1. अध्याय एक नज़र में
Paper I Section B के शेष units — Planning and Economic Development, Caste, Religion and Ethnicity in Indian Politics, Party System और Social Movements — "राजनीति व्यवहार में" को समझाते हैं। 2023 में 1989-99 का दलीय रूपांतरण, जाति राजनीति, आंबेडकर का "शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित हो", "गरीबों का पर्यावरणवाद" और नीति आयोग; 2024 में दबाव समूह, सापेक्ष वंचना और जातीय संघर्ष, पर्यावरण आंदोलन, अरक-विरोधी आंदोलन, योजना आयोग की विरासत और ग्राम स्वराज आधारित गांधीवादी नियोजन पूछे गए।
- नियोजन और आर्थिक विकास: नेहरूवादी और गांधीवादी परिप्रेक्ष्य; नियोजन और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका; हरित क्रांति, भूमि सुधार, कृषि संबंध; उदारीकरण और आर्थिक सुधार।
- जाति, धर्म और जातीयता भारतीय राजनीति में।
- दलीय व्यवस्था: राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल, वैचारिक-सामाजिक आधार, गठबंधन राजनीति के प्रतिरूप; दबाव समूह, चुनावी व्यवहार के रुझान, विधायकों की बदलती सामाजिक-आर्थिक प्रोफ़ाइल।
- सामाजिक आंदोलन: नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार आंदोलन; महिला आंदोलन; पर्यावरण आंदोलन।
2. नियोजन और आर्थिक विकास
नेहरूवादी बनाम गांधीवादी परिप्रेक्ष्य
| आधार | नेहरूवादी | गांधीवादी |
|---|---|---|
| विकास मॉडल | भारी उद्योग, आधुनिकीकरण — महालनोबिस मॉडल (दूसरी योजना 1956) | ग्रामोद्योग, कुटीर उद्योग, आत्मनिर्भर गाँव |
| राज्य की भूमिका | सार्वजनिक क्षेत्र "commanding heights"; मिश्रित अर्थव्यवस्था | विकेंद्रीकृत, न्यूनतम राज्य, न्यासिता |
| तकनीक | बड़े बाँध — "आधुनिक भारत के मंदिर" | मानव-श्रम आधारित, उपयुक्त तकनीक |
| नियोजन | केंद्रीकृत, ऊपर से नीचे (योजना आयोग 1950) | नीचे से ऊपर — ग्राम स्वराज, "Gandhian Plan" (श्रीमन्नारायण, 1944) |
| प्रभाव | औद्योगिक आधार, IIT, ISRO, सार्वजनिक उपक्रम | KVIC, सामुदायिक विकास (1952), पंचायती राज, MGNREGA की आत्मा |
- योजना आयोग की विरासत (UPSC 2024) — 12 पंचवर्षीय योजनाएँ (अंतिम 2012-17), संसाधन आवंटन, गरीबी अनुमान (तेंदुलकर, रंगराजन), अंतर-क्षेत्रीय संतुलन; आलोचना — केंद्रीकृत, "one-size-fits-all", राज्यों से टकराव। 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग ने स्थान लिया, पर विरासत बनी है — दीर्घकालीन दृष्टि दस्तावेज़ (Viksit Bharat@2047), सार्वजनिक निवेश, आकांक्षी ज़िले, सांख्यिकीय तंत्र, सहकारी संघवाद का मंच।
- नीति आयोग — "साझा दृष्टि वाला नीति थिंक टैंक" (UPSC 2023) — अध्यक्ष प्रधानमंत्री, गवर्निंग काउंसिल (मुख्यमंत्री), क्षेत्रीय परिषदें; "Team India", सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद (राज्यों की रैंकिंग — SDG Index, स्वास्थ्य सूचकांक), "bottom-up" नियोजन, Atal Innovation Mission। आलोचना — धन-आवंटन की शक्ति नहीं (वित्त मंत्रालय के पास), इसलिए प्रभाव सीमित; राज्यों की वास्तविक भागीदारी पर प्रश्न।
