Class 12 Political Science · Chapter 5 · समकालीन विश्व राजनीति

समकालीन विश्व में सुरक्षा

सुरक्षा का अर्थ, पारंपरिक और अपारंपरिक सुरक्षा, आतंकवाद, मानवाधिकार, वैश्विक निर्धनता, सहयोगमूलक सुरक्षा और भारत की रणनीति।

NCERT समकालीन विश्व राजनीति + स्वतंत्र भारत में राजनीतिCBSE Class 12 14 min read

1. अध्याय एक नज़र में

"सुरक्षा" शब्द सुनते ही हमारे मन में सीमा पर तैनात सैनिक, युद्ध और हथियारों की तस्वीर आती है। पर आज सुरक्षा का अर्थ बहुत व्यापक हो गया है — आतंकवाद, महामारी, गरीबी, जलवायु परिवर्तन, पलायन और साइबर हमले भी सुरक्षा के लिए ख़तरे हैं। इस अध्याय में हम सुरक्षा का अर्थ, पारंपरिक और अपारंपरिक सुरक्षा की धारणाएँ, ख़तरों के नए स्रोत, सहयोगात्मक सुरक्षा और भारत की सुरक्षा रणनीति को समझेंगे।

इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • सुरक्षा का अर्थ — मूल मूल्यों पर ख़तरे से बचाव।
  • पारंपरिक सुरक्षा — बाहरी और आंतरिक; अवरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन।
  • निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रण और विश्वास-बहाली।
  • अपारंपरिक सुरक्षा — मानव सुरक्षा और विश्वव्यापी सुरक्षा।
  • ख़तरों के नए स्रोत और भारत की सुरक्षा रणनीति।

2. सुरक्षा क्या है?

सबसे सरल अर्थ में सुरक्षा का अर्थ है ख़तरे से मुक्ति। पर हर ख़तरा सुरक्षा का प्रश्न नहीं होता — सुरक्षा उन ख़तरों से जुड़ी है जो किसी देश या व्यक्ति के मूल मूल्यों (core values) को इतना नुक़सान पहुँचा सकते हैं कि वह अपूरणीय हो। किन मूल्यों की रक्षा करनी है, इस पर दो प्रमुख धारणाएँ हैं — पारंपरिक और अपारंपरिक।

3. पारंपरिक सुरक्षा (Traditional Security)

(क) बाहरी सुरक्षा

पारंपरिक धारणा में सबसे बड़ा ख़तरा है दूसरे देश का सैन्य हमला, जो किसी देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को ख़तरे में डालता है। इसमें आम नागरिकों की जान भी जाती है। सरकार के पास युद्ध की स्थिति में तीन विकल्प होते हैं — आत्मसमर्पण, हमलावर को रोकना, या मुक़ाबला करके हराना।

उपायअर्थ
अवरोध (Deterrence)इतनी सैन्य क्षमता रखना कि दुश्मन हमला करने से पहले ही डर जाए
रक्षा (Defence)युद्ध होने पर उसे सीमित करना या समाप्त करना
शक्ति-संतुलन (Balance of Power)पड़ोसी या प्रतिद्वंद्वी देश से शक्ति में बहुत पीछे न रहना; सैन्य और आर्थिक क्षमता बढ़ाना
गठबंधन (Alliance)कई देशों का मिलकर सैन्य हमले को रोकने का औपचारिक समझौता — जैसे NATO; गठबंधन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं और हित बदलने पर बदल सकते हैं

विश्व राजनीति में कोई केंद्रीय सत्ता नहीं है जो हर देश की रक्षा करे — इसलिए हर देश को अपनी सुरक्षा स्वयं करनी पड़ती है ("स्व-सहायता")।

(ख) आंतरिक सुरक्षा

पारंपरिक धारणा में आंतरिक शांति और व्यवस्था बनाए रखना भी शामिल है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शक्तिशाली देशों के लिए आंतरिक सुरक्षा बड़ा प्रश्न नहीं रही, पर एशिया और अफ़्रीका के नए स्वतंत्र देशों को दोहरी चुनौती मिली — पड़ोसियों से युद्ध का ख़तरा और भीतर अलगाववादी आंदोलन। इन देशों में गृहयुद्धों में अंतरराष्ट्रीय युद्धों से अधिक लोग मारे गए।

