UPSC Mains · Public Administration · Paper I · अध्याय 5

लोक नीति, कार्मिक एवं वित्तीय प्रशासन

Public Policy, Personnel and Financial Administration

नीति निर्माण के मॉडल, क्रियान्वयन और मूल्यांकन; भर्ती, प्रशिक्षण, पदोन्नति, अनुशासन; बजट के प्रकार, ZBB, परिणाम बजट, लेखा और अंकेक्षण।

Paper I 20 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper I के तीन व्यावहारिक खंड इस अध्याय में हैं:

  • लोक नीति: नीति-निर्माण के मॉडल और उनकी आलोचना; अवधारणा, नियोजन, क्रियान्वयन, निगरानी, मूल्यांकन और समीक्षा की प्रक्रियाएँ और उनकी सीमाएँ; राज्य-सिद्धांत और नीति-निर्माण।
  • कार्मिक प्रशासन: मानव संसाधन विकास का महत्व; भर्ती, प्रशिक्षण, करियर-उन्नति, पद-वर्गीकरण, अनुशासन, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन, पदोन्नति, वेतन और सेवा-शर्तें; नियोक्ता-कर्मचारी संबंध; शिकायत-निवारण; आचार-संहिता; प्रशासनिक नैतिकता।
  • वित्तीय प्रशासन: मौद्रिक और राजकोषीय नीतियाँ; सार्वजनिक ऋण और उधार; बजट के प्रकार और रूप; बजट प्रक्रिया; वित्तीय उत्तरदायित्व; लेखा और अंकेक्षण।

2025 में नव-उदारवादी नीतियाँ और कराधान, विकल्पों की उपेक्षा से नीति-विश्लेषण की सीमा, सिविल सेवा के मूल्यों पर वैश्विक प्रभाव, सकारात्मक कार्रवाई (affirmative action), दक्षता-मानचित्रण (competency mapping) और नीति-निर्माण में मौन ज्ञान (tacit knowledge) पूछे गए। 2024 में सिविल सेवकों का मताधिकार, अंकेक्षण का उद्देश्य, प्रशासनिक नैतिकता में नवाचार, कार्य-निष्पादन प्रबंधन बनाम मूल्यांकन, सार्वजनिक ऋण और नीति-मूल्यांकन आए।

2. लोक नीति: मॉडल और प्रक्रिया

  • अर्थ: थॉमस डाई के अनुसार "सरकार जो करने या न करने का चुनाव करती है"। हैरोल्ड लासवेल ("The Policy Orientation", 1951) ने "नीति-विज्ञान" की नींव रखी।
मॉडलविचारकमूल विचारआलोचना
तर्कसंगत-व्यापकशास्त्रीयसभी विकल्पों और परिणामों का आकलन, फिर सर्वोत्तम का चयनअव्यावहारिक (साइमन की सीमित तर्कसंगतता)
वृद्धिशीलचार्ल्स लिंडब्लॉम (1959)पिछली नीति में छोटे-छोटे परिवर्तन; "जैसे-तैसे काम चलाना" (muddling through)यथास्थितिवादी; बड़े संकटों में अपर्याप्त
मिश्रित-अवलोकनअमिताई एट्ज़ियोनी (1967)मूलभूत निर्णयों में व्यापक दृष्टि, सामान्य निर्णयों में वृद्धिशीलव्यावहारिक, पर अस्पष्ट
इष्टतम मानकयेहेज़केल ड्रोरतर्कसंगतता के साथ अतिरिक्त-तर्कसंगत तत्व (अंतर्ज्ञान, अनुभव)-
अभिजन मॉडलसी. राइट मिल्सनीति अभिजन की प्राथमिकताओं को दर्शाती हैजन-भूमिका की उपेक्षा
समूह मॉडलडेविड ट्रूमैननीति हित-समूहों के संतुलन का परिणामशक्ति की असमानता
कचरा-पात्र मॉडलकोहेन, मार्च और ओल्सन (1972)"संगठित अराजकता" में समस्याएँ, समाधान और भागीदार संयोग से मिलते हैं-
बहु-धारा मॉडलजॉन किंगडन (1984)समस्या, नीति और राजनीति की तीन धाराएँ मिलने पर "नीति-खिड़की" खुलती है-
विरामित संतुलनबॉमगार्टनर और जोन्स (1993)लंबी स्थिरता के बीच अचानक बड़े परिवर्तन-
पैरवी गठबंधनपॉल सबातियर (1988)विश्वासों पर आधारित गठबंधन नीति-उपतंत्रों में प्रतिस्पर्धा करते हैं-
  • नीति-चक्र: एजेंडा-निर्धारण, निर्माण, स्वीकृति, क्रियान्वयन, मूल्यांकन, और फिर संशोधन या समाप्ति।
  • क्रियान्वयन: "ऊपर से नीचे" (प्रेसमैन और विल्डाव्स्की, "Implementation", 1973) और "नीचे से ऊपर" (माइकल लिप्स्की, "Street-Level Bureaucracy", 1980; ज़मीनी कर्मचारी वास्तव में नीति "बनाते" हैं)।

