UPSC Mains · Public Administration · Paper I · अध्याय 2

मानव संबंध, व्यवहारवादी एवं तंत्र उपागम

Human Relations, Behavioural and Systems Approaches

एल्टन मेयो, साइमन, बर्नार्ड, मैकग्रेगर, मैस्लो, हर्ज़बर्ग, आर्गिरिस, लिकर्ट; नेतृत्व, संचार, अभिप्रेरणा और निर्णय-निर्माण के सिद्धांत।

Paper I 20 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

शास्त्रीय सिद्धांतों ने संगठन को "मशीन" की तरह देखा था। इस अध्याय के उपागमों ने उसमें "मनुष्य" को वापस रखा:

  • मानव संबंध उपागम: एल्टन मेयो और हॉथॉर्न प्रयोग; मैरी पार्कर फ़ॉलेट।
  • व्यवहारवादी उपागम: चेस्टर बर्नार्ड और हर्बर्ट साइमन; निर्णय-निर्माण।
  • अभिप्रेरणा: मास्लो, हर्ज़बर्ग, मैकग्रेगर, आर्गिरिस, लिकर्ट, एल्डरफ़र (ERG), व्रूम।
  • प्रशासनिक व्यवहार: नेतृत्व, संचार, अनौपचारिक संगठन, संघर्ष।
  • तंत्र और आकस्मिकता उपागम।

2025 में बर्नार्ड का निर्णय-निर्माण का कथन, साइमन की "कहावतें", फ़ॉलेट का सामाजिक-मनोवैज्ञानिक उपागम, संघर्ष की स्थितियों में नेतृत्व, और नेतृत्व की जवाबदेही पूछी गई। 2024 में अनौपचारिक समूह, "ग्रेपवाइन" (अनौपचारिक संचार), मैकग्रेगर के X और Y सिद्धांत, ERG सिद्धांत, और वैज्ञानिक प्रबंधन बनाम मानव संबंध आए।

2. मानव संबंध उपागम

एल्टन मेयो और हॉथॉर्न प्रयोग (1924-32)

चरणअवधिनिष्कर्ष
प्रकाश प्रयोग (Illumination)1924-27रोशनी बढ़ाने या घटाने, दोनों से उत्पादन बढ़ा, यानी भौतिक दशाओं से अधिक मनोवैज्ञानिक कारक प्रभावी थे
रिले असेंबली कक्ष1927-32छोटे समूह, ध्यान और सहभागिता से मनोबल और उत्पादकता बढ़ी ("हॉथॉर्न प्रभाव")
साक्षात्कार कार्यक्रम1928-30लगभग 21,000 श्रमिकों से बातचीत; भावनाओं और शिकायतों की अभिव्यक्ति का महत्व
बैंक वायरिंग अवलोकन कक्ष1931-32अनौपचारिक समूह अपने "मानदंड" (उत्पादन की सीमा) तय करता है और उनका पालन करवाता है
  • स्रोत: वेस्टर्न इलेक्ट्रिक कंपनी, शिकागो; मेयो ("The Human Problems of an Industrial Civilization", 1933) और रोएथलिसबर्जर तथा डिक्सन ("Management and the Worker", 1939)।
  • निष्कर्ष: संगठन एक "सामाजिक तंत्र" है; श्रमिक "सामाजिक मानव" है, केवल "आर्थिक मानव" नहीं; अनौपचारिक समूह, मनोबल, सहभागी पर्यवेक्षण और संचार उत्पादकता के प्रमुख कारक हैं।
  • आलोचना: प्रयोगों की वैज्ञानिक पद्धति पर प्रश्न; "प्रबंधन-समर्थक" होना (संघर्ष को "समायोजन" से हल करने की प्रवृत्ति; ट्रेड यूनियनों की उपेक्षा); आर्थिक प्रेरणा को कम आँकना; और "प्रसन्न श्रमिक उत्पादक श्रमिक है" जैसे अति-सरलीकरण।

मैरी पार्कर फ़ॉलेट: सामाजिक-मनोवैज्ञानिक उपागम की अग्रदूत (UPSC 2025)

