UPSC Mains · Political Science & International Relations · Paper II · अध्याय 10

भारत एवं विश्व: विदेश नीति

India and the World: Foreign Policy

विदेश नीति के निर्धारक, गुटनिरपेक्षता, परमाणु नीति; पड़ोसी देश, अमेरिका, रूस, चीन, यूरोप; SAARC, BIMSTEC, ASEAN, BRICS, QUAD और भारत की नई भूमिका।

Paper II 21 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper II का Section B — "India and the World" — पूरी तरह भारत की विदेश नीति पर है और सबसे अधिक समसामयिक है। Syllabus के units — विदेश नीति के निर्धारक और संस्थाएँ, NAM में भारत का योगदान, भारत और दक्षिण एशिया, भारत और Global South, भारत और वैश्विक शक्ति-केंद्र (अमेरिका, EU, जापान, चीन, रूस), भारत और UN, भारत और परमाणु प्रश्न, तथा हाल के घटनाक्रम (अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, पश्चिम एशिया, अमेरिका-इज़राइल संबंध, नई विश्व व्यवस्था की दृष्टि)। 2023 और 2024 दोनों वर्षों में इस Section के लगभग सभी प्रश्न ताज़ा घटनाओं से जुड़े थे — QUAD, I2U2, अफ़ग़ानिस्तान, फ़िलिस्तीन नीति, म्यांमार FMR, भूटान-चीन सीमा, श्रीलंका, Indo-Pacific।

भारत और विश्व: विदेश नीति का चित्र-सार
भारत की विदेश नीति — पड़ोसी, महाशक्तियाँ, अंतरराष्ट्रीय संगठन और वैश्विक मुद्दे एक नज़र में (NCERT आधारित infographic)।

2. विदेश नीति के निर्धारक और संस्थाएँ

आंतरिक निर्धारकबाह्य निर्धारक (UPSC 2023)
भूगोल — हिंद महासागर, हिमालय, लंबी स्थलीय सीमाएँअंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की संरचना — द्विध्रुवीय, एकध्रुवीय, बहुध्रुवीय
इतिहास और संस्कृति — उपनिवेश-विरोध, "वसुधैव कुटुंबकम्", बौद्ध विरासतमहाशक्तियों की नीतियाँ — अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-पश्चिम टकराव
आर्थिक आवश्यकताएँ — ऊर्जा, निवेश, बाज़ार, प्रौद्योगिकीपड़ोसी देशों की स्थिति — पाकिस्तान, चीन, अफ़ग़ानिस्तान
राजनीतिक व्यवस्था और नेतृत्व — नेहरू से वर्तमान तकअंतरराष्ट्रीय संगठन, संधियाँ, क़ानून
सैन्य क्षमता, जनमत, प्रवासी भारतीय (diaspora)वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, तकनीकी परिवर्तन, जलवायु संकट
  • नीति-निर्माण की संस्थाएँ — प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO — नेहरू से सबसे प्रभावी), विदेश मंत्रालय, मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (CCS), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (1998 से), संसद की स्थायी समिति, राज्य सरकारें (तमिलनाडु-श्रीलंका, पश्चिम बंगाल-तीस्ता), थिंक-टैंक।
  • निरंतरता और परिवर्तन — रणनीतिक स्वायत्तता निरंतर; परिवर्तन — गुटनिरपेक्षता → बहु-संरेखण (multi-alignment); आदर्शवाद → यथार्थवादी व्यावहारिकता; आर्थिक कूटनीति।

3. विदेश नीति का विकास: नेहरूवाद से बहु-संरेखण

चरणमुख्य विशेषताएँ
नेहरू युग (1947–64)गुटनिरपेक्षता, पंचशील (1954), उपनिवेश-विरोध, UN में आस्था; 1962 के युद्ध से झटका
इंदिरा युग (1966–77, 80–84)यथार्थवाद — भारत-सोवियत संधि (1971), बांग्लादेश युद्ध, पोखरण-I (1974), "Indira Doctrine" (दक्षिण एशिया में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध)
शीत युद्धोत्तर (1991–2014)आर्थिक सुधार, "Look East" (1991), गुजराल सिद्धांत (1996 — पड़ोसियों को बिना पारस्परिकता लाभ), पोखरण-II (1998), भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (2005-08)
2014 के बाद"Neighbourhood First", "Act East" (2014), "SAGAR" (2015 — अब "MAHASAGAR", 2025), "Think West"/Link West, Indo-Pacific, QUAD, I2U2, G20 अध्यक्षता (2023), "Vishwa Bandhu", "Global South की आवाज़"
नेहरूवाद से नव-उदारवाद की ओर? (UPSC 2024 — 20 अंक)

