1. अध्याय एक नज़र में
Paper II का Section A "Comparative Politics and International Relations" से शुरू होता है। इसके पहले चार units — Comparative Politics (प्रकृति और उपागम; राजनीतिक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक समाजशास्त्र; तुलनात्मक पद्धति की सीमाएँ), State in comparative perspective, Politics of Representation and Participation और Globalisation — इस अध्याय में हैं। 2023 में तुलनात्मक राजनीति के प्रश्न केवल 10 अंकों के रहे (अनुभवजन्य सिद्धांत, राज्यों की तुलना की कठिनाइयाँ, लोकतंत्र और नागरिकता), जबकि 2024 में व्याख्यात्मक (interpretive) उपागम, उत्तर-आधुनिक राज्य, विकासशील देशों में दल, महिलाओं के अधिकारों के आंदोलन और "Deglobalisation" पूछे गए।
- तुलनात्मक राजनीति — प्रकृति, प्रमुख उपागम; राजनीतिक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक समाजशास्त्र के परिप्रेक्ष्य; तुलनात्मक पद्धति की सीमाएँ।
- तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य — विकसित पूँजीवादी और समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं में तथा उत्तर-औपनिवेशिक समाजों में राज्य की बदलती प्रकृति।
- प्रतिनिधित्व और भागीदारी — राजनीतिक दल, दबाव समूह, सामाजिक आंदोलन (विकसित और विकासशील समाजों में)।
- वैश्वीकरण — विकसित और विकासशील समाजों की प्रतिक्रियाएँ।
2. तुलनात्मक राजनीति: प्रकृति और विकास
- अरस्तू — 158 संविधानों का अध्ययन: तुलनात्मक राजनीति के पहले "विद्वान"।
- पारंपरिक चरण (द्वितीय विश्व युद्ध से पहले) — औपचारिक-विधिक, संस्थागत, वर्णनात्मक, यूरोप-केंद्रित (ब्राइस — Modern Democracies, फ़ाइनर)।
- आधुनिक चरण — रॉय मैक्रिडिस (1955, The Study of Comparative Government) ने पारंपरिक अध्ययन को "essentially non-comparative, descriptive, parochial, static, monographic" कहा; उपनिवेशों की स्वतंत्रता से नए राज्य; अमेरिका में SSRC की तुलनात्मक राजनीति समिति (आल्मंड)।
- विशेषताएँ — विश्लेषणात्मक, अनुभवजन्य, अंतर-अनुशासनात्मक, गैर-पश्चिमी देशों का समावेश, प्रक्रिया और व्यवहार पर ध्यान।
3. तुलनात्मक राजनीति के उपागम
| उपागम | मुख्य विचार | विचारक | आलोचना |
|---|---|---|---|
| संस्थागत / नव-संस्थावाद | संस्थाएँ व्यवहार को आकार देती हैं; "rules of the game"; ऐतिहासिक, तार्किक-चयन और समाजशास्त्रीय नव-संस्थावाद | मार्च-ओल्सेन, नॉर्थ, थेलेन | संस्थाओं की उत्पत्ति की व्याख्या कमज़ोर |
| तंत्र (Systems) | input-output-feedback | ईस्टन | यथास्थितिवादी |
| संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक | हर व्यवस्था कुछ सार्वभौमिक कार्य करती है, संरचनाएँ भिन्न | आल्मंड-पॉवेल | पश्चिम-केंद्रित, परिवर्तन की उपेक्षा |
| राजनीतिक संस्कृति | parochial, subject, participant; "civic culture" | आल्मंड-वर्बा (1963), लूसियन पाई | अमेरिकी मॉडल को आदर्श मानना |
| राजनीतिक विकास / आधुनिकीकरण | परंपरा → आधुनिकता, विभेदीकरण, धर्मनिरपेक्षीकरण | लिप्सेट, लर्नर, रोस्टोव | रेखीय विकास की धारणा; हंटिंगटन — "political decay" |
