UPSC Mains · Political Science & International Relations · Paper II · अध्याय 9

अंतरराष्ट्रीय संबंध: सिद्धांत, संस्थाएँ एवं मुद्दे

International Relations: Theories, Institutions and Issues

यथार्थवाद, उदारवाद, मार्क्सवाद, निर्भरता सिद्धांत; शक्ति, राष्ट्रीय हित, सामूहिक सुरक्षा; शीत युद्ध से बहुध्रुवीयता तक; UN, WTO, क्षेत्रीय संगठन और समकालीन वैश्विक मुद्दे।

Paper II 21 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper II Section A के शेष units — Approaches to the study of International Relations, Key concepts in IR, Changing International Political Order, Evolution of the International Economic System, United Nations, Regionalisation of World Politics और Contemporary Global Concerns — इस अध्याय में हैं। 2023 में प्रकार्यवाद, आक्रामक-रक्षात्मक यथार्थवाद, अमेरिकी आधिपत्य की सीमाएँ, NAM, ICJ, सुरक्षा परिषद, EU और पर्यावरण-मानव सुरक्षा; 2024 में विश्व-व्यवस्था सिद्धांत, आदर्शवाद, ग्राम्शीवादी आधिपत्य, निरस्त्रीकरण, रूस का विस्तारवाद, NATO, WTO का पतन, EU और NAFTA-USMCA पूछे गए।

इस अध्याय की संरचना
  • सिद्धांत — आदर्शवाद, यथार्थवाद (शास्त्रीय, नव, आक्रामक-रक्षात्मक), उदारवाद, मार्क्सवाद (निर्भरता, विश्व-व्यवस्था), प्रकार्यवाद, रचनावाद, नारीवाद।
  • अवधारणाएँ — राष्ट्रीय हित, सुरक्षा, शक्ति, शक्ति संतुलन, निवारण, अंतरराष्ट्रीय समाज।
  • विश्व व्यवस्था — शीत युद्ध, NAM, एकध्रुवीयता, बहुध्रुवीयता; अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था — ब्रेटन वुड्स से WTO।
  • संस्थाएँ — UN, क्षेत्रीय संगठन; समकालीन मुद्दे — आतंकवाद, पर्यावरण, मानवाधिकार, परमाणु प्रसार।

2. अंतरराष्ट्रीय संबंध के सिद्धांत

(क) आदर्शवाद (Idealism) — UPSC 2024

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद; वुडरो विल्सन के 14 सूत्र (1918), राष्ट्र संघ; कांट का "Perpetual Peace" (1795) — लोकतांत्रिक गणराज्य, शांति संघ; नॉर्मन एंजेल (The Great Illusion)।
  • पहलू — मानव स्वभाव मूलतः अच्छा; युद्ध रोका जा सकता है; अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संस्थाएँ; सामूहिक सुरक्षा; आत्मनिर्णय; खुली कूटनीति; निरस्त्रीकरण; जनमत की शक्ति।
  • आलोचना — ई.एच. कार (The Twenty Years' Crisis, 1939) ने इसे "utopianism" कहा; राष्ट्र संघ की विफलता, द्वितीय विश्व युद्ध।
  • समकालीन प्रासंगिकता — UN, मानवाधिकार व्यवस्था, R2P (2005), ICC, जलवायु समझौते, "democratic peace theory"; पर यूक्रेन, गाज़ा जैसे संघर्ष इसकी सीमाएँ भी दिखाते हैं।

(ख) यथार्थवाद (Realism)

धारामुख्य विचारविचारक
शास्त्रीय यथार्थवादमानव स्वभाव शक्ति-लोलुप; "राष्ट्रीय हित शक्ति के रूप में परिभाषित"; राजनीति की स्वायत्तता; नैतिकता का विवेकपूर्ण प्रयोगहांस मॉर्गेन्थाउ (Politics Among Nations, 1948) — 6 सिद्धांत; ई.एच. कार; थ्यूसिडिडीज़, मैकियावेली, हॉब्स
नव-यथार्थवाद / संरचनात्मकअराजक (anarchic) अंतरराष्ट्रीय संरचना राज्यों को स्वयं-सहायता (self-help) और सुरक्षा की खोज के लिए बाध्य करती है; शक्ति का वितरण (ध्रुवीयता) निर्णायक; द्विध्रुवीयता सबसे स्थिरकेनेथ वॉल्ट्ज़ (Theory of International Politics, 1979)
रक्षात्मक यथार्थवादराज्य "पर्याप्त" सुरक्षा चाहते हैं; अधिक विस्तार प्रति-संतुलन (balancing) को जन्म देता है; यथास्थिति-प्रियवॉल्ट्ज़, स्टीफ़न वॉल्ट (balance of threat), जैक स्नाइडर
आक्रामक यथार्थवादराज्य शक्ति अधिकतम करते हैं; हर महाशक्ति क्षेत्रीय आधिपत्य (hegemony) चाहती है; "tragedy of great power politics"जॉन मियरशाइमर (2001)
नव-शास्त्रीय यथार्थवादसंरचना + घरेलू कारक (नेतृत्व की धारणा, राज्य क्षमता)गिडियन रोज़, रैंडल श्वेलर
आक्रामक बनाम रक्षात्मक यथार्थवाद (UPSC 2023)