पक्ष — आर्थिक कूटनीति, FTA (UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, UK), निवेश आकर्षण, बाज़ार-उन्मुख वैश्वीकरण, अमेरिका से घनिष्ठता, यथार्थवादी शक्ति-राजनीति। विपक्ष — रणनीतिक स्वायत्तता (रूस से तेल और S-400), RCEP से बाहर रहना (2019), WTO में खाद्य सुरक्षा और कृषि पर दृढ़ता, Global South का नेतृत्व, विकास साझेदारी — नेहरूवादी मूल्यों की निरंतरता। निष्कर्ष — भारत की नीति "Nehruvian ends with realist and market means" — स्वायत्तता का लक्ष्य, साधनों में लचीलापन; सी. राजा मोहन इसे "Nehruvianism से pragmatism" का संक्रमण कहते हैं।

4. गुटनिरपेक्षता: अतीत और वर्तमान

  • भारत का योगदान — संस्थापक सदस्य, उपनिवेश-विरोधी और रंगभेद-विरोधी नेतृत्व, निरस्त्रीकरण, NIEO, विकासशील देशों की एकजुटता (G-77)।
  • "गुटनिरपेक्षता को त्यागकर बहु-संरेखण" (UPSC 2024) — बहु-संरेखण: अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग साझेदारों के साथ — QUAD (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) और SCO-BRICS (रूस, चीन) दोनों में; I2U2 (भारत, इज़राइल, UAE, अमेरिका); IMEC (2023)। तर्क — यह गुटनिरपेक्षता का "त्याग" नहीं, उसका उन्नत रूप है: मूल लक्ष्य (रणनीतिक स्वायत्तता) वही, पर पद्धति "दूरी" से "सहभागिता" की ओर; विदेश मंत्री एस. जयशंकर (The India Way, 2020) — "engage America, manage China, cultivate Europe, reassure Russia, bring Japan into play"।

5. भारत और दक्षिण एशिया

देशसहयोगमुद्दे / चुनौतियाँ
पाकिस्तानसिंधु जल संधि (1960), करतारपुर कॉरिडोर (2019)सीमा-पार आतंकवाद, कश्मीर; पुलवामा-बालाकोट (2019); पहलगाम हमला (अप्रैल 2025) के बाद सिंधु जल संधि "स्थगित" (abeyance) और ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025)
बांग्लादेशभूमि सीमा समझौता (2015), ऊर्जा, संपर्कतीस्ता जल, अवैध प्रवासन; अगस्त 2024 में शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद संबंधों में तनाव
नेपाल1950 की शांति-मैत्री संधि, खुली सीमा, ऊर्जा व्यापारकालापानी-लिपुलेख नक्शा विवाद (2020), चीन का प्रभाव (BRI)
भूटान2007 की मैत्री संधि, जलविद्युत (चुखा, ताला, मंगदेछु), रक्षा सहयोगडोकलाम (2017); भूटान-चीन सीमा वार्ता — चुंबी घाटी और सिलीगुड़ी कॉरिडोर ("chicken's neck") पर भारत की सुरक्षा चिंता (UPSC 2024)
श्रीलंका2022 के आर्थिक संकट में लगभग 4 अरब डॉलर की भारतीय सहायता; त्रिंकोमाली ऊर्जा केंद्र; 2025 का रक्षा सहयोग समझौतातमिल प्रश्न (13वाँ संशोधन), मछुआरे, कच्चातीवु; चीन का प्रभाव — हंबनटोटा बंदरगाह (99 वर्ष का पट्टा, 2017), चीनी शोध पोत (UPSC 2024)
मालदीव"India First" परंपरा, 1988 का ऑपरेशन कैक्टस, विकास परियोजनाएँ"India Out" अभियान (2023-24), भारतीय सैनिकों की वापसी; बाद में संबंधों में सुधार (2024-25)
अफ़ग़ानिस्तानसंसद भवन, सलमा बाँध, ज़रंज-देलाराम सड़क, चाबहार मार्गअगस्त 2021 तालिबान का कब्ज़ा; भारत की "तकनीकी टीम" (2022), मानवीय सहायता (गेहूँ, दवाएँ), दुबई में वार्ताएँ, 2025 में तालिबान विदेश मंत्री की भारत यात्रा और काबुल में भारतीय मिशन का दूतावास स्तर पर उन्नयन (UPSC 2023)
म्यांमार"Act East" का द्वार, कलादान परियोजना, त्रिपक्षीय राजमार्ग2021 का सैन्य तख़्तापलट, शरणार्थी (मिज़ोरम-मणिपुर), Free Movement Regime (16 किमी) की समाप्ति (2024) और सीमा पर बाड़ (UPSC 2024)
  • SAARC का भविष्य (UPSC 2024) — 2016 (उरी हमले) के बाद इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन रद्द, तब से निष्क्रिय; भारत का BIMSTEC (बिना पाकिस्तान; 2022 चार्टर), BBIN, IORA, ASEAN पर ध्यान। "regionness" की कमी (UPSC 2023) — भारत का आकार और असममिति, भारत-पाक शत्रुता, अंतर-क्षेत्रीय व्यापार कम (लगभग 5%), साझा पहचान का अभाव, जातीय संघर्ष-विद्रोह (UPSC 2023), बाहरी शक्तियाँ (चीन)।