  • कृतियाँ: "The New State" (1918), "Creative Experience" (1924), और मरणोपरांत "Dynamic Administration" (1941, मेटकाफ़ और उर्विक द्वारा संपादित)।
  • रचनात्मक संघर्ष: संघर्ष को "विनाशकारी" नहीं, "भिन्नता" मानना। संघर्ष-समाधान के तीन तरीक़े: प्रभुत्व (एक पक्ष जीतता है), समझौता (दोनों कुछ छोड़ते हैं) और एकीकरण (integration), जिसमें ऐसा समाधान खोजा जाता है जिसमें दोनों की वास्तविक इच्छाएँ पूरी हों। उदाहरण: पुस्तकालय में एक व्यक्ति खिड़की खोलना चाहता था और दूसरा बंद रखना; हल निकला कि बगल के खाली कमरे की खिड़की खोल दी जाए।
  • शक्ति: "दूसरों पर शक्ति" (power over) के स्थान पर "दूसरों के साथ शक्ति" (power with), यानी सह-क्रियात्मक शक्ति।
  • "स्थिति का नियम" (law of the situation): आदेश व्यक्ति की इच्छा से नहीं, स्थिति की माँग से दिए जाएँ, यानी "आदेश का अवैयक्तिकरण" (depersonalising orders)। इससे आदेश की स्वीकार्यता बढ़ती है।
  • वृत्ताकार प्रतिक्रिया (circular response): व्यवहार परस्पर-प्रभावी होता है।
  • समन्वय के चार सिद्धांत: प्रत्यक्ष संपर्क, प्रारंभिक चरण में समन्वय, पारस्परिक संबंध, और समन्वय एक सतत प्रक्रिया।
  • अग्रदूत क्यों: उन्होंने हॉथॉर्न प्रयोगों से पहले ही संगठन में मनोविज्ञान, समूह और संघर्ष की भूमिका पर लिखा। वे शास्त्रीय और मानव संबंध उपागमों के बीच "सेतु" थीं, और सहभागी प्रबंधन, बातचीत (negotiation; "जीत-जीत") तथा नेटवर्क-शासन की आधुनिक धारणाएँ उन्हीं से प्रेरित हैं। पीटर ड्रकर ने उन्हें "प्रबंधन की पैगंबर" कहा।
  • आलोचना: एकीकरण हमेशा संभव नहीं (शक्ति की असमानता); विचार आदर्शवादी।

वैज्ञानिक प्रबंधन बनाम मानव संबंध (UPSC 2024)

आधारवैज्ञानिक प्रबंधन (टेलर)मानव संबंध (मेयो)
मनुष्य की धारणाआर्थिक मानव; मशीन का पुर्ज़ासामाजिक मानव
दक्षता का स्रोतकार्य का वैज्ञानिक विश्लेषण, मानकीकरण, प्रोत्साहन-मज़दूरीमनोबल, समूह, संचार, सहभागिता
केंद्रऔपचारिक संगठन, कार्यअनौपचारिक संगठन, व्यक्ति और समूह
पर्यवेक्षणनियंत्रण-आधारित (कार्यात्मक फ़ोरमैनशिप)सहानुभूतिपूर्ण और सहभागी
प्रेरणाधनसामाजिक स्वीकृति, पहचान
पद्धतिसमय और गति अध्ययनप्रयोग, साक्षात्कार, अवलोकन
  • समानता: दोनों का अंतिम लक्ष्य दक्षता और उत्पादकता है; दोनों "प्रबंधन-केंद्रित" हैं; और दोनों ने श्रमिक-प्रबंधक सहयोग की बात की (टेलर की "मानसिक क्रांति")।
  • निष्कर्ष: दोनों "विरोधी" नहीं, बल्कि "पूरक" हैं: एक ने "कार्य" को और दूसरे ने "कार्यकर्ता" को समझाया। आधुनिक प्रबंधन (कुल गुणवत्ता प्रबंधन, लीन प्रबंधन) दोनों का संश्लेषण है।

3. व्यवहारवादी उपागम: बर्नार्ड और साइमन

चेस्टर बर्नार्ड ("The Functions of the Executive", 1938)

  • संगठन: "दो या अधिक व्यक्तियों की सचेत रूप से समन्वित गतिविधियों का तंत्र", यानी एक "सहकारी तंत्र"।
  • अनौपचारिक संगठन: हर औपचारिक संगठन के भीतर अनौपचारिक संगठन होता है, जो संचार, एकजुटता और व्यक्तिगत गरिमा बनाए रखता है।
  • सत्ता का स्वीकृति सिद्धांत: सत्ता ऊपर से नहीं आती, बल्कि आदेश पाने वाले की "स्वीकृति" पर निर्भर करती है। "उदासीनता का क्षेत्र" (zone of indifference) वह दायरा है जिसमें आदेश बिना सवाल माने जाते हैं।
  • प्रलोभन-योगदान संतुलन: कर्मचारी तब तक योगदान देता है जब तक उसे मिलने वाले प्रलोभन (भौतिक और गैर-भौतिक) उसके योगदान के बराबर या अधिक हों।
  • कार्यकारी के कार्य: संचार-तंत्र बनाए रखना, आवश्यक सेवाएँ प्राप्त करना, और उद्देश्य निर्धारित करना।

"निर्णय-निर्माण की सूक्ष्म कला वह निर्णय न लेना है जो दूसरे ले सकते हैं" (UPSC 2025)

