1. अध्याय एक नज़र में
पिछले अध्याय में हमने उपभोक्ता का अध्ययन किया — वह क्या खरीदता है और क्यों। अब हम बाज़ार के दूसरे पक्ष की ओर चलते हैं — उत्पादक या फर्म (Firm)। एक फर्म आगतों (Inputs) — जैसे श्रम, भूमि, मशीन और कच्चा माल — का उपयोग करके निर्गत (Output) का उत्पादन करती है और उसे बाज़ार में बेचकर लाभ कमाना चाहती है।
उत्पादन के निर्णय लेने के लिए फर्म को दो बातें समझनी होती हैं: (1) आगतों और निर्गत के बीच तकनीकी संबंध क्या है — इसे उत्पादन फलन (Production Function) कहते हैं; और (2) विभिन्न मात्राओं के उत्पादन की लागत (Cost) कितनी होगी। इस अध्याय में हम कुल, औसत और सीमांत उत्पाद, परिवर्ती अनुपात का नियम, पैमाने के प्रतिफल, तथा अल्पकालीन और दीर्घकालीन लागतों का अध्ययन करेंगे।
- उत्पादन फलन; अल्पकाल और दीर्घकाल।
- कुल उत्पाद (TP), औसत उत्पाद (AP), सीमांत उत्पाद (MP) और उनका संबंध।
- ह्रासमान सीमांत उत्पाद / परिवर्ती अनुपात का नियम।
- पैमाने के प्रतिफल: वर्धमान, स्थिर, ह्रासमान।
- अल्पकालीन लागतें: TFC, TVC, TC, AFC, AVC, AC, MC।
- लागत वक्रों के आकार और संबंध; दीर्घकालीन लागतें।
2. उत्पादन फलन (Production Function)
उत्पादन फलन किसी फर्म द्वारा उपयोग किए गए आगतों और उनसे प्राप्त होने वाले अधिकतम निर्गत के बीच तकनीकी संबंध है, दी हुई तकनीक के अंतर्गत।
उत्पादन फलन दी हुई तकनीक पर आधारित होता है। यदि तकनीक में सुधार हो, तो उन्हीं आगतों से अधिक निर्गत मिलेगा — नया उत्पादन फलन बनेगा।
अल्पकाल और दीर्घकाल
| अल्पकाल (Short Run) | दीर्घकाल (Long Run) |
|---|---|
| कम-से-कम एक आगत स्थिर (Fixed) रहता है — जैसे कारखाने का आकार, मशीनें | सभी आगत परिवर्ती (Variable) होते हैं |
| उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल परिवर्ती आगत (जैसे श्रम) बढ़ाया जा सकता है | फर्म संयंत्र का आकार भी बदल सकती है |
| परिवर्ती अनुपात का नियम लागू | पैमाने के प्रतिफल लागू |
अल्पकाल और दीर्घकाल कैलेंडर समय (जैसे 6 महीने या 2 वर्ष) से परिभाषित नहीं होते; ये इस पर निर्भर करते हैं कि सभी आगतों को बदलना संभव है या नहीं। एक छोटी चाय की दुकान के लिए दीर्घकाल कुछ सप्ताह हो सकता है, जबकि एक इस्पात संयंत्र के लिए कई वर्ष।
3. कुल, औसत और सीमांत उत्पाद
- कुल उत्पाद (Total Product — TP): परिवर्ती आगत की दी हुई मात्रा से (अन्य आगत स्थिर रखकर) प्राप्त कुल निर्गत। इसे परिवर्ती आगत का कुल प्रतिफल भी कहते हैं।
- औसत उत्पाद (Average Product — AP): परिवर्ती आगत की प्रति इकाई निर्गत।
- सीमांत उत्पाद (Marginal Product — MP): परिवर्ती आगत की एक अतिरिक्त इकाई लगाने से कुल उत्पाद में होने वाला परिवर्तन।
उत्पादन तालिका (अभ्यास हेतु काल्पनिक आँकड़े; पूँजी स्थिर)
| श्रम (L) | TP | MP | AP | अवस्था |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 10 | 10 | 10 | MP बढ़ रहा है |
