1. अध्याय एक नज़र में
Paper I का भाग 2 — जलवायु विज्ञान (Climatology) — वायुमंडल की संरचना और संगठन, सूर्यातप और ऊष्मा बजट, तापमान का वितरण, वायुदाब और पवन तंत्र, वायुमंडलीय परिसंचरण, जेट स्ट्रीम, वायुराशियाँ और वाताग्र, शीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय चक्रवात, मानसून, जलवायु वर्गीकरण (कोपेन, थॉर्नथ्वेट) और जलवायु परिवर्तन। 2025 में वायुराशियाँ और स्थानीय पवन, त्रिकोशिकीय वायुमंडलीय परिसंचरण, पृथ्वी-वायुमंडल तंत्र में ऊर्जा का वितरण और संतुलन; 2024 में शीतोष्ण चक्रवात और "विस्तारण अक्ष" (axis of dilation), कोपेन वर्गीकरण का अक्षांशीय वितरण, और वायुराशियाँ तथा उत्तरी गोलार्ध का मौसम पूछे गए।

2. वायुमंडल: संघटन और संरचना
- संघटन — नाइट्रोजन ~78.08%, ऑक्सीजन ~20.95%, आर्गन ~0.93%, कार्बन डाइऑक्साइड ~0.042% (2024 में वार्षिक औसत लगभग 424 ppm), जलवाष्प (0-4%), ओज़ोन, धूलकण (संघनन-केंद्र)।
| परत | ऊँचाई (लगभग) | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| क्षोभमंडल (Troposphere) | ध्रुवों पर ~8 किमी, विषुवत् पर ~18 किमी | सभी मौसमी घटनाएँ; ताप-ह्रास दर ~6.5°C प्रति किमी; ऊपरी सीमा — क्षोभसीमा |
| समतापमंडल (Stratosphere) | क्षोभसीमा से ~50 किमी | ओज़ोन परत (15-35 किमी) — पराबैंगनी अवशोषण से तापमान बढ़ता; स्थिर — जेट विमानों के लिए आदर्श |
| मध्यमंडल (Mesosphere) | 50-80 किमी | सबसे ठंडा भाग (~−90°C); उल्काएँ जलती हैं |
| तापमंडल/आयनमंडल | 80-400+ किमी | आयनित कण, रेडियो तरंगों का परावर्तन, ध्रुवीय ज्योति (aurora) |
| बहिर्मंडल (Exosphere) | सबसे ऊपरी | अत्यंत विरल; उपग्रह |
3. सूर्यातप, ऊष्मा बजट और ऊर्जा संतुलन (UPSC 2025)
- सूर्यातप (Insolation) — सौर स्थिरांक ~1,361 वाट/वर्ग मीटर (वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर); वितरण के नियंत्रक — सूर्य-किरणों का कोण (अक्षांश), दिन की अवधि, वायुमंडल की पारदर्शिता, स्थल-विन्यास, पृथ्वी-सूर्य दूरी (उपसौर — जनवरी, अपसौर — जुलाई)।
- ऊष्मा बजट (NCERT का सरल मॉडल — 100 इकाई) — आने वाली ऊर्जा: 35 इकाई परावर्तित (ऐल्बिडो — 27 बादल, 2 हिम-बर्फ़, 6 प्रकीर्णन); 14 इकाई वायुमंडल द्वारा अवशोषित; 51 इकाई पृथ्वी की सतह द्वारा। पृथ्वी से विकिरण: 51 इकाई में से 17 सीधे अंतरिक्ष को, 34 वायुमंडल द्वारा अवशोषित (6 प्रत्यक्ष, 9 संवहन-विक्षोभ, 19 गुप्त ऊष्मा); वायुमंडल कुल 48 (14 + 34) इकाई अंतरिक्ष में विकिरित करता है → कुल निर्गमन 35 + 17 + 48 = 100 — दीर्घकालिक संतुलन। (आधुनिक उपग्रह-आकलन में ग्रहीय ऐल्बिडो लगभग 0.29-0.30।)
- ग्रीनहाउस प्रभाव — लघु-तरंग सौर विकिरण अंदर आता है, दीर्घ-तरंग पार्थिव विकिरण को CO₂, जलवाष्प, मीथेन आदि रोकते हैं — बिना इसके पृथ्वी का औसत तापमान लगभग −18°C होता (अभी ~15°C)।
