1. अध्याय एक नज़र में
विधायिका (Legislature) जनता की निर्वाचित संस्था है, जो कानून बनाती है, सरकार के बजट को मंज़ूरी देती है और कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है। संसदीय लोकतंत्र में यह लोकतंत्र का सबसे प्रतिनिधिक अंग है — यहाँ देश के कोने-कोने के लोगों की आवाज़ पहुँचती है और बहस होती है। इस अध्याय में हम भारतीय संसद की संरचना, लोकसभा और राज्यसभा की शक्तियाँ, कानून बनाने की प्रक्रिया, कार्यपालिका पर नियंत्रण के साधन, संसदीय समितियाँ और दल-बदल निरोधक कानून समझेंगे।
- हमें संसद की ज़रूरत क्यों है और द्विसदनीय व्यवस्था क्यों।
- लोकसभा और राज्यसभा की संरचना और शक्तियाँ।
- विधेयक से कानून बनने तक की प्रक्रिया।
- संसद कार्यपालिका पर कैसे नियंत्रण रखती है; समितियाँ और आत्म-नियंत्रण।
2. संसद की आवश्यकता और द्विसदनीय व्यवस्था
संसद केवल कानून नहीं बनाती; यह वाद-विवाद का सबसे खुला मंच है, सरकार को चुनती और हटाती है, संविधान में संशोधन करती है, जनता के धन पर नियंत्रण रखती है और राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति का चुनाव करती है। अनुच्छेद 79 के अनुसार भारतीय संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा शामिल हैं।
जब विधायिका के दो सदन होते हैं, उसे द्विसदनीय (Bicameral) कहते हैं। बड़े और विविध देश प्रायः दो सदन रखते हैं ताकि (1) समाज के सभी वर्गों और देश के सभी क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिल सके, और (2) हर निर्णय पर दूसरी बार विचार हो सके — एक सदन के जल्दबाज़ी में लिए निर्णय को दूसरा सदन जाँच सके। भारत के छह राज्यों — आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश — में भी विधान परिषद् सहित द्विसदनीय विधायिका है।
3. लोकसभा और राज्यसभा
| पक्ष | लोकसभा (House of the People) | राज्यसभा (Council of States) |
|---|---|---|
| प्रतिनिधित्व | जनता का | राज्यों का |
| चुनाव | जनता द्वारा प्रत्यक्ष, FPTP | राज्यों के विधायकों द्वारा अप्रत्यक्ष, STV |
| सदस्य संख्या | 543 निर्वाचित (नामांकित एंग्लो-इंडियन सीटें 104वें संशोधन, 2020 से समाप्त) | अधिकतम 250 — 238 तक निर्वाचित + 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत (साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा से) |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (पहले भंग हो सकती है) | स्थायी सदन — भंग नहीं होता; सदस्य 6 वर्ष के लिए; हर 2 वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त |
| पीठासीन अधिकारी | अध्यक्ष (Speaker) | सभापति (उपराष्ट्रपति) |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
अमेरिका की सीनेट में हर राज्य को समान (दो-दो) सीटें मिलती हैं — इसे समान प्रतिनिधित्व कहते हैं। भारत की राज्यसभा में सीटें जनसंख्या के आधार पर हैं — उत्तर प्रदेश को 31 सीटें, जबकि कई छोटे राज्यों को केवल एक सीट। इसे असमान प्रतिनिधित्व कहते हैं।
शक्तियों की तुलना
- लोकसभा की विशेष शक्तियाँ: धन विधेयक (Money Bill, अनुच्छेद 110) केवल लोकसभा में पेश होता है; राज्यसभा उसे केवल 14 दिन तक रोक सकती है और उसके सुझाव मानना ज़रूरी नहीं। मंत्रिपरिषद् केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है; अविश्वास प्रस्ताव से सरकार को केवल लोकसभा हटा सकती है।
- राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ: अनुच्छेद 249 — राष्ट्रीय हित में राज्य-सूची के विषय पर संसद को कानून बनाने का अधिकार दे सकती है; अनुच्छेद 312 — नई अखिल भारतीय सेवा बनाने का प्रस्ताव पारित कर सकती है।
- समान शक्तियाँ: साधारण विधेयक, संविधान संशोधन, राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति का चुनाव, महाभियोग, न्यायाधीशों को हटाना।
4. कानून कैसे बनता है
किसी कानून का प्रस्ताव विधेयक (Bill) कहलाता है। मंत्री द्वारा रखा गया विधेयक सरकारी विधेयक और साधारण सदस्य द्वारा रखा गया गैर-सरकारी (Private Member's) विधेयक होता है।
- पहला वाचन: विधेयक सदन में पेश होता है और उसका शीर्षक पढ़ा जाता है।