नीति-विश्लेषण और विकल्पों की उपेक्षा (UPSC 2025)

  • नीति-विश्लेषण की प्रक्रिया: यूजीन बर्डाक का "आठ-चरणीय मार्ग": समस्या की परिभाषा, साक्ष्य-संग्रह, विकल्पों का निर्माण, मानदंडों का चयन, परिणामों का अनुमान, समझौतों (trade-offs) का सामना, निर्णय, और प्रस्तुति।
  • विकल्पों की उपेक्षा के दुष्परिणाम: "एक ही समाधान" से सोचने का जाल; अनपेक्षित परिणाम; संसाधनों की बर्बादी; "समूह-चिंतन" (इरविंग जैनिस, 1972); और नीति-विफलता।
  • संभावित परिणामों की उपेक्षा: जोखिम-आकलन का अभाव, वितरणात्मक प्रभाव (किसे लाभ, किसे हानि) की उपेक्षा, और दीर्घकालिक प्रभाव।
  • उपाय: विनियामक प्रभाव आकलन (RIA), लागत-लाभ विश्लेषण, परिदृश्य-नियोजन, प्रायोगिक परियोजनाएँ (pilots), हितधारक-परामर्श, और पूर्व-विधायी परामर्श नीति (2014)।

नीति-निर्माण में मौन ज्ञान और व्यक्तिगत अनुभव (UPSC 2025)

  • मौन ज्ञान: माइकल पोलान्यी ("The Tacit Dimension", 1966) के अनुसार "हम जितना कह सकते हैं, उससे अधिक जानते हैं"। अनुभव से आया, कठिनाई से लिखित होने वाला ज्ञान। नोनाका और ताकेउची (1995) के SECI मॉडल में मौन ज्ञान को स्पष्ट (explicit) ज्ञान में बदलने की प्रक्रिया बताई गई है।
  • नीति में भूमिका: ज़मीनी अधिकारियों का क्षेत्रीय अनुभव (ज़िलाधीश, ग्राम-स्तरीय कर्मचारी), समुदायों का पारंपरिक ज्ञान (जल-संचयन, वन-प्रबंधन), क्रियान्वयन की व्यावहारिक बाधाओं की समझ, और संकट-प्रबंधन (आपदा-राहत) में अनुभव।
  • लाभ: संदर्भ-संवेदनशीलता, व्यावहारिकता और तेज़ निर्णय; और "साक्ष्य-आधारित" के बजाय "साक्ष्य-सूचित" (evidence-informed) नीति।
  • सीमाएँ: व्यक्तिगत पूर्वाग्रह, गैर-सामान्यीकरणीयता, सत्यापन की कठिनाई, और "अनुभव" के नाम पर यथास्थितिवाद।
  • संतुलन: मौन ज्ञान को डेटा, अनुसंधान और मूल्यांकन के साथ जोड़ना; ज्ञान-प्रबंधन प्रणालियाँ और "सर्वोत्तम प्रथाओं" का दस्तावेज़ीकरण (प्रधानमंत्री लोक प्रशासन उत्कृष्टता पुरस्कार); और सहभागी नीति-निर्माण।

नीति-मूल्यांकन के बिना नीति-निर्माण निरर्थक (UPSC 2024)

  • मूल्यांकन के प्रकार: निर्माणात्मक (क्रियान्वयन के दौरान) बनाम योगात्मक (अंत में); प्रक्रिया-मूल्यांकन बनाम प्रभाव-मूल्यांकन (यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण, यानी RCT); और लागत-प्रभावशीलता।
  • महत्व: प्रतिपुष्टि से नीति-चक्र का पूरा होना; साक्ष्य के आधार पर संशोधन या समाप्ति; जवाबदेही; और संसाधनों का कुशल उपयोग।
  • भारत में तंत्र: योजना आयोग का कार्यक्रम मूल्यांकन संगठन (1952), NITI Aayog का विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (DMEO, 2015), CAG का निष्पादन अंकेक्षण, परिणाम बजट, PRAGATI मंच और डैशबोर्ड।
  • कमज़ोरियाँ: मूल्यांकन का औपचारिक होना, स्वतंत्रता की कमी, आँकड़ों की गुणवत्ता, निष्कर्षों पर कार्रवाई का अभाव, और राजनीतिक प्रतिरोध।
  • उपाय: स्वतंत्र मूल्यांकन निकाय, योजना के डिज़ाइन में ही मूल्यांकन, खुले आँकड़े, और "सूर्यास्त खंड" (sunset clauses), यानी निश्चित अवधि के बाद योजना की समीक्षा अनिवार्य।