हरित क्रांति, भूमि सुधार और कृषि संबंध
- भूमि सुधार — ज़मींदारी उन्मूलन (सबसे सफल), काश्तकारी सुधार, भूमि हदबंदी (कमज़ोर), चकबंदी; पश्चिम बंगाल का "ऑपरेशन बर्गा" (1978) और केरल सफल उदाहरण; पहला संशोधन (1951) और नौवीं अनुसूची।
- हरित क्रांति (1965-66 से) — HYV बीज, सिंचाई, रासायनिक उर्वरक; पंजाब-हरियाणा-पश्चिमी UP; खाद्य आत्मनिर्भरता। राजनीतिक परिणाम — धनी-मध्यम किसानों का उदय ("bullock capitalists" — रुडॉल्फ़ दंपती), किसान राजनीति (चरण सिंह, महेंद्र सिंह टिकैत, शरद जोशी — "भारत बनाम इंडिया"), क्षेत्रीय असमानता, पर्यावरणीय क्षरण।
- 2020-21 का किसान आंदोलन — तीन कृषि क़ानूनों के विरुद्ध; नवंबर 2021 में क़ानून वापस — लोकतांत्रिक दबाव का उदाहरण।
उदारीकरण और आर्थिक सुधार
- 1991 — भुगतान संतुलन संकट; LPG सुधार (नरसिंह राव-मनमोहन सिंह); लाइसेंस राज का अंत, विनिवेश, विदेशी निवेश।
- राजनीतिक प्रभाव — "reforms by stealth" (रॉब जेनकिंस), राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा, मध्यम वर्ग का विस्तार, कल्याणकारी राज्य का नया रूप (अधिकार-आधारित क़ानून — RTI, MGNREGA, RTE, NFSA; बाद में DBT, JAM)।
3. जाति, धर्म और जातीयता
जाति और राजनीति
- रजनी कोठारी (Caste in Indian Politics, 1970) — "जाति का राजनीतिकरण" (politicisation of caste): लोकतंत्र ने जाति को नष्ट नहीं, रूपांतरित किया; जाति राजनीतिक संगठन का आधार बनी।
- रुडॉल्फ़ दंपती — The Modernity of Tradition: जाति संघ (caste associations) आधुनिकीकरण के वाहक।
- एम.एन. श्रीनिवास — "dominant caste" (संख्या, भूमि, शिक्षा, स्थानीय शक्ति)।
- मंडल आयोग (1980 रिपोर्ट, 1990 में क्रियान्वयन) — OBC के लिए 27% आरक्षण; "मंडल-मंदिर" राजनीति; क्रिस्टॉफ़ जाफ़रलो — "silent revolution" (उत्तर भारत में निचली जातियों का सत्ता में उदय)।
- दलित राजनीति — RPI, दलित पैंथर्स (1972), BSP (कांशीराम, 1984) — "बहुजन"; सामाजिक इंजीनियरिंग (2007)।
- जाति राजनीति के उदय के कारण (UPSC 2023) — क्षेत्रीय आकांक्षाएँ (द्रविड़ आंदोलन, यादव-कुर्मी राजनीति), चुनावी गणित (वोट बैंक, गठबंधन), आरक्षण, हरित क्रांति से आर्थिक सशक्तीकरण; हाल में उप-वर्गीकरण, जाति सर्वेक्षण (बिहार 2023) और "गैर-प्रभावशाली OBC" की राजनीति।
धर्म और राजनीति
- भारतीय धर्मनिरपेक्षता — राजीव भार्गव: "principled distance"; राज्य धर्मों से समान दूरी नहीं, सिद्धांत-आधारित दूरी/हस्तक्षेप।
- सांप्रदायिकता — बिपन चंद्र की तीन अवस्थाएँ (सामुदायिक पहचान → हितों का अलगाव → शत्रुता); पॉल ब्रास — "institutionalised riot systems"; आशुतोष वार्ष्णेय — नागरिक जुड़ाव (inter-ethnic civic networks) दंगे रोकते हैं।
