UPSC Mains · History · Paper II · अध्याय 9

विश्व इतिहास: प्रबोधन एवं क्रांतियाँ

World History: Enlightenment and Revolutions

पुनर्जागरण और प्रबोधन, अमेरिकी और फ्रांसीसी क्रांति, औद्योगिक क्रांति, राष्ट्रवाद, उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद।

Paper II 24 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper II का खंड B (विश्व इतिहास) अठारहवीं शताब्दी के प्रबोधन (Enlightenment) से शुरू होता है। इस अध्याय में ये विषय हैं:

  • पृष्ठभूमि: प्राचीन सभ्यताएँ, रोमन साम्राज्य, मध्यकालीन यूरोप, पुनर्जागरण, धर्मसुधार और वैज्ञानिक क्रांति (संक्षेप में, ताकि आगे के विचारों की जड़ें स्पष्ट हों)।
  • प्रबोधन और आधुनिक विचार: प्रमुख विचारक, धर्मनिरपेक्षता और पादरी-विरोध, प्रबोधन का प्रसार।
  • आधुनिक राजनीति की उत्पत्ति: अमेरिकी क्रांति और संविधान, फ़्रांसीसी क्रांति, ब्रिटेन में संसदीय सुधार।
  • औद्योगीकरण: इंग्लैंड, जर्मनी, रूस; समाजवाद का उदय।
  • राष्ट्र-राज्य व्यवस्था: उन्नीसवीं शताब्दी का राष्ट्रवाद, जर्मनी और इटली का एकीकरण, अमेरिकी गृहयुद्ध, नया साम्राज्यवाद।

2025 में फ़्रांसीसी क्रांति में अभिजात वर्ग की भूमिका, 1832 का सुधार अधिनियम, मार्क्स-पूर्व समाजवादी, राष्ट्रवाद द्वारा एकीकरण और विघटन, अमेरिकी क्रांति और प्रबोधन, नया साम्राज्यवाद, और प्रबोधन का पादरी-विरोध पूछे गए। 2024 में प्रबोधन के विचारों की चुनौती, अमेरिकी गृहयुद्ध, जर्मन एकीकरण में "कोयला और लोहा", अंग्रेज़ी औद्योगीकरण का "क्रांति" होना या न होना, और रूस के औद्योगीकरण में राज्य की भूमिका आए।

इतिहास: विश्व इतिहास की समय-रेखा
विश्व इतिहास की समय-रेखा: प्राचीन सभ्यताओं से आधुनिक युग तक प्रमुख घटनाएँ (NCERT आधारित infographic)।

2. पृष्ठभूमि: प्राचीन विश्व से पुनर्जागरण तक

  • मेसोपोटामिया: नगरीय सभ्यता (उरुक), कीलाक्षर (cuneiform) लिपि और हम्मूराबी की विधि-संहिता। "विधि द्वारा शासन" और लिखित क़ानून की परंपरा यहीं से शुरू हुई, जो आगे चलकर प्रबोधन के "विधि के शासन" के विचार की दूर की पृष्ठभूमि बनी।
इतिहास: मेसोपोटामिया का सचित्र इतिहास
मेसोपोटामिया: नगर, लेखन (कीलाक्षर), मंदिर और विधि-संहिता (NCERT आधारित infographic)।
इतिहास: पश्चिम एशिया के देश और भौतिक विशेषताएँ
पश्चिम एशिया का मानचित्र: दजला-फ़रात, पठार, मरुस्थल और प्राचीन सभ्यताओं के क्षेत्र (NCERT आधारित मानचित्र)।
  • रोमन साम्राज्य: गणतंत्र (सीनेट, कौंसल) से साम्राज्य तक; रोमन विधि; नागरिकता; भूमध्यसागर के चारों ओर एकीकृत अर्थव्यवस्था; ईसाई धर्म का राजकीय धर्म बनना (चौथी शताब्दी)। प्रबोधन-युग के विचारकों (मॉन्टेस्क्यू, गिबन) ने रोमन गणतंत्र और उसके पतन से राजनीतिक शिक्षाएँ लीं, और अमेरिकी संस्थापकों ने "सीनेट" जैसे नाम अपनाए।
इतिहास: रोमन साम्राज्य, एक अंतरमहाद्वीपीय शक्ति
रोमन साम्राज्य: प्रशासन, सेना, नगर, सड़कें और व्यापार (NCERT आधारित infographic)।
इतिहास: अपने चरम विस्तार पर रोमन साम्राज्य
रोमन साम्राज्य का अधिकतम विस्तार (लगभग दूसरी शताब्दी): यूरोप, उत्तरी अफ़्रीका और पश्चिम एशिया (NCERT आधारित मानचित्र)।
इतिहास: प्राचीन विश्व के स्थल और कलाकृतियाँ
प्राचीन विश्व के प्रमुख स्मारक और कलाकृतियाँ (NCERT आधारित collage)।
इतिहास: यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका का उच्चावच मानचित्र
यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका का भौतिक मानचित्र: पर्वत, नदियाँ और समुद्र (NCERT आधारित मानचित्र)।
  • मध्यकालीन यूरोप: सामंतवाद (लॉर्ड, नाइट और कृषि-दास), चर्च की सर्वोच्चता, किले और गिरजाघर, मठ और विश्वविद्यालय। प्रबोधन का "पादरी-विरोध" और "पुराने शासन" (ancien régime) की आलोचना इसी व्यवस्था के विरुद्ध थी।
इतिहास: इंग्लैंड के ऐतिहासिक किले और गिरजाघर
मध्यकालीन इंग्लैंड के किले और गिरजाघर: सामंती और धार्मिक सत्ता के प्रतीक (NCERT आधारित infographic)।
इतिहास: यूरोप और अफ़्रीका के शासकों और घटनाओं की समय-रेखा
यूरोप और अफ़्रीका के प्रमुख शासक और घटनाएँ: मध्यकाल से प्रारंभिक आधुनिक काल तक (NCERT आधारित infographic)।
  • पुनर्जागरण (चौदहवीं से सोलहवीं शताब्दी, इटली से): मानववाद (पेट्रार्क), शास्त्रीय यूनानी-रोमन ज्ञान का पुनरुद्धार, कला में यथार्थवाद (लियोनार्डो, माइकलएंजेलो), मैकियावेली का "द प्रिंस" (1513), और गुटेनबर्ग का छापाखाना (लगभग 1450)। संरक्षक थे फ़्लोरेंस के मेडिची जैसे व्यापारी परिवार।
इतिहास: पुनर्जागरण कालीन इटली की कला, मानचित्र और स्थापत्य
पुनर्जागरण कालीन इटली: नगर-राज्य, कलाकार, स्थापत्य और मानववादी विचार (NCERT आधारित infographic)।
  • धर्मसुधार: मार्टिन लूथर की 95 थीसिस (1517); "केवल आस्था से मुक्ति"; प्रोटेस्टेंट चर्च; प्रति-धर्मसुधार (ट्रेंट परिषद 1545-63; जेसुइट संघ 1540)।
  • वैज्ञानिक क्रांति: कॉपरनिकस (1543), गैलीलियो, न्यूटन का "प्रिंसिपिया" (1687)। प्रकृति को नियमों से समझा जा सकता है, तो समाज को भी, यही विचार प्रबोधन की नींव बना।

