UPSC Mains · Political Science & International Relations · Paper I · अध्याय 7

भारतीय राजनीति: दल, समाज एवं आंदोलन

Party System, Society and Movements in Indian Politics

दलीय व्यवस्था, चुनावी व्यवहार, जाति-धर्म-जातीयता, क्षेत्रवाद, सामाजिक आंदोलन, नियोजन और आर्थिक सुधार, चुनाव सुधार।

Paper I 18 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper I Section B के शेष units — Planning and Economic Development, Caste, Religion and Ethnicity in Indian Politics, Party System और Social Movements — "राजनीति व्यवहार में" को समझाते हैं। 2023 में 1989-99 का दलीय रूपांतरण, जाति राजनीति, आंबेडकर का "शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित हो", "गरीबों का पर्यावरणवाद" और नीति आयोग; 2024 में दबाव समूह, सापेक्ष वंचना और जातीय संघर्ष, पर्यावरण आंदोलन, अरक-विरोधी आंदोलन, योजना आयोग की विरासत और ग्राम स्वराज आधारित गांधीवादी नियोजन पूछे गए।

Syllabus के बिंदु
  • नियोजन और आर्थिक विकास: नेहरूवादी और गांधीवादी परिप्रेक्ष्य; नियोजन और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका; हरित क्रांति, भूमि सुधार, कृषि संबंध; उदारीकरण और आर्थिक सुधार।
  • जाति, धर्म और जातीयता भारतीय राजनीति में।
  • दलीय व्यवस्था: राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल, वैचारिक-सामाजिक आधार, गठबंधन राजनीति के प्रतिरूप; दबाव समूह, चुनावी व्यवहार के रुझान, विधायकों की बदलती सामाजिक-आर्थिक प्रोफ़ाइल।
  • सामाजिक आंदोलन: नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार आंदोलन; महिला आंदोलन; पर्यावरण आंदोलन।

2. नियोजन और आर्थिक विकास

नेहरूवादी बनाम गांधीवादी परिप्रेक्ष्य

आधारनेहरूवादीगांधीवादी
विकास मॉडलभारी उद्योग, आधुनिकीकरण — महालनोबिस मॉडल (दूसरी योजना 1956)ग्रामोद्योग, कुटीर उद्योग, आत्मनिर्भर गाँव
राज्य की भूमिकासार्वजनिक क्षेत्र "commanding heights"; मिश्रित अर्थव्यवस्थाविकेंद्रीकृत, न्यूनतम राज्य, न्यासिता
तकनीकबड़े बाँध — "आधुनिक भारत के मंदिर"मानव-श्रम आधारित, उपयुक्त तकनीक
नियोजनकेंद्रीकृत, ऊपर से नीचे (योजना आयोग 1950)नीचे से ऊपर — ग्राम स्वराज, "Gandhian Plan" (श्रीमन्नारायण, 1944)
प्रभावऔद्योगिक आधार, IIT, ISRO, सार्वजनिक उपक्रमKVIC, सामुदायिक विकास (1952), पंचायती राज, MGNREGA की आत्मा
  • योजना आयोग की विरासत (UPSC 2024) — 12 पंचवर्षीय योजनाएँ (अंतिम 2012-17), संसाधन आवंटन, गरीबी अनुमान (तेंदुलकर, रंगराजन), अंतर-क्षेत्रीय संतुलन; आलोचना — केंद्रीकृत, "one-size-fits-all", राज्यों से टकराव। 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग ने स्थान लिया, पर विरासत बनी है — दीर्घकालीन दृष्टि दस्तावेज़ (Viksit Bharat@2047), सार्वजनिक निवेश, आकांक्षी ज़िले, सांख्यिकीय तंत्र, सहकारी संघवाद का मंच।
  • नीति आयोग — "साझा दृष्टि वाला नीति थिंक टैंक" (UPSC 2023) — अध्यक्ष प्रधानमंत्री, गवर्निंग काउंसिल (मुख्यमंत्री), क्षेत्रीय परिषदें; "Team India", सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद (राज्यों की रैंकिंग — SDG Index, स्वास्थ्य सूचकांक), "bottom-up" नियोजन, Atal Innovation Mission। आलोचना — धन-आवंटन की शक्ति नहीं (वित्त मंत्रालय के पास), इसलिए प्रभाव सीमित; राज्यों की वास्तविक भागीदारी पर प्रश्न।

