1. अध्याय एक नज़र में
लोकतंत्र का अर्थ केवल दिल्ली में संसद और राज्यों की राजधानियों में विधानसभाएँ नहीं है। असली लोकतंत्र तब है जब गाँव और शहर के लोग अपने स्थानीय मामलों — पानी, सड़क, सफ़ाई, स्कूल — के बारे में स्वयं निर्णय लें। इसी के लिए स्थानीय शासन (Local Government) की व्यवस्था है। इस अध्याय में हम स्थानीय शासन का महत्त्व, भारत में इसका विकास, 73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन तथा इसके क्रियान्वयन की समस्याएँ समझेंगे।
- स्थानीय शासन क्यों ज़रूरी है।
- भारत में स्थानीय शासन का ऐतिहासिक विकास और प्रमुख समितियाँ।
- 73वें संशोधन (पंचायती राज) और 74वें संशोधन (नगरीय निकाय) के प्रावधान।
- ग्यारहवीं और बारहवीं अनुसूची, आरक्षण, राज्य चुनाव आयोग, राज्य वित्त आयोग।
- क्रियान्वयन की चुनौतियाँ — फ़ंड, फ़ंक्शन और फ़ंक्शनरी।
2. स्थानीय शासन क्यों?
स्थानीय शासन वह सरकार है जो गाँव या ज़िले या शहर के स्तर पर काम करती है और आम आदमी के सबसे नज़दीक होती है। इसके कई लाभ हैं:
- लोगों की भागीदारी: नागरिक सीधे ग्राम सभा या वार्ड सभा में अपनी बात रख सकते हैं।
- स्थानीय समस्याओं का स्थानीय समाधान: गाँव की ज़रूरत गाँव वाले सबसे अच्छी तरह जानते हैं।
- कम ख़र्च, तेज़ काम: छोटे कामों के लिए राज्य या केंद्र तक जाने की ज़रूरत नहीं।
- लोकतंत्र की पाठशाला: स्थानीय निकायों से नए नेता निकलते हैं और लोग लोकतंत्र सीखते हैं।
- सत्ता का विकेंद्रीकरण (Decentralisation): शक्ति कुछ हाथों में सिमटने के बजाय नीचे तक बँटती है।
संविधान लागू होने पर स्थानीय शासन को राज्य सूची का विषय बनाया गया और अनुच्छेद 40 (नीति-निदेशक तत्त्व) में राज्य को ग्राम पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया। पर इसे संवैधानिक दर्जा 1992 में ही मिला। गांधीजी के "ग्राम स्वराज" का विचार इसी विकेंद्रीकरण की प्रेरणा था।
3. भारत में स्थानीय शासन का विकास
| वर्ष / काल | घटना | महत्त्व |
|---|---|---|
| प्राचीन काल | ग्राम "सभा" जैसी संस्थाएँ | गाँव के स्तर पर स्वशासन की परंपरा |
| 1882 | लॉर्ड रिपन का प्रस्ताव | निर्वाचित स्थानीय निकायों की शुरुआत; "स्थानीय स्वशासन का जनक" |
| 1919 | भारत शासन अधिनियम | कई प्रांतों में ग्राम पंचायतें बनीं |
| 1952 | सामुदायिक विकास कार्यक्रम | ग्रामीण विकास में जन-भागीदारी का प्रयास |
| 1957 | बलवंत राय मेहता समिति | त्रिस्तरीय पंचायती राज की सिफ़ारिश; 1959 में राजस्थान (नागौर) से शुरुआत |
| 1977 | अशोक मेहता समिति | द्विस्तरीय व्यवस्था और राजनीतिक दलों की भागीदारी का सुझाव |
| 1986 | एल. एम. सिंघवी समिति | स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफ़ारिश |
| 1992 | 73वाँ और 74वाँ संशोधन | पंचायतों और नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा; 1993 से लागू |
1992 से पहले स्थानीय निकाय पूरी तरह राज्य सरकारों की इच्छा पर निर्भर थे — कई राज्यों में वर्षों तक चुनाव ही नहीं होते थे, निकायों को भंग कर दिया जाता था और उनके पास न पैसा था, न अधिकार।
4. 73वाँ संविधान संशोधन — ग्रामीण स्थानीय शासन