(ग) सुरक्षा के पारंपरिक तरीक़े — सहयोग

  • निरस्त्रीकरण (Disarmament): कुछ प्रकार के हथियारों का पूरी तरह त्याग — जैसे जैविक हथियार संधि (BWC, 1972) और रासायनिक हथियार संधि (CWC, 1992)।
  • अस्त्र-नियंत्रण (Arms Control): हथियारों के विकास और संख्या पर नियंत्रण — जैसे अमेरिका-सोवियत संघ की एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि (1972), SALT-I, SALT-II, START संधियाँ; परमाणु अप्रसार संधि (NPT, 1968)।
  • विश्वास-बहाली के उपाय (Confidence Building): प्रतिद्वंद्वी देश सैन्य अभ्यास, तैनाती और योजनाओं की सूचना आपस में साझा करें, ताकि ग़लतफ़हमी से युद्ध न हो — जैसे भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का वार्षिक आदान-प्रदान।
भारत और NPT

भारत ने NPT (1968) पर हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि यह संधि भेदभावपूर्ण है — 1967 से पहले परमाणु परीक्षण करने वाले पाँच देशों (अमेरिका, सोवियत संघ/रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन) को परमाणु हथियार रखने का अधिकार देती है, जबकि बाक़ी देशों को इससे रोकती है। भारत ने 1974 (पोखरण-I) और 1998 (पोखरण-II) में परमाणु परीक्षण किए, पर उसकी नीति "पहले प्रयोग नहीं" (No First Use) और विश्वसनीय न्यूनतम अवरोध की है। भारत सार्वभौमिक और भेदभाव-रहित परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थक है।

4. अपारंपरिक सुरक्षा (Non-traditional Security)

अपारंपरिक धारणा केवल सैन्य ख़तरों तक सीमित नहीं है; यह मानव जीवन को प्रभावित करने वाले हर गंभीर ख़तरे को शामिल करती है। इसका केंद्र राज्य के बजाय मनुष्य या पूरी मानवता है।

धारणाअर्थ
मानव सुरक्षा (Human Security)राज्यों से अधिक व्यक्तियों की सुरक्षा। संकीर्ण अर्थ — हिंसा से सुरक्षा; व्यापक अर्थ — भूख, बीमारी, प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा; सबसे व्यापक अर्थ — "अभाव से मुक्ति" (freedom from want) और "भय से मुक्ति" (freedom from fear)। कई बार नागरिकों को सबसे बड़ा ख़तरा अपनी ही सरकार से होता है।
विश्वव्यापी सुरक्षा (Global Security)ऐसे ख़तरे जो पूरी दुनिया को प्रभावित करते हैं — ग्लोबल वार्मिंग, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, एड्स और कोविड-19 जैसी महामारियाँ; इनसे कोई देश अकेले नहीं निपट सकता

5. ख़तरों के नए स्रोत

  1. आतंकवाद: राजनीतिक उद्देश्य से नागरिकों को जान-बूझकर निशाना बनाने वाली हिंसा — जैसे 11 सितंबर 2001 का अमेरिका पर हमला, 26/11 (2008) का मुंबई हमला।
  2. मानवाधिकार: राजनीतिक, आर्थिक-सामाजिक और उपनिवेशों / अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन; नरसंहार और जातीय सफ़ाया रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप पर बहस (जैसे रवांडा 1994)।
  3. वैश्विक गरीबी: अमीर और गरीब देशों के बीच तथा देशों के भीतर बढ़ती असमानता; जनसंख्या वृद्धि का बड़ा हिस्सा गरीब देशों में।
  4. पलायन और शरणार्थी: गरीबी, युद्ध और उत्पीड़न से बड़े पैमाने पर लोगों का एक देश से दूसरे देश जाना; आंतरिक रूप से विस्थापित लोग भी।
  5. महामारियाँ: HIV-एड्स, बर्ड फ़्लू, सार्स, इबोला और कोविड-19 — दुनिया के जुड़ाव से बीमारियाँ तेज़ी से फैलती हैं।
  6. पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन तथा साइबर सुरक्षा भी आज सुरक्षा के प्रमुख प्रश्न हैं।

इन ख़तरों से निपटने के लिए सहयोगात्मक सुरक्षा (Cooperative Security) आवश्यक है — द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, महाद्वीपीय और वैश्विक स्तर पर देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों (UN, WHO, विश्व बैंक), NGO (एमनेस्टी, रेड क्रॉस) और व्यवसायों का सहयोग। अंतिम उपाय के रूप में बल प्रयोग भी हो सकता है, पर वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वीकृत होना चाहिए।