- प्रमुख घटनाएँ — शाह बानो (1985), अयोध्या आंदोलन, CAA (2019) बहस; बहुसंख्यकवाद बनाम धर्मनिरपेक्षता की बहस।
जातीयता (Ethnicity)
- भाषायी राज्य (1956), पूर्वोत्तर में जातीय आंदोलन (नागा, मिज़ो, बोडो), पंजाब, कश्मीर; छठी अनुसूची और अनु. 371 के विशेष प्रावधान।
- सापेक्ष वंचना (Relative deprivation — UPSC 2024) — टेड गुर (Why Men Rebel, 1970): अपेक्षाओं और उपलब्धियों के बीच अंतर से असंतोष; जातीय समूह जब स्वयं को दूसरों की तुलना में वंचित मानते हैं तो संघर्ष उभरता है। उदाहरण — असम आंदोलन (1979-85, "बाहरी" प्रवासियों के विरुद्ध), मणिपुर (2023 — मैतेई-कुकी, ST दर्जे की माँग), बोडोलैंड, तेलंगाना आंदोलन, श्रीलंका में तमिल। सीमा — केवल वंचना नहीं, नेतृत्व, संगठन, अवसर संरचना और पहचान-निर्माण भी आवश्यक।
4. दलीय व्यवस्था (Party System)
| चरण | विशेषता | विद्वान की व्याख्या |
|---|---|---|
| 1952–67 | एक-दलीय प्रभुत्व — कांग्रेस; विपक्ष "दबाव दल" | रजनी कोठारी — "Congress System"; मॉरिस-जोन्स — "one-party dominance" |
| 1967–77 | 9 राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें (संविद), "आया राम गया राम"; 1969 कांग्रेस विभाजन | "Congress-opposition" से प्रतिस्पर्धी व्यवस्था की ओर |
| 1977–89 | जनता पार्टी प्रयोग; इंदिरा की वापसी; 1984 में कांग्रेस की बड़ी जीत | "Plebiscitary politics" |
| 1989–2014 | त्रिशंकु संसद, गठबंधन सरकारें (NF, UF, NDA, UPA); क्षेत्रीय दलों का उदय | योगेंद्र यादव — "third electoral system"; "federalisation of the party system" |
| 2014 के बाद | भाजपा का प्रभुत्व — 2014 और 2019 में अपना बहुमत; 2024 में बहुमत से कम, NDA गठबंधन सरकार | "fourth party system" (मिलन वैष्णव और जेमी हिंटसन, 2019), "BJP-dominant system" |
- कांग्रेस के प्रभुत्व का अंत — 1989 के बाद कोई दल अपने बल पर बहुमत नहीं (2014 तक)।
- मंडल — OBC राजनीति का उभार (सपा, राजद, जद); मंदिर — भाजपा का उदय (1984 में 2 सीटों से 1998 में 182); बाज़ार — 1991 के सुधार। (योगेंद्र यादव — "3M": Mandal, Mandir, Market)।
- गठबंधन राजनीति का संस्थानीकरण — NF (1989), UF (1996), NDA (1998, 1999); साझा न्यूनतम कार्यक्रम।
- क्षेत्रीय दलों की केंद्रीय भूमिका — TDP, DMK/AIADMK, अकाली दल, TMC; राष्ट्रीय नीति में राज्यों की आवाज़।
- "Democratic upsurge" — निचली जातियों, ग्रामीण और गरीब मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी (योगेंद्र यादव)।
दबाव समूह (Pressure Groups — UPSC 2024)
- प्रकार — व्यावसायिक (FICCI, CII, ASSOCHAM), श्रमिक (AITUC, INTUC, BMS), किसान (भारतीय किसान यूनियन, AIKS), पेशेवर (IMA, बार काउंसिल), छात्र, धार्मिक-जातीय, "anomic" (स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन)।
- भूमिका — हित-अभिव्यक्ति (आल्मंड), नीति में विशेषज्ञता, लॉबिंग, जन-जागरण, न्यायालय में PIL, मीडिया अभियान।