| राजनीतिक अर्थव्यवस्था | राजनीति-अर्थ का अंतर्संबंध; वर्ग, निर्भरता, विश्व-व्यवस्था | मार्क्स, फ़्रैंक, वालरस्टीन, बैरिंगटन मूर | आर्थिक नियतिवाद |
| राजनीतिक समाजशास्त्र | समाज (वर्ग, धर्म, जातीयता) और राजनीति का संबंध; दलों के सामाजिक आधार | लिप्सेट-रोक्कन (cleavages, 1967) | राजनीति की स्वायत्तता की उपेक्षा |
| तार्किक चयन (Rational choice) | व्यक्ति उपयोगिता अधिकतम करता है; खेल सिद्धांत | डाउन्स, ओल्सन (collective action) | संस्कृति और पहचान की उपेक्षा |
| व्याख्यात्मक (Interpretive) | अर्थ, विश्वास, परंपरा से राजनीति को समझना | क्लिफ़र्ड गीर्ट्ज़ ("thick description"), बेविर-रोड्स | सामान्यीकरण कठिन |
यह मानता है कि राजनीतिक कर्म अर्थपूर्ण होते हैं और उन्हें कर्ताओं के विश्वासों, परंपराओं और "दुविधाओं" के संदर्भ में समझा जाना चाहिए — "समझ" (Verstehen — वेबर), "thick description" (गीर्ट्ज़ — बाली में "theatre state")। बेविर और रोड्स ने "interpretive approach to British government" विकसित किया। शक्ति — संस्कृति-संवेदी, गैर-पश्चिमी समाजों के लिए उपयुक्त; सीमा — कारण-व्याख्या और तुलना कठिन, शोधकर्ता की व्यक्तिपरकता।
तुलनात्मक पद्धति की सीमाएँ और राज्यों की तुलना की कठिनाइयाँ (UPSC 2023)
- "Too many variables, too few cases" (लिजफ़ार्ट, 1971) — थोड़े देश, बहुत से कारक।
- Conceptual stretching (जियोवानी सार्तोरी) — "दल", "लोकतंत्र" जैसी अवधारणाओं को हर संदर्भ पर खींचने से उनका अर्थ खो जाता है।
- Galton's problem — देशों के बीच प्रसार (diffusion), इसलिए वे स्वतंत्र मामले नहीं।
- Selection bias, आँकड़ों की असमान गुणवत्ता, सांस्कृतिक पूर्वाग्रह (Eurocentrism), मूल्य-निर्णय।
- उपाय — मिल की "method of agreement and difference", "most similar" और "most different systems design" (प्रेज़ेवोर्स्की-ट्यून), गुणात्मक तुलनात्मक विश्लेषण (रागिन)।
4. तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य
(क) विकसित पूँजीवादी राज्य
- कल्याणकारी राज्य (1945-75 — "Golden Age", कीन्सियन सहमति) → नव-उदार राज्य (1980 के बाद) → "regulatory state" (माजोन) → "competition state" (सर्नी)।
- एस्पिंग-एंडरसन (The Three Worlds of Welfare Capitalism, 1990) — उदार (अमेरिका, ब्रिटेन), रूढ़िवादी-कॉर्पोरेटिस्ट (जर्मनी, फ़्रांस), सामाजिक-लोकतांत्रिक (स्कैंडिनेविया)।
- उत्तर-आधुनिक राज्य (UPSC 2024) — रॉबर्ट कूपर (The Postmodern State, 2002): यूरोपीय संघ जैसे राज्य जहाँ घरेलू-विदेशी मामलों का भेद धुँधला, संप्रभुता साझा, पारस्परिक निगरानी (हथियार नियंत्रण), सैन्य शक्ति पर कम निर्भरता; अन्य विशेषताएँ — विकेंद्रीकृत, बहु-स्तरीय शासन (multi-level governance), नेटवर्क गवर्नेंस, "hollowing out" (रोड्स), नागरिकता के बहुल रूप, पहचान-आधारित राजनीति।
(ख) समाजवादी राज्य
- सोवियत मॉडल — एकदलीय राज्य, केंद्रीय नियोजन, "democratic centralism"; विघटन (1991) के कारण — आर्थिक ठहराव, नौकरशाही, राष्ट्रीयताओं का असंतोष, गोर्बाचेव के ग्लासनोस्त-पेरेस्त्रोइका।
- चीन — "socialism with Chinese characteristics" (देंग, 1978 से सुधार), "authoritarian capitalism", "developmental state"; वियतनाम का दोई मोई।