पारंपरिक — राज्य केंद्रित अपारंपरिक — मानव केंद्रित बाहरी सैन्य हमला आंतरिक अलगाववाद अवरोध, रक्षा, गठबंधन निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रण आतंकवाद, मानवाधिकार गरीबी, पलायन महामारी, जलवायु सहयोगात्मक सुरक्षा
सुरक्षा की पारंपरिक और अपारंपरिक धारणाएँ (विचार-चित्र)।

6. भारत की सुरक्षा रणनीति

भारत को पारंपरिक (सैन्य) और अपारंपरिक दोनों प्रकार के ख़तरों का सामना है। भारत की सुरक्षा रणनीति के चार घटक हैं:

घटकविवरण
1. सैन्य क्षमता को मज़बूत करनापड़ोसियों से संघर्ष — पाकिस्तान (1947-48, 1965, 1971, 1999) और चीन (1962) — के अनुभव के कारण; परमाणु परीक्षण 1974 और 1998; आधुनिक सेना
2. अंतरराष्ट्रीय नियमों और संस्थाओं को मज़बूत करनाएशियाई एकता, उपनिवेशवाद-विरोध, निरस्त्रीकरण का समर्थन; गुटनिरपेक्ष आंदोलन; UN के माध्यम से विवादों का समाधान; जलवायु वार्ता (क्योटो प्रोटोकॉल, पेरिस समझौता) में सक्रिय भूमिका; UN शांति-स्थापना में योगदान
3. आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से निपटनानगालैंड, मिज़ोरम, पंजाब, कश्मीर जैसे क्षेत्रों में उग्रवाद; लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया से समायोजन — विभिन्न समुदायों को अपनी शिकायतें व्यक्त करने का अवसर
4. आर्थिक विकासगरीबी, असमानता और बेरोज़गारी दूर कर आम लोगों का जीवन सुरक्षित करना; लोकतांत्रिक सरकार का आर्थिक विकास और मानवाधिकारों के साथ तालमेल

7. मास्टर तालिका : मुख्य शब्दावली

शब्दअर्थ
सुरक्षामूल मूल्यों पर गंभीर ख़तरे से मुक्ति
अवरोध (Deterrence)युद्ध से पहले ही दुश्मन को हमला न करने के लिए विवश करना
शक्ति-संतुलनप्रतिद्वंद्वियों के बीच शक्ति का संतुलन बनाए रखना
गठबंधनसैन्य हमले को रोकने हेतु देशों का औपचारिक समूह
निरस्त्रीकरणकुछ हथियारों का पूर्ण त्याग
अस्त्र-नियंत्रणहथियारों के विकास और संख्या पर नियंत्रण
विश्वास-बहालीसैन्य सूचनाएँ साझा कर अविश्वास घटाना
मानव सुरक्षाराज्य के बजाय व्यक्ति की सुरक्षा; अभाव व भय से मुक्ति
विश्वव्यापी सुरक्षापूरी दुनिया को प्रभावित करने वाले ख़तरों से सुरक्षा
सहयोगात्मक सुरक्षादेशों व संस्थाओं के सहयोग से ख़तरों का सामना

8. मास्टर सारांश तालिका

पक्षपारंपरिक सुरक्षाअपारंपरिक सुरक्षा
केंद्रराज्यमनुष्य / मानवता
ख़तरासैन्य हमला, अलगाववादआतंकवाद, गरीबी, महामारी, पलायन, जलवायु
उपायअवरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन; निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रणसहयोगात्मक सुरक्षा, विकास, मानवाधिकार
उदाहरणNATO, NPT, CWCWHO, जलवायु समझौते

चार्ट — भारत के परमाणु परीक्षणों में विस्फोटों की संख्या:

पोखरण-I (मई 1974)1
पोखरण-II (मई 1998)5

9. माइंड मैप

समकालीन सुरक्षा
पारंपरिक
  • बाहरी, आंतरिक
  • अवरोध, गठबंधन
सहयोग
  • निरस्त्रीकरण
  • अस्त्र-नियंत्रण
अपारंपरिक
  • मानव सुरक्षा
  • विश्वव्यापी
नए ख़तरे
  • आतंकवाद, महामारी
  • गरीबी, पलायन
भारत
  • 4 घटक
  • NPT पर रुख़

