UPSC Mains · Economics · Paper I · अध्याय 2

वितरण सिद्धांत एवं कल्याण अर्थशास्त्र

Theories of Distribution and Welfare Economics

रिकार्डो, मार्क्स, कलडोर, कलेकी के वितरण सिद्धांत; पैरेटो इष्टतमता, क्षतिपूर्ति सिद्धांत, ऐरो का असंभाव्यता प्रमेय, A.K. सेन का कल्याण फलन।

Paper I 16 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

यह अध्याय Paper I के दो खंडों को जोड़ता है: वितरण सिद्धांत (राष्ट्रीय आय साधनों में कैसे बँटती है) और कल्याण अर्थशास्त्र (कौन-सी आर्थिक अवस्था "बेहतर" है, यह कैसे तय करें)। सिलेबस:

  • साधन-कीमत निर्धारण: सीमांत उत्पादकता सिद्धांत, ऑयलर प्रमेय और उत्पाद-समाप्ति; लगान, मज़दूरी, ब्याज और लाभ के सिद्धांत।
  • समष्टि वितरण सिद्धांत: रिकार्डो, मार्क्स, कालेकी, काल्डोर।
  • कल्याण अर्थशास्त्र: पैरेटो इष्टतमता (उपभोग, उत्पादन, उत्पाद-मिश्रण), कल्याण के मूल प्रमेय, क्षतिपूर्ति सिद्धांत (काल्डोर-हिक्स, सिटोवस्की), सामाजिक कल्याण फलन (बर्गसन-सैमुएलसन), ऐरो का असंभाव्यता प्रमेय, सेन और रॉल्स।
  • बाज़ार विफलता: बाह्यताएँ, सार्वजनिक वस्तुएँ, सूचना-असममिति; सरकार की भूमिका।

2025 में बाज़ार विफलता के कारण और सिटोवस्की विरोधाभास के साथ काल्डोर-हिक्स कसौटी पूछी गई; 2024 में 2×2×2 मॉडल में उत्पादन की पैरेटो इष्टतमता (और यह कि वह समता नहीं देती) तथा सार्वजनिक बनाम निजी वस्तुएँ आईं।

2. साधन-कीमत: सीमांत उत्पादकता सिद्धांत

  • मूल विचार (जे.बी. क्लार्क): पूर्ण प्रतियोगिता में हर साधन को उसके सीमांत उत्पाद के मूल्य (VMP = P × MP) के बराबर भुगतान मिलता है।
  • अपूर्ण प्रतियोगिता में: फ़र्म साधन को MRP = MR × MP तक लगाती है; MRP < VMP, इसलिए अंतर (VMP − MRP) को जोन रॉबिन्सन ने एकाधिकारी शोषण कहा। साधन बाज़ार में क्रेता-एकाधिकार (monopsony) हो तो मज़दूरी MRP से भी कम (क्रेता-एकाधिकारी शोषण)।
  • उत्पाद-समाप्ति समस्या (Wicksteed, 1894): क्या सीमांत उत्पादकता के अनुसार भुगतान कुल उत्पाद को ठीक समाप्त करेगा?
Q = L·MPL + K·MPK (ऑयलर प्रमेय, प्रथम घात का समघात फलन)
  • स्थिर पैमाने के प्रतिफल पर ठीक समाप्ति; वर्धमान प्रतिफल पर भुगतान उत्पाद से अधिक (घाटा), ह्रासमान पर कम (अवशेष)।
  • हिक्स-सैमुएलसन समाधान: दीर्घकालीन पूर्ण प्रतियोगी संतुलन में फ़र्म LAC के न्यूनतम बिंदु पर होती है, जहाँ स्थानीय रूप से स्थिर प्रतिफल हैं; इसलिए उत्पाद-समाप्ति हर उत्पादन फलन के लिए वहाँ लागू।
  • कॉब-डगलस में साधन-हिस्से: Q = ALαK1−α में श्रम का हिस्सा wL/Q = α स्थिर; यह सापेक्ष साधन-हिस्सों की दीर्घकालीन स्थिरता (बाउली का नियम) को समझाता है।
आलोचना
  • साधनों की पूर्ण विभाज्यता और पूर्ण प्रतियोगिता की मान्यता अवास्तविक।
  • संयुक्त उत्पादन में किसी एक साधन का सीमांत उत्पाद अलग करना कठिन।
  • यह साधन की माँग का सिद्धांत है, कीमत का पूर्ण सिद्धांत नहीं; पूर्ति पक्ष (श्रम-पूर्ति, बचत) भी चाहिए।
  • कैम्ब्रिज पूँजी विवाद (जोन रॉबिन्सन, स्राफ़ा): विषम पूँजी को एक इकाई में मापना ब्याज दर पर निर्भर, यानी तर्क चक्रीय।

