDC (2022) जैसा विकल्प।
"गरीबी क्षमता-वंचन है।" व्याख्या कीजिए।
मॉडल उत्तर
खंड 3: सेन का दृष्टिकोण (कार्य, क्षमता, रूपांतरण कारक), आय-दृष्टिकोण से भेद, उदाहरण (समान आय पर विकलांग व्यक्ति की अधिक आवश्यकता; केरल बनाम ऊँची आय वाले राज्य), नीति-अर्थ और माप (HDI, MPI)।
भारत में अंतर-राज्यीय आय-असमानता क्यों बनी हुई है?
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 4: प्रवृत्ति (अभिसरण का अभाव), कारण, उपाय। सैद्धांतिक आधार: सोलो के सशर्त अभिसरण के अनुसार भिन्न मानव पूँजी और संस्थाओं वाले राज्य अलग स्थिर अवस्थाओं की ओर जाते हैं; मिर्डल का संचयी कारण।
भारत में गरीबी और असमानता मापने की विधियों की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 3: गरीबी-रेखा समितियाँ (तालिका), सूचकांक (HCR, PG, SPG, सेन), MPI, विश्व बैंक रेखा; असमानता के माप (लॉरेंज़, गिनी, पाल्मा, थाइल); आँकड़ा-स्रोत (HCES, PLFS, AIDIS, NFHS)। सीमाएँ: उपभोग बनाम आय, पुराने आँकड़े, धनी परिवारों का कम प्रतिनिधित्व।
गरीबी में कमी लाने में ग्रामीण और शहरी विकास की भूमिका की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 3 का अंतिम बिंदु: ग्रामीण विकास के माध्यम (कृषि-उत्पादकता, गैर-कृषि रोज़गार, अवसंरचना, SHG) और शहरी विकास के माध्यम (रोज़गार, आवास, सेवाएँ, प्रेषण); ग्रामीण-शहरी निरंतरता; चुनौतियाँ (शहरी अनौपचारिकता, झुग्गियाँ, ग्रामीण संकट)।
भारत में ग्रामीण गरीबी के अनुमानों और उसे कम करने के उपायों की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
अनुमान: तेंदुलकर (ग्रामीण 2004-05 और 2011-12 में तेज़ गिरावट), रंगराजन, NITI MPI (ग्रामीण बहुआयामी गरीबी में गिरावट); विवाद (रेखा का स्तर, आँकड़ा-अंतराल)। उपाय: खंड 3 की योजनाएँ (मज़दूरी-रोज़गार, आजीविका, बुनियादी सुविधाएँ, खाद्य सुरक्षा, आय-समर्थन)।
उदारीकरण के बाद भारत की राजकोषीय नीति में हुए परिवर्तनों की समीक्षा कीजिए। क्या इसने सामाजिक न्याय के साथ संवृद्धि सुनिश्चित की है?
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 8: कर-सुधार, राजकोषीय अनुशासन, व्यय-संरचना; सामाजिक न्याय के उपाय और आलोचना। संतुलित निष्कर्ष: संवृद्धि और गरीबी-कमी में सफलता, पर असमानता, मानव-पूँजी व्यय और कर-आधार में कमियाँ।
TRIMS समझौते की विशेषताएँ बताइए। यह भारत के हितों के विरुद्ध कैसे है?
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
विशेषताएँ: केवल वस्तु-व्यापार से जुड़े निवेश-उपाय; राष्ट्रीय व्यवहार (GATT अनुच्छेद III) और मात्रात्मक प्रतिबंध-निषेध (अनुच्छेद XI) से असंगत उपायों की "उदाहरण-सूची"; अधिसूचना और संक्रमण-अवधि (विकासशील देशों के लिए 5 वर्ष)। भारत के विरुद्ध: खंड 6 का TRIMS बिंदु। आगे: WTO-अनुरूप औद्योगिक नीति (PLI, अवसंरचना, R&D)।
भारत की विदेशी निवेश नीति की चर्चा कीजिए। क्या विदेशी निवेश पर नियंत्रण की आवश्यकता है?