- भारत में — मायरन वीनर (The Politics of Scarcity, 1962); दल-आधारित संबद्धता (कई श्रमिक संघ दलों के अंग); जाति और समुदाय की भूमिका।
- आलोचनात्मक मूल्यांकन — पक्ष: बहुलवादी लोकतंत्र, सूचना; विपक्ष: धनी समूहों का असमान प्रभाव (कॉर्पोरेट लॉबिंग), पारदर्शिता का अभाव (भारत में लॉबिंग का कोई पंजीकरण क़ानून नहीं), हिंसक/अवरोधक आंदोलन।
चुनावी व्यवहार और विधायकों की प्रोफ़ाइल
- मतदान व्यवहार के निर्धारक — जाति, धर्म, वर्ग, नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाएँ ("labharthi" मतदाता), महिला मतदाता का उदय (2019 में लगभग पुरुषों के बराबर मतदान), युवा।
- CSDS-लोकनीति सर्वे — भारतीय चुनावी व्यवहार अध्ययन का प्रमुख स्रोत।
- विधायकों की प्रोफ़ाइल — कृषक और निचली जातियों का बढ़ता प्रतिनिधित्व; करोड़पति सांसदों का बढ़ता अनुपात और आपराधिक मामलों वाले प्रत्याशी (ADR रिपोर्टें); महिलाओं का प्रतिनिधित्व 18वीं लोकसभा में लगभग 14%; नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (परिसीमन के बाद 33% आरक्षण)।
5. सामाजिक आंदोलन
नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार आंदोलन
- आपातकाल (1975-77) के बाद उदय — PUCL (1976, JP की प्रेरणा से), PUDR (1977/1981)।
- मुद्दे — हिरासत में मौत, AFSPA, UAPA, फ़र्ज़ी मुठभेड़, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता; न्यायालयों में PIL।
महिला आंदोलन
- "Towards Equality" रिपोर्ट (1974) — महिला आंदोलन की "दूसरी लहर" की प्रेरणा।
- दहेज-विरोधी आंदोलन (1970-80), मथुरा बलात्कार मामला (1979) → बलात्कार क़ानून संशोधन (1983); शाह बानो; विशाखा (1997); निर्भया (2012) → आपराधिक क़ानून संशोधन 2013।
- अरक (देसी शराब)-विरोधी आंदोलन (UPSC 2024) — आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले (दुबगुंटा गाँव) से 1992 में शुरू; साक्षरता अभियान की कक्षाओं में महिलाओं ने शराब के कारण घरेलू हिंसा और गरीबी पर चर्चा की; शराब की दुकानों का घेराव, नीलामी रोकना; परिणाम — 1995 में आंध्र प्रदेश में शराबबंदी (1997 में आंशिक रूप से हटाई गई)। महत्व — ग्रामीण, गरीब, दलित महिलाओं का स्वतःस्फूर्त आंदोलन; घरेलू हिंसा को सार्वजनिक राजनीतिक मुद्दा बनाया ("personal is political"); राज्य के राजस्व-हित बनाम महिला कल्याण का प्रश्न।
पर्यावरण आंदोलन
| आंदोलन | वर्ष/क्षेत्र | नेता | मुद्दा और परिणाम |
|---|---|---|---|
| चिपको | 1973, उत्तराखंड (मंडल, रेणी) | सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट, गौरा देवी | वनों की व्यावसायिक कटाई; हिमालयी क्षेत्र में हरे पेड़ काटने पर 15 वर्ष का प्रतिबंध (1980) |
| साइलेंट वैली | 1970-80, केरल | KSSP, कवयित्री सुगतकुमारी | पनबिजली परियोजना रद्द; 1984 में राष्ट्रीय उद्यान |
| अप्पिको | 1983, कर्नाटक | पांडुरंग हेगड़े | चिपको का दक्षिणी रूप |
