1. अध्याय एक नज़र में
PSIR Paper I के Section A का अंतिम unit है — Western Political Thought: Plato, Aristotle, Machiavelli, Hobbes, Locke, John S. Mill, Marx, Gramsci, Hannah Arendt। ये नौ नाम आधिकारिक syllabus में दर्ज हैं और लगभग हर वर्ष इनमें से दो-तीन पर प्रश्न आता है। 2023 में हॉब्स ("state of nature as state of war") और मिल (स्त्री-अधीनता), 2024 में लॉक (क्रांति) और प्लेटो (प्रत्यय सिद्धांत) पूछे गए। मार्क्स और ग्राम्शी के विस्तृत विचार पिछले अध्यायों में हैं; यहाँ उनका सार और तुलना दी गई है।
- मुख्य ग्रंथ और प्रकाशन वर्ष।
- 3-4 केंद्रीय अवधारणाएँ और उनका तर्क।
- एक प्रसिद्ध उद्धरण (अंग्रेज़ी में), जो उत्तर को प्रामाणिक बनाता है।
- आलोचना और समकालीन/भारतीय प्रासंगिकता।
2. प्लेटो (427–347 ई.पू.)
ग्रंथ — The Republic, The Statesman, The Laws। सुकरात के शिष्य; एथेंस के लोकतंत्र ने सुकरात को मृत्युदंड दिया, इसलिए प्लेटो लोकतंत्र के आलोचक बने।
- प्रत्यय (Forms/Ideas) का सिद्धांत — दृश्य जगत परिवर्तनशील, अपूर्ण "छाया" है; वास्तविक सत्य अपरिवर्तनशील प्रत्ययों का जगत है जिसे केवल तर्कबुद्धि से जाना जा सकता है; सर्वोच्च प्रत्यय "शुभ" (the Good)। गुफा का रूपक — कैदी दीवार पर छायाएँ देखकर उन्हें सत्य मानते हैं; दार्शनिक गुफा से निकलकर सूर्य (शुभ) देखता है।
- न्याय — आत्मा के तीन अंग (तर्क, साहस/उत्साह, क्षुधा) और समाज के तीन वर्ग (शासक-दार्शनिक, सैनिक-संरक्षक, उत्पादक) — हर अंग/वर्ग का अपना कार्य करना और दूसरे में हस्तक्षेप न करना ही न्याय है।
- दार्शनिक-राजा — "जब तक दार्शनिक राजा या राजा दार्शनिक नहीं होंगे, नगर-राज्यों की बुराइयाँ समाप्त नहीं होंगी।"
- शिक्षा — राज्य-नियंत्रित, क्रमिक (50 वर्ष तक); साम्यवाद — संरक्षक वर्ग के लिए संपत्ति और परिवार का साम्यवाद (निजी हित से भ्रष्टाचार न हो); स्त्रियों को भी संरक्षक बनने का अवसर।
- राज्यों का पतन क्रम — आदर्श राज्य → तिमोक्रेसी → अल्पतंत्र → लोकतंत्र → निरंकुशता।
- आलोचना — अरस्तू: प्रत्यय अमूर्त और वस्तुओं से अलग नहीं हो सकते (Third Man argument); अत्यधिक एकता राज्य को परिवार और फिर व्यक्ति में बदल देगी; कार्ल पॉपर (The Open Society and its Enemies, 1945): प्लेटो सर्वसत्तावाद का अग्रदूत।
3. अरस्तू (384–322 ई.पू.)