- अक्षांशीय ऊर्जा असंतुलन — लगभग 40°N और 40°S के बीच ऊर्जा-अधिशेष, ध्रुवों की ओर ऊर्जा-घाटा; यह असंतुलन पवनों (अधिकांश भाग) और महासागरीय धाराओं द्वारा ऊष्मा के ध्रुवोन्मुख स्थानांतरण से संतुलित — यही वायुमंडलीय-महासागरीय परिसंचरण का मूल कारण।
- ऊर्ध्वाधर संतुलन — सतह पर विकिरण-अधिशेष, वायुमंडल में घाटा — संवहन और गुप्त ऊष्मा (वाष्पीकरण-संघनन) से संतुलन।
- वर्तमान असंतुलन — ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने से पृथ्वी के ऊर्जा-बजट में धनात्मक असंतुलन (आने वाली ऊर्जा > जाने वाली — लगभग 1 वाट/वर्ग मीटर के क्रम का अनुमान); अतिरिक्त ऊष्मा का ~90% महासागरों में संचित; IPCC AR6 (2021) — 2011-2020 में पूर्व-औद्योगिक (1850-1900) से ~1.1°C वृद्धि; WMO के अनुसार 2024 पहला कैलेंडर वर्ष जिसका वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक से ~1.5°C से अधिक रहा।

4. वायुदाब, पवन और त्रिकोशिकीय परिसंचरण
- वायुदाब पेटियाँ — विषुवतीय निम्न (डोलड्रम/ITCZ), उपोष्ण उच्च (~30° — "अश्व अक्षांश"), उपध्रुवीय निम्न (~60°), ध्रुवीय उच्च।
- पवन को प्रभावित करने वाले बल — दाब-प्रवणता बल, कोरिओलिस बल (फ़ेरल का नियम — उत्तरी गोलार्ध में दाहिनी ओर, दक्षिणी में बाईं ओर; विषुवत् पर शून्य, ध्रुवों पर अधिकतम), घर्षण; ऊपरी वायुमंडल में भूविक्षेपी पवन (geostrophic — समदाब रेखाओं के समानांतर)।
- स्थायी पवनें — व्यापारिक (पूर्वी), पछुआ (पश्चिमी — "गरजता चालीसा", "प्रचंड पचासा", "चीखता साठा" — दक्षिणी गोलार्ध), ध्रुवीय पूर्वी।
त्रिकोशिकीय वायुमंडलीय परिसंचरण (UPSC 2025)
| कोशिका | अक्षांश | प्रकृति | सतही पवन |
|---|---|---|---|
| हैडली (जॉर्ज हैडली, 1735) | 0°-30° | तापीय-प्रत्यक्ष — विषुवत् पर गर्म वायु ऊपर उठकर ध्रुवों की ओर, 30° पर नीचे उतरती | व्यापारिक पवनें (उत्तर-पूर्वी/दक्षिण-पूर्वी) |
| फ़ेरल (विलियम फ़ेरल, 1856) | 30°-60° | तापीय-अप्रत्यक्ष — दोनों ओर की कोशिकाओं से संचालित; चक्रवातों-प्रतिचक्रवातों (भँवरों) द्वारा ऊष्मा-संवहन का औसत रूप | पछुआ पवनें |
| ध्रुवीय | 60°-90° | तापीय-प्रत्यक्ष — ध्रुवों पर ठंडी वायु नीचे उतरकर 60° की ओर | ध्रुवीय पूर्वी पवनें |
- निर्माण क्यों — घूर्णन की भूमिका — यदि पृथ्वी घूर्णन न करती, तो प्रत्येक गोलार्ध में एक विशाल संवहन-कोशिका (जॉर्ज हैडली का मूल एक-कोशिका मॉडल, 1735) बनती — विषुवत् से ध्रुव तक; पर पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न कोरिओलिस बल ध्रुवोन्मुख ऊपरी वायु को विक्षेपित कर पश्चिमी बना देता है, कोणीय संवेग संरक्षण से ~30° तक वह तीव्र पश्चिमी पवन (उपोष्ण जेट) बन जाती है और आगे नहीं जा पाती — वह ठंडी होकर नीचे उतरती है → उपोष्ण उच्च दाब; इसी प्रकार ध्रुवीय कोशिका बनती है; बीच का क्षेत्र भँवर-प्रधान फ़ेरल कोशिका। अर्थात् अक्षांशीय तापन-भेद + घूर्णन (कोरिओलिस) + गोलाकार आकार मिलकर एक कोशिका को तीन में तोड़ देते हैं।