3. कार्मिक प्रशासन

  • भर्ती: योग्यता-आधारित प्रणाली (संरक्षण या लूट-प्रणाली के विपरीत); भारत में UPSC (अनुच्छेद 315-323) और राज्य लोक सेवा आयोग; पार्श्व प्रवेश (2018 से)।
  • प्रशिक्षण: लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA, मसूरी); मिशन कर्मयोगी (2020)।
  • पदोन्नति: वरिष्ठता बनाम योग्यता; विभागीय पदोन्नति समिति।
  • अनुशासन: अनुच्छेद 311 (सुनवाई का अवसर; पद से हटाने की प्रक्रिया); CCS (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1965।
  • आचार-संहिता: केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम 1964; अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968।
  • नियोक्ता-कर्मचारी संबंध: ब्रिटेन की व्हिटली परिषदें; भारत में संयुक्त परामर्श तंत्र (JCM, 1966); वेतन आयोग (सातवाँ 2016; आठवें के गठन की घोषणा 2025)।
  • प्रतिनिधिक नौकरशाही: जे. डोनाल्ड किंग्सले (1944) के अनुसार नौकरशाही में समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए, ताकि वह संवेदनशील और वैध हो।

सार्वजनिक सेवाओं में सकारात्मक कार्रवाई: वैश्विक संदर्भ (UPSC 2025)

देशव्यवस्थाटिप्पणी
भारतअनुच्छेद 16(4), 16(4A), 16(4B); SC, ST, OBC आरक्षण; EWS के लिए 10% (103वाँ संशोधन, 2019; जनहित अभियान 2022 में वैध ठहराया गया)इंद्रा साहनी (1992) में 50% की सीमा और "क्रीमी लेयर"
अमेरिकाकार्यकारी आदेश 11246 (1965) से "सकारात्मक कार्रवाई"; कोटा नहीं, लक्ष्यSFFA बनाम हार्वर्ड (2023) में उच्च शिक्षा में नस्ल-आधारित प्रवेश समाप्त
दक्षिण अफ़्रीकारोज़गार समता अधिनियम (1998)रंगभेद के बाद अश्वेत बहुसंख्यक के लिए
मलेशिया"भूमिपुत्र" नीति (नई आर्थिक नीति, 1971)बहुसंख्यक मलय समुदाय के लिए
ब्रिटेन और कनाडाब्रिटेन का समानता अधिनियम (2010; "सकारात्मक कार्रवाई" की सीमित अनुमति); कनाडा का रोज़गार समता अधिनियमकोटा नहीं; प्रतिनिधित्व के लक्ष्य
  • औचित्य: ऐतिहासिक अन्याय का सुधार, प्रतिनिधिक नौकरशाही, अवसर की वास्तविक समानता (औपचारिक नहीं), और सामाजिक एकता।
  • आलोचना: योग्यता से समझौता का तर्क, लाभ का "मलाईदार परत" तक सीमित रहना, कलंक, और जाति या पहचान का स्थायीकरण।
  • निष्कर्ष: सकारात्मक कार्रवाई "समान अवसर" की आधारशिला है, पर उसके रूप देशों की सामाजिक संरचना के अनुसार भिन्न हैं। लक्ष्य अंततः ऐसी स्थिति है जहाँ इसकी आवश्यकता न रहे।

सिविल सेवकों का मताधिकार और चुनावी भागीदारी (UPSC 2024)

  • वर्तमान नियम: CCS (आचरण) नियम 1964 के नियम 5 के अनुसार सरकारी सेवक किसी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं बन सकता, राजनीतिक आंदोलन में भाग नहीं ले सकता, और चुनाव में प्रचार नहीं कर सकता। वह मतदान कर सकता है, पर यह संकेत नहीं दे सकता कि उसने किसे मत दिया या देगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार सरकारी सेवक चुनाव-एजेंट नहीं बन सकता; चुनाव-ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए डाक-मतपत्र की व्यवस्था है।
  • सीमित भागीदारी के पक्ष में: राजनीतिक तटस्थता, निष्पक्ष प्रशासन (विशेषकर चुनाव-प्रबंधन), जनता का विश्वास, और सरकार बदलने पर भी निरंतरता।
  • व्यापक भागीदारी के पक्ष में: सिविल सेवक भी नागरिक हैं (अनुच्छेद 19); निचले स्तर के कर्मचारियों (जिनकी नीति-निर्माण में भूमिका नहीं) पर कठोर प्रतिबंध अनुचित है।
  • अन्य देश: ब्रिटेन में "राजनीतिक रूप से प्रतिबंधित पद" (वरिष्ठ पदों पर प्रतिबंध, निचले पदों पर छूट); अमेरिका का हैच अधिनियम (1939)।
  • सेवानिवृत्ति के बाद: तुरंत राजनीति में आने पर "विश्राम-अवधि" (cooling-off) की बहस।
  • निष्कर्ष: मतदान का अधिकार बनाए रखते हुए सक्रिय राजनीतिक भागीदारी पर प्रतिबंध उचित है; पद के स्तर के अनुसार विभेदित नियम विचारणीय हैं।