3. प्रबोधन और आधुनिक विचार

विचारककृतिमुख्य विचार
जॉन लॉकTwo Treatises of Government (1689)प्राकृतिक अधिकार (जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति); सहमति पर आधारित सरकार; विद्रोह का अधिकार
मॉन्टेस्क्यूThe Spirit of the Laws (1748)शक्ति-पृथक्करण (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका)
वॉल्टेयरपत्र, निबंध; कैलास मामले में हस्तक्षेप (1762)धार्मिक सहिष्णुता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, चर्च की कट्टरता की आलोचना ("Écrasez l'infâme"); देववाद (deism)
रूसोThe Social Contract (1762)"सामान्य इच्छा" (general will); जन-संप्रभुता; "मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, पर हर जगह ज़ंजीरों में है"
दिदरो और दालांबेरEncyclopédie (1751-72)ज्ञान का संकलन और प्रसार; तर्क की सत्ता
एडम स्मिथThe Wealth of Nations (1776)मुक्त बाज़ार, श्रम-विभाजन, "अदृश्य हाथ"
बेकारियाOn Crimes and Punishments (1764)यातना और मृत्युदंड का विरोध; दंड-सुधार
कांट"What is Enlightenment?" (1784)"Sapere aude", यानी अपनी बुद्धि का उपयोग करने का साहस करो

प्रबोधन के विचार: पुरानी व्यवस्था के लिए चुनौती (UPSC 2024)

  • राजनीतिक चुनौती: राजा के "दैवी अधिकार" के स्थान पर "जन-सहमति" और "सामाजिक अनुबंध"; निरंकुशता के स्थान पर शक्ति-पृथक्करण और विधि का शासन।
  • सामाजिक चुनौती: जन्म-आधारित विशेषाधिकार (कुलीन वर्ग) के स्थान पर योग्यता और समानता; सामंती दायित्वों की आलोचना।
  • धार्मिक चुनौती: चर्च की सत्ता, असहिष्णुता और अंधविश्वास की आलोचना; धर्मनिरपेक्षता।
  • आर्थिक चुनौती: वाणिज्यवाद (mercantilism) और गिल्ड-नियंत्रण के स्थान पर मुक्त व्यापार।
  • प्रसार: सैलॉन, कॉफ़ी-हाउस, पत्रिकाएँ, अकादमियाँ और मेसोनिक लॉज, यानी नया "सार्वजनिक क्षेत्र" (हैबरमास)।
  • सीमाएँ: "प्रबुद्ध निरंकुश" शासक (प्रशा के फ़्रेडरिक द्वितीय, रूस की कैथरीन द्वितीय, ऑस्ट्रिया के जोसेफ़ द्वितीय) ने कुछ विचार अपनाए, पर सत्ता नहीं छोड़ी। अधिकतर विचारक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि सुधारवादी थे। स्त्रियों, दासों और उपनिवेशितों को "सार्वभौम अधिकारों" से बाहर रखा गया, जिसके उत्तर में मैरी वोलस्टोनक्राफ़्ट ने 1792 में "A Vindication of the Rights of Woman" लिखी।
  • निष्कर्ष: प्रबोधन ने "पुराने शासन" की वैधता को भीतर से खोखला कर दिया, और उसकी परिणति अमेरिकी तथा फ़्रांसीसी क्रांतियों में हुई।

प्रबोधन का पादरी-विरोध: पुनर्जागरण और धर्मसुधार से तुलना (UPSC 2025)