| नर्मदा बचाओ | 1985 से, मध्य भारत | मेधा पाटकर, बाबा आमटे | सरदार सरोवर बाँध, विस्थापन; विश्व बैंक 1993 में हटा; NBA बनाम भारत संघ (2000) |
| नियमगिरि | 2000 के दशक, ओडिशा | डोंगरिया कोंध | वेदांता खनन; ग्राम सभाओं ने अस्वीकार किया (2013) |
- "गरीबों का पर्यावरणवाद" (Environmentalism of the poor — UPSC 2023) — रामचंद्र गुहा और जोन मार्टिनेज़-एलियर: विकासशील देशों में पर्यावरण आंदोलन "जीविका और अस्तित्व" का संघर्ष हैं — वन, जल, भूमि पर निर्भर समुदाय अपने संसाधनों की रक्षा करते हैं; यह पश्चिम के "विलासिता के पर्यावरणवाद" (wilderness/आनंद के लिए संरक्षण) से भिन्न है।
- पर्यावरण शासन पर प्रभाव (UPSC 2024) — पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 (भोपाल त्रासदी के बाद), वन अधिकार अधिनियम 2006, EIA में जन-सुनवाई, NGT (2010), न्यायालयों के "polluter pays" और "precautionary principle" (वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच 1996), पुनर्वास नीतियाँ (LARR 2013)।
6. Master Summary Table
| विषय | मुख्य अवधारणा | प्रमुख विद्वान | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| नियोजन | नेहरूवादी बनाम गांधीवादी | महालनोबिस, श्रीमन्नारायण | योजना आयोग → नीति आयोग |
| कृषि | भूमि सुधार, हरित क्रांति | रुडॉल्फ़ (bullock capitalists) | ऑपरेशन बर्गा, किसान आंदोलन 2020-21 |
| जाति | जाति का राजनीतिकरण | कोठारी, श्रीनिवास, जाफ़रलो | मंडल, BSP |
| धर्म | principled distance, सांप्रदायिकता | भार्गव, बिपन चंद्र, ब्रास, वार्ष्णेय | शाह बानो, अयोध्या |
| जातीयता | सापेक्ष वंचना | टेड गुर | असम, मणिपुर, बोडोलैंड |
| दलीय व्यवस्था | Congress system → गठबंधन → BJP प्रभुत्व | कोठारी, यादव, वैष्णव | 1989-99 का रूपांतरण |
| दबाव समूह | हित-अभिव्यक्ति | वीनर, आल्मंड | FICCI, BKU |
| सामाजिक आंदोलन | गरीबों का पर्यावरणवाद, महिला आंदोलन | गुहा, मार्टिनेज़-एलियर | चिपको, NBA, अरक-विरोधी |
7. Mind Map
- नेहरू बनाम गांधी
- योजना आयोग → नीति आयोग
- हरित क्रांति, भूमि सुधार
- 1991 सुधार
- जाति — कोठारी, मंडल
- धर्म — principled distance
- जातीयता — सापेक्ष वंचना
- Congress system
- 1989-99 — 3M
- गठबंधन, क्षेत्रीय दल
- दबाव समूह, मतदान व्यवहार
- नागरिक स्वतंत्रता — PUCL
- महिला — अरक-विरोधी
- पर्यावरण — चिपको, NBA
8. महत्वपूर्ण One-liners
- "Congress System"; Caste in Indian Politics — रजनी कोठारी।
- "Silent revolution" — क्रिस्टॉफ़ जाफ़रलो; "democratic upsurge", "third electoral system" — योगेंद्र यादव।
- "Principled distance" — राजीव भार्गव; "institutionalised riot systems" — पॉल ब्रास।
- Ethnic Conflict and Civic Life — आशुतोष वार्ष्णेय; Why Men Rebel — टेड गुर।