| 2 | 24 | 14 | 12 | |
| 3 | 36 | 12 | 12 | MP घट रहा है पर धनात्मक |
| 4 | 44 | 8 | 11 | |
| 5 | 48 | 4 | 9.6 | |
| 6 | 48 | 0 | 8 | |
| 7 | 45 | −3 | 6.43 | MP ऋणात्मक, TP घटता है |
TP, AP और MP का संबंध
- जब MP बढ़ता है → TP बढ़ती दर से बढ़ता है।
- जब MP घटता है पर धनात्मक है → TP घटती दर से बढ़ता है।
- जब MP = 0 → TP अधिकतम (तालिका में L = 6)।
- जब MP ऋणात्मक → TP घटता है।
- जब MP > AP → AP बढ़ता है; MP = AP → AP अधिकतम; MP < AP → AP घटता है। अर्थात MP वक्र, AP वक्र को उसके अधिकतम बिंदु पर ऊपर से काटता है।
किसी कक्षा के 10 छात्रों का औसत अंक 60 है। यदि 11वें छात्र (सीमांत) के अंक 71 हों, तो औसत बढ़कर 61 हो जाएगा; यदि 49 हों, तो औसत घटकर 59 हो जाएगा। अर्थात सीमांत मान औसत से अधिक हो तो औसत बढ़ता है, कम हो तो घटता है — यही संबंध AP-MP, AC-MC पर भी लागू होता है।
4. परिवर्ती अनुपात का नियम (Law of Variable Proportions)
इसे ह्रासमान सीमांत उत्पाद का नियम (Law of Diminishing Marginal Product) भी कहते हैं।
अन्य आगतों को स्थिर रखते हुए यदि किसी एक परिवर्ती आगत की इकाइयाँ लगातार बढ़ाई जाएँ, तो प्रारंभ में उस आगत का सीमांत उत्पाद बढ़ सकता है, पर एक बिंदु के बाद वह अवश्य घटने लगता है, और अंततः ऋणात्मक भी हो सकता है।
तीन अवस्थाएँ
| अवस्था | TP | MP | कारण |
|---|---|---|---|
| I. वर्धमान प्रतिफल | बढ़ती दर से बढ़ता है | बढ़ता है | स्थिर आगत का बेहतर उपयोग; श्रम विभाजन और विशिष्टीकरण |
| II. ह्रासमान प्रतिफल | घटती दर से बढ़ता है, अधिकतम तक | घटता है पर धनात्मक, शून्य तक | स्थिर आगत पर दबाव; परिवर्ती आगत का अनुपात इष्टतम से अधिक |
| III. ऋणात्मक प्रतिफल | घटता है | ऋणात्मक | स्थिर आगत पर अत्यधिक भीड़; श्रमिक एक-दूसरे के काम में बाधा |
एक विवेकशील उत्पादक सदैव दूसरी अवस्था में उत्पादन करता है — पहली अवस्था में आगत बढ़ाते रहना लाभदायक है, और तीसरी में अतिरिक्त आगत लगाने से उत्पादन ही घटता है।
एक छोटे खेत (स्थिर भूमि) पर पहला और दूसरा श्रमिक मिलकर काम बाँट लेते हैं — एक जुताई करता है, दूसरा बीज बोता है — इसलिए दूसरे श्रमिक का अतिरिक्त योगदान पहले से अधिक है। पर जैसे-जैसे और श्रमिक जोड़ते हैं, भूमि वही रहती है; हर नया श्रमिक कम योगदान देता है। बहुत अधिक श्रमिक हो जाएँ तो वे एक-दूसरे के रास्ते में आते हैं और कुल उत्पादन घट भी सकता है।
5. पैमाने के प्रतिफल (Returns to Scale)
दीर्घकाल में सभी आगत परिवर्ती होते हैं। जब सभी आगतों को एक ही अनुपात में बढ़ाया जाता है, तो निर्गत में होने वाले परिवर्तन को पैमाने के प्रतिफल कहते हैं।
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण (सभी आगत दोगुने) |
|---|---|---|
| वर्धमान पैमाने के प्रतिफल (IRS) | निर्गत, आगतों से अधिक अनुपात में बढ़ता है | निर्गत दोगुने से अधिक |