- उत्तर-साम्यवादी संक्रमण — "shock therapy" (रूस) बनाम क्रमिक सुधार (चीन)।
(ग) उत्तर-औपनिवेशिक राज्य
- हमज़ा अलवी — "overdeveloped state"; गुन्नार मिर्डल — "soft state" (Asian Drama, 1968): नियम लागू करने में शिथिल राज्य।
- "Developmental state" (चाल्मर्स जॉनसन — जापान का MITI; दक्षिण कोरिया, ताइवान) — पीटर इवांस: "embedded autonomy"।
- "Predatory state", "failed/fragile state" (सोमालिया), "rentier state" (तेल अर्थव्यवस्थाएँ), "neo-patrimonial state" (अफ़्रीका)।
- भारत — "weak-strong state" (रुडॉल्फ़), "relative autonomy" (बर्धन), आतुल कोहली — "commanding heights" से "pro-business" राज्य।
5. प्रतिनिधित्व और भागीदारी
राजनीतिक दल
- मॉरिस दुवर्जे (Political Parties, 1951) — "Duverger's law": FPTP → द्विदलीय, आनुपातिक प्रतिनिधित्व → बहुदलीय; दलों के प्रकार — cadre और mass दल।
- ओटो किर्शहाइमर — "catch-all party"; काट्ज़-मेयर — "cartel party"; सार्तोरी — दलीय व्यवस्थाओं का वर्गीकरण (predominant, polarised pluralism)।
- विकासशील समाजों में दल (UPSC 2024) — लोकतंत्र को टिकाने में भूमिका: राष्ट्रीय एकता (भारत की कांग्रेस, दक्षिण अफ़्रीका का ANC), हितों का समूहन, राजनीतिक समाजीकरण, सरकार और विपक्ष का निर्माण, सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण। चुनौतियाँ — व्यक्ति/परिवार-केंद्रितता, आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, धन-बल, जातीय-सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, सेना का हस्तक्षेप (पाकिस्तान, म्यांमार), "dominant party" अधिनायकवाद (हंटिंगटन — Political Order in Changing Societies: संस्थानीकरण आवश्यक)।
दबाव समूह और सामाजिक आंदोलन
- दबाव समूह — बहुलवादी (अमेरिका), कॉर्पोरेटिस्ट (स्कैंडिनेविया, ऑस्ट्रिया — राज्य-पूँजी-श्रम त्रिपक्षीयता; श्मिटर)।
- नए सामाजिक आंदोलन (1960 के बाद) — पहचान, जीवनशैली, पर्यावरण, नारीवाद, शांति; वर्ग नहीं, मूल्य-आधारित; विचारक — आलेन तूरेन, अल्बर्टो मेलुची, क्लॉस ऑफ़े; "post-materialism" (रोनाल्ड इंगलहार्ट)।
- सिद्धांत — संसाधन संघटन (मैकार्थी-ज़ाल्ड), राजनीतिक अवसर संरचना (टैरो), framing (स्नो-बेनफ़ोर्ड)।
- महिलाओं के शारीरिक अधिकारों से जुड़े हाल के आंदोलन (UPSC 2024) — #MeToo (2017, वैश्विक); अर्जेंटीना का "Ni Una Menos" (2015) और गर्भपात वैधीकरण (2020 — "हरा रूमाल" आंदोलन); आयरलैंड का 2018 जनमत संग्रह (आठवाँ संशोधन हटाया); अमेरिका में Dobbs (2022) के बाद प्रजनन अधिकार आंदोलन; ईरान का "Woman, Life, Freedom" (2022, महसा अमीनी की मृत्यु के बाद); पोलैंड का गर्भपात-प्रतिबंध विरोध (2020); भारत में निर्भया आंदोलन (2012) और RG Kar (2024) विरोध। विश्लेषण — शरीर पर स्वायत्तता, हिंसा से सुरक्षा, राज्य और धर्म की सत्ता से संघर्ष; डिजिटल नेटवर्क की भूमिका।
लोकतांत्रिक राजनीति और नागरिकता (UPSC 2023)
- टी.एच. मार्शल (1950) — नागरिकता के तीन चरण: नागरिक (18वीं सदी), राजनीतिक (19वीं), सामाजिक (20वीं सदी)।
