UPSC Mains · Public Administration · Paper II · अध्याय 10

सिविल सेवाएँ, कल्याण प्रशासन एवं प्रमुख मुद्दे

Civil Services, Welfare Administration and Significant Issues

संवैधानिक स्थिति, भर्ती, प्रशिक्षण, नैतिकता; विधि-व्यवस्था, पुलिस सुधार; कल्याण योजनाएँ; मूल्य, नागरिक-प्रशासन संबंध, आपदा प्रबंधन।

Paper II 35 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper II का यह अंतिम अध्याय सिलेबस की कई इकाइयों को जोड़ता है:

  • सिविल सेवाएँ: संवैधानिक स्थिति, संरचना, भर्ती, प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण; आचरण-संहिता और अनुशासन; तटस्थता बनाम प्रतिबद्धता; लोक सेवा आयोग।
  • वित्तीय प्रबंधन: बजट एक राजनीतिक उपकरण के रूप में; व्यय पर संसदीय नियंत्रण; CAG की भूमिका।
  • विधि-व्यवस्था प्रशासन: पुलिस की भूमिका, पुलिस सुधार, NIA जैसी केंद्रीय एजेंसियाँ, पुलिस-जनता संबंध, स्मार्ट और सामुदायिक पुलिसिंग।
  • कल्याण प्रशासन और प्रमुख मुद्दे: महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए तंत्र; नियामक आयोग (TRAI); शिकायत-निवारण (CPGRAMS); ई-गवर्नेंस (Aadhaar, GeM, GPR, साइबर सुरक्षा); आपदा प्रबंधन में AI; प्रशासनिक सुधार और राजनीतिक इच्छाशक्ति।

2025 में लैंगिक समानता के संवैधानिक प्रावधान, साइबर जागरूकता, guillotine, GeM, CPGRAMS, Aadhaar, स्मार्ट और सामुदायिक पुलिसिंग, बजट के निहितार्थ, GPR, प्रशिक्षण बनाम क्षमता-निर्माण, और आपदा प्रबंधन में AI पूछे गए। 2024 में लोक सेवा आयोग, तटस्थता का "मिथक", TRAI, व्यय पर संसदीय नियंत्रण, सुधार और राजनीतिक इच्छाशक्ति, क्षमता-निर्माण आयोग, पुलिस-अन्वेषण-अभियोजन का पृथक्करण, NIA, पुलिस-जनता संबंध, और CAG आए। यानी इस अध्याय से हर वर्ष लगभग 10 प्रश्न आते हैं।

2. सिविल सेवाएँ: संवैधानिक स्थिति और संरचना

अनुच्छेदप्रावधानपरीक्षा-बिंदु
309भर्ती और सेवा-शर्तें (संसद या विधानमंडल का क़ानून; तब तक राष्ट्रपति या राज्यपाल के नियम)अधिकांश सेवा-नियम इसी के अंतर्गत
310प्रसाद का सिद्धांत (doctrine of pleasure)ब्रिटिश परंपरा से
311बर्ख़ास्तगी, पद से हटाने या पदावनति से पहले सुरक्षा उपाय311(2) के अपवाद; तुलसीराम पटेल (1985)
312अखिल भारतीय सेवाएँराज्य सभा का दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव
315-323संघ और राज्य लोक सेवा आयोग320: परामर्श संबंधी कार्य
  • संरचना: अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS, और 1966 से भारतीय वन सेवा); केंद्रीय सेवाएँ (समूह A, B, C); और राज्य सेवाएँ।
  • सरदार पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं को देश की एकता का "स्टील फ़्रेम" कहा था।
  • प्रमुख सुधार-प्रयास: प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966); कोठारी समिति (1976, भर्ती); सतीश चंद्र समिति (1989); होता समिति (2004); द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की 10वीं रिपोर्ट ("Refurbishing of Personnel Administration", 2008); पार्श्व प्रवेश (lateral entry, 2018 से); और मिशन कर्मयोगी (2020)।
  • टी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ (2013): सर्वोच्च न्यायालय ने निश्चित कार्यकाल, सिविल सेवा बोर्ड (स्थानांतरण और पदस्थापन के लिए), और मौखिक आदेशों के बजाय लिखित निर्देशों पर बल दिया।

लोक सेवा आयोग: संवैधानिक दर्जा और स्वायत्तता (UPSC 2024)

  • स्वायत्तता के संवैधानिक सुरक्षा उपाय:
    • नियुक्ति राष्ट्रपति (UPSC) या राज्यपाल (राज्य आयोग) द्वारा, पर हटाना केवल अनुच्छेद 317 की प्रक्रिया से (दुर्व्यवहार के आरोप पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद)।
    • सेवा-शर्तों में नियुक्ति के बाद अहितकारी परिवर्तन नहीं हो सकता (अनुच्छेद 318)।
    • कार्यकाल के बाद सरकारी नियुक्ति पर प्रतिबंध (अनुच्छेद 319)।
    • व्यय संचित निधि पर भारित (अनुच्छेद 322), यानी उस पर मतदान नहीं होता।
    • वार्षिक रिपोर्ट संसद में रखी जाती है (अनुच्छेद 323)।
  • निष्पक्ष भर्ती में योगदान: योग्यता-आधारित खुली प्रतियोगिता; आरक्षण का क्रियान्वयन; पदोन्नति और अनुशासनिक मामलों में परामर्श।
  • सीमाएँ:
    • अनुच्छेद 320(3) के अंतर्गत परामर्श बाध्यकारी नहीं है (भारत संघ बनाम मनबोधन लाल श्रीवास्तव, 1957)।
    • अनेक पद आयोग के दायरे से बाहर रखे जाते हैं।
    • सदस्यों की नियुक्ति में राजनीतिक प्रभाव, विशेषकर राज्य आयोगों में।
    • राज्य आयोगों में प्रश्न-पत्र लीक, परीक्षा में देरी और मुक़दमेबाज़ी।
  • सुधार: लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024; सदस्यों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी चयन-समिति; परीक्षा-कैलेंडर का पालन; और प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा।

सिविल सेवा की तटस्थता: क्या यह मिथक बन गई है? (UPSC 2024)

  • अर्थ: सिविल सेवक दलीय राजनीति से अलग रहकर, हर निर्वाचित सरकार की नीतियों को समान निष्ठा से लागू करता है, और निष्पक्ष तथा स्पष्ट (frank) सलाह देता है। यह वेबर की नौकरशाही और ब्रिटिश व्हाइटहॉल मॉडल का मूल विचार है।
  • प्रावधान: अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 और केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964, जो राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाते हैं।
  • "मिथक" होने के तर्क:
    • बार-बार स्थानांतरण को राजनीतिक नियंत्रण के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना।
    • सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्तियों और चुनावी राजनीति में प्रवेश का प्रलोभन।
    • अधिकारियों का जाति, क्षेत्र या दल के आधार पर ध्रुवीकरण।
    • 1970 के दशक की "प्रतिबद्ध नौकरशाही" (committed bureaucracy) की बहस।
    • राजनेता-नौकरशाह-अपराधी गठजोड़ (वोहरा समिति, 1993)।
  • प्रतिवाद: अधिकांश अधिकारी दल बदलने पर भी नीतियों को निष्ठा से लागू करते हैं; चुनाव आयोग के अधीन चुनाव-प्रबंधन निष्पक्ष रहता है; और न्यायालय (टी.एस.आर. सुब्रमण्यम, 2013) सुरक्षा देते हैं।
  • निष्कर्ष: विकासशील लोकतंत्र में "मूल्य-रहित तटस्थता" संभव नहीं है। लक्ष्य होना चाहिए "दलीय तटस्थता", पर संविधान और जन-कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता। इसके लिए निश्चित कार्यकाल, सिविल सेवा बोर्ड और लिखित निर्देश आवश्यक हैं।