| स्थिर पैमाने के प्रतिफल (CRS) | निर्गत, आगतों के समान अनुपात में बढ़ता है | निर्गत ठीक दोगुना |
| ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल (DRS) | निर्गत, आगतों से कम अनुपात में बढ़ता है | निर्गत दोगुने से कम |
परिवर्ती अनुपात का नियम अल्पकाल का है — केवल एक आगत बदलता है, अन्य स्थिर। पैमाने के प्रतिफल दीर्घकाल के हैं — सभी आगत एक ही अनुपात में बदलते हैं।
6. लागतें : अल्पकाल
अर्थशास्त्र में लागत का अर्थ केवल नकद भुगतान नहीं है। स्पष्ट लागत (Explicit Cost) वह है जो फर्म बाहरी आगतों के लिए वास्तव में भुगतान करती है — मज़दूरी, कच्चा माल, किराया। अंतर्निहित लागत (Implicit Cost) वह है जो फर्म के स्वामी के अपने संसाधनों की अवसर लागत है — जैसे स्वामी की अपनी दुकान का किराया जो वह किसी और को देकर कमा सकता था, या स्वयं के श्रम का मूल्य। आर्थिक लागत = स्पष्ट लागत + अंतर्निहित लागत; इसमें सामान्य लाभ (Normal Profit) भी शामिल माना जाता है — वह न्यूनतम लाभ जो स्वामी को उसी व्यवसाय में बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
उत्पादन के लिए फर्म को आगतों पर व्यय करना पड़ता है। लागत फलन (Cost Function) निर्गत की प्रत्येक मात्रा के उत्पादन की न्यूनतम लागत को दर्शाता है।
| लागत | अर्थ | सूत्र |
|---|---|---|
| कुल स्थिर लागत (TFC) | स्थिर आगतों पर व्यय — उत्पादन शून्य होने पर भी लगती है; निर्गत के साथ नहीं बदलती (किराया, बीमा, स्थायी कर्मचारियों का वेतन) | स्थिर |
| कुल परिवर्ती लागत (TVC) | परिवर्ती आगतों पर व्यय — निर्गत के साथ बदलती है; शून्य निर्गत पर शून्य (कच्चा माल, दैनिक मज़दूरी, बिजली) | — |
| कुल लागत (TC) | स्थिर और परिवर्ती लागत का योग | TC = TFC + TVC |
| औसत स्थिर लागत (AFC) | प्रति इकाई स्थिर लागत | AFC = TFC ÷ q |
| औसत परिवर्ती लागत (AVC) | प्रति इकाई परिवर्ती लागत | AVC = TVC ÷ q |
| औसत कुल लागत (AC / SAC) | प्रति इकाई कुल लागत | AC = TC ÷ q = AFC + AVC |
| सीमांत लागत (MC / SMC) | एक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन से कुल लागत में परिवर्तन | MCₙ = TCₙ − TCₙ₋₁ = TVCₙ − TVCₙ₋₁ |
MC को TVC से भी निकाला जा सकता है, क्योंकि TFC स्थिर है और उसका परिवर्तन शून्य है। साथ ही, सभी MC का योग = TVC (TC नहीं)।
लागत तालिका (अभ्यास हेतु काल्पनिक आँकड़े; TFC = ₹60)
| q | TFC | TVC | TC | AFC | AVC | AC | MC |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 0 | 60 | 0 | 60 | — | — | — | — |
| 1 | 60 | 40 | 100 | 60 | 40 | 100 | 40 |
| 2 | 60 | 70 | 130 | 30 | 35 | 65 | 30 |
| 3 | 60 | 90 | 150 | 20 | 30 | 50 | 20 |
| 4 | 60 | 120 | 180 | 15 | 30 | 45 | 30 |
| 5 | 60 | 165 | 225 | 12 | 33 | 45 | 45 |
| 6 | 60 | 228 | 288 | 10 | 38 | 48 | 63 |