6. भारत और वैश्विक शक्ति-केंद्र

अमेरिका

  • शीत युद्ध में दूरी → 2000 के बाद "natural allies"; परमाणु समझौता (2008), "Major Defence Partner" (2016), चार मूलभूत रक्षा समझौते — GSOMIA (2002), LEMOA (2016), COMCASA (2018), BECA (2020); iCET (2023) → TRUST पहल (2025); QUAD; 2025 में ऊँचे अमेरिकी टैरिफ़ (रूसी तेल ख़रीद से जुड़े) से व्यापार तनाव।
  • "इतने मज़बूत रणनीतिक साझेदार कि औपचारिक सहयोगी बनने की ज़रूरत नहीं" (UPSC 2024) — पक्ष: बिना संधि-दायित्व के गहन सहयोग; भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और अमेरिका के लचीले "coalition" मॉडल दोनों के अनुकूल; विपक्ष: व्यापार-टैरिफ़, आव्रजन (H-1B), रूस नीति, लोकतंत्र-मानवाधिकार पर मतभेद दिखाते हैं कि साझेदारी में "विश्वास-अंतर" बना है।

रूस

  • परंपरागत तीन स्तंभ — हथियार, आर्थिक संबंध, भू-राजनीतिक समानता; 1971 की संधि, "Special and Privileged Strategic Partnership" (2010)।
  • तीन स्तंभ अब नहीं? (UPSC 2023) — हथियार आयात में रूस का हिस्सा घटा (SIPRI के अनुसार 2009-13 में लगभग 76% से 2020-24 में लगभग 36%); रूस-चीन निकटता ("no limits" साझेदारी, 2022) से भू-राजनीतिक अभिसरण कमज़ोर; पर तेल आयात (2022 के बाद रियायती रूसी तेल — भारत का सबसे बड़ा स्रोत), ऊर्जा, परमाणु (कुडनकुलम), अंतरिक्ष और RIC/BRICS/SCO में नए स्तंभ उभरे। निष्कर्ष — संबंध बदल रहे हैं, टूट नहीं रहे।

चीन

  • पंचशील (1954), 1962 का युद्ध, 1988 (राजीव गांधी यात्रा) के बाद सामान्यीकरण, सीमा शांति समझौते (1993, 1996)।
  • मुद्दे — LAC विवाद (डोकलाम 2017, गलवान जून 2020), व्यापार घाटा (लगभग 100 अरब डॉलर), CPEC, ब्रह्मपुत्र पर बाँध, पाकिस्तान को समर्थन, NSG और UNSC में अवरोध।
  • अक्टूबर 2024 का देपसांग-डेमचोक गश्त समझौता और 2025 में संबंधों का आंशिक सामान्यीकरण (कैलाश मानसरोवर यात्रा पुनः शुरू, सीधी उड़ानें, SCO तियानजिन शिखर सम्मेलन)।
  • "एशियाई सदी" की व्यवहार्यता (UPSC 2024) — देंग-राजीव गांधी (1988) का विचार कि भारत-चीन सहयोग के बिना एशियाई सदी नहीं; प्रतिस्पर्धा के बावजूद आर्थिक परस्पर निर्भरता, BRICS-SCO सहयोग; पर सीमा विवाद और रणनीतिक अविश्वास बाधक — "competitive coexistence" ही यथार्थ।

यूरोपीय संघ और जापान

  • EU — सबसे बड़े व्यापार साझेदारों में; व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (2023), FTA वार्ताएँ (2022 में पुनः आरंभ), IMEC, जलवायु और डिजिटल सहयोग; मुद्दे — CBAM (कार्बन सीमा कर), डेटा नियम।
  • जापान — "Special Strategic and Global Partnership", मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल, Act East में पूर्वोत्तर निवेश, QUAD, 2+2 संवाद।