3. प्रशिक्षण, क्षमता-निर्माण और मिशन कर्मयोगी

प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण में अंतर (UPSC 2025)

आधारप्रशिक्षण (Training)क्षमता-निर्माण (Capacity Building)
दायराव्यक्ति के ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोणव्यक्ति, संगठन और संस्था, तीनों स्तर
अवधिप्रायः निश्चित अवधि के कार्यक्रमसतत, दीर्घकालिक प्रक्रिया
उद्देश्यकिसी विशेष कार्य का कुशल निष्पादनसंगठन की परिणाम देने की कुल क्षमता
साधनकक्षा, पाठ्यक्रम, संस्थान (LBSNAA)प्रक्रियाएँ, प्रौद्योगिकी, नेतृत्व, संस्कृति, साझेदारी
दृष्टिकोणनियम-आधारित (rule-based)भूमिका-आधारित (role-based)
मूल्यांकनपाठ्यक्रम-पूर्णताकार्य-प्रदर्शन और सेवा-वितरण में सुधार
  • संबंध: प्रशिक्षण क्षमता-निर्माण का एक हिस्सा है। अच्छा प्रशिक्षित अधिकारी भी कमज़ोर संगठनात्मक प्रक्रियाओं में असफल रह सकता है, इसलिए दोनों आवश्यक हैं।
  • भारतीय संदर्भ: राष्ट्रीय प्रशिक्षण नीति (1996, संशोधित 2012) प्रशिक्षण पर केंद्रित थी। मिशन कर्मयोगी (2020) ने क्षमता-निर्माण का ढाँचा अपनाया।

क्षमता-निर्माण आयोग और मिशन कर्मयोगी (UPSC 2024)

  • मिशन कर्मयोगी: सिविल सेवा क्षमता-निर्माण का राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCSCB), जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2020 में स्वीकृति दी। इसका लक्ष्य है "नियम से भूमिका की ओर" (rule to role) बदलाव।
  • संस्थागत ढाँचा: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मानव संसाधन परिषद; मंत्रिमंडल सचिव समन्वय इकाई; क्षमता-निर्माण आयोग (अप्रैल 2021); कर्मयोगी भारत (विशेष प्रयोजन वाहन, SPV), जो iGOT कर्मयोगी डिजिटल मंच चलाता है।
  • आयोग के उद्देश्य:
    • मंत्रालयों और विभागों की वार्षिक क्षमता-निर्माण योजनाएँ (ACBP) तैयार करवाना और उनकी निगरानी।
    • प्रशिक्षण संस्थानों का सामंजस्य और उनके मानक तय करना।
    • भूमिकाओं, गतिविधियों और दक्षताओं के ढाँचे (FRACing) पर आधारित दक्षता-मॉडल।
    • मानव संसाधन का अंकेक्षण और क्षमता-निर्माण पर रिपोर्ट।
    • साझा शिक्षण-संसाधन और ज्ञान-भागीदारी।
  • प्रगति: अनेक मंत्रालयों की ACBP बनीं; iGOT पर बड़ी संख्या में कर्मचारी पंजीकृत हैं और हज़ारों पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं; "कर्मयोगी सप्ताह" (राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह, 2024) आयोजित हुआ; और राज्यों के साथ सहयोग शुरू हुआ।
  • चुनौतियाँ: ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का "प्रमाणपत्र-पूर्ति" तक सीमित रहना; सीखने और कार्य-प्रदर्शन के बीच जुड़ाव का कमज़ोर आकलन; राज्यों और ज़मीनी कर्मचारियों तक सीमित पहुँच; और पदोन्नति तथा मूल्यांकन से अपर्याप्त जुड़ाव।
  • निष्कर्ष: आयोग ने ढाँचा और डिजिटल अवसंरचना बना दी है; अब परिणाम-आधारित मूल्यांकन और व्यवहार-परिवर्तन अगला चरण है।

4. बजट, संसदीय नियंत्रण और CAG

बजट: वित्तीय प्रशासन की धुरी (UPSC 2025)

  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 112 (वार्षिक वित्तीय विवरण), 113 (अनुदान माँगें), 114 (विनियोग विधेयक), 116 (लेखानुदान), और 265 (क़ानून के बिना कोई कर नहीं)।
  • "धुरी" क्यों: राजस्व, व्यय, ऋण, लेखा और अंकेक्षण, यानी वित्तीय प्रशासन की हर प्रक्रिया बजट से शुरू होकर उसी पर समाप्त होती है।
  • आर्थिक निहितार्थ: मसग्रेव के तीन कार्य (आवंटन, वितरण, स्थिरीकरण); पूँजीगत व्यय से विकास; राजकोषीय घाटे का प्रबंधन (FRBM अधिनियम, 2003); और निवेश के संकेत।
  • सामाजिक निहितार्थ: कल्याण-योजनाओं पर व्यय; जेंडर बजटिंग (2005-06 से); अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आवंटन; और क्षेत्रीय असमानता घटाना।
  • राजनीतिक निहितार्थ: सरकार की प्राथमिकताओं और विचारधारा का वार्षिक घोषणा-पत्र; कार्यपालिका की विधायिका के प्रति जवाबदेही (वित्त विधेयक का गिरना अविश्वास के समान); संघ-राज्य संबंध (वित्त आयोग के हस्तांतरण); चुनावी चक्र का प्रभाव; और दबाव समूहों की भूमिका।
  • आधुनिक सुधार: परिणाम बजट (2005), रेल बजट का विलय (2017), बजट की तिथि 1 फ़रवरी करना (2017), और योजना और ग़ैर-योजना व्यय के भेद का अंत।

Guillotine: समय-सीमा के लिए बजट-प्रक्रिया को तेज़ करना (UPSC 2025)

  • प्रक्रिया: अनुदान माँगों पर चर्चा के लिए निर्धारित अंतिम दिन, अध्यक्ष शेष सभी माँगों को बिना चर्चा के एक साथ मतदान के लिए रख देते हैं (लोक सभा के प्रक्रिया-नियमों का नियम 208)।
  • औचित्य: 31 मार्च से पहले विनियोग विधेयक पारित करना आवश्यक है ताकि 1 अप्रैल से व्यय हो सके; सीमित संसदीय समय; और सरकारी कामकाज की निरंतरता।
  • आलोचना: अधिकांश मंत्रालयों की माँगों पर कोई चर्चा नहीं होती। उदाहरण के लिए, मार्च 2023 में व्यवधान के बीच लोक सभा ने अनुदान माँगें और वित्त विधेयक लगभग बिना चर्चा के पारित कर दिए। इससे विधायी जाँच औपचारिक रह जाती है और कार्यपालिका का प्रभुत्व बढ़ता है।
  • सुधार: विभाग-संबंधित स्थायी समितियों (DRSC) की रिपोर्टों पर अनिवार्य चर्चा; बजट-सत्र में अधिक दिन; स्वतंत्र संसदीय बजट कार्यालय (Parliamentary Budget Office); और प्रमुख मंत्रालयों का वार्षिक रोटेशन।

व्यय पर घटता संसदीय नियंत्रण (UPSC 2024)