हरित क्रांति, भूमि सुधार और कृषि संबंध

  • भूमि सुधार — ज़मींदारी उन्मूलन (सबसे सफल), काश्तकारी सुधार, भूमि हदबंदी (कमज़ोर), चकबंदी; पश्चिम बंगाल का "ऑपरेशन बर्गा" (1978) और केरल सफल उदाहरण; पहला संशोधन (1951) और नौवीं अनुसूची।
  • हरित क्रांति (1965-66 से) — HYV बीज, सिंचाई, रासायनिक उर्वरक; पंजाब-हरियाणा-पश्चिमी UP; खाद्य आत्मनिर्भरता। राजनीतिक परिणाम — धनी-मध्यम किसानों का उदय ("bullock capitalists" — रुडॉल्फ़ दंपती), किसान राजनीति (चरण सिंह, महेंद्र सिंह टिकैत, शरद जोशी — "भारत बनाम इंडिया"), क्षेत्रीय असमानता, पर्यावरणीय क्षरण।
  • 2020-21 का किसान आंदोलन — तीन कृषि क़ानूनों के विरुद्ध; नवंबर 2021 में क़ानून वापस — लोकतांत्रिक दबाव का उदाहरण।

उदारीकरण और आर्थिक सुधार

  • 1991 — भुगतान संतुलन संकट; LPG सुधार (नरसिंह राव-मनमोहन सिंह); लाइसेंस राज का अंत, विनिवेश, विदेशी निवेश।
  • राजनीतिक प्रभाव — "reforms by stealth" (रॉब जेनकिंस), राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा, मध्यम वर्ग का विस्तार, कल्याणकारी राज्य का नया रूप (अधिकार-आधारित क़ानून — RTI, MGNREGA, RTE, NFSA; बाद में DBT, JAM)।

3. जाति, धर्म और जातीयता

जाति और राजनीति

  • रजनी कोठारी (Caste in Indian Politics, 1970) — "जाति का राजनीतिकरण" (politicisation of caste): लोकतंत्र ने जाति को नष्ट नहीं, रूपांतरित किया; जाति राजनीतिक संगठन का आधार बनी।
  • रुडॉल्फ़ दंपती — The Modernity of Tradition: जाति संघ (caste associations) आधुनिकीकरण के वाहक।
  • एम.एन. श्रीनिवास — "dominant caste" (संख्या, भूमि, शिक्षा, स्थानीय शक्ति)।
  • मंडल आयोग (1980 रिपोर्ट, 1990 में क्रियान्वयन) — OBC के लिए 27% आरक्षण; "मंडल-मंदिर" राजनीति; क्रिस्टॉफ़ जाफ़रलो — "silent revolution" (उत्तर भारत में निचली जातियों का सत्ता में उदय)।
  • दलित राजनीति — RPI, दलित पैंथर्स (1972), BSP (कांशीराम, 1984) — "बहुजन"; सामाजिक इंजीनियरिंग (2007)।
  • जाति राजनीति के उदय के कारण (UPSC 2023) — क्षेत्रीय आकांक्षाएँ (द्रविड़ आंदोलन, यादव-कुर्मी राजनीति), चुनावी गणित (वोट बैंक, गठबंधन), आरक्षण, हरित क्रांति से आर्थिक सशक्तीकरण; हाल में उप-वर्गीकरण, जाति सर्वेक्षण (बिहार 2023) और "गैर-प्रभावशाली OBC" की राजनीति।

