UPSC Mains · Public Administration · Paper II · अध्याय 8

संघ एवं राज्य सरकार का प्रशासन

Union and State Government Administration

मंत्रिमंडल सचिवालय, PMO, केंद्रीय मंत्रालय; राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राज्य सचिवालय; केंद्र-राज्य संबंध और वित्त आयोग।

Paper II 20 मिनट

1. अध्याय एक नज़र में

Paper II का यह अध्याय भारत में शासन की "मशीनरी" को समझाता है:

  • संघ सरकार और प्रशासन: कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका की संरचना और कार्य-प्रक्रियाएँ; मंत्रिमंडल सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सचिवालय, मंत्रालय और विभाग, संबद्ध और क्षेत्रीय कार्यालय।
  • योजना और प्राथमिकताएँ: योजना आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद से NITI आयोग तक; "सांकेतिक" नियोजन।
  • राज्य सरकार और प्रशासन: केंद्र-राज्य के प्रशासनिक, विधायी और वित्तीय संबंध; वित्त आयोग; राज्यपाल; मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद; मुख्य सचिव; राज्य सचिवालय और निदेशालय।

2025 में NITI आयोग की सीमित प्रभावशीलता, राज्य और समवर्ती सूचियों के विषयों पर संघ का योगदान, सहकारी संघवाद की बाधाएँ, केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध, और सचिवालय तथा निदेशालय की भूमिकाओं का भेद पूछे गए। 2024 में "जनता का PMO", GST और केंद्र-राज्य संबंध, NITI का NDAP, केंद्र-राज्य संबंधों में परिवर्तन, राज्यपाल और राज्य सरकारों का तनाव, कॉलेजियम प्रणाली, और गठबंधन सरकारों में प्रशासन की समस्याएँ आए।

2. संघ सरकार की मशीनरी

  • मंत्रिमंडल सचिवालय (1947): प्रधानमंत्री के अधीन; मंत्रिमंडल और उसकी समितियों को सचिवीय सहायता, अंतर-मंत्रालयी समन्वय, और "भारत सरकार (कार्य-आवंटन) नियम" और "(कार्य-संचालन) नियम" (1961) का प्रशासन। मंत्रिमंडल सचिव सिविल सेवा का प्रमुख होता है।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO): 1947 में "प्रधानमंत्री सचिवालय", 1977 में नाम बदलकर PMO। यह प्रधानमंत्री का "स्टाफ़" अभिकरण है: सलाह, समन्वय, निगरानी, सार्वजनिक शिकायतें, और प्रधानमंत्री के अधीन विभाग। इंदिरा गांधी के समय पी.एन. हक्सर के नेतृत्व में यह बहुत शक्तिशाली बना।
  • केंद्रीय सचिवालय: मंत्रालय और विभाग (नीति-निर्माण); संबद्ध कार्यालय (नीति-क्रियान्वयन और तकनीकी सलाह, जैसे केंद्रीय लोक निर्माण विभाग); अधीनस्थ कार्यालय (क्षेत्रीय क्रियान्वयन)। पद-क्रम: सचिव, अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव, निदेशक या उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी।
  • कार्यकाल प्रणाली (tenure system): केंद्रीय सचिवालय में अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (राज्यों से), जो "नई दृष्टि" और "क्षेत्रीय अनुभव" के लिए है। पर इससे विशेषज्ञता की कमी की आलोचना भी होती है।

"जनता का PMO, प्रधानमंत्री का PMO नहीं" (UPSC 2024)

  • अर्थ: PMO का उद्देश्य प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सत्ता का केंद्र बनना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं, शिकायतों और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र बनना होना चाहिए।
  • जनता के PMO के तत्व: CPGRAMS से शिकायत-निवारण, PRAGATI मंच (2015) से परियोजनाओं और शिकायतों की समीक्षा, नागरिक-संवाद (MyGov), पारदर्शिता (PMO भी RTI के अधीन), और प्रमुख योजनाओं की निगरानी।
  • चिंताएँ: PMO का अत्यधिक केंद्रीकरण, जिससे मंत्रिमंडल की "सामूहिक उत्तरदायित्व" वाली प्रणाली कमज़ोर होती है और मंत्रालय PMO के "अधीनस्थ" बन जाते हैं; और PMO की संसद के प्रति सीधी जवाबदेही का अभाव।
  • निष्कर्ष: PMO "समन्वय और नागरिक-सेवा" का केंद्र हो, "सत्ता के केंद्रीकरण" का नहीं।