- सीमाएँ और आधुनिक दृष्टि — फ़ेरल कोशिका एक "औसत" अवधारणा है; मध्य-अक्षांशों में ऊर्जा-स्थानांतरण मुख्यतः रॉस्बी तरंगों और चक्रवाती भँवरों से; ऋतु के साथ कोशिकाओं का खिसकना; स्थल-जल वितरण से विकृति (मानसून); जलवायु परिवर्तन से हैडली कोशिका का ध्रुवोन्मुख विस्तार — उपोष्ण शुष्कता का प्रसार।
- जेट स्ट्रीम — क्षोभसीमा के निकट तीव्र पश्चिमी पवन-पट्टियाँ — उपोष्ण पश्चिमी जेट (~30°, हैडली-फ़ेरल सीमा) और ध्रुवीय वाताग्र जेट (~60°); भारत में ग्रीष्म में उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट (मानसून से जुड़ा)।

5. वायुराशियाँ, वाताग्र और स्थानीय पवन
वायुराशियाँ (UPSC 2024, 2025)
- परिभाषा — विशाल क्षेत्र (हज़ारों किमी) में फैला वायु-पिंड जिसमें क्षैतिज रूप से तापमान और आर्द्रता लगभग समान हो — यह अपने उद्गम-प्रदेश (source region — समरूप, स्थिर सतह: महासागर, विशाल मैदान, बर्फ़ीले क्षेत्र, प्रतिचक्रवाती स्थिति) के गुण ग्रहण करता है।
- वर्गीकरण (टॉर बर्जरॉन, 1928) — उद्गम के अक्षांश से: A (आर्कटिक/अंटार्कटिक), P (ध्रुवीय), T (उष्णकटिबंधीय), E (विषुवतीय); सतह से: c (महाद्वीपीय — शुष्क), m (सामुद्रिक — आर्द्र); तापीय: k (सतह से ठंडी), w (गर्म)।
| वायुराशि | उद्गम | गुण | उत्तरी गोलार्ध के मौसम पर प्रभाव |
|---|---|---|---|
| cA / cP | साइबेरिया, उत्तरी कनाडा, आर्कटिक | अत्यंत ठंडी, शुष्क, स्थिर | शीत लहरें, पाला, साफ़ आकाश (उत्तरी अमेरिका, यूरेशिया); "ध्रुवीय भँवर" के विस्थापन से अत्यधिक ठंड (टेक्सास, फ़रवरी 2021); उत्तर भारत की शीत लहर |
| mP | उत्तरी प्रशांत, उत्तरी अटलांटिक | ठंडी, आर्द्र, अस्थिर | पश्चिमी तटों पर बादल, बौछारें, हिमपात (ब्रिटेन, ब्रिटिश कोलंबिया) |
| mT | मेक्सिको की खाड़ी, उपोष्ण अटलांटिक-प्रशांत | गर्म, आर्द्र, अस्थिर | उमस, गरज-तूफ़ान, टॉर्नेडो (cP से मिलने पर — "टॉर्नेडो एली"), भारी वर्षा |
| cT | सहारा, अरब, थार, उत्तर मेक्सिको | गर्म, शुष्क | लू, धूल-आँधी, सूखा, ग्रीष्म-लहर (भूमध्यसागरीय यूरोप, उत्तर भारत) |
| mE | विषुवतीय महासागर | अत्यंत गर्म-आर्द्र | मानसून और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में योगदान |
- मौसम-गतिकी — वायुराशियाँ उद्गम से हटकर रूपांतरित होती हैं (ऊष्मागतिक — ऊष्मा/नमी लेना-देना; यांत्रिक — उत्थान-अवतलन); भिन्न वायुराशियाँ मिलने पर वाताग्र (fronts) — शीत, उष्ण, स्थिर, अधिविष्ट (occluded); वाताग्रों पर बादल, वर्षा, शीतोष्ण चक्रवात।
- भारत — शीतकाल में cP का प्रभाव और पश्चिमी विक्षोभ (भूमध्यसागर से उत्पन्न, उपोष्ण जेट द्वारा — उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा, रबी के लिए लाभदायक); ग्रीष्म में cT (लू); मानसून में mT/mE।
वायुराशियों और स्थानीय पवनों का संबंध (UPSC 2025)