- लोकतांत्रिक राजनीति नागरिकता "रचती" है — संघर्ष और आंदोलनों से मताधिकार का विस्तार (महिलाएँ, अश्वेत), बहुसंस्कृतिवादी नागरिकता (किमलिका), विभेदित नागरिकता (आइरिस यंग), सक्रिय नागरिकता (सहभागी लोकतंत्र)।
- भारत — सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार 1950 से; नागरिकता अधिनियम 1955; CAA 2019 पर बहस — नागरिकता का धर्म से संबंध।
6. वैश्वीकरण (Globalisation)
- परिभाषा — एंथनी गिडेंस: "दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ने वाले विश्वव्यापी सामाजिक संबंधों का गहनीकरण"; डेविड हेल्ड — विस्तार, तीव्रता, गति, प्रभाव।
- तीन दृष्टियाँ (हेल्ड-मैकग्रू) — hyperglobalists (ओमाए — "borderless world", राज्य का अंत), sceptics (हर्स्ट-थॉम्पसन — अंतरराष्ट्रीयकरण, नया नहीं), transformationalists (गिडेंस — राज्य बदल रहा है, समाप्त नहीं)।
- विकसित देशों की प्रतिक्रिया — मुक्त व्यापार और पूँजी प्रवाह का नेतृत्व (WTO, Washington Consensus); बाद में असमानता, विऔद्योगीकरण ("rust belt"), प्रवासन-विरोध से संरक्षणवाद।
- विकासशील देशों की प्रतिक्रिया — संरचनात्मक समायोजन (IMF-विश्व बैंक), निर्यात-आधारित विकास (पूर्वी एशिया), भारत के 1991 सुधार; विरोध — "anti-globalisation" आंदोलन (सिएटल 1999, विश्व सामाजिक मंच — पोर्टो अलेग्रे 2001), जोसेफ़ स्टिग्लिट्ज़ — Globalization and Its Discontents (2002)।
- विकासशील देशों पर प्रभाव (UPSC 2023) — सकारात्मक: तेज़ संवृद्धि, गरीबी में कमी (चीन, भारत), तकनीक, सेवा निर्यात (भारत का IT); नकारात्मक: असमानता, कृषि संकट, अनौपचारिकता, सांस्कृतिक समरूपीकरण, संप्रभुता का क्षरण, वित्तीय संकट (एशियाई संकट 1997)।
- "Deglobalisation वैश्वीकरण को विस्थापित कर रहा है" (UPSC 2024) — शब्द वाल्डेन बेल्लो (2002) से; प्रमाण — 2008 का संकट, ब्रेक्ज़िट (2016), अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध (2018 से), कोविड-19 और आपूर्ति शृंखला संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और प्रतिबंध, "friend-shoring", "de-risking", औद्योगिक नीतियों की वापसी (अमेरिका का CHIPS Act, IRA), 2025 के ऊँचे अमेरिकी टैरिफ़; "slowbalisation" (द इकोनॉमिस्ट)। प्रतिवाद — डिजिटल सेवाओं, डेटा, प्रवासन, जलवायु सहयोग में वैश्वीकरण जारी; व्यापार-GDP अनुपात ऊँचे स्तर पर; अतः वैश्वीकरण का रूपांतरण/पुनर्क्षेत्रीयकरण हो रहा है, अंत नहीं।
7. Master Summary Table
| विषय | मुख्य अवधारणा | विचारक |
|---|---|---|
| तुलनात्मक राजनीति का विकास | पारंपरिक → आधुनिक; Macridis की आलोचना | अरस्तू, मैक्रिडिस, आल्मंड |
| उपागम | संस्थागत, तंत्र, संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक, संस्कृति, राजनीतिक अर्थव्यवस्था, व्याख्यात्मक | ईस्टन, आल्मंड-वर्बा, गीर्ट्ज़, बेविर |
| पद्धति की सीमाएँ | conceptual stretching, Galton's problem | सार्तोरी, लिजफ़ार्ट |
| पूँजीवादी राज्य | कल्याण → नव-उदार → regulatory; उत्तर-आधुनिक राज्य | एस्पिंग-एंडरसन, कूपर |
| समाजवादी राज्य | सोवियत मॉडल, चीनी विशेषताओं वाला समाजवाद | देंग |
| उत्तर-औपनिवेशिक राज्य | overdeveloped, soft, developmental state | अलवी, मिर्डल, जॉनसन, इवांस |
