Class 12 Political Science · Chapter 7 · समकालीन विश्व राजनीति

वैश्वीकरण

वैश्वीकरण की अवधारणा, कारण, राजनीतिक-आर्थिक-सांस्कृतिक परिणाम, भारत और वैश्वीकरण तथा वैश्वीकरण का प्रतिरोध।

NCERT समकालीन विश्व राजनीति + स्वतंत्र भारत में राजनीतिCBSE Class 12 14 min read

1. अध्याय एक नज़र में

आज भारत के किसी छोटे शहर का विद्यार्थी अमेरिका में बने मोबाइल ऐप पर पढ़ाई करता है, चीन में बना फ़ोन इस्तेमाल करता है, कोरियाई ड्रामा देखता है और उसके बड़े भाई-बहन किसी विदेशी कंपनी के लिए भारत में बैठकर काम करते हैं। यह सब वैश्वीकरण (Globalisation) का परिणाम है। इस अध्याय में हम वैश्वीकरण का अर्थ, उसके कारण, उसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिणाम, भारत और वैश्वीकरण तथा वैश्वीकरण के विरोध को समझेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • वैश्वीकरण की अवधारणा — विचारों, पूँजी, वस्तुओं और लोगों का प्रवाह।
  • वैश्वीकरण के कारण — विशेषकर प्रौद्योगिकी।
  • राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिणाम।
  • भारत में 1991 के आर्थिक सुधार।
  • वैश्वीकरण का विरोध — विश्व सामाजिक मंच।

2. वैश्वीकरण की अवधारणा

वैश्वीकरण का मूल अर्थ है प्रवाह (flows) — दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में चीज़ों का आना-जाना। यह प्रवाह चार प्रकार का है:

प्रवाहउदाहरण
विचारलोकतंत्र, मानवाधिकार, पर्यावरण-चेतना, फ़ैशन, संगीत का दुनिया भर में फैलना
पूँजीविदेशी निवेश (FDI), शेयर बाज़ार में विदेशी पैसा, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
वस्तुएँअंतरराष्ट्रीय व्यापार — आयात-निर्यात
लोगबेहतर रोज़गार और शिक्षा के लिए एक देश से दूसरे देश जाना

वैश्वीकरण में ये प्रवाह निरंतर होते हैं और इनसे दुनिया भर में परस्पर जुड़ाव (interconnectedness) बढ़ता है। वैश्वीकरण केवल आर्थिक नहीं — यह एक बहुआयामी अवधारणा है, जिसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलू हैं। इसका प्रभाव हर जगह एक जैसा नहीं होता — कुछ देशों और समुदायों को अधिक लाभ होता है, कुछ को हानि।

ध्यान दें: लोगों का प्रवाह वस्तुओं और पूँजी की तुलना में कम हुआ है, क्योंकि विकसित देश वीज़ा नीतियों से अपनी सीमाओं की सावधानी से रक्षा करते हैं।

3. वैश्वीकरण के कारण

  • प्रौद्योगिकी — सबसे महत्त्वपूर्ण कारण: टेलीग्राफ़, टेलीफ़ोन, माइक्रोचिप, इंटरनेट और मोबाइल ने संचार में क्रांति ला दी — जैसे छपाई ने कभी राष्ट्रवाद को जन्म दिया था। आज विचार, पूँजी और सूचना पलक झपकते दुनिया के किसी भी कोने में पहुँच जाते हैं।
  • परस्पर जुड़ाव की चेतना: दुनिया के एक हिस्से की घटनाओं का प्रभाव दूसरे हिस्से पर पड़ता है — जैसे बर्ड फ़्लू या सुनामी किसी एक देश तक सीमित नहीं रहते; 2008 का वित्तीय संकट या कोविड-19 महामारी सब देशों को प्रभावित करते हैं।
  • वैश्वीकरण कोई नई घटना नहीं — इतिहास में भी व्यापार, धर्म और संस्कृतियों का आदान-प्रदान होता रहा है (जैसे रेशम मार्ग); पर आज की गति और पैमाना अभूतपूर्व है।