7. भारत, UN और परमाणु प्रश्न

  • UN — संस्थापक सदस्य (1945); शांति स्थापना में अग्रणी; 8 बार अस्थायी सदस्य; G4 के साथ स्थायी सदस्यता का दावा — जनसंख्या, लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, शांति स्थापना योगदान (UPSC 2023), Global South का प्रतिनिधित्व।
  • "वीटो-रहित स्थायी के बजाय अर्ध-स्थायी सदस्यता?" (UPSC 2024) — "Uniting for Consensus" का प्रस्ताव: लंबी अवधि की नवीकरणीय सीटें; पक्ष — व्यावहारिक, शीघ्र संभव; विपक्ष — P5 के साथ असमानता स्थायी हो जाएगी; भारत की आधिकारिक स्थिति — वीटो के बिना भी स्थायी सदस्यता (15 वर्ष तक वीटो प्रयोग न करने की G4 की लचीली पेशकश) पर नए सदस्यों और पुराने में भेदभाव नहीं।
  • परमाणु नीति — पोखरण-I (1974, "शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट"), पोखरण-II (मई 1998); परमाणु सिद्धांत (2003) — No First Use, credible minimum deterrence, परमाणु-रहित देशों के विरुद्ध प्रयोग नहीं, जैविक-रासायनिक आक्रमण पर अपवाद, Nuclear Command Authority।
  • NPT पर हस्ताक्षर से इनकार (UPSC 2024) — भेदभावपूर्ण संधि ("nuclear apartheid" — जसवंत सिंह): 1967 से पहले परीक्षण करने वाले 5 को ही परमाणु शक्ति माना; निरस्त्रीकरण (अनु. VI) की उपेक्षा; पड़ोस में दो परमाणु शक्तियाँ (चीन, पाकिस्तान); CTBT पर भी यही कारण। फिर भी भारत का साफ़ अप्रसार रिकॉर्ड — NSG छूट (2008), MTCR (2016), Wassenaar (2017), Australia Group (2018) सदस्यता; NSG सदस्यता चीन के कारण लंबित।
  • "सांस्कृतिक विश्वासों और व्यावहारिकता से प्रभावित परमाणु नीति" (UPSC 2023) — गांधी-नेहरू की अहिंसा और निरस्त्रीकरण (राजीव गांधी कार्य योजना 1988) बनाम सुरक्षा-यथार्थवाद (1998); NFU इसी संतुलन का प्रतीक।

8. भारत और Global South

  • विकास साझेदारी — ITEC (1964), लाइन ऑफ़ क्रेडिट, अफ़्रीका-भारत फ़ोरम शिखर सम्मेलन (2008, 2011, 2015)।
  • Voice of Global South Summit (जनवरी 2023 से, वर्चुअल); G20 अध्यक्षता में अफ़्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता (सितंबर 2023, नई दिल्ली घोषणा)।
  • वैक्सीन मैत्री (कोविड), जलवायु न्याय (CBDR), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (2015), CDRI (2019), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (UPI, आधार मॉडल) का निर्यात।
  • WTO में भारत का प्रभाव (UPSC 2024) — विशाल बाज़ार, खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण पर "peace clause" (बाली 2013), ई-कॉमर्स मोरेटोरियम और मत्स्य सब्सिडी पर दृढ़ता, विकासशील देशों का गठबंधन-नेता (G-33, G-20 कृषि)।
  • TRIPS छूट नहीं, समझौता (UPSC 2023) — भारत-दक्षिण अफ़्रीका का अक्टूबर 2020 का प्रस्ताव टीके, उपचार, निदान सभी पर व्यापक छूट माँगता था; MC12 (जून 2022) का निर्णय केवल टीकों के पेटेंट पर, सीमित अवधि (5 वर्ष) और अनिवार्य लाइसेंस प्रक्रिया की शर्तों में ढील तक सीमित — इसलिए यह वास्तविक "waiver" नहीं।
  • नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में भूमिका (UPSC 2024) — बहुपक्षीय विकास बैंकों के सुधार, ऋण-संकट (G20 Common Framework), जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, UNSC सुधार।
  • अफ़्रीका में रुचि के प्रेरक (UPSC 2023) — ऊर्जा और खनिज (तेल, महत्वपूर्ण खनिज), बाज़ार, समुद्री सुरक्षा (पूर्वी अफ़्रीकी तट), प्रवासी भारतीय, UN में समर्थन, चीन से प्रतिस्पर्धा; भारत अफ़्रीका का प्रमुख व्यापार साझेदार।