  • निरंतरता: पुनर्जागरण के मानववादियों (इरास्मस) ने पादरियों के भ्रष्टाचार पर व्यंग्य किया, और धर्मसुधार (लूथर) ने पोप की सत्ता और "क्षमा-पत्रों" (indulgences) को चुनौती दी। प्रबोधन ने इसी पादरी-विरोधी परंपरा को आगे बढ़ाया।
  • पुनर्जागरण से भिन्नता: पुनर्जागरण ने शास्त्रीय यूनानी-रोमन संस्कृति, उसके "मूर्तिपूजक" (pagan) देवताओं और मिथकों का कलात्मक पुनरुद्धार किया। प्रबोधन ने ऐसा कोई धार्मिक पुनरुद्धार नहीं किया; उसका आधार तर्क और विज्ञान था।
  • धर्मसुधार से भिन्नता: धर्मसुधार का उद्देश्य आस्था को "शुद्ध" और "गहरा" करना था (केवल आस्था से मुक्ति, बाइबिल की सर्वोच्चता)। प्रबोधन ने आस्था के स्थान पर तर्क को सर्वोच्च माना। अधिकतर विचारक "देववादी" (deist) थे, यानी ईश्वर को सृष्टिकर्ता मानते थे पर चमत्कार, प्रकाशना (revelation) और चर्च की मध्यस्थता नहीं।
  • प्रबोधन का अपना मार्ग: धार्मिक सहिष्णुता (वॉल्टेयर का कैलास मामला), राज्य और चर्च का पृथक्करण (अमेरिका में जेफ़रसन का वर्जीनिया धार्मिक स्वतंत्रता क़ानून, 1786), और धर्म को निजी विश्वास बनाना।
  • निष्कर्ष: प्रबोधन का पादरी-विरोध "न मूर्तिपूजक, न आस्थावादी", बल्कि "तर्कवादी" था। इसी से आधुनिक धर्मनिरपेक्षता का जन्म हुआ।

4. अमेरिकी और फ़्रांसीसी क्रांतियाँ

अमेरिकी क्रांति: प्रबोधन की अभिव्यक्ति (UPSC 2025)

  • घटनाक्रम: स्टाम्प अधिनियम (1765) और "प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं"; बोस्टन टी पार्टी (1773); टॉमस पेन का "Common Sense" (1776); स्वतंत्रता की घोषणा (4 जुलाई 1776); पेरिस की संधि (1783); संविधान (1787); अधिकार-पत्र (Bill of Rights, 1791)।
  • राजनीतिक क्षेत्र में प्रबोधन:
    • जेफ़रसन की घोषणा में लॉक के प्राकृतिक अधिकार ("जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज") और सहमति पर आधारित सरकार।
    • संविधान में मॉन्टेस्क्यू का शक्ति-पृथक्करण और "नियंत्रण और संतुलन" (checks and balances)।
    • गणतंत्र और संघवाद।
  • नागरिक क्षेत्र में प्रबोधन: अधिकार-पत्र में अभिव्यक्ति, प्रेस, सभा और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार; और विधि का शासन।
  • धार्मिक (चर्च संबंधी) क्षेत्र में प्रबोधन: राज्य और चर्च का पृथक्करण; प्रथम संशोधन के अनुसार "किसी धर्म की स्थापना नहीं"; वर्जीनिया धार्मिक स्वतंत्रता क़ानून (1786); और कई संस्थापक, जैसे जेफ़रसन और फ़्रैंकलिन, देववादी थे।
  • सीमाएँ: दास-प्रथा बनी रही (संविधान में दास को "तीन-पाँचवें" व्यक्ति के रूप में गिना गया); मूल निवासियों और स्त्रियों को अधिकार नहीं मिले; और संपत्ति-आधारित मताधिकार रहा।
  • प्रभाव: फ़्रांसीसी क्रांति (लाफ़ायेत और फ़्रांस का युद्ध-ऋण), लैटिन अमेरिका के स्वतंत्रता आंदोलन, और लिखित संविधान का विश्वव्यापी मॉडल।
  • निष्कर्ष: अमेरिकी क्रांति प्रबोधन के विचारों का पहला सफल राजनीतिक प्रयोग थी, यद्यपि उसके सार्वभौम दावे और व्यवहार में अंतर था।

फ़्रांसीसी क्रांति और अभिजात वर्ग (UPSC 2025)

  • पृष्ठभूमि: राजकोषीय संकट (अमेरिकी युद्ध का ख़र्च); तीन एस्टेट (पादरी, कुलीन और "तृतीय एस्टेट"); करों का असमान भार।
  • "अभिजात वर्ग का विद्रोह" (1787-88): वित्त मंत्री कैलोन ने विशेषाधिकार-प्राप्त वर्गों पर भूमि-कर का प्रस्ताव रखा, जिसे "प्रतिष्ठित व्यक्तियों की सभा" (Assembly of Notables, 1787) ने अस्वीकार कर दिया। पेरिस और प्रांतों के "पार्लमां" (कुलीन न्यायालयों) ने राजा का विरोध किया और "एस्टेट्स-जनरल" बुलाने की माँग की। 1788 में राजा को झुकना पड़ा।
  • व्याख्या: जॉर्ज लेफ़ेव्र (The Coming of the French Revolution, 1939) के अनुसार 1789 में चार क्रांतियाँ हुईं: अभिजात, बुर्जुआ (मध्यवर्गीय), नगरीय जन (बास्तील) और किसान ("महा भय", Great Fear)। पहली "विजय" अभिजात वर्ग की थी, क्योंकि उसने राजा की निरंकुशता को झुकाया।
  • आगे का क्रम: एस्टेट्स-जनरल (मई 1789), टेनिस कोर्ट की शपथ (20 जून), बास्तील का पतन (14 जुलाई), 4 अगस्त को सामंती विशेषाधिकारों का उन्मूलन, और "मनुष्य और नागरिक के अधिकारों की घोषणा" (26 अगस्त 1789)। इसके बाद अभिजात वर्ग स्वयं क्रांति का शिकार बना। उसका उद्देश्य अपने विशेषाधिकार बचाना था, पर उसके द्वारा खोला गया द्वार तृतीय एस्टेट के लिए निकला।
  • चरण: संवैधानिक राजतंत्र (1789-92), गणतंत्र और आतंक का शासन (1793-94, रोबेस्पियर), डायरेक्टरी (1795-99) और नेपोलियन (1799)।
  • इतिहासलेखन: मार्क्सवादी (लेफ़ेव्र, सोबूल; "बुर्जुआ क्रांति") बनाम संशोधनवादी (अल्फ़्रेड कोबान, फ़्रांस्वा फ़ूरे; राजनीतिक संस्कृति और विचारधारा पर बल)।
  • निष्कर्ष: कथन सही है, पर विडंबना यह है कि अभिजात वर्ग ने जो क्रांति शुरू की, उसी ने उसे समाप्त कर दिया।

