Class 12 Political Science · Chapter 6 · स्वतंत्र भारत में राजनीति

लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

आपातकाल की पृष्ठभूमि, आपातकाल की घोषणा, आपातकाल के दौरान क्या हुआ, 1977 के चुनाव और जनता सरकार।

NCERT समकालीन विश्व राजनीति + स्वतंत्र भारत में राजनीतिCBSE Class 12 17 min read

1. अध्याय एक नज़र में

25 जून 1975 की रात देश में आंतरिक आपातकाल (Emergency) घोषित किया गया, जो मार्च 1977 तक चला। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित हुईं, विपक्षी नेता जेल में डाले गए और प्रेस पर सेंसरशिप लगी। यह स्वतंत्र भारत के लोकतंत्र का सबसे बड़ा संकट था। पर 1977 के चुनाव में जनता ने आपातकाल लगाने वाली सरकार को हटा दिया — यह भारतीय लोकतंत्र की शक्ति का प्रमाण था। इस अध्याय में हम आपातकाल की पृष्ठभूमि, घोषणा, परिणाम, सबक और 1977 के बाद की राजनीति समझेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • आपातकाल की पृष्ठभूमि — आर्थिक संकट, गुजरात और बिहार आंदोलन, न्यायपालिका से टकराव।
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय और आपातकाल की घोषणा।
  • आपातकाल के दौरान क्या हुआ — प्रेस सेंसरशिप, गिरफ़्तारियाँ, 42वाँ संशोधन।
  • आपातकाल पर विवाद और उसके सबक।
  • 1977 का चुनाव, जनता पार्टी सरकार और उसका पतन।

2. आपातकाल की पृष्ठभूमि

(क) आर्थिक संदर्भ

  • 1971 के "ग़रीबी हटाओ" के वादे के बाद भी गरीबों की स्थिति में बड़ा सुधार नहीं हुआ।
  • बांग्लादेश संकट से आर्थिक बोझ बढ़ा; युद्ध के बाद अमेरिका ने सहायता बंद कर दी।
  • 1973 में अंतरराष्ट्रीय तेल संकट से तेल की क़ीमतें कई गुना बढ़ीं; महँगाई में भारी वृद्धि; 1972-73 में मानसून की विफलता से खाद्यान्न उत्पादन घटा।
  • बेरोज़गारी, औद्योगिक विकास में कमी, सरकारी कर्मचारियों के वेतन रुकना — जन असंतोष बढ़ा।

(ख) गुजरात और बिहार आंदोलन

आंदोलनविवरण
गुजरात (1974)जनवरी 1974 में खाद्यान्न, खाद्य तेल और अन्य वस्तुओं की बढ़ती क़ीमतों और उच्च पदों पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध छात्र आंदोलन ("नवनिर्माण आंदोलन"); बड़े विपक्षी दल भी जुड़े; राष्ट्रपति शासन लगा; मोरारजी देसाई के अनशन के बाद जून 1975 में चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस हार गई
बिहार (1974)मार्च 1974 में बढ़ती क़ीमतों, खाद्य संकट, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध छात्र आंदोलन; छात्रों ने जयप्रकाश नारायण (JP) को नेतृत्व के लिए आमंत्रित किया; JP ने "संपूर्ण क्रांति" (Total Revolution) का आह्वान किया — सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में बदलाव; बिहार की कांग्रेस सरकार की बर्ख़ास्तगी की माँग; आंदोलन ने राष्ट्रीय रूप लिया

इसी दौर में नक्सलवादी आंदोलन (1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से), रेलवे हड़ताल (मई 1974) — जॉर्ज फ़र्नांडिस के नेतृत्व में — और अन्य विरोध प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया। सरकार ने रेलवे हड़ताल को अवैध घोषित कर दमन किया।

(ग) न्यायपालिका से टकराव

  • सरकार और न्यायपालिका के बीच मौलिक अधिकारों में संशोधन और संपत्ति के अधिकार को लेकर टकराव चल रहा था (गोलकनाथ 1967, केशवानंद भारती 1973)।
  • 1973 में सरकार ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी कर न्यायमूर्ति ए. एन. रे को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया — इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला माना गया और "प्रतिबद्ध न्यायपालिका" की बहस छिड़ी।

