1. अध्याय एक नज़र में
Paper II के ये खंड इस अध्याय में शामिल हैं:
- परिवहन, संचार और व्यापार: सड़क, रेल, जलमार्ग, वायुमार्ग और पाइपलाइन जाल और प्रादेशिक विकास में उनकी पूरक भूमिका; राष्ट्रीय और विदेशी व्यापार में बंदरगाहों का बढ़ता महत्व; पर्यटन।
- सांस्कृतिक विन्यास: भारतीय समाज का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य; प्रजातीय, भाषायी और नृजातीय विविधताएँ; धार्मिक अल्पसंख्यक; प्रमुख जनजातियाँ, जनजातीय क्षेत्र और उनकी समस्याएँ; सांस्कृतिक प्रदेश; जनसंख्या की वृद्धि, वितरण और घनत्व; जनांकिकीय विशेषताएँ (लिंगानुपात, आयु संरचना, साक्षरता, कार्यबल, निर्भरता अनुपात, दीर्घायु); प्रवास; स्वास्थ्य-भूगोल।
- अधिवास: ग्रामीण अधिवासों के प्रकार, प्रतिरूप और आकारिकी; नगरीय विकास; भारतीय नगरों की आकारिकी; कार्यात्मक वर्गीकरण; संनगर (conurbation) और महानगरीय प्रदेश; नगरीय फैलाव; झुग्गियाँ; नगर नियोजन; नगरीकरण की समस्याएँ।
2025 में नौका पर्यटन, SC/ST का वितरण, ग्रामीण अधिवास, ग्रामीण-नगरीय उपांत, धार्मिक समूह, नगरीय ताप-द्वीप, सागरमाला और लिंगानुपात पूछे गए। 2024 में संनगर, प्रजातियाँ, बंदरगाह, लिंग और आयु संरचना, नगर आकारिकी और चंडीगढ़, RRTS, स्वास्थ्य और घरेलू पर्यटन आए।

2. परिवहन जाल और प्रादेशिक विकास
| साधन | मुख्य तथ्य | हाल की पहल |
|---|---|---|
| सड़क | विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क जाल (लगभग 63 लाख किमी से अधिक); राष्ट्रीय राजमार्ग 1.4 लाख किमी से अधिक | भारतमाला (2017), स्वर्णिम चतुर्भुज, PMGSY (2000), एक्सप्रेसवे (दिल्ली-मुंबई) |
| रेल | लगभग 68,000 किमी का मार्ग; ब्रॉड गेज़ का लगभग पूर्ण विद्युतीकरण; 17 ज़ोन (साथ में नया दक्षिण तटीय रेलवे ज़ोन घोषित) | समर्पित माल गलियारे (पूर्वी लगभग 1,337 किमी, पश्चिमी लगभग 1,506 किमी), वंदे भारत (2019), मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन |
| अंतर्देशीय जलमार्ग | राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 से 111 राष्ट्रीय जलमार्ग; NW-1 (गंगा: हल्दिया से प्रयागराज) | जल मार्ग विकास परियोजना; वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया के मल्टी-मॉडल टर्मिनल |
| वायु | विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार | UDAN (2016), नए हवाई अड्डे (नवी मुंबई, जेवर) |
| पाइपलाइन | HBJ गैस पाइपलाइन (हज़ीरा-विजयपुर-जगदीशपुर); नाहरकटिया-बरौनी तेल पाइपलाइन | "एक राष्ट्र एक गैस ग्रिड"; प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा |
- प्रादेशिक विकास में भूमिका: बाज़ार तक पहुँच, औद्योगिक अवस्थिति, नगरीकरण, पर्यटन, आपदा-राहत और राष्ट्रीय एकता। पिछड़े और पहाड़ी क्षेत्र परिवहन के बिना "अलगाव" में रहते हैं; इसके उत्तर हैं पूर्वोत्तर की सड़कें, चार धाम सड़क परियोजना और भविष्य में ब्रह्मपुत्र के नीचे सुरंग।
- बहु-मॉडल एकीकरण: PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (2021), राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022) जिसका लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत घटाना है, और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क।
क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली (RRTS) (UPSC 2024)
- अवधारणा: NCR योजना बोर्ड की 2032 योजना के अंतर्गत दिल्ली को आसपास के नगरों से तेज़, उच्च-आवृत्ति रेल द्वारा जोड़ने की प्रणाली। इसका क्रियान्वयन NCRTC (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम) करता है।
- पहला गलियारा: दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ "नमो भारत", लगभग 82 किमी लंबा। इसकी डिज़ाइन गति 180 किमी प्रति घंटा और परिचालन गति लगभग 160 किमी प्रति घंटा है। अक्टूबर 2023 में साहिबाबाद-दुहाई खंड से संचालन शुरू हुआ और फिर चरणबद्ध विस्तार हुआ।
- प्रस्तावित गलियारे: दिल्ली-गुरुग्राम-SNB-अलवर और दिल्ली-सोनीपत-पानीपत।
- भौगोलिक महत्व:
- दिल्ली पर जनसंख्या-दबाव कम करना और "बहु-केंद्रीय" महानगरीय प्रदेश बनाना।
- मेरठ जैसे नगरों में रहकर दिल्ली में काम करना संभव होना, यानी "दिक्-काल अभिसरण"।
- सड़क-भीड़ और प्रदूषण में कमी।