3. लगान, मज़दूरी, ब्याज और लाभ

साधन-आयप्रमुख सिद्धांतमूल बिंदु
लगानरिकार्डो (भेदात्मक लगान)भूमि की उर्वरता/स्थिति में अंतर; सीमांत भूमि लगान-रहित; "अनाज महँगा है इसलिए लगान ऊँचा है, उल्टा नहीं"।
आधुनिक (हस्तांतरण आय)आर्थिक लगान = वास्तविक आय − हस्तांतरण आय (अगले श्रेष्ठ उपयोग की आय); पूर्ति पूर्णतः बेलोचदार हो तो पूरी आय लगान।
मार्शल (आभास-लगान)अल्पकाल में मानव-निर्मित स्थिर साधनों की आय: कुल आय − कुल परिवर्ती लागत; दीर्घकाल में विलुप्त।
मज़दूरीसीमांत उत्पादकता; सौदेबाज़ी; दक्षता मज़दूरीदक्षता मज़दूरी (शापिरो-स्टिग्लिट्ज़): बाज़ार से ऊँची मज़दूरी से कामचोरी घटती है, उत्पादकता बढ़ती है; इसलिए अनैच्छिक बेरोज़गारी।
ब्याजक्लासिकल (बचत-निवेश), उधारदेय कोष, तरलता अधिमानविस्तार अध्याय 3 (समष्टि) में।
लाभक्लार्क (गतिशील), हॉले (जोखिम), नाइट (अनिश्चितता), शुम्पीटर (नवप्रवर्तन)नाइट: बीमा-योग्य जोखिम लागत है, अबीमा-योग्य अनिश्चितता का पुरस्कार लाभ; शुम्पीटर: नवप्रवर्तन से अस्थायी एकाधिकारी लाभ, नकल से विलुप्त ("सृजनात्मक विनाश")।

4. समष्टि वितरण सिद्धांत

  • रिकार्डो: तीन वर्ग (भूस्वामी, पूँजीपति, श्रमिक)। जनसंख्या बढ़ने पर घटिया भूमि पर खेती, लगान बढ़ता है; मज़दूरी जीवन-निर्वाह स्तर पर; इसलिए लाभ का हिस्सा घटता है और अंततः स्थिर अवस्था (stationary state)।
  • मार्क्स: श्रम ही मूल्य का स्रोत; अतिरिक्त मूल्य s = कुल मूल्य − मज़दूरी (परिवर्ती पूँजी v)। शोषण दर s/v; लाभ दर s/(c + v)। पूँजी का जैविक संघटन (c/v) बढ़ने से लाभ दर की गिरती प्रवृत्ति; बेरोज़गारों की "आरक्षित सेना" मज़दूरी को दबाती है।
  • कालेकी (एकाधिकार-अंश): कीमत = प्रमुख लागत पर मार्क-अप; मज़दूरी का हिस्सा एकाधिकार-अंश, कच्चे माल की कीमतों और उद्योग-संरचना पर निर्भर। प्रसिद्ध सूत्र: "मज़दूर जो कमाते हैं वह खर्च करते हैं, पूँजीपति जो खर्च करते हैं वह कमाते हैं"।
  • काल्डोर (1955-56): पूर्ण रोज़गार पर निवेश स्वतंत्र; बचत दरें sp (लाभ से) > sw (मज़दूरी से)। I = S से:
P/Y = [1/(sp − sw)]·(I/Y) − sw/(sp − sw)
  • sw = 0 हो तो P/Y = (1/sp)(I/Y): निवेश-अनुपात बढ़ने पर लाभ का हिस्सा बढ़ता है। स्थायित्व शर्त sp > sw। आलोचना: पूर्ण रोज़गार की मान्यता; लाभ-हिस्से की ऊपरी सीमा (न्यूनतम मज़दूरी) और निचली सीमा (न्यूनतम लाभ दर)।