4. राजनीतिक परिणाम

दृष्टिकोणतर्क
राज्य की क्षमता घटीकल्याणकारी राज्य की जगह न्यूनतम राज्य (minimalist state) की धारणा आई — राज्य केवल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तक सीमित; बाज़ार आर्थिक-सामाजिक प्राथमिकताओं का निर्धारक बना; बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभाव बढ़ने से सरकारों की स्वायत्तता घटी
राज्य की प्रधानता बनी रहीराज्य अब भी राजनीतिक समुदाय का प्रमुख आधार है; सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विदेश नीति उसी के हाथ में
राज्य और शक्तिशाली हुआउन्नत प्रौद्योगिकी से राज्य अपने नागरिकों के बारे में अधिक जानकारी जुटा सकता है और उन पर बेहतर ढंग से शासन कर सकता है

5. आर्थिक परिणाम

आर्थिक वैश्वीकरण में IMF, विश्व बैंक और WTO जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की बड़ी भूमिका है। दुनिया भर में आयात प्रतिबंध घटे, विदेशी निवेश के लिए देश खुले, पूँजी का प्रवाह तेज़ हुआ।

समर्थकों के तर्कआलोचकों के तर्क
व्यापार बढ़ने से हर देश अपनी विशेषता के क्षेत्र में उत्पादन कर सकता है; आर्थिक वृद्धि और समृद्धिलाभ असमान रूप से बँटते हैं — अमीर और अमीर, गरीब और गरीब; देशों के भीतर और देशों के बीच असमानता बढ़ी
उपभोक्ताओं को सस्ती और बेहतर वस्तुएँ, अधिक विकल्पसरकारें सामाजिक सुरक्षा (स्वास्थ्य, शिक्षा, सब्सिडी) से पीछे हटती हैं; कमज़ोर वर्ग प्रभावित — "पुनः-उपनिवेशीकरण" का आरोप
विदेशी निवेश से रोज़गार और तकनीककिसानों, छोटे उद्योगों और श्रमिकों की असुरक्षा बढ़ी; रोज़गार की अनिश्चितता
पारस्परिक निर्भरता से देशों के बीच सहयोगविकसित देश अपने बाज़ार और कृषि सब्सिडी की रक्षा करते हैं, जबकि विकासशील देशों से बाज़ार खोलने की अपेक्षा

एक मध्यम मार्ग यह है कि वैश्वीकरण से पूरी तरह इनकार न किया जाए, पर सामाजिक सुरक्षा कवच (social safety net) बनाए रखा जाए, ताकि कमज़ोर वर्ग असुरक्षित न हों।

6. सांस्कृतिक परिणाम

  • सांस्कृतिक समरूपता (Cultural Homogenisation): आशंका है कि दुनिया भर में एक ही (प्रायः पश्चिमी, विशेषकर अमेरिकी) संस्कृति फैल जाएगी — इसे "मैक्डोनाल्डीकरण" भी कहा जाता है; बर्गर और नीली जींस की लोकप्रियता इसका प्रतीक है। इससे स्थानीय और पारंपरिक संस्कृतियों के कमज़ोर होने का डर है।
  • सांस्कृतिक विभिन्नीकरण (Cultural Heterogenisation): दूसरी ओर, बाहरी संस्कृति के प्रभाव से हमारी पसंद और विकल्प बढ़ते हैं; संस्कृतियाँ आपस में मिलकर नई चीज़ें बनाती हैं — जैसे खादी के कुर्ते के साथ नीली जींस, या भारतीय स्वाद वाले फ़ास्ट-फ़ूड। संस्कृति स्थिर नहीं, बल्कि बाहरी प्रभावों से समृद्ध होती है।
  • भारतीय संस्कृति भी वैश्वीकरण के माध्यम से दुनिया तक पहुँची है — योग, भारतीय भोजन, बॉलीवुड, आयुर्वेद।

7. भारत और वैश्वीकरण

औपनिवेशिक काल में भारत कच्चे माल का निर्यातक और तैयार माल का आयातक बना। स्वतंत्रता के बाद भारत ने संरक्षणवाद (Protectionism) की नीति अपनाई — घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया, आत्मनिर्भरता पर ज़ोर दिया। इससे कुछ क्षेत्रों में प्रगति हुई, पर स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा और आर्थिक वृद्धि अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ी; विकास दर धीमी रही।

1991 के आर्थिक सुधार

1991 में भारत गंभीर भुगतान-संतुलन संकट में फँस गया — विदेशी मुद्रा भंडार केवल कुछ सप्ताह के आयात के बराबर बचा था। तब प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में नई आर्थिक नीति अपनाई गई — उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG): लाइसेंस राज समाप्त, आयात शुल्क घटाए, विदेशी निवेश को खोला, सार्वजनिक क्षेत्र में विनिवेश। इसके बाद भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ी — विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में।