- "Environmentalism of the poor" — गुहा और मार्टिनेज़-एलियर।
- The Politics of Scarcity — मायरन वीनर; "bullock capitalists" — रुडॉल्फ़ दंपती।
- नीति आयोग — 1 जनवरी 2015; योजना आयोग — 15 मार्च 1950।
- चिपको — 1973; नर्मदा बचाओ — 1985; अरक-विरोधी — 1992, नेल्लोर।
- "भारत बनाम इंडिया" — शरद जोशी (शेतकरी संगठन)।
9. टिप्स एवं ट्रिक्स
- हर उत्तर में एक भारतीय विद्वान (कोठारी, यादव, भार्गव, जाफ़रलो) और एक आँकड़ा/उदाहरण।
- आंदोलन के प्रश्नों में — कारण, नेतृत्व, रणनीति, परिणाम, सिद्धांत (नया सामाजिक आंदोलन, संसाधन संघटन)।
- दलीय व्यवस्था में चरण-वार तालिका बहुत प्रभावी।
1989-99 का रूपांतरण — "3M + C + R": Mandal, Mandir, Market + Coalition + Regional parties।
10. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
1989–1999 के दशक ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दलीय व्यवस्था में युगांतकारी परिवर्तन किया। इस दौर के प्रमुख राष्ट्रीय रुझान पहचानिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: 1989 का आम चुनाव कांग्रेस प्रणाली के अंत और बहुदलीय, प्रतिस्पर्धी, गठबंधन आधारित व्यवस्था की शुरुआत था।
प्रमुख रुझान: (1) एकदलीय प्रभुत्व का अंत — त्रिशंकु संसदें, छह वर्षों में पाँच प्रधानमंत्री; (2) मंडल राजनीति — OBC दलों का उदय, जाफ़रलो की "silent revolution"; (3) मंदिर राजनीति — भाजपा का 1984 की 2 सीटों से 1998 में 182 सीटों तक विस्तार, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद; (4) बाज़ार — 1991 सुधारों पर व्यापक सहमति; (5) गठबंधन का संस्थानीकरण — NF, UF, NDA; (6) क्षेत्रीय दलों का राष्ट्रीय महत्व — संघवाद का "federalisation"; (7) democratic upsurge — गरीब, ग्रामीण, निचली जातियों की भागीदारी; (8) दलबदल और अस्थिरता — 1997-98 में सरकारों का गिरना।
निष्कर्ष: इस दशक ने भारतीय लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और संघीय बनाया, यद्यपि अस्थिरता भी आई; 2014 के बाद नई प्रभुत्ववादी व्यवस्था भी इन्हीं सामाजिक परिवर्तनों पर टिकी है।
"सापेक्ष वंचना जातीय संघर्ष का प्रमुख स्रोत है।" प्रासंगिक उदाहरणों सहित इस कथन की व्याख्या कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: सापेक्ष वंचना वह मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसमें कोई समूह अपनी स्थिति को दूसरे समूहों या अपनी अपेक्षाओं की तुलना में कमतर मानता है (टेड गुर, स्टॉफ़र)।
तंत्र: अपेक्षा और उपलब्धि का अंतर → निराशा → सामूहिक पहचान → संघर्ष; शिक्षा और विकास अपेक्षाएँ बढ़ाते हैं ("revolution of rising expectations")।
उदाहरण: असम आंदोलन (प्रवासियों से नौकरियाँ-भूमि छिनने का भय); मणिपुर 2023 (ST दर्जे और भूमि अधिकार पर मैतेई-कुकी तनाव); तेलंगाना (जल, नौकरी, धन — "नीलू, निधुलु, नियामकालु"); पंजाब 1980 (नदी जल, चंडीगढ़); श्रीलंका (सिंहली भाषा नीति से तमिल वंचना)।