- स्टेशनों के आसपास पारगमन-उन्मुख विकास (TOD) और भूमि-मूल्यों में वृद्धि।
- प्रादेशिक संतुलन, यानी उपग्रह नगरों का विकास।
- चुनौतियाँ: भारी लागत, अंतिम-मील संपर्क, किराया, भूमि अधिग्रहण, और राज्यों के बीच वित्तीय सहयोग।
3. बंदरगाह, सागरमाला और विदेशी व्यापार
भारत के बंदरगाह (UPSC 2024)
| तट | प्रमुख बंदरगाह | विशेषता |
|---|---|---|
| पश्चिमी | दीनदयाल (कांडला), मुंबई, जवाहरलाल नेहरू (JNPA, न्हावा शेवा), मोरमुगाओ, न्यू मंगलौर, कोचीन | JNPA सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह; कांडला ज्वारीय बंदरगाह और मुक्त व्यापार क्षेत्र; मोरमुगाओ से लौह-अयस्क निर्यात |
| पूर्वी | वी.ओ. चिदंबरनार (तूतीकोरिन), चेन्नई, कामराजर (एन्नोर), विशाखापत्तनम, पारादीप, श्यामा प्रसाद मुखर्जी (कोलकाता और हल्दिया) | विशाखापत्तनम सबसे गहरा भूमि-आबद्ध बंदरगाह; कोलकाता नदी-बंदरगाह (हुगली की गाद की समस्या); पारादीप में बड़े पैमाने पर कोयला और अयस्क |
| नए और निजी | मुंद्रा (सबसे बड़ा निजी बंदरगाह), विझिंजम (केरल; अंतरराष्ट्रीय गहरे पानी का ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, 2025 में चालू), वाढवण (महाराष्ट्र; 2024 में स्वीकृत; विश्व के शीर्ष गहरे बंदरगाहों में शामिल होने की योजना) | ट्रांसशिपमेंट (अभी बड़ा भाग कोलंबो और सिंगापुर से होता है) |
- व्यापार में महत्व: भारत के विदेशी व्यापार का मात्रा की दृष्टि से लगभग 95% और मूल्य की दृष्टि से लगभग 70% समुद्री मार्ग से होता है। बंदरगाहों का "पृष्ठ-प्रदेश" (hinterland) तय करता है कि वे किन उद्योगों और क्षेत्रों की सेवा करेंगे।
- समस्याएँ: कम गहराई और गाद (कोलकाता), जहाज़ों के लौटने में अधिक समय (turnaround time; अब काफ़ी सुधार), भीतरी संपर्क, और ट्रांसशिपमेंट पर विदेशी निर्भरता।
सागरमाला कार्यक्रम (UPSC 2025)
- शुरुआत: मार्च 2015 में स्वीकृत। उद्देश्य "बंदरगाह-आधारित विकास" (port-led development) है, ताकि भारत की लगभग 7,500 किमी लंबी तट-रेखा और 14,500 किमी के संभावित नौगम्य जलमार्गों का उपयोग हो सके।
- पाँच स्तंभ: (1) बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और नए बंदरगाह, (2) बंदरगाह संपर्क (रेल, सड़क, जलमार्ग), (3) बंदरगाह-आधारित औद्योगीकरण, जिसमें 14 तटीय आर्थिक क्षेत्र (CEZ) प्रस्तावित हैं, (4) तटीय समुदायों का विकास (मत्स्य, कौशल), (5) तटीय नौवहन और अंतर्देशीय जल परिवहन।
- संबंधित विज़न: मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 (2021) और अमृत काल मैरीटाइम विज़न 2047।
- भौगोलिक महत्व: लॉजिस्टिक्स लागत में कमी; तटीय राज्यों (गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा) में औद्योगिक संकुल; कोयला और सीमेंट जैसे माल की तटीय ढुलाई से रेल और सड़क पर बोझ घटना; और हिंद महासागर में सामरिक उपस्थिति।
- चिंताएँ: मछुआरों का विस्थापन, मैंग्रोव और प्रवाल क्षेत्रों की हानि, तटीय अपरदन, CRZ नियमों में ढील, और तटीय समुदायों का विरोध (वाढवण, विझिंजम)।
4. पर्यटन
घरेलू पर्यटन (UPSC 2024)
- स्थिति: पर्यटन मंत्रालय के अनुसार 2023 में घरेलू पर्यटक यात्राएँ लगभग 250 करोड़ रहीं। सबसे अधिक घरेलू पर्यटक उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में आते हैं।
- प्रकार: धार्मिक और आध्यात्मिक (वाराणसी, अयोध्या, उज्जैन का महाकाल लोक, तिरुपति, वैष्णो देवी, प्रयागराज कुंभ 2025), धरोहर, प्रकृति और पहाड़ (हिमाचल, उत्तराखंड), पारिस्थितिक पर्यटन, साहसिक, ग्रामीण, चिकित्सा और कल्याण (केरल का आयुर्वेद), तथा सप्ताहांत पर्यटन।
- प्रेरक कारक: मध्यम वर्ग की बढ़ती आय, सड़क, रेल और उड़ान का विस्तार, ऑनलाइन बुकिंग, सोशल मीडिया, और कोविड के बाद "निकट-पर्यटन" की प्रवृत्ति।
- योजनाएँ: देखो अपना देश (2020), स्वदेश दर्शन 2.0, PRASHAD (तीर्थ-स्थलों का कायाकल्प), और "भारत गौरव" ट्रेनें।
- समस्याएँ: अति-पर्यटन और पहाड़ों की वहन-क्षमता (जोशीमठ, मनाली, शिमला), कचरा, जल-संकट, भीड़ से जुड़ी दुर्घटनाएँ, मौसमी रोज़गार, और अवसंरचना का असमान वितरण।
- भूगोल से संबंध: पर्यटन प्रादेशिक अर्थव्यवस्था (हिमाचल, गोवा), सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय रोज़गार का माध्यम है।
नौका पर्यटन (Nautical tourism) (UPSC 2025)