  • नियंत्रण के साधन: बजट पर चर्चा और मतदान; कटौती प्रस्ताव (नीति-अनुमोदन, मितव्ययिता और सांकेतिक); वित्तीय समितियाँ, जैसे लोक लेखा समिति (22 सदस्य: लोक सभा 15, राज्य सभा 7), प्राक्कलन समिति (30, केवल लोक सभा), और सार्वजनिक उपक्रम समिति (22); विभाग-संबंधित स्थायी समितियाँ (1993 से, अब 24); और CAG की रिपोर्टें।
  • गिरावट के कारण:
    • Guillotine और व्यवधान के कारण चर्चा के घंटे कम।
    • बजट की तकनीकी जटिलता और सांसदों के लिए शोध-सहायता की कमी।
    • दल-बदल विरोधी क़ानून के कारण सांसदों की स्वतंत्रता सीमित।
    • बजट से बाहर के ऋण (off-budget borrowings) और अतिरिक्त-बजटीय संसाधन।
    • वित्त विधेयक को धन विधेयक के रूप में पारित करना, जिससे राज्य सभा की भूमिका घटती है।
    • समितियों की रिपोर्टों का बजट के बाद आना और सिफ़ारिशों का बाध्यकारी न होना।
  • निष्कर्ष: संसद का नियंत्रण "पूर्व-व्यय" (ex-ante) स्तर पर कमज़ोर हुआ है, पर "उत्तर-व्यय" (ex-post) स्तर पर लोक लेखा समिति और CAG के माध्यम से बना हुआ है। संसदीय बजट कार्यालय और समिति-रिपोर्टों पर बहस इसे मज़बूत कर सकते हैं।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) (UPSC 2024)

  • प्रावधान: अनुच्छेद 148-151; CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा-शर्तें) अधिनियम, 1971; कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक; हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान; वेतन संचित निधि पर भारित।
  • कार्य: वित्तीय, अनुपालन (compliance) और निष्पादन (performance) अंकेक्षण। रिपोर्टें राष्ट्रपति या राज्यपाल को जाती हैं, जो उन्हें विधायिका में रखवाते हैं, और फिर लोक लेखा समिति उनकी जाँच करती है।
  • "जनता की नज़र से दूर" क्यों: अंकेक्षण तकनीकी और पश्च-प्रभावी (post-facto) होता है; रिपोर्टें देर से आती हैं; और मीडिया का ध्यान केवल बड़े घोटालों तक सीमित रहता है।
  • फिर भी सबसे महत्वपूर्ण पदों में क्यों: डॉ. आंबेडकर ने CAG को संविधान का "संभवतः सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी" कहा था। 2G स्पेक्ट्रम (2010) और कोयला-आवंटन (2012) जैसी निष्पादन-अंकेक्षण रिपोर्टों ने नीति और न्यायिक निर्णयों को प्रभावित किया। CAG संसद की "आँख और कान" है और जनता के धन का संरक्षक है।
  • चुनौतियाँ: नियुक्ति पूरी तरह कार्यपालिका के हाथ में; 1971 का अधिनियम पुराना (PPP, सार्वजनिक-निजी उपक्रम और स्थानीय निकायों का अंकेक्षण अस्पष्ट); रिपोर्टों में देरी; लोक लेखा समिति में लंबित रिपोर्टें; और "नीति-निर्णयों" के अंकेक्षण पर विवाद।
  • सुधार: कॉलेजियम जैसी चयन-प्रक्रिया; अधिनियम का संशोधन; वास्तविक-समय और डिजिटल अंकेक्षण; और रिपोर्टों का सरल सार्वजनिक सार।

5. विधि-व्यवस्था प्रशासन और पुलिस

  • संवैधानिक स्थिति: "पुलिस" और "लोक व्यवस्था" सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 1 और 2) में हैं। केंद्र के पास केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, CBI (दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946), NIA और IB जैसी एजेंसियाँ हैं।
  • औपनिवेशिक विरासत: पुलिस अधिनियम, 1861 (1857 के बाद), जिसका उद्देश्य नियंत्रण था, सेवा नहीं।
  • प्रमुख सुधार-प्रयास: राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1977-81); रिबेरो समिति (1998); पद्मनाभैया समिति (2000); मलिमथ समिति (2003, आपराधिक न्याय); सोली सोराबजी समिति का आदर्श पुलिस अधिनियम (2006); और ARC-II की 5वीं रिपोर्ट ("Public Order", 2007)।
  • प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) के सात निर्देश:
    • राज्य सुरक्षा आयोग।
    • DGP का चयन UPSC के पैनल से, और कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल।
    • SP और थाना-प्रभारी जैसे परिचालन अधिकारियों का दो वर्ष का निश्चित कार्यकाल।
    • अन्वेषण (investigation) को विधि-व्यवस्था से अलग करना (10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों से शुरू करके)।
    • पुलिस स्थापना बोर्ड (स्थानांतरण और पदस्थापन)।
    • पुलिस शिकायत प्राधिकरण (राज्य और ज़िला स्तर)।
    • केंद्रीय बलों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग।
  • क्रियान्वयन: अधिकांश राज्यों ने निर्देशों का आंशिक या औपचारिक पालन किया। यह राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का प्रमुख उदाहरण है।

पुलिस, अन्वेषण और अभियोजन का पृथक्करण (UPSC 2024)

  • तीन अलग कार्य: विधि-व्यवस्था (law and order, निवारक पुलिसिंग), अन्वेषण (अपराध की जाँच और साक्ष्य), और अभियोजन (न्यायालय में राज्य का पक्ष रखना)।
  • लाभ:
    • विशेषज्ञता: प्रशिक्षित अन्वेषक और फ़ॉरेंसिक-आधारित जाँच।
    • विधि-व्यवस्था के दबाव (VIP सुरक्षा, आंदोलन) से अन्वेषण का समय न घटना।
    • दोषसिद्धि दर में सुधार और लंबित मामलों में कमी।
    • स्वतंत्र अभियोजक पुलिस की कमज़ोर जाँच को चुनौती दे सकता है, जिससे जवाबदेही बढ़ती है।
  • चुनौतियाँ: अतिरिक्त कर्मचारियों और बजट की आवश्यकता; दोनों शाखाओं के बीच समन्वय की कमी; छोटे थानों में अव्यावहारिकता; और अभियोजकों की कमी।
  • हाल के विकास:
    • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई, राज्य और ज़िला स्तर पर अभियोजन निदेशालय का प्रावधान करती है।
    • सात वर्ष या अधिक दंड वाले अपराधों में फ़ॉरेंसिक जाँच अनिवार्य; तलाशी और ज़ब्ती की वीडियोग्राफ़ी; ई-FIR और ज़ीरो FIR।
    • अनेक राज्यों ने बड़े नगरों में अन्वेषण के लिए अलग शाखाएँ बनाईं।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) और आतंकवाद-निरोध (UPSC 2024)