सीमाएँ: केवल वंचना पर्याप्त नहीं — नेतृत्व, संगठन, राजनीतिक अवसर, अभिजनों द्वारा पहचान का उपयोग (पॉल ब्रास का "instrumentalist" दृष्टिकोण), और राज्य की प्रतिक्रिया भी निर्णायक।
निष्कर्ष: समावेशी विकास, संघीय समायोजन (छठी अनुसूची, विशेष प्रावधान) और संवाद सापेक्ष वंचना को संघर्ष बनने से रोक सकते हैं।
सरकार की निर्णय-प्रक्रिया में दबाव समूहों की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: दबाव समूह संगठित हित-समूह हैं जो सत्ता प्राप्त किए बिना सरकारी नीतियों को प्रभावित करना चाहते हैं — "invisible government"।
भूमिका: (1) हित-अभिव्यक्ति और सूचना — उद्योग संघों की बजट-पूर्व सिफ़ारिशें; (2) विशेषज्ञता — IMA स्वास्थ्य नीति पर; (3) जन-जागरण और आंदोलन — RTI के लिए MKSS; (4) न्यायिक मार्ग — PIL; (5) संसदीय समितियों के समक्ष प्रस्तुतीकरण।
आलोचना: संसाधनों की असमानता — कॉर्पोरेट समूहों का अधिक प्रभाव; पारदर्शिता का अभाव (लॉबिंग पंजीकरण क़ानून नहीं); जातिगत-धार्मिक समूहों द्वारा संकीर्ण माँगें; हिंसक आंदोलन (रेल रोको); दलों के अंग होने से स्वायत्तता कम।
सकारात्मक मूल्यांकन: बहुलवादी लोकतंत्र के लिए आवश्यक; चुनावों के बीच जवाबदेही का साधन; किसान आंदोलन 2020-21 ने नीति बदलवाई।
निष्कर्ष: लॉबिंग नियमन, सार्वजनिक परामर्श की अनिवार्यता (पूर्व-विधायी परामर्श नीति 2014) और नागरिक समाज की स्वायत्तता से दबाव समूहों को लोकतंत्र का सहायक बनाया जा सकता है।
भारत में पर्यावरणीय शासन को आकार देने में पर्यावरण आंदोलनों की भूमिका की चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: भारत में पर्यावरण आंदोलन "गरीबों के पर्यावरणवाद" का उदाहरण हैं — वन, जल, भूमि पर निर्भर समुदायों का अस्तित्व-संघर्ष।
प्रमुख आंदोलन और प्रभाव: चिपको → वन नीति 1988 (स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता), हिमालय में कटाई प्रतिबंध; साइलेंट वैली → परियोजना रद्द, राष्ट्रीय उद्यान; NBA → पुनर्वास पर बहस, विश्व बैंक का हटना, विस्थापन नीतियाँ; भोपाल गैस त्रासदी पर अभियान → पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986; नियमगिरि → ग्राम सभा की सहमति का सिद्धांत; वनाधिकार आंदोलन → FRA 2006।
संस्थागत परिवर्तन: EIA अधिसूचना और जन-सुनवाई, NGT (2010), न्यायिक सिद्धांत — polluter pays, precautionary principle, public trust doctrine (एम.सी. मेहता बनाम कमलनाथ 1997)।
सीमाएँ: विकास बनाम पर्यावरण का तनाव, EIA को कमज़ोर करने के आरोप, आंदोलनकारियों पर दमन, शहरी पर्यावरण मुद्दों (वायु प्रदूषण) पर सीमित जन-आंदोलन।
निष्कर्ष: पर्यावरण आंदोलनों ने भारत में पर्यावरणीय शासन को अधिकार-आधारित, सहभागी और न्यायिक रूप से सजग बनाया; जलवायु परिवर्तन के दौर में "just transition" के लिए यह परंपरा और महत्वपूर्ण होगी।