3. आपातकाल की घोषणा

  1. 12 जून 1975 — इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने समाजवादी नेता राज नारायण की चुनाव याचिका पर इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को अवैध घोषित किया (चुनाव प्रचार में सरकारी कर्मचारी की सेवाएँ लेने के आधार पर)।
  2. 24 जून 1975 — सर्वोच्च न्यायालय ने अपील लंबित रहने तक इंदिरा गांधी को सांसद बने रहने की अनुमति दी, पर संसद में मतदान का अधिकार नहीं दिया — आंशिक स्थगन।
  3. 25 जून 1975 — JP के नेतृत्व में दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली; JP ने इंदिरा गांधी के इस्तीफ़े की माँग की और सेना, पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों से "अनैतिक और अवैध आदेश" न मानने की अपील की। जनता पार्टी ("लोक संघर्ष समिति") ने देशव्यापी सत्याग्रह की घोषणा की।
  4. 25 जून 1975 की रात — प्रधानमंत्री की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने अनुच्छेद 352 के तहत "आंतरिक अशांति" के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया। मंत्रिमंडल को अगली सुबह इसकी सूचना दी गई।

4. आपातकाल के दौरान क्या हुआ?

क्षेत्रप्रभाव
संघीय ढाँचाआपातकाल में शक्तियों का संघीय बँटवारा व्यावहारिक रूप से निलंबित; सारी शक्ति केंद्र के हाथ में
मौलिक अधिकारनागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित; अदालत जाने का अधिकार भी सीमित
प्रेसप्रेस सेंसरशिप — समाचार पत्रों को छापने से पहले सरकार की अनुमति; कई अख़बारों ने विरोध में संपादकीय स्थान ख़ाली छोड़ा (जैसे इंडियन एक्सप्रेस, स्टेट्समैन); "सेमिनार" और "मेनस्ट्रीम" जैसी पत्रिकाएँ बंद हुईं
गिरफ़्तारियाँनिवारक नज़रबंदी के कानूनों (जैसे MISA) के तहत JP, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, चंद्रशेखर सहित हज़ारों नेता और कार्यकर्ता बिना मुक़दमे जेल में; RSS और जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध
न्यायपालिकाADM जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला (1976) — "बंदी प्रत्यक्षीकरण मामला" — में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आपातकाल में नागरिक अपनी नज़रबंदी को चुनौती नहीं दे सकते; न्यायमूर्ति एच. आर. खन्ना ने असहमति जताई
संवैधानिक बदलावप्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति के चुनाव को न्यायालय में चुनौती से बाहर करने का संशोधन; 42वाँ संशोधन (1976) — लोकसभा व विधानसभाओं का कार्यकाल 5 से 6 वर्ष, न्यायिक समीक्षा सीमित, प्रस्तावना में "समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता", मौलिक कर्तव्य
ज़्यादतियाँ"बीस सूत्री कार्यक्रम" के नाम पर कुछ अच्छे कदम, पर दिल्ली में झुग्गियाँ हटाने (जैसे तुर्कमान गेट) और ज़बरदस्ती नसबंदी जैसे अभियानों से लोगों पर अत्याचार; प्रधानमंत्री के छोटे बेटे संजय गांधी बिना किसी आधिकारिक पद के प्रशासन पर प्रभाव डालते थे

शाह आयोग: 1977 में जनता पार्टी सरकार ने न्यायमूर्ति जे. सी. शाह की अध्यक्षता में आपातकाल की ज़्यादतियों की जाँच के लिए आयोग बनाया। आयोग के अनुसार लगभग 1 लाख 11 हज़ार लोगों को निवारक नज़रबंदी कानूनों के तहत गिरफ़्तार किया गया था।