  • स्रोत: बर्नार्ड के अनुसार कार्यकारी निर्णय की सूक्ष्म कला इसमें है: जो प्रश्न अभी प्रासंगिक नहीं उन पर निर्णय न लेना, समय से पहले निर्णय न लेना, ऐसे निर्णय न लेना जिन्हें प्रभावी नहीं बनाया जा सकता, और वे निर्णय न लेना जो दूसरों को लेने चाहिए।
  • अर्थ: यह प्रत्यायोजन (delegation) और सत्ता के विकेंद्रीकरण का सिद्धांत है। शीर्ष अधिकारी का समय और ध्यान "सामरिक" निर्णयों के लिए है, "दैनिक" निर्णयों के लिए नहीं।
  • लाभ: निर्णय सूचना के निकट लिए जाते हैं (क्षेत्रीय कार्यालय); अधीनस्थों का सशक्तीकरण और प्रेरणा; निर्णयों की गति; और नेतृत्व-क्षमता का विकास।
  • भारतीय संदर्भ: अत्यधिक केंद्रीकरण और "फ़ाइल ऊपर भेजने" की प्रवृत्ति; द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने निर्णय के स्तर घटाने और प्रत्यायोजन की संस्तुति की; "डेस्क अधिकारी" प्रणाली।
  • सीमा: प्रत्यायोजन के साथ जवाबदेही और निगरानी आवश्यक है; अंतिम उत्तरदायित्व शीर्ष का रहता है।

हर्बर्ट साइमन

  • कृतियाँ: "The Proverbs of Administration" (Public Administration Review, 1946) और "Administrative Behavior" (1947)। उन्हें 1978 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला।
  • निर्णय-निर्माण: प्रशासन का सार "निर्णय-निर्माण" है। निर्णय के तीन चरण: बुद्धि (समस्या पहचानना), रूपांकन (विकल्प खोजना) और चयन।
  • सीमित तर्कसंगतता (bounded rationality): सूचना, समय और संज्ञानात्मक क्षमता सीमित होती है, इसलिए "आर्थिक मानव" (जो अधिकतम लाभ चुनता है) के स्थान पर "प्रशासनिक मानव" होता है, जो "संतोषजनक" (satisficing) विकल्प चुनता है।
  • तथ्य और मूल्य: निर्णयों में "तथ्य" (अनुभवजन्य, परीक्षण-योग्य) और "मूल्य" (नैतिक) दोनों होते हैं; प्रशासनिक विज्ञान को तथ्यात्मक पक्ष पर केंद्रित होना चाहिए (तार्किक प्रत्यक्षवाद)।

प्रशासन के सिद्धांतों को "कहावतें" कहना (UPSC 2025)

  • साइमन का तर्क: कहावतों की तरह प्रशासन के "सिद्धांत" भी जोड़ों में आते हैं और एक-दूसरे के विपरीत होते हैं ("देखो फिर कूदो" बनाम "देर करने वाला चूक जाता है")। उदाहरण:
    • नियंत्रण का विस्तार (span of control) छोटा रखो, यानी अधिक स्तर बनेंगे; जबकि पद-सोपान के स्तर कम रखो, यानी विस्तार बढ़ाना पड़ेगा।
    • विशेषज्ञता बढ़ाओ, जबकि आदेश की एकता बनाए रखो; विशेषज्ञ अनेक अधिकारियों से निर्देश लेता है।
    • विभागीकरण के चार आधार (उद्देश्य, प्रक्रिया, ग्राहक, स्थान) परस्पर-विरोधी हैं, और सिद्धांत यह नहीं बताते कि किस स्थिति में कौन-सा आधार चुनें।
  • औचित्य: सिद्धांत अनुभवजन्य परीक्षण पर आधारित नहीं थे; वे "सार्वभौमिक" होने का दावा करते थे पर संदर्भ की उपेक्षा करते थे। इस आलोचना ने व्यवहारवादी और आकस्मिकता (contingency) उपागमों का मार्ग खोला।
  • सीमा: सिद्धांत व्यावहारिक "दिशानिर्देश" के रूप में उपयोगी रहे; उर्विक ने उत्तर दिया कि सिद्धांत संदर्भ के साथ प्रयुक्त होते हैं। साइमन का "तथ्य-मूल्य" विभाजन भी नए लोक प्रशासन की आलोचना का विषय बना।
  • निष्कर्ष: साइमन की आलोचना काफ़ी हद तक उचित थी। उसने लोक प्रशासन को "सिद्धांतों" से "अनुभवजन्य विज्ञान" की ओर मोड़ा, यद्यपि सिद्धांतों की व्यावहारिक उपयोगिता बनी रही।
  • निर्णय के अन्य मॉडल: चार्ल्स लिंडब्लॉम का वृद्धिशील मॉडल ("The Science of 'Muddling Through'", 1959), अमिताई एट्ज़ियोनी का मिश्रित-अवलोकन (mixed scanning, 1967) और येहेज़केल ड्रोर का मानक-इष्टतम मॉडल। विस्तार लोक नीति अध्याय में है।