ग्रंथ — Politics, Nicomachean Ethics। "राजनीति विज्ञान के जनक"; 158 संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन।
- "Man is by nature a political animal"; राज्य स्वाभाविक है — परिवार → गाँव → पोलिस; राज्य "अच्छे जीवन" के लिए अस्तित्व में है।
- कार्य-कारण सिद्धांत — भौतिक, औपचारिक, क्रियात्मक, अंतिम (final) कारण; राज्य का अंतिम कारण नैतिक जीवन।
- संविधानों का वर्गीकरण — शासकों की संख्या (एक, कुछ, अनेक) और उद्देश्य (सामान्य हित या स्वार्थ):
| शासक | शुद्ध रूप (सामान्य हित) | विकृत रूप (स्वार्थ) |
|---|---|---|
| एक | राजतंत्र (Monarchy) | निरंकुशता (Tyranny) |
| कुछ | कुलीनतंत्र (Aristocracy) | अल्पतंत्र (Oligarchy) |
| अनेक | Polity (मिश्रित संविधान) | लोकतंत्र (Democracy — गरीबों का शासन) |
- Polity — मध्यम वर्ग का शासन, अल्पतंत्र और लोकतंत्र का मिश्रण — सबसे व्यावहारिक और स्थिर; "golden mean"।
- क्रांति के कारण — असमानता की भावना सबसे बड़ा कारण; रोकथाम के उपाय — क़ानून का पालन, मध्यम वर्ग को मज़बूत करना, शिक्षा।
- न्याय — वितरणात्मक (आनुपातिक) और सुधारात्मक; दास-प्रथा और स्त्री की अधीनता का समर्थन — प्रमुख आलोचना।
- प्लेटो से अंतर — आदर्शवाद बनाम यथार्थवाद; निगमन बनाम आगमन; संपत्ति-परिवार के साम्यवाद का विरोध — "जो सबका होता है उसकी चिंता किसी को नहीं होती"।
4. निकोलो मैकियावेली (1469–1527)
ग्रंथ — The Prince (1513, प्रकाशित 1532), Discourses on Livy। "आधुनिक राजनीति विज्ञान के जनक"।
- राजनीति का नैतिकता और धर्म से पृथक्करण — राजनीति अपने नियमों से चलती है; राज्य की रक्षा सर्वोच्च लक्ष्य ("reason of state")।
- मानव स्वभाव — मनुष्य "कृतघ्न, चंचल, झूठे, कायर और लालची" हैं; इसलिए राजकुमार को "प्रिय होने से अधिक भय पैदा करने वाला" होना चाहिए, पर घृणा का पात्र नहीं।
- सिंह और लोमड़ी — राजकुमार को सिंह की शक्ति और लोमड़ी की चालाकी दोनों चाहिए।
- Virtù और Fortuna — virtù (साहस, कौशल, दूरदर्शिता) से fortuna (भाग्य) पर नियंत्रण।
- दोहरी नैतिकता — शासक के लिए राज्य-हित की नैतिकता, नागरिक के लिए सामान्य नैतिकता; "साध्य साधन को उचित ठहराता है" (उनके नाम से प्रचलित सूत्र)।
- Discourses में गणतंत्र का समर्थन — नागरिक सद्गुण, मिश्रित सरकार; इसलिए उन्हें "रिपब्लिकन" भी कहा जाता है।
- कौटिल्य से तुलना — दोनों यथार्थवादी; पर कौटिल्य का राजा धर्म और लोक-कल्याण से बँधा।
5. थॉमस हॉब्स (1588–1679)
ग्रंथ — Leviathan (1651); अंग्रेज़ी गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि।
- मानव स्वभाव — यांत्रिक-भौतिकवादी दृष्टि; मनुष्य स्वार्थी, शक्ति की "निरंतर और बेचैन इच्छा" वाला; भय और आत्म-संरक्षण मूल प्रेरक।
- प्राकृतिक अवस्था = युद्ध की अवस्था (UPSC 2023) — कोई साझा शक्ति न होने पर "war of every man against every man"; जीवन "solitary, poor, nasty, brutish and short"; संघर्ष के तीन कारण — प्रतिस्पर्धा (competition), अविश्वास (diffidence), यश (glory)। यहाँ उद्योग, कला, समाज संभव नहीं।