तालिका में देखें: MC पहले घटता (40 → 20) और फिर बढ़ता है; जब MC < AVC, तो AVC घटता है; q = 4 पर MC = AVC = 30 (AVC न्यूनतम); q = 5 पर MC = AC = 45 (AC न्यूनतम); उसके बाद MC > AC, इसलिए AC बढ़ता है।
लागत वक्रों के आकार
- TFC: क्षैतिज रेखा (x-अक्ष के समानांतर)।
- TVC: मूल बिंदु से शुरू; पहले घटती दर से, फिर बढ़ती दर से बढ़ती है (परिवर्ती अनुपात के नियम के कारण)।
- TC: TVC के समान आकार, पर TFC की ऊँचाई से शुरू; TC और TVC के बीच की ऊर्ध्वाधर दूरी सदैव TFC के बराबर।
- AFC: लगातार गिरता है पर कभी शून्य नहीं होता — यह आयताकार अतिपरवलय (Rectangular Hyperbola) है, क्योंकि AFC × q = TFC (स्थिर)।
- AVC, AC, MC: U-आकार के — परिवर्ती अनुपात के नियम के कारण। जब MP बढ़ता है, MC घटता है; जब MP घटता है, MC बढ़ता है।
- AC और AVC के बीच की दूरी = AFC; निर्गत बढ़ने पर यह दूरी घटती जाती है, पर दोनों वक्र कभी मिलते नहीं।
- AC का न्यूनतम बिंदु, AVC के न्यूनतम बिंदु के दाईं ओर होता है।
7. दीर्घकालीन लागतें
दीर्घकाल में सभी आगत परिवर्ती होते हैं, इसलिए कोई स्थिर लागत नहीं होती — केवल दीर्घकालीन औसत लागत (LRAC) और दीर्घकालीन सीमांत लागत (LRMC)।
- LRAC भी सामान्यतः U-आकार का होता है, पर इसका कारण पैमाने के प्रतिफल हैं: वर्धमान पैमाने के प्रतिफल पर LRAC घटता है, स्थिर पर स्थिर रहता है, और ह्रासमान पर बढ़ता है।
- LRMC वक्र, LRAC को उसके न्यूनतम बिंदु पर नीचे से काटता है।
8. समोत्पाद वक्र (Isoquant) और उदाहरण
दीर्घकाल में फर्म दोनों आगतों — श्रम और पूँजी — को बदल सकती है। एक ही मात्रा का निर्गत अलग-अलग आगत-संयोगों से भी बनाया जा सकता है: अधिक श्रम और कम मशीनें, या कम श्रम और अधिक मशीनें।
समोत्पाद वक्र (Isoquant) श्रम और पूँजी के उन सभी संयोगों को दर्शाता है जिनसे समान अधिकतम निर्गत प्राप्त होता है। यह उपभोक्ता के अनधिमान वक्र जैसा है — अंतर यह है कि अनधिमान वक्र समान संतुष्टि दिखाता है, जबकि समोत्पाद वक्र समान निर्गत, जिसे मापा जा सकता है।
- समोत्पाद वक्र बाएँ से दाएँ नीचे ढलता है — एक आगत बढ़ाने पर निर्गत वही रखने के लिए दूसरा आगत घटाना पड़ता है।
- यह सामान्यतः मूल बिंदु की ओर उत्तल होता है — ह्रासमान तकनीकी प्रतिस्थापन की सीमांत दर (MRTS) के कारण।
- ऊँचा समोत्पाद वक्र अधिक निर्गत दर्शाता है; समोत्पाद वक्रों का समूह समोत्पाद मानचित्र (Isoquant Map) कहलाता है।
2 श्रम + 2 पूँजी से 40 इकाई बनती हैं। 4 श्रम + 4 पूँजी से 100 इकाई बनती हैं। पैमाने के प्रतिफल का प्रकार बताइए।
हल: आगत दोगुने (100% वृद्धि), निर्गत 40 से 100 (150% वृद्धि)। निर्गत में वृद्धि का अनुपात आगतों से अधिक है, इसलिए वर्धमान पैमाने के प्रतिफल। यदि निर्गत 80 होता तो स्थिर, और 70 होता तो ह्रासमान।
AP: 20, 25, 25, 22 (श्रम 1 से 4; काल्पनिक आँकड़े)। TP और MP निकालिए।
हल: TP = AP × L: 20, 50, 75, 88। MP: 20, 30, 25, 13। ध्यान दें — L = 2 पर MP (30) > AP (25), इसलिए AP बढ़ा; L = 3 पर MP = AP = 25, इसलिए AP अधिकतम (25) रहा; L = 4 पर MP (13) < AP, इसलिए AP घटा।