4. अभिप्रेरणा के सिद्धांत

सिद्धांतविचारक और वर्षमूल विचार
आवश्यकताओं का पदानुक्रमअब्राहम मास्लो (1943)पाँच स्तर: शारीरिक, सुरक्षा, सामाजिक, सम्मान, आत्म-सिद्धि; निचली आवश्यकता पूरी होने पर ही ऊपरी प्रेरक बनती है
दो-कारक सिद्धांतफ़्रेडरिक हर्ज़बर्ग (1959)स्वास्थ्य-कारक (hygiene: वेतन, नीति, दशाएँ) असंतोष रोकते हैं; प्रेरक (उपलब्धि, पहचान, कार्य स्वयं, उत्तरदायित्व, विकास) संतोष और प्रेरणा देते हैं
X और Y सिद्धांतडगलस मैकग्रेगर (1960)नीचे देखें
अपरिपक्वता-परिपक्वताक्रिस आर्गिरिस (1957)औपचारिक संगठन व्यक्ति को "अपरिपक्व" बनाए रखता है (निर्भर, निष्क्रिय); व्यक्ति और संगठन में संघर्ष; उपाय: कार्य-विस्तार, सहभागिता
चार प्रबंधन प्रणालियाँरेन्सिस लिकर्ट (1961, 1967)शोषक-सत्तावादी, परोपकारी-सत्तावादी, परामर्शी, सहभागी-समूह; "प्रणाली 4" सबसे प्रभावी; "लिंकिंग पिन"
ERGक्लेटन एल्डरफ़र (1969)नीचे देखें
प्रत्याशा सिद्धांतविक्टर व्रूम (1964)प्रेरणा = प्रत्याशा × साधनता × मूल्य (valence)
उपलब्धि-आवश्यकताडेविड मैक्लेलैंडउपलब्धि, संबद्धता और शक्ति की आवश्यकता
Z सिद्धांतविलियम ओची (1981)जापानी प्रबंधन: दीर्घकालिक रोज़गार, सामूहिक निर्णय

मैकग्रेगर के X और Y सिद्धांत (UPSC 2024)

  • कृति: "The Human Side of Enterprise" (1960)।
  • X सिद्धांत (परंपरागत धारणा): सामान्य व्यक्ति स्वभाव से काम से बचता है; उसे दबाव, नियंत्रण और दंड से काम करवाना पड़ता है; वह उत्तरदायित्व से बचता है और सुरक्षा चाहता है। परिणाम: केंद्रीकरण, कठोर पर्यवेक्षण, "गाजर और डंडा"।
  • Y सिद्धांत (आधुनिक धारणा): काम खेल या आराम जितना स्वाभाविक है; प्रतिबद्ध व्यक्ति आत्म-नियंत्रण करता है; उचित दशाओं में व्यक्ति उत्तरदायित्व स्वीकार करता है और खोजता भी है; रचनात्मकता व्यापक रूप से वितरित है। परिणाम: विकेंद्रीकरण, सहभागिता, "उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन" (MBO), कार्य-विस्तार।
  • मास्लो से संबंध: X सिद्धांत निचली आवश्यकताओं पर केंद्रित है, Y सिद्धांत ऊपरी (सम्मान, आत्म-सिद्धि) पर।
  • मैकग्रेगर का मत: प्रबंधक की "धारणा" ही उसका व्यवहार तय करती है, और वह "स्व-पूर्ण भविष्यवाणी" (self-fulfilling prophecy) बन जाती है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र में: भारत में X-प्रकार की नियम-आधारित नौकरशाही से Y-प्रकार के उपायों (मिशन कर्मयोगी, 360-डिग्री मूल्यांकन, नवाचार पुरस्कार) की ओर धीमा बदलाव।
  • आलोचना: द्वैत अति-सरल है; आकस्मिकता सिद्धांत के अनुसार उचित शैली स्थिति और कर्मचारी पर निर्भर करती है (जॉन मोर्स और जे.डब्ल्यू. लॉर्श का "आकस्मिकता सिद्धांत", 1970)।

ERG सिद्धांत: मास्लो का पुनर्संकल्पन (UPSC 2024)

  • तीन आवश्यकताएँ: अस्तित्व (Existence; मास्लो की शारीरिक और भौतिक सुरक्षा), संबंधितता (Relatedness; सामाजिक और बाहरी सम्मान) और विकास (Growth; आंतरिक सम्मान और आत्म-सिद्धि)।
  • मास्लो से भिन्नताएँ:
    • पाँच के स्थान पर तीन आवश्यकताएँ।
    • कठोर पदानुक्रम नहीं; अनेक आवश्यकताएँ एक साथ सक्रिय हो सकती हैं।
    • कुंठा-प्रतिगमन (frustration-regression): ऊपरी आवश्यकता पूरी न होने पर व्यक्ति निचली आवश्यकता पर अधिक ज़ोर देता है, जैसे विकास के अवसर न मिलने पर वेतन की माँग बढ़ाना।
    • व्यक्तियों और संस्कृतियों के अनुसार क्रम भिन्न हो सकता है।
  • महत्व: अनुभवजन्य रूप से अधिक समर्थित और प्रबंधकों के लिए व्यावहारिक: विकास के अवसर न देने पर "वेतन-असंतोष" बढ़ता है।