5. आपातकाल पर विवाद

सरकार का पक्ष (आपातकाल के समर्थन में)आलोचकों का पक्ष
लोकतंत्र में विपक्ष को चुनी हुई सरकार को अपनी नीतियों के अनुसार काम करने देना चाहिए; बार-बार विरोध, आंदोलन और हड़तालों से देश में अराजकता फैल रही थीJP का आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था; विरोध का अधिकार लोकतंत्र का मूल है
विपक्ष ने सेना-पुलिस से आदेश न मानने को कहा — यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा थाआपातकाल का असली कारण इंदिरा गांधी की सत्ता बचाना था, न कि राष्ट्रीय सुरक्षा
कुछ कदम (बीस सूत्री कार्यक्रम) गरीबों के हित में थेसरकार ने आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग किया — नागरिक स्वतंत्रताएँ कुचलीं, प्रेस को चुप कराया, संविधान को बदला; CPI ने भी बाद में समर्थन को ग़लती माना

6. आपातकाल के सबक

  1. भारत में लोकतंत्र को समाप्त करना कठिन है — 18-19 महीनों के भीतर ही लोकतंत्र बहाल हुआ और जनता ने वोट से जवाब दिया।
  2. संविधान की कमियाँ दूर हुईं — 44वें संशोधन (1978) से राष्ट्रीय आपातकाल का आधार "आंतरिक अशांति" से बदलकर "सशस्त्र विद्रोह" किया गया; आपातकाल की घोषणा के लिए मंत्रिमंडल की लिखित सलाह अनिवार्य; अनुच्छेद 20 और 21 आपातकाल में भी निलंबित नहीं हो सकते।
  3. नागरिक स्वतंत्रताओं के प्रति जागरूकता — आपातकाल के बाद कई नागरिक अधिकार संगठन बने (जैसे PUCL); न्यायपालिका ने बाद में नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाई।
  4. नौकरशाही और पुलिस — आपातकाल ने दिखाया कि ये संस्थाएँ राजनीतिक दबाव में कैसे दुरुपयोग की जा सकती हैं; इनकी स्वतंत्रता और जवाबदेही की आवश्यकता स्पष्ट हुई।

7. आपातकाल के बाद — 1977 का चुनाव और जनता सरकार

  • जनवरी 1977 में अचानक चुनावों की घोषणा हुई; जेल से छूटे विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस (O), भारतीय लोकदल, भारतीय जनसंघ, सोशलिस्ट पार्टी आदि को मिलाकर जनता पार्टी बनाई; कांग्रेस से अलग हुए जगजीवन राम ने कांग्रेस फ़ॉर डेमोक्रेसी बनाई।
  • चुनाव "लोकतंत्र बनाम तानाशाही" का जनमत-संग्रह बन गया।
  • मार्च 1977 के परिणाम: स्वतंत्रता के बाद पहली बार केंद्र में कांग्रेस हारी; जनता पार्टी और सहयोगियों को लोकसभा की 542 में से 330 सीटें मिलीं, कांग्रेस को केवल 154; इंदिरा गांधी और संजय गांधी दोनों हार गए; उत्तर भारत में कांग्रेस का लगभग सफ़ाया।
  • मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने — पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री; चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम उप-प्रधानमंत्री।
  • जनता पार्टी में स्पष्ट नेतृत्व और साझा कार्यक्रम का अभाव था; नेताओं के बीच आपसी संघर्ष से जुलाई 1979 में मोरारजी सरकार गिर गई; चौधरी चरण सिंह कांग्रेस के बाहरी समर्थन से कुछ महीने प्रधानमंत्री रहे, पर समर्थन वापस लेने से सरकार गिरी।
  • जनवरी 1980 के चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 353 सीटों के साथ फिर सत्ता में लौटी।
1974गुजरात, बिहारआंदोलन 12 जून 75इलाहाबादनिर्णय 25 जून 75आपातकाल(अनु. 352) मार्च 77जनता पार्टी330 सीटें 1980कांग्रेस कीवापसी
आपातकाल और उसके बाद की प्रमुख घटनाएँ (विचार-चित्र)।

8. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
आंतरिक आपातकाल25 जून 1975 – मार्च 1977, अनु. 352, "आंतरिक अशांति" के आधार पर
संपूर्ण क्रांतिJP का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक बदलाव का आह्वान
नवनिर्माण आंदोलन1974 — गुजरात का छात्र आंदोलन
प्रतिबद्ध न्यायपालिकासरकार की नीतियों के प्रति वफ़ादार न्यायपालिका का विवादित विचार
प्रेस सेंसरशिपसमाचार छापने से पहले सरकारी अनुमति
निवारक नज़रबंदीअपराध की आशंका पर बिना मुक़दमे हिरासत (MISA)
शाह आयोग1977 — आपातकाल की ज़्यादतियों की जाँच
44वाँ संशोधन1978 — "आंतरिक अशांति" की जगह "सशस्त्र विद्रोह"
जनता पार्टी1977 में विपक्षी दलों के विलय से बना दल

9. मास्टर सारांश तालिका

चरणमुख्य तथ्य
पृष्ठभूमिमहँगाई, तेल संकट 1973, गुजरात व बिहार आंदोलन 1974, JP — संपूर्ण क्रांति, रेलवे हड़ताल 1974, न्यायपालिका से टकराव (ए. एन. रे 1973)
तात्कालिक कारण12 जून 1975 इलाहाबाद HC (राज नारायण मामला); 25 जून रामलीला मैदान रैली
घोषणा25 जून 1975, अनु. 352, राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद
दौरानसेंसरशिप, MISA गिरफ़्तारियाँ, ADM जबलपुर, 42वाँ संशोधन, ज़बरदस्ती नसबंदी
सबक44वाँ संशोधन, नागरिक स्वतंत्रता की जागरूकता
बाद में1977 जनता पार्टी (330 सीटें), मोरारजी PM; 1979 पतन; 1980 कांग्रेस की वापसी

चार्ट — 1977 के लोकसभा चुनाव परिणाम (कुल 542 सीटें):

जनता पार्टी व सहयोगी330
कांग्रेस154

10. माइंड मैप

लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
पृष्ठभूमि
  • महँगाई, तेल संकट
  • JP आंदोलन
घोषणा
  • 12 जून निर्णय
  • 25 जून 1975
दौरान
  • सेंसरशिप, MISA
  • 42वाँ संशोधन
सबक
  • 44वाँ संशोधन
  • नागरिक अधिकार
1977
  • जनता पार्टी
  • मोरारजी PM

11. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • तारीख़ें "12 जून → 24 जून → 25 जून 1975": इलाहाबाद निर्णय → SC आंशिक स्थगन → आपातकाल।
  • "42 ने बिगाड़ा, 44 ने सुधारा"।
  • 1977: "330 बनाम 154"।
आम गलतियाँ
  • 1975 का आपातकाल "आंतरिक अशांति" पर था; 1962 और 1971 के आपातकाल बाहरी आक्रमण के आधार पर थे।
  • आपातकाल की घोषणा राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने की, वी. वी. गिरि ने नहीं।
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने दिया; याचिका राज नारायण की थी।

12. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • आपातकाल 25 जून 1975 को घोषित हुआ।
  • आपातकाल अनुच्छेद 352 के तहत "आंतरिक अशांति" के आधार पर लगा।
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय 12 जून 1975 को आया।
  • JP ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया।
  • रेलवे हड़ताल 1974 में जॉर्ज फ़र्नांडिस के नेतृत्व में हुई।
  • 1973 में ए. एन. रे को वरिष्ठता की अनदेखी कर मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
  • ADM जबलपुर मामला 1976 में आया।
  • शाह आयोग ने आपातकाल की ज़्यादतियों की जाँच की।
  • जनता पार्टी 1977 में बनी।
  • मोरारजी देसाई पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।
  • 44वें संशोधन ने "आंतरिक अशांति" की जगह "सशस्त्र विद्रोह" शब्द रखा।
  • 1980 में कांग्रेस फिर सत्ता में आई।

13. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

1975 का आपातकाल किस आधार पर घोषित किया गया?

