Class 11 Political Science · Chapter 3 · भारत का संविधान : सिद्धांत और व्यवहार

चुनाव और प्रतिनिधित्व

प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लोकतंत्र, FPTP और समानुपातिक प्रतिनिधित्व, आरक्षित क्षेत्र, सार्वभौमिक मताधिकार और चुनाव आयोग।

NCERT भारत का संविधान : सिद्धांत और व्यवहार + राजनीतिक सिद्धांतCBSE Class 11 13 min read

1. अध्याय एक नज़र में

लोकतंत्र का अर्थ है जनता का शासन। लेकिन करोड़ों लोग हर निर्णय में सीधे भाग नहीं ले सकते, इसलिए वे अपने प्रतिनिधि (representatives) चुनते हैं। प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया ही चुनाव (Election) है। यह अध्याय बताता है कि भारत में चुनाव किस व्यवस्था से होते हैं, संविधान ने सर्वाधिक मत से जीत (FPTP) प्रणाली क्यों चुनी, आरक्षित क्षेत्र क्या हैं, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का महत्त्व क्या है और चुनाव आयोग (Election Commission) स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे कराता है।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष (प्रतिनिधिक) लोकतंत्र।
  • FPTP और समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली का अंतर।
  • आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र और परिसीमन।
  • सार्वभौमिक मताधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार, चुनाव आयोग और चुनाव सुधार।

2. चुनाव और लोकतंत्र

प्रकारअर्थउदाहरण
प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy)नागरिक स्वयं निर्णय लेते हैंप्राचीन यूनान के नगर-राज्य; भारत में ग्राम सभा; स्विट्ज़रलैंड में जनमत-संग्रह
अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधिक लोकतंत्र (Representative Democracy)नागरिक प्रतिनिधि चुनते हैं जो उनकी ओर से शासन करते हैंभारत की लोकसभा और विधानसभाएँ

प्रतिनिधिक लोकतंत्र में चुनाव की व्यवस्था बहुत महत्त्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही तय करती है कि वोटों को सीटों में कैसे बदला जाए। संविधान ने इस प्रक्रिया के कुछ मूल नियम स्वयं तय किए और बाकी के लिए संसद को कानून बनाने का अधिकार दिया — जैसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act), 1950 और 1951।

3. चुनाव प्रणालियाँ : FPTP और PR

सर्वाधिक मत से जीत — FPTPसमानुपातिक प्रतिनिधित्व — PR
पूरा देश छोटे निर्वाचन क्षेत्रों में बँटा होता हैबड़े भौगोलिक क्षेत्र या पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र हो सकता है
हर क्षेत्र से एक प्रतिनिधि चुना जाता हैएक क्षेत्र से कई प्रतिनिधि चुने जाते हैं
मतदाता उम्मीदवार को वोट देता हैमतदाता प्रायः दल (party) को वोट देता है
दल को मिली सीटें उसके वोट-प्रतिशत से कम या ज़्यादा हो सकती हैंदल को वोटों के अनुपात में सीटें मिलती हैं
जीतने वाले को बहुमत (50%+) की ज़रूरत नहीं — सबसे अधिक वोट काफ़ीजीत के लिए निर्धारित कोटा या प्रतिशत चाहिए
उदाहरण: ब्रिटेन, भारत (लोकसभा, विधानसभा)उदाहरण: इज़राइल, नीदरलैंड्स
उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, समझने के लिए)

मान लीजिए किसी क्षेत्र में चार उम्मीदवारों को क्रमशः 35%, 30%, 20% और 15% वोट मिले। FPTP में 35% वोट वाला उम्मीदवार जीत जाएगा, भले ही 65% मतदाताओं ने उसे वोट नहीं दिया। इसी कारण कई बार कोई दल लगभग 40% वोट पाकर भी सदन में स्पष्ट बहुमत की सीटें जीत लेता है।