- अर्थ: समुद्र, नदियों और झीलों पर आधारित पर्यटन: क्रूज़, नौकायन (yachting), मरीना, नदी-क्रूज़, गोताखोरी (scuba), प्रकाशस्तंभ-पर्यटन और जल-क्रीड़ाएँ।
- भारत की संभावना: लंबी तट-रेखा, 1,300 से अधिक द्वीप (अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप), बड़ी नदियाँ, और केरल के बैकवाटर।
- पहलें: क्रूज़ भारत मिशन (2024); "गंगा विलास" (जनवरी 2023 में वाराणसी से डिब्रूगढ़ तक की नदी-क्रूज़, विश्व की सबसे लंबी नदी-क्रूज़ यात्राओं में); मुंबई, गोवा, कोच्चि और चेन्नई में अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल; प्रकाशस्तंभ पर्यटन (75 प्रकाशस्तंभ); और लक्षद्वीप में पर्यटन-विकास पर चर्चा (2024)।
- चुनौतियाँ: नाज़ुक द्वीप और प्रवाल-पारिस्थितिकी, CRZ नियम, अवसंरचना, मौसम (मानसून में समुद्र अशांत रहता है), और सुरक्षा।
5. सांस्कृतिक विन्यास: प्रजाति, भाषा, धर्म, जनजाति
भारत की प्रजातियाँ (UPSC 2024)
- हर्बर्ट रिज़ले (1915): सात प्रजातीय प्रकार बताए: तुर्क-ईरानी, भारतीय-आर्य, शक-द्रविड़, आर्य-द्रविड़, मंगोल-द्रविड़, मंगोलॉयड और द्रविड़। यह वर्गीकरण "शीर्ष सूचकांक" और "नासिका सूचकांक" जैसे मापों पर आधारित था। इसकी आलोचना हुई कि यह औपनिवेशिक और जाति-प्रजाति के गलत समीकरण पर आधारित था।
- बी.एस. गुहा (1935): छह प्रमुख प्रजातियाँ बताईं: नीग्रिटो (अंडमान की ओंगे और जारवा जनजातियाँ), प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉयड (मध्य भारत की जनजातियाँ), मंगोलॉयड (पूर्वोत्तर और हिमालय), भूमध्यसागरीय, पश्चिमी चौड़े सिर वाले (western brachycephals) और नॉर्डिक।
- आधुनिक आनुवंशिक दृष्टि: डेविड राइख और साथियों (2009) के अध्ययन के अनुसार अधिकांश भारतीयों में दो प्राचीन वंशों, "पैतृक उत्तर भारतीय" (ANI) और "पैतृक दक्षिण भारतीय" (ASI), का मिश्रण है। "प्रजाति" को जैविक रूप से अलग श्रेणी मानना अब अवैज्ञानिक माना जाता है; भारत की जनसंख्या को सतत मिश्रण का परिणाम माना जाता है।
- भाषायी विविधता: चार भाषा परिवार हैं: भारोपीय (लगभग 78%), द्रविड़ (लगभग 20%), ऑस्ट्रो-एशियाई (मुंडा और खासी) और चीनी-तिब्बती (पूर्वोत्तर)। संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ हैं। जनगणना 2011 के अनुसार हिंदी (भाषा-समूह) बोलने वाले लगभग 43.6% हैं। 1956 के बाद राज्यों का भाषायी पुनर्गठन हुआ।
धार्मिक समूहों का वितरण (UPSC 2025)
| धर्म (जनगणना 2011) | हिस्सा | सकेंद्रण |
|---|---|---|
| हिंदू | 79.8% | अधिकांश राज्यों में बहुसंख्यक; हिमाचल और ओडिशा में 90% से अधिक |
| मुस्लिम | 14.2% | लक्षद्वीप (लगभग 97%), जम्मू-कश्मीर (लगभग 68%) में बहुसंख्यक; असम, पश्चिम बंगाल, केरल में बड़ा हिस्सा; संख्या में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में |
| ईसाई | 2.3% | नागालैंड (लगभग 88%), मिज़ोरम (लगभग 87%), मेघालय (लगभग 75%); केरल, गोवा, तमिलनाडु |
| सिख | 1.7% | पंजाब (लगभग 58%); हरियाणा, दिल्ली |
| बौद्ध | 0.7% | संख्या में सबसे अधिक महाराष्ट्र में (नवयान, अंबेडकर); सिक्किम, अरुणाचल, लद्दाख |
| जैन | 0.4% | महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात; नगरीय और व्यापारिक |
- भौगोलिक व्याख्या: वितरण ऐतिहासिक प्रक्रियाओं से बना: व्यापार-मार्ग (केरल में ईसाई और मुस्लिम समुदाय), मिशनरी गतिविधि (पूर्वोत्तर), सूफ़ी परंपरा और शासन (उत्तर भारत, बंगाल), विभाजन (1947), और प्रवास। अल्पसंख्यक प्रायः नगरीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिक सकेंद्रित हैं।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का वितरण (UPSC 2025)
- अनुसूचित जाति (जनगणना 2011): जनसंख्या का 16.6% (लगभग 20.1 करोड़)। संख्या में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में; अनुपात में सबसे अधिक पंजाब (लगभग 31.9%) में, फिर हिमाचल और पश्चिम बंगाल। गंगा के मैदान, पंजाब और तमिलनाडु के डेल्टा जैसे उपजाऊ कृषि क्षेत्रों में सकेंद्रण का संबंध कृषि-श्रम से है। नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में कोई अनुसूचित जाति अधिसूचित नहीं है।