- प्राकृतिक क़ानून — तर्कबुद्धि के निर्देश: शांति खोजो; शांति के लिए अपने अधिकार छोड़ो।
- सामाजिक समझौता — सभी व्यक्ति आपस में अनुबंध करके अपने अधिकार एक संप्रभु (व्यक्ति या सभा) को सौंपते हैं; संप्रभु अनुबंध का पक्ष नहीं — इसलिए निरपेक्ष; संप्रभु "Leviathan" — "mortal god"।
- अपवाद — आत्म-रक्षा का अधिकार अहस्तांतरणीय; यदि संप्रभु रक्षा न कर सके तो आज्ञापालन का दायित्व समाप्त।
- व्यक्तिवाद और निरंकुशता — विरोधाभास नहीं: व्यक्ति के आत्म-संरक्षण के लिए ही निरपेक्ष राज्य; इसलिए हॉब्स को "उदारवाद का जनक" भी कहा गया (सी.बी. मैकफ़र्सन — "possessive individualism")।
6. जॉन लॉक (1632–1704)
ग्रंथ — Two Treatises of Government (1689), A Letter Concerning Toleration; 1688 की गौरवपूर्ण क्रांति के सैद्धांतिक प्रवक्ता। "उदारवाद के जनक"।
- प्राकृतिक अवस्था — शांति, सद्भाव और प्राकृतिक क़ानून की अवस्था; पर तीन कमियाँ — स्थापित क़ानून, निष्पक्ष न्यायाधीश और दंड लागू करने वाली शक्ति का अभाव।
- प्राकृतिक अधिकार — जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति ("property" व्यापक अर्थ में)।
- संपत्ति का श्रम सिद्धांत — प्रकृति में अपना श्रम मिलाने से वस्तु व्यक्ति की संपत्ति बनती है; सीमा — बर्बादी न हो और दूसरों के लिए "enough and as good" बचे (बाद में धन के आविष्कार से असीम संचय उचित ठहराया — मैकफ़र्सन की आलोचना)।
- दो समझौते — समाज बनाने का और सरकार को सीमित शक्ति सौंपने का; सरकार एक न्यास (trust) है।
- सीमित सरकार और शक्ति-विभाजन — विधायिका सर्वोच्च पर सीमित; कार्यपालिका, संघीय (विदेश) शक्ति।
- क्रांति का अधिकार (UPSC 2024) — जब सरकार न्यास भंग करे, जनता के अधिकारों का उल्लंघन करे, तो जनता "appeal to heaven" कर सरकार बदल सकती है; क्रांति अंतिम उपाय, और "विद्रोह" वास्तव में शासक करता है जो संविधान तोड़ता है। प्रभाव — अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा (1776)।
- धार्मिक सहिष्णुता — चर्च और राज्य का पृथक्करण (कैथोलिकों और नास्तिकों को छोड़कर)।
| आधार | हॉब्स | लॉक | रूसो |
|---|---|---|---|
| मानव स्वभाव | स्वार्थी, भयभीत | तर्कशील, सहयोगी | "noble savage", सहानुभूतिपूर्ण |
| प्राकृतिक अवस्था | युद्ध की अवस्था | शांति, पर असुविधाजनक | आदर्श, निजी संपत्ति से पतन |
| समझौता | एक — संप्रभु को सब अधिकार | दो — समाज और सरकार | एक — सामान्य इच्छा |
| संप्रभुता | निरपेक्ष शासक | सीमित, जनता में अंतिम | जनता में (सामान्य इच्छा) |
| क्रांति | नहीं (आत्मरक्षा छोड़कर) | हाँ, न्यास भंग पर | सामान्य इच्छा के विरुद्ध शासन पर |
| ग्रंथ | Leviathan (1651) | Two Treatises (1689) | Social Contract (1762) |
7. जॉन स्टुअर्ट मिल (1806–1873)
ग्रंथ — On Liberty (1859), Considerations on Representative Government (1861), Utilitarianism (1863), The Subjection of Women (1869)।
- गुणात्मक उपयोगितावाद — बेंथम की "मात्रा" के स्थान पर सुख की "गुणवत्ता"; "It is better to be a human being dissatisfied than a pig satisfied; better to be Socrates dissatisfied than a fool satisfied."