इस संशोधन से संविधान में भाग IX ("पंचायतें") और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई। यह 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ, इसलिए 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| त्रिस्तरीय ढाँचा | ग्राम पंचायत (गाँव) → पंचायत समिति / मंडल (प्रखंड) → ज़िला परिषद (ज़िला)। 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्य बीच का स्तर छोड़ सकते हैं। |
| ग्राम सभा | गाँव के सभी वयस्क मतदाता इसके सदस्य; पंचायत के काम की समीक्षा |
| प्रत्यक्ष चुनाव | तीनों स्तरों के सदस्य जनता द्वारा सीधे चुने जाते हैं |
| कार्यकाल | 5 वर्ष; भंग होने पर 6 महीने के अंदर चुनाव अनिवार्य |
| आरक्षण | SC/ST के लिए जनसंख्या के अनुपात में; कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए (अध्यक्ष पदों पर भी); OBC आरक्षण राज्य तय करते हैं |
| राज्य चुनाव आयोग | पंचायत चुनाव कराने वाली स्वतंत्र संस्था (अनुच्छेद 243K) |
| राज्य वित्त आयोग | हर 5 वर्ष में; राज्य और स्थानीय निकायों के बीच धन-बँटवारे की सिफ़ारिश (अनुच्छेद 243I) |
| विषयों का हस्तांतरण | ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषय — जैसे कृषि, पेयजल, ग्रामीण सड़कें, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन |
बिहार ने 2006 में पंचायतों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया; आज अनेक राज्यों में यह 50% है। PESA अधिनियम, 1996 ने पंचायत व्यवस्था को अनुसूचित (जनजातीय) क्षेत्रों तक बढ़ाया और वहाँ की ग्राम सभा को जल, जंगल, ज़मीन पर विशेष अधिकार दिए।
5. 74वाँ संविधान संशोधन — शहरी स्थानीय शासन
इस संशोधन से भाग IXA ("नगरपालिकाएँ") और बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई। इसमें शहरी निकायों के लिए वही प्रमुख प्रावधान हैं — प्रत्यक्ष चुनाव, 5 वर्ष का कार्यकाल, SC/ST और महिलाओं के लिए आरक्षण, राज्य चुनाव आयोग और राज्य वित्त आयोग।
| निकाय | किस क्षेत्र के लिए |
|---|---|
| नगर पंचायत | गाँव से शहर में बदलते संक्रमणशील क्षेत्र |
| नगर परिषद (नगरपालिका) | छोटे शहर |
| नगर निगम | बड़े शहर (जैसे पटना, दिल्ली, मुंबई) |
बारहवीं अनुसूची में 18 विषय हैं — जैसे शहरी नियोजन, जल आपूर्ति, सफ़ाई और ठोस कचरा प्रबंधन, अग्निशमन, झुग्गी सुधार, जन्म-मृत्यु पंजीकरण। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की लगभग 31% जनसंख्या शहरों में रहती थी, इसलिए शहरी शासन का महत्त्व लगातार बढ़ रहा है।
6. क्रियान्वयन — उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ
उपलब्धियाँ
- सभी राज्यों में नियमित चुनाव होने लगे और स्थानीय निकाय भंग करने की मनमानी घटी।
- पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार देश में 30 लाख से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनमें लगभग आधी महिलाएँ हैं — यह दुनिया में सबसे बड़े जमीनी लोकतांत्रिक प्रयोगों में से एक है।
- दलितों, आदिवासियों और महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला; सामाजिक संरचना में बदलाव आया।
चुनौतियाँ — "तीन F"
- Funds (धन): स्थानीय निकायों की अपनी आय बहुत कम है; वे राज्य और केंद्र के अनुदान पर निर्भर हैं।
- Functions (कार्य): कई राज्यों ने 29 या 18 विषय पूरी तरह हस्तांतरित नहीं किए।
- Functionaries (कर्मचारी): निकायों के पास अपने प्रशिक्षित कर्मचारी कम हैं; नौकरशाही पर निर्भरता।