- अनुसूचित जनजाति (जनगणना 2011): जनसंख्या का 8.6% (लगभग 10.4 करोड़)। संख्या में सबसे अधिक मध्य प्रदेश में, फिर महाराष्ट्र और ओडिशा। अनुपात में सबसे अधिक लक्षद्वीप और मिज़ोरम (लगभग 94-95%) में। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और पुडुचेरी में कोई अनुसूचित जनजाति अधिसूचित नहीं है।
- ST की भौगोलिक पेटियाँ: (1) मध्य भारत की पेटी (छोटानागपुर, बस्तर, सतपुड़ा-विंध्य; गोंड, भील, संथाल, मुंडा, उराँव), (2) पूर्वोत्तर (नागा, मिज़ो, खासी, गारो), (3) पश्चिमी भारत (भील और मीणा), (4) दक्षिण भारत (टोडा, इरुला, चेंचू), (5) हिमालय (थारू, भोटिया, गद्दी), (6) द्वीप (ओंगे, जारवा, सेंटिनली; निकोबारी)। विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) 75 हैं।
- व्याख्या: ST पहाड़ी, वन्य और दुर्गम क्षेत्रों में हैं, जहाँ ऐतिहासिक अलगाव रहा। ये खनिज-समृद्ध क्षेत्र भी हैं, जिससे विस्थापन होता है। SC मैदानी कृषि क्षेत्रों में हैं, जहाँ उनकी भूमिहीनता और कृषि-श्रम से निर्भरता जुड़ी है।
- नीति: पाँचवीं और छठी अनुसूची, PESA (1996), वन अधिकार अधिनियम (2006), PM-JANMAN (2023; PVTG के लिए), और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (2024)।
6. जनांकिकी: लिंगानुपात, आयु संरचना और स्वास्थ्य
लिंगानुपात (UPSC 2025)
- प्रवृत्ति: जनगणना 2011 के अनुसार लिंगानुपात 943 (प्रति 1,000 पुरुषों पर स्त्रियाँ) और बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष) 919 था, जो 1961 के बाद से सबसे कम है। NFHS-5 (2019-21) में कुल लिंगानुपात 1,020 और जन्म के समय लिंगानुपात 929 दर्ज हुआ।
- प्रादेशिक प्रतिरूप: केरल (1,084) और पुडुचेरी में सबसे अधिक; हरियाणा (879) में सबसे कम राज्य-स्तरीय अनुपात; दमन-दीव जैसे औद्योगिक संघ राज्य क्षेत्रों में बहुत कम। "उत्तर-पश्चिम बनाम दक्षिण और पूर्वोत्तर" का स्पष्ट विभाजन दिखता है। जनजातीय क्षेत्रों में लिंगानुपात अपेक्षाकृत संतुलित है।
- कारण: पुत्र-वरीयता, लिंग-चयनात्मक गर्भपात (अल्ट्रासाउंड का दुरुपयोग), दहेज, स्त्री-शिशुओं की उपेक्षा, मातृ-मृत्यु, और पुरुष-प्रधान प्रवास (गंतव्य नगरों में कम अनुपात और मूल क्षेत्रों में अधिक)।
- परिणाम: "लापता स्त्रियाँ" (अमर्त्य सेन), विवाह-संकट और स्त्रियों की तस्करी, तथा सामाजिक तनाव।
- नीति: PCPNDT अधिनियम (1994, 2003 में संशोधित), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (2015, पानीपत से शुरुआत), सुकन्या समृद्धि योजना। हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार दिखा है।
लिंग और आयु संरचना (UPSC 2024)
- आयु-पिरामिड: भारत का पिरामिड "विस्तारशील" से "संकुचनशील" की ओर बदल रहा है: आधार संकरा हो रहा है (प्रजनन घटने से) और मध्य भाग चौड़ा (कार्यशील आयु वर्ग, 15-64 वर्ष, लगभग 67-68%)। 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग लगभग 10% हैं और 2050 तक लगभग 20% होने का अनुमान है (UNFPA की भारत वृद्धावस्था रिपोर्ट, 2023)।
- प्रादेशिक भिन्नता: केरल, तमिलनाडु, हिमाचल और पंजाब "वृद्ध" राज्य हैं; बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और मेघालय "युवा" राज्य।
- निर्भरता अनुपात: घट रहा है। इसे "जनांकिकीय लाभांश" कहते हैं, जिसका लाभ शिक्षा, कौशल और रोज़गार पर निर्भर है।
- लिंग-आयु संरचना के प्रभाव: श्रम-बाज़ार में स्त्री-भागीदारी (PLFS के अनुसार बढ़कर लगभग 40% के आसपास), वृद्ध स्त्रियों की विधवा-अवस्था और ग़रीबी, और प्रवास से कार्यशील आयु के पुरुषों का असमान वितरण।
स्वास्थ्य भूगोल (UPSC 2024)
- संकेतक: SRS के अनुसार शिशु मृत्यु दर लगभग 27-28 (2020-21) और मातृ मृत्यु अनुपात लगभग 93 (2019-21)। केरल के संकेतक सर्वोत्तम हैं; मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और असम पिछड़े हैं।
- रोग-पारिस्थितिकी: मलेरिया ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड की वन्य जनजातीय पेटी में; कालाज़ार बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में (उन्मूलन-लक्ष्य के निकट); जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस पूर्वी उत्तर प्रदेश और असम में; फ़्लोरोसिस राजस्थान में; आर्सेनिक गंगा डेल्टा में। साथ ही गैर-संचारी रोग (मधुमेह, हृदय रोग) नगरीय और दक्षिणी राज्यों में अधिक हैं, जिसे "दोहरा रोग-भार" कहते हैं।