  • स्थापना: NIA अधिनियम, 2008, जो 26/11 मुंबई हमले के बाद बना। यह संघीय आतंकवाद-निरोधी एजेंसी है जो राज्य की अनुमति के बिना अनुसूचित अपराधों की जाँच कर सकती है।
  • 2019 का संशोधन: विदेश में भारतीयों या भारतीय हितों के विरुद्ध अपराधों पर अधिकार-क्षेत्र; नए अपराध जोड़े गए (मानव-तस्करी, नक़ली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियार, साइबर आतंकवाद और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के अपराध); और विशेष न्यायालय।
  • भूमिका: आतंकी वित्तपोषण की जाँच (नक़ली मुद्रा, हवाला); अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क; विदेशी एजेंसियों से सहयोग; संगठनों पर प्रतिबंध के लिए साक्ष्य (UAPA); और उच्च दोषसिद्धि दर।
  • चिंताएँ: संघवाद (पुलिस राज्य का विषय है; छत्तीसगढ़ ने 2020 में अनुच्छेद 131 के अंतर्गत अधिनियम को चुनौती दी); UAPA के कठोर प्रावधानों से लंबी विचाराधीन क़ैद; राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप; और राज्य पुलिस से समन्वय।
  • निष्कर्ष: NIA ने राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद-निरोध की क्षमता बढ़ाई है, पर उसकी विश्वसनीयता के लिए राज्य पुलिस के साथ सहयोगी संघवाद और नागरिक-स्वतंत्रता के सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।

पुलिस-जनता संबंध (UPSC 2024)

  • ख़राब संबंधों के कारण: औपनिवेशिक "शासक" मानसिकता; हिरासत में हिंसा और मृत्यु; FIR दर्ज करने से इनकार; भ्रष्टाचार; राजनीतिक हस्तक्षेप; कर्मचारियों की कमी (जनसंख्या के अनुपात में स्वीकृत पद भी पूरे नहीं) और लंबे कार्य-घंटे; और कमज़ोर वर्गों के प्रति असंवेदनशीलता।
  • सुधार के उपाय:
    • प्रकाश सिंह निर्देशों का पूर्ण पालन, विशेषकर पुलिस शिकायत प्राधिकरण।
    • सामुदायिक पुलिसिंग और थानों में "स्वागत कक्ष" (help desk), महिला सहायता डेस्क।
    • संवेदनशीलता-प्रशिक्षण (जेंडर, जाति, बाल-अधिकार) और व्यवहार-आधारित मूल्यांकन।
    • थानों में CCTV (परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह, 2020) और बॉडी-कैमरा।
    • नागरिक प्रतिक्रिया (feedback) प्रणाली और ऑनलाइन शिकायत।
    • कार्य-परिस्थितियों में सुधार: आवास, निश्चित कार्य-घंटे, साप्ताहिक अवकाश।

स्मार्ट पुलिसिंग और सामुदायिक पुलिसिंग (UPSC 2025)

  • SMART पुलिसिंग: 2014 के DGP सम्मेलन में प्रस्तुत अवधारणा: Strict and Sensitive, Modern and Mobile, Alert and Accountable, Reliable and Responsive, Techno-savvy and Trained।
  • प्रौद्योगिकी पक्ष: CCTNS (अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क, 2009); अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS); एकीकृत आपात नंबर 112; भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C, 2020), cybercrime.gov.in पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन; ड्रोन, चेहरा-पहचान प्रणाली और अपराध-मानचित्रण।
  • सामुदायिक पुलिसिंग के उदाहरण: केरल का जनमैत्री सुरक्षा (2008); महाराष्ट्र (भिवंडी) की मोहल्ला समितियाँ; तमिलनाडु का "फ़्रेंड्स ऑफ़ पुलिस"; और ग्राम-रक्षा दल।
  • सामाजिक-तकनीकी चुनौतियाँ: साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी, सोशल मीडिया पर अफ़वाहें और भीड़-हिंसा, और नगरीकरण से अनाम समाज। इनसे निपटने के लिए तकनीक और जन-विश्वास, दोनों चाहिए।
  • सीमाएँ: निगरानी से निजता की चिंता (पुट्टास्वामी, 2017); एल्गोरिदम का पूर्वाग्रह; डेटा-संरक्षण; कर्मचारियों का तकनीकी कौशल; और सामुदायिक कार्यक्रमों का व्यक्ति-आधारित होना (अधिकारी के स्थानांतरण पर बंद हो जाना)।

6. कल्याण प्रशासन, नियमन और शिकायत-निवारण

लैंगिक समानता: संवैधानिक प्रावधान और न्यायिक हस्तक्षेप (UPSC 2025)

  • संवैधानिक प्रावधान:
    • अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समता), 15(1) (लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं), 15(3) (स्त्रियों और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान), और 16 (लोक नियोजन में समान अवसर)।
    • नीति-निदेशक तत्व: 39(a) (आजीविका के समान अधिकार), 39(d) (समान कार्य के लिए समान वेतन), और 42 (प्रसूति सहायता)।
    • मौलिक कर्तव्य 51A(e): स्त्रियों के सम्मान के प्रतिकूल प्रथाओं का त्याग।
    • 243D और 243T: स्थानीय निकायों में एक-तिहाई आरक्षण।
    • 106वाँ संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023): लोक सभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण, जो जनगणना के बाद परिसीमन से लागू होगा।
  • न्यायिक हस्तक्षेप:
    • एयर इंडिया बनाम नरगेश मिर्ज़ा (1981): गर्भावस्था पर सेवा-समाप्ति का नियम असंवैधानिक।
    • विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997): कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के दिशानिर्देश, जिनसे POSH अधिनियम, 2013 बना।
    • शायरा बानो (2017): तत्काल तीन तलाक़ असंवैधानिक।
    • जोसेफ़ शाइन (2018): व्यभिचार की धारा 497 निरस्त।
    • विनीता शर्मा (2020): पुत्रियों को सहदायिक (coparcenary) अधिकार।
    • बबीता पुनिया (2020): सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन।
  • प्रशासनिक तंत्र: राष्ट्रीय महिला आयोग (1992); जेंडर बजटिंग; और मिशन शक्ति (2022)।

नियामक आयोग: TRAI और उपभोक्ता हित (UPSC 2024)

  • स्थापना: TRAI अधिनियम, 1997। 2000 के संशोधन से विवादों के लिए अलग दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) बना।
  • उपभोक्ता-हित में भूमिका:
    • शुल्क (tariff) का नियमन और पारदर्शिता।
    • सेवा की गुणवत्ता (QoS) के मानक, जैसे कॉल-ड्रॉप, और उनके उल्लंघन पर वित्तीय दंड।
    • मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (2011)।
    • अवांछित व्यावसायिक संचार (स्पैम) पर रोक: TCCCPR, 2018, और DND।
    • नेट तटस्थता: डेटा सेवाओं के भेदभावपूर्ण शुल्क पर रोक (2016)।
    • उपभोक्ता-शिक्षा और शिकायत-निवारण के मानक।
  • सीमाएँ: लाइसेंसिंग पर सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं; दूरसंचार विभाग के साथ अधिकारों का अतिव्यापन; प्रवर्तन-शक्तियाँ सीमित; बाज़ार में कुछ ही कंपनियों का प्रभुत्व; और स्पैम तथा साइबर धोखाधड़ी पर अधूरी सफलता। दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने भी नियामक ढाँचे को बदला है।
  • सामान्य सबक: स्वतंत्र नियामक तभी प्रभावी है जब उसे स्वायत्तता, विशेषज्ञता, प्रवर्तन-शक्ति और जवाबदेही चारों मिलें।

CPGRAMS और स्थानीय समस्याएँ (UPSC 2025)