कॉलेजियम प्रणाली (UPSC 2024)

  • विकास: प्रथम न्यायाधीश मामला (एस.पी. गुप्ता, 1981; कार्यपालिका की प्रधानता); द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993; मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों का कॉलेजियम; "परामर्श" का अर्थ "सहमति"); तृतीय न्यायाधीश मामला (1998; मुख्य न्यायाधीश और चार वरिष्ठतम न्यायाधीश)।
  • NJAC: 99वें संशोधन (2014) से राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बना, जिसे अक्टूबर 2015 में चतुर्थ न्यायाधीश मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक ठहराया (न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मूल ढाँचा)।
  • पक्ष: न्यायपालिका की स्वतंत्रता की आधारशिला; कार्यपालिका के हस्तक्षेप से बचाव (आपातकाल में "अधिक्रमण" (supersession) का अनुभव)।
  • आलोचना: पारदर्शिता का अभाव ("न्यायाधीश ही न्यायाधीश चुनते हैं"); विविधता की कमी (स्त्रियाँ, वंचित वर्ग); नियुक्तियों में देरी (प्रक्रिया-ज्ञापन, यानी MoP, पर गतिरोध); भाई-भतीजावाद के आरोप; और जवाबदेही का अभाव।
  • सुधार: कॉलेजियम के प्रस्तावों का सार्वजनिक प्रकाशन (2017 से), स्पष्ट मानदंड, समयबद्धता, और न्यायपालिका की प्रधानता के साथ एक संशोधित स्वतंत्र आयोग।

3. नियोजन की मशीनरी: योजना आयोग से NITI आयोग

  • योजना आयोग: 15 मार्च 1950 को मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से (न संवैधानिक, न वैधानिक); अध्यक्ष प्रधानमंत्री। राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC, 1952) में मुख्यमंत्री शामिल थे। 12 पंचवर्षीय योजनाएँ (1951-2017)। आठवीं योजना (1992-97) से "सांकेतिक" नियोजन (indicative planning) शुरू हुआ, यानी निजी क्षेत्र के लिए दिशा-संकेत, आदेश नहीं।
  • NITI आयोग (1 जनवरी 2015): भारत परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय संस्थान; "थिंक टैंक"। इसमें शासी परिषद (सभी मुख्यमंत्री), क्षेत्रीय परिषदें, उपाध्यक्ष और विशेषज्ञ हैं। प्रमुख कार्य: SDG भारत सूचकांक (2018 से), आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम (2018), अटल नवाचार मिशन, DMEO, राज्य-सूचकांक (स्वास्थ्य, जल, निर्यात तैयारी), और "विकसित भारत 2047" का दृष्टिपत्र।

NITI आयोग की सीमित प्रभावशीलता (UPSC 2025)

  • कारण:
    • वित्तीय शक्ति का अभाव: योजना आयोग की तरह राज्यों को अनुदान आवंटित करने की शक्ति नहीं; वित्त मंत्रालय और वित्त आयोग पर निर्भरता।
    • कोई संवैधानिक या वैधानिक दर्जा नहीं: केवल कार्यकारी प्रस्ताव से बना।
    • सलाहकार भूमिका: उसकी संस्तुतियाँ बाध्यकारी नहीं।
    • राज्यों की धारणा: कुछ राज्य इसे केंद्र का "विस्तार" मानते हैं; विपक्ष-शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा शासी परिषद की बैठकों का बहिष्कार (जैसे 2024 में)।
    • शासी परिषद की बैठकें कम और औपचारिक।
    • दीर्घकालिक दृष्टि के क्रियान्वयन-तंत्र का अभाव।
  • उपलब्धियाँ: प्रतिस्पर्धी संघवाद (राज्यों की रैंकिंग), आकांक्षी ज़िले, आँकड़ों का लोकतंत्रीकरण (NDAP), और नीति-अनुसंधान।
  • सुधार: वैधानिक दर्जा, राज्यों के साथ नियमित संवाद, क्षेत्रीय परिषदों का सुदृढ़ीकरण, और राज्य-स्तरीय "SIT" (राज्य परिवर्तन संस्थान) को समर्थन।

NITI आयोग का NDAP (UPSC 2024)

