1. अध्याय एक नज़र में
यदि कोई पूछे कि "आपकी कक्षा के छात्रों ने गणित में कैसा प्रदर्शन किया?", तो आप 40 छात्रों के अंक एक-एक कर नहीं बताएँगे। आप कहेंगे — "औसत अंक 62 रहे"। यह एक संख्या पूरे समूह का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसी संख्या को केंद्रीय प्रवृत्ति की माप (Measure of Central Tendency) कहते हैं, क्योंकि अधिकांश आँकड़े प्रायः इसी के आसपास केंद्रित रहते हैं।
इस अध्याय में हम केंद्रीय प्रवृत्ति की तीन प्रमुख मापें — समांतर माध्य (Arithmetic Mean), माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode) — विभिन्न प्रकार की श्रेणियों में ज्ञात करना सीखेंगे। साथ ही भारित माध्य, चतुर्थक और इन मापों के आपसी संबंध तथा उपयुक्तता का अध्ययन करेंगे।
- समांतर माध्य: व्यक्तिगत, खंडित और सतत श्रेणी; प्रत्यक्ष, कल्पित माध्य और पद-विचलन विधि।
- भारित समांतर माध्य; माध्य के गुण और दोष।
- माध्यिका: सभी श्रेणियों में; चतुर्थक और शतमक।
- बहुलक: खंडित और सतत श्रेणी में।
- माध्य, माध्यिका और बहुलक का संबंध।
- किस स्थिति में कौन-सी माप उपयुक्त है।
2. श्रेणियों के प्रकार
| श्रेणी | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series) | प्रत्येक प्रेक्षण अलग-अलग दिया हो | 7 छात्रों के अंक: 12, 18, 9, 15, 21, 15, 10 |
| खंडित / विविक्त श्रेणी (Discrete Series) | मान और उनकी बारंबारताएँ | बच्चों की संख्या 0, 1, 2 … और परिवारों की संख्या |
| सतत / अखंडित श्रेणी (Continuous Series) | वर्ग-अंतराल और उनकी बारंबारताएँ | अंक 0–10, 10–20 … और छात्रों की संख्या |
इस अध्याय के सभी उदाहरणों के अंक अभ्यास हेतु काल्पनिक आँकड़े हैं।
- सरल: समझने और गणना करने में आसान हो।
- निश्चित (Rigidly Defined): स्पष्ट सूत्र से परिभाषित हो, ताकि हर व्यक्ति को एक ही उत्तर मिले।
- सभी प्रेक्षणों पर आधारित हो।
- चरम मानों से कम प्रभावित हो।
- प्रतिदर्श-स्थिरता: एक ही समष्टि से लिए गए विभिन्न प्रतिदर्शों में उसका मान बहुत अधिक न बदले।
- आगे के बीजगणितीय उपयोग के योग्य हो।
कोई भी एक माप इन सभी गुणों पर खरी नहीं उतरती — इसलिए परिस्थिति के अनुसार माध्य, माध्यिका या बहुलक का चुनाव किया जाता है।
3. समांतर माध्य (Arithmetic Mean)
सभी प्रेक्षणों के योग को प्रेक्षणों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त मान समांतर माध्य कहलाता है। इसे X̄ (एक्स-बार) से दर्शाते हैं।
(क) व्यक्तिगत श्रेणी
7 छात्रों के अंक: 12, 18, 9, 15, 21, 15, 10। ΣX = 100, N = 7। X̄ = 100/7 = 14.29।
कल्पित माध्य विधि (A = 15): d = −3, 3, −6, 0, 6, 0, −5; Σd = −5। X̄ = 15 + (−5/7) = 15 − 0.71 = 14.29 ✓।