- "सरपंच-पति" या "मुखिया-पति" प्रथा: कई जगह निर्वाचित महिला की जगह उसके परिवार के पुरुष काम करते हैं।
- ग्राम सभा की बैठकों में कम उपस्थिति और जागरूकता की कमी।
7. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| स्थानीय शासन | गाँव, प्रखंड, ज़िला या शहर स्तर की निर्वाचित सरकार |
| विकेंद्रीकरण | शक्ति को ऊपर से नीचे के स्तरों तक बाँटना |
| ग्राम सभा | गाँव के सभी वयस्क मतदाताओं की सभा |
| ग्राम पंचायत | गाँव स्तर की निर्वाचित इकाई; मुखिया / सरपंच प्रमुख |
| पंचायत समिति | प्रखंड (ब्लॉक) स्तर की इकाई |
| ज़िला परिषद | ज़िला स्तर की सर्वोच्च पंचायत इकाई |
| राज्य चुनाव आयोग | स्थानीय निकायों के चुनाव कराने वाली संस्था |
| राज्य वित्त आयोग | स्थानीय निकायों को धन-बँटवारे की सिफ़ारिश |
| ग्यारहवीं अनुसूची | पंचायतों के 29 विषय |
| बारहवीं अनुसूची | नगर निकायों के 18 विषय |
| PESA, 1996 | अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम |
8. मास्टर सारांश तालिका
| आधार | 73वाँ संशोधन | 74वाँ संशोधन |
|---|---|---|
| क्षेत्र | ग्रामीण | शहरी |
| संविधान का भाग | भाग IX | भाग IXA |
| अनुसूची | ग्यारहवीं — 29 विषय | बारहवीं — 18 विषय |
| इकाइयाँ | ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, ज़िला परिषद | नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम |
| साझा प्रावधान | 5 वर्ष कार्यकाल, प्रत्यक्ष चुनाव, SC/ST व न्यूनतम 1/3 महिला आरक्षण, राज्य चुनाव आयोग, राज्य वित्त आयोग | |
| लागू | 24 अप्रैल 1993 | 1 जून 1993 |
चार्ट — संविधान द्वारा सुझाए गए विषयों की संख्या:
चार्ट — महिलाओं के लिए आरक्षण:
9. माइंड मैप
- भागीदारी
- विकेंद्रीकरण
- रिपन 1882
- मेहता 1957
- त्रिस्तरीय
- 29 विषय
- नगर निकाय
- 18 विषय
- फ़ंड, फ़ंक्शन
- फ़ंक्शनरी
10. टिप्स और ट्रिक्स
- 73 = गाँव, 74 = शहर — छोटी संख्या गाँव, बड़ी संख्या शहर।
- 11वीं अनुसूची = 29, 12वीं = 18 — "11 पर 29, 12 पर 18"।
- समितियाँ क्रम से: बलवंत (1957) → अशोक (1977) → सिंघवी (1986); "ब-अ-सि"।
- पंचायत चुनाव भारत का चुनाव आयोग नहीं, राज्य चुनाव आयोग कराता है।
- संविधान में महिला आरक्षण "कम से कम" एक-तिहाई है, 50% राज्यों का निर्णय है।
- ग्राम सभा और ग्राम पंचायत अलग हैं — सभा सभी मतदाताओं की, पंचायत निर्वाचित सदस्यों की।
11. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर
- लॉर्ड रिपन को भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता है।
- अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के गठन का निर्देश देता है।
- बलवंत राय मेहता समिति ने त्रिस्तरीय पंचायती राज सुझाया।
- पंचायती राज की शुरुआत 1959 में राजस्थान के नागौर से हुई।
- 73वाँ संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
- 24 अप्रैल राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है।
- ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय हैं।
- बारहवीं अनुसूची में 18 विषय हैं।
- बिहार ने 2006 में पंचायतों में 50% महिला आरक्षण दिया।
- PESA अधिनियम 1996 में बना।
- राज्य वित्त आयोग हर पाँच वर्ष में गठित होता है।
12. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
73वाँ संविधान संशोधन किससे संबंधित है?