  • स्वरूप: केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली, जिसे प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) चलाता है। यह 24x7 ऑनलाइन मंच है जो केंद्रीय मंत्रालयों से जुड़ा है और अनेक राज्यों के पोर्टलों से एकीकृत है। 2024 के व्यापक दिशानिर्देशों ने शिकायत-निपटान की अधिकतम अवधि घटाकर 21 दिन की।
  • स्थानीय समस्याओं में अप्रभावी होने के कारण:
    • अधिकांश नागरिक-समस्याएँ (पानी, बिजली, राशन, भूमि-अभिलेख, सड़क) राज्य और स्थानीय विषय हैं, पर सभी राज्य और नगर निकाय पूरी तरह एकीकृत नहीं।
    • शिकायतें बिना समाधान के "निपटाई" घोषित कर दी जाती हैं; गुणवत्ता की जगह संख्या पर ज़ोर।
    • डिजिटल विभाजन और भाषा की बाधा।
    • शिकायत को आगे भेजने (forwarding) की लंबी श्रृंखला।
    • प्रणालीगत कारणों का विश्लेषण कम।
  • विचार: यह कथन आंशिक रूप से सही है। CPGRAMS केंद्रीय स्तर पर उपयोगी है, पर स्थानीय समस्याओं के लिए राज्य-स्तरीय प्रणालियाँ (जैसे लोक सेवा अधिकार अधिनियम, मध्य प्रदेश 2010 और बिहार 2011; बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015) अधिक प्रभावी हैं।
  • सुधार: राज्य और स्थानीय पोर्टलों का पूर्ण एकीकरण; नागरिक-संतुष्टि के आधार पर समापन; AI से शिकायतों का वर्गीकरण और मूल कारण विश्लेषण; और सेवोत्तम (Sevottam) मॉडल का पालन।

7. ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्रशासन

Aadhaar: समावेशी शासन और प्रशासनिक विश्वसनीयता (UPSC 2025)

  • पृष्ठभूमि: UIDAI (2009); पहला Aadhaar 2010 में; Aadhaar अधिनियम, 2016; अब तक 130 करोड़ से अधिक Aadhaar जारी।
  • समावेशी शासन में योगदान:
    • पहचान-पत्र से वंचित लोगों को एक सार्वभौमिक पहचान।
    • JAM त्रिमूर्ति (जन धन, Aadhaar, मोबाइल) से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)।
    • फ़र्ज़ी और दोहरे लाभार्थियों का उन्मूलन।
    • "वन नेशन वन राशन कार्ड" से प्रवासी मज़दूरों को राशन।
    • e-KYC से बैंक खाते, सिम कार्ड और सेवाएँ आसान।
  • प्रशासनिक विश्वसनीयता: रिसाव में कमी, लक्ष्य-निर्धारण में सटीकता, डिजिटल प्रमाण-योग्य लेन-देन, और DigiLocker जैसे मंचों का आधार।
  • चिंताएँ:
    • बहिष्करण त्रुटियाँ: बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण की विफलता (वृद्ध, श्रमिक, दिव्यांग), जिससे लाभ से वंचित होने की शिकायतें।
    • निजता और डेटा-सुरक्षा।
    • सेवाओं को Aadhaar से अनिवार्य रूप से जोड़ने का दबाव।
  • न्यायिक स्थिति: के.एस. पुट्टास्वामी (Aadhaar, 2018) में सर्वोच्च न्यायालय ने 4:1 से योजना को वैध माना, पर निजी कंपनियों के उपयोग (धारा 57) को निरस्त किया और बैंक खातों तथा मोबाइल के लिए अनिवार्यता हटाई। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 भी अब लागू ढाँचे का हिस्सा है।
  • निष्कर्ष: Aadhaar ने समावेश और विश्वसनीयता दोनों बढ़ाए हैं, पर "कोई भी वंचित न रहे" के लिए वैकल्पिक पहचान-विकल्प और शिकायत-निवारण आवश्यक हैं।

सरकारी प्रक्रिया पुनर्रचना (GPR) और सुशासन (UPSC 2025)

  • अर्थ: सरकारी प्रक्रियाओं का मूलभूत पुनर्विचार और पुनर्रचना, ताकि लागत, समय और जटिलता घटे और नागरिक-केंद्रित सेवा मिले। ARC-II की 11वीं रिपोर्ट ("Promoting e-Governance: The SMART Way Forward", 2008) के अनुसार कंप्यूटरीकरण से पहले प्रक्रिया की पुनर्रचना होनी चाहिए, वरना "पुरानी अक्षमता का डिजिटलीकरण" होगा।
  • उदाहरण: पासपोर्ट सेवा (2010); MCA21 (कंपनी पंजीकरण); फ़ेसलेस आयकर आकलन (2020); स्व-सत्यापन (2014 से); e-Office; GST नेटवर्क; और सैकड़ों अप्रचलित क़ानूनों का निरसन।
  • सुशासन में योगदान: पारदर्शिता, विवेकाधिकार और भ्रष्टाचार में कमी, समयबद्ध सेवा, जवाबदेही, और "न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन"।
  • चुनौतियाँ: परिवर्तन का विरोध, विभागों के बीच समन्वय, क़ानूनी संशोधनों की आवश्यकता, और डिजिटल विभाजन।

Government e-Marketplace (GeM) (UPSC 2025)

  • परिचय: 2016 में शुरू; वाणिज्य मंत्रालय के अधीन एक SPV; सामान्य वित्तीय नियम, 2017 (नियम 149) के अंतर्गत GeM पर उपलब्ध वस्तुओं और सेवाओं की ख़रीद अनिवार्य। इसका वार्षिक सकल व्यापारिक मूल्य कई लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है।
  • क्रियान्वयन की चुनौतियाँ:
    • कुछ उत्पादों का मूल्य खुले बाज़ार से अधिक होने की शिकायतें।
    • गुणवत्ता की समस्याएँ और विक्रेता की विश्वसनीयता।
    • सूक्ष्म और लघु उद्यमों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण विक्रेताओं का पंजीकरण तथा डिजिटल कौशल।
    • भुगतान में देरी।
    • संगठित मिलीभगत (cartelisation) और बोली में हेरफेर।
    • तकनीकी कठिनाइयाँ और जटिल श्रेणियाँ।
    • राज्यों और स्थानीय निकायों में असमान अपनाया जाना।
  • सुधार: AI-आधारित मूल्य-तुलना और मिलीभगत की पहचान; समयबद्ध भुगतान; विक्रेता-रेटिंग; और प्रशिक्षण।

अधिकारियों में साइबर जागरूकता और साइबर सुरक्षा (UPSC 2025)

  • समस्या: फ़िशिंग ईमेल, कमज़ोर पासवर्ड, सरकारी काम के लिए निजी ईमेल और मैसेजिंग ऐप का उपयोग, अप्रमाणित सॉफ़्टवेयर, और पेन-ड्राइव से डेटा-स्थानांतरण। उदाहरण: AIIMS दिल्ली पर रैनसमवेयर हमला (नवंबर 2022)।
  • संस्थागत ढाँचा: IT अधिनियम, 2000 (धारा 70A के अंतर्गत NCIIPC; धारा 70B के अंतर्गत CERT-In); राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति (2013); CERT-In का घटनाओं को 6 घंटे में रिपोर्ट करने का निर्देश (2022); साइबर सुरक्षित भारत (2018); और DPDP अधिनियम, 2023।
  • उपाय: अनिवार्य साइबर-स्वच्छता प्रशिक्षण (iGOT पर); हर विभाग में मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (CISO); बहु-कारक प्रमाणीकरण; नियमित सुरक्षा-अंकेक्षण; "ज़ीरो ट्रस्ट" ढाँचा; और घटनाओं की तत्काल रिपोर्टिंग की संस्कृति।