- स्वतंत्रता — harm principle; self-regarding बनाम other-regarding कार्य; विचार-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तर्क — दबाया गया विचार सत्य हो सकता है, आंशिक सत्य हो सकता है, असत्य से टकराकर सत्य जीवंत रहता है।
- "बहुमत का अत्याचार" (tyranny of the majority) — टॉकविल से लिया विचार; सामाजिक रीति-रिवाज़ का दबाव भी स्वतंत्रता का शत्रु।
- प्रतिनिधि सरकार — सर्वश्रेष्ठ शासन; आनुपातिक प्रतिनिधित्व (हेयर पद्धति), बहु-मतदान (शिक्षितों को अधिक वोट), महिलाओं का मताधिकार; पर उपनिवेशों के लिए "उदार निरंकुशता"।
- स्त्री-अधीनता (UPSC 2023 का उद्धरण) — "The legal subordination of one sex to another is wrong in itself, and now one of the chief hindrances to human improvement"; विवाह को समान साझेदारी, स्त्री की शिक्षा और रोज़गार; हैरियट टेलर मिल का प्रभाव।
- आलोचना — "हिचकिचाता लोकतंत्रवादी" (reluctant democrat), अभिजनवादी, उपनिवेशवाद का समर्थक; self/other-regarding का भेद अस्पष्ट।
8. मार्क्स और ग्राम्शी (सार)
- मार्क्स — ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग संघर्ष, अतिरिक्त मूल्य, अलगाव, राज्य वर्ग-उपकरण, सर्वहारा अधिनायकत्व, राज्य का लोप (विस्तार — अध्याय 1 और 3)।
- ग्राम्शी (Prison Notebooks) — hegemony, civil society, organic intellectuals, war of position, "historic bloc", "pessimism of the intellect, optimism of the will"।
- तुलना — मार्क्स आर्थिक आधार पर बल देते हैं; ग्राम्शी अधिरचना (संस्कृति, विचारधारा) की स्वायत्त भूमिका दिखाते हैं — इसलिए "superstructure का मार्क्सवादी"।
9. हन्ना आरेंट (1906–1975)
ग्रंथ — The Origins of Totalitarianism (1951), The Human Condition (1958), Eichmann in Jerusalem (1963), On Revolution (1963), On Violence (1970)।
- Vita activa के तीन रूप — Labour (जैविक आवश्यकता, जीवन-निर्वाह), Work (स्थायी वस्तुओं का निर्माण), Action (सार्वजनिक क्षेत्र में शब्द और कर्म से "नई शुरुआत" — natality); राजनीति का सार action है।
- सार्वजनिक क्षेत्र का क्षरण — आधुनिकता में "सामाजिक" (आर्थिक) ने "राजनीतिक" को निगल लिया।
- सर्वसत्तावाद — नया शासन-रूप; यहूदी-विरोध, साम्राज्यवाद, जन-समाज (atomised masses), विचारधारा और आतंक; नाज़ीवाद और स्टालिनवाद दोनों।
- "Banality of evil" — आइकमैन जैसे साधारण नौकरशाह "विचारहीनता" (thoughtlessness) से जघन्य अपराध करते हैं।
- शक्ति बनाम हिंसा — शक्ति सामूहिक कार्य की क्षमता (सहमति), हिंसा साधन-आधारित; "हिंसा शक्ति को नष्ट कर सकती है, बना नहीं सकती।"
- क्रांति — अमेरिकी क्रांति (स्वतंत्रता की स्थापना) फ़्रांसीसी क्रांति (सामाजिक प्रश्न, गरीबी) से अधिक सफल; परिषद् प्रणाली (council system) की प्रशंसा।
10. Master Summary Table
| चिंतक | प्रमुख ग्रंथ | केंद्रीय अवधारणाएँ | प्रसिद्ध कथन |
|---|---|---|---|
| प्लेटो | Republic | प्रत्यय, न्याय, दार्शनिक-राजा, साम्यवाद | Philosopher kings |
| अरस्तू | Politics | राज्य स्वाभाविक, polity, क्रांति, golden mean | Man is a political animal |