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 6: विकासक्रम, मार्ग और सीमाएँ, प्रेस नोट 3; FDI बनाम FPI; नियंत्रण पर संतुलित दृष्टि (विवेकपूर्ण सीमाएँ, सुरक्षा जाँच, कर-निगरानी)।
पिछले दस वर्षों में भारत सरकार द्वारा निर्यात-संवर्धन के लिए उठाए गए कदमों की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 5 के कदम (नीति, प्रोत्साहन, PLI, लॉजिस्टिक्स, FTA, रुपया-निपटान, ज़िला-स्तर); परिणाम (सेवा निर्यात और इलेक्ट्रॉनिक्स में वृद्धि); चुनौतियाँ (श्रम-गहन निर्यात, वैश्विक संरक्षणवाद)।
स्वतंत्रता के बाद भारत की राष्ट्रीय आय की क्षेत्रीय संरचना में आए परिवर्तनों की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 2: कृषि का घटता, सेवाओं का बढ़ता, उद्योग का स्थिर हिस्सा; उत्पादन-रोज़गार का असंतुलन; कारण (सेवा-मांग की ऊँची आय-लोच, IT, विनिर्माण की बाधाएँ); क्लार्क-फ़िशर परिकल्पना से तुलना (भारत ने विनिर्माण-चरण "छलाँग" लगाई)। आँकड़े आर्थिक सर्वेक्षण/NSO से "लगभग" रूप में।
पूर्ण परिवर्तनीयता से आप क्या समझते हैं? क्या भारत में पूँजी खाता परिवर्तनीयता संभव है?
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
अर्थ: चालू और पूँजी दोनों खातों के लेन-देन के लिए बाज़ार-दर पर घरेलू मुद्रा का स्वतंत्र विनिमय। खंड 7: भारत की वर्तमान स्थिति, तारापोर की पूर्व-शर्तें, पक्ष-विपक्ष, निष्कर्ष (क्रमिक)।
RBI की विनिमय दर प्रबंधन रणनीति और उसमें हाल के परिवर्तनों की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 7: 1992-93 से प्रबंधित अस्थिरता, उद्देश्य (अस्थिरता घटाना), उपकरण (स्पॉट, फ़ॉरवर्ड, NDF हस्तक्षेप, निष्फलीकरण, भंडार), हाल के परिवर्तन (कम अस्थिरता का चरण, IMF वर्गीकरण, 2025 में अधिक लचीलापन, रुपया-अंतरराष्ट्रीयकरण)। संबंध: असंभव त्रयी (खुले पूँजी-प्रवाह के साथ मौद्रिक स्वायत्तता हेतु दर में लचीलापन)।
वर्तमान वित्त आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशों और राजकोषीय समेकन से उनके संबंध की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 8: 15वें FC का ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज हस्तांतरण, अनुदान, राजकोषीय मार्ग (केंद्र 4% तक, राज्यों की उधार-सीमा), संस्थागत सिफ़ारिशें; 16वें FC (2026-31) का उल्लेख। संबंध: हस्तांतरण की पूर्वानुमेयता से राज्यों का समेकन आसान; प्रदर्शन-आधारित अनुदान से सुधार-प्रोत्साहन; चुनौती: उपकर-अधिभार, राज्यों की गारंटियाँ और बिजली क्षेत्र के घाटे।
राजकोषीय संघवाद, राजकोषीय समेकन और सहकारी संघवाद के अंतर्संबंधों की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
खंड 8 का अंतिम बिंदु: तीनों की परिभाषाएँ, तनाव के बिंदु (उपकर, उधार-सीमा, GST क्षतिपूर्ति), सामंजस्य के उपाय। उदाहरण: कोविड में राज्यों की अतिरिक्त उधार-सीमा सुधार-शर्तों से जोड़ी गई (सहकारी + समेकन); पूँजीगत व्यय हेतु राज्यों को 50-वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋण।
15. Quick Revision Summary
- संरचना: 1991 के दो स्तर; उत्पादन-रोज़गार असंतुलन; सेवा-नेतृत्व वृद्धि की सीमाएँ।
- गरीबी-असमानता: अलघ से रंगराजन, MPI, विश्व बैंक; गिनी-लॉरेंज़-पाल्मा; सेन का क्षमता दृष्टिकोण; ग्रामीण गरीबी के उपाय; राज्य-असमानता।
- व्यापार: FTP 2023 (समाप्ति-तिथि रहित), RoDTEP, PLI, FTA, लॉजिस्टिक्स।
- निवेश: FDI मार्ग और सीमाएँ, प्रेस नोट 3, बहु-ब्रांड खुदरा की शर्तें, FPI और नियंत्रण, TRIMS।
- रुपया: चालू खाता 1994, तारापोर, LRS; प्रबंधित अस्थिरता; मूल्यह्रास के निहितार्थ।
- राजकोषीय: कर-सुधार, FRBM, GST (279A, GST 2.0), 15वाँ FC (41%, मानदंड), 16वाँ FC; संघवाद का त्रिकोण।