8. आपदा प्रबंधन और AI

  • ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005; NDMA (अध्यक्ष: प्रधानमंत्री), SDMA (मुख्यमंत्री), DDMA (ज़िलाधीश); NDRF (2006); और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (2016, अद्यतन 2019)। 2025 के संशोधन से राष्ट्रीय और राज्य आपदा डेटाबेस और नगरीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों का प्रावधान हुआ।
  • वैश्विक ढाँचा: सेंडाई फ़्रेमवर्क (2015-2030), जिसमें "प्रतिक्रिया" से "जोखिम-न्यूनीकरण" की ओर बदलाव है; भारत की पहल: आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI, 2019)।
  • उपलब्धि: ओडिशा मॉडल: 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद फ़ैलिन (2013) और फ़णि (2019) में समय पर निकासी से जनहानि बहुत कम।

आपदा प्रबंधन में AI (UPSC 2025)

  • पूर्व-चेतावनी: मशीन-लर्निंग से मौसम और चक्रवात का पूर्वानुमान; 2025 में IMD की उच्च-रिज़ॉल्यूशन "भारत फ़ोरकास्ट सिस्टम"; केंद्रीय जल आयोग और Google की बाढ़-पूर्वानुमान साझेदारी (2018 में पटना से पायलट)।
  • चेतावनी का प्रसार: NDMA की कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल आधारित "सचेत" (SACHET) प्रणाली से क्षेत्र-विशेष SMS चेतावनी।
  • प्रतिक्रिया: उपग्रह-चित्रों (ISRO भुवन) और ड्रोन-चित्रों का AI विश्लेषण कर क्षति का तेज़ आकलन; सोशल मीडिया से संकट-संकेतों की पहचान; राहत-सामग्री का अनुकूलित वितरण।
  • पुनर्निर्माण और जोखिम-मानचित्रण: भूस्खलन, बाढ़ और हीटवेव के जोखिम-मानचित्र; भवनों की संरचनात्मक कमज़ोरी का आकलन।
  • सीमाएँ: स्थानीय आँकड़ों की कमी, एल्गोरिदम का पूर्वाग्रह, डिजिटल विभाजन (चेतावनी हर किसी तक न पहुँचना), तकनीक पर अति-निर्भरता, और डेटा-निजता।
  • निष्कर्ष: AI "मानव निर्णय का पूरक" है, विकल्प नहीं। सामुदायिक तैयारी और स्थानीय क्षमता के साथ ही यह प्रभावी होता है।

9. प्रशासनिक सुधार और राजनीतिक इच्छाशक्ति (UPSC 2024)

  • कथन का आधार: सुधार सत्ता-संरचनाओं को बदलते हैं (स्थानांतरण पर नियंत्रण, विवेकाधिकार, संरक्षण), इसलिए राजनीतिक नेतृत्व के समर्थन के बिना वे लागू नहीं होते।
  • राजनीतिक इच्छाशक्ति से सफल सुधार: GST (2017); DBT और JAM; ग्रुप C और D पदों के लिए साक्षात्कार की समाप्ति (2016); फ़ेसलेस आयकर आकलन; मिशन कर्मयोगी; और दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (2016)।
  • इच्छाशक्ति के अभाव में अटके सुधार: पुलिस सुधार (प्रकाश सिंह, 2006); सिविल सेवा बोर्ड का औपचारिक पालन; लोकपाल (1968 से प्रस्तावित, 2013 में अधिनियम, 2019 में नियुक्ति); ARC-II की अनेक सिफ़ारिशें; और पार्श्व प्रवेश, जिसका अगस्त 2024 का विज्ञापन आरक्षण पर आपत्तियों के बाद वापस लिया गया।
  • अन्य आवश्यक तत्व: नौकरशाही का समर्थन (प्रतिरोध पर क़ाबू), नागरिक समाज और मीडिया का दबाव, न्यायिक हस्तक्षेप, प्रौद्योगिकी, और संस्थागत निरंतरता (सरकार बदलने पर भी सुधार न रुकें)।
  • निष्कर्ष: राजनीतिक इच्छाशक्ति आवश्यक शर्त है, पर पर्याप्त नहीं। प्रशासनिक क्षमता, जन-समर्थन और संस्थागत डिज़ाइन से ही सुधार टिकाऊ बनते हैं।

10. Master Summary Table

विषयमुख्य तथ्ययाद रखें
सिविल सेवाएँअनुच्छेद 309-312टी.एस.आर. सुब्रमण्यम 2013
लोक सेवा आयोग315-323; 320(3) परामर्शमनबोधन लाल 1957; लोक परीक्षा अधिनियम 2024
तटस्थताआचरण नियम 1964 और 1968वोहरा समिति 1993
क्षमता-निर्माणमिशन कर्मयोगी 2020; आयोग 2021Rule to role; FRACing; iGOT
बजट112-116; FRBM 2003जेंडर बजट 2005-06
Guillotineनियम 208मार्च 2023
वित्तीय समितियाँPAC 22, प्राक्कलन 30, COPU 22DRSC 1993
CAG148-151; अधिनियम 19712G 2010, कोयला 2012
पुलिस सुधारप्रकाश सिंह 2006 (7 निर्देश)BNSS: 1 जुलाई 2024
NIA2008; संशोधन 2019छत्तीसगढ़ की चुनौती 2020
स्मार्ट पुलिसिंग2014; CCTNS 2009I4C 2020; 1930
लैंगिक समानता15(3), 39(d), 42, 106वाँ संशोधनविशाखा 1997; बबीता पुनिया 2020
TRAI1997; TDSAT 2000MNP 2011; नेट तटस्थता 2016
CPGRAMSDARPG; 21 दिन (2024)सेवोत्तम
Aadhaarअधिनियम 2016पुट्टास्वामी 2018 (4:1)
GPR और GeMARC-II 11वीं रिपोर्ट; GeM 2016GFR 2017 नियम 149
साइबर सुरक्षाCERT-In (70B); 6 घंटे का नियम 2022AIIMS 2022
आपदा प्रबंधनअधिनियम 2005; सेंडाई 2015CDRI 2019; सचेत

11. चार्ट: संसद में बजट-चक्र और वित्तीय जवाबदेही

बजट प्रस्तुति(अनुच्छेद 112) सामान्य चर्चा(नीति पर बहस) स्थायी समितियाँ(DRSC जाँच) अनुदान माँगें(मतदान, guillotine) विनियोग विधेयक(अनुच्छेद 114) वित्त विधेयक(कर प्रस्ताव) CAG अंकेक्षण(अनुच्छेद 149) लोक लेखा समिति(उत्तर-व्यय जाँच) अगले बजट के लिए सबक
बजट-चक्र: ऊपर की पंक्ति "पूर्व-व्यय" नियंत्रण है (यहाँ guillotine से चर्चा घटती है); नीचे की पंक्ति "उत्तर-व्यय" जवाबदेही है (CAG और लोक लेखा समिति)। टूटी रेखा बताती है कि अंकेक्षण के सबक अगले बजट तक लौटते हैं।

12. Mind Map

सिविल सेवाएँ, कल्याण एवं प्रमुख मुद्दे
सिविल सेवा
  • 309-312, लोक सेवा आयोग
  • तटस्थता, कर्मयोगी
वित्त
  • बजट, guillotine
  • संसदीय नियंत्रण, CAG
पुलिस
  • प्रकाश सिंह, BNSS
  • NIA, स्मार्ट पुलिसिंग
कल्याण और नियमन
  • लैंगिक समानता
  • TRAI, CPGRAMS
डिजिटल शासन
  • Aadhaar, GPR, GeM
  • साइबर सुरक्षा, AI

