Class 11 Political Science · Chapter 4 · भारत का संविधान : सिद्धांत और व्यवहार

कार्यपालिका

संसदीय और अध्यक्षात्मक कार्यपालिका, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद्, स्थायी कार्यपालिका — नौकरशाही।

NCERT भारत का संविधान : सिद्धांत और व्यवहार + राजनीतिक सिद्धांतCBSE Class 11 12 min read

1. अध्याय एक नज़र में

सरकार के तीन अंग होते हैं — विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका (Executive) उन कानूनों और नीतियों को लागू करती है, और न्यायपालिका विवादों का निपटारा करती है। कार्यपालिका में केवल राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि मंत्री और सरकारी कर्मचारी — पूरी नौकरशाही (bureaucracy) — भी शामिल हैं। इस अध्याय में हम कार्यपालिका के प्रकार, भारत में संसदीय कार्यपालिका, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् की शक्तियाँ तथा स्थायी कार्यपालिका की भूमिका समझेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका का अंतर।
  • संसदीय, अध्यक्षात्मक और अर्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्थाएँ।
  • राष्ट्रपति के चुनाव, शक्तियाँ और विवेकाधिकार।
  • प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद् और सामूहिक उत्तरदायित्व; नौकरशाही।

2. कार्यपालिका के प्रकार

आधारप्रकारउदाहरण
कार्यकाल और चयनराजनीतिक कार्यपालिका — चुने हुए नेता, निश्चित अवधि के लिएप्रधानमंत्री, मंत्री
स्थायी कार्यपालिका — योग्यता से नियुक्त अधिकारी, लंबी अवधि तकIAS, IPS अधिकारी, सचिव
व्यवस्थामुख्य विशेषतादेश
संसदीय (Parliamentary)प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख; वह और मंत्रिपरिषद् विधायिका के प्रति उत्तरदायी; राष्ट्राध्यक्ष (राजा या राष्ट्रपति) औपचारिक प्रमुखभारत, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान
अध्यक्षात्मक (Presidential)राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख दोनों; सीधे जनता से चुना जाता है; निश्चित कार्यकाल; विधायिका के प्रति उत्तरदायी नहींअमेरिका, ब्राज़ील, अधिकतर लैटिन अमेरिकी देश
अर्ध-अध्यक्षात्मक (Semi-presidential)राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के पास वास्तविक शक्तियाँ; राष्ट्रपति सीधे चुना जाता है, प्रधानमंत्री विधायिका के प्रति उत्तरदायीफ्रांस, रूस, श्रीलंका
भारत ने संसदीय व्यवस्था क्यों चुनी?

संविधान निर्माता ऐसी कार्यपालिका चाहते थे जो शक्तिशाली तो हो, पर जनता के प्रतिनिधियों के प्रति उत्तरदायी भी रहे। अध्यक्षात्मक व्यवस्था में एक व्यक्ति के हाथ में बहुत शक्ति आ जाने का ख़तरा था। ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीयों को संसदीय व्यवस्था का कुछ अनुभव भी था। इसलिए भारत ने संसदीय कार्यपालिका अपनाई, जिसमें राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख और प्रधानमंत्री वास्तविक प्रमुख है।

3. भारत के राष्ट्रपति

  • चुनाव: अप्रत्यक्ष — एक निर्वाचक मंडल द्वारा, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों (तथा दिल्ली और पुडुचेरी) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं। प्रणाली — एकल संक्रमणीय मत द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व।
  • कार्यकाल: 5 वर्ष; पुनः चुने जा सकते हैं।
  • हटाना: केवल संविधान के उल्लंघन पर महाभियोग (Impeachment) द्वारा — संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से (अनुच्छेद 61)।
  • कार्यकारी शक्तियाँ: सारे सरकारी कार्य राष्ट्रपति के नाम से होते हैं; प्रधानमंत्री, मंत्री, राज्यपाल, न्यायाधीश, चुनाव आयुक्त, राजदूत आदि की नियुक्ति; सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर।
  • विधायी शक्तियाँ: संसद का सत्र बुलाना, लोकसभा भंग करना, अध्यादेश (Ordinance) जारी करना, विधेयक पर स्वीकृति देना।
  • क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72)।