5. पैरेटो इष्टतमता

परिभाषा: ऐसी अवस्था जहाँ किसी एक को बेहतर बनाने के लिए किसी दूसरे को बदतर बनाना अनिवार्य हो। 2×2×2 मॉडल (2 उपभोक्ता A, B; 2 वस्तुएँ X, Y; 2 साधन L, K) में तीन सीमांत शर्तें:

शर्तसूत्रआरेखप्रतियोगी बाज़ार में कैसे पूरी होती है
उपभोग में दक्षता (विनिमय)MRSAXY = MRSBXYएजवर्थ बॉक्स में अनधिमान वक्रों के स्पर्श-बिंदु: अनुबंध वक्रदोनों MRS = PX/PY
उत्पादन में दक्षताMRTSXLK = MRTSYLKउत्पादन एजवर्थ बॉक्स में सम-उत्पाद वक्रों का स्पर्श; इससे उत्पादन संभावना वक्रदोनों MRTS = w/r
उत्पाद-मिश्रण (समग्र)MRTXY = MRSXYउत्पादन संभावना वक्र और सामुदायिक अनधिमान वक्र का स्पर्शMRT = MCX/MCY = PX/PY = MRS
  • कल्याण का प्रथम मूल प्रमेय: पूर्ण प्रतियोगी संतुलन (बाह्यताएँ नहीं, पूर्ण सूचना) पैरेटो इष्टतम होता है (स्मिथ का "अदृश्य हाथ" का औपचारिक रूप)।
  • द्वितीय मूल प्रमेय: उत्तल अधिमान और तकनीक हो तो हर पैरेटो इष्टतम अवस्था उपयुक्त एकमुश्त (lump-sum) पुनर्वितरण के बाद प्रतियोगी संतुलन से प्राप्त हो सकती है; अर्थात दक्षता और समता के प्रश्न अलग किए जा सकते हैं।
  • सीमा: अनुबंध वक्र पर अनगिनत पैरेटो इष्टतम बिंदु हैं; एक बिंदु पर A के पास लगभग सब कुछ हो सकता है। अतः पैरेटो कसौटी वितरण-तटस्थ है, यह समता की गारंटी नहीं देती और यथास्थिति की ओर झुकी है।

6. क्षतिपूर्ति सिद्धांत और सामाजिक कल्याण फलन

  • काल्डोर (1939): परिवर्तन तब सुधार है जब लाभ पाने वाले हानि उठाने वालों की क्षतिपूर्ति करके भी बेहतर रहें (क्षतिपूर्ति संभावित है, वास्तविक भुगतान आवश्यक नहीं)।
  • हिक्स (1939): परिवर्तन तब सुधार है जब हानि उठाने वाले लाभ पाने वालों को परिवर्तन न करने के लिए "रिश्वत" देकर राज़ी न कर सकें।
  • सिटोवस्की विरोधाभास (1941): उपयोगिता संभावना वक्रों के परस्पर काटने पर स्थिति A से B जाना काल्डोर-हिक्स कसौटी पर सुधार हो सकता है, और फिर B से वापस A जाना भी सुधार दिखता है, यानी कसौटी असंगत। सिटोवस्की की द्विक कसौटी: परिवर्तन तभी सुधार जब (i) काल्डोर-हिक्स कसौटी पूरी हो और (ii) उलटा परिवर्तन यह कसौटी पूरी न करे।
  • लिटिल की कसौटी: दक्षता के साथ वितरण-निर्णय भी जोड़ें: परिवर्तन तब वांछनीय जब काल्डोर-हिक्स पूरी हो, सिटोवस्की उलटाव न हो, और वितरण बदतर न हो।
  • बर्गसन (1938) और सैमुएलसन (1947) का सामाजिक कल्याण फलन: W = W(UA, UB); स्पष्ट मूल्य-निर्णय; उपयोगिता संभावना सीमा और सामाजिक अनधिमान वक्र के स्पर्श पर "परम आनंद बिंदु" (constrained bliss point)।
  • ऐरो का असंभाव्यता प्रमेय (1951): तीन या अधिक विकल्पों और दो या अधिक व्यक्तियों के लिए ऐसा कोई सामाजिक चयन नियम नहीं जो एक साथ (i) असीमित डोमेन, (ii) पैरेटो सिद्धांत, (iii) असंबद्ध विकल्पों से स्वतंत्रता और (iv) अधिनायक-रहितता को पूरा करे। उदाहरण: बहुमत मतदान में कोंडोर्से चक्र।
  • सेन: "उदारवादी पैरेटियन की असंभाव्यता" (1970): न्यूनतम उदारवाद और पैरेटो सिद्धांत भी परस्पर टकराते हैं। क्षमता दृष्टिकोण: कल्याण को "कार्य-क्षमताओं" (functionings, capabilities) से आँकें।
  • रॉल्स (1971): "अज्ञान के पर्दे" के पीछे चुनाव; मैक्सिमिन कल्याण फलन W = min(UA, UB) (सबसे वंचित की स्थिति सुधारें)। इसके विपरीत बेंथम का उपयोगितावादी फलन W = UA + UB।