कार्य-निष्पादन प्रबंधन बनाम कार्य-निष्पादन मूल्यांकन (UPSC 2024)

आधारकार्य-निष्पादन मूल्यांकन (Appraisal)कार्य-निष्पादन प्रबंधन (Management)
स्वरूपएक घटना: वार्षिक मूल्यांकनएक सतत प्रक्रिया
चरणपिछले वर्ष का आकलनलक्ष्य-निर्धारण, निगरानी, प्रतिपुष्टि, विकास, मूल्यांकन, पुरस्कार
दृष्टिभूतकाल-उन्मुख, निर्णयात्मकभविष्य-उन्मुख, विकासात्मक
उपयोगपदोन्नति और अनुशासनसंगठनात्मक लक्ष्यों से व्यक्तिगत लक्ष्यों का संरेखण
भारतAPAR (वार्षिक कार्य-निष्पादन मूल्यांकन प्रतिवेदन; पहले ACR); 2017 से वरिष्ठ पदों के लिए "360-डिग्री" मूल्यांकनपरिणाम-रूपरेखा दस्तावेज़ (RFD, 2009); मिशन कर्मयोगी
  • APAR की समस्याएँ: "उत्कृष्ट" ग्रेड की अति (ग्रेड-स्फीति), व्यक्तिपरकता, गोपनीयता (देव दत्त, 2008 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रविष्टियाँ बताने का निर्देश दिया), और विकास-प्रतिपुष्टि का अभाव।
  • निष्कर्ष: मूल्यांकन कार्य-निष्पादन प्रबंधन का एक "अंग" है; केवल मूल्यांकन से संस्कृति नहीं बदलती।

दक्षता-मानचित्रण और करियर-विकास (UPSC 2025)

  • दक्षता-मानचित्रण (competency mapping): किसी पद के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल, अभिवृत्ति और व्यवहार की पहचान करना, और कर्मचारी की वर्तमान दक्षता से उसकी तुलना करना।
  • भारत: मिशन कर्मयोगी (सिविल सेवा क्षमता-निर्माण का राष्ट्रीय कार्यक्रम, 2020) में "नियम-आधारित" से "भूमिका-आधारित" मानव संसाधन प्रबंधन की ओर बदलाव; FRACs (भूमिकाओं, गतिविधियों और दक्षताओं की रूपरेखा); iGOT कर्मयोगी मंच; क्षमता निर्माण आयोग (2021)।
  • प्रेरणा कैसे देता है: सही व्यक्ति को सही भूमिका, जिससे कार्य-संतोष बढ़ता है; प्रशिक्षण की आवश्यकता का स्पष्ट आकलन; करियर-मार्ग की पारदर्शिता; और पदोन्नति तथा पदस्थापन को दक्षता से जोड़ना। हर्ज़बर्ग के प्रेरक (उपलब्धि, विकास) और व्रूम का प्रत्याशा सिद्धांत (प्रयास से परिणाम और पुरस्कार का स्पष्ट संबंध) इसके सैद्धांतिक आधार हैं।
  • चुनौतियाँ: वरिष्ठता-आधारित पदोन्नति की परंपरा, बार-बार के तबादले, सामान्यज्ञ (generalist) संस्कृति, मूल्यांकन की व्यक्तिपरकता, और प्रशिक्षण का औपचारिक होना।
  • निष्कर्ष: हाँ, दक्षता-मानचित्रण सेवा-वितरण के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ा सकता है, बशर्ते वह पदस्थापन, पदोन्नति और पुरस्कार से वास्तव में जुड़ा हो।

प्रशासनिक नैतिकता: वैश्विक प्रवृत्तियाँ और नवाचार (UPSC 2024, 2025)