दोनों अराजकता और स्वयं-सहायता मानते हैं; अंतर इस प्रश्न पर है कि "कितनी शक्ति पर्याप्त है?" रक्षात्मक — संतुलन से विस्तार दंडित होता है, इसलिए संयम; आक्रामक — अनिश्चितता के कारण अधिकतम शक्ति ही सुरक्षा। उदाहरण — मियरशाइमर ने यूक्रेन संकट (2014, 2022) के लिए NATO विस्तार को ज़िम्मेदार ठहराया; चीन के उदय को "शांतिपूर्ण नहीं" माना; "security dilemma" (जॉन हर्ज़, रॉबर्ट जर्विस) दोनों में केंद्रीय।

(ग) उदारवाद और नव-उदार संस्थावाद

  • परस्पर निर्भरता — कोहेन और नाई (Power and Interdependence, 1977): "complex interdependence"।
  • नव-उदार संस्थावाद — संस्थाएँ सहयोग संभव बनाती हैं (सूचना, लेनदेन लागत घटाना) — कोहेन (After Hegemony, 1984)।
  • लोकतांत्रिक शांति सिद्धांत — लोकतंत्र आपस में युद्ध नहीं करते (माइकल डॉयल)।
  • सॉफ़्ट पावर — जोसेफ़ नाई (1990): आकर्षण से प्रभाव; "smart power"।

(घ) प्रकार्यवाद (Functionalism) — UPSC 2023

  • डेविड मित्रानी (A Working Peace System, 1943) — तकनीकी, गैर-राजनीतिक क्षेत्रों (डाक, स्वास्थ्य, परिवहन) में सहयोग से राज्यों के बीच परस्पर निर्भरता का "जाल" बनेगा, निष्ठा राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर जाएगी — "ramification"; "form follows function"।
  • नव-प्रकार्यवाद — अर्न्स्ट हास: "spillover" — एक क्षेत्र का एकीकरण दूसरे में फैलता है; यूरोपीय एकीकरण (ECSC 1951 → EEC → EU)।
  • शांति में योगदान — UN की विशिष्ट एजेंसियाँ (WHO, ITU, UPU, FAO), EU; सीमाएँ — "low politics" से "high politics" (सुरक्षा) में spillover कठिन; राष्ट्रवाद (ब्रेक्ज़िट)।

(ङ) मार्क्सवादी और आलोचनात्मक सिद्धांत

  • लेनिन — साम्राज्यवाद पूँजीवाद की उच्चतम अवस्था।
  • निर्भरता सिद्धांत — राउल प्रेबिश (ECLA), आंद्रे गुंडर फ़्रैंक ("development of underdevelopment"), समीर अमीन; केंद्र (core) द्वारा परिधि (periphery) का शोषण।
  • विश्व-व्यवस्था सिद्धांत (UPSC 2024) — इमैनुअल वालरस्टीन (1974): 16वीं सदी से एक ही "capitalist world-economy"; तीन क्षेत्र — core (उच्च तकनीक, पूँजी-गहन), periphery (कच्चा माल, सस्ता श्रम), semi-periphery (बीच का, गतिशीलता संभव — भारत, ब्राज़ील, चीन); असमान विनिमय (unequal exchange); राज्य व्यवस्था पूँजी संचय की सेवा करती है; आधिपत्य का चक्र (डच, ब्रिटिश, अमेरिकी)।
  • ग्राम्शीवादी IR — रॉबर्ट कॉक्स (1981, "theory is always for someone and for some purpose"), स्टीफ़न गिल: वैश्विक आधिपत्य = भौतिक शक्ति + विचारधारा + संस्थाएँ; अमेरिकी आधिपत्य Washington Consensus, IMF-WB और सांस्कृतिक प्रभाव से "सहमति" बनाता है; "transnational historic bloc"।

(च) रचनावाद और नारीवाद

  • अलेक्ज़ेंडर वेंट — "Anarchy is what states make of it" (1992); पहचान और मानदंड हितों को गढ़ते हैं; हॉब्सियन, लॉकियन, कांटियन संस्कृतियाँ।
  • नारीवादी IR — सिंथिया एनलो (Bananas, Beaches and Bases), जे. ऐन टिकनर — मॉर्गेन्थाउ के सिद्धांतों का नारीवादी पुनर्लेखन; "मानव सुरक्षा"; UNSC प्रस्ताव 1325 (2000 — महिलाएँ, शांति और सुरक्षा)।