इज़राइल में पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र है; हर दल उम्मीदवारों की सूची देता है और वोटों के अनुपात में सीटें मिलती हैं, बशर्ते दल न्यूनतम सीमा (threshold) पार करे। इससे छोटे दलों को प्रतिनिधित्व मिलता है, पर गठबंधन सरकारें अक्सर अस्थिर रहती हैं।

भारत में PR का उपयोग

भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा और विधान परिषदों के चुनाव में एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) वाली समानुपातिक प्रणाली अपनाई जाती है। इसमें मतदाता उम्मीदवारों को वरीयता क्रम (1, 2, 3...) देता है और जीतने के लिए एक निश्चित कोटा चाहिए।

भारत ने FPTP क्यों अपनाया?

  1. सरलता: आम मतदाता, जिनमें से बहुत-से उस समय पढ़-लिख नहीं सकते थे, आसानी से समझ सकते हैं।
  2. स्पष्ट विकल्प: मतदाता किसी एक व्यक्ति को चुनता है, और उस क्षेत्र का एक स्पष्ट प्रतिनिधि होता है जो उसके प्रति उत्तरदायी है।
  3. स्थिर सरकार: PR में अक्सर किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलता; FPTP सामान्यतः बड़े दलों या गठबंधन को बहुमत देकर स्थिर सरकार बनाता है।
  4. सामाजिक मेलजोल: हर क्षेत्र में कई जातियाँ और समुदाय होते हैं; जीतने के लिए उम्मीदवार को सबका समर्थन चाहिए, इसलिए दल सबको जोड़ने की कोशिश करते हैं।

4. आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र और परिसीमन

FPTP में सामाजिक रूप से कमज़ोर वर्ग शायद ही जीत पाते, क्योंकि वे अधिकांश क्षेत्रों में अल्पसंख्या में होते हैं। इसलिए संविधान ने अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र (Reserved Constituencies) रखे। इन क्षेत्रों में उम्मीदवार केवल SC/ST वर्ग से हो सकता है, पर मतदाता सभी होते हैं। यह पृथक निर्वाचन मंडल (separate electorate) नहीं है, जिसे संविधान सभा ने विभाजनकारी मानकर अस्वीकार किया था।

कौन-सा क्षेत्र आरक्षित होगा, यह परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) तय करता है, जिसे राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं। यह चुनाव आयोग के साथ मिलकर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ खींचता है। वर्तमान परिसीमन (2008 से लागू) के अनुसार लोकसभा की 543 सीटों में से 84 SC और 47 ST के लिए आरक्षित हैं। महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण का कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023) अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।

5. सार्वभौमिक मताधिकार और चुनाव लड़ने का अधिकार

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise): धर्म, जाति, लिंग, शिक्षा या संपत्ति के भेदभाव के बिना हर वयस्क नागरिक को वोट का अधिकार। कई पश्चिमी देशों में महिलाओं और गरीबों को यह अधिकार बहुत संघर्ष के बाद मिला, जबकि भारत ने 1950 से ही सबको दिया।
  • मतदान की आयु पहले 21 वर्ष थी; 61वें संशोधन (1988) ने इसे 18 वर्ष किया।
  • चुनाव लड़ने का अधिकार: लोकसभा और विधानसभा के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष, राज्यसभा और विधान परिषद् के लिए 30 वर्ष। कुछ अपराधों में सज़ा पाए व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते। कोई शैक्षिक योग्यता आवश्यक नहीं, ताकि गरीब और कम पढ़े लोग भी प्रतिनिधि बन सकें।

6. स्वतंत्र चुनाव आयोग

अनुच्छेद 324 के तहत भारत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करता है। पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराते हैं।

  • 1993 से आयोग बहु-सदस्यीय है — एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और दो निर्वाचन आयुक्त।
  • CEC को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी कठिन है, ताकि वह सरकार के दबाव से मुक्त रहे।
  • 2023 के कानून के अनुसार नियुक्ति एक चयन समिति की सिफ़ारिश पर होती है — प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री।
  • कार्य: मतदाता सूची तैयार और अद्यतन करना; चुनाव कार्यक्रम तय करना; आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू करना; दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न देना; ज़रूरत पड़ने पर पुनर्मतदान कराना या चुनाव स्थगित करना।
  • चुनाव के समय पूरी सरकारी मशीनरी आयोग के नियंत्रण में काम करती है।