ब्रिटेन: 1832 का सुधार अधिनियम (UPSC 2025)

  • प्रावधान: अर्ल ग्रे की व्हिग सरकार ने 56 "सड़े हुए" (rotten) और "जेब" (pocket) बरो का प्रतिनिधित्व समाप्त किया; सीटें मैनचेस्टर और बर्मिंघम जैसे नए औद्योगिक नगरों को दी गईं; और बरो में £10 मूल्य के मकान वाले गृहस्वामियों को मताधिकार दिया गया। मतदाता लगभग 4 लाख से बढ़कर लगभग 6.5 लाख हो गए, यानी वयस्क पुरुषों का लगभग पाँचवाँ भाग।
  • सुधार-विधानों की शृंखला: दास-प्रथा उन्मूलन अधिनियम (1833), फ़ैक्टरी अधिनियम (1833; निरीक्षक नियुक्त), निर्धन क़ानून संशोधन (1834), नगर निगम अधिनियम (1835) और 1846 में "कॉर्न लॉ" की समाप्ति।
  • महत्व: उदीयमान औद्योगिक मध्य वर्ग को सत्ता में हिस्सा मिला; क्रांति के बिना "क्रमिक सुधार" का ब्रिटिश मार्ग स्थापित हुआ; और संसद की सर्वोच्चता बढ़ी।
  • सीमाएँ: मज़दूर वर्ग को मताधिकार नहीं मिला, जिससे चार्टिस्ट आंदोलन (1838-48) हुआ। आगे के सुधार अधिनियम 1867 और 1884 में आए।

5. औद्योगीकरण और समाजवाद

अंग्रेज़ी औद्योगीकरण: "क्रांति" या लंबी प्रक्रिया? (UPSC 2024)

  • "क्रांति" शब्द: अर्नोल्ड टॉयनबी के व्याख्यानों (1880 का दशक) से लोकप्रिय हुआ।
  • "क्रांति" न मानने के तर्क (संशोधनवादी दृष्टि): एन.एफ़.आर. क्राफ़्ट्स और सी.के. हार्ले के 1980 के दशक के अध्ययनों के अनुसार 1760-1830 में राष्ट्रीय आय की वृद्धि-दर धीमी (लगभग 1-2% प्रतिवर्ष) थी। परिवर्तन मुख्यतः कपास और लोहा जैसे कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहा। अधिकांश श्रमिक छोटी कार्यशालाओं में ही काम करते रहे, और भाप-शक्ति का व्यापक उपयोग उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक ही हुआ।
  • "क्रांति" मानने के तर्क:
    • तकनीकी: स्पिनिंग जेनी (1764), वॉटर फ़्रेम (1769), म्यूल (1779) और वॉट का भाप-इंजन।
    • संरचनात्मक: कृषि से उद्योग की ओर श्रम का स्थानांतरण, कारख़ाना-प्रणाली, नगरीकरण और रेलवे (1830 से)।
    • ऊर्जा-संक्रमण: ई.ए. रिगली के अनुसार "जैविक अर्थव्यवस्था" (लकड़ी, पशु-शक्ति) से "खनिज अर्थव्यवस्था" (कोयला) की ओर संक्रमण, जिसने निरंतर वृद्धि को संभव बनाया।
    • सामाजिक: नए वर्ग (औद्योगिक बुर्जुआ और मज़दूर)।
  • निष्कर्ष: गति धीमी थी, पर परिवर्तन की "प्रकृति" क्रांतिकारी थी, क्योंकि उसने मानव इतिहास में पहली बार निरंतर आर्थिक वृद्धि का मार्ग खोला। इसलिए "धीमी क्रांति" कहना उचित है।

रूस के औद्योगीकरण में राज्य (UPSC 2024)

  • सिद्धांत: अलेक्ज़ेंडर गर्शेनक्रॉन (Economic Backwardness in Historical Perspective, 1962) के अनुसार कोई देश जितना पिछड़ा होता है, उसके औद्योगीकरण में राज्य और बैंकों की भूमिका उतनी ही बड़ी होती है, क्योंकि निजी पूँजी और उद्यमशीलता की कमी को राज्य पूरा करता है।
  • रूस में: 1861 में कृषि-दास प्रथा का उन्मूलन हुआ, जिससे श्रम मुक्त हुआ, यद्यपि ग्राम-समुदाय (मीर) का बंधन बना रहा। वित्त मंत्री सर्गेई विट्टे (1892-1903) ने राज्य के नेतृत्व में औद्योगीकरण किया: ट्रांस-साइबेरियन रेलवे (1891 से), 1891 के संरक्षणवादी शुल्क, 1897 में स्वर्ण-मान, फ़्रांस से विदेशी ऋण, और राजकीय ऑर्डर (रेल, लोहा)। 1890 के दशक में औद्योगिक उत्पादन तेज़ी से बढ़ा।
  • सोवियत चरण: 1928 से स्टालिन की पंचवर्षीय योजनाएँ, यानी पूर्ण राजकीय नियंत्रण, भारी उद्योग और बलात् सामूहिकीकरण।
  • सीमाएँ: विदेशी पूँजी की बड़ी भूमिका; मॉस्को के वस्त्र उद्योग में निजी उद्यमियों की भूमिका; कृषि का पिछड़ापन, जिससे 1905 और 1917 की क्रांतियों की पृष्ठभूमि बनी।
  • निष्कर्ष: कथन सही है; रूस "राज्य-प्रेरित औद्योगीकरण" का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मार्क्स-पूर्व समाजवादी (UPSC 2025)