7. बाज़ार विफलता और सरकार

कारणप्रभावसुधार-उपाय
बाह्यताएँ (नकारात्मक: प्रदूषण; धनात्मक: टीकाकरण)निजी MC ≠ सामाजिक MC; अति/न्यून उत्पादनपिगू कर/सब्सिडी; व्यापार-योग्य परमिट; कोस प्रमेय (स्पष्ट संपत्ति अधिकार, कम सौदा-लागत)
सार्वजनिक वस्तुएँमुफ़्तखोरी (free-rider); बाज़ार द्वारा न्यून पूर्तिसरकारी पूर्ति, कर से वित्त; सैमुएलसन शर्त ΣMRS = MRT
अपूर्ण प्रतियोगिताP > MC, भारहीन हानिप्रतिस्पर्धा कानून, नियमन
सूचना-असममितिप्रतिकूल चयन (एकरलॉफ़ का "लेमन्स" बाज़ार, 1970), नैतिक संकटअनिवार्य बीमा, वारंटी, संकेतन (स्पेंस), प्रकटीकरण नियम
अपूर्ण/लुप्त बाज़ारजोखिम, भविष्य, ऋण बाज़ारों का अभावसरकारी ऋण-गारंटी, फ़सल बीमा
असमानता और समष्टि अस्थिरतादक्ष पर अन्यायपूर्ण परिणाम; बेरोज़गारीपुनर्वितरण, स्थिरीकरण नीति
  • सार्वजनिक वस्तु के लक्षण: अ-प्रतिद्वंद्विता (non-rivalry: एक के उपभोग से दूसरे के लिए कमी नहीं) और अ-वर्जनीयता (non-excludability: भुगतान न करने वाले को रोकना असंभव/महँगा)। उदाहरण: राष्ट्रीय रक्षा, प्रकाश-स्तंभ, स्वच्छ वायु।
  • वर्गीकरण: निजी (प्रतिद्वंद्वी, वर्जनीय: भोजन); क्लब वस्तु (अ-प्रतिद्वंद्वी, वर्जनीय: केबल TV, टोल सड़क); साझा संसाधन (प्रतिद्वंद्वी, अ-वर्जनीय: मछली क्षेत्र, भूजल, "साझा संपदा की त्रासदी", हार्डिन 1968); शुद्ध सार्वजनिक।
  • गुण वस्तुएँ (merit goods, मसग्रेव): शिक्षा, स्वास्थ्य; समाज इन्हें व्यक्ति के चुनाव से अधिक मात्रा में चाहता है।
  • सरकार की विफलता: लोक-चयन सिद्धांत (बुकानन): किराया-माँग (rent-seeking), नौकरशाही, सूचना-अभाव; इसलिए बाज़ार-विफलता अपने-आप सरकारी हस्तक्षेप का औचित्य नहीं।