13. महत्वपूर्ण One-liners

  • अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का अधिकार: अनुच्छेद 312 (राज्य सभा का दो-तिहाई प्रस्ताव)।
  • लोक सेवा आयोग के सदस्य को हटाने की प्रक्रिया: अनुच्छेद 317।
  • अनुच्छेद 320(3) का परामर्श बाध्यकारी नहीं: मनबोधन लाल श्रीवास्तव (1957)।
  • क्षमता-निर्माण आयोग की स्थापना: अप्रैल 2021।
  • Guillotine का आधार: लोक सभा प्रक्रिया-नियमों का नियम 208।
  • लोक लेखा समिति के सदस्य: 22 (लोक सभा 15, राज्य सभा 7)।
  • CAG का कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु।
  • पुलिस सुधार के सात निर्देश: प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006)।
  • NIA अधिनियम: 2008 (संशोधन 2019)।
  • Aadhaar निर्णय: के.एस. पुट्टास्वामी (2018), 4:1।
  • GeM पर ख़रीद अनिवार्य: सामान्य वित्तीय नियम 2017, नियम 149।
  • CERT-In का वैधानिक आधार: IT अधिनियम की धारा 70B।

14. टिप्स एवं ट्रिक्स

इस अध्याय के उत्तरों में
  • हर उत्तर में अनुच्छेद, अधिनियम, समिति और निर्णय का कम से कम एक संदर्भ दें।
  • डिजिटल शासन के प्रश्नों (Aadhaar, GeM, CPGRAMS) में "लाभ, चुनौतियाँ, न्यायिक/क़ानूनी स्थिति, सुधार" का चार-भाग ढाँचा अपनाएँ।
  • "मिथक", "घट रहा है" जैसे कथनों में पक्ष और विपक्ष दोनों देकर संतुलित निष्कर्ष लिखें।
  • ARC-II की रिपोर्ट संख्याएँ याद रखें: 4थी (नैतिकता), 5वीं (लोक व्यवस्था), 10वीं (कार्मिक), 11वीं (ई-गवर्नेंस), 15वीं (राज्य और ज़िला प्रशासन)।
याद रखने की तरकीब

प्रकाश सिंह के सात निर्देश: "सु-D-का-अ-बो-शि-रा" (सुरक्षा आयोग, DGP, कार्यकाल, अन्वेषण-पृथक्करण, स्थापना बोर्ड, शिकायत प्राधिकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग)। SMART पुलिसिंग: हर अक्षर दो गुण।

ध्यान दें

लोक सेवा आयोग और CAG, दोनों के व्यय संचित निधि पर भारित हैं और दोनों को हटाने के लिए विशेष प्रक्रिया है। यह तुलना स्वायत्तता वाले प्रश्नों में बहुत उपयोगी है।

15. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2025 · Paper II · 1(c) · 10 अंक

भारत में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाले संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक हस्तक्षेपों पर प्रकाश डालिए।

मॉडल उत्तर

प्रावधान: 14, 15(3), 16, 39(a), 39(d), 42, 51A(e), 243D, 106वाँ संशोधन।

निर्णय: नरगेश मिर्ज़ा, विशाखा, शायरा बानो, जोसेफ़ शाइन, विनीता शर्मा, बबीता पुनिया।

निष्कर्ष: औपचारिक से वास्तविक समानता की ओर; क्रियान्वयन की चुनौती बनी है।

Q2UPSC 2025 · Paper II · 6(a)

केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) स्थानीय स्तर की समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं करती। अपना मत दीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

स्वरूप: DARPG, 24x7, 21 दिन।

कारण: राज्य-स्थानीय विषय, अपूर्ण एकीकरण, औपचारिक निपटान, डिजिटल विभाजन।

मत: आंशिक रूप से सही; लोक सेवा अधिकार अधिनियमों का उदाहरण।

सुधार: एकीकरण, संतुष्टि-आधारित समापन, AI, सेवोत्तम।

Q3UPSC 2025 · Paper II · 6(b)

क्या आप मानते हैं कि Aadhaar पहल ने समावेशी शासन और प्रशासनिक विश्वसनीयता को बढ़ावा दिया है? प्रकाश डालिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

समावेश: सार्वभौमिक पहचान, DBT, ONORC, e-KYC।

विश्वसनीयता: रिसाव में कमी, सटीक लक्ष्य-निर्धारण।

चिंताएँ: बहिष्करण, निजता; पुट्टास्वामी 2018; DPDP 2023।

Q4UPSC 2025 · Paper II · 6(c)

विधि-व्यवस्था में सामाजिक-तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए स्मार्ट पुलिसिंग और सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

SMART (2014) और तकनीक: CCTNS, ICJS, 112, I4C।

सामुदायिक: जनमैत्री, मोहल्ला समितियाँ।

सीमाएँ: निजता, पूर्वाग्रह, निरंतरता।

Q5UPSC 2025 · Paper II · 5(b) · 10 अंक

"Guillotine" समय-सीमा पूरी करने के लिए बजट-प्रक्रिया को तेज़ करता है। इस प्रक्रिया का मूल्यांकन कीजिए।

मॉडल उत्तर

प्रक्रिया: नियम 208; अंतिम दिन शेष माँगों पर एक साथ मतदान।

औचित्य: 31 मार्च की समय-सीमा, सीमित समय।

आलोचना: अधिकांश माँगें बिना चर्चा (मार्च 2023)।

सुधार: DRSC रिपोर्टों पर चर्चा, संसदीय बजट कार्यालय।

Q6UPSC 2025 · Paper II · 7(b)

बजट वह धुरी है जिसके चारों ओर पूरा वित्तीय प्रशासन घूमता है। बजट के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

धुरी: 112-116, 265; वित्तीय प्रशासन का चक्र (चार्ट)।

आर्थिक: मसग्रेव के तीन कार्य, FRBM।

सामाजिक: कल्याण, जेंडर बजट, SC/ST आवंटन।

राजनीतिक: प्राथमिकताओं का घोषणा-पत्र, जवाबदेही, संघवाद, चुनावी चक्र।

Q7UPSC 2025 · Paper II · 7(c)

सुशासन को बढ़ावा देने में सरकारी प्रक्रिया पुनर्रचना (GPR) की भूमिका का आकलन कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

अर्थ: ARC-II की 11वीं रिपोर्ट; पहले प्रक्रिया, फिर तकनीक।

उदाहरण: पासपोर्ट सेवा, MCA21, फ़ेसलेस आकलन, स्व-सत्यापन।

चुनौतियाँ: परिवर्तन का विरोध, क़ानूनी संशोधन।

Q8UPSC 2025 · Paper II · 8(b)

प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण के दायरे और उद्देश्य अलग-अलग हैं। प्रमुख अंतर स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

अंतर-तालिका: दायरा, अवधि, उद्देश्य, साधन, दृष्टिकोण, मूल्यांकन।

संबंध: प्रशिक्षण क्षमता-निर्माण का भाग।

भारत: राष्ट्रीय प्रशिक्षण नीति से मिशन कर्मयोगी तक।

Q9UPSC 2025 · Paper II · 8(c)

आपदा प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक नवाचारी उपकरण के रूप में उभरी है। उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

चरण-वार उपयोग: पूर्व-चेतावनी (भारत फ़ोरकास्ट सिस्टम, बाढ़-पूर्वानुमान), प्रसार (सचेत), प्रतिक्रिया (उपग्रह और ड्रोन विश्लेषण), जोखिम-मानचित्रण।

सीमाएँ और निष्कर्ष: मानव निर्णय का पूरक।

Q10UPSC 2024 · Paper II · 6(a)