  • प्रमुख विचारक: सेंट-साइमन (उद्योगपतियों और वैज्ञानिकों द्वारा नियोजित समाज), चार्ल्स फ़ूरिए (सहकारी समुदाय "फ़ैलान्स्टेयर"), रॉबर्ट ओवेन (न्यू लैनार्क की आदर्श मिल; 1825 में अमेरिका में "न्यू हार्मनी" का प्रयोग), लुई ब्लां (राष्ट्रीय कार्यशालाएँ; 1848) और प्रूधों ("संपत्ति चोरी है", 1840)।
  • योगदान: औद्योगिक पूँजीवाद की पहली आलोचना (शोषण, ग़रीबी, प्रतिस्पर्धा); सहकारिता का विचार, जिससे सहकारी आंदोलन (रॉकडेल, 1844) प्रेरित हुआ; शिक्षा, कार्य-समय और श्रमिक-कल्याण पर बल।
  • सीमाएँ (कथन का समर्थन): मार्क्स और एंगेल्स ("कम्युनिस्ट घोषणापत्र", 1848; एंगेल्स का "Socialism: Utopian and Scientific", 1880) ने इन्हें "काल्पनिक" (utopian) समाजवादी कहा, क्योंकि:
    • इन्होंने वर्ग-संघर्ष और इतिहास के भौतिक नियमों की उपेक्षा की;
    • ये परिवर्तन के लिए अभिजात वर्ग की सद्भावना और आदर्श समुदायों के उदाहरण पर निर्भर रहे;
    • सत्ता प्राप्त करने और नई व्यवस्था को बनाए रखने की कोई ठोस राजनीतिक रणनीति नहीं थी;
    • इनके अधिकांश प्रयोग (न्यू हार्मनी) विफल रहे।
  • निष्कर्ष: कथन सही है, पर इन विचारकों ने समाजवादी कल्पना को जन्म दिया, जिस पर बाद का "वैज्ञानिक" समाजवाद खड़ा हुआ।

6. राष्ट्रवाद, राष्ट्र-राज्य और साम्राज्यवाद

उन्नीसवीं शताब्दी का राष्ट्रवाद: एकीकरण और विघटन (UPSC 2025)

  • एकीकरण की शक्ति:
    • इटली (1861; रोम 1870): मात्सिनी (युवा इटली), कावूर (कूटनीति, पीडमॉन्ट) और गैरीबाल्डी (हज़ार लाल-कुर्ती सैनिक)।
    • जर्मनी (1871): बिस्मार्क।
    • जापान: मेजी पुनर्स्थापन (1868) से एकीकृत राष्ट्र-राज्य।
    • अमेरिका: गृहयुद्ध के बाद संघ का सुदृढ़ीकरण।
  • विघटन की शक्ति:
    • उस्मानी (ऑटोमन) साम्राज्य: यूनान (1830), सर्बिया, रोमानिया और बुल्गारिया की स्वतंत्रता; बाल्कन, जिसे "यूरोप का बारूदख़ाना" कहा गया।
    • हैब्सबर्ग (ऑस्ट्रियाई) साम्राज्य: 1848 की क्रांतियाँ, 1867 का "आउसग्लाइख़" (ऑस्ट्रिया-हंगरी का द्वैध राजतंत्र), और स्लाव राष्ट्रीयताओं का असंतोष।
    • लैटिन अमेरिका: स्पेनिश साम्राज्य से स्वतंत्रता (1810-25; बोलीवार, सान मार्टिन); बाद में "ग्रैन कोलंबिया" का विघटन (1830)।
    • बेल्जियम: 1830 में नीदरलैंड से अलग हुआ।
  • विश्लेषण: राष्ट्रवाद ने बिखरे राज्यों (इटली, जर्मनी) को जोड़ा और बहु-जातीय साम्राज्यों (उस्मानी, हैब्सबर्ग) को तोड़ा। दोनों प्रक्रियाओं के पीछे एक ही सिद्धांत था: "एक राष्ट्र, एक राज्य"। सिद्धांतकार हैं अर्नेस्ट गेलनर, बेनेडिक्ट एंडरसन ("कल्पित समुदाय", 1983) और एरिक हॉब्सबॉम।
  • परिणाम: प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि (साराजेवो, 1914), और युद्ध के बाद "राष्ट्रीय आत्मनिर्णय" (विल्सन) के आधार पर नए राज्य।

जर्मनी का एकीकरण: "कोयला और लोहा" (UPSC 2024)

  • "रक्त और लोहा": बिस्मार्क के 1862 के भाषण के अनुसार जर्मन प्रश्न भाषणों और बहुमत के प्रस्तावों से नहीं, "रक्त और लोहे" से हल होगा। तीन युद्ध हुए: डेनमार्क (1864), ऑस्ट्रिया (1866; सादोवा) और फ़्रांस (1870-71)। 18 जनवरी 1871 को वर्साय में जर्मन साम्राज्य की घोषणा हुई।
  • "कोयला और लोहा": जॉन मेनार्ड कीन्स (The Economic Consequences of the Peace, 1919) ने लिखा कि जर्मन साम्राज्य "रक्त और लोहे" से अधिक "कोयले और लोहे" पर बना। इसके आधार:
    • प्रशा के नेतृत्व में "ज़ोलवेराइन" (सीमा-शुल्क संघ, 1834), जिससे ऑस्ट्रिया बाहर रहा। इसने आर्थिक एकीकरण पहले कर दिया।
    • रेलवे का जाल।
    • रूर और सार का कोयला; क्रुप जैसे इस्पात और शस्त्र उद्योग।
    • प्रशा का औद्योगिक-वित्तीय आधार, जिससे सेना का आधुनिकीकरण हुआ (सुई-बंदूक, रेल से सेना का परिवहन)।
  • निष्कर्ष: दोनों पक्ष पूरक थे। "कोयला और लोहा" ने वह आर्थिक आधार दिया जिस पर "रक्त और लोहे" की कूटनीति और युद्ध सफल हो सके।