  1. बाहरी आक्रमण
  2. आंतरिक अशांति
  3. वित्तीय संकट
  4. सशस्त्र विद्रोह
उत्तर देखें

25 जून 1975 को अनुच्छेद 352 के तहत "आंतरिक अशांति" के आधार पर आपातकाल लगा; 44वें संशोधन (1978) ने इसकी जगह "सशस्त्र विद्रोह" शब्द रखा।

उत्तर: (ख) आंतरिक अशांति

प्र2आसान

"संपूर्ण क्रांति" का आह्वान किसने किया?

  1. मोरारजी देसाई
  2. जयप्रकाश नारायण
  3. राम मनोहर लोहिया
  4. चौधरी चरण सिंह
उत्तर देखें

1974 के बिहार आंदोलन का नेतृत्व करते हुए जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया।

उत्तर: (ख) जयप्रकाश नारायण

प्र3आसान

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 12 जून 1975 को क्या निर्णय दिया?

उत्तर देखें

न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने समाजवादी नेता राज नारायण की चुनाव याचिका पर इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को अवैध घोषित किया, क्योंकि उन्होंने चुनाव प्रचार में एक सरकारी कर्मचारी की सेवाएँ ली थीं। यह निर्णय आपातकाल का तात्कालिक कारण बना।

उत्तर: इंदिरा गांधी का 1971 का चुनाव अवैध घोषित

प्र4मध्यम

बिहार आंदोलन (1974) की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर देखें

(1) मार्च 1974 में बढ़ती क़ीमतों, खाद्यान्न संकट, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध छात्रों ने आंदोलन शुरू किया; (2) छात्रों ने जयप्रकाश नारायण को नेतृत्व के लिए आमंत्रित किया, जिन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रखा था; (3) JP ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया और बिहार की कांग्रेस सरकार की बर्ख़ास्तगी की माँग की; (4) आंदोलन अहिंसक था और इसमें विपक्षी दल भी जुड़े; (5) धीरे-धीरे यह राष्ट्रीय आंदोलन बन गया और इंदिरा गांधी के इस्तीफ़े की माँग उठी।

उत्तर: छात्र आंदोलन, JP का नेतृत्व, संपूर्ण क्रांति, राष्ट्रीय विस्तार

प्र5मध्यम

आपातकाल के दौरान प्रेस पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर देखें

आपातकाल में प्रेस सेंसरशिप लगाई गई — अख़बारों को कोई भी समाचार छापने से पहले सरकार की अनुमति लेनी पड़ती थी। सरकार की आलोचना और विरोध प्रदर्शनों की ख़बरें रोकी गईं। इंडियन एक्सप्रेस और स्टेट्समैन जैसे अख़बारों ने विरोध में अपने संपादकीय का स्थान ख़ाली छोड़ दिया; "सेमिनार" और "मेनस्ट्रीम" जैसी पत्रिकाओं ने प्रकाशन बंद करना बेहतर समझा। कई पत्रकार गिरफ़्तार हुए। इससे जनता तक सही सूचना पहुँचनी बंद हो गई।

उत्तर: सेंसरशिप, आलोचना पर रोक, अख़बारों का प्रतीकात्मक विरोध

प्र6मध्यम

44वें संविधान संशोधन ने आपातकाल से जुड़े प्रावधानों में क्या बदलाव किए?

उत्तर देखें

(1) राष्ट्रीय आपातकाल का आधार "आंतरिक अशांति" की जगह "सशस्त्र विद्रोह" किया गया; (2) आपातकाल की घोषणा के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सलाह अनिवार्य की गई; (3) अनुच्छेद 20 और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) आपातकाल में भी निलंबित नहीं किए जा सकते; (4) संसद द्वारा आपातकाल की स्वीकृति के लिए विशेष बहुमत और नियमित पुनः-स्वीकृति आवश्यक; (5) लोकसभा का कार्यकाल फिर 5 वर्ष किया गया। इन बदलावों से आपातकाल के दुरुपयोग को कठिन बनाया गया।