"भारत जैसे देश में प्रशासनिक सुधारों की सफलता राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है।" टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

क्यों: सुधार सत्ता-संरचनाएँ बदलते हैं।

सफल सुधार: GST, DBT, साक्षात्कार-समाप्ति, IBC।

अटके सुधार: पुलिस सुधार, लोकपाल, पार्श्व प्रवेश 2024।

निष्कर्ष: आवश्यक पर पर्याप्त नहीं।

Q11UPSC 2024 · Paper II · 6(c)

क्षमता-निर्माण आयोग किन लक्ष्यों और उद्देश्यों के लिए स्थापित किया गया था? मूल्यांकन कीजिए कि वह इन लक्ष्यों को पाने में कहाँ तक पहुँचा है।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

पृष्ठभूमि: मिशन कर्मयोगी 2020; आयोग 2021।

उद्देश्य: ACBP, संस्थानों का सामंजस्य, FRACing, HR अंकेक्षण।

प्रगति और चुनौतियाँ (प्रमाणपत्र-पूर्ति, राज्यों तक पहुँच)।

Q12UPSC 2024 · Paper II · 7(a)

पुलिस, अन्वेषण और अभियोजन के पृथक्करण के अपने लाभ और चुनौतियाँ हैं। हाल के विकास के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

तीन कार्य; प्रकाश सिंह का चौथा निर्देश।

लाभ और चुनौतियाँ।

हाल के विकास: BNSS 2023 (अभियोजन निदेशालय, फ़ॉरेंसिक, वीडियोग्राफ़ी)।

Q13UPSC 2024 · Paper II · 7(c)

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) आतंकवाद-निरोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

स्थापना: 2008, 26/11; संशोधन 2019।

भूमिका: आतंकी वित्तपोषण, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, दोषसिद्धि।

चिंताएँ: संघवाद, UAPA, दुरुपयोग के आरोप।

Q14UPSC 2024 · Paper II · 8(a)

"भारत में पुलिस-जनता संबंध ख़राब हैं। इन संबंधों को मज़बूत करने के लिए कौन-से उपाय आवश्यक हैं?"

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

कारण: औपनिवेशिक मानसिकता, हिरासत-हिंसा, FIR से इनकार, भ्रष्टाचार, कर्मचारियों की कमी।

उपाय: प्रकाश सिंह, सामुदायिक पुलिसिंग, संवेदनशीलता-प्रशिक्षण, CCTV (परमवीर सिंह सैनी 2020), feedback, कार्य-परिस्थितियाँ।

Q15UPSC 2024 · Paper II · 8(b)

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का पद और उसका कार्य जनता की नज़र से दूर रहता है, फिर भी यह संविधान के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक है। चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

प्रावधान: 148-151, अधिनियम 1971, स्वतंत्रता के उपाय।

"नज़र से दूर" क्यों और "सबसे महत्वपूर्ण" क्यों (आंबेडकर; 2G, कोयला)।

चुनौतियाँ और सुधार: नियुक्ति, अधिनियम का संशोधन, डिजिटल अंकेक्षण।

Q16UPSC 2025 · Paper II · 5(a) · 10 अंक

अधिकारियों में साइबर जागरूकता की कमी प्रशासन में साइबर सुरक्षा की समस्याएँ पैदा कर रही है। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

समस्या: फ़िशिंग, निजी ऐप, कमज़ोर पासवर्ड; AIIMS 2022।

ढाँचा: CERT-In, NCIIPC, 6 घंटे का नियम, DPDP 2023।

उपाय: प्रशिक्षण, CISO, बहु-कारक प्रमाणीकरण, ज़ीरो ट्रस्ट।

Q17UPSC 2025 · Paper II · 5(e) · 10 अंक

Government e-Marketplace (GeM) के क्रियान्वयन की चुनौतियों और मुद्दों की पहचान कीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय: 2016, GFR नियम 149।

चुनौतियाँ: मूल्य, गुणवत्ता, MSME पंजीकरण, भुगतान, मिलीभगत, तकनीकी, राज्यों में असमानता।

सुधार: AI मूल्य-तुलना, समयबद्ध भुगतान, रेटिंग।

Q18UPSC 2024 · Paper II · 5(a) · 10 अंक

लोक सेवा आयोगों को दिया गया संवैधानिक दर्जा उन्हें निष्पक्ष भर्ती के लिए स्वायत्तता देता है। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

सुरक्षा उपाय: 317, 318, 319, 322, 323।

सीमाएँ: 320(3) बाध्यकारी नहीं (मनबोधन लाल), राज्य आयोगों में लीक और देरी।

सुधार: लोक परीक्षा अधिनियम 2024, पारदर्शी नियुक्ति।

Q19UPSC 2024 · Paper II · 5(b) · 10 अंक

"सिविल सेवा की तटस्थता एक मिथक बन गई है।" टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

अर्थ और आचरण नियम।

पक्ष: स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति के बाद लाभ, ध्रुवीकरण, प्रतिबद्ध नौकरशाही।

विपक्ष और निष्कर्ष: दलीय तटस्थता और संवैधानिक प्रतिबद्धता।

Q20UPSC 2024 · Paper II · 5(c) · 10 अंक

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

स्थापना: 1997; TDSAT 2000।

भूमिका: शुल्क, QoS, MNP, स्पैम-नियंत्रण, नेट तटस्थता।

सीमाएँ: सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं, प्रवर्तन, DoT से अतिव्यापन।

Q21UPSC 2024 · Paper II · 5(d) · 10 अंक

"सार्वजनिक व्यय पर संसदीय नियंत्रण घट रहा है।" टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

साधन: बजट-मतदान, कटौती प्रस्ताव, PAC, प्राक्कलन, COPU, DRSC, CAG।

गिरावट: guillotine, व्यवधान, जटिलता, off-budget ऋण, धन विधेयक मार्ग।

निष्कर्ष: पूर्व-व्यय नियंत्रण कमज़ोर, उत्तर-व्यय नियंत्रण बना हुआ।

Q22अभ्यास प्रश्न · 15 अंक

"कल्याणकारी राज्य में प्रशासन की सफलता का माप उसकी नियम-पालन क्षमता नहीं, बल्कि नागरिक-संतुष्टि है।" शिकायत-निवारण और डिजिटल सेवा-वितरण के उदाहरणों से विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

अवधारणा: नियम-केंद्रित से नागरिक-केंद्रित प्रशासन (NPM, सुशासन)।

उदाहरण: CPGRAMS, लोक सेवा अधिकार अधिनियम, सेवोत्तम, Aadhaar-DBT, पासपोर्ट सेवा।

संतुलन: नियम जवाबदेही के लिए आवश्यक; "संतुष्टि" का मापन सावधानी से।

16. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • सिविल सेवा: 309-312; लोक सेवा आयोग (315-323); तटस्थता की बहस; प्रशिक्षण बनाम क्षमता-निर्माण; मिशन कर्मयोगी और आयोग।
  • वित्त: बजट के निहितार्थ; guillotine; घटता संसदीय नियंत्रण; CAG।
  • पुलिस: प्रकाश सिंह; अन्वेषण-अभियोजन पृथक्करण और BNSS; NIA; पुलिस-जनता संबंध; स्मार्ट और सामुदायिक पुलिसिंग।
  • कल्याण और नियमन: लैंगिक समानता; TRAI; CPGRAMS।
  • डिजिटल शासन: Aadhaar, GPR, GeM, साइबर सुरक्षा; आपदा प्रबंधन में AI; सुधार और राजनीतिक इच्छाशक्ति।