8. Master Summary Table

विषयमूल परिणामनाम/वर्ष
उत्पाद-समाप्तिQ = L·MPL + K·MPK (CRS)विक्स्टीड, ऑयलर
एकाधिकारी शोषणVMP − MRPजोन रॉबिन्सन
भेदात्मक लगानसीमांत भूमि लगान-रहितरिकार्डो, 1817
आभास-लगानTR − TVC (अल्पकाल)मार्शल
लाभअबीमा-योग्य अनिश्चितता / नवप्रवर्तननाइट 1921 / शुम्पीटर
काल्डोर वितरणP/Y = (1/sp)(I/Y) (sw = 0)काल्डोर, 1956
पैरेटो शर्तेंMRSA = MRSB; MRTSX = MRTSY; MRT = MRSपैरेटो
क्षतिपूर्तिसंभावित क्षतिपूर्ति; द्विक कसौटीकाल्डोर-हिक्स 1939; सिटोवस्की 1941
SWFW = W(UA, UB)बर्गसन 1938, सैमुएलसन
असंभाव्यता4 शर्तें एक साथ असंभवऐरो, 1951
सार्वजनिक वस्तुΣMRS = MRTसैमुएलसन, 1954
बाह्यतापिगू कर; कोस प्रमेयपिगू 1920; कोस 1960

9. चार्ट: उपयोगिता संभावना वक्र और सिटोवस्की विरोधाभास

A (वक्र UPC₁ पर) B (वक्र UPC₂ पर) UPC₁ UPC₂ UBUA
A से B: UPC₂ पर ऐसे बिंदु हैं जो A से दोनों के लिए बेहतर (A के उत्तर-पूर्व), अतः काल्डोर कसौटी पर सुधार। B से A वापसी: UPC₁ पर भी B से बेहतर बिंदु हैं, अतः यह भी "सुधार"। वक्रों के काटने से उत्पन्न यह असंगति सिटोवस्की विरोधाभास है।

10. Mind Map

वितरण और कल्याण
साधन-कीमत
  • VMP, MRP, शोषण
  • ऑयलर, उत्पाद-समाप्ति
साधन-आय
  • लगान: रिकार्डो, आभास
  • लाभ: नाइट, शुम्पीटर
समष्टि वितरण
  • रिकार्डो, मार्क्स
  • कालेकी, काल्डोर
कल्याण
  • पैरेटो, मूल प्रमेय
  • काल्डोर-हिक्स, सिटोवस्की
  • SWF, ऐरो, रॉल्स, सेन
बाज़ार विफलता
  • बाह्यता, सार्वजनिक वस्तु
  • सूचना-असममिति

11. महत्वपूर्ण One-liners

  • पैरेटो इष्टतमता दक्षता की कसौटी है, समता की नहीं।
  • कल्याण का द्वितीय प्रमेय दक्षता और वितरण को अलग करता है (एकमुश्त हस्तांतरण द्वारा)।
  • काल्डोर-हिक्स क्षतिपूर्ति संभावित है, वास्तविक नहीं।
  • सार्वजनिक वस्तु के लिए ΣMRS = MRT (ऊर्ध्वाधर योग), निजी वस्तु के लिए क्षैतिज योग।
  • कोस: कम सौदा-लागत पर संपत्ति अधिकार किसी को भी मिलें, परिणाम दक्ष होगा।
  • "Risk, Uncertainty and Profit" (1921): फ्रैंक नाइट।
  • "The Market for Lemons" (1970): जॉर्ज एकरलॉफ़।
  • ऐरो के असंभाव्यता प्रमेय की पुस्तक: "Social Choice and Individual Values" (1951)।

12. टिप्स एवं ट्रिक्स

उत्तर-लेखन
  • पैरेटो प्रश्नों में एजवर्थ बॉक्स और उत्पादन संभावना वक्र दोनों बनाएँ; अनुबंध वक्र से PPC का संबंध दिखाएँ।
  • क्षतिपूर्ति प्रश्नों में उपयोगिता संभावना वक्र (UPC) का आरेख सबसे प्रभावी है।
  • बाज़ार विफलता के उत्तर को भारतीय उदाहरणों से जोड़ें: पराली जलाना (बाह्यता), भूजल दोहन (साझा संसाधन), फ़सल बीमा (लुप्त बाज़ार)।
याद रखने की तरकीब

पैरेटो की तीन शर्तें: "उपभोक्ता-उत्पादक-उत्पाद" (MRS = MRS, MRTS = MRTS, MRT = MRS)। लाभ के सिद्धांत: "क्लार्क चले, हॉले जोखिम, नाइट अनिश्चित, शुम्पीटर नया"।

सामान्य भूल

हिक्स और काल्डोर कसौटियों को एक कहना ठीक है (काल्डोर-हिक्स), पर दोनों के दृष्टिकोण अलग हैं: काल्डोर लाभ पाने वालों की ओर से, हिक्स हानि उठाने वालों की ओर से।

13. PYQ-आधारित प्रश्न एवं हल

Q1UPSC 2025 · Paper I · 1(d) · 10 अंक

बाज़ार विफलता के कारण स्पष्ट कीजिए। इसके सुधार में सरकार की क्या भूमिका है?