उत्तर: सशस्त्र विद्रोह, लिखित सलाह, अनु. 20-21 सुरक्षित, विशेष बहुमत

प्र7मध्यम

1977 में जनता पार्टी की जीत के कारण बताइए।

उत्तर देखें

(1) आपातकाल की ज़्यादतियों — प्रेस सेंसरशिप, बिना मुक़दमे गिरफ़्तारी, ज़बरदस्ती नसबंदी और झुग्गियाँ हटाने — से जनता में भारी नाराज़गी; (2) विपक्षी दलों का एकजुट होकर जनता पार्टी बनाना, जिससे वोट नहीं बँटे; (3) जगजीवन राम जैसे बड़े कांग्रेसी नेताओं का अलग होना; (4) चुनाव का "लोकतंत्र बनाम तानाशाही" के जनमत-संग्रह में बदल जाना; (5) JP जैसे नैतिक नेता का समर्थन। परिणामस्वरूप जनता पार्टी को 330 सीटें मिलीं और उत्तर भारत में कांग्रेस का लगभग सफ़ाया हो गया।

उत्तर: आपातकाल की ज़्यादतियाँ, विपक्षी एकता, लोकतंत्र बनाम तानाशाही

प्र8कठिन

क्या 1975 का आपातकाल आवश्यक था? दोनों पक्षों के तर्क देकर अपना मत दीजिए।

उत्तर देखें

सरकार के तर्क: (1) लोकतंत्र में विपक्ष को चुनी हुई सरकार को काम करने देना चाहिए, पर लगातार आंदोलनों, हड़तालों और प्रदर्शनों से देश में अस्थिरता और अराजकता फैल रही थी; (2) JP द्वारा सेना और पुलिस से आदेश न मानने की अपील राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा थी; (3) विदेशी शक्तियों द्वारा अस्थिरता फैलाने की आशंका; (4) आपातकाल में कुछ आर्थिक कदम (बीस सूत्री कार्यक्रम) गरीबों के हित में थे। आलोचकों के तर्क: (1) JP का आंदोलन मूलतः शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था; विरोध का अधिकार लोकतंत्र का मूल है; (2) आपातकाल का असली कारण इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद इंदिरा गांधी की सत्ता बचाना था; (3) आपातकालीन शक्तियों का घोर दुरुपयोग हुआ — नागरिक स्वतंत्रताएँ कुचलीं, संविधान बदला गया। मत: लोकतांत्रिक विरोध से निपटने के लिए लोकतांत्रिक साधन — चुनाव, बातचीत, कानून-व्यवस्था — पर्याप्त थे; आपातकाल अनुचित था, और 1977 में जनता का निर्णय भी यही बताता है।

उत्तर: सरकार — अराजकता व सुरक्षा; आलोचक — सत्ता बचाना व दुरुपयोग; अनुचित था

प्र9कठिन

आपातकाल से भारतीय लोकतंत्र ने कौन-से सबक सीखे?

उत्तर देखें

(1) लोकतंत्र की जड़ें मज़बूत हैं: 18-19 महीनों में ही चुनाव हुए और जनता ने आपातकाल लगाने वाली सरकार को हटा दिया — भारत में लोकतंत्र को समाप्त करना कठिन है। (2) संवैधानिक सुधार: 44वें संशोधन से "सशस्त्र विद्रोह", लिखित मंत्रिमंडलीय सलाह और अनु. 20-21 की सुरक्षा — भविष्य में दुरुपयोग कठिन। (3) नागरिक स्वतंत्रता की जागरूकता: PUCL जैसे संगठन बने; न्यायपालिका बाद में नागरिक अधिकारों की रक्षा में अधिक सक्रिय हुई (जनहित याचिका, मेनका गांधी मामला 1978)। (4) संस्थाओं की स्वतंत्रता: न्यायपालिका, प्रेस, नौकरशाही और पुलिस की स्वतंत्रता व जवाबदेही आवश्यक है। (5) राजनीतिक सबक: किसी एक नेता या दल पर अत्यधिक सत्ता-केंद्रीकरण लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक है।

उत्तर: लोकतंत्र की मज़बूती, 44वाँ संशोधन, नागरिक अधिकार जागरूकता, संस्थाओं की स्वतंत्रता

प्र10कठिन

जनता पार्टी सरकार के पतन के कारणों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर देखें