धर्म और राजनीति

  • भारतीय धर्मनिरपेक्षता — राजीव भार्गव: "principled distance"; राज्य धर्मों से समान दूरी नहीं, सिद्धांत-आधारित दूरी/हस्तक्षेप।
  • सांप्रदायिकता — बिपन चंद्र की तीन अवस्थाएँ (सामुदायिक पहचान → हितों का अलगाव → शत्रुता); पॉल ब्रास — "institutionalised riot systems"; आशुतोष वार्ष्णेय — नागरिक जुड़ाव (inter-ethnic civic networks) दंगे रोकते हैं।
  • प्रमुख घटनाएँ — शाह बानो (1985), अयोध्या आंदोलन, CAA (2019) बहस; बहुसंख्यकवाद बनाम धर्मनिरपेक्षता की बहस।

जातीयता (Ethnicity)

  • भाषायी राज्य (1956), पूर्वोत्तर में जातीय आंदोलन (नागा, मिज़ो, बोडो), पंजाब, कश्मीर; छठी अनुसूची और अनु. 371 के विशेष प्रावधान।
  • सापेक्ष वंचना (Relative deprivation — UPSC 2024) — टेड गुर (Why Men Rebel, 1970): अपेक्षाओं और उपलब्धियों के बीच अंतर से असंतोष; जातीय समूह जब स्वयं को दूसरों की तुलना में वंचित मानते हैं तो संघर्ष उभरता है। उदाहरण — असम आंदोलन (1979-85, "बाहरी" प्रवासियों के विरुद्ध), मणिपुर (2023 — मैतेई-कुकी, ST दर्जे की माँग), बोडोलैंड, तेलंगाना आंदोलन, श्रीलंका में तमिल। सीमा — केवल वंचना नहीं, नेतृत्व, संगठन, अवसर संरचना और पहचान-निर्माण भी आवश्यक।

4. दलीय व्यवस्था (Party System)

चरणविशेषताविद्वान की व्याख्या
1952–67एक-दलीय प्रभुत्व — कांग्रेस; विपक्ष "दबाव दल"रजनी कोठारी — "Congress System"; मॉरिस-जोन्स — "one-party dominance"
1967–779 राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें (संविद), "आया राम गया राम"; 1969 कांग्रेस विभाजन"Congress-opposition" से प्रतिस्पर्धी व्यवस्था की ओर
1977–89जनता पार्टी प्रयोग; इंदिरा की वापसी; 1984 में कांग्रेस की बड़ी जीत"Plebiscitary politics"
1989–2014त्रिशंकु संसद, गठबंधन सरकारें (NF, UF, NDA, UPA); क्षेत्रीय दलों का उदययोगेंद्र यादव — "third electoral system"; "federalisation of the party system"
2014 के बादभाजपा का प्रभुत्व — 2014 और 2019 में अपना बहुमत; 2024 में बहुमत से कम, NDA गठबंधन सरकार"fourth party system" (मिलन वैष्णव और जेमी हिंटसन, 2019), "BJP-dominant system"
1989–1999: युगांतकारी परिवर्तन (UPSC 2023)
  • कांग्रेस के प्रभुत्व का अंत — 1989 के बाद कोई दल अपने बल पर बहुमत नहीं (2014 तक)।
  • मंडल — OBC राजनीति का उभार (सपा, राजद, जद); मंदिर — भाजपा का उदय (1984 में 2 सीटों से 1998 में 182); बाज़ार — 1991 के सुधार। (योगेंद्र यादव — "3M": Mandal, Mandir, Market)।
  • गठबंधन राजनीति का संस्थानीकरण — NF (1989), UF (1996), NDA (1998, 1999); साझा न्यूनतम कार्यक्रम।
  • क्षेत्रीय दलों की केंद्रीय भूमिका — TDP, DMK/AIADMK, अकाली दल, TMC; राष्ट्रीय नीति में राज्यों की आवाज़।
  • "Democratic upsurge" — निचली जातियों, ग्रामीण और गरीब मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी (योगेंद्र यादव)।

दबाव समूह (Pressure Groups — UPSC 2024)