  • वैश्विक मानक: ब्रिटेन के नोलन सिद्धांत (1995; सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत: निःस्वार्थता, सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही, खुलापन, ईमानदारी, नेतृत्व); भ्रष्टाचार के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCAC, 2003; भारत ने 2011 में अनुसमर्थन किया); OECD की सार्वजनिक सत्यनिष्ठा संस्तुति (2017)।
  • वैश्विक प्रवृत्तियाँ भारतीय मूल्यों को कैसे आकार देती हैं: पारदर्शिता (RTI), हित-संघर्ष की घोषणा, संपत्ति की घोषणा, व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम (2014), ई-प्रोक्योरमेंट, और "सत्यनिष्ठा संधि" (integrity pact; ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल)।
  • सीमा: मूल्य केवल "आयातित" नहीं होते। भारतीय संविधान के मूल्य (न्याय, समता, बंधुत्व), गांधी का "जंतर" (सबसे ग़रीब व्यक्ति का चेहरा याद करो) और कौटिल्य की परंपरा भी मूल्यों के स्रोत हैं।
  • नवाचारी प्रथाएँ: नैतिकता-अंकेक्षण (ethics audit), व्यवहारगत अंतर्दृष्टि (behavioural insights; "nudge"), नैतिक दुविधाओं पर आधारित प्रशिक्षण (केस-स्टडी), डिजिटल शासन (जिससे विवेकाधिकार और मानवीय संपर्क घटता है, जैसे DBT), सोशल मीडिया पर आचरण की नीतियाँ, नैतिकता अधिकारी, और नागरिकों की प्रतिपुष्टि।
  • भारत में अनुशंसाएँ: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की चौथी रिपोर्ट "Ethics in Governance" (2007): सिविल सेवा मूल्यों और नैतिक संहिता का वैधानिक रूप, हित-संघर्ष का क़ानून।
  • निष्कर्ष: नैतिक नवाचार से सार्वजनिक विश्वास बढ़ता है, जो किसी भी शासन की सबसे बड़ी पूँजी है।

4. वित्तीय प्रशासन

बजट का प्रकारउद्भवमूल विचार
मद-आधारित (line-item)परंपरागतव्यय की मदों पर नियंत्रण
निष्पादन बजटअमेरिका का हूवर आयोग (1949)कार्यक्रम और गतिविधियों से व्यय को जोड़ना
PPBSअमेरिकी रक्षा विभाग, रॉबर्ट मैकनामारा (1961)नियोजन, कार्यक्रम और बजट का एकीकरण
शून्य-आधारित बजट (ZBB)पीटर पायर, टेक्सस इंस्ट्रूमेंट्स (1969); भारत में 1986-87 से प्रयोगहर वर्ष हर व्यय का शून्य से औचित्य
परिणाम बजट (outcome)भारत 2005व्यय से निर्गत (output) और परिणाम (outcome) तक
जेंडर बजटभारत 2005-06स्त्रियों पर प्रभाव का विवरण
  • भारत में बजट प्रक्रिया: अनुच्छेद 112 (वार्षिक वित्तीय विवरण), 113 (अनुदान माँगें), 114 (विनियोग विधेयक), 110 (धन विधेयक) और 116 (लेखानुदान)। 2017 से रेल बजट का आम बजट में विलय और बजट 1 फ़रवरी को पेश होता है। अनुदान माँगों पर "गिलोटिन" (अंतिम दिन सभी शेष माँगों पर बिना चर्चा मतदान) का विस्तार अगले अध्याय में है।
  • वित्तीय उत्तरदायित्व: राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम 2003; 2018 के संशोधन में सामान्य सरकारी ऋण का लक्ष्य GDP का 60% रखा गया (केंद्र 40%, राज्य 20%)।

अंकेक्षण: दोष ढूँढना नहीं, सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करना (UPSC 2024)

  • प्रकार: अनुपालन (compliance) अंकेक्षण, वित्तीय अंकेक्षण, निष्पादन अंकेक्षण (मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता), और आज के समय में IT और पर्यावरणीय अंकेक्षण।
  • भारत: CAG (अनुच्छेद 148-151); CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा-शर्तें) अधिनियम 1971; रिपोर्टें संसद की लोक लेखा समिति को जाती हैं।
  • कथन का अर्थ: आधुनिक अंकेक्षण (INTOSAI के अंतरराष्ट्रीय मानक) "निगरानीकर्ता" के बजाय "आश्वासन-दाता" और "सुधार-सहयोगी" है। वह सटीकता, विश्वसनीयता और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करता है, जोखिमों की पहचान करता है, आंतरिक नियंत्रण सुधारता है और प्रणाली में सुधार की संस्तुति देता है।
  • सीमा: धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का पता लगाना भी अंकेक्षण का दायित्व है (जैसे 2G और कोयला-ब्लॉक पर CAG की रिपोर्टें)। "दोष ढूँढने" और "सुधार" के बीच संतुलन आवश्यक है; अत्यधिक आलोचनात्मक अंकेक्षण निर्णय-पक्षाघात (policy paralysis) का कारण भी बन सकता है।