| मैकियावेली | The Prince | राजनीति-नैतिकता पृथक्करण, virtù, fortuna | Better to be feared than loved |
| हॉब्स | Leviathan | युद्ध की प्राकृतिक अवस्था, निरपेक्ष संप्रभु | Solitary, poor, nasty, brutish and short |
| लॉक | Two Treatises | प्राकृतिक अधिकार, संपत्ति, न्यास, क्रांति | Appeal to heaven |
| जे.एस. मिल | On Liberty | harm principle, बहुमत का अत्याचार, स्त्री-समानता | Socrates dissatisfied |
| मार्क्स | Manifesto, Capital | वर्ग संघर्ष, अतिरिक्त मूल्य, अलगाव | Workers of the world, unite! |
| ग्राम्शी | Prison Notebooks | hegemony, civil society, organic intellectual | Pessimism of the intellect, optimism of the will |
| आरेंट | The Human Condition | action, सर्वसत्तावाद, banality of evil | Power and violence are opposites |
11. समय-रेखा (Timeline Chart)
12. Mind Map
- प्लेटो — आदर्शवाद, न्याय
- अरस्तू — यथार्थवाद, polity
- मैकियावेली — राज्य-हित
- virtù, fortuna
- हॉब्स — निरपेक्ष संप्रभु
- लॉक — सीमित सरकार
- (रूसो — सामान्य इच्छा)
- मिल — स्वतंत्रता, प्रतिनिधि सरकार
- स्त्री-समानता
- मार्क्स — वर्ग संघर्ष
- ग्राम्शी — hegemony
- आरेंट — action, सर्वसत्तावाद
13. महत्वपूर्ण One-liners
- गुफा का रूपक, दार्शनिक-राजा, आत्मा के तीन अंग — प्लेटो।
- प्लेटो को "open society का शत्रु" — कार्ल पॉपर (1945)।
- 158 संविधानों का अध्ययन; "राजनीति विज्ञान के जनक" — अरस्तू।
- "राजनीति को नैतिकता से अलग करने वाले पहले चिंतक" — मैकियावेली।
- Competition, diffidence, glory — संघर्ष के तीन कारण — हॉब्स।
- Possessive individualism — सी.बी. मैकफ़र्सन (हॉब्स-लॉक की व्याख्या)।
- Labour theory of property; "enough and as good" — लॉक।
- Tyranny of the majority; harm principle — जे.एस. मिल।
- The Subjection of Women (1869) — जे.एस. मिल।
- Historic bloc; war of position — ग्राम्शी।
- Labour, work, action; natality; banality of evil — हन्ना आरेंट।
14. टिप्स एवं ट्रिक्स
- उद्धरण से शुरुआत करें, पर उद्धरण के बाद उसकी व्याख्या अनिवार्य है।
- हर चिंतक को उसके ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ें — हॉब्स (गृहयुद्ध), लॉक (1688), मैकियावेली (विखंडित इटली)।
- तुलना (हॉब्स-लॉक-रूसो, प्लेटो-अरस्तू) को तालिका में रखें — कम शब्दों में अधिक अंक।
- अंत में समकालीन प्रासंगिकता — लॉक के क्रांति-अधिकार से आधुनिक नागरिक अवज्ञा; मिल से सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता; आरेंट से ध्रुवीकरण और "post-truth"।
नौ चिंतक क्रम में — "प्ला-अर-मै-हॉ-लॉ-मि-मा-ग्रा-आ" (प्लेटो, अरस्तू, मैकियावेली, हॉब्स, लॉक, मिल, मार्क्स, ग्राम्शी, आरेंट)।
15. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
युद्ध की अवस्था के रूप में प्राकृतिक अवस्था (हॉब्स) — टिप्पणी कीजिए।
मॉडल उत्तर
भूमिका: Leviathan (1651) में हॉब्स ने राज्य-पूर्व "प्राकृतिक अवस्था" की कल्पना की, जिसका उद्देश्य निरपेक्ष संप्रभु की आवश्यकता सिद्ध करना था।