  • प्रकार — व्यावसायिक (FICCI, CII, ASSOCHAM), श्रमिक (AITUC, INTUC, BMS), किसान (भारतीय किसान यूनियन, AIKS), पेशेवर (IMA, बार काउंसिल), छात्र, धार्मिक-जातीय, "anomic" (स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन)।
  • भूमिका — हित-अभिव्यक्ति (आल्मंड), नीति में विशेषज्ञता, लॉबिंग, जन-जागरण, न्यायालय में PIL, मीडिया अभियान।
  • भारत में — मायरन वीनर (The Politics of Scarcity, 1962); दल-आधारित संबद्धता (कई श्रमिक संघ दलों के अंग); जाति और समुदाय की भूमिका।
  • आलोचनात्मक मूल्यांकन — पक्ष: बहुलवादी लोकतंत्र, सूचना; विपक्ष: धनी समूहों का असमान प्रभाव (कॉर्पोरेट लॉबिंग), पारदर्शिता का अभाव (भारत में लॉबिंग का कोई पंजीकरण क़ानून नहीं), हिंसक/अवरोधक आंदोलन।

चुनावी व्यवहार और विधायकों की प्रोफ़ाइल

  • मतदान व्यवहार के निर्धारक — जाति, धर्म, वर्ग, नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाएँ ("labharthi" मतदाता), महिला मतदाता का उदय (2019 में लगभग पुरुषों के बराबर मतदान), युवा।
  • CSDS-लोकनीति सर्वे — भारतीय चुनावी व्यवहार अध्ययन का प्रमुख स्रोत।
  • विधायकों की प्रोफ़ाइल — कृषक और निचली जातियों का बढ़ता प्रतिनिधित्व; करोड़पति सांसदों का बढ़ता अनुपात और आपराधिक मामलों वाले प्रत्याशी (ADR रिपोर्टें); महिलाओं का प्रतिनिधित्व 18वीं लोकसभा में लगभग 14%; नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (परिसीमन के बाद 33% आरक्षण)।

5. सामाजिक आंदोलन

नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार आंदोलन

  • आपातकाल (1975-77) के बाद उदय — PUCL (1976, JP की प्रेरणा से), PUDR (1977/1981)।
  • मुद्दे — हिरासत में मौत, AFSPA, UAPA, फ़र्ज़ी मुठभेड़, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता; न्यायालयों में PIL।

महिला आंदोलन

  • "Towards Equality" रिपोर्ट (1974) — महिला आंदोलन की "दूसरी लहर" की प्रेरणा।
  • दहेज-विरोधी आंदोलन (1970-80), मथुरा बलात्कार मामला (1979) → बलात्कार क़ानून संशोधन (1983); शाह बानो; विशाखा (1997); निर्भया (2012) → आपराधिक क़ानून संशोधन 2013।
  • अरक (देसी शराब)-विरोधी आंदोलन (UPSC 2024) — आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले (दुबगुंटा गाँव) से 1992 में शुरू; साक्षरता अभियान की कक्षाओं में महिलाओं ने शराब के कारण घरेलू हिंसा और गरीबी पर चर्चा की; शराब की दुकानों का घेराव, नीलामी रोकना; परिणाम — 1995 में आंध्र प्रदेश में शराबबंदी (1997 में आंशिक रूप से हटाई गई)। महत्व — ग्रामीण, गरीब, दलित महिलाओं का स्वतःस्फूर्त आंदोलन; घरेलू हिंसा को सार्वजनिक राजनीतिक मुद्दा बनाया ("personal is political"); राज्य के राजस्व-हित बनाम महिला कल्याण का प्रश्न।