3. प्रमुख अवधारणाएँ

  • राष्ट्रीय हित — मॉर्गेन्थाउ; महत्वपूर्ण (vital) और गौण हित; वस्तुनिष्ठ बनाम व्यक्तिनिष्ठ।
  • शक्ति संतुलन — कोई एक राज्य प्रभुत्व न पाए; 19वीं सदी का "Concert of Europe"; बाह्य (गठबंधन) और आंतरिक (हथियार) संतुलन; bandwagoning।
  • सामूहिक सुरक्षा — "एक पर आक्रमण सब पर"; UN अध्याय VII; NATO का अनु. 5 सामूहिक रक्षा (भिन्न)।
  • निवारण (Deterrence) — परमाणु युग में "Mutually Assured Destruction"; भारत का "credible minimum deterrence"।
  • अंतरराष्ट्रीय समाज — इंग्लिश स्कूल (हेडली बुल, The Anarchical Society, 1977)।
  • मानव सुरक्षा — UNDP मानव विकास रिपोर्ट 1994: "freedom from fear and freedom from want"।

4. बदलती अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक व्यवस्था

शीत युद्ध (1947–1991)

  • ट्रूमैन सिद्धांत (1947), मार्शल योजना, "containment" (जॉर्ज केनन); NATO (1949) बनाम वारसॉ संधि (1955); बर्लिन, कोरिया, क्यूबा मिसाइल संकट (1962), वियतनाम; détente (1970) और हथियार नियंत्रण (SALT); गोर्बाचेव और अंत।
  • हथियारों की होड़ — परमाणु त्रय, MAD; NPT (1968), PTBT (1963), INF संधि (1987; 2019 में अमेरिका हटा), New START (2010; रूस ने 2023 में भागीदारी निलंबित की, संधि फ़रवरी 2026 में समाप्त)।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM)

  • बांडुंग (1955) की पृष्ठभूमि; बेलग्रेड (1961) — नेहरू, टीटो, नासिर, सुकर्णो, न्क्रूमा; उद्देश्य — गुटों से स्वतंत्र विदेश नीति, उपनिवेशवाद-विरोध, निरस्त्रीकरण, NIEO (1974)।
  • "तीसरी शक्ति" बनने में विफलता (UPSC 2023) — बहुत बड़ा और विषम (120 सदस्य), सदस्यों के आपसी युद्ध (भारत-पाक, ईरान-इराक़), कुछ सदस्यों का किसी एक गुट से झुकाव (क्यूबा, भारत-सोवियत संधि 1971), आर्थिक-सैन्य शक्ति का अभाव, संस्थागत ढाँचे (स्थायी सचिवालय) का अभाव। फिर भी — विऔपनिवेशीकरण, रंगभेद-विरोध, UN में "Group of 77" के माध्यम से विकासशील देशों की आवाज़।
  • भारत की सॉफ़्ट पावर में NAM की मानक भावना (UPSC 2023) — शांति, संप्रभु समानता, अहस्तक्षेप, उपनिवेश-विरोध की विरासत से "Global South की आवाज़" के रूप में भारत की विश्वसनीयता; आज "रणनीतिक स्वायत्तता" और "multi-alignment" में रूपांतरित।

शीत युद्धोत्तर व्यवस्था

  • एकध्रुवीय क्षण (चार्ल्स क्राउथैमर, 1990); फ़ुकुयामा का "End of History" बनाम हंटिंगटन का "Clash of Civilizations" (1993/1996)।
  • 9/11 और "war on terror", इराक़ युद्ध (2003); चीन का उदय, BRICS (2009; 2024 से विस्तार), "multipolarity"।
  • अमेरिकी आधिपत्य की सीमाएँ (UPSC 2023) — चीन का आर्थिक-सैन्य उदय, रूस की चुनौती, अफ़ग़ानिस्तान-इराक़ में विफलताएँ (2021 अफ़ग़ान वापसी), घरेलू ध्रुवीकरण और अलगाववादी झुकाव, डॉलर-प्रभुत्व को चुनौती (स्थानीय मुद्रा व्यापार), बहुपक्षीय संस्थाओं से दूरी, Global South की "multi-alignment"। भविष्य में सबसे प्रमुख — चीन से प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा और घरेलू राजनीतिक विभाजन।
  • NATO — अमेरिकी आधिपत्य का औज़ार? (UPSC 2024) — पक्ष: अमेरिका का प्रभुत्व (रक्षा व्यय का बड़ा भाग), पूर्व की ओर विस्तार (1999 से), "out of area" अभियान (कोसोवो 1999, अफ़ग़ानिस्तान, लीबिया 2011); विपक्ष: यूरोप की सामूहिक सुरक्षा की वास्तविक आवश्यकता (2022 के बाद फ़िनलैंड 2023 और स्वीडन 2024 का स्वेच्छा से शामिल होना), सहमति-आधारित निर्णय, यूरोपीय "रणनीतिक स्वायत्तता" की माँग।
  • रूस का विस्तारवाद (UPSC 2024) — जॉर्जिया (2008), क्रीमिया का विलय (2014), यूक्रेन पर आक्रमण (फ़रवरी 2022); पुतिन का "Russkiy Mir" और "Near Abroad" सिद्धांत; पर यह सोवियत पुनर्स्थापना से अधिक सुरक्षा-क्षेत्र (sphere of influence) और NATO-विरोध है (मियरशाइमर बनाम उदारवादी व्याख्या)।
  • निरस्त्रीकरण पर ख़तरा (UPSC 2024) — INF का अंत, New START का क्षरण और 2026 में समाप्ति, CTBT का लागू न होना, परमाणु धमकियाँ (रूस), चीन के परमाणु भंडार में तेज़ वृद्धि, उत्तर कोरिया, ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) का टूटना; हथियारों की नई होड़ — हाइपरसोनिक, AI, अंतरिक्ष। आशा — TPNW (2021 से लागू), जैविक-रासायनिक हथियार अभिसमय।

5. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का विकास

  • ब्रेटन वुड्स (1944) — IMF, IBRD (विश्व बैंक); डॉलर-स्वर्ण मानक (1971 में निक्सन शॉक से समाप्त); GATT (1947)।
  • NIEO (1974) — विकासशील देशों की न्यायपूर्ण आर्थिक व्यवस्था की माँग; उत्तर-दक्षिण संवाद।
  • WTO (1995, उरुग्वे दौर) — वस्तुएँ, सेवाएँ (GATS), बौद्धिक संपदा (TRIPS), विवाद निपटान; दोहा विकास दौर (2001) ठप।
  • WTO का पतन (UPSC 2024) — अपीलीय निकाय दिसंबर 2019 से निष्क्रिय (अमेरिका ने नियुक्तियाँ रोकीं), दोहा दौर की विफलता, एकतरफ़ा टैरिफ़ और प्रतिबंध (अमेरिका-चीन, 2025 के "reciprocal tariffs"), राष्ट्रीय सुरक्षा अपवाद (GATT अनु. XXI) का दुरुपयोग, क्षेत्रीय और मेगा-FTA, औद्योगिक सब्सिडी। GATT की "बहुपक्षीय, भेदभाव-रहित" भावना कमज़ोर हुई; सुधार — MPIA (अंतरिम अपील व्यवस्था), MC12 (2022) के मत्स्य सब्सिडी और TRIPS छूट निर्णय।
  • नए संस्थान — G20 (2008 से शिखर), AIIB (2016), New Development Bank (BRICS, 2015)।

6. संयुक्त राष्ट्र (United Nations)

  • चार्टर पर हस्ताक्षर — 26 जून 1945 (सैन फ़्रांसिस्को); स्थापना — 24 अक्टूबर 1945; 193 सदस्य।
  • छह प्रमुख अंग — महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक-सामाजिक परिषद, न्यास परिषद (1994 से निष्क्रिय), अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, सचिवालय।
अंगसंरचनाकार्य
सुरक्षा परिषद (UPSC 2023)15 सदस्य — 5 स्थायी (P5: अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस) वीटो सहित, 10 अस्थायी (2 वर्ष, महासभा द्वारा निर्वाचित, क्षेत्रीय आधार)अंतरराष्ट्रीय शांति-सुरक्षा की प्राथमिक ज़िम्मेदारी; अध्याय VI (शांतिपूर्ण समाधान), VII (प्रतिबंध, सैन्य कार्रवाई — बाध्यकारी); शांति स्थापना मिशन; नए सदस्यों और महासचिव की सिफ़ारिश; प्रक्रियात्मक मामलों में 9 मत, सारभूत में 9 मत + P5 का वीटो न होना
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय — ICJ (UPSC 2023)हेग; 15 न्यायाधीश, 9 वर्ष का कार्यकाल, महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा अलग-अलग पूर्ण बहुमत से निर्वाचितराज्यों के विवाद (contentious — दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक), परामर्शी राय (advisory); निर्णय बाध्यकारी पर प्रवर्तन सुरक्षा परिषद पर निर्भर; उदाहरण — कुलभूषण जाधव (भारत बनाम पाकिस्तान, 2019), दक्षिण अफ़्रीका बनाम इज़राइल (2024), जलवायु परिवर्तन पर परामर्शी राय (जुलाई 2025)
  • सुधार — सुरक्षा परिषद का विस्तार (G4 — भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान; अफ़्रीका का "Ezulwini Consensus"; "Uniting for Consensus"/Coffee Club का विरोध), वीटो का सीमितीकरण (2022 से वीटो के प्रयोग पर महासभा में बहस अनिवार्य — "veto initiative"), महासभा का पुनरुत्थान, शांति स्थापना सुधार।
  • शांति स्थापना — 1948 से; भारत शीर्ष योगदानकर्ताओं में (अब तक 2.75 लाख से अधिक सैनिक-पुलिसकर्मी, 50 से अधिक मिशनों में), पहली पूर्ण-महिला पुलिस इकाई (लाइबेरिया, 2007)।