- संबंध — अधिकांश स्थानीय पवनें किसी वृहत् वायुराशि का स्थानीय रूपांतरण हैं — स्थलाकृति (पर्वत, घाटी), स्थानीय तापन और दाब-प्रवणता द्वारा: (1) उष्ण-शुष्क स्थानीय पवन — cT वायुराशि से (लू, सिरोको, ख़मसिन, हरमट्टन); (2) पर्वत से उतरती गर्म पवनें — mP/mT वायु पर्वत पर चढ़कर वर्षा कर देती है, फिर विपरीत ढलान पर शुष्क रुद्धोष्म (adiabatic) तापन से गर्म — फ़ोहन (आल्प्स), चिनूक (रॉकीज़ — "हिम-भक्षक"); (3) ठंडी अपवाहिक (katabatic) पवनें — cP/cA वायु का पर्वतीय घाटियों में संकुचित होकर तीव्र प्रवाह — मिस्ट्रल (रोन घाटी, फ़्रांस), बोरा (एड्रियाटिक); (4) सांता एना (कैलिफ़ोर्निया — वनाग्नि)।
- भारतीय स्थानीय पवनें — लू (उत्तर-पश्चिम भारत, मई-जून), काल बैसाखी/नॉरवेस्टर (बंगाल-असम — cT और mT का मिलन, चाय-जूट-धान के लिए लाभ), आम्र वर्षा (केरल-कर्नाटक — आम पकने में सहायक), फूलों वाली बौछार/चेरी ब्लॉसम (कर्नाटक-केरल — कॉफ़ी के फूल), आँधी।
- निष्कर्ष — वायुराशि "वृहत् मौसम" तय करती है, स्थानीय पवन उसका "स्थानीय भू-आकृतिक-तापीय रूप" है।

6. चक्रवात
शीतोष्ण चक्रवात और विस्तारण अक्ष (UPSC 2024)
- ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत — वी. बर्कनीज़ और जे. बर्कनीज़ (बर्गेन स्कूल, 1918-22) — ध्रुवीय (cP/mP) और उष्णकटिबंधीय (mT) वायुराशियों के बीच वाताग्र पर तरंग-विक्षोभ से चक्रवात: (1) स्थिर वाताग्र; (2) तरंग-निर्माण; (3) "खुली तरंग" — उष्ण और शीत खंड (sectors), उष्ण और शीत वाताग्र; (4) शीत वाताग्र का तेज़ी से बढ़कर उष्ण को पकड़ना — अधिविष्ट वाताग्र (occlusion); (5) विघटन।
- वाताग्र-जनन (frontogenesis) और "विस्तारण अक्ष" — वाताग्र (और इसलिए शीतोष्ण चक्रवात) तभी बनता है जब तापमान-प्रवणता तीव्र हो; यह विकृति क्षेत्र (deformation field) पर निर्भर करता है — जहाँ दो विपरीत वायु-प्रवाह एक संकुचन अक्ष (axis of contraction) पर मिलते हैं और लंबवत् विस्तारण अक्ष (axis of dilatation) के साथ फैलते हैं; स्वेरे पेटरसन (1936) के अनुसार यदि समताप रेखाएँ विस्तारण अक्ष से 45° से कम कोण बनाती हैं तो वे उसके समानांतर "सिमटती" (packed) जाती हैं — तापमान-प्रवणता बढ़ती है → वाताग्र-जनन; 45° से अधिक कोण पर वे फैलती हैं → वाताग्र-क्षय (frontolysis)। अतः शीतोष्ण चक्रवात का निर्माण "विस्तारण अक्ष" की स्थिति पर निर्भर है।
- अन्य कारक — ऊपरी वायुमंडल में जेट स्ट्रीम का अपसरण (divergence) — सतह पर निम्न दाब को गहरा करना; रॉस्बी तरंगों के "गर्त" के पूर्व में चक्रवात-जनन; "बैरोक्लिनिक अस्थिरता"।
- मौसम — उष्ण वाताग्र पर लंबी, हल्की वर्षा (निंबोस्ट्रेटस), शीत वाताग्र पर तीव्र बौछारें, गरज (क्यूमुलोनिंबस); पश्चिम से पूर्व गति।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात
- अनुकूल दशाएँ — समुद्र-सतह तापमान 26.5-27°C से अधिक (~50 मीटर गहराई तक), कोरिओलिस बल (विषुवत् से 5° से दूर), कम ऊर्ध्वाधर पवन-अपरूपण (wind shear), पूर्व-विद्यमान निम्न दाब विक्षोभ, ऊपरी अपसरण, उच्च सापेक्ष आर्द्रता।
- नाम — हरिकेन (अटलांटिक), टाइफ़ून (पश्चिमी प्रशांत), चक्रवात (हिंद महासागर), विली-विली (ऑस्ट्रेलिया); संरचना — नेत्र (eye), नेत्र-भित्ति (eyewall — सर्वाधिक तीव्र), सर्पिल बैंड।