मॉडल उत्तर

अर्थ: जब बाज़ार संसाधनों का पैरेटो-इष्टतम आवंटन नहीं कर पाता (प्रथम मूल प्रमेय की शर्तें टूटती हैं)।

कारण और सरकारी भूमिका: खंड 7 की तालिका: बाह्यताएँ (पिगू कर, जैसे कोयला उपकर; परमिट), सार्वजनिक वस्तुएँ (सरकारी पूर्ति), एकाधिकार (प्रतिस्पर्धा आयोग), सूचना-असममिति (SEBI/IRDAI जैसे नियामक), लुप्त बाज़ार (PMFBY फ़सल बीमा, ऋण-गारंटी)।

सीमा: सरकार की विफलता (किराया-माँग, सूचना-अभाव) भी संभव; अतः लक्षित, नियम-आधारित हस्तक्षेप।

Q2UPSC 2025 · Paper I · 2(c)

सिटोवस्की विरोधाभास क्या है? काल्डोर-हिक्स क्षतिपूर्ति कसौटी के संदर्भ में इसकी व्याख्या कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

पृष्ठभूमि: पैरेटो कसौटी उन परिवर्तनों पर मौन है जिनमें किसी को लाभ और किसी को हानि हो। काल्डोर और हिक्स ने क्षतिपूर्ति की संभावना के आधार पर कसौटी दी, जिससे अंतर-व्यक्तिक उपयोगिता तुलना से बचा जा सके।

विरोधाभास: चार्ट: परस्पर काटते UPC पर A → B और B → A दोनों काल्डोर-हिक्स सुधार। कारण: परिवर्तन से उत्पादन-मिश्रण के साथ आय-वितरण भी बदलता है, और सापेक्ष कीमतें बदलने से "क्षतिपूर्ति की संभावना" का आधार बदल जाता है।

सिटोवस्की का समाधान: द्विक कसौटी। सीमा: दोनों कसौटियाँ पूरी न हों तो भी कोई क्रम नहीं; और गोरमन ने दिखाया कि द्विक कसौटी भी संक्रामकता (transitivity) की गारंटी नहीं देती। अतः अंततः स्पष्ट मूल्य-निर्णय (बर्गसन-सैमुएलसन SWF) आवश्यक।

Q3UPSC 2024 · Paper I · 2(a)

2×2×2 मॉडल में उत्पादन में पैरेटो इष्टतमता की व्याख्या कीजिए। दर्शाइए कि पैरेटो इष्टतमता आवश्यक रूप से समता सुनिश्चित नहीं करती।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

उत्पादन एजवर्थ बॉक्स: भुजाएँ कुल L और K; X और Y के सम-उत्पाद वक्र विपरीत कोनों से। जहाँ वे एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं वहाँ MRTSXLK = MRTSYLK; इन बिंदुओं का पथ उत्पादन अनुबंध वक्र। अनुबंध वक्र से बाहर का बिंदु (जहाँ सम-उत्पाद काटते हैं) अदक्ष, क्योंकि पुनर्आवंटन से दोनों उत्पादन बढ़ सकते हैं। अनुबंध वक्र को X-Y तल में ले जाने पर उत्पादन संभावना वक्र।

समता क्यों नहीं: अनुबंध वक्र का हर बिंदु दक्ष है, चाहे वह लगभग सब कुछ X को दे या Y को; और उपभोग अनुबंध वक्र पर भी एक उपभोक्ता के पास लगभग सारी वस्तुएँ हो सकती हैं। अतः दक्षता अनेक संभावित वितरणों के साथ संगत है; प्रारंभिक संपदा का वितरण तय करता है कि हम कहाँ पहुँचेंगे। समता के लिए सामाजिक कल्याण फलन या रॉल्सियन/सेन जैसा न्याय-सिद्धांत चाहिए।

Q4UPSC 2024 · Paper I · 4(b)