| दल | Duverger's law, catch-all, cartel | दुवर्जे, किर्शहाइमर, काट्ज़-मेयर |
| सामाजिक आंदोलन | नए सामाजिक आंदोलन, post-materialism | तूरेन, इंगलहार्ट, टैरो |
| नागरिकता | नागरिक-राजनीतिक-सामाजिक | टी.एच. मार्शल |
| वैश्वीकरण | hyper/sceptic/transformationalist; deglobalisation | गिडेंस, हेल्ड, स्टिग्लिट्ज़, बेल्लो |
8. Mind Map
- संस्थागत, तंत्र
- संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक
- राजनीतिक संस्कृति
- राजनीतिक अर्थव्यवस्था
- व्याख्यात्मक
- पूँजीवादी — कल्याण, नव-उदार
- उत्तर-आधुनिक
- समाजवादी
- उत्तर-औपनिवेशिक
- दल — दुवर्जे
- दबाव समूह — बहुलवाद/कॉर्पोरेटिज़्म
- नए सामाजिक आंदोलन
- नागरिकता — मार्शल
- तीन दृष्टियाँ
- विकसित बनाम विकासशील प्रतिक्रिया
- Deglobalisation, slowbalisation
9. महत्वपूर्ण One-liners
- पारंपरिक तुलनात्मक अध्ययन "non-comparative, descriptive, parochial" — रॉय मैक्रिडिस (1955)।
- The Civic Culture (1963) — आल्मंड और वर्बा।
- "Conceptual stretching" — जियोवानी सार्तोरी; "too many variables, too few cases" — अरेंड लिजफ़ार्ट।
- "Thick description" — क्लिफ़र्ड गीर्ट्ज़।
- The Three Worlds of Welfare Capitalism (1990) — गोस्टा एस्पिंग-एंडरसन।
- "Soft state" — गुन्नार मिर्डल; "embedded autonomy" — पीटर इवांस; developmental state — चाल्मर्स जॉनसन।
- Duverger's law — मॉरिस दुवर्जे; catch-all party — किर्शहाइमर।
- Post-materialism — रोनाल्ड इंगलहार्ट; Citizenship and Social Class (1950) — टी.एच. मार्शल।
- "Deglobalization" (2002) — वाल्डेन बेल्लो; Globalization and Its Discontents — स्टिग्लिट्ज़।
- The Postmodern State — रॉबर्ट कूपर।
10. टिप्स एवं ट्रिक्स
- हर उत्तर में कम से कम दो देशों की तुलना — जैसे विकसित (स्वीडन) और विकासशील (भारत/ब्राज़ील)।
- उपागम के प्रश्न में — मूल धारणा, विचारक, उदाहरण, आलोचना, निष्कर्ष।
- वैश्वीकरण पर उत्तर हमेशा "दोनों पक्ष" — अवसर और चुनौतियाँ — और अंत में "रूपांतरण" का संतुलित निष्कर्ष।
11. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
"Deglobalisation वैश्वीकरण को विस्थापित कर रहा है।" टिप्पणी कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: Deglobalisation का अर्थ है देशों के बीच व्यापार, निवेश, लोगों और विचारों के प्रवाह में कमी और राष्ट्रीय नियंत्रण की वापसी; वाल्डेन बेल्लो ने इसे विकासशील देशों के लिए विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया था।
पक्ष में प्रमाण: 2008 के बाद व्यापार वृद्धि धीमी; ब्रेक्ज़िट; अमेरिका-चीन व्यापार और प्रौद्योगिकी युद्ध (सेमीकंडक्टर नियंत्रण); कोविड-19 से आपूर्ति शृंखलाओं का "reshoring/friend-shoring"; रूस पर प्रतिबंध और SWIFT से बहिष्कार; औद्योगिक नीतियों की वापसी (CHIPS Act, IRA, भारत का PLI); WTO विवाद-निपटान तंत्र का ठप होना।
विपक्ष में प्रमाण: डिजिटल व्यापार, सेवाएँ, डेटा प्रवाह, प्रवासी-प्रेषण, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं का स्थानांतरण (चीन से वियतनाम, भारत, मैक्सिको) — यह "पुनर्वैश्वीकरण" है; नए व्यापार समझौते (RCEP, भारत-UAE CEPA, भारत-UK FTA)।