- भारत — बंगाल की खाड़ी में अधिक चक्रवात (गर्म जल, कम अपरूपण), अरब सागर में हाल के वर्षों में वृद्धि (गर्म होता समुद्र); IMD वर्गीकरण; भारत की आपदा-तैयारी से मृत्यु में भारी कमी (फ़ानी 2019, ओडिशा मॉडल)।

7. मानसून
- सिद्धांत — (1) तापीय (एडमंड हैली, 1686) — स्थल-जल के असमान तापन से बड़े पैमाने की "समुद्री समीर"; (2) गतिक/ITCZ खिसकाव (हरमन फ़्लॉन, 1951) — ग्रीष्म में ITCZ का उत्तर की ओर खिसकना, दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों का विषुवत् पार कर कोरिओलिस से दक्षिण-पश्चिमी बनना; (3) जेट स्ट्रीम — उपोष्ण पश्चिमी जेट का हिमालय के उत्तर खिसकना और उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट का बनना; तिब्बत पठार का ऊष्मा-स्रोत के रूप में तापन; (4) ENSO — अल नीनो प्रायः कमज़ोर मानसून; (5) हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) (साजी और साथी, 1999) — धनात्मक IOD सहायक; (6) MJO — अंतर-मौसमी उतार-चढ़ाव।
- विशेषताएँ — आगमन (केरल ~1 जून), "मानसून विराम", निवर्तन (अक्टूबर-नवंबर — तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मानसून वर्षा)।
8. जलवायु वर्गीकरण
कोपेन वर्गीकरण और उसका अक्षांशीय वितरण (UPSC 2024)
- व्लादिमीर कोपेन (1918; संशोधित 1936) — तापमान और वर्षा के मासिक-वार्षिक आँकड़ों तथा प्राकृतिक वनस्पति (ए. डी कैंडोल के पादप-समूहों से प्रेरित) पर आधारित आनुभविक वर्गीकरण।
| वर्ग | मानदंड | उपप्रकार | अक्षांशीय वितरण |
|---|---|---|---|
| A — उष्णकटिबंधीय आर्द्र | सबसे ठंडे माह का औसत 18°C से अधिक | Af (वर्षावन), Am (मानसूनी), Aw (सवाना) | लगभग 0°-15/20° (विषुवत् के दोनों ओर); Af विषुवत् के पास, Aw बाहर की ओर |
| B — शुष्क | वाष्पीकरण > वर्षा (तापमान-आधारित सूत्र) | BW (मरुस्थल), BS (स्टेपी); h (गर्म), k (ठंडा) | उपोष्ण उच्च दाब पेटी ~15°-30° (महाद्वीपों के पश्चिमी भाग — सहारा, अटाकामा, कालाहारी, ऑस्ट्रेलिया); मध्य-अक्षांशीय महाद्वीपीय भीतरी भाग (गोबी, पैटागोनिया) |
| C — उष्ण शीतोष्ण | सबसे ठंडा माह −3°C (या 0°C) और 18°C के बीच | Cs (भूमध्यसागरीय), Cw (शुष्क शीत), Cf (सदा आर्द्र — Cfa आर्द्र उपोष्ण, Cfb समुद्री पश्चिमी तट) | ~30°-45/50° |
| D — शीत हिम-वन | सबसे ठंडा माह −3°C से नीचे, सबसे गर्म 10°C से ऊपर | Df, Dw (साइबेरिया) | ~45/50°-70° — केवल उत्तरी गोलार्ध (दक्षिणी गोलार्ध में इन अक्षांशों पर विस्तृत स्थलखंड नहीं) |
| E — ध्रुवीय | सबसे गर्म माह 10°C से कम | ET (टुंड्रा), EF (हिम-आवरण) | ~65-70° से ध्रुव तक; ग्रीनलैंड, अंटार्कटिका |
| H — उच्चभूमि (बाद में जोड़ा) | ऊँचाई के कारण | — | हिमालय, एंडीज़, तिब्बत |
- विचलन — महाद्वीपों के पूर्वी-पश्चिमी तटों में भिन्नता (पश्चिमी तट पर Cs/Cfb, पूर्वी तट पर Cfa/Cw), महासागरीय धाराएँ, पर्वत, मानसून के कारण अक्षांशीय पेटियाँ विकृत।