सार्वजनिक ऋण: रोज़गार का साधन या भावी पीढ़ियों पर भार? (UPSC 2024)

  • रोज़गार और नीति का साधन: केन्स (1936) के अनुसार मंदी में सरकारी उधार और व्यय से माँग और रोज़गार बढ़ते हैं। अब्बा लर्नर (1943) का "कार्यात्मक वित्त" कहता है कि बजट को संतुलित करना नहीं, अर्थव्यवस्था को संतुलित करना लक्ष्य है। पूँजीगत व्यय (अवसंरचना) के लिए उधार भावी पीढ़ियों को परिसंपत्ति भी देता है।
  • भावी पीढ़ियों पर भार: जेम्स ब्यूकैनन (1958) के अनुसार ऋण का भार भविष्य के करदाताओं पर पड़ता है। "क्राउडिंग आउट" (सरकारी उधार से ब्याज-दर बढ़कर निजी निवेश घटता है), ब्याज-भुगतान का बढ़ता बोझ (भारत में केंद्र के राजस्व-व्यय का बड़ा हिस्सा), मुद्रास्फीति, और "रिकार्डियन समतुल्यता" (रॉबर्ट बैरो, 1974: लोग भविष्य के कर का अनुमान करके बचत बढ़ा देते हैं)।
  • संतुलन: "स्वर्णिम नियम", यानी केवल पूँजीगत व्यय के लिए उधार; राजकोषीय नियम (FRBM); ऋण-स्थिरता (वृद्धि-दर का ब्याज-दर से अधिक होना); और पारदर्शिता (बजट से बाहर के उधार को स्पष्ट करना)।

नव-उदारवादी नीतियाँ और कराधान (UPSC 2025)

  • नीतियाँ: कर-दरों में कटौती और आधार का विस्तार (लैफ़र वक्र का तर्क), अप्रत्यक्ष करों का एकीकरण (GST, 2017), 2019 में कॉर्पोरेट कर की दर 22% करना, डिजिटलीकरण (ई-इनवॉइसिंग, 2020 से "फ़ेसलेस" कर-निर्धारण), और औपचारिकीकरण।
  • कराधान के अवसर कैसे बढ़े: आर्थिक वृद्धि से कर-आधार बढ़ा; अनौपचारिक से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव; GST से कर-शृंखला और अनुपालन; डेटा-विश्लेषण से कर-चोरी पर नियंत्रण; और विनिवेश तथा उपयोगकर्ता-शुल्क जैसे नए राजस्व-स्रोत।
  • सीमाएँ: "नीचे की ओर दौड़" (race to the bottom) जैसी कर-प्रतिस्पर्धा, जिसके उत्तर में OECD का वैश्विक न्यूनतम कर (15%) आया; प्रत्यक्ष करों की तुलना में अप्रत्यक्ष करों का प्रतिगामी स्वरूप; राज्यों की कर-स्वायत्तता में कमी (GST); और कुल कर-GDP अनुपात का अपेक्षा से कम बढ़ना।

5. Master Summary Table

विषयमुख्य तथ्ययाद रखें
नीति-विज्ञानलासवेल 1951; डाईनीति-चक्र
मॉडललिंडब्लॉम 1959; एट्ज़ियोनी 1967; किंगडन 1984कचरा-पात्र 1972
क्रियान्वयनप्रेसमैन-विल्डाव्स्की 1973; लिप्स्की 1980ज़मीनी नौकरशाह
मौन ज्ञानपोलान्यी 1966; SECI 1995साक्ष्य-सूचित नीति
मूल्यांकनPEO 1952; DMEO 2015RCT
सकारात्मक कार्रवाई16(4); EWS 2019; इंद्रा साहनी 1992SFFA 2023
आचरणCCS आचरण नियम 1964 (नियम 5)हैच 1939
मूल्यांकन बनाम प्रबंधनAPAR; 360-डिग्री 2017; RFD 2009देव दत्त 2008
कर्मयोगी2020; FRACs; CBC 2021नियम से भूमिका की ओर
नैतिकतानोलन 1995; UNCAC 2003ARC-II 2007
बजटPPBS 1961; ZBB 1969; परिणाम 2005अनुच्छेद 112-116
ऋणकेन्स, लर्नर 1943, ब्यूकैनन 1958, बैरो 1974FRBM 2003, 2018