5. नेतृत्व, संचार, अनौपचारिक संगठन और संघर्ष

  • नेतृत्व के सिद्धांत:
    • गुण सिद्धांत ("महान व्यक्ति")।
    • व्यवहार सिद्धांत: ओहायो (आरंभ-संरचना और विचारशीलता), मिशिगन (कार्य-केंद्रित बनाम कर्मचारी-केंद्रित), ब्लेक-माउटन का प्रबंधकीय ग्रिड (1964)।
    • आकस्मिकता सिद्धांत: फ़ीडलर (1967), हर्सी-ब्लैंचर्ड का स्थितिजन्य नेतृत्व, हाउस का पथ-लक्ष्य सिद्धांत (1971)।
    • रूपांतरणकारी नेतृत्व (जेम्स मैकग्रेगर बर्न्स, 1978; बर्नार्ड बास, 1985) बनाम लेन-देन आधारित नेतृत्व।
    • सेवक नेतृत्व (रॉबर्ट ग्रीनलीफ़, 1970)।

संघर्ष की स्थितियों में नेतृत्व (UPSC 2025)

  • कथन का अर्थ: संगठन में संघर्ष के समय नेतृत्व प्रायः आक्रामक व्यक्तियों के पास चला जाता है और भावनात्मक रूप से परिपक्व लोग पृष्ठभूमि में चले जाते हैं।
  • क्यों होता है: संकट में "तत्काल निर्णय" और "शक्ति-प्रदर्शन" को नेतृत्व समझ लिया जाता है; आक्रामक व्यक्ति दृश्यमान और मुखर होते हैं; समूह-मनोविज्ञान में भय और असुरक्षा "मज़बूत" व्यक्ति की ओर खींचते हैं; और संगठनात्मक संस्कृति प्रतिस्पर्धी हो तो आक्रामकता को पुरस्कार मिलता है।
  • दुष्परिणाम: संघर्ष का बढ़ना, "प्रभुत्व" से समाधान (फ़ॉलेट), मनोबल का गिरना और दीर्घकालिक विश्वास का क्षरण।
  • भावनात्मक परिपक्वता का महत्व: डैनियल गोलमैन (1995) की भावनात्मक बुद्धि (आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, सहानुभूति, सामाजिक कौशल); थॉमस-किलमैन के संघर्ष-शैली मॉडल में "सहयोग" (collaborating) की शैली; और फ़ॉलेट का "एकीकरण"।
  • सुधार: संघर्ष-समाधान का प्रशिक्षण, मध्यस्थता की संस्थागत व्यवस्था, सहभागी निर्णय, और नेतृत्व-चयन में भावनात्मक बुद्धि का मूल्यांकन।
  • निष्कर्ष: यह प्रवृत्ति वास्तविक है, पर अल्पकालिक। दीर्घकाल में प्रभावी नेतृत्व भावनात्मक परिपक्वता से ही आता है।

नेतृत्व: श्रेय के साथ विफलता का उत्तरदायित्व भी (UPSC 2025)

  • सिद्धांत: "ज़िम्मेदारी यहीं रुकती है" (The buck stops here; अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन); नैतिक नेतृत्व; और मंत्रिस्तरीय उत्तरदायित्व।
  • महत्व: विश्वास और विश्वसनीयता, सीखने की संस्कृति (गलतियों को छिपाने के बजाय उनसे सीखना), अधीनस्थों को सुरक्षा (जिससे वे नवाचार का जोखिम लें), और "दोष-संस्कृति" (blame culture) से बचाव।
  • उदाहरण: 1956 में रेल दुर्घटना के बाद लाल बहादुर शास्त्री का रेल मंत्री पद से त्यागपत्र, जिसे नैतिक उत्तरदायित्व का उदाहरण माना जाता है।
  • प्रशासन में बाधाएँ: "फ़ाइल-आधारित" सामूहिक निर्णय में उत्तरदायित्व का धुंधलापन, अधीनस्थों पर दोष डालना, और नीति-विफलताओं में राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व के बीच दोषारोपण।
  • उपाय: स्पष्ट भूमिका-निर्धारण, परिणाम-आधारित मूल्यांकन, "ईमानदार गलतियों" के लिए संरक्षण (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 2018 के संशोधन, धारा 17A), और लोकपाल तथा सामाजिक अंकेक्षण।

अनौपचारिक संगठन और "ग्रेपवाइन" (UPSC 2024)