10. टिप्स और ट्रिक्स

याद रखने के सूत्र
  • बाहरी सुरक्षा के 4 उपाय "अ-र-श-ग": अवरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन।
  • भारत की रणनीति के 4 घटक "से-अं-आं-आ": सेना, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास।
  • संधियाँ: NPT 1968, BWC 1972, ABM 1972, CWC 1992।
आम गलतियाँ
  • निरस्त्रीकरण और अस्त्र-नियंत्रण एक नहीं — पहला त्याग, दूसरा नियंत्रण।
  • भारत NPT का सदस्य नहीं है; वह परमाणु निरस्त्रीकरण का विरोधी नहीं, भेदभाव का विरोधी है।
  • मानव सुरक्षा में ख़तरा कभी-कभी अपनी ही सरकार से होता है, केवल बाहरी देश से नहीं।

11. महत्त्वपूर्ण वन-लाइनर

  • परमाणु अप्रसार संधि (NPT) 1968 में हुई।
  • जैविक हथियार संधि 1972 में हुई।
  • रासायनिक हथियार संधि 1992 में हुई।
  • एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि 1972 में हुई।
  • भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में किया।
  • पोखरण-II परीक्षण 1998 में हुए।
  • भारत की परमाणु नीति "पहले प्रयोग नहीं" है।
  • मानव सुरक्षा का अर्थ अभाव और भय से मुक्ति है।
  • अमेरिका पर आतंकी हमला 11 सितंबर 2001 को हुआ।
  • मुंबई आतंकी हमला 26 नवंबर 2008 को हुआ।
  • NATO एक सैन्य गठबंधन है।

12. बोर्ड परीक्षा-पैटर्न प्रश्न (विस्तृत उत्तर सहित)

प्र1आसान

भारत ने NPT पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?

  1. भारत परमाणु ऊर्जा नहीं चाहता
  2. संधि भेदभावपूर्ण है
  3. भारत UN का सदस्य नहीं
  4. संधि अमेरिका ने रद्द कर दी
उत्तर देखें

NPT पाँच देशों को परमाणु हथियार रखने देती है और बाक़ी को रोकती है — भारत इसे भेदभावपूर्ण मानता है और सार्वभौमिक निरस्त्रीकरण चाहता है।

उत्तर: (ख) संधि भेदभावपूर्ण है

प्र2आसान

"अभाव से मुक्ति और भय से मुक्ति" किस धारणा से जुड़ा है?

  1. शक्ति-संतुलन
  2. मानव सुरक्षा
  3. गठबंधन
  4. अवरोध
उत्तर देखें

मानव सुरक्षा का सबसे व्यापक अर्थ अभाव (भूख, बीमारी) और भय (हिंसा) — दोनों से मुक्ति है।

उत्तर: (ख) मानव सुरक्षा

प्र3आसान

निरस्त्रीकरण और अस्त्र-नियंत्रण में अंतर बताइए।

उत्तर देखें

निरस्त्रीकरण में देश कुछ प्रकार के हथियारों का पूर्ण त्याग करते हैं — जैसे जैविक (1972) और रासायनिक (1992) हथियार संधियाँ। अस्त्र-नियंत्रण में हथियारों के विकास, परीक्षण और संख्या पर नियंत्रण किया जाता है — जैसे ABM संधि, SALT, START।

उत्तर: पूर्ण त्याग बनाम नियंत्रण

प्र4मध्यम

पारंपरिक सुरक्षा में बाहरी ख़तरे से निपटने के उपाय बताइए।

उत्तर देखें

(1) अवरोध — इतनी सैन्य क्षमता रखना कि दुश्मन हमला करने से डरे; (2) रक्षा — युद्ध होने पर उसे सीमित या समाप्त करना; (3) शक्ति-संतुलन — प्रतिद्वंद्वी से शक्ति में बहुत पीछे न रहना, सैन्य व आर्थिक क्षमता बढ़ाना; (4) गठबंधन — अन्य देशों के साथ सैन्य समझौते (जैसे NATO)। विश्व राजनीति में केंद्रीय सत्ता के अभाव में हर देश को अपनी सुरक्षा स्वयं करनी पड़ती है।

उत्तर: अवरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन

प्र5मध्यम

नए स्वतंत्र एशियाई-अफ़्रीकी देशों के सामने सुरक्षा की कौन-सी दोहरी चुनौती थी?