6. चार्ट: नीति-चक्र

1. एजेंडा-निर्धारण 2. नीति-निर्माण 3. स्वीकृति 4. क्रियान्वयन 5. मूल्यांकन 6. संशोधन या अंत प्रतिपुष्टि सेचक्र दोबारा
नीति-चक्र: एजेंडा-निर्धारण से निर्माण, स्वीकृति, क्रियान्वयन और मूल्यांकन तक; मूल्यांकन की प्रतिपुष्टि से नीति का संशोधन या अंत होता है। व्यवहार में चरण अतिव्याप्त होते हैं।

7. Mind Map

नीति, कार्मिक, वित्त
नीति
  • मॉडल, नीति-चक्र
  • विकल्प, मौन ज्ञान, मूल्यांकन
कार्मिक
  • भर्ती, प्रशिक्षण, अनुशासन
  • सकारात्मक कार्रवाई, मताधिकार
निष्पादन
  • प्रबंधन बनाम मूल्यांकन
  • दक्षता-मानचित्रण
नैतिकता
  • नोलन, UNCAC
  • नवाचारी प्रथाएँ
वित्त
  • बजट के प्रकार, अंकेक्षण
  • ऋण, कराधान

8. महत्वपूर्ण One-liners

  • "The Science of 'Muddling Through'": चार्ल्स लिंडब्लॉम (1959)।
  • "नीति-खिड़की" (policy window): जॉन किंगडन।
  • "Street-Level Bureaucracy": माइकल लिप्स्की (1980)।
  • "हम जितना कह सकते हैं, उससे अधिक जानते हैं": माइकल पोलान्यी।
  • प्रतिनिधिक नौकरशाही: जे. डोनाल्ड किंग्सले (1944)।
  • सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत: नोलन समिति (1995)।
  • शून्य-आधारित बजट के जनक: पीटर पायर।
  • PPBS: रॉबर्ट मैकनामारा (1961)।
  • भारत में परिणाम बजट: 2005।
  • FRBM अधिनियम: 2003।

9. टिप्स एवं ट्रिक्स

इस अध्याय के उत्तरों में
  • नीति के प्रश्नों में मॉडल का नाम और विचारक दें और भारतीय योजना से उदाहरण दें (MGNREGA, DBT)।
  • कार्मिक प्रश्नों में नियम और न्यायिक निर्णय (CCS नियम, इंद्रा साहनी, देव दत्त) जोड़ें।
  • वित्त के प्रश्नों में संवैधानिक अनुच्छेद और FRBM के लक्ष्य लिखें।
याद रखने की तरकीब

नोलन के सात सिद्धांत: "नि-स-व-ज-खु-ई-ने"। बजट का क्रम: "मद-निष्पादन-PPBS-ZBB-परिणाम"।

10. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2025 · Paper I · 6(c)

समान अवसर के लिए सकारात्मक कार्रवाई सार्वजनिक सेवाओं में भर्ती की आधारशिला है। वैश्विक संदर्भ में विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

अवधारणा: किंग्सले; वास्तविक समानता।

वैश्विक: तालिका (भारत, अमेरिका, दक्षिण अफ़्रीका, मलेशिया, ब्रिटेन, कनाडा)।

औचित्य और आलोचना।

निष्कर्ष: आधारशिला, पर संदर्भ-विशिष्ट।

Q2UPSC 2025 · Paper I · 7(c)

क्या करियर-विकास से जुड़ा दक्षता-मानचित्रण प्रभावी सेवा-वितरण के प्रति सिविल सेवकों की प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित कर सकता है? विस्तार से बताइए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

अवधारणा: ज्ञान, कौशल, अभिवृत्ति, व्यवहार।

भारत: मिशन कर्मयोगी, FRACs, iGOT, CBC।

प्रेरणा: भूमिका-अनुकूलता, करियर-पारदर्शिता; हर्ज़बर्ग, व्रूम।

चुनौतियाँ और निष्कर्ष।

Q3UPSC 2025 · Paper I · 8(b)

नीति-निर्माण की प्रक्रिया में ज्ञान के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में मौन ज्ञान और व्यक्तिगत अनुभव की भूमिका और क्षेत्र का मूल्यांकन कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

अवधारणा: पोलान्यी; SECI।

भूमिका: क्षेत्रीय अधिकारी, समुदाय, क्रियान्वयन, संकट।

लाभ और सीमाएँ।

संतुलन: साक्ष्य-सूचित नीति, ज्ञान-प्रबंधन।

Q4UPSC 2024 · Paper I · 6(a)

सरकार में सार्वजनिक विश्वास बढ़ाने के लिए प्रशासनिक नैतिकता में नवाचारी प्रथाओं को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

संदर्भ: विश्वास का संकट।

वैश्विक मानक: नोलन, UNCAC, OECD।

नवाचार: नैतिकता-अंकेक्षण, nudge, केस-आधारित प्रशिक्षण, डिजिटल शासन, सत्यनिष्ठा संधि, व्हिसलब्लोअर।