- सुविधाओं का वितरण: नगर-ग्राम असंतुलन; डॉक्टर और विशेषज्ञ नगरों में केंद्रित; जेब से होने वाला व्यय (out-of-pocket) ऊँचा।
- नीति: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत (2018) के दो भाग: आयुष्मान आरोग्य मंदिर (स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र) और PM-JAY (बीमा); "एक स्वास्थ्य" (One Health) दृष्टिकोण; और डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (ABHA)।
7. ग्रामीण और नगरीय अधिवास
भारत में ग्रामीण अधिवास (UPSC 2025)
- प्रकार और वितरण:
- संहत या गुच्छित: उत्तरी मैदान, गुजरात और राजस्थान के भाग। कारण: उपजाऊ भूमि, सुरक्षा, जल-स्रोत, सामाजिक संगठन।
- अर्ध-संहत: गुजरात मैदान, राजस्थान के भाग।
- पल्लीकृत या पुरवा: मध्य और निचला गंगा मैदान, छत्तीसगढ़, हिमालय की निचली घाटियाँ। स्थानीय नाम हैं "पाड़ा", "पल्ली", "नगला", "ढाणी"।
- परिक्षिप्त: मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल और केरल के भाग; पहाड़ी और वन्य क्षेत्र।
- प्रतिरूप: रैखिक (नदी, सड़क, नहर, तट; केरल का तट), आयताकार (पंजाब और हरियाणा के नियोजित गाँव), वृत्ताकार (झील या तालाब के चारों ओर), तारा-आकार (सड़कों के मिलन-बिंदु पर), T-आकार और दोहरे गाँव (नदी के दोनों किनारे)।
- प्रभावित करने वाले कारक: भौतिक (उच्चावच, जल, बाढ़, मृदा), सामाजिक (जाति-आधारित मोहल्ले, जिनमें प्रायः दलित बस्तियाँ गाँव के किनारे बसाई गईं, यानी सामाजिक-स्थानिक पृथक्करण), ऐतिहासिक (सुरक्षा) और आर्थिक कारक।
- भारत में अधिवास-अध्ययन: आर.एल. सिंह और ई. अहमद जैसे भूगोलवेत्ताओं के अध्ययन।
- समस्याएँ और योजनाएँ: कच्चे मकान (PMAY-G), स्वच्छता (SBM-G), पेयजल (जल जीवन मिशन), सड़क (PMGSY), डिजिटल संपर्क (भारतनेट), और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन (2016)।
ग्रामीण-नगरीय उपांत (UPSC 2025)
- विशेषताएँ: मिश्रित भूमि-उपयोग (खेत, फ़ार्महाउस, गोदाम, अनियोजित कॉलोनियाँ, ईंट-भट्ठे); भूमि का सट्टा; कृषि से गैर-कृषि में परिवर्तन; दैनिक आवागमन करने वाली जनसंख्या; प्रशासनिक अस्पष्टता (न ग्राम पंचायत ठीक से, न नगर निगम); और सेवाओं का अभाव।
- भारतीय उदाहरण: दिल्ली के "शहरी गाँव" और अनधिकृत कॉलोनियाँ; पुणे और बेंगलुरु के उपांत (झीलों का अतिक्रमण)। जनगणना के "जनगणना नगर" (census towns; 2011 में 3,894) इसी प्रक्रिया की उपज हैं।
- नियोजन: महानगरीय योजना में "पेरी-अर्बन" क्षेत्रों का समावेश, हरित पट्टी, भूमि-संचयन (land pooling) और रूर्बन मिशन।

- नगरीकरण: जनगणना 2011 के अनुसार 31.2% नगरीय जनसंख्या; 53 दस लाखी नगर या नगरीय समूह। सबसे अधिक नगरीकृत बड़े राज्य तमिलनाडु और केरल हैं; सबसे कम हिमाचल और बिहार। नगरों का कार्यात्मक वर्गीकरण अशोक मित्रा (1961 के आँकड़े) ने किया।
संनगर (Conurbation) (UPSC 2024)
- अर्थ: पैट्रिक गेडेस (Cities in Evolution, 1915) ने यह शब्द दिया। यह वह नगरीय प्रदेश है जहाँ कई अलग-अलग नगर और कस्बे फैलकर एक-दूसरे से मिल जाते हैं और एक सतत निर्मित क्षेत्र बनाते हैं, जबकि प्रशासनिक रूप से वे अलग रहते हैं। उदाहरण: ग्रेटर मैनचेस्टर, जर्मनी का रूर, और जापान का टोक्यो-योकोहामा। जीन गॉटमैन (1961) ने इससे भी बड़े पैमाने के लिए "महानगरीय श्रृंखला" (Megalopolis) शब्द दिया, जैसे बोस्टन से वाशिंगटन तक का क्षेत्र।
- भारत में: हुगली संनगर (कोलकाता, हावड़ा, बैरकपुर, चंदननगर, हुगली-चिनसुरा); मुंबई महानगरीय प्रदेश (मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, वसई-विरार); दिल्ली NCR (दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद, गुरुग्राम, फ़रीदाबाद); चेन्नई; और बेंगलुरु। जनगणना इन्हें "नगरीय समूह" (Urban Agglomeration) कहती है।
- निर्माण के कारण: औद्योगीकरण, परिवहन-गलियारे (रेल, राजमार्ग), जनसंख्या-वृद्धि, उपनगरीकरण, और अनुषंगी नगरों का विकास।
- समस्याएँ: अनेक प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय का अभाव, परिवहन-भीड़, प्रदूषण, जल-आपूर्ति और जल-निकास (मुंबई की बाढ़), और झुग्गियाँ।
- प्रबंधन: महानगरीय विकास प्राधिकरण (MMRDA, KMDA, NCR योजना बोर्ड, 1985), 74वें संशोधन के अंतर्गत महानगरीय योजना समितियाँ, और RRTS तथा मेट्रो।
भारतीय नगरों की आकारिकी और चंडीगढ़ (UPSC 2024)