मंत्रिपरिषद् की सलाह और राष्ट्रपति के विवेकाधिकार

अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सलाह के अनुसार कार्य करते हैं। 44वें संशोधन (1978) के बाद राष्ट्रपति सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं, पर दोबारा भेजी गई सलाह मानना अनिवार्य है। फिर भी तीन स्थितियों में राष्ट्रपति अपने विवेक का प्रयोग कर सकते हैं:

  1. सलाह को पुनर्विचार के लिए लौटाना।
  2. संसद द्वारा पारित विधेयक (धन विधेयक को छोड़कर) पर अनिश्चित काल तक निर्णय न लेना — इसे पॉकेट वीटो (Pocket Veto) कहते हैं; जैसे 1986 में राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह ने भारतीय डाक (संशोधन) विधेयक पर किया।
  3. चुनाव के बाद किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर प्रधानमंत्री की नियुक्ति — यह तय करना कि कौन बहुमत का समर्थन जुटा सकता है।

उपराष्ट्रपति 5 वर्ष के लिए संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं; वे राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं और राष्ट्रपति का पद खाली होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति बनते हैं।

4. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद्

संसदीय व्यवस्था में वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् के पास होती है। राष्ट्रपति उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं जिसे लोकसभा में बहुमत का समर्थन हो। प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्री नियुक्त होते हैं।

विषयप्रावधान
सदस्यतामंत्री के लिए संसद सदस्य होना ज़रूरी; जो सदस्य नहीं, उसे 6 महीने के भीतर सदस्य बनना होगा
आकार91वें संशोधन (2003) के अनुसार मंत्रिपरिषद् लोकसभा (या विधानसभा) की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं
मंत्रियों के स्तरकैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री
सामूहिक उत्तरदायित्वमंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी (अनुच्छेद 75); अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है
प्रधानमंत्री की भूमिकामंत्रिपरिषद् का प्रमुख और राष्ट्रपति व मंत्रिपरिषद् के बीच मुख्य कड़ी; विभागों का बँटवारा; नीति का समन्वय

प्रधानमंत्री की शक्ति राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है। जब एक दल को स्पष्ट बहुमत होता है, प्रधानमंत्री बहुत प्रभावशाली होता है। 1989 के बाद के गठबंधन युग में प्रधानमंत्री को सहयोगी दलों से सलाह और समझौता करना पड़ता था, जिससे उसकी स्थिति अपेक्षाकृत कमज़ोर हुई। राज्यों में यही भूमिका राज्यपाल (औपचारिक प्रमुख) और मुख्यमंत्री (वास्तविक प्रमुख) निभाते हैं।

5. स्थायी कार्यपालिका : नौकरशाही

मंत्री नीतियाँ बनाते हैं, पर उन्हें लागू करने का काम प्रशिक्षित सरकारी अधिकारी करते हैं। इन्हें नौकरशाही या लोक सेवा (Civil Services) कहते हैं। इनसे अपेक्षा है कि वे राजनीतिक रूप से तटस्थ (politically neutral) रहें और कोई भी दल सत्ता में हो, नीतियों को ईमानदारी से लागू करें।

सेवाएँभर्तीनियंत्रण
अखिल भारतीय सेवाएँ — IAS, IPS (और IFoS)संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)केंद्र द्वारा नियुक्ति, राज्यों में तैनाती; हटाने का अधिकार केंद्र के पास
केंद्रीय सेवाएँ — IFS, IRS आदिUPSCकेंद्र सरकार
राज्य सेवाएँराज्य लोक सेवा आयोगराज्य सरकार