अमेरिकी गृहयुद्ध (1861-65) (UPSC 2024)

  • आर्थिक भिन्नता: उत्तर औद्योगिक था, संरक्षणवादी शुल्क चाहता था और वेतन-श्रम पर आधारित था। दक्षिण कृषि-प्रधान था, कपास के बागानों पर निर्भर था, निर्यात के लिए मुक्त व्यापार चाहता था और दास-श्रम पर आधारित था।
  • मुख्य कारण, दास-प्रथा और उसका विस्तार: मिसूरी समझौता (1820), कैनसस-नेब्रास्का अधिनियम (1854), ड्रेड स्कॉट निर्णय (1857), 1860 में लिंकन का चुनाव, और दक्षिणी राज्यों का अलग होना (secession)।
  • परिणाम: मुक्ति-घोषणा (1 जनवरी 1863), तेरहवाँ संशोधन (1865; दास-प्रथा का अंत), संघ की एकता, और उत्तर के औद्योगिक पूँजीवाद की विजय।
  • इतिहासलेखन: चार्ल्स बियर्ड (1927) ने आर्थिक व्याख्या दी ("दूसरी अमेरिकी क्रांति")। जेम्स मैकफ़र्सन जैसे बाद के इतिहासकार दास-प्रथा को केंद्रीय कारण मानते हैं।
  • निष्कर्ष: आर्थिक भिन्नता महत्वपूर्ण थी, पर उसके केंद्र में दास-प्रथा थी। इसलिए युद्ध "आर्थिक हितों" के साथ-साथ "नैतिक और राजनीतिक" संघर्ष भी था।

नया साम्राज्यवाद: निरंतरता या मौलिक परिवर्तन? (UPSC 2025)

  • नया साम्राज्यवाद (लगभग 1870-1914): अफ़्रीका का बँटवारा (बर्लिन सम्मेलन 1884-85; 1914 तक लगभग पूरा अफ़्रीका उपनिवेश बन गया), एशिया और प्रशांत में विस्तार, और जर्मनी, इटली, अमेरिका तथा जापान जैसी नई साम्राज्यवादी शक्तियों का उदय।
  • निरंतरता के तर्क: जॉन गैलाघर और रोनाल्ड रॉबिन्सन ("The Imperialism of Free Trade", 1953) के अनुसार ब्रिटेन का "अनौपचारिक साम्राज्य" (व्यापार और प्रभाव) पहले से था, और औपचारिक विलय उसी का विस्तार था। कच्चा माल और बाज़ार की खोज और यूरोपीय श्रेष्ठता की धारणा पुराने उपनिवेशवाद से चली आ रही थी।
  • मौलिक परिवर्तन के तर्क:
    • आर्थिक: जे.ए. हॉब्सन ("Imperialism", 1902) और लेनिन ("साम्राज्यवाद: पूँजीवाद की सर्वोच्च अवस्था", 1917) के अनुसार वित्त-पूँजी, अधिशेष पूँजी का निर्यात और एकाधिकार।
    • तकनीकी: कुनैन, मैक्सिम गन, भाप-जहाज़ और तार, जिससे भीतरी प्रदेशों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण संभव हुआ।
    • वैचारिक: सामाजिक डार्विनवाद, नस्लवाद, "श्वेत व्यक्ति का बोझ" (किपलिंग, 1899)।
    • भू-राजनीतिक: बहुध्रुवीय प्रतिस्पर्धा, जिससे विश्व का "बँटवारा पूरा" हुआ और प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि बनी।
  • निष्कर्ष: नया साम्राज्यवाद पुरानी प्रवृत्तियों का "तीव्रीकरण" था, पर उसके पैमाने, गति, तकनीक और प्रतिस्पर्धा ने वैश्विक शक्ति-संरचना को मौलिक रूप से बदल दिया।

7. Master Summary Table

विषयमुख्य तथ्ययाद रखें
पृष्ठभूमिलूथर 1517; न्यूटन 1687गुटेनबर्ग लगभग 1450
प्रबोधनलॉक 1689, मॉन्टेस्क्यू 1748, रूसो 1762कांट: "Sapere aude"
पादरी-विरोधदेववाद; वॉल्टेयर का कैलास मामलान मूर्तिपूजक, न आस्थावादी
अमेरिकी क्रांति1776, 1787, 1791प्रथम संशोधन
फ़्रांसीसी क्रांतिनोटेबल्स की सभा 1787; बास्तील 14 जुलाई 1789लेफ़ेव्र 1939
सुधार अधिनियम1832; 56 बरो; £10 गृहस्वामी1833, 1834, 1835, 1846
औद्योगीकरणटॉयनबी; क्राफ़्ट्स और हार्लेरिगली: ऊर्जा-संक्रमण
रूसगर्शेनक्रॉन 1962; विट्टे1861; ट्रांस-साइबेरियन
काल्पनिक समाजवादओवेन, फ़ूरिए, सेंट-साइमन, प्रूधोंएंगेल्स 1880
जर्मनीज़ोलवेराइन 1834; 1871कीन्स: "कोयला और लोहा"
गृहयुद्ध1861-65; तेरहवाँ संशोधनबियर्ड बनाम मैकफ़र्सन
नया साम्राज्यवादबर्लिन 1884-85हॉब्सन, लेनिन, गैलाघर-रॉबिन्सन

8. चार्ट: लेफ़ेव्र की 1789 की "चार क्रांतियाँ"