- भारतीय नगर की सामान्य आकारिकी: (1) पुराना नगर: अनियोजित और जैविक विकास, सँकरी गलियाँ, मिश्रित भूमि-उपयोग, जाति और व्यवसाय आधारित मोहल्ले, और केंद्र में मंदिर, मस्जिद, क़िला या बाज़ार (चाँदनी चौक, वाराणसी); (2) औपनिवेशिक भाग: सिविल लाइंस, छावनी और रेलवे कॉलोनी, जो चौड़ी सड़कों, बंगलों और अलगाव से पहचाने जाते हैं; (3) स्वतंत्रता के बाद के भाग: नियोजित सेक्टर, औद्योगिक क्षेत्र, शरणार्थी बस्तियाँ और अनौपचारिक बस्तियाँ। इसलिए भारतीय नगर को "दोहरा" या "बहुपरती" नगर कहा जाता है।
- चंडीगढ़:
- विभाजन के बाद पंजाब की नई राजधानी के रूप में बना। प्रारंभिक योजना अल्बर्ट मेयर और मैथ्यू नोविकी ने बनाई (नोविकी की 1950 में मृत्यु हो गई)। बाद में ले कॉर्बूज़िए ने पियरे जेनरे, मैक्सवेल फ़्राई और जेन ड्रू के साथ इसकी अंतिम योजना और रूपांकन किया (1951 से)। यह 1966 में पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी और संघ राज्य क्षेत्र बना।
- मानव शरीर की उपमा: कैपिटल कॉम्प्लेक्स "सिर", सेक्टर-17 (व्यावसायिक केंद्र) "हृदय", लेज़र वैली और उद्यान "फेफड़े", "7V" सड़क-पदानुक्रम "रक्त-संचार तंत्र", और औद्योगिक क्षेत्र "अंग"।
- सेक्टर प्रणाली: लगभग 800 मी × 1,200 मी के आत्मनिर्भर "पड़ोस इकाई" सेक्टर, जिनमें स्कूल, बाज़ार और हरित क्षेत्र हैं। सुखना झील, हरित पट्टी, और कैपिटल कॉम्प्लेक्स (ले कॉर्बूज़िए के वास्तुशिल्प कार्यों के अंतर्गत 2016 में UNESCO विश्व धरोहर) भी इसकी पहचान हैं।
- आलोचना: मोटर-वाहन केंद्रित और कम घनत्व वाला नगर; प्रवासी श्रमिकों के लिए आवास की योजना नहीं होने से झुग्गियाँ बनीं; "पेरिफ़ेरी" (मोहाली और पंचकूला) का अनियंत्रित विकास; और सामाजिक पृथक्करण (आय के अनुसार सेक्टर)।
नगरीय ताप-द्वीप (UPSC 2025)
- अर्थ: नगर का तापमान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक होना। यह अंतर विशेषकर रात में स्पष्ट होता है और कई डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है।
- कारण: कंक्रीट और डामर का उच्च ताप-अवशोषण और निम्न एल्बिडो; वनस्पति और जल-निकायों की कमी, जिससे वाष्पोत्सर्जन से ठंडक घटती है; ऊँची इमारतों की "नगरीय घाटियाँ" जो ऊष्मा को रोकती हैं; वाहनों, AC और उद्योगों की मानवजनित ऊष्मा; और प्रदूषण की परत।
- प्रभाव: लू से मृत्यु, ऊर्जा की माँग में वृद्धि, जल-माँग, वायु-गुणवत्ता में गिरावट (ओज़ोन), और निर्धनों तथा बाहरी कामगारों पर अधिक प्रभाव (ताप-असमानता)।
- भारतीय उदाहरण: दिल्ली, अहमदाबाद और नागपुर की लू; अहमदाबाद हीट एक्शन प्लान (2013) दक्षिण एशिया की पहली ऐसी योजना थी; NDMA के ताप-लहर दिशानिर्देश।
- निवारण: नगरीय वन और "मियावाकी" पद्धति, हरित छतें, ठंडी छतें (तेलंगाना की कूल रूफ़ नीति 2023-28), जल-निकायों का संरक्षण, पारगम्य फ़र्श, भवन-कोड, छायादार गलियाँ, और ताप-कार्य योजनाएँ।
- नगरीकरण की समस्याएँ और नियोजन: झुग्गियाँ (2011 में लगभग 6.5 करोड़ लोग), जल-निकास, अपशिष्ट, परिवहन और आवास। योजनाएँ: AMRUT (2015), स्मार्ट सिटी मिशन (2015), PMAY-U, और स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय।
8. Master Summary Table
| विषय | मुख्य तथ्य | याद रखें |
|---|---|---|
| RRTS | दिल्ली-मेरठ, लगभग 82 किमी; 2023 से | NCRTC; 160 किमी प्रति घंटा |
| सागरमाला | 2015; 5 स्तंभ; 14 CEZ | मैरीटाइम विज़न 2030 और 2047 |
| बंदरगाह | 12 प्रमुख बंदरगाह; मात्रा में लगभग 95% व्यापार | विझिंजम 2025, वाढवण 2024 |
| पर्यटन | लगभग 250 करोड़ घरेलू यात्राएँ (2023) | क्रूज़ भारत मिशन 2024; गंगा विलास 2023 |
| प्रजाति | रिज़ले 1915 (7), गुहा 1935 (6) | ANI-ASI (2009) |
| धर्म | हिंदू 79.8%, मुस्लिम 14.2%, ईसाई 2.3%, सिख 1.7% | जनगणना 2011 |
| SC/ST | 16.6% / 8.6% | SC: पंजाब में सबसे अधिक अनुपात; ST: मध्य प्रदेश में सबसे अधिक संख्या |
| लिंगानुपात | 943; बाल लिंगानुपात 919 (2011) | NFHS-5: 1,020; SRB 929 |
| संनगर | गेडेस 1915; गॉटमैन 1961 | हुगली, MMR, NCR |
| चंडीगढ़ | ले कॉर्बूज़िए; सेक्टर; शरीर की उपमा | UNESCO 2016 |
| ताप-द्वीप | अहमदाबाद हीट एक्शन प्लान 2013 | कूल रूफ़ (तेलंगाना) |
9. चार्ट: चंडीगढ़ की सेक्टर योजना (सरलीकृत)
10. Mind Map
- सड़क, रेल, जल, वायु
- RRTS, गति शक्ति
- बंदरगाह, सागरमाला