चुनाव सुधार

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT का प्रयोग; उम्मीदवारों द्वारा संपत्ति और आपराधिक मामलों का हलफ़नामा; NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प (2013 से); मतदाता पहचान पत्र। सुझाए गए सुधार: चुनाव में धनबल और बाहुबल पर रोक, चुनावों का सरकारी वित्तपोषण, आपराधिक पृष्ठभूमि वालों पर कठोर प्रतिबंध।

FPTP • एक क्षेत्र → एक सीट • उम्मीदवार को वोट • सबसे अधिक वोट = जीत • लोकसभा, विधानसभा PR • बड़ा क्षेत्र → कई सीटें • प्रायः दल को वोट • वोट के अनुपात में सीटें • राज्यसभा, राष्ट्रपति (STV)
दो चुनाव प्रणालियों की तुलना (विचार-चित्र)।

7. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
निर्वाचन क्षेत्र (Constituency)वह क्षेत्र जिसके मतदाता एक प्रतिनिधि चुनते हैं
FPTPसबसे अधिक वोट पाने वाला जीतता है
समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR)वोटों के अनुपात में सीटें
एकल संक्रमणीय मत (STV)वरीयता क्रम वाली PR पद्धति
आरक्षित क्षेत्रजहाँ केवल SC/ST उम्मीदवार खड़े हो सकते हैं
परिसीमन (Delimitation)निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ तय करना
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकारहर वयस्क नागरिक को बिना भेदभाव वोट का अधिकार
आदर्श आचार संहिताचुनाव के दौरान दलों-सरकार के लिए नियम
NOTA"उपरोक्त में से कोई नहीं" विकल्प
VVPATवोट की पुष्टि करने वाली पर्ची मशीन

8. मास्टर सारांश तालिका

चुनावप्रणालीमतदाता
लोकसभा, विधानसभाFPTP18+ आयु के सभी नागरिक
राज्यसभाPR (STV)राज्यों के निर्वाचित विधायक
राष्ट्रपतिPR (STV)संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
उपराष्ट्रपतिPR (STV)संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य
पंचायत, नगर निकायFPTPस्थानीय मतदाता (राज्य निर्वाचन आयोग)

चार्ट — लोकसभा की 543 सीटों में आरक्षण (2008 परिसीमन):

सामान्य412
अनुसूचित जाति84
अनुसूचित जनजाति47

9. माइंड मैप

चुनाव और प्रतिनिधित्व
लोकतंत्र
  • प्रत्यक्ष
  • प्रतिनिधिक
प्रणालियाँ
  • FPTP
  • PR, STV
आरक्षण
  • SC 84, ST 47
  • परिसीमन
मताधिकार
  • 18 वर्ष (61वाँ)
  • लड़ने हेतु 25
चुनाव आयोग
  • Art 324
  • EVM, NOTA

10. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • FPTP = "First Past The Post" — दौड़ में जो पहले रेखा पार करे, वही जीते।
  • STV वाले चुनाव "रा-उ-रा-वि": राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा, विधान परिषद्।
  • आयु: वोट 18, लोकसभा 25, राज्यसभा 30।
आम गलतियाँ
  • आरक्षित क्षेत्र में केवल उम्मीदवार SC/ST होता है, मतदाता सभी होते हैं।
  • FPTP में जीतने के लिए 50% से अधिक वोट ज़रूरी नहीं।
  • पंचायत चुनाव भारत निर्वाचन आयोग नहीं, राज्य निर्वाचन आयोग कराता है।

11. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • भारत में लोकसभा के चुनाव FPTP प्रणाली से होते हैं।
  • राज्यसभा के चुनाव एकल संक्रमणीय मत से होते हैं।
  • इज़राइल में समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली है।
  • चुनाव आयोग अनुच्छेद 324 से बना है।
  • चुनाव आयोग 1993 से तीन सदस्यीय है।
  • मतदान की आयु 61वें संशोधन से 18 वर्ष हुई।
  • परिसीमन आयोग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ तय करता है।
  • लोकसभा में 84 सीटें SC और 47 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं।
  • NOTA का विकल्प 2013 से मिला।
  • पृथक निर्वाचन मंडल को संविधान सभा ने अस्वीकार किया।
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पारित हुआ।

12. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव किस प्रणाली से होता है?