7. विश्व राजनीति का क्षेत्रीयकरण

संगठनस्थापनासफलताचुनौतियाँ
EUECSC 1951, रोम संधि 1957, मास्ट्रिख्ट 1992 (EU), यूरो 1999/2002शांति (नोबेल 2012), एकल बाज़ार, साझा मुद्रा, अधिराष्ट्रीय संस्थाएँ, "Brussels effect" (GDPR)ब्रेक्ज़िट (2020), यूरोज़ोन संकट, प्रवासन, लोकलुभावनवाद, ऊर्जा निर्भरता
ASEAN1967, बैंकॉक घोषणा"ASEAN Way" — सहमति, अहस्तक्षेप; RCEP; क्षेत्रीय स्थिरतादक्षिण चीन सागर पर विभाजन, म्यांमार संकट
NAFTA → USMCANAFTA 1994; USMCA 2020व्यापार में भारी वृद्धिNAFTA की सीमाएँ — विनिर्माण नौकरियों का मैक्सिको जाना, कमज़ोर श्रम-पर्यावरण मानक, ISDS विवाद, डेयरी, डिजिटल व्यापार का अभाव
APEC1989खुला क्षेत्रवादबाध्यकारी नियमों का अभाव
SAARC1985, ढाकाSAFTA (2006)भारत-पाक तनाव; 2016 के बाद शिखर सम्मेलन नहीं
AU, SCO, BRICS2002, 2001, 2009क्षेत्रीय/वैकल्पिक मंचसदस्यों के विरोधी हित
NAFTA से USMCA — सुधार (UPSC 2024)
  • ऑटोमोबाइल के लिए rules of origin 62.5% से 75%; 40-45% हिस्सा 16 डॉलर/घंटा या अधिक वेतन वाले श्रमिकों से।
  • मैक्सिको में श्रम सुधार, लागू करने योग्य श्रम-पर्यावरण अध्याय, "Rapid Response Labor Mechanism"।
  • डिजिटल व्यापार और बौद्धिक संपदा अध्याय; कनाडा का डेयरी बाज़ार आंशिक रूप से खुला।
  • ISDS सीमित; sunset clause — 16 वर्ष, हर 6 वर्ष में संयुक्त समीक्षा (पहली समीक्षा 2026)।

8. समकालीन वैश्विक चिंताएँ

  • लोकतंत्र और मानवाधिकार — "democratic recession" (लैरी डायमंड), R2P (2005)।
  • पर्यावरण और मानव सुरक्षा (UPSC 2023) — जलवायु परिवर्तन से खाद्य असुरक्षा, जल-संकट, आपदाएँ, "जलवायु शरणार्थी" (बांग्लादेश, प्रशांत द्वीप — तुवालु-ऑस्ट्रेलिया Falepili संधि 2023), स्वास्थ्य जोखिम, संसाधन-संघर्ष (सहेल में चरवाहा-किसान संघर्ष, दारफ़ुर); UNFCCC, पेरिस समझौता (2015 — 1.5/2°C), "loss and damage" कोष (COP27-28)।
  • आतंकवाद — 9/11, ISIS; UN की व्यापक आतंकवाद अभिसमय (CCIT, भारत का 1996 प्रस्ताव) अभी तक अपनाया नहीं गया।
  • परमाणु प्रसार — NPT, ईरान, उत्तर कोरिया; परमाणु सुरक्षा।
  • महामारी (कोविड-19), साइबर सुरक्षा, AI शासन, प्रवासन।

9. Master Summary Table

सिद्धांतमुख्य इकाईव्यवस्था की प्रकृतिसहयोग की संभावनाविचारक
आदर्शवादराज्य + जनमतसुधार योग्यउच्च (संस्थाओं से)कांट, विल्सन
शास्त्रीय यथार्थवादराज्यशक्ति-संघर्ष (मानव स्वभाव)कममॉर्गेन्थाउ, कार
नव-यथार्थवादराज्यअराजक संरचनाकम (सापेक्ष लाभ की चिंता)वॉल्ट्ज़, मियरशाइमर
नव-उदार संस्थावादराज्य + संस्थाएँअराजक पर परस्पर निर्भरउच्च (निरपेक्ष लाभ)कोहेन, नाई
प्रकार्यवादतकनीकी संस्थाएँपरस्पर निर्भरता का जालक्रमिक spilloverमित्रानी, हास
मार्क्सवाद / विश्व-व्यवस्थावर्ग, core-peripheryपूँजीवादी विश्व-अर्थव्यवस्थाशोषणकारीवालरस्टीन, फ़्रैंक, कॉक्स
रचनावादपहचान, मानदंडसामाजिक रूप से निर्मितपहचान पर निर्भरवेंट
नारीवादलिंग, व्यक्तिपितृसत्तात्मकमानव सुरक्षा सेएनलो, टिकनर