पर्यावरण आंदोलन

आंदोलनवर्ष/क्षेत्रनेतामुद्दा और परिणाम
चिपको1973, उत्तराखंड (मंडल, रेणी)सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट, गौरा देवीवनों की व्यावसायिक कटाई; हिमालयी क्षेत्र में हरे पेड़ काटने पर 15 वर्ष का प्रतिबंध (1980)
साइलेंट वैली1970-80, केरलKSSP, कवयित्री सुगतकुमारीपनबिजली परियोजना रद्द; 1984 में राष्ट्रीय उद्यान
अप्पिको1983, कर्नाटकपांडुरंग हेगड़ेचिपको का दक्षिणी रूप
नर्मदा बचाओ1985 से, मध्य भारतमेधा पाटकर, बाबा आमटेसरदार सरोवर बाँध, विस्थापन; विश्व बैंक 1993 में हटा; NBA बनाम भारत संघ (2000)
नियमगिरि2000 के दशक, ओडिशाडोंगरिया कोंधवेदांता खनन; ग्राम सभाओं ने अस्वीकार किया (2013)
  • "गरीबों का पर्यावरणवाद" (Environmentalism of the poor — UPSC 2023) — रामचंद्र गुहा और जोन मार्टिनेज़-एलियर: विकासशील देशों में पर्यावरण आंदोलन "जीविका और अस्तित्व" का संघर्ष हैं — वन, जल, भूमि पर निर्भर समुदाय अपने संसाधनों की रक्षा करते हैं; यह पश्चिम के "विलासिता के पर्यावरणवाद" (wilderness/आनंद के लिए संरक्षण) से भिन्न है।
  • पर्यावरण शासन पर प्रभाव (UPSC 2024) — पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 (भोपाल त्रासदी के बाद), वन अधिकार अधिनियम 2006, EIA में जन-सुनवाई, NGT (2010), न्यायालयों के "polluter pays" और "precautionary principle" (वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच 1996), पुनर्वास नीतियाँ (LARR 2013)।

6. Master Summary Table

विषयमुख्य अवधारणाप्रमुख विद्वानउदाहरण
नियोजननेहरूवादी बनाम गांधीवादीमहालनोबिस, श्रीमन्नारायणयोजना आयोग → नीति आयोग
कृषिभूमि सुधार, हरित क्रांतिरुडॉल्फ़ (bullock capitalists)ऑपरेशन बर्गा, किसान आंदोलन 2020-21
जातिजाति का राजनीतिकरणकोठारी, श्रीनिवास, जाफ़रलोमंडल, BSP
धर्मprincipled distance, सांप्रदायिकताभार्गव, बिपन चंद्र, ब्रास, वार्ष्णेयशाह बानो, अयोध्या
जातीयतासापेक्ष वंचनाटेड गुरअसम, मणिपुर, बोडोलैंड
दलीय व्यवस्थाCongress system → गठबंधन → BJP प्रभुत्वकोठारी, यादव, वैष्णव1989-99 का रूपांतरण
दबाव समूहहित-अभिव्यक्तिवीनर, आल्मंडFICCI, BKU
सामाजिक आंदोलनगरीबों का पर्यावरणवाद, महिला आंदोलनगुहा, मार्टिनेज़-एलियरचिपको, NBA, अरक-विरोधी

7. Mind Map

भारतीय राजनीति व्यवहार में
नियोजन
  • नेहरू बनाम गांधी
  • योजना आयोग → नीति आयोग
  • हरित क्रांति, भूमि सुधार
  • 1991 सुधार
पहचान
  • जाति — कोठारी, मंडल
  • धर्म — principled distance
  • जातीयता — सापेक्ष वंचना
दल
  • Congress system
  • 1989-99 — 3M
  • गठबंधन, क्षेत्रीय दल
  • दबाव समूह, मतदान व्यवहार
आंदोलन
  • नागरिक स्वतंत्रता — PUCL
  • महिला — अरक-विरोधी
  • पर्यावरण — चिपको, NBA

8. महत्वपूर्ण One-liners

  • "Congress System"; Caste in Indian Politics — रजनी कोठारी।
  • "Silent revolution" — क्रिस्टॉफ़ जाफ़रलो; "democratic upsurge", "third electoral system" — योगेंद्र यादव।
  • "Principled distance" — राजीव भार्गव; "institutionalised riot systems" — पॉल ब्रास।
  • Ethnic Conflict and Civic Life — आशुतोष वार्ष्णेय; Why Men Rebel — टेड गुर।
  • "Environmentalism of the poor" — गुहा और मार्टिनेज़-एलियर।
  • The Politics of Scarcity — मायरन वीनर; "bullock capitalists" — रुडॉल्फ़ दंपती।
  • नीति आयोग — 1 जनवरी 2015; योजना आयोग — 15 मार्च 1950।
  • चिपको — 1973; नर्मदा बचाओ — 1985; अरक-विरोधी — 1992, नेल्लोर।
  • "भारत बनाम इंडिया" — शरद जोशी (शेतकरी संगठन)।