  1. FPTP
  2. एकल संक्रमणीय मत द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व
  3. सूची प्रणाली
  4. प्रत्यक्ष जनमत
उत्तर देखें

राष्ट्रपति का चुनाव संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत वाली समानुपातिक प्रणाली से होता है। FPTP लोकसभा-विधानसभा में है; सूची प्रणाली इज़राइल जैसे देशों में।

उत्तर: (ख)

प्र2आसान

भारत में मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष किस संशोधन से की गई?

  1. 42वाँ
  2. 52वाँ
  3. 61वाँ
  4. 73वाँ
उत्तर देखें

61वें संशोधन (1988) द्वारा। 42वाँ मौलिक कर्तव्यों से, 52वाँ दल-बदल से और 73वाँ पंचायतों से जुड़ा है।

उत्तर: (ग) 61वाँ

प्र3आसान

आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र और पृथक निर्वाचन मंडल में क्या अंतर है?

उत्तर देखें

आरक्षित क्षेत्र में केवल SC/ST उम्मीदवार खड़े होते हैं, पर सभी मतदाता वोट देते हैं। पृथक निर्वाचन मंडल में किसी समुदाय के प्रतिनिधि को केवल उसी समुदाय के मतदाता चुनते हैं — इसे विभाजनकारी मानकर अस्वीकार किया गया।

उत्तर: मतदाता सबके या केवल एक समुदाय के

प्र4मध्यम

FPTP और PR प्रणाली में चार अंतर लिखिए।

उत्तर देखें

(1) FPTP में छोटे क्षेत्र, एक प्रतिनिधि; PR में बड़े क्षेत्र, कई प्रतिनिधि। (2) FPTP में उम्मीदवार को, PR में प्रायः दल को वोट। (3) FPTP में सीटें वोट-अनुपात से भिन्न हो सकती हैं; PR में अनुपात में मिलती हैं। (4) FPTP में सबसे अधिक वोट से जीत; PR में कोटा चाहिए।

उत्तर: क्षेत्र, वोट का पात्र, सीट-वोट संबंध, जीत की शर्त

प्र5मध्यम

चुनाव आयोग के प्रमुख कार्य बताइए।

उत्तर देखें

मतदाता सूची बनाना और अद्यतन करना; चुनाव का समय और कार्यक्रम तय करना; नामांकन से परिणाम तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी; आदर्श आचार संहिता लागू करना; राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न देना; गड़बड़ी होने पर पुनर्मतदान या चुनाव रद्द करना।

उत्तर: सूची, कार्यक्रम, आचार संहिता, दलों की मान्यता, निष्पक्षता की रक्षा

प्र6मध्यम

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का क्या महत्त्व है?

उत्तर देखें

यह हर वयस्क नागरिक को बिना धर्म, जाति, लिंग, शिक्षा या संपत्ति के भेद के समान वोट देता है — "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य"। इससे राजनीतिक समानता आती है, गरीब और वंचित वर्ग भी सत्ता को प्रभावित कर पाते हैं और लोकतंत्र वैध बनता है।

उत्तर: राजनीतिक समानता और लोकतंत्र की वैधता

प्र7मध्यम

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की गई है?