10. Mind Map

अंतरराष्ट्रीय संबंध
सिद्धांत
  • आदर्शवाद, यथार्थवाद
  • उदारवाद, प्रकार्यवाद
  • मार्क्सवाद, विश्व-व्यवस्था
  • रचनावाद, नारीवाद
अवधारणाएँ
  • राष्ट्रीय हित, शक्ति संतुलन
  • सामूहिक सुरक्षा, निवारण
  • मानव सुरक्षा
व्यवस्था
  • शीत युद्ध, NAM
  • एकध्रुवीयता → बहुध्रुवीयता
  • रूस, NATO, निरस्त्रीकरण
अर्थव्यवस्था
  • ब्रेटन वुड्स, GATT → WTO
  • NIEO, G20, NDB
संस्थाएँ
  • UN — UNSC, ICJ, सुधार
  • EU, ASEAN, USMCA, SAARC

11. महत्वपूर्ण One-liners

  • Politics Among Nations (1948) — मॉर्गेन्थाउ; The Twenty Years' Crisis (1939) — ई.एच. कार।
  • Theory of International Politics (1979) — केनेथ वॉल्ट्ज़; The Tragedy of Great Power Politics (2001) — मियरशाइमर।
  • Balance of threat — स्टीफ़न वॉल्ट; security dilemma — जॉन हर्ज़।
  • A Working Peace System (1943) — डेविड मित्रानी; spillover — अर्न्स्ट हास।
  • World-systems theory (1974) — वालरस्टीन; "development of underdevelopment" — गुंडर फ़्रैंक।
  • "Theory is always for someone and for some purpose" — रॉबर्ट कॉक्स।
  • "Anarchy is what states make of it" — अलेक्ज़ेंडर वेंट; The Anarchical Society — हेडली बुल।
  • Soft power — जोसेफ़ नाई; complex interdependence — कोहेन-नाई।
  • Clash of Civilizations — हंटिंगटन; End of History — फ़ुकुयामा; unipolar moment — क्राउथैमर।
  • UN स्थापना — 24 अक्टूबर 1945; WTO — 1 जनवरी 1995; NAM बेलग्रेड — 1961।

12. टिप्स एवं ट्रिक्स

IR उत्तरों के लिए
  • सिद्धांत के प्रश्नों में भी समकालीन उदाहरण (यूक्रेन, गाज़ा, ताइवान) अवश्य दें।
  • "Comment" प्रश्नों में दो सिद्धांतों की दृष्टि से विश्लेषण — जैसे NATO पर यथार्थवादी और उदारवादी व्याख्या।
  • हर उत्तर का अंत भारत के दृष्टिकोण से — "India's interest/position"।

13. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2024 · Paper II · 1(b) · 10 अंक

विश्व-व्यवस्था सिद्धांत (World-Systems Theory) के केंद्रीय सिद्धांतों की व्याख्या कीजिए।

मॉडल उत्तर

भूमिका: इमैनुअल वालरस्टीन (The Modern World-System, 1974) ने निर्भरता सिद्धांत को ऐतिहासिक-वैश्विक स्तर पर विस्तार देकर यह सिद्धांत दिया।

केंद्रीय सिद्धांत: (1) विश्लेषण की इकाई राष्ट्र नहीं, "world-system" है; (2) 16वीं सदी से एक पूँजीवादी विश्व-अर्थव्यवस्था; (3) त्रि-स्तरीय विभाजन — core, periphery, semi-periphery; (4) असमान विनिमय द्वारा अधिशेष का परिधि से केंद्र की ओर प्रवाह; (5) semi-periphery स्थिरता देता है और उसमें गतिशीलता संभव; (6) आधिपत्य के चक्र और "Kondratieff waves"।

आलोचना: आर्थिक नियतिवाद, राज्य और संस्कृति की उपेक्षा, पूर्वी एशिया के उदय की व्याख्या में कठिनाई।

निष्कर्ष: भारत और चीन का semi-periphery से core की ओर बढ़ना इस सिद्धांत की गतिशीलता को दिखाता है; Global South की NIEO जैसी माँगें इसी विश्लेषण से प्रेरित हैं।

Q2UPSC 2023 · Paper II · 4(b)

आक्रामक और रक्षात्मक यथार्थवाद से आप क्या समझते हैं?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: दोनों संरचनात्मक यथार्थवाद की शाखाएँ हैं — अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अराजक है, राज्य तर्कसंगत और अस्तित्व-केंद्रित हैं।

रक्षात्मक यथार्थवाद: वॉल्ट्ज़, वॉल्ट, स्नाइडर, जर्विस — राज्य सुरक्षा अधिकतम करते हैं, शक्ति नहीं; अत्यधिक विस्तार दूसरों के संतुलन को जन्म देता है (balance of power/threat); "offence-defence balance" अधिकतर रक्षा के पक्ष में; युद्ध प्रायः घरेलू विकृतियों (सैन्यवाद) से।