9. पश्चिम एशिया और हाल के घटनाक्रम

  • "Look West / Think West" — खाड़ी में 90 लाख के आसपास भारतीय, प्रेषण, ऊर्जा; UAE (CEPA 2022, रुपया-दिरहम व्यापार), सऊदी अरब (रणनीतिक भागीदारी परिषद 2019)।
  • I2U2 / "West Asia Quad" (UPSC 2023) — अक्टूबर 2021 में विदेश मंत्रियों की बैठक, जुलाई 2022 पहला शिखर सम्मेलन; खाद्य सुरक्षा (UAE निवेश से भारत में फ़ूड पार्क), स्वच्छ ऊर्जा; भारत के लिए महत्व — अब्राहम समझौतों (2020) के बाद पश्चिम एशिया में व्यावहारिक, गैर-सैन्य बहुपक्षीय भूमिका, "de-hyphenation"।
  • ईरान — चाबहार (2024 में 10 वर्षीय संचालन समझौता), INSTC; चुनौतियाँ (UPSC 2023) — अमेरिकी प्रतिबंध, तेल आयात बंद (2019), ईरान-इज़राइल संघर्ष, ईरान की चीन से निकटता।
  • फ़िलिस्तीन नीति — निरंतरता और परिवर्तन (UPSC 2024) — निरंतरता: दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन, UNRWA को सहायता, मानवीय सहायता (गाज़ा); परिवर्तन: इज़राइल से रणनीतिक साझेदारी (1992 से राजनयिक संबंध, 2017 में प्रधानमंत्री की यात्रा — "de-hyphenation"), 7 अक्टूबर 2023 के आतंकवादी हमले की तुरंत निंदा, कुछ UNGA प्रस्तावों पर मतदान से अनुपस्थिति (बाद में युद्धविराम प्रस्तावों के पक्ष में मतदान)।
  • IMEC — भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (G20, सितंबर 2023)।

10. Indo-Pacific और QUAD

  • "Asia-Pacific" से "Indo-Pacific" (UPSC 2024) — शिंज़ो आबे का "Confluence of Two Seas" भाषण (भारतीय संसद, 2007); अमेरिका ने 2018 में "Pacific Command" को "Indo-Pacific Command" बनाया; तर्क — हिंद और प्रशांत महासागर की आर्थिक-सामरिक एकता, भारत की केंद्रीय भूमिका की मान्यता, चीन के उदय का संतुलन; भारत की दृष्टि — "free, open, inclusive" (शांगरी-ला भाषण 2018), ASEAN केंद्रीयता, IPOI (2019)।
  • QUAD (UPSC 2023) — 2004 सुनामी सहयोग → 2007 → 2017 में पुनर्जीवन → 2021 पहला नेता-स्तरीय शिखर सम्मेलन; कार्य — टीके, महत्वपूर्ण तकनीक, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (IPMDA), जलवायु, अवसंरचना; भारत के लिए महत्व — चीन के प्रभुत्व के विरुद्ध "strategic balancing" बिना सैन्य गठबंधन के; सीमाएँ — भारत का सैन्य गठबंधन से इनकार, अमेरिकी नीति की अनिश्चितता।

11. Master Summary Table

क्षेत्र / विषयमुख्य नीति / पहलप्रमुख चुनौती
पड़ोसNeighbourhood First, गुजराल सिद्धांतपाकिस्तान आतंकवाद, चीन का प्रभाव
दक्षिण-पूर्व एशियाLook East (1991) → Act East (2014)RCEP से बाहर, संपर्क परियोजनाओं में विलंब
पश्चिम एशियाThink West, I2U2, IMEC, चाबहारसंघर्ष, प्रतिबंध, ऊर्जा सुरक्षा
हिंद महासागरSAGAR → MAHASAGAR, IORAचीनी नौसेना, "string of pearls"
महाशक्तियाँबहु-संरेखण, रणनीतिक स्वायत्तताअमेरिका-चीन-रूस संतुलन
UNG4, शांति स्थापनाP5 का विरोध, UfC
परमाणुNFU, credible minimum deterrenceNPT से बाहर, NSG सदस्यता
Global SouthVoGS, अफ़्रीकी संघ G20 में, ITECसंसाधन सीमाएँ, चीन से प्रतिस्पर्धा

12. Mind Map

भारत की विदेश नीति
आधार
  • निर्धारक — आंतरिक/बाह्य
  • संस्थाएँ — PMO, MEA, NSC
  • नेहरूवाद → बहु-संरेखण
पड़ोस
  • पाकिस्तान, चीन
  • बांग्लादेश, नेपाल, भूटान
  • श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार, अफ़ग़ानिस्तान
  • SAARC → BIMSTEC
महाशक्तियाँ
  • अमेरिका — QUAD
  • रूस — तेल, हथियार
  • EU, जापान
बहुपक्षीय
  • UN — G4
  • WTO, G20, BRICS, SCO
  • परमाणु — NFU, NPT
नई दिशाएँ
  • Indo-Pacific
  • I2U2, IMEC
  • Global South, अफ़्रीका