9. टिप्स एवं ट्रिक्स

"Indian Politics" उत्तरों में अंक कैसे बढ़ाएँ
  • हर उत्तर में एक भारतीय विद्वान (कोठारी, यादव, भार्गव, जाफ़रलो) और एक आँकड़ा/उदाहरण।
  • आंदोलन के प्रश्नों में — कारण, नेतृत्व, रणनीति, परिणाम, सिद्धांत (नया सामाजिक आंदोलन, संसाधन संघटन)।
  • दलीय व्यवस्था में चरण-वार तालिका बहुत प्रभावी।
याद रखने की तरकीब

1989-99 का रूपांतरण — "3M + C + R": Mandal, Mandir, Market + Coalition + Regional parties।

10. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2023 · Paper I · 8(b)

1989–1999 के दशक ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दलीय व्यवस्था में युगांतकारी परिवर्तन किया। इस दौर के प्रमुख राष्ट्रीय रुझान पहचानिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: 1989 का आम चुनाव कांग्रेस प्रणाली के अंत और बहुदलीय, प्रतिस्पर्धी, गठबंधन आधारित व्यवस्था की शुरुआत था।

प्रमुख रुझान: (1) एकदलीय प्रभुत्व का अंत — त्रिशंकु संसदें, छह वर्षों में पाँच प्रधानमंत्री; (2) मंडल राजनीति — OBC दलों का उदय, जाफ़रलो की "silent revolution"; (3) मंदिर राजनीति — भाजपा का 1984 की 2 सीटों से 1998 में 182 सीटों तक विस्तार, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद; (4) बाज़ार — 1991 सुधारों पर व्यापक सहमति; (5) गठबंधन का संस्थानीकरण — NF, UF, NDA; (6) क्षेत्रीय दलों का राष्ट्रीय महत्व — संघवाद का "federalisation"; (7) democratic upsurge — गरीब, ग्रामीण, निचली जातियों की भागीदारी; (8) दलबदल और अस्थिरता — 1997-98 में सरकारों का गिरना।

निष्कर्ष: इस दशक ने भारतीय लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और संघीय बनाया, यद्यपि अस्थिरता भी आई; 2014 के बाद नई प्रभुत्ववादी व्यवस्था भी इन्हीं सामाजिक परिवर्तनों पर टिकी है।

Q2UPSC 2024 · Paper I · 8(b)

"सापेक्ष वंचना जातीय संघर्ष का प्रमुख स्रोत है।" प्रासंगिक उदाहरणों सहित इस कथन की व्याख्या कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: सापेक्ष वंचना वह मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसमें कोई समूह अपनी स्थिति को दूसरे समूहों या अपनी अपेक्षाओं की तुलना में कमतर मानता है (टेड गुर, स्टॉफ़र)।

तंत्र: अपेक्षा और उपलब्धि का अंतर → निराशा → सामूहिक पहचान → संघर्ष; शिक्षा और विकास अपेक्षाएँ बढ़ाते हैं ("revolution of rising expectations")।

उदाहरण: असम आंदोलन (प्रवासियों से नौकरियाँ-भूमि छिनने का भय); मणिपुर 2023 (ST दर्जे और भूमि अधिकार पर मैतेई-कुकी तनाव); तेलंगाना (जल, नौकरी, धन — "नीलू, निधुलु, नियामकालु"); पंजाब 1980 (नदी जल, चंडीगढ़); श्रीलंका (सिंहली भाषा नीति से तमिल वंचना)।