(1) साझा कार्यक्रम का अभाव: जनता पार्टी विभिन्न विचारधाराओं — कांग्रेस (O), भारतीय लोकदल, जनसंघ, सोशलिस्ट — के दलों का विलय थी; इन्हें केवल आपातकाल-विरोध और इंदिरा-विरोध ने जोड़ा था। (2) नेतृत्व का संघर्ष: मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम के बीच प्रधानमंत्री पद के लिए प्रतिस्पर्धा। (3) दोहरी सदस्यता विवाद: पूर्व जनसंघ के सदस्यों की RSS से जुड़ाव पर आपत्ति। (4) नीतियों में कोई बुनियादी बदलाव न ला पाना; जनता की अपेक्षाएँ पूरी न होना। (5) जुलाई 1979 में दल-बदल से मोरारजी सरकार गिरी; चरण सिंह कांग्रेस के समर्थन से PM बने, पर समर्थन वापस होने से उनकी सरकार भी गिर गई। परिणाम: जनवरी 1980 में कांग्रेस 353 सीटों के साथ लौटी। यह दिखाता है कि केवल विरोध पर बना गठबंधन स्थायी शासन नहीं दे पाता।

उत्तर: साझा कार्यक्रम का अभाव, नेतृत्व संघर्ष, दोहरी सदस्यता, दल-बदल

प्र11कठिन

आपातकाल के दौरान न्यायपालिका की भूमिका की समीक्षा कीजिए।

उत्तर देखें

पृष्ठभूमि: 1973 में वरिष्ठता की अनदेखी कर ए. एन. रे को मुख्य न्यायाधीश बनाने से "प्रतिबद्ध न्यायपालिका" की आशंका बढ़ी थी। आपातकाल के दौरान: (1) कई उच्च न्यायालयों ने नज़रबंदी के विरुद्ध बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएँ स्वीकार कर नागरिकों को राहत दी; (2) पर ADM जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला (1976) में सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने 4-1 के बहुमत से कहा कि आपातकाल में नागरिक अपनी नज़रबंदी को अदालत में चुनौती नहीं दे सकते; केवल न्यायमूर्ति एच. आर. खन्ना ने असहमति जताते हुए कहा कि जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार राज्य की देन नहीं है — उन्हें इसकी क़ीमत मुख्य न्यायाधीश न बनाए जाने के रूप में चुकानी पड़ी; (3) 39वें और 42वें संशोधनों से न्यायिक समीक्षा सीमित की गई। बाद में: सर्वोच्च न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स (1980) में 42वें संशोधन के कुछ अंश रद्द किए, और 2017 के पुट्टास्वामी निर्णय में ADM जबलपुर निर्णय को ग़लत माना। इस प्रकार आपातकाल न्यायपालिका की स्वतंत्रता के महत्त्व का सबक बना।

उत्तर: ADM जबलपुर में नागरिक अधिकारों की रक्षा में विफलता; खन्ना की असहमति; बाद में सुधार

14. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • पृष्ठभूमि: महँगाई, तेल संकट 1973; गुजरात (नवनिर्माण) व बिहार (JP — संपूर्ण क्रांति) आंदोलन 1974; रेलवे हड़ताल (जॉर्ज फ़र्नांडिस); न्यायपालिका से टकराव (ए. एन. रे 1973)।
  • तात्कालिक कारण: 12 जून 1975 इलाहाबाद HC (न्या. सिन्हा, राज नारायण मामला); 25 जून रामलीला मैदान रैली।
  • घोषणा: 25 जून 1975, अनु. 352, आंतरिक अशांति, राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद।
  • दौरान: सेंसरशिप, MISA गिरफ़्तारियाँ (शाह आयोग — ~1.11 लाख), ADM जबलपुर (खन्ना की असहमति), 42वाँ संशोधन, ज़बरदस्ती नसबंदी, संजय गांधी।
  • सबक: 44वाँ संशोधन (सशस्त्र विद्रोह); 1977 — जनता पार्टी 330 बनाम कांग्रेस 154, मोरारजी PM; 1979 पतन; 1980 कांग्रेस वापसी।