- नगर निगम
- पंचायती राज
- दल-बदल
- मौलिक कर्तव्य
उत्तर देखें
73वें संशोधन ने ग्रामीण स्थानीय शासन (पंचायतों) को संवैधानिक दर्जा दिया; नगर निकाय 74वें से जुड़े हैं।
उत्तर: (ख) पंचायती राज
पंचायत चुनाव कौन कराता है?
- भारत निर्वाचन आयोग
- राज्य चुनाव आयोग
- ज़िलाधिकारी
- राज्यपाल
उत्तर देखें
अनुच्छेद 243K के तहत हर राज्य में एक राज्य चुनाव आयोग पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराता है।
उत्तर: (ख) राज्य चुनाव आयोग
ग्राम सभा क्या है?
उत्तर देखें
ग्राम सभा गाँव (पंचायत क्षेत्र) के सभी वयस्क पंजीकृत मतदाताओं की सभा है। यह ग्राम पंचायत के कामकाज, बजट और लाभार्थियों की सूची पर चर्चा करती है और पंचायत को जवाबदेह बनाती है।
उत्तर: गाँव के सभी वयस्क मतदाताओं की सभा
1992 से पहले स्थानीय निकाय कमज़ोर क्यों थे?
उत्तर देखें
(1) इन्हें संवैधानिक दर्जा नहीं था; ये राज्य के कानूनों पर निर्भर थे। (2) कई राज्यों में वर्षों तक चुनाव नहीं हुए और निकायों को मनमाने ढंग से भंग किया गया। (3) इनके पास धन और अधिकार बहुत कम थे। (4) महिलाओं और कमज़ोर वर्गों का प्रतिनिधित्व नगण्य था।
उत्तर: संवैधानिक दर्जे, नियमित चुनाव, धन और अधिकारों का अभाव
राज्य वित्त आयोग की भूमिका बताइए।
उत्तर देखें
राज्य वित्त आयोग हर पाँच वर्ष में गठित होता है। यह राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के बीच करों, शुल्कों और अनुदानों के बँटवारे की सिफ़ारिश करता है तथा स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति सुधारने के उपाय सुझाता है। इससे ग्रामीण और शहरी निकायों को नियमित संसाधन मिलने का आधार बनता है।
उत्तर: राज्य और स्थानीय निकायों के बीच धन-बँटवारे की सिफ़ारिश
73वें और 74वें संशोधन में दो समानताएँ और दो अंतर लिखिए।
उत्तर देखें
समानताएँ: दोनों में 5 वर्ष का कार्यकाल और प्रत्यक्ष चुनाव; दोनों में SC/ST और न्यूनतम एक-तिहाई महिला आरक्षण, राज्य चुनाव आयोग व वित्त आयोग। अंतर: 73वाँ ग्रामीण (भाग IX, ग्यारहवीं अनुसूची — 29 विषय), 74वाँ शहरी (भाग IXA, बारहवीं अनुसूची — 18 विषय); 73वें में त्रिस्तरीय ढाँचा, 74वें में आकार के अनुसार तीन प्रकार के निकाय।
उत्तर: साझा चुनाव-आरक्षण प्रावधान; क्षेत्र और विषय-सूची में अंतर
PESA अधिनियम का महत्त्व बताइए।
उत्तर देखें
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 ने पाँचवीं अनुसूची वाले जनजातीय क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था लागू की। इसमें ग्राम सभा को लघु वन उपज, भूमि अधिग्रहण पर परामर्श, स्थानीय बाज़ार और जनजातीय परंपराओं की रक्षा जैसे विशेष अधिकार दिए गए — इससे आदिवासी समुदायों का स्वशासन मज़बूत हुआ।
उत्तर: जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा को विशेष अधिकार
महिला आरक्षण ने स्थानीय शासन को कैसे बदला? इसकी सीमाएँ भी बताइए।
उत्तर देखें