  • "औपचारिक संगठन अनौपचारिक समूहों से बने होते हैं": हॉथॉर्न (बैंक वायरिंग कक्ष) और बर्नार्ड ने दिखाया कि औपचारिक ढाँचे के भीतर मित्रता, रुचि और स्थान के आधार पर अनौपचारिक समूह बनते हैं।
    • कार्य: सामाजिक संतोष, संचार, समूह-मानदंड, नवाचार, और औपचारिक कठोरता में लचीलापन।
    • दुष्प्रभाव: परिवर्तन का प्रतिरोध, उत्पादन-सीमा, गुटबाज़ी और अफ़वाहें।
    • प्रबंधन: अनौपचारिक नेताओं की पहचान, समूह-मानदंडों को संगठन के लक्ष्यों से जोड़ना।
  • "ग्रेपवाइन एक आवश्यक बुराई है": ग्रेपवाइन यानी अनौपचारिक संचार का जाल। कीथ डेविस ने इसके चार प्रकार बताए: एकल-धारा (single strand), गपशप (gossip), संभाव्यता (probability) और गुच्छ (cluster), जिनमें गुच्छ सबसे सामान्य है। डेविस के अध्ययनों में इसकी सूचनाएँ बड़े अंश तक सटीक पाई गईं।
    • आवश्यक: तेज़, लचीला, कर्मचारियों की भावनाओं का "बैरोमीटर", औपचारिक संचार की कमियों की पूर्ति, और सामाजिक बंधन।
    • बुराई: अफ़वाहें, विकृति, अपूर्ण सूचना, ग़लतफ़हमी और गोपनीयता का उल्लंघन।
    • प्रबंधन: औपचारिक संचार को खुला, समयबद्ध और पारदर्शी बनाना; ग्रेपवाइन को "सुनना" और उसका उपयोग करना। इसे दबाना नहीं, बल्कि प्रबंधित करना चाहिए।

6. तंत्र और आकस्मिकता उपागम

  • तंत्र उपागम: संगठन एक "खुला तंत्र" है, जिसमें निवेश, प्रक्रिया, उत्पाद, प्रतिपुष्टि और पर्यावरण होते हैं (कैट्ज़ और कान, "The Social Psychology of Organizations", 1966)। एन्ट्रॉपी, यानी बंद तंत्र का क्षय, और "नकारात्मक एन्ट्रॉपी" (पर्यावरण से ऊर्जा लेकर टिके रहना) इसकी प्रमुख अवधारणाएँ हैं।
  • आकस्मिकता (contingency) उपागम: "कोई एक सर्वोत्तम तरीक़ा नहीं है"; संगठन की संरचना पर्यावरण और तकनीक पर निर्भर करती है।
    • बर्न्स और स्टॉकर (1961): स्थिर पर्यावरण में "यांत्रिक" (mechanistic) और गतिशील पर्यावरण में "जैविक" (organic) संगठन।
    • जोन वुडवर्ड: तकनीक और संरचना का संबंध।
    • लॉरेंस और लॉर्श (1967): विभेदीकरण और एकीकरण।
  • सामाजिक-तकनीकी तंत्र (टैविस्टॉक संस्थान): तकनीक और सामाजिक व्यवस्था का संयुक्त अनुकूलन।

7. Master Summary Table

विचारककृति और वर्षमुख्य अवधारणा
मेयोहॉथॉर्न 1924-32; 1933सामाजिक मानव, अनौपचारिक समूह
फ़ॉलेट1918, 1924; Dynamic Administration 1941एकीकरण, "शक्ति साथ", स्थिति का नियम
बर्नार्डFunctions of the Executive 1938स्वीकृति सिद्धांत, उदासीनता का क्षेत्र
साइमन1946, 1947; नोबेल 1978सीमित तर्कसंगतता, "कहावतें"
मास्लो1943पाँच-स्तरीय पदानुक्रम
हर्ज़बर्ग1959स्वास्थ्य-कारक बनाम प्रेरक
मैकग्रेगर1960X और Y सिद्धांत
आर्गिरिस1957अपरिपक्वता-परिपक्वता
लिकर्ट1961, 1967प्रणाली 4; लिंकिंग पिन
एल्डरफ़र1969ERG; कुंठा-प्रतिगमन
व्रूम1964प्रत्याशा सिद्धांत
कैट्ज़ और कान1966खुला तंत्र
बर्न्स-स्टॉकर1961यांत्रिक बनाम जैविक

8. चार्ट: मास्लो का पदानुक्रम और एल्डरफ़र का ERG

शारीरिक सुरक्षा सामाजिक सम्मान आत्म-सिद्धि मास्लो (1943): निचली से ऊपरी आवश्यकता विकास (G): आत्म-सिद्धि, आंतरिक सम्मान संबंधितता (R): सामाजिक, बाह्य सम्मान अस्तित्व (E): शारीरिक, सुरक्षा एल्डरफ़र (1969): कुंठा होने पर नीचे लौटना
मास्लो की पाँच आवश्यकताएँ एल्डरफ़र के ERG में तीन श्रेणियों में समाहित होती हैं। ERG में आवश्यकताएँ एक साथ सक्रिय रह सकती हैं, और ऊपरी आवश्यकता पूरी न होने पर व्यक्ति निचली पर लौट आता है (कुंठा-प्रतिगमन)।