- दूसरा वाचन: विधेयक के सिद्धांतों पर बहस; आवश्यकता होने पर उसे समिति को भेजा जाता है, जो खंड-दर-खंड जाँच कर रिपोर्ट देती है।
- तीसरा वाचन: विधेयक पर मतदान होता है।
- दूसरे सदन में: वही प्रक्रिया दोहराई जाती है।
- गतिरोध होने पर: साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में असहमति हो तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक (Joint Sitting, अनुच्छेद 108) बुला सकते हैं, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं। धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं होती।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: स्वीकृति मिलने पर विधेयक अधिनियम (Act) बन जाता है।
5. कार्यपालिका पर संसद का नियंत्रण
| साधन | कैसे काम करता है |
|---|---|
| बहस और चर्चा | राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव, विधेयकों और नीतियों पर बहस |
| प्रश्नकाल (Question Hour) | बैठक का पहला घंटा; सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं — सरकार को जवाब देना पड़ता है |
| शून्यकाल (Zero Hour) | प्रश्नकाल के बाद, बिना पूर्व सूचना के तात्कालिक मुद्दे उठाना |
| ध्यानाकर्षण और स्थगन प्रस्ताव | किसी गंभीर सार्वजनिक मुद्दे पर तुरंत चर्चा की माँग |
| वित्तीय नियंत्रण | बजट पारित करना; कोई कर या खर्च संसद की अनुमति के बिना नहीं; नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पर लोक लेखा समिति की जाँच |
| अविश्वास प्रस्ताव | लोकसभा का सबसे शक्तिशाली हथियार — पारित होने पर सरकार गिर जाती है |
व्यवहार में, जब सरकार के पास स्पष्ट बहुमत होता है तो संसद का नियंत्रण कमज़ोर हो जाता है; बार-बार के व्यवधान (disruptions) से बहस का समय भी घटता है। फिर भी संसद सरकार को जनता के सामने जवाबदेह बनाए रखने का प्रमुख मंच है।
6. संसदीय समितियाँ और आत्म-नियंत्रण
संसद के पास हर विषय की गहराई से जाँच का समय नहीं होता, इसलिए वह समितियों के माध्यम से काम करती है — इन्हें "लघु संसद (mini-legislatures)" कहा जाता है।
- विभागीय स्थायी समितियाँ (Departmentally Related Standing Committees): विभिन्न मंत्रालयों की माँगों, नीतियों और विधेयकों की जाँच करती हैं; इनमें दोनों सदनों के सदस्य होते हैं।
- लोक लेखा समिति (PAC): सरकारी खर्च की जाँच; परंपरा से इसका अध्यक्ष विपक्ष से होता है।
- संयुक्त संसदीय समिति (JPC): किसी विशेष विधेयक या घोटाले की जाँच के लिए बनाई जाती है।
दल-बदल निरोधक कानून
सांसदों-विधायकों द्वारा लाभ के लिए दल बदलने से सरकारें अस्थिर होती थीं। 52वें संविधान संशोधन (1985) ने दसवीं अनुसूची जोड़कर दल-बदल निरोधक कानून (Anti-Defection Law) बनाया। यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से दल छोड़ता है या दल के निर्देश (whip) के विरुद्ध मतदान करता है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है। निर्णय सदन का अध्यक्ष/सभापति करता है। 91वें संशोधन (2003) ने "एक-तिहाई के विभाजन" को मिली छूट समाप्त कर दी; अब केवल दो-तिहाई सदस्यों के दूसरे दल में विलय को छूट है। आलोचना यह है कि इससे सदस्यों की स्वतंत्र राय पर रोक लगती है।
सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए अध्यक्ष (Speaker) सर्वोच्च अधिकारी है — वह बोलने की अनुमति देता है, अनुशासन बनाए रखता है और यह प्रमाणित करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं।
7. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| द्विसदनीय (Bicameral) | दो सदनों वाली विधायिका |
| विधेयक (Bill) | कानून का प्रस्ताव |
| धन विधेयक (Money Bill) | कर और सरकारी खर्च से संबंधित विधेयक — केवल लोकसभा में पेश |
| संयुक्त बैठक | गतिरोध दूर करने के लिए दोनों सदनों की साथ बैठक |
| प्रश्नकाल | बैठक का पहला घंटा, मंत्रियों से प्रश्न |
| शून्यकाल | बिना पूर्व सूचना के मुद्दे उठाने का समय |
| अविश्वास प्रस्ताव | सरकार को हटाने का लोकसभा का प्रस्ताव |
| लोक लेखा समिति (PAC) | सरकारी खर्च की जाँच करने वाली समिति |
| व्हिप (Whip) | दल का अपने सदस्यों को मतदान का निर्देश |