(ख) खंडित श्रेणी
| बच्चों की संख्या (X) | परिवार (f) | fX |
|---|---|---|
| 0 | 2 | 0 |
| 1 | 5 | 5 |
| 2 | 8 | 16 |
| 3 | 4 | 12 |
| 4 | 1 | 4 |
| योग | 20 | 37 |
X̄ = 37/20 = 1.85 बच्चे प्रति परिवार। (ध्यान दें — माध्य 1.85 एक भिन्न है, जबकि बच्चों की संख्या पूर्णांक होती है। माध्य ऐसा मान हो सकता है जो किसी वास्तविक प्रेक्षण के बराबर न हो।)
(ग) सतत श्रेणी
सतत श्रेणी में प्रत्येक वर्ग के वर्ग-चिह्न (m) को उस वर्ग का प्रतिनिधि मान माना जाता है।
| अंक | f | m | fm | d′ = (m − 25)/10 | fd′ |
|---|---|---|---|---|---|
| 0–10 | 2 | 5 | 10 | −2 | −4 |
| 10–20 | 5 | 15 | 75 | −1 | −5 |
| 20–30 | 10 | 25 | 250 | 0 | 0 |
| 30–40 | 9 | 35 | 315 | 1 | 9 |
| 40–50 | 4 | 45 | 180 | 2 | 8 |
| योग | 30 | — | 830 | — | 8 |
प्रत्यक्ष: X̄ = 830/30 = 27.67। पद-विचलन (A = 25, h = 10): X̄ = 25 + (8/30) × 10 = 25 + 2.67 = 27.67 ✓। पद-विचलन विधि में गणनाएँ छोटी संख्याओं से होती हैं, इसलिए यह बड़े आँकड़ों में समय बचाती है।
भारित समांतर माध्य (Weighted Arithmetic Mean)
जब विभिन्न प्रेक्षणों का महत्व अलग-अलग हो, तो प्रत्येक को उसके महत्व के अनुसार भार (Weight, W) दिया जाता है:
एक छात्र को तीन परीक्षाओं में अंक मिले — इकाई परीक्षा 80 (भार 1), अर्धवार्षिक 70 (भार 2), वार्षिक 60 (भार 3)। साधारण माध्य = 210/3 = 70। भारित माध्य = (80×1 + 70×2 + 60×3)/(1+2+3) = (80 + 140 + 180)/6 = 400/6 = 66.67। वार्षिक परीक्षा का भार अधिक है, इसलिए भारित माध्य उसके अंक (60) की ओर झुका।
समांतर माध्य के गुण
- माध्य से सभी प्रेक्षणों के विचलनों का योग शून्य होता है: Σ(X − X̄) = 0।
- N × X̄ = ΣX — माध्य और प्रेक्षणों की संख्या से कुल योग ज्ञात किया जा सकता है।
- सभी प्रेक्षणों पर आधारित; समझने और गणना में सरल; आगे के बीजगणितीय उपयोग संभव।
- दोष: चरम मानों (Extreme Values) से बहुत प्रभावित होता है; खुले सिरे वाले वर्गों में गणना कठिन; गुणात्मक आँकड़ों के लिए उपयुक्त नहीं।
पाँच कर्मचारियों का मासिक वेतन (₹ हज़ार): 15, 16, 18, 20, 181 (प्रबंधक)। माध्य = 250/5 = 50 हज़ार — जबकि पाँच में से चार की आय 20 हज़ार या कम है! यहाँ माध्य भ्रामक है; माध्यिका (18 हज़ार) बेहतर प्रतिनिधि है।
4. माध्यिका (Median)
आँकड़ों को आरोही (या अवरोही) क्रम में व्यवस्थित करने पर जो मान ठीक बीच में आता है, वह माध्यिका है। यह श्रेणी को दो बराबर भागों में बाँटती है — आधे प्रेक्षण इससे कम और आधे इससे अधिक। माध्यिका एक स्थिति-संबंधी (Positional) माप है।
(क) व्यक्तिगत श्रेणी