- भारत (कोपेन) — Amw (कोंकण, मालाबार तट), As (कोरोमंडल तट), Aw (प्रायद्वीप का अधिकांश), BShw (वृष्टि-छाया क्षेत्र, हरियाणा-गुजरात के भाग), BWhw (पश्चिमी राजस्थान), Cwg (गंगा मैदान), Dfc (अरुणाचल), E (लद्दाख, उच्च हिमालय)।
- आलोचना — वनस्पति-सीमाएँ और जलवायु-सीमाएँ हमेशा मेल नहीं खातीं; वाष्पीकरण का सही माप नहीं; वायुराशियों/गतिकी की उपेक्षा; फिर भी सरल और व्यापक रूप से प्रयुक्त।
- थॉर्नथ्वेट (1931; 1948) — संभाव्य वाष्पोत्सर्जन (PE) और जल-संतुलन, आर्द्रता सूचकांक — अधिक वैज्ञानिक पर जटिल।
9. जलवायु परिवर्तन
- कारण — प्राकृतिक (मिलानकोविच चक्र, ज्वालामुखी, सौर परिवर्तन) और मानवजनित (ग्रीनहाउस गैसें, भूमि-उपयोग परिवर्तन, एरोसोल)।
- प्रभाव — तापमान वृद्धि, हिमनद-पिघलन, समुद्र-तल वृद्धि, चरम घटनाएँ (हीटवेव, अतिवृष्टि), मानसून में परिवर्तनशीलता, समुद्री अम्लीकरण।
- वैश्विक प्रयास — UNFCCC (1992), क्योटो प्रोटोकॉल (1997), पेरिस समझौता (2015 — 2°C से नीचे, 1.5°C का प्रयास), COP28 (दुबई, 2023 — जीवाश्म ईंधन से "दूर संक्रमण"); भारत — NAPCC (2008), 2070 तक नेट-ज़ीरो।
10. Master Summary Table
| विषय | मुख्य तथ्य / विचारक | याद रखें |
|---|---|---|
| वायुमंडल | 5 परतें; ताप-ह्रास 6.5°C/किमी; ओज़ोन 15-35 किमी | CO₂ ~424 ppm (2024) |
| ऊष्मा बजट | 35 परावर्तित, 14 वायुमंडल, 51 सतह; ±40° अधिशेष | ~90% अतिरिक्त ऊष्मा महासागर में |
| परिसंचरण | हैडली 1735; फ़ेरल 1856; ध्रुवीय कोशिका | घूर्णन + तापन-भेद |
| वायुराशि | बर्जरॉन 1928; cP, mP, mT, cT, A, E | स्थानीय पवन = रूपांतरित वायुराशि |
| स्थानीय पवन | फ़ोहन, चिनूक, मिस्ट्रल, बोरा, सिरोको, हरमट्टन; लू, काल बैसाखी | रुद्धोष्म तापन |
| शीतोष्ण चक्रवात | बर्कनीज़ (1918-22); पेटरसन — विस्तारण अक्ष <45° | वाताग्र-जनन |
| मानसून | हैली 1686; फ़्लॉन 1951; TEJ; ENSO; IOD (1999) | केरल ~1 जून |
| वर्गीकरण | कोपेन 1918/1936 (A-E, H); थॉर्नथ्वेट 1931/1948 | D केवल उत्तरी गोलार्ध |
| जलवायु परिवर्तन | AR6 ~1.1°C; 2024 > 1.5°C (WMO); पेरिस 2015 | नेट-ज़ीरो 2070 (भारत) |
11. चार्ट: त्रिकोशिकीय वायुमंडलीय परिसंचरण (उत्तरी गोलार्ध)
12. Mind Map
- सूर्यातप
- ऊष्मा बजट
- अक्षांशीय असंतुलन
- दाब पेटियाँ
- त्रिकोशिकीय मॉडल
- जेट स्ट्रीम
- बर्जरॉन
- वाताग्र
- स्थानीय पवन
- शीतोष्ण (विस्तारण अक्ष)
- उष्णकटिबंधीय
- मानसून सिद्धांत
- कोपेन
- थॉर्नथ्वेट
- जलवायु परिवर्तन
13. महत्वपूर्ण One-liners
- हैडली कोशिका — जॉर्ज हैडली (1735); फ़ेरल कोशिका — विलियम फ़ेरल (1856)।
- वायुराशि वर्गीकरण — टॉर बर्जरॉन (1928); ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत — बर्कनीज़ (बर्गेन स्कूल)।
- वाताग्र-जनन में 45° का नियम — स्वेरे पेटरसन (1936)।
- मानसून का तापीय सिद्धांत — एडमंड हैली (1686); गतिक सिद्धांत — फ़्लॉन (1951)।
- कोपेन वर्गीकरण — 1918 (संशोधित 1936); थॉर्नथ्वेट — 1931, 1948।
- हिंद महासागर द्विध्रुव — साजी और साथी (1999)।