आक्रामक यथार्थवाद: मियरशाइमर — दूसरों के इरादों की अनिश्चितता के कारण राज्य शक्ति अधिकतम करते हैं; हर महाशक्ति क्षेत्रीय आधिपत्य चाहती है और दूसरे क्षेत्रों में प्रतिद्वंद्वी आधिपत्य रोकती है ("offshore balancing"); इसलिए महाशक्ति राजनीति "त्रासदीपूर्ण" है।

उदाहरण: चीन का दक्षिण चीन सागर में विस्तार (आक्रामक दृष्टि); यूक्रेन पर मियरशाइमर का विश्लेषण; भारत का "credible minimum deterrence" (रक्षात्मक दृष्टि)।

निष्कर्ष: दोनों सिद्धांत महाशक्ति प्रतिस्पर्धा समझाने में उपयोगी हैं, पर पहचान, संस्थाओं और घरेलू राजनीति की उपेक्षा करते हैं — जिसकी पूर्ति रचनावाद और नव-शास्त्रीय यथार्थवाद करते हैं।

Q3UPSC 2023 · Paper II · 2(b)

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में प्रकार्यवादी उपागम वैश्विक राजनीति में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में किस प्रकार सहायक है?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: डेविड मित्रानी का प्रकार्यवाद मानता है कि शांति राजनीतिक संधियों से नहीं, बल्कि साझा आवश्यकताओं पर आधारित व्यावहारिक सहयोग के "जाल" से आती है।

तंत्र: (1) तकनीकी, गैर-विवादित क्षेत्रों में सहयोग — डाक, स्वास्थ्य, परिवहन; (2) "ramification" — सहयोग एक क्षेत्र से दूसरे में; (3) निष्ठाओं का राष्ट्र से प्रकार्यात्मक संस्थाओं की ओर स्थानांतरण; (4) परस्पर निर्भरता युद्ध की लागत बढ़ाती है।

उदाहरण: UN की विशिष्ट एजेंसियाँ (WHO का चेचक उन्मूलन, ICAO, UPU), ECSC से EU — "फ़्रांस और जर्मनी के बीच युद्ध भौतिक रूप से असंभव" (शुमन घोषणा 1950); मेकांग नदी आयोग, सिंधु जल संधि (1960) का दीर्घकालिक संचालन।

सीमाएँ: "high politics" में spillover कठिन; राष्ट्रवाद और संप्रभुता की राजनीति (ब्रेक्ज़िट); महाशक्ति प्रतिस्पर्धा तकनीकी संस्थाओं को भी राजनीतिक बना देती है (WHO पर कोविड विवाद)।

निष्कर्ष: प्रकार्यवाद पूर्ण शांति की गारंटी नहीं, पर संघर्ष की संभावना घटाने और विश्वास-निर्माण का प्रभावी मार्ग है — जलवायु, स्वास्थ्य और डिजिटल शासन में आज भी प्रासंगिक।

Q4UPSC 2024 · Paper II · 4(b)

व्यापार अवरोधों और आर्थिक प्रतिबंधों की वापसी ने GATT की भावना को कम कर दिया है। इस संदर्भ में हाल के समय में WTO के पतन के कारक बताइए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: GATT (1947) और WTO (1995) की मूल भावना — बहुपक्षीयता, MFN और राष्ट्रीय व्यवहार (भेदभाव-रहितता), पारदर्शिता, विवादों का नियम-आधारित समाधान।

पतन के कारक: (1) अपीलीय निकाय दिसंबर 2019 से निष्क्रिय; (2) दोहा दौर का ठहराव — कृषि सब्सिडी, विशेष और विभेदक व्यवहार पर उत्तर-दक्षिण मतभेद; (3) अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर टैरिफ़ और निर्यात नियंत्रण (अनु. XXI का दुरुपयोग); (4) रूस पर व्यापक प्रतिबंध; (5) औद्योगिक नीति और सब्सिडी की होड़ (IRA, CHIPS); (6) मेगा-क्षेत्रीय समझौते (CPTPP, RCEP); (7) सर्वसम्मति-आधारित निर्णय-प्रक्रिया की जड़ता; (8) ई-कॉमर्स, पर्यावरण जैसे नए मुद्दों पर नियमों का अभाव।

सुधार के प्रयास: MPIA, MC12 (2022) — मत्स्य सब्सिडी समझौता, TRIPS छूट; MC13 (अबू धाबी 2024) में सीमित प्रगति।

निष्कर्ष: WTO "मृत" नहीं, पर कमज़ोर है; भारत जैसे विकासशील देशों के लिए नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था सबसे सुरक्षित है, इसलिए विवाद-निपटान की बहाली और विकास-केंद्रित सुधार आवश्यक हैं।

Q5UPSC 2024 · Paper II · 4(c)