MC: 20, 15, 18, 25 (q = 1 से 4), TFC = ₹50 (काल्पनिक आँकड़े)। q = 4 पर TC, AVC और AC निकालिए।
हल: TVC = ΣMC = 20 + 15 + 18 + 25 = ₹78। TC = 50 + 78 = ₹128। AVC = 78/4 = ₹19.5। AC = 128/4 = ₹32।
9. मास्टर तालिका : प्रमुख सूत्र
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| औसत उत्पाद | AP = TP ÷ L |
| सीमांत उत्पाद | MPₙ = TPₙ − TPₙ₋₁ |
| कुल लागत | TC = TFC + TVC |
| औसत स्थिर लागत | AFC = TFC ÷ q |
| औसत परिवर्ती लागत | AVC = TVC ÷ q |
| औसत लागत | AC = TC ÷ q = AFC + AVC |
| सीमांत लागत | MCₙ = TCₙ − TCₙ₋₁ = TVCₙ − TVCₙ₋₁ |
| TVC | ΣMC |
| TFC (किसी भी q पर) | TC − TVC = AFC × q = TC at q=0 |
10. मास्टर सारांश तालिका
| संबंध | नियम |
|---|---|
| MP और TP | MP = 0 पर TP अधिकतम; MP ऋणात्मक पर TP घटता है |
| MP और AP | MP, AP को उसके अधिकतम पर ऊपर से काटता है |
| MC और AVC/AC | MC दोनों को उनके न्यूनतम पर नीचे से काटता है |
| AFC | आयताकार अतिपरवलय; लगातार गिरता |
| U-आकार (अल्पकाल) | परिवर्ती अनुपात का नियम |
| U-आकार (दीर्घकाल) | पैमाने के प्रतिफल |
11. माइंड मैप
- q = f(L, K)
- अल्पकाल, दीर्घकाल
- TP, AP, MP
- परिवर्ती अनुपात
- IRS, CRS, DRS
- LRAC का आकार
- TFC, TVC, TC
- AFC, AVC, AC, MC
12. टिप्स और ट्रिक्स
- लागत तालिका पूरी करनी हो तो पहले q = 0 वाली पंक्ति देखें — वहाँ TC = TFC।
- "MP ऊपर से, MC नीचे से" — MP, AP को अधिकतम पर ऊपर से काटता है; MC, AC को न्यूनतम पर नीचे से।
- MP और MC दर्पण-प्रतिबिंब जैसे हैं: MP बढ़ता है तो MC घटता है।
- ΣMC = TC लिखना — सही: ΣMC = TVC।
- AFC वक्र को x-अक्ष को छूता हुआ बनाना — यह कभी शून्य नहीं होता।
- परिवर्ती अनुपात के नियम और पैमाने के प्रतिफल को एक समझना।
13. महत्वपूर्ण वन-लाइनर
- अल्पकाल में कम-से-कम एक आगत स्थिर होता है।
- MP = 0 होने पर TP अधिकतम होता है।
- विवेकशील उत्पादक दूसरी अवस्था में उत्पादन करता है।
- AFC वक्र आयताकार अतिपरवलय होता है।
- TC और TVC के बीच की दूरी TFC के बराबर रहती है।
- दीर्घकाल में कोई स्थिर लागत नहीं होती।
- आर्थिक लागत में स्पष्ट और अंतर्निहित दोनों लागतें शामिल होती हैं।
- LRAC का U-आकार पैमाने के प्रतिफल के कारण है।
14. परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)
जब सीमांत उत्पाद शून्य होता है, तब कुल उत्पाद:
- शून्य
- अधिकतम
- न्यूनतम
- ऋणात्मक
उत्तर देखें
MP = 0 पर अतिरिक्त इकाई कुछ नहीं जोड़ती, इसलिए TP अधिकतम होता है।
उत्तर: (ख) अधिकतम
स्थिर लागत के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखें
कारखाने का किराया, बीमा प्रीमियम, स्थायी कर्मचारियों का वेतन, ऋण पर ब्याज (कोई दो)।
उत्तर: किराया, बीमा प्रीमियम (उदाहरणार्थ)
AFC वक्र का आकार कैसा होता है?