13. महत्वपूर्ण One-liners

  • पंचशील — 1954 (भारत-चीन); गुजराल सिद्धांत — 1996; Look East — 1991; Act East — 2014।
  • परमाणु सिद्धांत (NFU) — जनवरी 2003; पोखरण-II — मई 1998।
  • "Confluence of Two Seas" (2007) — शिंज़ो आबे।
  • The India Way (2020) — एस. जयशंकर।
  • GSOMIA, LEMOA, COMCASA, BECA — भारत-अमेरिका के चार मूलभूत रक्षा समझौते।
  • अफ़्रीकी संघ G20 का स्थायी सदस्य — नई दिल्ली शिखर सम्मेलन, सितंबर 2023।
  • I2U2 पहला शिखर सम्मेलन — जुलाई 2022; IMEC — सितंबर 2023।
  • भूमि सीमा समझौता (बांग्लादेश) — 2015 (100वाँ संशोधन)।
  • Free Movement Regime (म्यांमार) समाप्ति की घोषणा — फ़रवरी 2024।
  • MC12 TRIPS निर्णय (टीकों तक सीमित) — जून 2022।

14. टिप्स एवं ट्रिक्स

Section B की तैयारी
  • हर द्विपक्षीय संबंध के लिए "5-बिंदु कार्ड" — इतिहास, सहयोग के क्षेत्र, मुद्दे, हाल की घटना (पिछले 12-18 माह), आगे का मार्ग।
  • उत्तर में आँकड़े (व्यापार, प्रवासी, सहायता) और नवीनतम घटना से अंक बढ़ते हैं — पर केवल सत्यापित तथ्य।
  • सिद्धांत से जोड़ें — यथार्थवाद (चीन नीति), उदारवाद (बहुपक्षवाद), रचनावाद (सभ्यतागत पहचान, "Vishwa Guru")।
  • MEA की वार्षिक रिपोर्ट, संयुक्त वक्तव्य और विदेश मंत्री के भाषण प्रामाणिक स्रोत हैं।

15. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2024 · Paper II · 8(c)

"भारत ने हाल ही में बहु-संरेखण की खोज में गुटनिरपेक्षता को त्यागना चुना है।" टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: गुटनिरपेक्षता (1950-90) शीत युद्ध के दो गुटों से दूरी थी; बहु-संरेखण (multi-alignment) बहुध्रुवीय विश्व में अनेक शक्तियों से मुद्दा-आधारित साझेदारी है।

"त्याग" के पक्ष में तर्क: QUAD जैसी अमेरिका-नेतृत्व वाली व्यवस्थाओं में भागीदारी; चार रक्षा समझौते; NAM शिखर सम्मेलनों में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति (2016, 2019); इज़राइल से घनिष्ठता।

विपक्ष — निरंतरता: रणनीतिक स्वायत्तता का मूल लक्ष्य वही; रूस से तेल-हथियार, SCO-BRICS में सक्रियता; यूक्रेन पर संतुलित मत; सैन्य गठबंधन से इनकार; Global South का नेतृत्व — NAM की मानक भावना।

विश्लेषण: यह गुटनिरपेक्षता का "विकास" है — "non-alignment 2.0" (2012 की रिपोर्ट); शीत युद्ध के बाद गुट ही नहीं रहे, इसलिए "गैर-संरेखण" का स्थान "सर्व-संरेखण" ने लिया।

निष्कर्ष: भारत ने गुटनिरपेक्षता की पद्धति बदली है, दर्शन नहीं — बहु-संरेखण ही आज रणनीतिक स्वायत्तता का व्यावहारिक रूप है।

Q2UPSC 2023 · Paper II · 6(a)

हथियार व्यापार, आर्थिक संबंध और समान भू-राजनीतिक हित — उभरते सामरिक संदर्भ में ये अब भारत-रूस संबंधों के तीन स्तंभ नहीं रहे। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: शीत युद्ध से भारत-रूस संबंध "समय-परीक्षित" रहे — सोवियत हथियार, राजनयिक समर्थन (कश्मीर पर वीटो), भारी उद्योग में सहयोग।

स्तंभों का क्षरण: (1) हथियार — विविधीकरण (अमेरिका, फ़्रांस, इज़राइल) और आत्मनिर्भर भारत; रूसी हिस्सा घटा; यूक्रेन युद्ध से आपूर्ति में देरी; (2) भू-राजनीति — रूस-चीन घनिष्ठता, रूस-पाकिस्तान संपर्क, भारत की अमेरिका से निकटता; (3) आर्थिक — परंपरागत रूप से कमज़ोर।