उदाहरण: 12, 18, 9, 15, 21, 15, 10 → क्रम में: 9, 10, 12, 15, 15, 18, 21। N = 7; (7+1)/2 = 4वाँ पद = 15। यदि N सम हो, तो दो बीच के पदों का औसत लें — जैसे 4, 7, 9, 12 की माध्यिका = (7 + 9)/2 = 8।
(ख) खंडित श्रेणी
संचयी बारंबारता (cf) बनाएँ और (N + 1)/2वाँ पद ज्ञात करें। बच्चों वाले उदाहरण में N = 20, (20+1)/2 = 10.5वाँ पद। cf: 2, 7, 15, 19, 20 — 10.5 पहली बार cf = 15 वाले मान में आता है, अतः माध्यिका = 2 बच्चे।
(ग) सतत श्रेणी
जहाँ L = माध्यिका वर्ग की निम्न सीमा, c.f. = माध्यिका वर्ग से पहले वाले वर्ग की संचयी बारंबारता, f = माध्यिका वर्ग की बारंबारता, h = वर्ग-विस्तार। माध्यिका वर्ग वह है जिसमें N/2वाँ पद आता है।
N/2 = 15। cf: 2, 7, 17, 26, 30 → 15वाँ पद वर्ग 20–30 में (cf 7 से 17 के बीच)। L = 20, c.f. = 7, f = 10, h = 10। माध्यिका = 20 + [(15 − 7)/10] × 10 = 20 + 8 = 28।
चतुर्थक (Quartiles) और शतमक (Percentiles)
जिस प्रकार माध्यिका श्रेणी को दो बराबर भागों में बाँटती है, उसी प्रकार चतुर्थक चार बराबर भागों में बाँटते हैं — Q₁ (निम्न चतुर्थक, 25% प्रेक्षण इससे कम), Q₂ (= माध्यिका), Q₃ (उच्च चतुर्थक, 75% प्रेक्षण इससे कम)। शतमक श्रेणी को 100 बराबर भागों में बाँटते हैं — जैसे किसी प्रतियोगी परीक्षा में "90वाँ शतमक" का अर्थ है कि 90% परीक्षार्थियों के अंक उससे कम हैं।
उदाहरण (30 छात्र): N/4 = 7.5 → वर्ग 20–30 (cf 7 के बाद): Q₁ = 20 + (7.5 − 7)/10 × 10 = 20.5। 3N/4 = 22.5 → वर्ग 30–40 (c.f. = 17, f = 9): Q₃ = 30 + (22.5 − 17)/9 × 10 = 30 + 6.11 = 36.11। व्यक्तिगत श्रेणी में Q₁ = [(N+1)/4]वाँ और Q₃ = [3(N+1)/4]वाँ पद होता है।
5. बहुलक (Mode)
किसी श्रेणी में सबसे अधिक बार आने वाला मान — अर्थात जिसकी बारंबारता सबसे अधिक हो — बहुलक कहलाता है।
- व्यक्तिगत श्रेणी: 9, 10, 12, 15, 15, 18, 21 में 15 दो बार आया है → बहुलक = 15।
- खंडित श्रेणी: सबसे अधिक बारंबारता वाला मान — बच्चों वाले उदाहरण में f = 8 पर X = 2 → बहुलक = 2।
- किसी श्रेणी में एक भी बहुलक न हो, या एक से अधिक बहुलक हों (द्वि-बहुलक, Bimodal), यह संभव है।
सतत श्रेणी
जहाँ L = बहुलक वर्ग (सबसे अधिक बारंबारता वाला वर्ग) की निम्न सीमा, f₁ = बहुलक वर्ग की बारंबारता, f₀ = उससे पहले वाले वर्ग की बारंबारता, f₂ = उसके बाद वाले वर्ग की बारंबारता।
बहुलक वर्ग 20–30 (f₁ = 10), f₀ = 5, f₂ = 9, h = 10। बहुलक = 20 + [(10 − 5)/(20 − 5 − 9)] × 10 = 20 + (5/6) × 10 = 20 + 8.33 = 28.33।