- नौका पर्यटन
- प्रजाति, भाषा, धर्म
- SC/ST का वितरण
- लिंगानुपात, आयु
- स्वास्थ्य
- ग्रामीण, उपांत
- संनगर, चंडीगढ़, ताप-द्वीप
11. महत्वपूर्ण One-liners
- "संनगर" शब्द: पैट्रिक गेडेस (1915); "Megalopolis": जीन गॉटमैन (1961)।
- चंडीगढ़ के मुख्य योजनाकार: ले कॉर्बूज़िए।
- भारत का पहला RRTS: दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ (नमो भारत)।
- सागरमाला कार्यक्रम की स्वीकृति: 2015।
- सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह: JNPA; सबसे बड़ा निजी बंदरगाह: मुंद्रा।
- जनगणना 2011 के अनुसार लिंगानुपात: 943; केरल: 1,084।
- SC का सबसे अधिक अनुपात: पंजाब; ST की सबसे अधिक संख्या: मध्य प्रदेश।
- भारत की प्रजातियों का छह-स्तरीय वर्गीकरण: बी.एस. गुहा (1935)।
- दक्षिण एशिया की पहली हीट एक्शन प्लान: अहमदाबाद (2013)।
- भारत में राष्ट्रीय जलमार्ग: 111 (2016 के अधिनियम से)।
12. टिप्स एवं ट्रिक्स
- जनांकिकीय प्रश्नों में जनगणना 2011 और NFHS-5 दोनों के आँकड़े दें, और स्पष्ट लिखें कि अगली जनगणना के आँकड़े प्रतीक्षित हैं।
- हर वितरण-प्रश्न (SC/ST, धर्म, लिंगानुपात, बंदरगाह) में भारत का मानचित्र बनाएँ।
- नगरीय प्रश्नों में मॉडल (बर्गेस आदि) को भारतीय वास्तविकता (बहुपरती नगर) से जोड़ें।
सागरमाला के पाँच स्तंभ: "आ-सं-औ-स-त" (आधुनिकीकरण, संपर्क, औद्योगीकरण, समुदाय, तटीय नौवहन)। चंडीगढ़ की उपमा: "सिर-हृदय-फेफड़े-नसें"।
13. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
भारतीय नगरों की आकारिकी की विवेचना कीजिए। चंडीगढ़ की नियोजित आकारिकी की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भारतीय नगर: पुराना नगर (जैविक), औपनिवेशिक भाग (सिविल लाइंस, छावनी), स्वतंत्रता के बाद के भाग (सेक्टर, औद्योगिक, अनौपचारिक); "बहुपरती नगर"।
चंडीगढ़: मेयर और नोविकी से ले कॉर्बूज़िए तक; शरीर की उपमा; 7V; सेक्टर; सुखना; UNESCO 2016; आरेख सहित।
आलोचना: मोटर-वाहन केंद्रित, कम घनत्व, झुग्गियाँ, पेरिफ़ेरी, पृथक्करण।
निष्कर्ष: चंडीगढ़ आधुनिकतावादी नियोजन का प्रतीक है, जिससे यह सीख मिलती है कि योजना में सामाजिक समावेश भी ज़रूरी है।
भारत में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के स्थानिक वितरण का वर्णन कीजिए और उसकी व्याख्या कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
SC: 16.6%; उत्तर प्रदेश (संख्या), पंजाब (अनुपात); उपजाऊ कृषि क्षेत्र; अधिसूचना-रहित राज्य।
ST: 8.6%; मध्य प्रदेश (संख्या), लक्षद्वीप और मिज़ोरम (अनुपात); छह पेटियाँ; PVTG 75।
मानचित्र: दोनों का वितरण।
व्याख्या: ST: अलगाव, वन, पहाड़, खनिज; SC: कृषि-श्रम, भूमिहीनता, सामाजिक-स्थानिक पृथक्करण।
नीति: पाँचवीं और छठी अनुसूची, PESA, FRA, PM-JANMAN, धरती आबा अभियान।
निष्कर्ष: वितरण केवल "स्थानिक" नहीं, ऐतिहासिक और सामाजिक प्रक्रियाओं का भी प्रतिबिंब है।
नगरीय ताप-द्वीप की परिघटना के कारणों, प्रभावों और भारतीय नगरों में इसके निवारण के उपायों की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
अर्थ: नगर-ग्राम तापमान अंतर; रात में अधिक; आरेख (तापमान-प्रोफ़ाइल)।
कारण: एल्बिडो, वनस्पति की कमी, नगरीय घाटियाँ, मानवजनित ऊष्मा, प्रदूषण।
प्रभाव: लू से मृत्यु, ऊर्जा, जल, ओज़ोन, ताप-असमानता।
भारत: दिल्ली, अहमदाबाद 2013, NDMA।
निवारण: नगरीय वन, हरित और ठंडी छतें, जल-निकाय, भवन-कोड, ताप-कार्य योजना।
निष्कर्ष: जलवायु परिवर्तन के दौर में "ताप-सुरक्षित नगर" नगर नियोजन का केंद्रीय लक्ष्य होना चाहिए।
सागरमाला कार्यक्रम के उद्देश्यों, घटकों और उसके भौगोलिक प्रभावों की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
पृष्ठभूमि: 7,500 किमी तट-रेखा; बंदरगाह-आधारित विकास।
पाँच स्तंभ: आधुनिकीकरण, संपर्क, औद्योगीकरण (14 CEZ), समुदाय, तटीय नौवहन।
प्रभाव: लॉजिस्टिक्स लागत, तटीय औद्योगिक संकुल, माल-परिवहन में बदलाव, सामरिक उपस्थिति।
चिंताएँ: विस्थापन, मैंग्रोव, अपरदन, CRZ, विरोध।
मानचित्र: प्रमुख बंदरगाह और CEZ।
निष्कर्ष: "नीली अर्थव्यवस्था" की सफलता तटीय पारिस्थितिकी और समुदायों के साथ संतुलन पर निर्भर है।
भारत में लिंगानुपात के प्रादेशिक प्रतिरूप और उसके कारणों की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