  • NDAP (राष्ट्रीय डेटा और विश्लेषण मंच): NITI आयोग ने 2022 में सार्वजनिक रूप से शुरू किया। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और संस्थाओं के सरकारी आँकड़े एक मंच पर, मानकीकृत और विश्लेषण-योग्य रूप में हैं: खुली पहुँच, डाउनलोड, विज़ुअलाइज़ेशन, और ज़िला-स्तर तक के आँकड़े।
  • लोकतंत्रीकरण और समावेशिता में योगदान: शोधकर्ता, पत्रकार, नागरिक समाज, राज्य सरकारें और विद्यार्थी सभी आँकड़ों तक समान पहुँच पाते हैं; प्रमाण-आधारित नीति; पारदर्शिता और जवाबदेही; ज़िला और ब्लॉक स्तर पर पिछड़े क्षेत्रों की पहचान; और नवाचार (स्टार्ट-अप, विश्लेषण)।
  • चुनौतियाँ: आँकड़ों की गुणवत्ता और समयबद्धता; विभागों के बीच समन्वय; डिजिटल साक्षरता; निजता (DPDP अधिनियम, 2023); और कुछ प्रमुख आँकड़ों (जैसे जनगणना) में देरी।
  • विकेंद्रीकृत नियोजन: 73वें और 74वें संशोधन (1992) से ज़िला योजना समिति (अनुच्छेद 243ZD) और महानगरीय योजना समिति। विस्तार अगले अध्याय में है।

4. केंद्र-राज्य संबंध

क्षेत्रप्रावधान
विधायीसातवीं अनुसूची (संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ); अनुच्छेद 249 (राज्य सभा के प्रस्ताव पर), 250 (आपातकाल), 252 (राज्यों की सहमति पर), 253 (अंतरराष्ट्रीय संधि); अवशिष्ट शक्तियाँ संघ के पास (अनुच्छेद 248)
प्रशासनिकअनुच्छेद 256 (संघ के क़ानूनों का पालन), 257 (संघ के निर्देश), 365 (निर्देश न मानने पर), 355 और 356; अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुच्छेद 312); अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263; 1990)
वित्तीयअनुच्छेद 270 (करों का बँटवारा), 275 (सहायता-अनुदान), 280 (वित्त आयोग), 282 (विवेकाधीन अनुदान), 279A (GST परिषद)
  • आयोग: सरकारिया आयोग (1983-88), पुंछी आयोग (2007-10), और प्रशासनिक सुधार आयोग की अध्ययन-टीमें।
  • भारतीय संघवाद का स्वरूप: के.सी. व्हीयर के अनुसार "अर्ध-संघीय" (quasi-federal); "एकत्र रखने वाला संघ" (holding together), जिसका उद्देश्य विविधता के बीच एकता है; और एस.आर. बोम्मई (1994) में संघवाद मूल ढाँचे का भाग माना गया।

सशक्त केंद्र और प्रशासनिक संबंधों की बहस (UPSC 2025)

  • सशक्त केंद्र क्यों बनाया गया: विभाजन का आघात, रियासतों का विलय, राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा, और आर्थिक नियोजन की आवश्यकता।
  • प्रशासनिक संबंधों में विवाद के बिंदु:
    • राज्यपाल की भूमिका और अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग (बोम्मई से पहले अनेक बार)।
    • अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर दोहरा नियंत्रण; IAS (संवर्ग) नियमों में 2022 के प्रस्तावित संशोधन पर राज्यों की आपत्ति।
    • केंद्रीय एजेंसियाँ (CBI, ED): कई राज्यों ने CBI से "सामान्य सहमति" वापस ली।
    • केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती; सीमा सुरक्षा बल के क्षेत्राधिकार का विस्तार (2021)।
    • राज्य के विषयों पर केंद्रीय योजनाएँ और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), जिनसे राज्य बायपास होते हैं।
  • संतुलन के उपाय: अंतर-राज्य परिषद की नियमित बैठकें, क्षेत्रीय परिषदें, सरकारिया और पुंछी की संस्तुतियाँ (राज्यपाल की नियुक्ति में मुख्यमंत्री से परामर्श, अनुच्छेद 356 का "अंतिम उपाय" के रूप में प्रयोग), और सहकारी संघवाद के मंच (GST परिषद, NITI शासी परिषद)।

"केंद्र-राज्य संबंधों में तीव्र परिवर्तन" (UPSC 2024)