नए आयाम: 2022 के बाद रियायती रूसी तेल से व्यापार में उछाल (60 अरब डॉलर से अधिक), रुपया-रूबल भुगतान प्रयोग, INSTC, कुडनकुलम, अंतरिक्ष (गगनयान प्रशिक्षण), आर्कटिक और उत्तरी समुद्री मार्ग; S-400 की आपूर्ति।

निष्कर्ष: पुराने स्तंभ बदल गए हैं, पर ऊर्जा, परमाणु, बहुध्रुवीयता की साझा दृष्टि और रणनीतिक स्वायत्तता नए स्तंभ बने हैं — संबंध "sentiment" से "interest" आधारित हो रहे हैं।

Q3UPSC 2024 · Paper II · 8(b)

म्यांमार के साथ Free Movement Regime को भारत सरकार द्वारा समाप्त करने के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की जटिल नृजातीय-राजनीतिक गतिशीलता पर प्रभावों की चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: FMR (2018 में औपचारिक, Act East के अंतर्गत) सीमा के दोनों ओर 16 किमी तक रहने वाले लोगों को बिना वीज़ा आवाजाही की अनुमति देता था — सीमा के आर-पार बसी नागा, कुकी-चिन-मिज़ो जनजातियों के पारिवारिक-सांस्कृतिक संबंधों की मान्यता। फ़रवरी 2024 में सरकार ने इसे समाप्त करने और 1,643 किमी सीमा पर बाड़ लगाने की घोषणा की।

सरकार के तर्क: मणिपुर हिंसा (2023) के बाद अवैध प्रवासन, हथियार-नशीले पदार्थों की तस्करी, उग्रवादी आवाजाही; म्यांमार के गृहयुद्ध से शरणार्थियों का प्रवाह।

प्रभाव: (1) मिज़ोरम और नागालैंड सरकारों का विरोध — पारिवारिक-कबीलाई संबंधों का विच्छेद; (2) नागा "एकीकृत नागालिम" की आकांक्षा और नागा शांति वार्ता पर असर; (3) मैतेई-कुकी ध्रुवीकरण — मैतेई समर्थन, कुकी-ज़ो विरोध; (4) सीमा-पार व्यापार और आजीविका को हानि; (5) कठिन भूभाग में बाड़ की व्यावहारिक कठिनाई; (6) भारत-म्यांमार संबंध और Act East।

निष्कर्ष: सुरक्षा आवश्यकताएँ वैध हैं, पर समाधान में स्थानीय समुदायों से परामर्श, विनियमित पास-व्यवस्था और विकास-आधारित दृष्टि (सीमा हाट) शामिल होनी चाहिए ताकि सुरक्षा उपाय नृजातीय अलगाव को न बढ़ाएँ।

Q4UPSC 2023 · Paper II · 6(c)

चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद (QUAD) एशिया में चीन के प्रभुत्व का सामना करने की भारत की रणनीतिक संतुलन नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: QUAD — भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया का अनौपचारिक मंच; 2017 में पुनर्जीवित, 2021 से नेता-स्तरीय।

रणनीतिक संतुलन में भूमिका: (1) गलवान (2020) के बाद भारत की सौदेबाज़ी क्षमता बढ़ी; (2) समुद्री क्षेत्र जागरूकता (IPMDA) और मालाबार अभ्यास; (3) महत्वपूर्ण तकनीक, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला — चीन पर निर्भरता घटाना; (4) वैकल्पिक अवसंरचना और वैक्सीन — BRI का प्रति-संतुलन; (5) मानदंड — "free, open, inclusive Indo-Pacific", नियम-आधारित व्यवस्था।

सीमाएँ: भारत सैन्य गठबंधन नहीं चाहता — "QUAD is not an Asian NATO"; AUKUS (2021) के बाद सैन्य आयाम बाहर; अमेरिकी नीति की अनिश्चितता; भारत की स्थलीय सीमा (LAC) पर QUAD का सीधा योगदान नहीं; ASEAN की आशंका।

निष्कर्ष: QUAD भारत के लिए "बाहरी संतुलन" (external balancing) का लचीला साधन है, जो रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए चीन के प्रभुत्व को सीमित करता है — पर आंतरिक संतुलन (रक्षा क्षमता, सीमा अवसंरचना) ही अंतिम गारंटी है।

Q5UPSC 2024 · Paper II · 7(b)

एक वास्तविक (de facto) परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता के बावजूद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर करने से भारत के लगातार इनकार का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: NPT (1968, 1970 से लागू) केवल उन्हीं पाँच देशों को "परमाणु शस्त्र राज्य" मानता है जिन्होंने 1 जनवरी 1967 से पहले परीक्षण किया; भारत इसे भेदभावपूर्ण मानता है।