प्रवृत्ति: 943 और बाल लिंगानुपात 919 (2011); NFHS-5 में 1,020 और SRB 929।
प्रतिरूप: केरल और पुडुचेरी बनाम हरियाणा, पंजाब और दमन-दीव; जनजातीय क्षेत्र; मानचित्र सहित।
कारण: पुत्र-वरीयता, लिंग-चयन, दहेज, उपेक्षा, प्रवास।
परिणाम: लापता स्त्रियाँ, तस्करी।
नीति: PCPNDT, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ; हरियाणा में सुधार।
निष्कर्ष: लिंगानुपात समाज में स्त्रियों की स्थिति का "भौगोलिक दर्पण" है।
संनगर क्या है? भारत में संनगरों के विकास और उनकी समस्याओं की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
अर्थ: गेडेस (1915); सतत निर्मित क्षेत्र; गॉटमैन का Megalopolis।
भारत: हुगली, MMR, NCR, चेन्नई, बेंगलुरु; नगरीय समूह।
कारण: औद्योगीकरण, परिवहन-गलियारे, उपनगरीकरण।
समस्याएँ: समन्वय, परिवहन, प्रदूषण, जल, झुग्गियाँ।
प्रबंधन: महानगरीय विकास प्राधिकरण, MPC (74वाँ संशोधन), RRTS, मेट्रो।
निष्कर्ष: संनगरों के लिए "महानगरीय शासन" की एकीकृत व्यवस्था आवश्यक है।
क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली (RRTS) के भौगोलिक महत्व की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
अवधारणा: NCRPB, NCRTC; दिल्ली-मेरठ नमो भारत; प्रस्तावित गलियारे।
महत्व: दिल्ली पर दबाव में कमी, दिक्-काल अभिसरण, प्रदूषण में कमी, TOD, उपग्रह नगरों का विकास।
चुनौतियाँ: लागत, अंतिम-मील, किराया, भूमि, वित्त।
निष्कर्ष: RRTS महानगरीय प्रदेश के "संतुलित विकेंद्रीकरण" का साधन है।
भारत की जनसंख्या की लिंग और आयु संरचना की विशेषताओं तथा उसके प्रभावों की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
आयु-पिरामिड: विस्तारशील से संकुचनशील; 15-64 वर्ष लगभग 67-68%; 60 से अधिक लगभग 10%, 2050 तक लगभग 20%; आरेख सहित।
प्रादेशिक भिन्नता: वृद्ध दक्षिणी राज्य बनाम युवा उत्तरी राज्य।
लिंग संरचना: लिंगानुपात; स्त्री-श्रम भागीदारी।
प्रभाव: जनांकिकीय लाभांश, वृद्ध-देखभाल, प्रवास, परिसीमन।
निष्कर्ष: लाभांश को "आपदा" बनने से रोकने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार में निवेश आवश्यक है।
भारत में ग्रामीण अधिवासों के प्रकारों और प्रतिरूपों को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
प्रकार: संहत, अर्ध-संहत, पल्लीकृत, परिक्षिप्त, वितरण सहित; मानचित्र।
प्रतिरूप: रैखिक, आयताकार, वृत्ताकार, तारा, T, दोहरे गाँव; आरेख।
कारक: भौतिक, सामाजिक (जाति के अनुसार पृथक्करण), ऐतिहासिक, आर्थिक।
समस्याएँ और योजनाएँ: PMAY-G, SBM-G, जल जीवन मिशन, PMGSY, रूर्बन मिशन।
भारत में घरेलू पर्यटन की प्रवृत्तियों, संभावनाओं और समस्याओं की विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
स्थिति: लगभग 250 करोड़ यात्राएँ (2023); अग्रणी राज्य।
प्रकार: धार्मिक, धरोहर, प्रकृति, पारिस्थितिक, चिकित्सा, ग्रामीण।
प्रेरक: आय, परिवहन, डिजिटल माध्यम।
योजनाएँ: देखो अपना देश, स्वदेश दर्शन 2.0, PRASHAD।
समस्याएँ: वहन-क्षमता, कचरा, भीड़, मौसमी रोज़गार।
निष्कर्ष: "सतत और ज़िम्मेदार पर्यटन" ही दीर्घकालिक लाभ देगा।
भारत में नौका पर्यटन की संभावनाओं पर टिप्पणी कीजिए।
मॉडल उत्तर
अर्थ: क्रूज़, नौकायन, मरीना, नदी-क्रूज़, गोताखोरी, प्रकाशस्तंभ।
संभावना: तट-रेखा, द्वीप, नदियाँ, बैकवाटर।
पहलें: क्रूज़ भारत मिशन 2024, गंगा विलास 2023, क्रूज़ टर्मिनल।
चुनौतियाँ: पारिस्थितिकी, CRZ, अवसंरचना, मानसून।
भारत की प्रजातीय संरचना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
मॉडल उत्तर
रिज़ले (1915): 7 प्रकार; आलोचना।
गुहा (1935): 6 प्रजातियाँ, उदाहरणों सहित।
आधुनिक दृष्टि: ANI-ASI मिश्रण (2009); प्रजाति की अवधारणा की वैज्ञानिक सीमाएँ।
14. Quick Revision Summary
- परिवहन: सड़क, रेल (DFC), जलमार्ग (111), वायु (UDAN), पाइपलाइन; गति शक्ति; RRTS।
- समुद्री: 12 प्रमुख बंदरगाह, नए बंदरगाह; सागरमाला; नौका पर्यटन; घरेलू पर्यटन।
- संस्कृति: रिज़ले और गुहा, ANI-ASI; भाषा परिवार; धर्मों का वितरण; SC/ST का वितरण और नीतियाँ।
- जनांकिकी: लिंगानुपात; आयु संरचना और लाभांश; स्वास्थ्य भूगोल।
- अधिवास: ग्रामीण प्रकार और प्रतिरूप; उपांत; नगरीकरण; संनगर; नगर आकारिकी और चंडीगढ़; नगरीय ताप-द्वीप; नगरीय योजनाएँ।