भारत: ARC-II 2007।

Q5UPSC 2024 · Paper I · 7(b)

कार्य-निष्पादन प्रबंधन और कार्य-निष्पादन मूल्यांकन लोक कार्मिक प्रशासन की दो अलग-अलग गतिविधियाँ हैं। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

तुलना-तालिका।

भारत: APAR, 360-डिग्री, RFD, कर्मयोगी; APAR की समस्याएँ।

निष्कर्ष: मूल्यांकन प्रबंधन का अंग है।

Q6UPSC 2024 · Paper I · 8(b)

आधुनिक अर्थशास्त्री सार्वजनिक ऋण को रोज़गार बढ़ाने का आवश्यक साधन और आर्थिक नीति का तत्व मानते हैं, पर यह भार को भावी पीढ़ियों पर भी डालता है। विश्लेषण कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

साधन: केन्स, लर्नर, पूँजीगत व्यय।

भार: ब्यूकैनन, क्राउडिंग आउट, ब्याज, बैरो।

संतुलन: स्वर्णिम नियम, FRBM, स्थिरता, पारदर्शिता।

Q7UPSC 2024 · Paper I · 8(c)

जब तक नीति-मूल्यांकन का सुदृढ़ तंत्र न हो, नीति-निर्माण की प्रक्रिया निरर्थक बनी रहती है। परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

प्रकार और महत्व।

भारत: PEO, DMEO, CAG, PRAGATI।

कमज़ोरियाँ और उपाय: स्वतंत्र निकाय, डिज़ाइन में मूल्यांकन, सूर्यास्त खंड।

Q8UPSC 2025 · Paper I · 5(b) · 10 अंक

नव-उदारवादी नीतियों ने सरकार के लिए कराधान का क्षेत्र और अवसर बढ़ाए हैं। स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर

नीतियाँ: दर-कटौती, GST, 2019 की कॉर्पोरेट कर-दर, फ़ेसलेस।

अवसर: आधार-विस्तार, औपचारिकीकरण, डेटा।

सीमाएँ: कर-प्रतिस्पर्धा, प्रतिगामिता, राज्यों की स्वायत्तता।

Q9UPSC 2025 · Paper I · 5(c) · 10 अंक

यदि संभावित परिणामों और वैकल्पिक नीतियों की उपेक्षा की जाए तो नीति-विश्लेषण की प्रक्रिया सीमित रह जाती है। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर

बर्डाक का आठ-चरणीय मार्ग।

दुष्परिणाम: एक समाधान का जाल, समूह-चिंतन, अनपेक्षित परिणाम।

उपाय: RIA, लागत-लाभ, पायलट, परामर्श।

Q10UPSC 2025 · Paper I · 5(d) · 10 अंक

सिविल सेवाओं में मूल्य और नैतिकता वैश्विक प्रथाओं और प्रवृत्तियों से आकार लेते हैं। स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर

वैश्विक: नोलन, UNCAC, OECD।

भारत पर प्रभाव: RTI, व्हिसलब्लोअर, ई-प्रोक्योरमेंट।

सीमा: संविधान, गांधी, कौटिल्य जैसे स्वदेशी स्रोत।

Q11UPSC 2024 · Paper I · 5(b) · 10 अंक

सिविल सेवकों को केवल मत डालने या देश की चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति होनी चाहिए। परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

नियम: CCS आचरण नियम 1964, नियम 5; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम; डाक-मतपत्र।

पक्ष और विपक्ष: तटस्थता बनाम नागरिक अधिकार।

अन्य देश: ब्रिटेन, हैच अधिनियम।

Q12UPSC 2024 · Paper I · 5(d) · 10 अंक

अंकेक्षण दोष ढूँढने के बारे में नहीं, बल्कि वित्तीय सूचना की सटीकता और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के बारे में है। विश्लेषण कीजिए।

मॉडल उत्तर

प्रकार: अनुपालन, वित्तीय, निष्पादन।

आधुनिक दृष्टि: आश्वासन, सुधार, INTOSAI।

सीमा: धोखाधड़ी का पता लगाना भी दायित्व; निर्णय-पक्षाघात से बचाव।

11. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • नीति: मॉडल (तर्कसंगत से बहु-धारा तक); नीति-चक्र; क्रियान्वयन; विकल्प; मौन ज्ञान; मूल्यांकन।
  • कार्मिक: भर्ती, प्रशिक्षण, अनुशासन, आचरण; सकारात्मक कार्रवाई; मताधिकार; निष्पादन; दक्षता-मानचित्रण; नैतिकता।
  • वित्त: बजट के प्रकार; प्रक्रिया; FRBM; अंकेक्षण; सार्वजनिक ऋण; कराधान।