इनकार के कारण: (1) "परमाणु रंगभेद" — स्थायी असमानता; (2) अनु. VI के अंतर्गत परमाणु निरस्त्रीकरण पर P5 की विफलता; (3) सुरक्षा परिवेश — चीन (1964 परीक्षण) और पाकिस्तान; (4) संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता; (5) NNWS के रूप में शामिल होने का अर्थ हथियार त्यागना।

भारत का ज़िम्मेदार रिकॉर्ड: स्वैच्छिक परीक्षण-स्थगन (1998 से), NFU, कठोर निर्यात नियंत्रण, 2008 की NSG छूट, MTCR-Wassenaar-Australia Group सदस्यता, IAEA सुरक्षा उपाय (असैन्य सुविधाओं पर)।

आलोचना: अप्रसार व्यवस्था को कमज़ोर करने का आरोप, दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़, NSG सदस्यता में बाधा (चीन "NPT सदस्यता" की शर्त रखता है)।

निष्कर्ष: भारत की स्थिति सिद्धांत (सार्वभौमिक, भेदभाव-रहित निरस्त्रीकरण) और यथार्थ (सुरक्षा) का संतुलन है; "NPT के बाहर, पर अप्रसार व्यवस्था के भीतर" — यही भारत का अनूठा मॉडल है।

Q6UPSC 2023 · Paper II · 7(b)

अगस्त 2021 में अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े के बाद वहाँ अपनी पकड़ पुनः प्राप्त करने के लिए भारत ने कौन-से कदम उठाए हैं?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: भारत ने 2001-21 के बीच अफ़ग़ानिस्तान में लगभग 3 अरब डॉलर की विकास परियोजनाएँ चलाईं; तालिबान की वापसी से दूतावास बंद हुआ और रणनीतिक प्रभाव घटा।

कदम: (1) मानवीय सहायता — 50,000 टन गेहूँ (पाकिस्तान के रास्ते, 2022), दवाएँ, कोविड टीके, भूकंप राहत; (2) राजनयिक उपस्थिति — जून 2022 में काबुल में "तकनीकी टीम"; (3) बहुपक्षीय कूटनीति — दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद (नवंबर 2021), UNSC प्रस्ताव 2593 (भारत की अध्यक्षता, अगस्त 2021 — अफ़ग़ान भूमि का आतंकवाद में प्रयोग न हो); (4) तालिबान से व्यावहारिक संवाद — दुबई बैठक (जनवरी 2025), 2025 में तालिबान विदेश मंत्री की भारत यात्रा और काबुल मिशन का दूतावास स्तर पर उन्नयन; (5) चाबहार मार्ग से व्यापार।

चुनौतियाँ: तालिबान को औपचारिक मान्यता का प्रश्न, महिलाओं के अधिकार, पाकिस्तान और चीन का प्रभाव, आतंकवादी समूह (ISKP, लश्कर)।

निष्कर्ष: भारत ने "जन-केंद्रित" दृष्टिकोण से अफ़ग़ान जनता में सद्भावना बचाते हुए व्यावहारिक संवाद अपनाया है — यह "strategic patience" और यथार्थवाद का संतुलन है।

16. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • निर्धारक — आंतरिक (भूगोल, इतिहास, अर्थ, नेतृत्व) और बाह्य (व्यवस्था, महाशक्तियाँ, पड़ोस); संस्थाएँ — PMO, MEA, CCS, NSA।
  • विकास — नेहरू (NAM, पंचशील) → इंदिरा (यथार्थवाद) → 1991 के बाद (Look East, गुजराल सिद्धांत, पोखरण-II) → 2014 के बाद (Neighbourhood First, Act East, बहु-संरेखण)।
  • पड़ोस — पाकिस्तान (आतंकवाद, सिंधु जल), बांग्लादेश, नेपाल, भूटान (डोकलाम), श्रीलंका (हंबनटोटा), मालदीव, म्यांमार (FMR), अफ़ग़ानिस्तान (तालिबान के बाद); SAARC → BIMSTEC।
  • महाशक्तियाँ — अमेरिका (रक्षा समझौते, QUAD, टैरिफ़ तनाव), रूस (स्तंभों का बदलाव), चीन (LAC, गलवान, 2024 समझौता), EU, जापान।
  • बहुपक्षीय — UN (G4, शांति स्थापना), परमाणु (NFU, NPT से इनकार), WTO (TRIPS समझौता), G20 (अफ़्रीकी संघ), Global South।
  • नई दिशाएँ — Indo-Pacific, QUAD, I2U2, IMEC, अफ़्रीका।