सीमाएँ: केवल वंचना पर्याप्त नहीं — नेतृत्व, संगठन, राजनीतिक अवसर, अभिजनों द्वारा पहचान का उपयोग (पॉल ब्रास का "instrumentalist" दृष्टिकोण), और राज्य की प्रतिक्रिया भी निर्णायक।

निष्कर्ष: समावेशी विकास, संघीय समायोजन (छठी अनुसूची, विशेष प्रावधान) और संवाद सापेक्ष वंचना को संघर्ष बनने से रोक सकते हैं।

Q3UPSC 2024 · Paper I · 7(c)

सरकार की निर्णय-प्रक्रिया में दबाव समूहों की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: दबाव समूह संगठित हित-समूह हैं जो सत्ता प्राप्त किए बिना सरकारी नीतियों को प्रभावित करना चाहते हैं — "invisible government"।

भूमिका: (1) हित-अभिव्यक्ति और सूचना — उद्योग संघों की बजट-पूर्व सिफ़ारिशें; (2) विशेषज्ञता — IMA स्वास्थ्य नीति पर; (3) जन-जागरण और आंदोलन — RTI के लिए MKSS; (4) न्यायिक मार्ग — PIL; (5) संसदीय समितियों के समक्ष प्रस्तुतीकरण।

आलोचना: संसाधनों की असमानता — कॉर्पोरेट समूहों का अधिक प्रभाव; पारदर्शिता का अभाव (लॉबिंग पंजीकरण क़ानून नहीं); जातिगत-धार्मिक समूहों द्वारा संकीर्ण माँगें; हिंसक आंदोलन (रेल रोको); दलों के अंग होने से स्वायत्तता कम।

सकारात्मक मूल्यांकन: बहुलवादी लोकतंत्र के लिए आवश्यक; चुनावों के बीच जवाबदेही का साधन; किसान आंदोलन 2020-21 ने नीति बदलवाई।

निष्कर्ष: लॉबिंग नियमन, सार्वजनिक परामर्श की अनिवार्यता (पूर्व-विधायी परामर्श नीति 2014) और नागरिक समाज की स्वायत्तता से दबाव समूहों को लोकतंत्र का सहायक बनाया जा सकता है।

Q4UPSC 2024 · Paper I · 8(a)

भारत में पर्यावरणीय शासन को आकार देने में पर्यावरण आंदोलनों की भूमिका की चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: भारत में पर्यावरण आंदोलन "गरीबों के पर्यावरणवाद" का उदाहरण हैं — वन, जल, भूमि पर निर्भर समुदायों का अस्तित्व-संघर्ष।

प्रमुख आंदोलन और प्रभाव: चिपको → वन नीति 1988 (स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता), हिमालय में कटाई प्रतिबंध; साइलेंट वैली → परियोजना रद्द, राष्ट्रीय उद्यान; NBA → पुनर्वास पर बहस, विश्व बैंक का हटना, विस्थापन नीतियाँ; भोपाल गैस त्रासदी पर अभियान → पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986; नियमगिरि → ग्राम सभा की सहमति का सिद्धांत; वनाधिकार आंदोलन → FRA 2006।

संस्थागत परिवर्तन: EIA अधिसूचना और जन-सुनवाई, NGT (2010), न्यायिक सिद्धांत — polluter pays, precautionary principle, public trust doctrine (एम.सी. मेहता बनाम कमलनाथ 1997)।

सीमाएँ: विकास बनाम पर्यावरण का तनाव, EIA को कमज़ोर करने के आरोप, आंदोलनकारियों पर दमन, शहरी पर्यावरण मुद्दों (वायु प्रदूषण) पर सीमित जन-आंदोलन।

निष्कर्ष: पर्यावरण आंदोलनों ने भारत में पर्यावरणीय शासन को अधिकार-आधारित, सहभागी और न्यायिक रूप से सजग बनाया; जलवायु परिवर्तन के दौर में "just transition" के लिए यह परंपरा और महत्वपूर्ण होगी।

Q5UPSC 2023 · Paper I · 7(c)