उत्तर देखें

(1) बाहरी: पड़ोसी देशों से सीमा और क्षेत्र को लेकर युद्ध का ख़तरा — जैसे भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन। (2) आंतरिक: देश के भीतर अलगाववादी आंदोलन, जो अलग राष्ट्र की माँग करते थे; कई बार ये पड़ोसी देशों के समर्थन से चलते थे, जिससे बाहरी और आंतरिक ख़तरे आपस में जुड़ जाते थे। इन देशों में गृहयुद्धों में अंतरराष्ट्रीय युद्धों से अधिक लोग मारे गए।

उत्तर: पड़ोसियों से युद्ध और आंतरिक अलगाववाद

प्र6मध्यम

विश्वास-बहाली के उपाय क्या हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर देखें

विश्वास-बहाली के उपायों में प्रतिद्वंद्वी देश अपने सैन्य इरादों, अभ्यासों, तैनाती और योजनाओं की जानकारी एक-दूसरे को देते हैं, ताकि ग़लतफ़हमी से अचानक युद्ध न छिड़ जाए। उदाहरण: भारत-पाकिस्तान हर वर्ष 1 जनवरी को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान करते हैं (परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला न करने का समझौता); सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) की हॉटलाइन; शीत युद्ध में अमेरिका-सोवियत संघ के बीच हॉटलाइन।

उत्तर: सैन्य सूचनाएँ साझा करना; परमाणु प्रतिष्ठान सूची, हॉटलाइन

प्र7मध्यम

सुरक्षा के लिए ख़तरों के तीन नए स्रोत बताइए।

उत्तर देखें

(1) आतंकवाद — राजनीतिक उद्देश्य से नागरिकों पर हिंसा; 9/11 (2001), 26/11 (2008)। (2) महामारियाँ — HIV-एड्स, इबोला, कोविड-19; वैश्विक जुड़ाव से तेज़ प्रसार। (3) वैश्विक गरीबी और पलायन — अमीर-गरीब देशों की असमानता, युद्ध व गरीबी से बड़े पैमाने पर शरणार्थी। इसके अलावा मानवाधिकार उल्लंघन, जलवायु परिवर्तन और साइबर हमले भी नए ख़तरे हैं।

उत्तर: आतंकवाद, महामारी, गरीबी-पलायन

प्र8कठिन

पारंपरिक और अपारंपरिक सुरक्षा की धारणाओं की तुलना कीजिए।

उत्तर देखें

पारंपरिक: केंद्र में राज्य; मुख्य ख़तरा दूसरे देश का सैन्य हमला और आंतरिक अलगाववाद; उपाय — सेना, अवरोध, शक्ति-संतुलन, गठबंधन, साथ ही निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रण और विश्वास-बहाली। अपारंपरिक: केंद्र में मनुष्य और मानवता; ख़तरों की सूची व्यापक — आतंकवाद, मानवाधिकार उल्लंघन, गरीबी, पलायन, महामारी, जलवायु परिवर्तन; इसमें मानव सुरक्षा (अभाव व भय से मुक्ति) और विश्वव्यापी सुरक्षा शामिल; उपाय — सहयोगात्मक सुरक्षा (देश, UN, NGO, व्यवसाय)। निष्कर्ष: आज के विश्व में दोनों आवश्यक हैं — सैन्य सुरक्षा के बिना देश सुरक्षित नहीं, और मानव सुरक्षा के बिना नागरिक।

उत्तर: राज्य व सैन्य केंद्रित बनाम मानव व व्यापक ख़तरों पर केंद्रित; दोनों आवश्यक

प्र9कठिन

भारत की सुरक्षा रणनीति के चारों घटकों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर देखें

(1) सैन्य क्षमता: पाकिस्तान (1947-48, 1965, 1971, 1999) और चीन (1962) से संघर्ष के कारण मज़बूत सेना; 1974 और 1998 के परमाणु परीक्षण; "पहले प्रयोग नहीं" और विश्वसनीय न्यूनतम अवरोध की नीति। (2) अंतरराष्ट्रीय नियम और संस्थाएँ: गुटनिरपेक्षता, उपनिवेशवाद-विरोध, सार्वभौमिक निरस्त्रीकरण का समर्थन; UN और शांति-स्थापना में योगदान; जलवायु वार्ताओं में सक्रियता। (3) आंतरिक सुरक्षा: नगालैंड, मिज़ोरम, पंजाब, कश्मीर जैसे क्षेत्रों में उग्रवाद से निपटना — बल के साथ लोकतांत्रिक बातचीत और समायोजन। (4) आर्थिक विकास: गरीबी, असमानता और बेरोज़गारी घटाना, ताकि नागरिकों की वास्तविक सुरक्षा हो; लोकतंत्र में विकास और अधिकारों का तालमेल।