| दल-बदल | निर्वाचित सदस्य द्वारा दल बदलना — दसवीं अनुसूची से नियंत्रित |
8. मास्टर सारांश तालिका
| शक्ति / प्रावधान | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| धन विधेयक | पेश करना और पारित करना | केवल 14 दिन रोक सकती है |
| अविश्वास प्रस्ताव | हाँ | नहीं |
| राज्य-सूची पर कानून की अनुमति (249) | नहीं | हाँ |
| नई अखिल भारतीय सेवा (312) | नहीं | हाँ |
| संविधान संशोधन, महाभियोग | समान | समान |
| भंग होना | हाँ | नहीं — स्थायी सदन |
चार्ट — संसद की सदस्य संख्या:
9. माइंड मैप
- लोकसभा 543
- राज्यसभा 250
- धन विधेयक
- Art 249, 312
- तीन वाचन
- संयुक्त बैठक (108)
- प्रश्नकाल, बजट
- अविश्वास
- समितियाँ
- दल-बदल कानून
10. टिप्स और ट्रिक्स
- राज्यसभा: 6 वर्ष सदस्य, हर 2 वर्ष में 1/3 रिटायर — "6-2-1/3"।
- अनुच्छेद: 108 संयुक्त बैठक, 110 धन विधेयक, 249 राज्य-सूची, 312 अखिल भारतीय सेवा।
- दल-बदल: 52वाँ संशोधन (1985) → दसवीं अनुसूची।
- संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं, उपराष्ट्रपति नहीं।
- धन विधेयक या संविधान संशोधन पर संयुक्त बैठक नहीं होती।
- राज्यसभा कभी भंग नहीं होती।
11. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर
- भारतीय संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं।
- छह राज्यों में विधान परिषद् है।
- राज्यसभा में 12 सदस्य राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।
- राज्यसभा में राज्यों को जनसंख्या के आधार पर सीटें मिलती हैं।
- धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश होता है।
- राज्यसभा धन विधेयक को 14 दिन तक रोक सकती है।
- संयुक्त बैठक अनुच्छेद 108 के तहत होती है।
- प्रश्नकाल संसद बैठक का पहला घंटा है।
- लोक लेखा समिति का अध्यक्ष परंपरा से विपक्ष से होता है।
- दल-बदल निरोधक कानून 1985 में बना।
- संसदीय समितियों को लघु संसद कहा जाता है।
12. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
धन विधेयक किस सदन में पेश किया जा सकता है?
- केवल राज्यसभा
- केवल लोकसभा
- किसी भी सदन में
- संयुक्त बैठक में
उत्तर देखें
अनुच्छेद 110 के अनुसार धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश होता है; राज्यसभा उसे केवल 14 दिन रोक सकती है।
उत्तर: (ख) केवल लोकसभा
दल-बदल निरोधक कानून किस संशोधन से बना?
- 42वाँ
- 44वाँ
- 52वाँ
- 61वाँ
उत्तर देखें
52वें संशोधन (1985) ने दसवीं अनुसूची जोड़कर दल-बदल पर रोक लगाई।
उत्तर: (ग) 52वाँ
राज्यसभा को स्थायी सदन क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखें
क्योंकि यह कभी भंग नहीं होती। इसके सदस्य 6 वर्ष के लिए चुने जाते हैं और हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं, जिनकी जगह नए सदस्य आते हैं।
उत्तर: यह भंग नहीं होती; एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में बदलते हैं
द्विसदनीय विधायिका के लाभ बताइए।
उत्तर देखें
(1) समाज के सभी वर्गों और देश के सभी क्षेत्रों, विशेषकर राज्यों, को प्रतिनिधित्व मिलता है। (2) हर निर्णय पर दो बार विचार होता है, जिससे जल्दबाज़ी के निर्णय रुकते हैं। (3) राज्यसभा में विशेषज्ञ (मनोनीत सदस्य) भी अपना अनुभव देते हैं।
उत्तर: व्यापक प्रतिनिधित्व और दोबारा विचार
संसद कार्यपालिका पर किन साधनों से नियंत्रण रखती है?
उत्तर देखें
बहस और चर्चा; प्रश्नकाल और शून्यकाल; ध्यानाकर्षण और स्थगन प्रस्ताव; बजट और वित्तीय स्वीकृति, CAG रिपोर्ट पर PAC की जाँच; और अविश्वास प्रस्ताव — जिससे सरकार हटाई जा सकती है।
उत्तर: बहस, प्रश्न, वित्तीय नियंत्रण, अविश्वास प्रस्ताव
राज्यसभा की दो विशेष शक्तियाँ बताइए।
उत्तर देखें
(1) अनुच्छेद 249 — दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय हित में राज्य-सूची के विषय पर संसद को कानून बनाने की अनुमति देना। (2) अनुच्छेद 312 — नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का प्रस्ताव पारित करना। ये शक्तियाँ राज्यों के प्रतिनिधि सदन होने के कारण उसे मिली हैं।
उत्तर: अनुच्छेद 249 और 312
संसदीय समितियों का महत्त्व क्या है?