उत्तर देखें

यह संवैधानिक निकाय है (अनुच्छेद 324); मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह संसद के विशेष बहुमत से ही हटाया जा सकता है; नियुक्ति के बाद उनकी सेवा-शर्तें उनके अहित में नहीं बदली जा सकतीं; और चुनाव के समय पूरा प्रशासन आयोग के नियंत्रण में रहता है।

उत्तर: संवैधानिक दर्जा, कठिन हटाने की प्रक्रिया, सुरक्षित सेवा-शर्तें

प्र8कठिन

संविधान निर्माताओं ने भारत के लिए FPTP प्रणाली क्यों चुनी? तर्क दीजिए।

उत्तर देखें

(1) सरल — कम साक्षर मतदाता भी समझ सकें। (2) हर क्षेत्र का एक स्पष्ट प्रतिनिधि, जो जनता के प्रति उत्तरदायी हो। (3) सामान्यतः किसी दल या गठबंधन को बहुमत देकर स्थिर सरकार। (4) विविध समाज में उम्मीदवार को कई जातियों-समुदायों का समर्थन चाहिए, इसलिए दल सबको साथ लेकर चलते हैं; कमज़ोर वर्गों के लिए आरक्षित क्षेत्र जोड़े गए।

उत्तर: सरलता, उत्तरदायित्व, स्थिरता और सामाजिक मेलजोल

प्र9कठिन

FPTP प्रणाली की कमियाँ बताइए। क्या भारत को PR अपनाना चाहिए?

उत्तर देखें

कमियाँ: बहुमत से कम वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत सकता है; दल का सीट-अनुपात उसके वोट-अनुपात से बहुत अलग हो सकता है; छोटे दल और बिखरे हुए समूह कम प्रतिनिधित्व पाते हैं। PR अधिक न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व देता है, पर अस्थिर गठबंधन, दल-केंद्रित राजनीति और मतदाता-प्रतिनिधि संबंध कमज़ोर होने का ख़तरा है। भारत के विविध समाज के लिए FPTP के साथ आरक्षण और सुधार अधिक व्यावहारिक माने गए।

उत्तर: कमियाँ हैं, पर विकल्पों के भी जोखिम हैं — संतुलित निर्णय

प्र10कठिन

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है?

उत्तर देखें

धनबल पर नियंत्रण (चुनाव खर्च की सख़्त निगरानी, सरकारी वित्तपोषण); आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों पर रोक; दलों में आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शी चंदा; महिलाओं का बेहतर प्रतिनिधित्व; फ़र्ज़ी ख़बरों और जाति-धर्म के नाम पर वोट माँगने पर कड़ी कार्रवाई; मतदाता जागरूकता। EVM, VVPAT, NOTA और हलफ़नामे जैसे सुधार पहले ही किए जा चुके हैं।

उत्तर: धनबल-बाहुबल पर रोक, पारदर्शिता और जागरूकता

प्र11कठिन

परिसीमन आयोग की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखें

राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त यह आयोग चुनाव आयोग के साथ मिलकर देश भर के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ खींचता है, ताकि हर क्षेत्र में लगभग समान जनसंख्या हो। यह यह भी तय करता है कि किन क्षेत्रों को SC/ST के लिए आरक्षित किया जाए — जहाँ उनकी जनसंख्या का अनुपात अधिक हो। इसके निर्णयों को सामान्यतः न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

उत्तर: क्षेत्रों की सीमा और आरक्षण तय करना

13. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • प्रत्यक्ष बनाम प्रतिनिधिक लोकतंत्र; चुनाव वोटों को सीटों में बदलते हैं।
  • FPTP (लोकसभा, विधानसभा) बनाम PR (इज़राइल); भारत में STV — राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा, विधान परिषद्।
  • FPTP क्यों: सरल, उत्तरदायी, स्थिर, सामाजिक मेलजोल।
  • आरक्षित क्षेत्र (SC 84, ST 47); परिसीमन आयोग; पृथक निर्वाचन मंडल अस्वीकृत।
  • मताधिकार 18 वर्ष (61वाँ संशोधन); लड़ने की आयु 25/30।
  • चुनाव आयोग (324), 3 सदस्य; EVM, VVPAT, NOTA, हलफ़नामा।