उत्तर देखें
आयताकार अतिपरवलय — लगातार गिरता, पर कभी अक्षों को नहीं छूता, क्योंकि AFC × q = TFC स्थिर है।
उत्तर: आयताकार अतिपरवलय
TP: 8, 20, 30, 36, 38, 38, 35 (श्रम 1 से 7; काल्पनिक आँकड़े)। MP निकालिए और अवस्थाएँ पहचानिए।
उत्तर देखें
MP: 8, 12, 10, 6, 2, 0, −3। अवस्था I: L = 1–2 (MP बढ़ रहा); अवस्था II: L = 3–6 (MP घटता पर ≥ 0); अवस्था III: L = 7 (MP ऋणात्मक)।
उत्तर: MP 8, 12, 10, 6, 2, 0, −3; अवस्थाएँ I (1–2), II (3–6), III (7)
AC और AVC वक्र निर्गत बढ़ने पर एक-दूसरे के निकट क्यों आते जाते हैं, पर कभी मिलते क्यों नहीं?
उत्तर देखें
AC − AVC = AFC। निर्गत बढ़ने पर AFC लगातार घटता है, इसलिए दोनों वक्रों की दूरी घटती है। पर AFC कभी शून्य नहीं होता (TFC > 0), इसलिए वक्र कभी मिलते नहीं।
उत्तर: उनके बीच की दूरी AFC है जो घटती है पर शून्य नहीं होती
TC: 50, 80, 100, 115, 140, 180 (q = 0 से 5; काल्पनिक आँकड़े)। TFC, TVC और MC निकालिए।
उत्तर देखें
TFC = q = 0 पर TC = 50। TVC = TC − 50: 0, 30, 50, 65, 90, 130। MC: 30, 20, 15, 25, 40।
उत्तर: TFC = 50; TVC 0, 30, 50, 65, 90, 130; MC 30, 20, 15, 25, 40
परिवर्ती अनुपात के नियम और पैमाने के प्रतिफल में अंतर बताइए।
उत्तर देखें
परिवर्ती अनुपात: अल्पकाल; केवल एक आगत बदलता है, अन्य स्थिर; आगतों का अनुपात बदलता है। पैमाने के प्रतिफल: दीर्घकाल; सभी आगत एक ही अनुपात में बदलते हैं; आगतों का अनुपात वही रहता है, केवल पैमाना बदलता है।
उत्तर: अल्पकाल-एक आगत बनाम दीर्घकाल-सभी आगत
अल्पकालीन MC वक्र U-आकार का क्यों होता है?