- "हिम-भक्षक" पवन — चिनूक; "डॉक्टर" पवन — हरमट्टन।
- आम्र वर्षा — केरल-कर्नाटक; काल बैसाखी — बंगाल-असम।
- सौर स्थिरांक — ~1,361 W/m²।
- 2024 — पहला कैलेंडर वर्ष ~1.5°C से अधिक गर्म (WMO)।
14. टिप्स एवं ट्रिक्स
- त्रिकोशिकीय मॉडल, वायुराशि-उद्गम मानचित्र, शीतोष्ण चक्रवात के चरण, ऊष्मा बजट प्रवाह-चार्ट, कोपेन का "आदर्श महाद्वीप" — ये पाँच आरेख अवश्य अभ्यास करें।
- हर उत्तर में भारतीय संबंध — पश्चिमी विक्षोभ, लू, काल बैसाखी, मानसून।
- 2024 जैसे तकनीकी प्रश्न (विस्तारण अक्ष) — परिभाषा + 45° नियम + आरेख।
कोपेन — "A-B-C-D-E: उष्ण-शुष्क-शीतोष्ण-हिमवन-ध्रुवीय"; उपप्रकार — "f = सदा आर्द्र, m = मानसून, w = शुष्क शीत, s = शुष्क ग्रीष्म"।
15. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
वायुमंडलीय त्रिकोशिकीय परिसंचरण तंत्र के निर्माण का परीक्षण कीजिए। पृथ्वी को घूर्णनशील ग्रह मानते हुए यह तंत्र कैसे बना, वर्णन कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: अक्षांशीय ऊर्जा-असंतुलन (±40° अधिशेष) को संतुलित करने हेतु वायुमंडल ऊष्मा को ध्रुवों की ओर ले जाता है — त्रिकोशिकीय मॉडल इसका सरल चित्र है।
कोशिकाएँ (तालिका और आरेख): हैडली (0-30°, तापीय-प्रत्यक्ष), फ़ेरल (30-60°, तापीय-अप्रत्यक्ष), ध्रुवीय (60-90°, तापीय-प्रत्यक्ष); संबद्ध दाब पेटियाँ और सतही पवनें।
घूर्णन की भूमिका: अघूर्णी पृथ्वी पर एक कोशिका; घूर्णन से कोरिओलिस बल — ध्रुवोन्मुख ऊपरी वायु का पश्चिमी पवन बनना, कोणीय संवेग से ~30° पर उपोष्ण जेट, वायु का अवतलन → उपोष्ण उच्च; ध्रुवीय कोशिका; बीच में भँवर-संचालित फ़ेरल।
सीमाएँ: फ़ेरल कोशिका औसत अवधारणा — रॉस्बी तरंगें और चक्रवात वास्तविक स्थानांतरक; मौसमी खिसकाव; स्थल-जल प्रभाव (मानसून); जलवायु परिवर्तन से हैडली विस्तार।
निष्कर्ष: त्रिकोशिकीय मॉडल तापन-भेद, घूर्णन और गोलाकार आकार की संयुक्त उपज है — वैश्विक जलवायु पेटियों की व्याख्या का आधार।
पृथ्वी के वायुमंडलीय तंत्र में ऊर्जा के वितरण और संतुलन का परीक्षण कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
सूर्यातप: सौर स्थिरांक ~1,361 W/m²; वितरण के नियंत्रक।
ऊष्मा बजट (100 इकाई — प्रवाह-चार्ट): 35 परावर्तित, 14 वायुमंडल, 51 सतह; पार्थिव विकिरण — 17 अंतरिक्ष, 34 वायुमंडल (6+9+19); वायुमंडल से 48 → संतुलन।
वितरण: अक्षांशीय — ±40° अधिशेष, ध्रुवों पर घाटा; ऊर्ध्वाधर — सतह अधिशेष, वायुमंडल घाटा; स्थल-जल भेद; ऋतु।
संतुलन के तंत्र: पवनें (त्रिकोशिकीय परिसंचरण, चक्रवात), महासागरीय धाराएँ (गल्फ़ स्ट्रीम), गुप्त ऊष्मा, संवहन।
वर्तमान असंतुलन: ग्रीनहाउस गैसों से धनात्मक असंतुलन, ~90% ऊष्मा महासागर में, ~1.1°C वृद्धि (AR6), 2024 > 1.5°C (WMO)।
निष्कर्ष: ऊर्जा संतुलन ही जलवायु तंत्र का "इंजन" है — उसका विचलन जलवायु परिवर्तन का मूल कारण।
वायुराशियों और संबद्ध मौसम-गतिकी की व्याख्या कीजिए। वायुराशियाँ उत्तरी गोलार्ध की मौसमी दशाओं को कैसे प्रभावित करती हैं?