लोक सेवा आयोगों के सदस्यों का कार्यकाल सुरक्षित है, ताकि भर्ती निष्पक्ष रहे। सरकारी सेवाओं में SC, ST और OBC के लिए आरक्षण है, ताकि नौकरशाही समाज की विविधता को दर्शाए। आलोचना यह है कि नौकरशाही कई बार जनता के प्रति असंवेदनशील, धीमी और राजनीतिक दबाव में आ जाती है; इसलिए सूचना का अधिकार (RTI), 2005 जैसे कदमों से पारदर्शिता बढ़ाई गई।

राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख प्रधानमंत्री + मंत्रिपरिषद् वास्तविक प्रमुख नौकरशाही स्थायी कार्यपालिका लोकसभा उत्तरदायित्व Art 74: सलाह
भारत में संसदीय कार्यपालिका की संरचना (विचार-चित्र)।

6. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
कार्यपालिका (Executive)कानून और नीतियाँ लागू करने वाला अंग
राजनीतिक कार्यपालिकानिर्वाचित नेता — PM, मंत्री
स्थायी कार्यपालिकानियुक्त अधिकारी — नौकरशाही
महाभियोग (Impeachment)संविधान उल्लंघन पर राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया
पॉकेट वीटोविधेयक पर अनिश्चित काल तक निर्णय न लेना
अध्यादेश (Ordinance)संसद सत्र न होने पर राष्ट्रपति का अस्थायी कानून
सामूहिक उत्तरदायित्वपूरी मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति साथ-साथ जवाबदेह
अविश्वास प्रस्तावसरकार में विश्वास न होने का प्रस्ताव — पारित होने पर सरकार गिरती है
गठबंधन सरकारकई दलों द्वारा मिलकर बनी सरकार
राजनीतिक तटस्थताअधिकारी किसी दल का पक्ष न लें

7. मास्टर सारांश तालिका

पदचयनकार्यकालभूमिका
राष्ट्रपतिनिर्वाचक मंडल (अप्रत्यक्ष)5 वर्षऔपचारिक प्रमुख, सीमित विवेकाधिकार
उपराष्ट्रपतिसंसद के दोनों सदन5 वर्षराज्यसभा के सभापति
प्रधानमंत्रीलोकसभा में बहुमत का नेता, राष्ट्रपति द्वारा नियुक्तबहुमत रहने तक (अधिकतम 5 वर्ष लोकसभा अवधि)वास्तविक प्रमुख
मंत्रिपरिषद्PM की सलाह पर नियुक्तPM के साथनीति और प्रशासन; अधिकतम 15%
नौकरशाहीUPSC/राज्य PSC परीक्षास्थायीनीतियों का क्रियान्वयन

चार्ट — मंत्रिपरिषद् की अधिकतम सीमा (543 सदस्यीय लोकसभा पर 15%):

लोकसभा सदस्य543
अधिकतम मंत्री (15%)81

8. माइंड मैप

कार्यपालिका
प्रकार
  • संसदीय, अध्यक्षात्मक
  • अर्ध-अध्यक्षात्मक
राष्ट्रपति
  • अप्रत्यक्ष चुनाव
  • विवेकाधिकार
प्रधानमंत्री
  • वास्तविक प्रमुख
  • सामूहिक उत्तरदायित्व
नौकरशाही
  • IAS, IPS
  • UPSC, तटस्थता

9. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • राष्ट्रपति के तीन विवेकाधिकार "लौ-पॉ-प्र": सलाह लौटाना, पॉकेट वीटो, प्रधानमंत्री चुनना (त्रिशंकु सदन में)।
  • संशोधन: 44वाँ = सलाह एक बार लौटाने का अधिकार; 91वाँ = मंत्रिपरिषद् 15%।
  • अर्ध-अध्यक्षात्मक "फ्रा-रू-श्री": फ्रांस, रूस, श्रीलंका।
आम गलतियाँ
  • मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है, राज्यसभा के प्रति नहीं।
  • राष्ट्रपति धन विधेयक पर पॉकेट वीटो नहीं कर सकते।
  • राष्ट्रपति को केवल "संविधान के उल्लंघन" पर महाभियोग से हटाया जा सकता है।

10. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • भारत में संसदीय कार्यपालिका है।
  • अमेरिका में अध्यक्षात्मक व्यवस्था है।
  • फ्रांस में अर्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था है।
  • राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष है।
  • राष्ट्रपति पर महाभियोग अनुच्छेद 61 के तहत होता है।
  • अनुच्छेद 74 मंत्रिपरिषद् की सलाह से जुड़ा है।
  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति हैं।
  • मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
  • 91वें संशोधन ने मंत्रिपरिषद् का आकार 15% तक सीमित किया।
  • IAS और IPS अखिल भारतीय सेवाएँ हैं।
  • सिविल सेवकों की भर्ती UPSC करता है।

11. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

भारत में वास्तविक कार्यकारी शक्ति किसके पास है?

  1. राष्ट्रपति
  2. उपराष्ट्रपति
  3. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद्
  4. मुख्य न्यायाधीश
उत्तर देखें

संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख हैं और मंत्रिपरिषद् की सलाह पर काम करते हैं; वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् के पास है।

उत्तर: (ग)

प्र2आसान

मंत्रिपरिषद् का आकार लोकसभा की सदस्य संख्या के कितने प्रतिशत तक सीमित है?

  1. 10%
  2. 15%
  3. 20%
  4. 25%
उत्तर देखें

91वें संविधान संशोधन (2003) के अनुसार 15%।

उत्तर: (ख) 15%

प्र3आसान

राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका में अंतर बताइए।

उत्तर देखें

राजनीतिक कार्यपालिका निर्वाचित नेताओं (PM, मंत्री) की होती है जो निश्चित अवधि के लिए नीति तय करते हैं। स्थायी कार्यपालिका योग्यता से चुने अधिकारियों (IAS आदि) की होती है जो लंबी अवधि तक नीतियाँ लागू करते हैं।

उत्तर: निर्वाचित और अस्थायी बनाम नियुक्त और स्थायी

प्र4मध्यम

संसदीय और अध्यक्षात्मक कार्यपालिका में तीन अंतर लिखिए।

उत्तर देखें

(1) संसदीय में राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख अलग होते हैं; अध्यक्षात्मक में दोनों एक ही (राष्ट्रपति)। (2) संसदीय में कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी है और अविश्वास से हटाई जा सकती है; अध्यक्षात्मक में राष्ट्रपति का निश्चित कार्यकाल होता है। (3) संसदीय में मंत्री विधायिका के सदस्य होते हैं; अध्यक्षात्मक में सामान्यतः नहीं।

उत्तर: प्रमुखों का भेद, उत्तरदायित्व और सदस्यता

प्र5मध्यम

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?

उत्तर देखें

अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों, दिल्ली तथा पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं। मतदान एकल संक्रमणीय मत वाली समानुपातिक प्रणाली से होता है।

उत्तर: निर्वाचक मंडल द्वारा, STV प्रणाली से

प्र6मध्यम

सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत क्या है?

उत्तर देखें

मंत्रिपरिषद् एक टीम की तरह लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। कैबिनेट का निर्णय सभी मंत्रियों का निर्णय माना जाता है; असहमत मंत्री को त्यागपत्र देना चाहिए। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है।

उत्तर: पूरी मंत्रिपरिषद् साथ-साथ लोकसभा के प्रति जवाबदेह

प्र7मध्यम

नौकरशाही से राजनीतिक तटस्थता की अपेक्षा क्यों की जाती है?

उत्तर देखें

क्योंकि सरकारें बदलती रहती हैं, पर अधिकारी स्थायी होते हैं। यदि वे किसी दल का पक्ष लें तो प्रशासन निष्पक्ष नहीं रहेगा और नई सरकार की नीतियाँ ठीक से लागू नहीं होंगी। तटस्थ नौकरशाही हर सरकार की वैध नीतियों को ईमानदारी से लागू करती है और नागरिकों से समान व्यवहार करती है।

उत्तर: हर सरकार की नीतियाँ निष्पक्ष रूप से लागू करने हेतु

प्र8कठिन

"राष्ट्रपति केवल नाममात्र का प्रमुख है।" क्या आप सहमत हैं? उत्तर का औचित्य दीजिए।