1. अभिजात क्रांतिनोटेबल्स, पार्लमां1787-88 2. बुर्जुआ क्रांतिटेनिस कोर्ट शपथजून 1789 3. नगरीय जनबास्तील14 जुलाई 1789 4. किसान क्रांतिमहा भय, 4 अगस्तजुलाई-अगस्त 1789 परिणति: मनुष्य और नागरिक के अधिकारों की घोषणा (26 अगस्त 1789) अभिजात वर्ग ने जो द्वार खोला, उससे होकर अन्य वर्ग आगे बढ़े
जॉर्ज लेफ़ेव्र की व्याख्या: 1789 की क्रांति वास्तव में चार परस्पर जुड़ी क्रांतियों का क्रम थी, जिनमें पहली अभिजात वर्ग की थी।

9. Mind Map

प्रबोधन और क्रांतियाँ
पृष्ठभूमि
  • प्राचीन विश्व, रोम
  • पुनर्जागरण, धर्मसुधार, विज्ञान
प्रबोधन
  • लॉक, मॉन्टेस्क्यू, रूसो, वॉल्टेयर
  • पादरी-विरोध
क्रांतियाँ
  • अमेरिकी, फ़्रांसीसी
  • ब्रिटिश सुधार 1832
औद्योगीकरण
  • इंग्लैंड, रूस
  • काल्पनिक समाजवाद
राष्ट्र-राज्य
  • राष्ट्रवाद, जर्मनी, गृहयुद्ध
  • नया साम्राज्यवाद

10. महत्वपूर्ण One-liners

  • "The Spirit of the Laws": मॉन्टेस्क्यू (1748)।
  • "The Social Contract": रूसो (1762)।
  • अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा: 4 जुलाई 1776 (जेफ़रसन)।
  • बास्तील का पतन: 14 जुलाई 1789।
  • "The Coming of the French Revolution": जॉर्ज लेफ़ेव्र।
  • "Industrial Revolution" शब्द को लोकप्रिय बनाया: अर्नोल्ड टॉयनबी।
  • न्यू लैनार्क का आदर्श कारख़ाना: रॉबर्ट ओवेन।
  • ज़ोलवेराइन: 1834।
  • "कोयला और लोहा" वाक्यांश: जॉन मेनार्ड कीन्स (1919)।
  • "Imperialism" (1902): जे.ए. हॉब्सन।

11. टिप्स एवं ट्रिक्स

विश्व इतिहास के उत्तर
  • विश्व इतिहास में तुलना अंक दिलाती है: अमेरिकी बनाम फ़्रांसीसी क्रांति, इंग्लैंड बनाम रूस का औद्योगीकरण।
  • हर उत्तर में कम से कम एक इतिहासकार या विचारक (लेफ़ेव्र, हॉब्सबॉम, गर्शेनक्रॉन, कीन्स) का उल्लेख करें।
  • Q5 के "कथन" वाले प्रश्नों में 150 शब्दों में अर्थ, दो प्रमाण, एक प्रति-तर्क, निर्णय लिखें।
याद रखने की तरकीब

लेफ़ेव्र की चार क्रांतियाँ: "अ-बु-न-कि" (अभिजात, बुर्जुआ, नगरीय, किसान)। जर्मन एकीकरण के युद्ध: "डे-ऑ-फ़्रां" (1864, 1866, 1870)।

12. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2025 · Paper II · 6(a)

"उन्नीसवीं शताब्दी में राष्ट्रवाद एकीकरण और विघटन, दोनों की प्रेरक शक्ति था।" यूरोप और विश्व के अन्य भागों के उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

एकीकरण: इटली, जर्मनी, जापान, अमेरिका।

विघटन: उस्मानी साम्राज्य और बाल्कन, हैब्सबर्ग, लैटिन अमेरिका, बेल्जियम।

विश्लेषण: "एक राष्ट्र, एक राज्य"; गेलनर, एंडरसन, हॉब्सबॉम।

परिणाम: 1914; विल्सन का आत्मनिर्णय।

निष्कर्ष: एक ही सिद्धांत, दो विपरीत परिणाम।

Q2UPSC 2025 · Paper II · 6(b)

"अमेरिकी क्रांति अनेक अर्थों में राजनीतिक, नागरिक और चर्च संबंधी क्षेत्रों में प्रबोधन की अभिव्यक्ति थी।" स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

घटनाक्रम: 1765 से 1791 तक।

राजनीतिक: लॉक, मॉन्टेस्क्यू; गणतंत्र, संघवाद।

नागरिक: अधिकार-पत्र, विधि का शासन।

चर्च संबंधी: प्रथम संशोधन; वर्जीनिया क़ानून 1786; देववाद।

सीमाएँ: दास-प्रथा, मूल निवासी, स्त्रियाँ।

निष्कर्ष: प्रबोधन का पहला सफल राजनीतिक प्रयोग।

Q3UPSC 2025 · Paper II · 6(c)

क्या नया साम्राज्यवाद पुरानी औपनिवेशिक प्रथाओं की निरंतरता था, या उसने वैश्विक शक्ति-संरचना में मौलिक परिवर्तन किया? आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर

निरंतरता: गैलाघर-रॉबिन्सन; अनौपचारिक साम्राज्य; कच्चा माल।

परिवर्तन: हॉब्सन और लेनिन; तकनीक; सामाजिक डार्विनवाद; नई शक्तियाँ; बँटवारा पूरा।

निष्कर्ष: तीव्रीकरण, जिसने शक्ति-संरचना बदल दी।

Q4UPSC 2025 · Paper II · 7(c)