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
परिभाषा और उद्गम: समरूप तापमान-आर्द्रता वाला विशाल वायु-पिंड; समरूप-स्थिर उद्गम-प्रदेश।
वर्गीकरण: बर्जरॉन (1928) — A, P, T, E × c, m; k/w।
मौसम-गतिकी: रूपांतरण (ऊष्मागतिक, यांत्रिक); वाताग्र — शीत, उष्ण, स्थिर, अधिविष्ट; शीतोष्ण चक्रवात।
उत्तरी गोलार्ध पर प्रभाव (तालिका): cP/cA — शीत लहरें, ध्रुवीय भँवर (टेक्सास 2021); mP — पश्चिमी तटों पर वर्षा-हिमपात; mT — उमस, टॉर्नेडो (cP से टकराव); cT — लू, ग्रीष्म-लहर; भारत — पश्चिमी विक्षोभ, लू, मानसून।
आरेख: उत्तरी अमेरिका/यूरेशिया के उद्गम-प्रदेश मानचित्र।
निष्कर्ष: उत्तरी गोलार्ध का विस्तृत स्थल वायुराशियों के तीव्र विरोधाभास का क्षेत्र है — इसलिए यहाँ मौसम अधिक परिवर्तनशील और चरम।
कोपेन के विश्व जलवायु वर्गीकरण के अक्षांशीय वितरण का वर्णन कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
आधार: कोपेन (1918/1936) — तापमान, वर्षा, वनस्पति; A-E (और H)।
अक्षांशीय वितरण (तालिका + "आदर्श महाद्वीप" आरेख): A (0-15/20°), B (~15-30° पश्चिमी भाग + मध्य-अक्षांशीय भीतरी भाग), C (~30-45/50°), D (~45/50-70°, केवल उत्तरी गोलार्ध), E (65-70° से आगे), H (उच्चभूमि)।
विचलन: पूर्वी-पश्चिमी तट भिन्नता, धाराएँ, पर्वत, मानसून।
भारत: Amw, As, Aw, BShw, BWhw, Cwg, Dfc, E।
मूल्यांकन: सरलता और व्यापकता बनाम गतिकी और वाष्पीकरण की उपेक्षा; थॉर्नथ्वेट का विकल्प।
निष्कर्ष: कोपेन का वर्गीकरण विश्व जलवायु का "अक्षांशीय मानचित्र" है जो दाब-पवन पेटियों के वितरण को प्रतिबिंबित करता है।
शीतोष्ण चक्रवात का निर्माण विस्तारण अक्ष की दशा पर निर्भर करता है। स्पष्ट कीजिए।
मॉडल उत्तर
शीतोष्ण चक्रवात: ध्रुवीय-उष्णकटिबंधीय वायुराशियों के वाताग्र पर (बर्कनीज़ — 5 चरण)।
विस्तारण अक्ष: विकृति क्षेत्र में संकुचन अक्ष पर अभिसरण, लंबवत् विस्तारण अक्ष पर प्रसार; पेटरसन (1936) — समताप रेखाएँ विस्तारण अक्ष से 45° से कम कोण पर हों तो सिमटकर प्रवणता बढ़ाती हैं → वाताग्र-जनन → चक्रवात; 45° से अधिक पर वाताग्र-क्षय।
अन्य कारक: जेट स्ट्रीम अपसरण, रॉस्बी गर्त।
आरेख: विकृति क्षेत्र में समताप रेखाओं का सिमटना।
वायुराशियों और स्थानीय पवनों के बीच संबंध को स्पष्ट कीजिए।
मॉडल उत्तर
संबंध: स्थानीय पवनें प्रायः वायुराशियों का स्थलाकृतिक-तापीय रूपांतरण — (1) cT से उष्ण-शुष्क: लू, सिरोको, ख़मसिन, हरमट्टन; (2) पर्वतानुवात रुद्धोष्म तापन: फ़ोहन, चिनूक; (3) cP से अपवाहिक ठंडी पवनें: मिस्ट्रल, बोरा; (4) सांता एना।
भारत: लू (cT), काल बैसाखी (cT-mT मिलन), आम्र वर्षा, पश्चिमी विक्षोभ।
निष्कर्ष: वायुराशि वृहत् मौसम तय करती है; स्थानीय पवन उसका स्थानीय रूप।
16. Quick Revision Summary
- वायुमंडल — संघटन, 5 परतें।
- ऊर्जा — सूर्यातप, ऊष्मा बजट (35-14-51 / 17-34-48), अक्षांशीय-ऊर्ध्वाधर असंतुलन, वर्तमान धनात्मक असंतुलन।
- परिसंचरण — दाब पेटियाँ, कोरिओलिस, त्रिकोशिकीय मॉडल (घूर्णन की भूमिका), जेट स्ट्रीम।
- वायुराशि — बर्जरॉन, उत्तरी गोलार्ध पर प्रभाव, स्थानीय पवन से संबंध।
- चक्रवात — शीतोष्ण (बर्कनीज़, विस्तारण अक्ष), उष्णकटिबंधीय (दशाएँ)।
- मानसून — हैली, फ़्लॉन, जेट, ENSO, IOD।
- वर्गीकरण — कोपेन (अक्षांशीय वितरण, भारत), थॉर्नथ्वेट; जलवायु परिवर्तन।