परस्पर जुड़ा विश्व विचार पूँजी वस्तुएँ लोग मुख्य चालक: प्रौद्योगिकी (इंटरनेट, मोबाइल)
वैश्वीकरण के चार प्रवाह (विचार-चित्र)।

8. वैश्वीकरण का विरोध

  • वामपंथी आलोचना: वैश्वीकरण वैश्विक पूँजीवाद का एक चरण है, जो अमीरों को और अमीर, गरीबों को और गरीब बनाता है; राज्य कमज़ोर होने से गरीबों की रक्षा घटती है।
  • दक्षिणपंथी आलोचना: राजनीतिक रूप से राज्य कमज़ोर होने की चिंता; आर्थिक क्षेत्र में कम से कम कुछ क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और संरक्षणवाद की वापसी की माँग; सांस्कृतिक रूप से परंपराओं के नष्ट होने का डर।
  • वैश्विक विरोध आंदोलन: 1999 में सिएटल में WTO की मंत्री-स्तरीय बैठक के दौरान बड़े प्रदर्शन — अनुचित व्यापार नीतियों के विरुद्ध।
  • विश्व सामाजिक मंच (World Social Forum — WSF): नव-उदारवादी वैश्वीकरण के विरोध में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पर्यावरणवादियों, मज़दूरों, युवाओं और महिला कार्यकर्ताओं का खुला मंच। पहली बैठक 2001 में पोर्टो अलेग्रे (ब्राज़ील) में हुई; चौथी बैठक 2004 में मुंबई में।
  • भारत में विरोध: वामपंथी दलों, इंडियन सोशल फ़ोरम, ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने विरोध किया; बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश, कृषि पर WTO नियमों, और पेटेंट (जैसे नीम और हल्दी के पेटेंट विवाद) का विरोध हुआ; कुछ समूहों ने विदेशी संस्कृति के प्रसार का भी विरोध किया।

9. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
वैश्वीकरणविचारों, पूँजी, वस्तुओं और लोगों का विश्वव्यापी प्रवाह और परस्पर जुड़ाव
उदारीकरणसरकारी नियंत्रण और प्रतिबंधों में ढील
निजीकरणसार्वजनिक क्षेत्र का निजी क्षेत्र को हस्तांतरण
संरक्षणवादघरेलू उद्योगों की विदेशी प्रतिस्पर्धा से रक्षा
न्यूनतम राज्यकेवल कानून-व्यवस्था व सुरक्षा तक सीमित राज्य
बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC)कई देशों में काम करने वाली कंपनी
सांस्कृतिक समरूपताएक संस्कृति (प्रायः पश्चिमी) का सब पर छा जाना
सांस्कृतिक विभिन्नीकरणसंस्कृतियों के मेल से नई, विविध संस्कृतियाँ
सामाजिक सुरक्षा कवचकमज़ोर वर्गों को आर्थिक झटकों से बचाने की व्यवस्था
विश्व सामाजिक मंचनव-उदारवादी वैश्वीकरण के विरोध का वैश्विक मंच (2001)

10. मास्टर सारांश तालिका

पक्षमुख्य बिंदु
अर्थविचार, पूँजी, वस्तु, लोगों का प्रवाह; बहुआयामी; असमान प्रभाव
कारणप्रौद्योगिकी; परस्पर जुड़ाव की चेतना
राजनीतिकराज्य की क्षमता घटी / बनी रही / बढ़ी — तीन दृष्टिकोण
आर्थिकव्यापार-निवेश में वृद्धि; असमानता व सामाजिक सुरक्षा में कमी की आलोचना
सांस्कृतिकसमरूपता (मैक्डोनाल्डीकरण) बनाम विभिन्नीकरण (जींस + कुर्ता)
भारतसंरक्षणवाद → 1991 संकट → LPG सुधार (राव-मनमोहन)
विरोधवाम व दक्षिणपंथी आलोचना; सिएटल 1999; WSF 2001 (पोर्टो अलेग्रे), 2004 (मुंबई)

चार्ट — विश्व सामाजिक मंच की बैठकों का क्रम:

पहली बैठक — पोर्टो अलेग्रे, ब्राज़ील (2001)1
चौथी बैठक — मुंबई, भारत (2004)4

11. माइंड मैप

वैश्वीकरण
अर्थ
  • 4 प्रवाह
  • परस्पर जुड़ाव
कारण
  • प्रौद्योगिकी
  • साझी समस्याएँ
परिणाम
  • राजनीतिक, आर्थिक
  • सांस्कृतिक
भारत
  • 1991 संकट
  • LPG सुधार
विरोध
  • सिएटल 1999
  • WSF 2001

12. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • चार प्रवाह "वि-पूँ-व-लो": विचार, पूँजी, वस्तुएँ, लोग।
  • WSF: "01 ब्राज़ील, 04 मुंबई"।
  • सांस्कृतिक प्रभाव के उत्तर में दोनों पक्ष लिखें: समरूपता + विभिन्नीकरण।
आम गलतियाँ
  • वैश्वीकरण केवल आर्थिक घटना नहीं; यह राजनीतिक और सांस्कृतिक भी है।
  • वैश्वीकरण पूरी तरह नई घटना नहीं; पर आज की गति और पैमाना नया है।
  • लोगों का प्रवाह वस्तुओं और पूँजी जितना मुक्त नहीं हुआ है।

13. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • वैश्वीकरण का मूल अर्थ प्रवाह है।
  • प्रौद्योगिकी वैश्वीकरण का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण है।
  • भारत ने 1991 में नई आर्थिक नीति अपनाई।
  • 1991 में डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे।
  • LPG का अर्थ उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण है।
  • WTO के विरुद्ध सिएटल में 1999 में प्रदर्शन हुए।
  • विश्व सामाजिक मंच की पहली बैठक 2001 में पोर्टो अलेग्रे में हुई।
  • WSF की चौथी बैठक 2004 में मुंबई में हुई।
  • मैक्डोनाल्डीकरण सांस्कृतिक समरूपता का प्रतीक है।
  • वैश्वीकरण में न्यूनतम राज्य की धारणा उभरी।

14. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

वैश्वीकरण का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण क्या है?

  1. युद्ध
  2. प्रौद्योगिकी
  3. धर्म
  4. उपनिवेशवाद
उत्तर देखें

टेलीग्राफ़, टेलीफ़ोन, माइक्रोचिप और इंटरनेट जैसी प्रौद्योगिकी ने विचारों, पूँजी और सूचना के तेज़ प्रवाह को संभव बनाया।

उत्तर: (ख) प्रौद्योगिकी

प्र2आसान

विश्व सामाजिक मंच की पहली बैठक कहाँ हुई?

  1. मुंबई
  2. सिएटल
  3. पोर्टो अलेग्रे
  4. जिनेवा
उत्तर देखें

WSF की पहली बैठक 2001 में ब्राज़ील के पोर्टो अलेग्रे में हुई; चौथी बैठक 2004 में मुंबई में।

उत्तर: (ग) पोर्टो अलेग्रे

प्र3आसान

वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर देखें

वैश्वीकरण का अर्थ है विचारों, पूँजी, वस्तुओं और लोगों का दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में निरंतर प्रवाह, जिससे विश्व के विभिन्न भागों के बीच परस्पर जुड़ाव बढ़ता है। इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आयाम हैं।

उत्तर: चार प्रकार के प्रवाह से बढ़ता विश्वव्यापी जुड़ाव

प्र4मध्यम

वैश्वीकरण के राजनीतिक परिणामों पर तीन दृष्टिकोण लिखिए।

उत्तर देखें

(1) राज्य की क्षमता घटी: कल्याणकारी राज्य की जगह न्यूनतम राज्य; बाज़ार और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ निर्णायक बनीं। (2) राज्य की प्रधानता बनी रही: राज्य अब भी राजनीतिक समुदाय का आधार है और सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विदेश नीति उसी के पास है। (3) राज्य और शक्तिशाली हुआ: उन्नत तकनीक से राज्य नागरिकों के बारे में अधिक सूचना जुटा सकता है और अधिक प्रभावी ढंग से शासन कर सकता है।