बदलाव: लाखों महिलाएँ पहली बार सार्वजनिक पदों पर पहुँचीं; पेयजल, स्वच्छता, स्कूल जैसे मुद्दों को प्राथमिकता मिली; महिलाओं का आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ी; कई राज्यों ने इसे 50% तक बढ़ाया। सीमाएँ: "मुखिया-पति" जैसी प्रथा में असली निर्णय परिवार के पुरुष लेते हैं; शिक्षा और प्रशिक्षण की कमी; रोटेशन के कारण अनुभव का लाभ नहीं मिल पाता। फिर भी समय के साथ महिलाओं की स्वतंत्र भूमिका बढ़ रही है।
उत्तर: नेतृत्व और प्राथमिकताओं में बदलाव; प्रॉक्सी नेतृत्व और प्रशिक्षण की कमी सीमाएँ
"स्थानीय निकायों को केवल चुनाव नहीं, फ़ंड-फ़ंक्शन-फ़ंक्शनरी चाहिए।" विवेचना कीजिए।
उत्तर देखें
73वें-74वें संशोधन ने नियमित चुनाव तो सुनिश्चित किए, पर विषयों का हस्तांतरण राज्य सरकारों की इच्छा पर छोड़ा। परिणामस्वरूप कई राज्यों ने 29 या 18 विषयों पर वास्तविक अधिकार नहीं दिए (Functions); अपनी कर-आय कम होने से निकाय अनुदान पर निर्भर रहे (Funds); और उनके पास अपने कर्मचारी न होने से योजनाएँ नौकरशाही के हाथ में रहीं (Functionaries)। बिना इन तीनों के निर्वाचित प्रतिनिधि केवल नाम के रह जाते हैं, इसलिए वास्तविक विकेंद्रीकरण के लिए तीनों का हस्तांतरण आवश्यक है।
उत्तर: तीनों F के बिना विकेंद्रीकरण अधूरा
बलवंत राय मेहता और अशोक मेहता समितियों की सिफ़ारिशों की तुलना कीजिए।
उत्तर देखें
बलवंत राय मेहता (1957): सामुदायिक विकास कार्यक्रम की समीक्षा के बाद "लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण" के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, ज़िला परिषद; पंचायत समिति को मुख्य इकाई माना। अशोक मेहता (1977): द्विस्तरीय व्यवस्था — ज़िला परिषद और मंडल पंचायत; ज़िले को मुख्य इकाई; पंचायत चुनावों में राजनीतिक दलों की भागीदारी। अंततः 73वें संशोधन ने त्रिस्तरीय ढाँचा अपनाया, पर छोटे राज्यों को बीच का स्तर छोड़ने की छूट दी।
उत्तर: त्रिस्तरीय बनाम द्विस्तरीय; 73वें संशोधन ने त्रिस्तरीय अपनाया
शहरी स्थानीय शासन का महत्त्व क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर देखें
2011 की जनगणना में लगभग 31% जनसंख्या शहरी थी और यह अनुपात लगातार बढ़ रहा है। तेज़ शहरीकरण से जल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन, आवास, झुग्गी, यातायात और प्रदूषण जैसी समस्याएँ बढ़ी हैं, जो बारहवीं अनुसूची के विषय हैं। इन्हें स्थानीय स्तर पर ही प्रभावी ढंग से सुलझाया जा सकता है। इसलिए सक्षम नगर निकाय, उनकी वित्तीय स्वायत्तता और नागरिक भागीदारी (वार्ड समितियाँ) आवश्यक हैं।
उत्तर: बढ़ता शहरीकरण और शहरी समस्याएँ
13. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- स्थानीय शासन = लोगों के सबसे नज़दीक सरकार; भागीदारी और विकेंद्रीकरण।
- विकास: रिपन 1882 → मेहता 1957 (त्रिस्तरीय) → अशोक मेहता 1977 → सिंघवी 1986 → 73वाँ-74वाँ (1992)।
- 73वाँ: भाग IX, 11वीं अनुसूची (29 विषय), ग्राम सभा, त्रिस्तरीय, 5 वर्ष, 1/3 महिला आरक्षण।
- 74वाँ: भाग IXA, 12वीं अनुसूची (18 विषय), नगर पंचायत / परिषद / निगम।
- राज्य चुनाव आयोग, राज्य वित्त आयोग; PESA 1996; चुनौतियाँ — फ़ंड, फ़ंक्शन, फ़ंक्शनरी।