9. Mind Map

मानव संबंध, व्यवहारवाद, तंत्र
मानव संबंध
  • हॉथॉर्न, मेयो
  • फ़ॉलेट
व्यवहारवाद
  • बर्नार्ड
  • साइमन, कहावतें
अभिप्रेरणा
  • मास्लो, हर्ज़बर्ग, ERG
  • मैकग्रेगर, आर्गिरिस, लिकर्ट
व्यवहार
  • नेतृत्व, संघर्ष
  • अनौपचारिक समूह, ग्रेपवाइन
तंत्र
  • खुला तंत्र
  • आकस्मिकता

10. महत्वपूर्ण One-liners

  • हॉथॉर्न प्रयोग: वेस्टर्न इलेक्ट्रिक, शिकागो (1924-32)।
  • "शक्ति साथ" (power with): मैरी पार्कर फ़ॉलेट।
  • सत्ता का स्वीकृति सिद्धांत: चेस्टर बर्नार्ड।
  • "संतोषजनक" (satisficing) निर्णय: हर्बर्ट साइमन।
  • स्वास्थ्य-कारक और प्रेरक: फ़्रेडरिक हर्ज़बर्ग।
  • "The Human Side of Enterprise": डगलस मैकग्रेगर (1960)।
  • "लिंकिंग पिन" की अवधारणा: रेन्सिस लिकर्ट।
  • कुंठा-प्रतिगमन: एल्डरफ़र (ERG)।
  • ग्रेपवाइन के चार प्रकार: कीथ डेविस।
  • यांत्रिक बनाम जैविक संगठन: बर्न्स और स्टॉकर (1961)।

11. टिप्स एवं ट्रिक्स

व्यवहारवादी विषयों के उत्तर
  • सिद्धांतों की तुलना (मास्लो और ERG; टेलर और मेयो) तालिका या आरेख से करें।
  • हर सिद्धांत को सार्वजनिक प्रशासन से जोड़ें: मिशन कर्मयोगी, APAR, सहभागी प्रबंधन।
  • "कथन" का स्रोत (बर्नार्ड, साइमन, फ़ॉलेट) बताने से उत्तर अधिक प्रभावी होता है।
याद रखने की तरकीब

हॉथॉर्न के चार चरण: "प्र-रि-सा-बैं" (प्रकाश, रिले, साक्षात्कार, बैंक वायरिंग)। फ़ॉलेट के संघर्ष-समाधान: "प्र-स-ए" (प्रभुत्व, समझौता, एकीकरण)।

12. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2025 · Paper I · 2(b)

मैरी पार्कर फ़ॉलेट ने संगठनों के अध्ययन में सामाजिक-मनोवैज्ञानिक उपागम के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

कृतियाँ: 1918, 1924, 1941।

अवधारणाएँ: रचनात्मक संघर्ष और एकीकरण; शक्ति साथ; स्थिति का नियम; वृत्ताकार प्रतिक्रिया; समन्वय के चार सिद्धांत।

अग्रदूत क्यों: हॉथॉर्न से पहले; सेतु; आधुनिक धारणाओं पर प्रभाव (ड्रकर)।

आलोचना: शक्ति-असमानता; आदर्शवाद।

निष्कर्ष: संगठन को मानवीय संबंधों का जाल मानने वाली पहली विचारक।

Q2UPSC 2025 · Paper I · 3(a)

संगठनों में संघर्ष की स्थितियों में नेतृत्व आक्रामक व्यक्तियों के पास चला जाता है और भावनात्मक रूप से परिपक्व लोगों को पृष्ठभूमि में धकेल देता है। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

क्यों होता है: दृश्यता, संकट-मनोविज्ञान, प्रतिस्पर्धी संस्कृति।

दुष्परिणाम: संघर्ष का बढ़ना, प्रभुत्व, मनोबल और विश्वास।

परिपक्वता का महत्व: गोलमैन, थॉमस-किलमैन, फ़ॉलेट।

सुधार: प्रशिक्षण, मध्यस्थता, सहभागिता, चयन।

निष्कर्ष: प्रवृत्ति अल्पकालिक, प्रभावी नेतृत्व परिपक्वता से।

Q3UPSC 2025 · Paper I · 4(b)

नेतृत्व केवल सफलता का श्रेय लेने के बारे में नहीं है, बल्कि विफलताओं को स्वीकार करने और उनके लिए उत्तरदायी होने के बारे में भी है। स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