उत्तर देखें
संसद के पास हर विषय की विस्तृत जाँच का समय नहीं। समितियाँ विधेयकों की खंड-दर-खंड जाँच करती हैं, विशेषज्ञों और जनता की राय लेती हैं, मंत्रालयों के बजट और कामकाज की समीक्षा करती हैं, और दलगत राजनीति से अपेक्षाकृत ऊपर उठकर काम करती हैं। इससे कानूनों की गुणवत्ता और सरकार की जवाबदेही बढ़ती है।
उत्तर: गहन जाँच, विशेषज्ञता और जवाबदेही
भारत में एक साधारण विधेयक के कानून बनने की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर देखें
विधेयक किसी भी सदन में पेश होता है (पहला वाचन)। दूसरे वाचन में उसके सिद्धांतों पर बहस होती है और उसे समिति को भेजा जा सकता है जो खंडवार जाँच कर रिपोर्ट देती है। तीसरे वाचन में मतदान होता है। फिर दूसरे सदन में यही प्रक्रिया होती है। असहमति होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) बुला सकते हैं, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं। अंत में राष्ट्रपति की स्वीकृति से विधेयक अधिनियम बनता है।
उत्तर: तीन वाचन → दूसरा सदन → (संयुक्त बैठक) → राष्ट्रपति की स्वीकृति
दल-बदल निरोधक कानून के लाभ और कमियाँ बताइए।
उत्तर देखें
लाभ: पद या धन के लालच में दल बदलने पर रोक, सरकारों की स्थिरता, मतदाताओं के जनादेश का सम्मान। कमियाँ: सांसद अपनी अंतरात्मा या क्षेत्र के हित में दल के विरुद्ध मत नहीं दे पाते; दल-नेतृत्व की शक्ति बहुत बढ़ जाती है; निर्णय अध्यक्ष के हाथ में होने से पक्षपात और देरी की आशंका रहती है।
उत्तर: स्थिरता बढ़ी, पर सदस्य की स्वतंत्रता घटी
"संसद का कार्यपालिका पर नियंत्रण व्यवहार में कमज़ोर हुआ है।" समीक्षा कीजिए।
उत्तर देखें
जब सरकार के पास बड़ा बहुमत होता है, विधेयक बिना पर्याप्त बहस के पारित हो जाते हैं और अविश्वास प्रस्ताव का भय नहीं रहता; व्हिप के कारण सदस्य स्वतंत्र मत नहीं दे पाते; बार-बार व्यवधान से प्रश्नकाल और बहस का समय घटता है; कई विधेयक समितियों को भेजे बिना पारित होते हैं। फिर भी समितियाँ, प्रश्न, CAG-PAC जाँच और विपक्ष की भूमिका नियंत्रण को जीवित रखते हैं; गठबंधन काल में यह नियंत्रण मज़बूत रहा।
उत्तर: बहुमत, व्हिप और व्यवधान से कमज़ोर, पर साधन अब भी प्रभावी
भारत की राज्यसभा और अमेरिका की सीनेट में प्रतिनिधित्व की तुलना कीजिए।
उत्तर देखें
अमेरिकी सीनेट में हर राज्य को आकार या जनसंख्या की परवाह किए बिना दो सीटें मिलती हैं — समान प्रतिनिधित्व, जो "साथ आने वाले" संघ में राज्यों की बराबरी दर्शाता है। भारत की राज्यसभा में सीटें जनसंख्या के आधार पर हैं — उत्तर प्रदेश 31, छोटे राज्य 1 — असमान प्रतिनिधित्व। इससे बड़े राज्यों का प्रभाव अधिक होता है, पर छोटे राज्यों की आवाज़ कमज़ोर पड़ सकती है।
उत्तर: अमेरिका में समान, भारत में जनसंख्या-आधारित असमान प्रतिनिधित्व
13. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा (अनुच्छेद 79); छह राज्यों में विधान परिषद्।
- लोकसभा: 543, प्रत्यक्ष, 5 वर्ष, धन विधेयक, अविश्वास। राज्यसभा: अधिकतम 250 (12 मनोनीत), स्थायी, 249 और 312।
- कानून: तीन वाचन, समिति, दूसरा सदन, संयुक्त बैठक (108), राष्ट्रपति।
- नियंत्रण: बहस, प्रश्नकाल, शून्यकाल, बजट, PAC, अविश्वास।
- समितियाँ = लघु संसद; दल-बदल कानून (52वाँ, 10वीं अनुसूची; 91वाँ ने विभाजन की छूट हटाई)।