  • वित्तीय: GST (2017) से राज्यों की कर-स्वायत्तता का "साझा संप्रभुता" में बदलना; 14वें वित्त आयोग की 42% हिस्सेदारी के बाद 15वें की 41%; उपकर (cess) और अधिभार, जो विभाज्य पूल से बाहर हैं और जिनका कुल कर-राजस्व में हिस्सा बढ़ा; GST क्षतिपूर्ति का जून 2022 में अंत।
  • संस्थागत: योजना आयोग की जगह NITI; केंद्र प्रायोजित योजनाओं का पुनर्गठन (2016)।
  • राजनीतिक: "डबल इंजन" की राजनीति; राज्यपालों से टकराव; केंद्रीय एजेंसियाँ।
  • सहयोग के नए रूप: GST परिषद, प्रतिस्पर्धी संघवाद (राज्यों की रैंकिंग), आकांक्षी ज़िले, कोविड-19 में समन्वय (और टकराव भी)।
  • निष्कर्ष: संबंध "सहयोगी" और "प्रतिस्पर्धी" के साथ-साथ "केंद्रीकृत" भी हुए हैं; परिवर्तन तीव्र है, पर वह एक ही दिशा में नहीं।

GST और केंद्र-राज्य संबंधों में प्रतिमान-परिवर्तन (UPSC 2024)

  • प्रावधान: 101वाँ संशोधन (2016); GST परिषद (अनुच्छेद 279A), जिसमें केंद्र के एक-तिहाई और राज्यों के दो-तिहाई मत हैं और निर्णय के लिए तीन-चौथाई बहुमत चाहिए; GST 1 जुलाई 2017 से लागू; पाँच वर्ष (जून 2022 तक) राज्यों को क्षतिपूर्ति।
  • वित्तीय परिवर्तन: केंद्र और राज्य दोनों ने अपनी स्वतंत्र कर-शक्ति छोड़ी ("साझा संप्रभुता"); राज्यों की निर्भरता बढ़ी; क्षतिपूर्ति और उधार पर विवाद (2020)।
  • राजनीतिक परिवर्तन: सहकारी संघवाद का स्थायी मंच; सर्वसम्मति की संस्कृति। मोहित मिनरल्स (2022) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि GST परिषद की संस्तुतियाँ "प्रेरक" हैं, बाध्यकारी नहीं; केंद्र और राज्य दोनों विधायी रूप से स्वतंत्र हैं।
  • निष्कर्ष: GST ने राजकोषीय संघवाद को "विभाजित संप्रभुता" से "साझा संप्रभुता" की ओर मोड़ा। यह प्रतिमान-परिवर्तन है, जिसकी सफलता परस्पर विश्वास पर निर्भर है।

राज्य और समवर्ती सूचियों के विषयों पर संघ का योगदान: राजकोषीय संघवाद (UPSC 2025)

  • माध्यम: केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, ग्रामीण विकास), अनुच्छेद 282 के अनुदान, और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएँ। मुख्यमंत्रियों के उप-समूह (2015) की संस्तुति पर 2016 में इन्हें "मुख्य में मुख्य", "मुख्य" और "वैकल्पिक" श्रेणियों में बाँटा गया, और अधिकांश में वित्त का अनुपात 60:40 (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10) रखा गया।
  • गुण: राष्ट्रीय प्राथमिकताओं (स्वच्छता, टीकाकरण, पोषण) की पूर्ति; पिछड़े राज्यों को संसाधन (समता); न्यूनतम मानक; और नवाचार तथा बड़े पैमाने के लाभ।
  • दोष: "एक आकार सबके लिए" (राज्य की परिस्थितियों की उपेक्षा); शर्तें और राज्यों पर "मिलान-अंश" का भार; राज्यों की प्राथमिकताओं का विकृत होना; राज्य-स्वायत्तता का क्षरण; योजनाओं की अधिकता और विखंडन; और "राजनीतिक श्रेय" की प्रतिस्पर्धा (ब्रांडिंग)।
  • सुधार: योजनाओं की संख्या घटाना, शर्तों में लचीलापन (राज्य-विशिष्ट घटक), वित्त आयोग के माध्यम से बिना शर्त हस्तांतरण बढ़ाना, और उपकर तथा अधिभार को सीमित करना।

सहकारी संघवाद की बाधाएँ (UPSC 2025)