विश्लेषण: यह "slowbalisation" या "fragmentation" है — वैश्वीकरण भू-राजनीतिक गुटों में बँट रहा है।
निष्कर्ष: Deglobalisation वैश्वीकरण को विस्थापित नहीं, बल्कि पुनर्गठित कर रहा है; भारत के लिए यह "China+1" के अवसर और संरक्षणवाद की चुनौती दोनों है।
उन्नत पूँजीवादी अर्थव्यवस्थाओं में उत्तर-आधुनिक राज्य की विशिष्ट विशेषताएँ क्या हैं? विश्लेषण कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: उत्तर-आधुनिक राज्य वह राज्य है जो वेस्टफ़ेलियन संप्रभुता, केंद्रीकृत नौकरशाही और सैन्य शक्ति पर आधारित "आधुनिक राज्य" से आगे बढ़ चुका है — रॉबर्ट कूपर ने यूरोपीय संघ को इसका उदाहरण माना।
विशेषताएँ: (1) साझा संप्रभुता — EU में मुद्रा, व्यापार, क़ानून पर साझा नियंत्रण; (2) घरेलू-विदेशी भेद का धुँधलापन — परस्पर हस्तक्षेप और निगरानी स्वीकार्य; (3) बहु-स्तरीय शासन — स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, अधिराष्ट्रीय; (4) hollowing out — निजीकरण, एजेंसियाँ, PPP, नेटवर्क गवर्नेंस; (5) regulatory state — सेवा देने के बजाय नियमन; (6) सैन्य शक्ति पर कम निर्भरता, "soft power"; (7) पहचान, बहुसंस्कृतिवाद और post-materialist मूल्यों पर आधारित राजनीति।
आलोचना: ब्रेक्ज़िट, लोकलुभावनवाद और यूक्रेन युद्ध के बाद रक्षा व्यय में वृद्धि ने दिखाया कि "आधुनिक" राज्य की विशेषताएँ लौट रही हैं; मार्क्सवादी इसे पूँजी के हित में राज्य का पुनर्गठन मानते हैं।
निष्कर्ष: उत्तर-आधुनिक राज्य एक "आदर्श प्रकार" है जो उन्नत पूँजीवादी समाजों में राज्य के रूपांतरण को समझाता है, पर संप्रभुता और राष्ट्रवाद की वापसी उसकी सीमाएँ भी दिखाती है।
विकासशील समाजों में लोकतंत्रों को बनाए रखने और स्थिर करने में राजनीतिक दलों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: शैट्शनाइडर — "Modern democracy is unthinkable save in terms of parties." विकासशील समाजों में दल राष्ट्र-निर्माण और लोकतांत्रिक संस्थानीकरण के वाहक रहे हैं।
सकारात्मक भूमिका: राष्ट्रीय आंदोलन से लोकतंत्र तक संक्रमण (कांग्रेस, ANC); विविध हितों का समूहन; राजनीतिक समाजीकरण और भागीदारी; सरकार-विपक्ष का निर्माण और सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण (भारत 1977, 2014; ब्राज़ील); हंटिंगटन — सशक्त, संस्थानीकृत दल "political decay" रोकते हैं।
नकारात्मक पक्ष: वंशवाद और व्यक्तिवाद; आंतरिक लोकतंत्र का अभाव; जातीय-धार्मिक ध्रुवीकरण (केन्या, श्रीलंका); धन-बल और अपराधीकरण; प्रभुत्ववादी दल का अधिनायकवाद (ज़िम्बाब्वे का ZANU-PF); कमज़ोर दल से सैन्य हस्तक्षेप (पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश)।
तुलनात्मक उदाहरण: भारत में दलीय प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र को टिकाऊ बनाती है; पाकिस्तान में दलों की कमज़ोरी ने सेना को शक्ति दी।
निष्कर्ष: दल लोकतंत्र के "आवश्यक पर अपर्याप्त" स्तंभ हैं — उनका आंतरिक लोकतंत्र, पारदर्शी वित्त और विचारधारा-आधारित राजनीति ही विकासशील लोकतंत्रों को स्थिर करेगी।
राज्यों की तुलना करने में राजनीतिक सिद्धांतकार को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