डॉ. आंबेडकर का आह्वान "शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो" दलित आंदोलन को नागरिक स्वतंत्रता की प्राप्ति की रणनीति देता है। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

भूमिका: यह त्रिसूत्री आह्वान दलित मुक्ति की समग्र रणनीति है — चेतना, संघर्ष और संस्थागत शक्ति।

शिक्षित बनो: ज्ञान आत्म-सम्मान और अधिकारों की चेतना देता है; पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी (1945), सिद्धार्थ कॉलेज; आरक्षण से शिक्षा और नौकरी।

संघर्ष करो (Agitate): महाड़ सत्याग्रह, कालाराम मंदिर प्रवेश, मनुस्मृति दहन — नागरिक अधिकारों (सार्वजनिक जल, मंदिर, सड़क) के लिए प्रत्यक्ष कार्रवाई; बाद में दलित पैंथर्स, अत्याचार-निवारण अधिनियम (1989) के लिए अभियान।

संगठित हो: ILP, SCF, RPI; बाद में BSP का "बहुजन" संगठन; दलित नागरिक समाज संगठन।

नागरिक स्वतंत्रता से संबंध: अनु. 17, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989; आंबेडकर का "सामाजिक लोकतंत्र" — नागरिक स्वतंत्रता सामाजिक समानता के बिना अधूरी।

निष्कर्ष: यह रणनीति आज भी प्रासंगिक है — शिक्षा में असमानता, अत्याचार और प्रतिनिधित्व के प्रश्न दलित आंदोलन को नए रूपों में सक्रिय रखते हैं।

Q6UPSC 2024 · Paper I · 5(e) · 10 अंक

अरक-विरोधी आंदोलन में महिलाओं की भूमिका — टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

भूमिका: 1992 में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले के गाँवों से शुरू हुआ यह आंदोलन ग्रामीण महिलाओं का स्वतःस्फूर्त जन-संघर्ष था।

भूमिका: साक्षरता अभियान (अक्षर दीपम) की कक्षाओं में शराब से होने वाली घरेलू हिंसा, कर्ज़ और गरीबी पर संवाद; महिलाओं ने शराब की दुकानें बंद करवाईं, नीलामी का बहिष्कार किया, शराब के पैकेट नष्ट किए; राजनीतिक दलों पर दबाव।

परिणाम और महत्व: 1995 में राज्य में मद्य-निषेध (1997 में आंशिक रूप से वापस); घरेलू मुद्दा सार्वजनिक राजनीति का विषय बना; दलित और गरीब महिलाओं का नेतृत्व; राज्य के राजस्व-हित बनाम महिला कल्याण का प्रश्न उभरा।

निष्कर्ष: यह "personal is political" का भारतीय उदाहरण है; बाद में बिहार (2016) जैसे राज्यों की शराबबंदी नीतियों पर बहस में इसकी विरासत दिखती है।

11. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • नियोजन — नेहरूवादी (महालनोबिस, सार्वजनिक क्षेत्र) बनाम गांधीवादी (ग्राम स्वराज); योजना आयोग (1950) → नीति आयोग (2015); भूमि सुधार, हरित क्रांति, 1991 सुधार।
  • जाति — कोठारी (राजनीतिकरण), श्रीनिवास (प्रभु जाति), मंडल, जाफ़रलो; धर्म — principled distance, ब्रास, वार्ष्णेय; जातीयता — सापेक्ष वंचना (गुर)।
  • दलीय व्यवस्था — Congress system → 1967 → 1989-99 (3M, गठबंधन, क्षेत्रीय दल) → 2014 के बाद भाजपा प्रभुत्व → 2024 गठबंधन।
  • दबाव समूह — प्रकार, भूमिका, असमान प्रभाव; मतदान व्यवहार, विधायकों की प्रोफ़ाइल।
  • आंदोलन — PUCL; महिला (Towards Equality, मथुरा, अरक-विरोधी); पर्यावरण (चिपको, साइलेंट वैली, NBA, नियमगिरि); गरीबों का पर्यावरणवाद।