सिद्धांत: ट्रूमैन; नैतिक नेतृत्व; मंत्रिस्तरीय उत्तरदायित्व।

महत्व: विश्वास, सीखने की संस्कृति, नवाचार, दोष-संस्कृति से बचाव।

उदाहरण: शास्त्री (1956)।

बाधाएँ और उपाय: धुंधला उत्तरदायित्व; धारा 17A, लोकपाल, सामाजिक अंकेक्षण।

Q4UPSC 2024 · Paper I · 2(a)

मैकग्रेगर के X और Y सिद्धांत कार्यस्थल पर मानव अभिप्रेरणा की अलग-अलग अंतर्दृष्टियाँ प्रदान करते हैं। विस्तार से परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

X सिद्धांत: धारणाएँ और परिणाम।

Y सिद्धांत: धारणाएँ और परिणाम (MBO, सहभागिता)।

मास्लो से संबंध; स्व-पूर्ण भविष्यवाणी।

सार्वजनिक क्षेत्र: मिशन कर्मयोगी, 360-डिग्री।

आलोचना: अति-सरलता; मोर्स-लॉर्श का आकस्मिकता सिद्धांत; ओची का Z।

Q5UPSC 2024 · Paper I · 4(a)

अभिप्रेरणा का ERG सिद्धांत आवश्यकताओं के पदानुक्रम के सिद्धांत को पुनर्संकल्पित करने का प्रयास करता है। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

मास्लो: पाँच स्तर, कठोर पदानुक्रम।

ERG: तीन श्रेणियाँ; एक साथ सक्रियता; कुंठा-प्रतिगमन; लचीला क्रम।

आरेख: मिलान।

महत्व: अनुभवजन्य समर्थन; प्रबंधकीय उपयोगिता।

Q6UPSC 2024 · Paper I · 4(b)

वैज्ञानिक प्रबंधन और मानव संबंध सिद्धांत दक्षता और उत्पादन बढ़ाने के दो भिन्न उपागम हैं। स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

तुलना-तालिका: मनुष्य, दक्षता का स्रोत, केंद्र, पर्यवेक्षण, प्रेरणा, पद्धति।

समानता: दक्षता; प्रबंधन-केंद्रितता।

निष्कर्ष: पूरक; TQM और लीन प्रबंधन में संश्लेषण।

Q7UPSC 2025 · Paper I · 1(b) · 10 अंक

निर्णय-निर्माण की सूक्ष्म कला वह निर्णय न लेना है जो दूसरे ले सकते हैं। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

स्रोत: बर्नार्ड (1938) के चार "न"।

अर्थ: प्रत्यायोजन, सामरिक बनाम दैनिक निर्णय।

लाभ और भारतीय संदर्भ: ARC-II, डेस्क अधिकारी।

सीमा: जवाबदेही बनी रहे।

Q8UPSC 2025 · Paper I · 1(d) · 10 अंक

क्या हर्बर्ट साइमन का प्रशासन के कुछ सिद्धांतों को "कहावतें" कहकर आलोचना करना उचित है? विश्लेषण कीजिए।

मॉडल उत्तर

तर्क: विस्तार बनाम स्तर; विशेषज्ञता बनाम आदेश की एकता; विभागीकरण के आधार।

औचित्य: अनुभवजन्य आधार का अभाव; संदर्भ की उपेक्षा।

सीमा: व्यावहारिक उपयोगिता (उर्विक); तथ्य-मूल्य विभाजन की आलोचना।

Q9UPSC 2024 · Paper I · 1(b) · 10 अंक

"औपचारिक संगठन अनौपचारिक समूहों से बने होते हैं।" विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर

साक्ष्य: हॉथॉर्न, बर्नार्ड।

कार्य और दुष्प्रभाव।

प्रबंधन: अनौपचारिक नेता, मानदंडों का संरेखण।

Q10UPSC 2024 · Paper I · 1(c) · 10 अंक

"ग्रेपवाइन एक आवश्यक बुराई है।" परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

अर्थ और प्रकार: डेविस के चार प्रकार।

आवश्यक: गति, बैरोमीटर, पूर्ति।

बुराई: अफ़वाह, विकृति।

प्रबंधन: खुला औपचारिक संचार; दमन नहीं।

13. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • मानव संबंध: हॉथॉर्न के चार चरण; मेयो; फ़ॉलेट; टेलर और मेयो की तुलना।
  • व्यवहारवाद: बर्नार्ड (स्वीकृति, उदासीनता का क्षेत्र, निर्णय की कला); साइमन (सीमित तर्कसंगतता, कहावतें)।
  • अभिप्रेरणा: मास्लो, हर्ज़बर्ग, मैकग्रेगर, आर्गिरिस, लिकर्ट, ERG, व्रूम, ओची।
  • व्यवहार: नेतृत्व के सिद्धांत; संघर्ष और भावनात्मक बुद्धि; जवाबदेह नेतृत्व; अनौपचारिक संगठन; ग्रेपवाइन।
  • तंत्र: खुला तंत्र, एन्ट्रॉपी, आकस्मिकता।