  • भिन्न राजनीतिक हित: केंद्र और राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारें; योजनाओं के नाम और श्रेय पर विवाद; कुछ राज्यों द्वारा केंद्रीय योजनाओं में भाग न लेना (जैसे कुछ समय तक आयुष्मान भारत और PM-SHRI में); और शासी परिषद की बैठकों का बहिष्कार।
  • वित्तीय बाधाएँ: राज्यों पर ऋण-सीमा, GST क्षतिपूर्ति का अंत, उपकर और अधिभार में हिस्सेदारी न मिलना, और विभाज्य पूल में राज्यों के बीच वितरण के मानदंडों (जनसंख्या बनाम दक्षता) पर दक्षिणी राज्यों की आपत्तियाँ।
  • निष्कर्ष: सहकारी संघवाद केवल संस्थाओं से नहीं, "परस्पर विश्वास और राजकोषीय निष्पक्षता" से चलता है।
  • वित्त आयोग: अनुच्छेद 280; हर पाँच वर्ष। 15वाँ वित्त आयोग (एन.के. सिंह; 2021-26) ने विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41% रखा। 16वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया) 2026-31 की अवधि के लिए है।

5. राज्य प्रशासन

  • राज्यपाल: अनुच्छेद 153-162; केंद्र द्वारा नियुक्त ("राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत"); संवैधानिक प्रमुख, पर विवेकाधीन शक्तियाँ (मुख्यमंत्री की नियुक्ति जब स्पष्ट बहुमत न हो, अनुच्छेद 356 के लिए रिपोर्ट, विधेयकों को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना)।
  • मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद: वास्तविक कार्यपालिका; 91वें संशोधन (2003) से मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा सदस्यों के 15% तक सीमित।
  • मुख्य सचिव: राज्य सिविल सेवा का प्रमुख; मंत्रिपरिषद का सचिव; समन्वय; और संकट-प्रबंधन।

राज्यपाल और राज्य सरकारों के बीच तनाव (UPSC 2024)

  • तनाव के बिंदु:
    • विधेयकों पर स्वीकृति में अत्यधिक देरी (अनुच्छेद 200): तमिलनाडु, केरल, पंजाब जैसे राज्यों में।
    • विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति पर विवाद।
    • विधानसभा सत्र बुलाना और अभिभाषण में बदलाव।
    • सरकार-गठन और बहुमत-परीक्षण में विवेक।
    • सार्वजनिक बयान और "समानांतर सत्ता-केंद्र" की धारणा।
  • न्यायिक दृष्टि:
    • नबाम रेबिया (2016): राज्यपाल का विवेक सीमित है।
    • पंजाब मामला (2023): राज्यपाल विधेयक को अनिश्चितकाल तक रोक नहीं सकते।
    • तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल (8 अप्रैल 2025): सर्वोच्च न्यायालय ने समय-सीमा निर्धारित की और अनुच्छेद 142 के अंतर्गत दस विधेयकों को स्वीकृत माना।
    • इसके बाद राष्ट्रपति के संदर्भ (अनुच्छेद 143) पर संविधान पीठ ने 20 नवंबर 2025 की अपनी राय में न्यायालय द्वारा निश्चित समय-सीमा थोपने और "मानित स्वीकृति" (deemed assent) को अस्वीकार किया, पर साथ ही कहा कि बिना कारण अनिश्चितकालीन निष्क्रियता सीमित न्यायिक समीक्षा के अधीन हो सकती है।
  • आयोगों की संस्तुतियाँ: सरकारिया आयोग (राज्यपाल राजनीति से दूर, "प्रतिष्ठित" और राज्य से बाहर का व्यक्ति हो; मुख्यमंत्री से परामर्श); पुंछी आयोग (निश्चित कार्यकाल; महाभियोग जैसी हटाने की प्रक्रिया; विधेयकों पर छह माह की समय-सीमा)।
  • निष्कर्ष: राज्यपाल "केंद्र का एजेंट" नहीं, "संविधान का संरक्षक" और "केंद्र-राज्य सेतु" हो। तनाव कम करने के लिए संवैधानिक परंपराओं और आयोगों की संस्तुतियों का पालन आवश्यक है।

राज्य सचिवालय बनाम निदेशालय (UPSC 2025)