बहुलक को आयतचित्र से आलेखी विधि द्वारा भी ज्ञात किया जा सकता है — सबसे ऊँचे आयत के ऊपरी कोनों को आसन्न आयतों के कोनों से तिरछी रेखाओं द्वारा मिलाएँ; उनके प्रतिच्छेद बिंदु से x-अक्ष पर डाला गया लंब बहुलक देता है।
6. माध्य, माध्यिका और बहुलक का संबंध
हमारे 30 छात्रों के उदाहरण में: माध्य = 27.67, माध्यिका = 28, बहुलक = 28.33 — तीनों लगभग बराबर हैं, क्योंकि वितरण लगभग सममित है।
- सममित वितरण (Symmetrical): माध्य = माध्यिका = बहुलक।
- धनात्मक विषम (Positively Skewed — दायाँ लंबा सिरा): बहुलक < माध्यिका < माध्य। आय का वितरण प्रायः ऐसा होता है — कुछ बहुत ऊँची आय वाले माध्य को ऊपर खींचते हैं।
- ऋणात्मक विषम (बायाँ लंबा सिरा): माध्य < माध्यिका < बहुलक।
जाँच (30 छात्र): 3 × 28 − 2 × 27.67 = 84 − 55.33 = 28.67, जो परिकलित बहुलक 28.33 के निकट है।
7. विशेष स्थितियाँ और व्यावहारिक सावधानियाँ
(क) समावेशी वर्ग
यदि वर्ग समावेशी रूप में दिए हों (जैसे 10–19, 20–29), तो माध्य की गणना में वर्ग-चिह्न सीधे लिए जा सकते हैं (14.5, 24.5, …), क्योंकि समायोजन से वर्ग-चिह्न नहीं बदलते। पर माध्यिका और बहुलक के सूत्रों में L (निम्न सीमा) का उपयोग होता है, इसलिए पहले वर्गों को अपवर्जी बनाना (9.5–19.5, 19.5–29.5) आवश्यक है; अन्यथा उत्तर 0.5 से गलत हो जाएगा।
(ख) खुले सिरे वाले वर्ग
कभी-कभी पहला वर्ग "10 से कम" या अंतिम वर्ग "50 और अधिक" के रूप में दिया जाता है। ऐसे वर्गों का वर्ग-चिह्न निश्चित नहीं होता, इसलिए माध्य ज्ञात करना कठिन है (अनुमान लगाना पड़ता है)। माध्यिका और बहुलक पर इसका प्रभाव प्रायः नहीं पड़ता, क्योंकि वे बीच के वर्गों से निकलते हैं। यह भी एक कारण है कि आय-वितरण के आँकड़ों में माध्यिका अधिक लोकप्रिय है।
(ग) संचयी बारंबारता से मूल बारंबारता
यदि प्रश्न में "से कम" संचयी बारंबारताएँ दी हों (जैसे 10 से कम: 4, 20 से कम: 12, 30 से कम: 26), तो पहले उन्हें घटाकर साधारण बारंबारता बनाएँ (4, 8, 14, …), फिर माध्य या बहुलक ज्ञात करें। माध्यिका सीधे संचयी बारंबारता से ही निकल जाती है।
(घ) अर्थशास्त्र में औसत का उपयोग — प्रति व्यक्ति आय
किसी देश की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) एक समांतर माध्य ही है — राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या। यह देशों की तुलना के लिए उपयोगी है, पर इसकी एक सीमा है: यदि आय कुछ लोगों में केंद्रित है, तो प्रति व्यक्ति आय ऊँची होने पर भी अधिकांश लोग गरीब हो सकते हैं। इसीलिए अर्थशास्त्री आय वितरण के अध्ययन में माध्यिका आय और अन्य मापों का भी उपयोग करते हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि सही माप का चुनाव निष्कर्ष को कितना प्रभावित कर सकता है।
8. तुलना : कौन-सी माप कब?