उत्तर देखें
परिवर्ती अनुपात के नियम के कारण। प्रारंभ में परिवर्ती आगत का MP बढ़ता है, इसलिए अतिरिक्त इकाई बनाने की लागत (MC) घटती है; बाद में MP घटता है, इसलिए MC बढ़ती है।
उत्तर: पहले बढ़ता फिर घटता MP → पहले घटती फिर बढ़ती MC
सिद्ध कीजिए कि MC वक्र, AC वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।
उत्तर देखें
औसत-सीमांत संबंध: जब MC < AC, अतिरिक्त इकाई की लागत औसत से कम है, इसलिए AC घटता है। जब MC > AC, अतिरिक्त इकाई की लागत औसत से अधिक है, इसलिए AC बढ़ता है। अतः AC घटने से बढ़ने की ओर ठीक उसी बिंदु पर मुड़ेगा जहाँ MC = AC — यही AC का न्यूनतम बिंदु है। तालिका में q = 5 पर MC = AC = 45, और AC वहीं न्यूनतम है।
उत्तर: MC < AC पर AC घटता, MC > AC पर बढ़ता; इसलिए MC = AC न्यूनतम AC पर
तीनों प्रकार के पैमाने के प्रतिफल समझाइए और LRAC वक्र के आकार से उनका संबंध बताइए।
उत्तर देखें
सभी आगत दोगुने करने पर — निर्गत दोगुने से अधिक: वर्धमान (IRS); ठीक दोगुना: स्थिर (CRS); दोगुने से कम: ह्रासमान (DRS)। IRS में प्रति इकाई लागत घटती है — LRAC गिरता है; CRS में LRAC स्थिर; DRS में LRAC बढ़ता है। सामान्यतः फर्म पहले IRS, फिर CRS, फिर DRS अनुभव करती है, इसलिए LRAC U-आकार का होता है।
उत्तर: IRS → LRAC गिरता, CRS → स्थिर, DRS → बढ़ता; अतः U-आकार
किसी फर्म का AFC 4 इकाई निर्गत पर ₹25 है। 10 इकाई निर्गत पर AFC क्या होगा? यदि 10 इकाई पर AVC ₹18 हो तो AC और TC ज्ञात कीजिए। (काल्पनिक आँकड़े)
उत्तर देखें
TFC = AFC × q = 25 × 4 = ₹100। 10 इकाई पर AFC = 100/10 = ₹10। AC = AFC + AVC = 10 + 18 = ₹28। TC = AC × q = 28 × 10 = ₹280।
उत्तर: AFC = ₹10, AC = ₹28, TC = ₹280
TP, AP और MP के बीच संबंध का वर्णन कीजिए। एक विवेकशील उत्पादक किस अवस्था में उत्पादन करेगा और क्यों?
उत्तर देखें
MP बढ़ता है → TP बढ़ती दर से बढ़ता है; MP घटता पर धनात्मक → TP घटती दर से बढ़ता है; MP = 0 → TP अधिकतम; MP ऋणात्मक → TP घटता है। MP > AP → AP बढ़ता है; MP = AP → AP अधिकतम; MP < AP → AP घटता है। विवेकशील उत्पादक दूसरी अवस्था में उत्पादन करेगा: पहली अवस्था में हर अतिरिक्त इकाई का योगदान बढ़ रहा है, इसलिए वहाँ रुकना अलाभकारी है; तीसरी अवस्था में अतिरिक्त आगत से TP घटता है, अर्थात लागत बढ़ती है और उत्पादन घटता है। दूसरी अवस्था में ही आगतों का सबसे कुशल उपयोग संभव है।
उत्तर: दूसरी अवस्था (ह्रासमान पर धनात्मक MP)
15. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश
- उत्पादन फलन q = f(L, K); अल्पकाल में कम-से-कम एक आगत स्थिर।
- AP = TP/L, MP = ΔTP; MP = 0 पर TP अधिकतम; MP, AP को अधिकतम पर काटता है।
- परिवर्ती अनुपात: तीन अवस्थाएँ; उत्पादक दूसरी अवस्था में।
- पैमाने के प्रतिफल: IRS, CRS, DRS (दीर्घकाल)।
- TC = TFC + TVC; AC = AFC + AVC; MC = ΔTC = ΔTVC; ΣMC = TVC।
- AFC आयताकार अतिपरवलय; AVC, AC, MC U-आकार; MC दोनों को न्यूनतम पर काटता है।