आधारसचिवालयनिदेशालय
प्रकृति"स्टाफ़" अभिकरण"लाइन" अभिकरण
कार्यनीति-निर्माण, विधेयक, बजट, मंत्री को सलाह, समन्वयक्रियान्वयन, तकनीकी पर्यवेक्षण, क्षेत्रीय कार्यालयों का नियंत्रण
प्रमुखसचिव (प्रायः सामान्यज्ञ IAS)निदेशक या आयुक्त (प्रायः विशेषज्ञ या तकनीकी अधिकारी)
  • स्पष्ट भेद न होने के दुष्परिणाम:
    • दोहराव: एक ही फ़ाइल की दोनों स्तरों पर जाँच, जिससे देरी।
    • सचिवालय का क्रियान्वयन के सूक्ष्म-विवरणों में उलझना, जिससे नीति-निर्माण की उपेक्षा होती है।
    • निदेशालय की पहल और स्वायत्तता में कमी।
    • सामान्यज्ञ और विशेषज्ञ का टकराव।
    • जवाबदेही का धुंधलापन।
    • नीति और क्रियान्वयन के बीच प्रतिपुष्टि का टूटना।
  • सुधार के सुझाव: प्रशासनिक सुधार आयोग (1966-70) और द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग: नीति-निर्माण (सचिवालय) और क्रियान्वयन ("कार्यकारी एजेंसियाँ" या निदेशालय) का स्पष्ट पृथक्करण, निदेशालयों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार, और "डेस्क अधिकारी" प्रणाली। कुछ राज्यों में निदेशालय-प्रमुखों को पदेन सचिव का दर्जा भी दिया गया।
  • निष्कर्ष: हाँ, भूमिकाओं की स्पष्टता के अभाव से नीति-निर्माण और क्रियान्वयन, दोनों प्रभावित होते हैं।

6. गठबंधन सरकारों में प्रशासन (UPSC 2024)

  • संदर्भ: 1989 से 2014 तक गठबंधन युग; 2024 के बाद केंद्र में फिर गठबंधन (NDA)।
  • प्रशासनिक समस्याएँ:
    • नीति-निर्माण में देरी और "न्यूनतम साझा कार्यक्रम" तक सीमित एजेंडा।
    • मंत्री प्रधानमंत्री के बजाय अपने दल-प्रमुख के प्रति निष्ठावान, जिससे सामूहिक उत्तरदायित्व कमज़ोर होता है।
    • मंत्रालयों का "जागीर" बनना और समन्वय की कमी।
    • क्षेत्रीय दलों का दबाव, यानी नीतियों में क्षेत्रीय पक्षपात।
    • सरकार की अस्थिरता और नौकरशाही की असमंजस।
    • भ्रष्टाचार पर नियंत्रण में कठिनाई; "नीतिगत पक्षाघात" के आरोप (2011-13)।
  • सकारात्मक पक्ष: संघीय प्रतिनिधित्व; सर्वसम्मति-आधारित निर्णय; केंद्र पर अंकुश; और RTI (2005) तथा MGNREGA (2005) जैसे अधिकार-आधारित क़ानून गठबंधन युग में ही बने।
  • उपाय: समन्वय समिति, स्पष्ट साझा कार्यक्रम, मंत्रिमंडलीय समितियाँ, और नौकरशाही की तटस्थता तथा निरंतरता।

7. Master Summary Table

विषयमुख्य तथ्ययाद रखें
मंत्रिमंडल सचिवालय1947; कार्य-आवंटन और कार्य-संचालन नियम 1961मंत्रिमंडल सचिव: सिविल सेवा प्रमुख
PMO1947 सचिवालय; 1977 PMOPRAGATI 2015
कॉलेजियम1981, 1993, 1998; NJAC 2014, रद्द 2015MoP
योजनायोजना आयोग 15 मार्च 1950; NDC 1952सांकेतिक नियोजन 1992
NITI1 जनवरी 2015; NDAP 2022वित्तीय शक्ति नहीं
संघवादसरकारिया 1983; पुंछी 2007; ISC 1990बोम्मई 1994
GST101वाँ संशोधन 2016; 279A; 1 जुलाई 2017मोहित मिनरल्स 2022
वित्त आयोगअनुच्छेद 280; 15वाँ: 41%16वाँ: पनगढ़िया
CSS2016 का पुनर्गठन; 60:40, 90:10अनुच्छेद 282
राज्यपालतमिलनाडु 8 अप्रैल 2025; संविधान पीठ की राय 20 नवंबर 2025नबाम रेबिया 2016
सचिवालय-निदेशालयस्टाफ़ बनाम लाइनARC की संस्तुतियाँ

8. चार्ट: संघ सरकार की प्रशासनिक संरचना

प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल PMO (स्टाफ़ अभिकरण) मंत्रिमंडल सचिवालय मंत्रालय और विभाग (सचिव) संबद्ध कार्यालय (क्रियान्वयन) अधीनस्थ और क्षेत्रीय कार्यालय नीति ऊपर (सचिवालय), क्रियान्वयन नीचे (संबद्ध और क्षेत्रीय कार्यालय)
संघ सरकार की प्रशासनिक संरचना: प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के साथ PMO और मंत्रिमंडल सचिवालय; उनके नीचे मंत्रालय, और फिर संबद्ध तथा क्षेत्रीय कार्यालय।