मॉडल उत्तर
भूमिका: तुलना राजनीति विज्ञान की मूल पद्धति है, पर राज्य जटिल, ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट और परस्पर जुड़ी इकाइयाँ हैं।
कठिनाइयाँ: (1) बहुत से चर, बहुत कम मामले (लिजफ़ार्ट); (2) अवधारणाओं का खिंचाव — "लोकतंत्र" या "दल" का अर्थ हर समाज में अलग (सार्तोरी); (3) गैल्टन की समस्या — देश स्वतंत्र मामले नहीं, विचारों और संस्थाओं का प्रसार होता है; (4) आँकड़ों की उपलब्धता और गुणवत्ता में असमानता; (5) सांस्कृतिक और यूरोकेंद्रित पूर्वाग्रह; (6) चयन-पूर्वाग्रह — केवल "सफल" मामलों का अध्ययन; (7) मूल्य-निर्णय और राजनीतिक संवेदनशीलता।
समाधान: most similar/most different systems design, केस स्टडी के साथ बड़े-N सांख्यिकीय अध्ययन, संदर्भ-संवेदी अवधारणाएँ।
निष्कर्ष: इन कठिनाइयों के बावजूद तुलना ही राजनीति के सामान्य नियम खोजने का एकमात्र मार्ग है — सावधानी और विनम्रता के साथ।
विश्व के विभिन्न देशों में महिलाओं के शारीरिक अधिकारों से संबंधित हाल के प्रमुख सामाजिक आंदोलनों की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: "मेरा शरीर, मेरा अधिकार" — शारीरिक स्वायत्तता (bodily autonomy) समकालीन नारीवादी आंदोलनों का केंद्र है: हिंसा से मुक्ति, प्रजनन अधिकार, पहनावे और जीवन-चयन की स्वतंत्रता।
प्रमुख आंदोलन: (1) #MeToo (2017) — यौन उत्पीड़न के विरुद्ध वैश्विक डिजिटल आंदोलन, भारत में 2018; (2) Ni Una Menos (अर्जेंटीना, 2015) — स्त्री-हत्या के विरुद्ध, 2020 में गर्भपात वैधीकरण; (3) आयरलैंड — 2018 जनमत संग्रह; (4) अमेरिका — Dobbs (2022) के बाद प्रजनन अधिकार आंदोलन और कई राज्यों में जनमत संग्रह; (5) ईरान — "Woman, Life, Freedom" (2022), अनिवार्य हिजाब के विरुद्ध; (6) पोलैंड — 2020 के गर्भपात-प्रतिबंध के विरुद्ध "Women's Strike"; (7) भारत — निर्भया (2012), RG Kar (2024) विरोध।
विश्लेषण: नए सामाजिक आंदोलन की विशेषताएँ — पहचान और मूल्य-आधारित, विकेंद्रीकृत, डिजिटल नेटवर्क; राज्य, धर्म और पितृसत्ता से संघर्ष; परिणाम — क़ानूनी सुधार, पर प्रतिक्रिया (backlash) भी।
निष्कर्ष: ये आंदोलन दिखाते हैं कि नागरिकता का अर्थ शरीर पर अधिकार तक फैल रहा है; भारत में भी पुट्टस्वामी (निजता) और X बनाम स्वास्थ्य विभाग (2022 — अविवाहित महिलाओं का गर्भपात अधिकार) इसी दिशा के निर्णय हैं।
12. Quick Revision Summary
- विकास — अरस्तू → पारंपरिक → आधुनिक (मैक्रिडिस, आल्मंड)।
- उपागम — संस्थागत/नव-संस्थावाद, तंत्र, संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक, राजनीतिक संस्कृति, आधुनिकीकरण, राजनीतिक अर्थव्यवस्था, राजनीतिक समाजशास्त्र, तार्किक चयन, व्याख्यात्मक।
- सीमाएँ — too many variables, conceptual stretching, Galton's problem, selection bias।
- राज्य — कल्याणकारी → नव-उदार → regulatory → उत्तर-आधुनिक; समाजवादी (सोवियत, चीन); उत्तर-औपनिवेशिक (अलवी, मिर्डल, developmental state)।
- भागीदारी — दल (दुवर्जे, किर्शहाइमर), दबाव समूह (बहुलवाद, कॉर्पोरेटिज़्म), नए सामाजिक आंदोलन, नागरिकता (मार्शल)।
- वैश्वीकरण — तीन दृष्टियाँ, विकसित-विकासशील प्रतिक्रियाएँ, deglobalisation बनाम रूपांतरण।