उत्तर देखें

सामान्यतः हाँ — अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सलाह मानते हैं। परंतु वे पूरी तरह शक्तिहीन नहीं: वे सलाह एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं, गैर-धन विधेयक पर पॉकेट वीटो कर सकते हैं, और त्रिशंकु लोकसभा में प्रधानमंत्री चुनने में विवेक का प्रयोग करते हैं। वे सरकार को सलाह, चेतावनी और प्रोत्साहन भी दे सकते हैं। इसलिए वे औपचारिक प्रमुख हैं पर महत्त्वपूर्ण संवैधानिक संरक्षक भी।

उत्तर: अधिकतर औपचारिक, पर सीमित विवेकाधिकार के साथ

प्र9कठिन

गठबंधन राजनीति ने प्रधानमंत्री की स्थिति को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर देखें

1989 के बाद अक्सर किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला, इसलिए गठबंधन सरकारें बनीं। प्रधानमंत्री को मंत्रिपद बाँटने, नीतियाँ तय करने और बड़े निर्णयों में सहयोगी दलों से सलाह और समझौता करना पड़ा; सहयोगी समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा सकते थे। इससे प्रधानमंत्री की स्वतंत्रता घटी, पर सत्ता का बँटवारा और क्षेत्रीय दलों की भागीदारी बढ़ी। स्पष्ट बहुमत आने पर प्रधानमंत्री की स्थिति फिर मज़बूत होती है।

उत्तर: सहमति और समझौते पर निर्भरता बढ़ी, स्वतंत्रता घटी

प्र10कठिन

भारत ने अध्यक्षात्मक के बजाय संसदीय व्यवस्था क्यों अपनाई?

उत्तर देखें

(1) कार्यपालिका को विधायिका और उसके माध्यम से जनता के प्रति लगातार उत्तरदायी रखना। (2) एक व्यक्ति के हाथ में अत्यधिक शक्ति केंद्रित होने से बचना, जो विविधता भरे नए राष्ट्र के लिए ख़तरनाक हो सकता था। (3) ब्रिटिश शासन में संसदीय संस्थाओं का अनुभव। (4) विविध समूहों को मंत्रिपरिषद् में प्रतिनिधित्व देने की सुविधा।

उत्तर: उत्तरदायित्व, शक्ति-केंद्रीकरण से बचाव, अनुभव और प्रतिनिधित्व

प्र11कठिन

अखिल भारतीय सेवाएँ संघवाद और प्रशासनिक एकता को कैसे जोड़ती हैं?

उत्तर देखें

IAS और IPS अधिकारियों की भर्ती UPSC करता है और नियुक्ति केंद्र करता है, पर वे राज्यों में तैनात होकर राज्य सरकार के अधीन काम करते हैं। अनुशासनात्मक कार्रवाई और हटाने का अधिकार केंद्र के पास है। इससे पूरे देश में प्रशासन का एक समान स्तर बनता है और राज्यों को कुशल अधिकारी मिलते हैं; आलोचक इसे केंद्र का राज्यों पर नियंत्रण भी मानते हैं।

उत्तर: केंद्र द्वारा भर्ती, राज्यों में सेवा — एकरूप प्रशासन

12. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • कार्यपालिका: राजनीतिक (निर्वाचित) + स्थायी (नौकरशाही)।
  • व्यवस्थाएँ: संसदीय (भारत, UK), अध्यक्षात्मक (USA), अर्ध-अध्यक्षात्मक (फ्रांस, रूस, श्रीलंका)।
  • राष्ट्रपति: अप्रत्यक्ष चुनाव, 5 वर्ष, महाभियोग (61); अनुच्छेद 74; विवेक — सलाह लौटाना, पॉकेट वीटो, PM चुनना।
  • PM और मंत्रिपरिषद्: वास्तविक प्रमुख; लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायी; 15% सीमा (91वाँ)।
  • नौकरशाही: IAS/IPS (UPSC), तटस्थता, आरक्षण, RTI से पारदर्शिता।