सार्वजनिक वस्तुओं और निजी वस्तुओं में भेद कीजिए। सार्वजनिक वस्तुएँ बाज़ार विफलता का कारण कैसे बनती हैं?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भेद: निजी वस्तु प्रतिद्वंद्वी और वर्जनीय; सार्वजनिक वस्तु अ-प्रतिद्वंद्वी और अ-वर्जनीय (खंड 7 का वर्गीकरण, उदाहरण सहित)।

दक्ष पूर्ति (सैमुएलसन, 1954): अ-प्रतिद्वंद्विता के कारण हर इकाई सभी उपभोग करते हैं, इसलिए सामाजिक सीमांत लाभ = व्यक्तिगत लाभों का योग: ΣMRS = MRT (माँग वक्रों का ऊर्ध्वाधर योग)।

बाज़ार विफलता: अ-वर्जनीयता से मुफ़्तखोरी: हर व्यक्ति अपनी सच्ची रुचि छिपाता है, इसलिए निजी पूर्ति शून्य या न्यून; अ-प्रतिद्वंद्विता के कारण अतिरिक्त उपयोगकर्ता की MC शून्य, अतः कीमत लेना भी अदक्ष।

समाधान: सरकारी पूर्ति, कर-वित्त; लिंडाल कीमतें; क्लार्क-ग्रोव्स प्रकटीकरण तंत्र; स्थानीय सार्वजनिक वस्तुओं में टिबू (पैरों से मतदान)।

Q5अभ्यास प्रश्न · 15 अंक

काल्डोर के वितरण मॉडल में sp = 0.4, sw = 0.1 और निवेश-आय अनुपात I/Y = 0.16 है। लाभ का हिस्सा ज्ञात कीजिए। यदि I/Y बढ़कर 0.19 हो जाए तो?

हल
P/Y = (I/Y − sw)/(sp − sw) = (0.16 − 0.10)/0.30 = 0.20

I/Y = 0.19 पर: P/Y = 0.09/0.30 = 0.30। निवेश-अनुपात में 3 प्रतिशत-अंक वृद्धि से लाभ-हिस्सा 10 प्रतिशत-अंक बढ़ा, क्योंकि गुणक 1/(sp − sw) = 3.33। व्याख्या: अधिक निवेश के लिए आवश्यक बचत ऊँची बचत-प्रवृत्ति वाले वर्ग (पूँजीपति) की आय बढ़ाकर ही आ सकती है।

Q6अभ्यास प्रश्न · 15 अंक

ऐरो के असंभाव्यता प्रमेय की शर्तें बताइए और बहुमत मतदान के उदाहरण से समझाइए। सेन ने इस गतिरोध से निकलने का क्या मार्ग सुझाया?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

शर्तें: खंड 6।

उदाहरण (कोंडोर्से चक्र): मतदाता 1: x > y > z; मतदाता 2: y > z > x; मतदाता 3: z > x > y। बहुमत से x > y (1, 3), y > z (1, 2), z > x (2, 3), यानी सामाजिक वरीयता चक्रीय, संक्रामकता भंग।

सेन का मार्ग: ऐरो केवल क्रमवाचक, अतुलनीय उपयोगिता की सूचना का उपयोग करते हैं। सेन ने दिखाया कि अंतर-व्यक्तिक तुलना (स्तर या इकाई) की अनुमति देने पर रॉल्सियन या उपयोगितावादी नियम संगत हो जाते हैं; "सूचनात्मक आधार" बढ़ाना ही समाधान है। इसी से क्षमता दृष्टिकोण और HDI जैसे माप निकले।

14. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • साधन-कीमत: VMP/MRP, रॉबिन्सन का शोषण, ऑयलर और उत्पाद-समाप्ति, कैम्ब्रिज विवाद।
  • साधन-आय: रिकार्डो लगान, आभास-लगान, दक्षता मज़दूरी, नाइट और शुम्पीटर का लाभ।
  • समष्टि वितरण: रिकार्डो की स्थिर अवस्था, मार्क्स की गिरती लाभ दर, कालेकी मार्क-अप, काल्डोर सूत्र।
  • कल्याण: तीन पैरेटो शर्तें, दो मूल प्रमेय, काल्डोर-हिक्स, सिटोवस्की, बर्गसन SWF, ऐरो, सेन, रॉल्स।
  • बाज़ार विफलता: बाह्यता (पिगू, कोस), सार्वजनिक वस्तु (ΣMRS = MRT), सूचना (एकरलॉफ़), सरकार की विफलता।