| आधार | माध्य | माध्यिका | बहुलक |
|---|---|---|---|
| सभी प्रेक्षणों पर आधारित | हाँ | नहीं | नहीं |
| चरम मानों से प्रभावित | बहुत अधिक | नहीं | नहीं |
| खुले सिरे वाले वर्ग | कठिन | संभव | संभव |
| गुणात्मक आँकड़े | नहीं | क्रम हो तो (जैसे ग्रेड) | हाँ |
| आलेखी विधि | नहीं | तोरण से | आयतचित्र से |
| सर्वोत्तम उपयोग | सममित आँकड़े; आगे की गणना (जैसे औसत उत्पादन) | विषम आँकड़े (आय, संपत्ति); क्रमबद्ध गुण | सबसे लोकप्रिय आकार/पसंद (जूतों का नाप, फ़ैशन) |
एक जूता विक्रेता को यह जानना है कि कौन-सा नाप सबसे अधिक स्टॉक में रखे — उसके लिए बहुलक उपयुक्त है (औसत नाप 7.36 का कोई जूता नहीं होता!)। किसी देश में "सामान्य परिवार की आय" जाननी हो तो माध्यिका बेहतर है। किसी फ़सल का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन जानना हो तो माध्य।
9. मास्टर तालिका : सभी सूत्र
| माप | सूत्र |
|---|---|
| माध्य (व्यक्तिगत) | ΣX/N; A + Σd/N |
| माध्य (खंडित) | ΣfX/Σf; A + Σfd/Σf |
| माध्य (सतत) | Σfm/Σf; A + (Σfd′/Σf) × h |
| भारित माध्य | ΣWX/ΣW |
| माध्यिका (व्यक्तिगत/खंडित) | (N+1)/2वाँ पद |
| माध्यिका (सतत) | L + [(N/2 − c.f.)/f] × h |
| Q₁, Q₃ (सतत) | L + [(N/4 − c.f.)/f] × h; L + [(3N/4 − c.f.)/f] × h |
| बहुलक (सतत) | L + [(f₁ − f₀)/(2f₁ − f₀ − f₂)] × h |
| अनुभवजन्य संबंध | बहुलक = 3 माध्यिका − 2 माध्य |
| माध्य का गुण | Σ(X − X̄) = 0 |
10. मास्टर सारांश तालिका
| माप | प्रकृति | मुख्य लाभ | मुख्य दोष |
|---|---|---|---|
| माध्य | गणितीय औसत | सभी मानों पर आधारित | चरम मानों से प्रभावित |
| माध्यिका | स्थिति-संबंधी (मध्य) | चरम मानों से अप्रभावित | सभी मानों पर आधारित नहीं |
| बहुलक | सबसे अधिक बारंबारता | गुणात्मक आँकड़ों में भी | कभी-कभी अपरिभाषित या अनेक |
11. माइंड मैप
- प्रत्यक्ष, कल्पित, पद-विचलन
- भारित माध्य
- (N+1)/2, सूत्र
- चतुर्थक, शतमक
- अधिकतम बारंबारता
- सतत सूत्र
- Mo = 3Md − 2X̄
- सममित, विषम
12. टिप्स और ट्रिक्स
- सतत श्रेणी के प्रश्न में पहले वर्ग-चिह्न, cf और d′ के स्तंभ एक ही सारणी में बना लें — माध्य, माध्यिका, बहुलक तीनों एक साथ निकल जाएँगे।
- माध्यिका से पहले हमेशा आँकड़े क्रम में लगाएँ।
- उत्तर की जाँच: सामान्य वितरण में तीनों माप एक-दूसरे के निकट होने चाहिए।
- माध्यिका सूत्र में "माध्यिका वर्ग की cf" लेना — सही है "पिछले वर्ग की cf"।
- सतत श्रेणी में माध्यिका के लिए (N+1)/2 लेना — सतत में N/2 लिया जाता है।
- बहुलक सूत्र में f₀ और f₂ उलट देना।
13. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- माध्य से विचलनों का योग शून्य होता है।
- माध्यिका श्रेणी को दो बराबर भागों में बाँटती है।
- Q₂ माध्यिका के बराबर होता है।
- सममित वितरण में माध्य = माध्यिका = बहुलक।