उत्तर: क्षमता घटी / प्रधानता बनी / राज्य मज़बूत हुआ

प्र5मध्यम

सांस्कृतिक समरूपता और सांस्कृतिक विभिन्नीकरण में अंतर बताइए।

उत्तर देखें

समरूपता: वैश्वीकरण से प्रभावशाली (प्रायः अमेरिकी) संस्कृति दुनिया भर में फैलकर स्थानीय संस्कृतियों को कमज़ोर कर देती है — "मैक्डोनाल्डीकरण"; सब जगह एक जैसा भोजन, पहनावा, मनोरंजन। विभिन्नीकरण: बाहरी संस्कृति के प्रभाव से विकल्प बढ़ते हैं और संस्कृतियाँ मिलकर नए रूप लेती हैं — जैसे खादी कुर्ते के साथ नीली जींस, भारतीय स्वाद के फ़ास्ट-फ़ूड। इससे संस्कृति अधिक विविध और समृद्ध बनती है।

उत्तर: एकरूपता का ख़तरा बनाम मिश्रण से विविधता

प्र6मध्यम

भारत ने 1991 में आर्थिक सुधार क्यों अपनाए?

उत्तर देखें

स्वतंत्रता के बाद अपनाई गई संरक्षणवादी नीति से विकास दर धीमी रही और लाइसेंस राज से उद्योगों की कुशलता घटी। 1991 में भारत गंभीर भुगतान-संतुलन संकट में फँस गया — विदेशी मुद्रा भंडार केवल कुछ सप्ताह के आयात के लिए बचा था और खाड़ी युद्ध से तेल महँगा हुआ था। इसलिए प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नई आर्थिक नीति अपनाई।

उत्तर: धीमा विकास और 1991 का भुगतान-संतुलन संकट

प्र7मध्यम

भारत में वैश्वीकरण के विरोध के रूप बताइए।

उत्तर देखें

(1) वामपंथी दलों और ट्रेड यूनियनों ने आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और श्रमिकों की असुरक्षा का विरोध किया; (2) इंडियन सोशल फ़ोरम और जन आंदोलनों ने नव-उदारवादी नीतियों पर सवाल उठाए; 2004 में मुंबई में WSF की बैठक हुई; (3) किसान संगठनों ने कृषि पर WTO नियमों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध किया; (4) नीम और हल्दी जैसे पारंपरिक ज्ञान पर विदेशी पेटेंट का विरोध हुआ; (5) कुछ समूहों ने विदेशी उपभोक्ता संस्कृति और टीवी चैनलों के प्रभाव का विरोध किया।

उत्तर: वाम दल, सामाजिक मंच, किसान आंदोलन, पेटेंट विरोध, सांस्कृतिक विरोध

प्र8कठिन

आर्थिक वैश्वीकरण के लाभ और हानियों का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर देखें

लाभ: (1) व्यापार और विदेशी निवेश बढ़ने से आर्थिक वृद्धि; (2) उपभोक्ताओं को सस्ती, बेहतर वस्तुएँ और अधिक विकल्प; (3) तकनीक और प्रबंधन कौशल का प्रसार; (4) भारत में IT और सेवा क्षेत्र में लाखों रोज़गार; (5) पारस्परिक निर्भरता से सहयोग। हानियाँ: (1) लाभ असमान — देशों के बीच और भीतर असमानता बढ़ी; (2) सरकारें सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटीं; (3) किसानों, छोटे उद्योगों और असंगठित श्रमिकों की असुरक्षा; (4) विकसित देश अपनी कृषि सब्सिडी बनाए रखते हुए विकासशील देशों से बाज़ार खोलने की अपेक्षा करते हैं; (5) वित्तीय संकटों का तेज़ी से फैलना (2008)। निष्कर्ष: वैश्वीकरण को नकारने के बजाय मज़बूत सामाजिक सुरक्षा कवच के साथ अपनाना चाहिए।

उत्तर: वृद्धि, विकल्प, रोज़गार बनाम असमानता, असुरक्षा; सुरक्षा कवच के साथ अपनाएँ

प्र9कठिन

"वैश्वीकरण के दौर में राज्य कमज़ोर हुआ है।" इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर देखें