तर्क: (1) मनुष्य स्वभाव से स्वार्थी है और "शक्ति के बाद शक्ति" चाहता है; (2) सभी लगभग समान हैं — कमज़ोर भी चालाकी से बलवान को मार सकता है; (3) संघर्ष के तीन कारण — प्रतिस्पर्धा, अविश्वास, यश; (4) इसलिए "हर व्यक्ति का हर व्यक्ति से युद्ध" — युद्ध केवल लड़ाई नहीं, लड़ने की तत्परता भी है; (5) परिणाम — न उद्योग, न कृषि, न ज्ञान; जीवन "एकाकी, दरिद्र, घृणित, पाशविक और अल्पायु"।
महत्व और आलोचना: यह तार्किक कल्पना है, ऐतिहासिक नहीं; लॉक ने इसे अतिरंजित माना, रूसो ने कहा हॉब्स ने सभ्य मनुष्य की बुराइयाँ प्राकृतिक मनुष्य पर थोप दीं। फिर भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों का यथार्थवाद (अराजक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था) इसी "हॉब्सियन" चित्र पर टिका है।
क्रांति पर लॉक के विचार — लगभग 150 शब्दों में।
मॉडल उत्तर
भूमिका: लॉक के अनुसार सरकार जनता की सहमति से बना एक न्यास (trust) है, जिसका उद्देश्य जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा है।
क्रांति का अधिकार कब: (1) जब विधायिका जनता की संपत्ति बिना सहमति ले, मनमाने क़ानून बनाए; (2) जब कार्यपालिका विधायिका को भंग करे या चुनाव रोके; (3) जब शासक विदेशी सत्ता को सौंप दे। तब सरकार "विघटित" मानी जाती है और शक्ति जनता को लौटती है — "appeal to heaven"।
सीमाएँ: क्रांति अंतिम उपाय; छोटी-मोटी ग़लतियों पर नहीं, "लंबी दुर्व्यवहार-श्रृंखला" पर; लॉक के अनुसार असली विद्रोही वह शासक है जो संविधान तोड़ता है।
निष्कर्ष: यह विचार 1688 की क्रांति का औचित्य था और अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा (1776) का आधार बना; आधुनिक लोकतंत्र में यह अधिकार चुनाव, न्यायिक पुनरावलोकन और शांतिपूर्ण विरोध के रूप में संस्थागत हो गया है।
प्लेटो के प्रत्यय सिद्धांत (Theory of Forms) का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: प्लेटो के अनुसार हमारा इंद्रिय-जगत परिवर्तनशील और अपूर्ण है; उसके पीछे शाश्वत, अपरिवर्तनशील "प्रत्ययों" का जगत है जो वास्तविक है।
मुख्य बिंदु: (1) हर वस्तु प्रत्यय की अपूर्ण प्रतिलिपि; (2) ज्ञान बनाम मत — प्रत्ययों का ज्ञान तर्क से, वस्तुओं का केवल "मत"; (3) सर्वोच्च प्रत्यय "शुभ" — सूर्य का रूपक; (4) गुफा का रूपक — शिक्षा अंधकार से प्रकाश की यात्रा; (5) राजनीतिक परिणाम — केवल शुभ को जानने वाला दार्शनिक ही शासन योग्य।
आलोचना: (1) अरस्तू — प्रत्यय वस्तुओं से अलग नहीं, उन्हीं में निहित; "Third Man" अनंत प्रतिगमन; (2) अनुभवजन्य जगत की उपेक्षा; (3) राजनीतिक रूप से अभिजनवादी और सर्वसत्तावादी परिणाम (पॉपर); (4) सत्य पर एकाधिकार का दावा लोकतांत्रिक बहुलता के विरुद्ध।
प्रासंगिकता: मानक राजनीतिक सिद्धांत का आधार — "क्या होना चाहिए" का आदर्श; विशेषज्ञ-शासन (technocracy) की बहस में प्लेटो की गूँज।
निष्कर्ष: प्रत्यय सिद्धांत दार्शनिक रूप से प्रभावशाली, पर राजनीतिक रूप से ख़तरनाक निष्कर्षों की ओर ले जा सकता है — इसलिए उसे आदर्श की प्रेरणा के रूप में, शासन के ब्लूप्रिंट के रूप में नहीं, पढ़ना चाहिए।