उत्तर: सैन्य शक्ति, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास

प्र10कठिन

"अपारंपरिक ख़तरों का सामना सहयोग से ही संभव है।" विवेचना कीजिए।

उत्तर देखें

अपारंपरिक ख़तरे सीमाओं को नहीं मानते: (1) महामारी — कोविड-19 एक देश से पूरी दुनिया में फैला; टीके, दवाएँ और सूचना साझा करना (WHO) आवश्यक था। (2) आतंकवाद — आतंकी नेटवर्क कई देशों में फैले हैं; ख़ुफ़िया सूचनाओं का आदान-प्रदान और आतंकी वित्त-पोषण पर रोक (FATF) सहयोग से ही संभव। (3) जलवायु परिवर्तन — एक देश के उत्सर्जन घटाने से समस्या हल नहीं; पेरिस समझौते जैसे वैश्विक प्रयास चाहिए। (4) शरणार्थी संकट — UNHCR और देशों के बीच ज़िम्मेदारी बाँटनी पड़ती है। इसलिए सहयोगात्मक सुरक्षा — द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर देशों, UN संस्थाओं, NGO और निजी क्षेत्र का सहयोग — ही प्रभावी उपाय है; बल प्रयोग केवल अंतिम और अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति के साथ।

उत्तर: ख़तरे सीमापार हैं, इसलिए वैश्विक सहयोग अनिवार्य

प्र11कठिन

मानव सुरक्षा की संकीर्ण और व्यापक धारणाओं में अंतर स्पष्ट करते हुए बताइए कि कभी-कभी नागरिकों को अपनी ही सरकार से ख़तरा क्यों होता है।

उत्तर देखें

संकीर्ण धारणा: मानव सुरक्षा का अर्थ है व्यक्तियों को हिंसा — युद्ध, गृहयुद्ध, नरसंहार, आतंकवाद — से बचाना। व्यापक धारणा: इसमें भूख, बीमारी, प्राकृतिक आपदाएँ भी शामिल हैं, क्योंकि इनसे युद्ध से कहीं अधिक लोग मरते हैं। सबसे व्यापक धारणा: "अभाव से मुक्ति" और "भय से मुक्ति" — यानी आर्थिक सुरक्षा और मानव गरिमा भी। अपनी सरकार से ख़तरा: पारंपरिक धारणा मानती है कि राज्य नागरिकों का रक्षक है; पर इतिहास में कई सरकारों ने अपने ही नागरिकों का दमन किया, जातीय अल्पसंख्यकों का नरसंहार किया या उन्हें भूख और बीमारी में छोड़ दिया (जैसे रवांडा 1994 में)। इसीलिए मानव सुरक्षा राज्य के बजाय व्यक्ति को केंद्र में रखती है।

उत्तर: हिंसा से सुरक्षा बनाम अभाव-भय से मुक्ति; दमनकारी सरकारें भी ख़तरा

13. त्वरित पुनरावृत्ति सारांश

2 मिनट में दोहराएँ
  • सुरक्षा = मूल मूल्यों पर गंभीर ख़तरे से मुक्ति।
  • पारंपरिक: राज्य केंद्रित; बाहरी (अवरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन) व आंतरिक; निरस्त्रीकरण (BWC 1972, CWC 1992), अस्त्र-नियंत्रण (ABM, SALT, START, NPT 1968), विश्वास-बहाली।
  • अपारंपरिक: मानव सुरक्षा (अभाव व भय से मुक्ति) और विश्वव्यापी सुरक्षा।
  • नए ख़तरे: आतंकवाद, मानवाधिकार, गरीबी, पलायन, महामारी, जलवायु; उपाय — सहयोगात्मक सुरक्षा।
  • भारत: सैन्य क्षमता (1974, 1998; पहले प्रयोग नहीं), अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास; NPT को भेदभावपूर्ण माना।