- आय के आँकड़ों के लिए माध्यिका प्रायः सबसे उपयुक्त है।
- बहुलक को आयतचित्र से आलेखी रूप में ज्ञात किया जा सकता है।
- माध्यिका को तोरण से आलेखी रूप में ज्ञात किया जा सकता है।
- समावेशी वर्गों में माध्यिका और बहुलक निकालने से पहले वर्गों को अपवर्जी बनाना आवश्यक है।
- खुले सिरे वाले वर्गों में माध्य की गणना कठिन होती है, पर माध्यिका और बहुलक आसानी से निकल जाते हैं।
- प्रति व्यक्ति आय समांतर माध्य का एक प्रमुख आर्थिक उदाहरण है।
- भारित माध्य में अधिक महत्वपूर्ण प्रेक्षणों को अधिक भार देकर उनके प्रभाव को बढ़ाया जाता है।
- धनात्मक विषम वितरण में बहुलक सबसे छोटा और माध्य सबसे बड़ा होता है, जबकि माध्यिका इन दोनों के बीच रहती है।
14. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
चरम मानों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाली माप है:
- माध्यिका
- बहुलक
- समांतर माध्य
- चतुर्थक
उत्तर देखें
माध्य सभी मानों के योग पर आधारित है, इसलिए एक बहुत बड़ा या छोटा मान उसे खींच लेता है। माध्यिका, बहुलक और चतुर्थक स्थिति/बारंबारता पर आधारित हैं।
उत्तर: (ग) समांतर माध्य
आँकड़े 5, 8, 3, 9, 6, 11, 4, 8 की माध्यिका और बहुलक ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
क्रम में: 3, 4, 5, 6, 8, 8, 9, 11; N = 8 (सम)। माध्यिका = (4था + 5वाँ)/2 = (6 + 8)/2 = 7। बहुलक = 8 (दो बार)।
उत्तर: माध्यिका 7, बहुलक 8
10 प्रेक्षणों का माध्य 25 है। उनका योग कितना है?
उत्तर देखें
ΣX = N × X̄ = 10 × 25 = 250।
उत्तर: 250
X: 10, 20, 30, 40, 50 और f: 3, 7, 12, 5, 3। समांतर माध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
fX: 30, 140, 360, 200, 150; ΣfX = 880; Σf = 30। X̄ = 880/30 = 29.33।
उत्तर: 29.33
5 प्रेक्षणों का माध्य 20 था। बाद में पता चला कि एक प्रेक्षण 18 के स्थान पर 28 पढ़ लिया गया था। सही माध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
गलत ΣX = 5 × 20 = 100। सही ΣX = 100 − 28 + 18 = 90। सही माध्य = 90/5 = 18।
उत्तर: 18
एक वितरण में माध्य 40 और माध्यिका 42 है। अनुभवजन्य संबंध से बहुलक ज्ञात कीजिए और विषमता की दिशा बताइए।
उत्तर देखें
बहुलक = 3 × 42 − 2 × 40 = 126 − 80 = 46। माध्य (40) < माध्यिका (42) < बहुलक (46) — ऋणात्मक विषम वितरण।
उत्तर: बहुलक 46; ऋणात्मक विषम
तीन वस्तुओं की कीमतें ₹40, ₹60, ₹30 और खरीदी गई मात्राएँ (भार) 5, 2, 3 हैं। भारित माध्य कीमत ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
ΣWX = 200 + 120 + 90 = 410; ΣW = 10। भारित माध्य = 41।
उत्तर: ₹41
"आय के आँकड़ों के लिए माध्य की तुलना में माध्यिका अधिक उपयुक्त है।" स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखें
आय का वितरण धनात्मक विषम होता है — कुछ लोगों की आय बहुत अधिक होती है, जो माध्य को ऊपर खींच लेती है; इससे माध्य "सामान्य व्यक्ति" की आय से बहुत अधिक दिखता है। माध्यिका चरम मानों से अप्रभावित रहती है और बताती है कि आधे लोग किस आय से कम कमाते हैं — इसलिए यह सामान्य आय का बेहतर प्रतिनिधित्व करती है।
उत्तर: चरम मानों से अप्रभावित होने के कारण
वर्ग: 0–10, 10–20, 20–30, 30–40, 40–50; f: 4, 8, 14, 10, 4। पद-विचलन विधि से माध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
m: 5, 15, 25, 35, 45; A = 25, h = 10; d′: −2, −1, 0, 1, 2; fd′: −8, −8, 0, 10, 8; Σfd′ = 2; Σf = 40। X̄ = 25 + (2/40) × 10 = 25 + 0.5 = 25.5।
उत्तर: 25.5
प्र9 के आँकड़ों से माध्यिका और बहुलक ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखें
cf: 4, 12, 26, 36, 40; N/2 = 20 → माध्यिका वर्ग 20–30 (L = 20, c.f. = 12, f = 14)। माध्यिका = 20 + (20 − 12)/14 × 10 = 20 + 5.71 = 25.71। बहुलक वर्ग 20–30 (f₁ = 14, f₀ = 8, f₂ = 10): बहुलक = 20 + (14 − 8)/(28 − 8 − 10) × 10 = 20 + 6/10 × 10 = 26। तीनों माप (25.5, 25.71, 26) निकट हैं — वितरण लगभग सममित।
उत्तर: माध्यिका 25.71, बहुलक 26
प्र9 के आँकड़ों से Q₁ और Q₃ ज्ञात कीजिए। इनका अर्थ भी बताइए।
उत्तर देखें
N/4 = 10 → वर्ग 10–20 (L = 10, c.f. = 4, f = 8): Q₁ = 10 + (10 − 4)/8 × 10 = 17.5। 3N/4 = 30 → वर्ग 30–40 (L = 30, c.f. = 26, f = 10): Q₃ = 30 + (30 − 26)/10 × 10 = 34। अर्थ: 25% प्रेक्षण 17.5 से कम और 75% प्रेक्षण 34 से कम हैं; बीच के 50% प्रेक्षण 17.5 और 34 के बीच हैं।
उत्तर: Q₁ = 17.5, Q₃ = 34
निम्न स्थितियों में केंद्रीय प्रवृत्ति की कौन-सी माप उपयुक्त है, कारण सहित: (क) एक कपड़ा व्यापारी कमीज़ों के सबसे अधिक बिकने वाले नाप का स्टॉक बढ़ाना चाहता है; (ख) किसी शहर के परिवारों की "सामान्य" आय; (ग) किसी ज़िले में गेहूँ का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन; (घ) छात्रों के ग्रेड (A, B, C, D) का केंद्रीय मान।
उत्तर देखें
(क) बहुलक — सबसे अधिक माँग वाला नाप; औसत नाप का कोई उपयोग नहीं। (ख) माध्यिका — आय का वितरण विषम, चरम मानों का प्रभाव नहीं। (ग) माध्य — कुल उत्पादन और क्षेत्र से सीधा संबंध, सभी मानों का उपयोग, आगे की गणना में सहायक। (घ) माध्यिका या बहुलक — ग्रेड गुणात्मक पर क्रमबद्ध हैं; माध्य संभव नहीं।
उत्तर: (क) बहुलक (ख) माध्यिका (ग) माध्य (घ) माध्यिका/बहुलक
15. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- माध्य: ΣX/N; ΣfX/Σf; A + (Σfd′/Σf)h; भारित ΣWX/ΣW; Σ(X − X̄) = 0।
- माध्यिका: (N+1)/2वाँ पद; सतत: L + [(N/2 − c.f.)/f]h; चतुर्थक N/4, 3N/4।
- बहुलक: अधिकतम बारंबारता; सतत: L + [(f₁ − f₀)/(2f₁ − f₀ − f₂)]h।
- संबंध: बहुलक ≈ 3 माध्यिका − 2 माध्य; सममित में तीनों बराबर।
- माध्य चरम मानों से प्रभावित; आय के लिए माध्यिका; लोकप्रिय नाप के लिए बहुलक।