"एक लिंग की दूसरे के प्रति विधिक अधीनता अपने-आप में ग़लत है और अब मानव-विकास की प्रमुख बाधाओं में से एक है।" (जे.एस. मिल) — टिप्पणी कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: यह कथन मिल की The Subjection of Women (1869) से है, जो उदार नारीवाद का आधार-ग्रंथ है।
मिल के तर्क: (1) स्त्री की अधीनता प्रकृति नहीं, बल के इतिहास और रीति-रिवाज़ की उपज है; (2) "स्त्री का स्वभाव" कृत्रिम रूप से गढ़ा गया — उसे स्वतंत्र विकास का अवसर नहीं मिला; (3) विवाह में स्त्री की स्थिति दासता जैसी — पत्नी की संपत्ति और शरीर पर पति का अधिकार; (4) उपयोगितावादी तर्क — आधी मानवता की प्रतिभा व्यर्थ जाती है; (5) समाधान — समान शिक्षा, रोज़गार, मताधिकार, विवाह को मित्रता/साझेदारी बनाना। मिल ने 1866-67 में संसद में स्त्री मताधिकार का प्रस्ताव रखा।
आलोचना: रेडिकल नारीवादियों के अनुसार मिल ने घरेलू श्रम-विभाजन को चुनौती नहीं दी (विवाहित स्त्री का घर संभालना "स्वाभाविक" चुनाव); केवल क़ानूनी समानता पर्याप्त नहीं।
निष्कर्ष: भारत में संविधान (अनु. 14, 15), हिंदू उत्तराधिकार संशोधन 2005, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 और नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 मिल के विचार की दिशा में कदम हैं; पर सामाजिक मानसिकता का बदलना अभी शेष है।
"हॉब्स की निरंकुशतावादी विचारधारा में व्यक्तिवाद अंतर्निहित है।" परीक्षण कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: हॉब्स निरपेक्ष संप्रभु का समर्थक है, फिर भी उसके सिद्धांत की शुरुआत और अंत व्यक्ति पर है — यही विरोधाभास-सा दिखने वाला तथ्य प्रश्न का केंद्र है।
व्यक्तिवाद के तत्व: (1) विश्लेषण का आधार व्यक्ति — समाज व्यक्तियों का योग; (2) व्यक्ति की समानता; (3) राज्य व्यक्ति की सहमति (समझौते) से बना; (4) राज्य का उद्देश्य व्यक्ति का आत्म-संरक्षण; (5) आत्म-रक्षा का अधिकार अहस्तांतरणीय; (6) क़ानून के मौन क्षेत्र में व्यक्ति स्वतंत्र।
निरंकुशता के तत्व: संप्रभु अविभाज्य, असीम, अनुबंध से परे; धर्म, संपत्ति, विचार पर नियंत्रण।
विश्लेषण: सेबाइन — हॉब्स "उदारवादी परिणामों वाला निरंकुशतावादी"; मैकफ़र्सन — बाज़ार समाज का "possessive individualism"। निरंकुशता साधन है, व्यक्ति की सुरक्षा साध्य।
निष्कर्ष: इसलिए हॉब्स आधुनिक उदारवाद की नींव में भी है — लॉक ने उसी व्यक्तिवादी आधार पर सीमित सरकार का सिद्धांत बनाया।
16. Quick Revision Summary
- प्लेटो — प्रत्यय, गुफा, न्याय (अपना कार्य), दार्शनिक-राजा, संरक्षक-साम्यवाद; पॉपर की आलोचना।
- अरस्तू — राजनीतिक प्राणी, 6 संविधान, polity (मध्यम वर्ग), क्रांति के कारण, दास-प्रथा का समर्थन।
- मैकियावेली — राजनीति-नैतिकता का पृथक्करण, सिंह-लोमड़ी, virtù-fortuna, Discourses में गणतंत्र।
- हॉब्स — युद्ध की अवस्था (3 कारण), समझौता, निरपेक्ष Leviathan, आत्म-रक्षा अपवाद।
- लॉक — शांतिपूर्ण पर असुविधाजनक प्राकृतिक अवस्था, जीवन-स्वतंत्रता-संपत्ति, श्रम सिद्धांत, न्यास, क्रांति का अधिकार।
- मिल — गुणात्मक उपयोगितावाद, harm principle, बहुमत का अत्याचार, प्रतिनिधि सरकार, स्त्री-समानता।
- मार्क्स-ग्राम्शी — आधार बनाम अधिरचना; hegemony, war of position।
- आरेंट — labour/work/action, सर्वसत्तावाद, banality of evil, शक्ति बनाम हिंसा।