क्या आप सहमत हैं कि EU अब तक क्षेत्रीय एकीकरण का सबसे सफल प्रयोग सिद्ध हुआ है? इसकी सफलताओं और हाल की चुनौतियों का विवरण दीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: EU दो विश्व युद्धों से तबाह यूरोप में शांति और समृद्धि के लिए शुरू हुआ एकीकरण है — प्रकार्यवाद/नव-प्रकार्यवाद का सबसे सफल प्रयोग।

सफलताएँ: सदस्यों के बीच युद्ध असंभव (नोबेल शांति पुरस्कार 2012); एकल बाज़ार और चार स्वतंत्रताएँ (वस्तु, सेवा, पूँजी, लोग); यूरो; अधिराष्ट्रीय संस्थाएँ (आयोग, संसद, न्यायालय); शेंगेन; पूर्वी यूरोप का लोकतांत्रिक एकीकरण; "Brussels effect" — वैश्विक नियम-निर्माता (GDPR, AI Act 2024); कोविड रिकवरी कोष (NextGenerationEU — साझा ऋण)।

चुनौतियाँ: ब्रेक्ज़िट (2020), यूरोज़ोन ऋण संकट (ग्रीस), 2015 का प्रवासन संकट, हंगरी-पोलैंड में "rule of law" विवाद, लोकलुभावन दलों का उदय, रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा संकट, अमेरिकी टैरिफ़ और रक्षा पर निर्भरता, चीन से प्रतिस्पर्धा।

तुलना: ASEAN (सहमति आधारित, कमज़ोर संस्थाएँ), SAARC (लगभग निष्क्रिय), AU (उभरता) — इनकी तुलना में EU का एकीकरण कहीं गहरा।

निष्कर्ष: हाँ, EU सबसे सफल क्षेत्रीय प्रयोग है, पर "ever closer union" की गति धीमी हुई है; भारत के लिए EU एक महत्वपूर्ण साझेदार है — भारत-EU व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (2023) और FTA वार्ताएँ।

Q6UPSC 2023 · Paper II · 1(e) · 10 अंक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना और कार्यों की चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर

संरचना: 15 सदस्य — 5 स्थायी (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस) वीटो सहित; 10 अस्थायी, दो वर्ष के लिए महासभा द्वारा दो-तिहाई बहुमत से निर्वाचित, क्षेत्रीय वितरण (अफ़्रीका 3, एशिया-प्रशांत 2, लैटिन अमेरिका 2, पश्चिमी यूरोप व अन्य 2, पूर्वी यूरोप 1); अध्यक्षता मासिक रोटेशन। भारत 8 बार अस्थायी सदस्य (अंतिम 2021-22)।

कार्य: अंतरराष्ट्रीय शांति-सुरक्षा की प्राथमिक ज़िम्मेदारी (अनु. 24); विवादों की जाँच और शांतिपूर्ण समाधान (अध्याय VI); ख़तरे का निर्धारण और प्रतिबंध, सैन्य कार्रवाई (अध्याय VII — बाध्यकारी, अनु. 25); शांति स्थापना मिशन; नए सदस्यों, महासचिव की नियुक्ति की सिफ़ारिश; ICJ न्यायाधीशों का चुनाव (महासभा के साथ); ICJ निर्णयों का प्रवर्तन।

मूल्यांकन: वीटो के कारण यूक्रेन, गाज़ा, सीरिया पर निष्क्रियता; 1945 की शक्ति-संरचना; अफ़्रीका-लैटिन अमेरिका का स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं।

निष्कर्ष: सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता के लिए विस्तार और वीटो-सीमन आवश्यक — भारत G4 के माध्यम से स्थायी सदस्यता का दावेदार है।

14. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • सिद्धांत — आदर्शवाद (कांट, विल्सन); यथार्थवाद (मॉर्गेन्थाउ → वॉल्ट्ज़ → मियरशाइमर); उदारवाद (कोहेन-नाई); प्रकार्यवाद (मित्रानी, हास); मार्क्सवाद (वालरस्टीन, कॉक्स); रचनावाद (वेंट); नारीवाद (एनलो, टिकनर)।
  • अवधारणाएँ — राष्ट्रीय हित, शक्ति संतुलन, सामूहिक सुरक्षा, निवारण, मानव सुरक्षा।
  • व्यवस्था — शीत युद्ध, NAM (बांडुंग 1955, बेलग्रेड 1961), एकध्रुवीयता, बहुध्रुवीयता; अमेरिकी आधिपत्य की सीमाएँ; रूस, NATO; निरस्त्रीकरण संकट।
  • अर्थव्यवस्था — ब्रेटन वुड्स, GATT, NIEO, WTO (1995) और उसका संकट।
  • UN — 6 अंग; UNSC (15 सदस्य, P5 वीटो), ICJ (15 न्यायाधीश, 9 वर्ष); सुधार।
  • क्षेत्रवाद — EU, ASEAN, NAFTA → USMCA, SAARC, APEC; समकालीन चिंताएँ — पर्यावरण, आतंकवाद, मानवाधिकार, परमाणु प्रसार।