डॉ. आंबेडकर का आह्वान "शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो" दलित आंदोलन को नागरिक स्वतंत्रता की प्राप्ति की रणनीति देता है। विवेचना कीजिए।
मॉडल उत्तर (रूपरेखा)
भूमिका: यह त्रिसूत्री आह्वान दलित मुक्ति की समग्र रणनीति है — चेतना, संघर्ष और संस्थागत शक्ति।
शिक्षित बनो: ज्ञान आत्म-सम्मान और अधिकारों की चेतना देता है; पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी (1945), सिद्धार्थ कॉलेज; आरक्षण से शिक्षा और नौकरी।
संघर्ष करो (Agitate): महाड़ सत्याग्रह, कालाराम मंदिर प्रवेश, मनुस्मृति दहन — नागरिक अधिकारों (सार्वजनिक जल, मंदिर, सड़क) के लिए प्रत्यक्ष कार्रवाई; बाद में दलित पैंथर्स, अत्याचार-निवारण अधिनियम (1989) के लिए अभियान।
संगठित हो: ILP, SCF, RPI; बाद में BSP का "बहुजन" संगठन; दलित नागरिक समाज संगठन।
नागरिक स्वतंत्रता से संबंध: अनु. 17, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989; आंबेडकर का "सामाजिक लोकतंत्र" — नागरिक स्वतंत्रता सामाजिक समानता के बिना अधूरी।
निष्कर्ष: यह रणनीति आज भी प्रासंगिक है — शिक्षा में असमानता, अत्याचार और प्रतिनिधित्व के प्रश्न दलित आंदोलन को नए रूपों में सक्रिय रखते हैं।
अरक-विरोधी आंदोलन में महिलाओं की भूमिका — टिप्पणी कीजिए।
मॉडल उत्तर
भूमिका: 1992 में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले के गाँवों से शुरू हुआ यह आंदोलन ग्रामीण महिलाओं का स्वतःस्फूर्त जन-संघर्ष था।
भूमिका: साक्षरता अभियान (अक्षर दीपम) की कक्षाओं में शराब से होने वाली घरेलू हिंसा, कर्ज़ और गरीबी पर संवाद; महिलाओं ने शराब की दुकानें बंद करवाईं, नीलामी का बहिष्कार किया, शराब के पैकेट नष्ट किए; राजनीतिक दलों पर दबाव।
परिणाम और महत्व: 1995 में राज्य में मद्य-निषेध (1997 में आंशिक रूप से वापस); घरेलू मुद्दा सार्वजनिक राजनीति का विषय बना; दलित और गरीब महिलाओं का नेतृत्व; राज्य के राजस्व-हित बनाम महिला कल्याण का प्रश्न उभरा।
निष्कर्ष: यह "personal is political" का भारतीय उदाहरण है; बाद में बिहार (2016) जैसे राज्यों की शराबबंदी नीतियों पर बहस में इसकी विरासत दिखती है।
11. Quick Revision Summary
- नियोजन — नेहरूवादी (महालनोबिस, सार्वजनिक क्षेत्र) बनाम गांधीवादी (ग्राम स्वराज); योजना आयोग (1950) → नीति आयोग (2015); भूमि सुधार, हरित क्रांति, 1991 सुधार।
- जाति — कोठारी (राजनीतिकरण), श्रीनिवास (प्रभु जाति), मंडल, जाफ़रलो; धर्म — principled distance, ब्रास, वार्ष्णेय; जातीयता — सापेक्ष वंचना (गुर)।
- दलीय व्यवस्था — Congress system → 1967 → 1989-99 (3M, गठबंधन, क्षेत्रीय दल) → 2014 के बाद भाजपा प्रभुत्व → 2024 गठबंधन।
- दबाव समूह — प्रकार, भूमिका, असमान प्रभाव; मतदान व्यवहार, विधायकों की प्रोफ़ाइल।
- आंदोलन — PUCL; महिला (Towards Equality, मथुरा, अरक-विरोधी); पर्यावरण (चिपको, साइलेंट वैली, NBA, नियमगिरि); गरीबों का पर्यावरणवाद।