9. Mind Map

संघ और राज्य प्रशासन
संघ
  • मंत्रिमंडल सचिवालय, PMO
  • सचिवालय, कॉलेजियम
नियोजन
  • योजना आयोग से NITI
  • NDAP, सीमाएँ
संघवाद
  • तीन प्रकार के संबंध
  • GST, CSS, वित्त आयोग
राज्य
  • राज्यपाल, मुख्यमंत्री
  • मुख्य सचिव, निदेशालय
राजनीति
  • सहकारी संघवाद की बाधाएँ
  • गठबंधन प्रशासन

10. महत्वपूर्ण One-liners

  • योजना आयोग का गठन: 15 मार्च 1950; NITI आयोग: 1 जनवरी 2015।
  • सांकेतिक नियोजन की शुरुआत: आठवीं योजना (1992-97)।
  • अंतर-राज्य परिषद: अनुच्छेद 263 (1990)।
  • GST परिषद: अनुच्छेद 279A।
  • 15वें वित्त आयोग में राज्यों का हिस्सा: 41%।
  • NJAC को रद्द किया गया: अक्टूबर 2015।
  • मंत्रिपरिषद का आकार 15% तक: 91वाँ संशोधन (2003)।
  • "अर्ध-संघीय" शब्द: के.सी. व्हीयर।
  • संघवाद मूल ढाँचे का भाग: एस.आर. बोम्मई (1994)।
  • PMO का नाम: 1977 से।

11. टिप्स एवं ट्रिक्स

संघ-राज्य प्रश्नों में
  • हर उत्तर में अनुच्छेद, आयोग और न्यायिक निर्णय दें (सरकारिया, पुंछी, बोम्मई, मोहित मिनरल्स)।
  • राज्यपाल जैसे समसामयिक विषयों में नवीनतम निर्णय (2025) का सही उल्लेख करें।
  • "गुण-दोष" वाले प्रश्नों में तालिका और संतुलित निष्कर्ष दें।
याद रखने की तरकीब

न्यायाधीश मामले: "81-93-98-2015"। केंद्र-राज्य आयोग: "स-पुं" (सरकारिया 1983, पुंछी 2007)।

12. PYQ-आधारित प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

Q1UPSC 2025 · Paper II · 2(b)

विषयों के विभाजन के बावजूद संघ सरकार राज्य और समवर्ती सूचियों के विषयों में योगदान देती है। राजकोषीय संघवाद के आलोक में इसके गुण-दोषों की विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

माध्यम: CSS, अनुच्छेद 282, केंद्रीय योजनाएँ; 2016 का पुनर्गठन।

गुण और दोष।

सुधार: कम योजनाएँ, लचीलापन, बिना शर्त हस्तांतरण, उपकर पर सीमा।

Q2UPSC 2025 · Paper II · 4(b)

राज्य सचिवालय और निदेशालय के बीच भूमिकाओं के स्पष्ट सीमांकन का अभाव नीति-निर्माण और नीति-क्रियान्वयन पर गंभीर प्रभाव डालता है। क्या आप सहमत हैं?

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

तुलना-तालिका।

दुष्परिणाम: दोहराव, सूक्ष्म-प्रबंधन, स्वायत्तता, टकराव, जवाबदेही, प्रतिपुष्टि।

सुधार: ARC, ARC-II, पदेन सचिव।

निष्कर्ष: सहमति।

Q3UPSC 2024 · Paper II · 3(c)

"हाल के समय में राज्यपाल और राज्य सरकारों के संबंधों में तनाव रहा है।" परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

तनाव के बिंदु।

न्यायिक दृष्टि: नबाम रेबिया, पंजाब 2023, तमिलनाडु 2025, संविधान पीठ की राय (नवंबर 2025)।

आयोग: सरकारिया, पुंछी।

निष्कर्ष: संविधान का संरक्षक और सेतु।

Q4UPSC 2024 · Paper II · 3(b)

"केंद्र-राज्य संबंध तीव्र परिवर्तन से गुज़र रहे हैं।" विस्तार से बताइए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

वित्तीय, संस्थागत और राजनीतिक परिवर्तन; सहयोग के नए रूप।

निष्कर्ष: सहयोगी, प्रतिस्पर्धी और केंद्रीकृत, तीनों।

Q5UPSC 2024 · Paper II · 4(b)

"उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों की कॉलेजियम प्रणाली न्यायपालिका की स्वतंत्रता की आधारशिला रही है, पर हाल में बहस का विषय बनी है।" विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

विकास: 1981, 1993, 1998; NJAC 2014-15।

पक्ष और आलोचना।

सुधार: प्रकाशन, मानदंड, समयबद्धता, संशोधित आयोग।

Q6UPSC 2024 · Paper II · 2(a)

NITI आयोग का राष्ट्रीय डेटा और विश्लेषण मंच (NDAP) विकास में लोकतंत्रीकरण और समावेशिता को बढ़ावा देने वाला सशक्त तंत्र बनाता है। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

NDAP: 2022; एकीकृत, मानकीकृत, खुले आँकड़े।

योगदान: समान पहुँच, प्रमाण-आधारित नीति, पारदर्शिता, पिछड़े क्षेत्र, नवाचार।

चुनौतियाँ: गुणवत्ता, समन्वय, साक्षरता, निजता, जनगणना में देरी।

Q7UPSC 2024 · Paper II · 8(c)

गठबंधन सरकारों में प्रशासन की समस्याओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर (रूपरेखा)

समस्याएँ: देरी, निष्ठा, जागीर, क्षेत्रीय दबाव, अस्थिरता, नीतिगत पक्षाघात।

सकारात्मक: प्रतिनिधित्व, सर्वसम्मति, RTI और MGNREGA।

उपाय।

Q8UPSC 2025 · Paper II · 1(b) · 10 अंक

NITI आयोग की सीमित प्रभावशीलता के कारणों का पता लगाइए।

मॉडल उत्तर

कारण: वित्तीय शक्ति नहीं, कोई वैधानिक दर्जा नहीं, सलाहकार भूमिका, राज्यों की धारणा, बहिष्कार।

उपलब्धियाँ और सुधार।

Q9UPSC 2024 · Paper II · 1(d) · 10 अंक

"यह जनता का PMO होना चाहिए, प्रधानमंत्री का PMO नहीं हो सकता।" टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

PMO: विकास और कार्य।

जनता का PMO: CPGRAMS, PRAGATI, RTI।

चिंताएँ: केंद्रीकरण, सामूहिक उत्तरदायित्व।

Q10UPSC 2024 · Paper II · 1(e) · 10 अंक

"वस्तु एवं सेवा कर (GST) के क्रियान्वयन ने केंद्र-राज्य संबंधों में वित्तीय और राजनीतिक, दोनों दृष्टियों से प्रतिमान-परिवर्तन किया है।" विश्लेषण कीजिए।

मॉडल उत्तर

प्रावधान: 101वाँ संशोधन, 279A, मत-संरचना, क्षतिपूर्ति।

वित्तीय और राजनीतिक परिवर्तन; मोहित मिनरल्स।

निष्कर्ष: साझा संप्रभुता।

Q11UPSC 2025 · Paper II · 2(c)

भिन्न राजनीतिक हित और वित्तीय बाधाएँ "सहकारी संघवाद" की भावना को बाधित करती हैं। टिप्पणी कीजिए।

मॉडल उत्तर

राजनीतिक: श्रेय, योजनाओं से बाहर रहना, बहिष्कार।

वित्तीय: ऋण-सीमा, क्षतिपूर्ति, उपकर, वितरण-मानदंड।

निष्कर्ष: विश्वास और निष्पक्षता।

Q12UPSC 2025 · Paper II · 3(c)

केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध बहस का विषय हैं, क्योंकि संवैधानिक प्रावधानों ने एक सशक्त केंद्र बनाया। विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर

कारण: विभाजन, विलय, एकता।

प्रावधान: 256, 257, 365, 356, AIS।

विवाद: राज्यपाल, संवर्ग नियम, एजेंसियाँ, BSF, DBT।

संतुलन के उपाय।

13. Quick Revision Summary

परीक्षा से पहले एक बार ज़रूर पढ़ें
  • संघ: मंत्रिमंडल सचिवालय, PMO, केंद्रीय सचिवालय, कॉलेजियम।
  • नियोजन: योजना आयोग, NDC, सांकेतिक नियोजन, NITI और उसकी सीमाएँ, NDAP।
  • संघवाद: तीन प्रकार के संबंध, आयोग, सशक्त केंद्र, परिवर्तन, GST, CSS, सहकारी संघवाद, वित्त आयोग।
  • राज्य: राज्यपाल (2025 के निर्णय), मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सचिवालय और निदेशालय।
  • गठबंधन प्रशासन की समस्याएँ और उपाय।