"प्रबोधन के पादरी-विरोध में पुनर्जागरण और धर्मसुधार की भावनाओं की प्रतिध्वनि थी, फिर भी उसने न तो पुनर्जागरण के मूर्तिपूजक तत्वों का समर्थन किया और न ही धर्मसुधार की आस्था को अपनाया।" विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर

निरंतरता: इरास्मस, लूथर।

भिन्नता: शास्त्रीय देवताओं का पुनरुद्धार नहीं; आस्था के स्थान पर तर्क; देववाद।

अपना मार्ग: सहिष्णुता, चर्च-राज्य पृथक्करण।

निष्कर्ष: तर्कवादी धर्मनिरपेक्षता का जन्म।

Q5UPSC 2024 · Paper II · 6(a)

अंग्रेज़ी औद्योगीकरण की प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि उसे क्रांति नहीं माना जा सकता। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

संशोधनवादी: क्राफ़्ट्स और हार्ले; धीमी वृद्धि; सीमित क्षेत्र।

क्रांति के पक्ष में: तकनीक, संरचना, ऊर्जा-संक्रमण (रिगली), नए वर्ग।

निष्कर्ष: गति धीमी, प्रकृति क्रांतिकारी; "धीमी क्रांति"।

Q6UPSC 2024 · Paper II · 6(c)

रूस के औद्योगीकरण में राज्य सबसे महत्वपूर्ण कारक था। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

सिद्धांत: गर्शेनक्रॉन।

साक्ष्य: 1861; विट्टे के क़दम (रेल, शुल्क, स्वर्ण-मान, ऋण, ऑर्डर); स्टालिन की योजनाएँ।

सीमाएँ: विदेशी पूँजी, निजी उद्यमी, कृषि।

निष्कर्ष: राज्य-प्रेरित औद्योगीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण।

Q7UPSC 2025 · Paper II · 5(a) · 10 अंक

"फ़्रांसीसी क्रांति अभिजात वर्ग द्वारा शुरू की गई और उसके पहले चरण में विजय भी उसी को मिली।" आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

अभिजात विद्रोह: कैलोन, नोटेबल्स 1787, पार्लमां, 1788।

लेफ़ेव्र: चार क्रांतियाँ।

विडंबना: 4 अगस्त 1789; अभिजात वर्ग स्वयं शिकार बना।

Q8UPSC 2025 · Paper II · 5(b) · 10 अंक

"1832 के सुधार अधिनियम के साथ विधान-पुनर्निर्माण की ऐसी गतिविधि शुरू हुई जिसकी ब्रिटिश इतिहास में कोई मिसाल नहीं थी।" आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

प्रावधान: 56 बरो, औद्योगिक नगर, £10।

शृंखला: 1833, 1834, 1835, 1846।

सीमा: मज़दूर वंचित; चार्टिस्ट; 1867।

Q9UPSC 2025 · Paper II · 5(e) · 10 अंक

"मार्क्स-पूर्व समाजवादी विचारकों ने समाजवादी समाजों की कल्पना की, पर उन्हें प्राप्त करने या बनाए रखने की व्यावहारिक विधियों पर पूरा विचार नहीं किया।" आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

विचारक: सेंट-साइमन, फ़ूरिए, ओवेन, ब्लां, प्रूधों।

योगदान: पूँजीवाद की आलोचना; सहकारिता।

सीमाएँ: वर्ग-संघर्ष की उपेक्षा, अभिजात की सद्भावना पर निर्भरता, रणनीति का अभाव; एंगेल्स।

Q10UPSC 2024 · Paper II · 5(c) · 10 अंक

जर्मनी का एकीकरण जितना "रक्त और लोहे" का, उतना ही "कोयले और लोहे" का भी परिणाम था। आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

रक्त और लोहा: बिस्मार्क 1862; तीन युद्ध; 1871।

कोयला और लोहा: कीन्स; ज़ोलवेराइन, रेलवे, रूर, क्रुप।

निष्कर्ष: दोनों पूरक।

Q11UPSC 2024 · Paper II · 5(b) · 10 अंक

अमेरिकी गृहयुद्ध औद्योगिक उत्तर और कृषि-प्रधान दक्षिण की आवश्यकताओं की असमानता का परिणाम था। आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

आर्थिक भिन्नता: शुल्क, श्रम, निर्यात।

दास-प्रथा: 1820, 1854, 1857, 1860।

इतिहासलेखन: बियर्ड बनाम मैकफ़र्सन।

निष्कर्ष: केंद्र में दास-प्रथा।

Q12UPSC 2024 · Paper II · 5(a) · 10 अंक

प्रबोधन के विचारकों द्वारा उठाए गए विचार पुराने शासन के समाज और राजनीतिक व्यवस्था के लिए गहरे अस्थिरकारी और चुनौतीपूर्ण थे। आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

चुनौतियाँ: राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक; सार्वजनिक क्षेत्र।

सीमाएँ: प्रबुद्ध निरंकुश; सुधारवादी विचारक; वंचित समूह।

निष्कर्ष: वैधता का क्षरण, जिसकी परिणति क्रांतियों में हुई।

13. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • पृष्ठभूमि: मेसोपोटामिया, रोम, मध्यकालीन यूरोप, पुनर्जागरण, धर्मसुधार, वैज्ञानिक क्रांति।
  • प्रबोधन: विचारक और कृतियाँ; पुराने शासन को चुनौती; पादरी-विरोध की विशिष्टता।
  • क्रांतियाँ: अमेरिकी (तीन क्षेत्र), फ़्रांसीसी (अभिजात से जन तक), ब्रिटिश सुधार 1832।
  • औद्योगीकरण: इंग्लैंड पर बहस; रूस और राज्य; काल्पनिक समाजवाद।
  • राष्ट्र-राज्य: राष्ट्रवाद के दो रूप; जर्मनी; अमेरिकी गृहयुद्ध; नया साम्राज्यवाद।