पक्ष में: कल्याणकारी राज्य की जगह न्यूनतम राज्य की धारणा आई; राज्य कई आर्थिक-सामाजिक कार्यों से पीछे हटा; बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ (IMF, WTO) नीतियों को प्रभावित करती हैं; पूँजी के तेज़ प्रवाह से सरकारों की स्वायत्तता घटी। विपक्ष में: राज्य आज भी सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विदेश नीति और नागरिकता का प्रमुख केंद्र है; कई देश अपने हित में व्यापार प्रतिबंध और संरक्षणवादी कदम उठाते हैं; उन्नत तकनीक (डिजिटल पहचान, निगरानी) से राज्य नागरिकों पर पहले से अधिक प्रभावी नियंत्रण रख सकता है; कोविड-19 जैसे संकटों में राज्य की भूमिका और बढ़ी। निष्कर्ष: राज्य की भूमिका बदली है — कुछ क्षेत्रों में घटी, कुछ में बढ़ी — पर राज्य कमज़ोर या अप्रासंगिक नहीं हुआ।

उत्तर: भूमिका बदली है; राज्य अब भी केंद्रीय और कई मामलों में अधिक सक्षम

प्र10कठिन

वैश्वीकरण के विरोध में वामपंथी और दक्षिणपंथी आलोचनाओं की तुलना कीजिए।

उत्तर देखें

वामपंथी आलोचना: वैश्वीकरण विश्वव्यापी पूँजीवाद का विशेष चरण है, जो अमीरों को और अमीर तथा गरीबों को और गरीब बनाता है; राज्य कमज़ोर होने से वह गरीबों के हितों की रक्षा नहीं कर पाता; श्रमिक और किसान असुरक्षित होते हैं। दक्षिणपंथी आलोचना: राजनीतिक दृष्टि से राज्य के कमज़ोर होने और संप्रभुता घटने की चिंता; आर्थिक दृष्टि से कम से कम कुछ क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और संरक्षणवाद की वापसी की माँग; सांस्कृतिक दृष्टि से पारंपरिक संस्कृति और मूल्यों के नष्ट होने का डर। समानता: दोनों राज्य के कमज़ोर होने से चिंतित हैं। अंतर: वामपंथ का ज़ोर आर्थिक असमानता पर, दक्षिणपंथ का संप्रभुता और संस्कृति पर।

उत्तर: वाम — असमानता व वर्ग; दक्षिण — संप्रभुता, आत्मनिर्भरता, संस्कृति

प्र11कठिन

"वैश्वीकरण का प्रभाव सब जगह एक जैसा नहीं होता।" उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखें

(1) देशों के बीच: तकनीक और पूँजी वाले विकसित देश अधिक लाभ उठाते हैं; कई अफ़्रीकी देश पीछे रह गए। (2) देशों के भीतर: भारत में IT, सेवा क्षेत्र और शहरी शिक्षित वर्ग को बड़ा लाभ हुआ, पर असंगठित श्रमिक, छोटे किसान और पारंपरिक कारीगर विदेशी प्रतिस्पर्धा से प्रभावित हुए। (3) लोगों का प्रवाह: पूँजी और वस्तुएँ आसानी से सीमाएँ पार करती हैं, पर लोगों का प्रवाह वीज़ा नियमों से सीमित है — विकसित देश अपनी सीमाओं की कड़ी रक्षा करते हैं। (4) संस्कृति: कुछ संस्कृतियाँ (जैसे अमेरिकी) अधिक प्रभावशाली रहीं, पर भारतीय योग, भोजन, फ़िल्में भी दुनिया में फैलीं। अतः वैश्वीकरण के लाभ-हानि का वितरण असमान है, जिसके लिए उचित नीतियाँ आवश्यक हैं।

उत्तर: देशों, वर्गों, प्रवाहों और संस्कृतियों में असमान प्रभाव

15. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • वैश्वीकरण = विचार, पूँजी, वस्तुएँ, लोगों का प्रवाह; बहुआयामी; असमान प्रभाव; मुख्य कारण प्रौद्योगिकी।
  • राजनीतिक: न्यूनतम राज्य बनाम राज्य की प्रधानता बनाम मज़बूत राज्य।
  • आर्थिक: IMF, विश्व बैंक, WTO; वृद्धि बनाम असमानता; सामाजिक सुरक्षा कवच ज़रूरी।
  • सांस्कृतिक: समरूपता (मैक्डोनाल्डीकरण) बनाम विभिन्नीकरण (जींस + कुर्ता)।
  • भारत: संरक्षणवाद → 1991 संकट → LPG (राव-मनमोहन); विरोध — वाम दल, इंडियन सोशल फ़ोरम; सिएटल 1999; WSF 2001 पोर्टो अलेग्रे, 2004 मुंबई।